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बारिश के मौसम में घर के अंदर सूखते कपड़े आपकी indoor air quality को कितना बदल सकते हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

बारिश का मौसम आते ही चिलचिलाती गर्मी से तो राहत मिल जाती है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी परेशानी भी घर आ जाती है कपड़े सुखाना। लगातार होने वाली बारिश के कारण बाहर तार पर कपड़े सुखाना नामुमकिन हो जाता है। ऐसे में हम सभी अपने गीले कपड़ों को घर के अंदर, पंखे के नीचे या बालकनी में सुखाने लगते हैं। 

यह तरीका भले ही हमें उस वक्त सबसे आसान और सही लगता हो, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसका आपके घर की हवा पर क्या असर पड़ता है?  घर के अंदर कपड़े सुखाने से हमारी इनडोर एयर क्वालिटी काफी हद तक बदल सकती है, जो हमारी सेहत के लिए एक खतरा बन सकती है।

बारिश में घर के अंदर कपड़े क्यों सुखाते हैं?

मानसून के दौरान बाहर का मौसम बदलता रहता है और कभी भी तेज़ बारिश शुरू हो सकती है। ऐसे में कपड़ों को बाहर सुखाना बड़ा मुश्किल  होता है, क्योंकि वे कभी भी दोबारा भीग सकते हैं। इसके अलावा बारिश के मौसम में बाहर हवा में भी नमी बहुत ज़्यादा होती है और धूप भी नहीं निकलती, जिससे कपड़े बाहर जल्दी नहीं सूखते। इन्हीं परेशानियों से बचने और कपड़ों को सेफ रखने के लिए हम कमरों में स्टैंड लगाकर या पंखे के नीचे कपड़े सुखाते हैं।

क्या घर में नमी बढ़ा देते हैं सूखे कपड़े?

जब हम घर के अंदर गीले कपड़े फैलाते हैं, तो उनका पानी भाप बनकर कमरे की हवा में मिलने लगता है। एक बाल्टी धुले कपड़ों में लगभग दो से तीन लीटर पानी होता है। जब यह सारा पानी सूखकर हवा में जाता है, तो कमरे के अंदर की नमी यानी ह्यूमिडिटी का स्तर अचानक से 30 % तक बढ़ जाता है। अगर कमरे में ताज़ी हवा आने का कोई रास्ता नहीं है, तो यह नमी बाहर नहीं निकल पाती और घर का माहौल एकदम चिपचिपा और सीलन भरा हो जाता है।

Indoor Air Quality क्यों खराब हो सकती है?

जब कमरों में नमी का स्तर हद से ज़्यादा बढ़ जाता है, तो घर की इनडोर एयर क्वालिटी में  गिरावट आने लगती है। हवा में मौजूद यह ज़्यादानमी डस्ट माइट्स और फंगस को  बढ़ावा देने वाला माहौल तैयार करती है। इसके अलावा कपड़ों में बचे हुए डिटर्जेंट और फैब्रिक सॉफ्टनर के केमिकल भी वाष्पीकरण के साथ हवा में घुलने लगते हैं। ऐसे में जब हम उस बंद कमरे में साँस लेते हैं, तो ये सारे दूषित तत्व हमारे फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं और घर की साफ हवा को पूरी तरह से प्रदूषित कर देते हैं।

नमी बढ़ने से साँस पर क्या असर होता है?

हवा में बहुत ज़्यादा नमी का होना हमारी सांस लेने की प्रक्रिया को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

  • अस्थमा: नमी के कारण हवा में फंगस और डस्ट माइट्स बढ़ते हैं, जो अस्थमा के मरीज़ों के लिए बहुत खतरनाक होते हैं।
  • साँस लेने में दिक्कत: सीलन से हवा भारी हो जाती है, जिससे फेफड़ों को ऑक्सीजन खींचने में ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
  • एलर्जी और खाँसी: सीलन भरी हवा गले में खराश, लगातार खाँसी और छींकने जैसी एलर्जी का मुख्य कारण बनती है।
  • साइनस की समस्या: ज़्यादा नमी से नाक बंद होने और साइनस का दर्द बढ़ने की शिकायत आम हो जाती है।

क्या गीले कपड़ों से फंगस बढ़ सकता है?

जी हाँ, गीले कपड़ों से निकलने वाली नमी घर के कोनों में खतरनाक फंगस और मोल्ड को बहुत तेज़ी से जन्म देती है।

  • दीवारों पर जाले: सीलन की वजह से दीवारों और छतों के कोनों में काले या हरे रंग की फंगस उगने लगती है।
  • फर्नीचर को नुकसान: लकड़ी के फर्नीचर और अलमारियों के पीछे यह फंगस बहुत जल्दी पनपती है और उन्हें खराब करती है।
  • बीमारियों का खतरा: एस्परगिलस नामक फंगस के बीजाणु हवा में फैल जाते हैं, जो फेफड़ों में गंभीर संक्रमण पैदा कर सकते हैं।
  • कपड़ों से बदबू: फंगस के कारण खुद सूखे हुए कपड़ों से भी एक अजीब सी सीलन भरी महक आने लगती है।

कपड़े सुखाते समय वेंटिलेशन क्यों ज़रूरी है?

घर के अंदर कपड़े सुखाते समय प्रॉपर वेंटिलेशन का होना सबसे ज्यादा जरूरी है ताकि हवा का लगातार बहाव बना रहे।

  • नमी को बाहर निकालना: खुली खिड़कियाँ और एग्जॉस्ट फैन कपड़ों से निकलने वाली नमी को तुरंत घर के बाहर फेंक देते हैं।
  • हवा को ताज़ा रखना: बाहर की ताज़ी हवा अंदर आने से डस्ट माइट्स और फंगस को पनपने का मौका ही नहीं मिलता।
  • जल्दी कपड़े सूखना: हवा का क्रॉस-वेंटिलेशन होने से कपड़ों का पानी जल्दी उड़ता है और वे कम समय में आसानी से सूख जाते हैं।
  • बीमारियों से बचाव: अच्छी हवा से कमरे में घुटन नहीं होती और साँस की गंभीर बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है।

बंद कमरे में कपड़े सुखाना कितना सही है?

पूरी तरह से बंद कमरे में कपड़े सुखाना बिल्कुल भी सही नहीं है और यह सेहत के लिए एक बड़ी गलती साबित हो सकता है। जब खिड़की दरवाज़े बंद होते हैं, तो कपड़ों से उड़ने वाला सारा पानी उसी कमरे की हवा में कैद हो जाता है। इससे कमरे का तापमान और नमी का स्तर तेज़ी से बिगड़ता है। ऐसा कमरा फंगस, बैक्टीरिया और हानिकारक सूक्ष्म जीवों का घर बन जाता है। इस तरह के घुटन भरे माहौल में सोने या समय बिताने से आपकी इम्युनिटी कमज़ोर हो सकती है और आप जल्दी बीमार पड़ सकते हैं।

कपड़े सुखाते समय किन गलतियों से बचें?

घर के अंदर कपड़े सुखाते समय हम कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जो हमारी परेशानी और बढ़ा देती हैं।

  • कपड़ों को बिना निचोड़े सुखाना: कपड़ों में बहुत ज़्यादा पानी छोड़कर सुखाने से बचें; वाशिंग मशीन के ड्रायर का हमेशा अच्छे से इस्तेमाल करें।
  • एक साथ बहुत सारे कपड़े फैलाना: स्टैंड पर कपड़ों को बहुत सटाकर न सुखाएं, उनके बीच हवा गुज़रने की जगह ज़रूर छोड़ें।
  • सोने वाले कमरे में सुखाना: बेडरूम में कपड़े सुखाने से बचें, क्योंकि रात में सीलन भरी हवा साँस के ज़रिए सीधे आपके अंदर जाती है।
  • दरवाज़े खिड़कियाँ  बंद रखना: हवा पास होने का रास्ता न छोड़ना सबसे बड़ी गलती है, हमेशा थोड़ी सी खिड़की खुली रखें।

बिना धूप कपड़े सुखाना कितना सही है?

धूप न केवल कपड़ों को सुखाती है, बल्कि एक प्राकृतिक कीटाणुनाशक का काम भी बहुत अच्छे से करती है। बिना धूप के, केवल पंखे की हवा में कपड़े सुखाने से उनके अंदर मौजूद बैक्टीरिया और फंगस पूरी तरह से मर नहीं पाते। हालांकि, बारिश के मौसम में हमारे पास इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं होता, इसलिए यह सिर्फ मजबूरी में किया जाने वाला काम है। लेकिन इसे पूरी तरह से सही नहीं माना जा सकता। बिना धूप के सूखे कपड़ों में एक अजीब सी महक रह जाती है। इसलिए, जब भी थोड़ी सी धूप निकले, कपड़ों को बाहर ज़रूर डालें।

निष्कर्ष:

बारिश के दिनों में घर के अंदर कपड़े सुखाना हमारी जरूरत ह। गीले कपड़ों से निकलने वाली नमी घर की हवा को गंदा करके फंगस और साँस की बीमारियों को बढ़ा देती है। इस समस्या से बचने का सबसे अच्छा तरीका है समझदारी से काम लेना। वेंटिलेशन का पूरा ध्यान रखें, कपड़ों को अच्छी तरह निचोड़ें और बेडरूम की जगह किसी खुले हॉल का इस्तेमाल करें। थोड़ी सी सावधानी रखकर आप अपने घर की हवा को शुद्ध और खुद को स्वस्थ रख सकते हैं।

References:

https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S2950362025000189

https://www.healthline.com/health/how-to-improve-air-quality-at-home

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/household-air-pollution-and-health

https://www.niehs.nih.gov/health/topics/agents/indoor-air

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ कपड़ों से निकलने वाली नमी हवा में फंगस बढ़ाती है, जिससे गले में खराश और सूखी खाँसी हो सकती है।

घर की बालकनी या वह कमरा जहाँ एग्जॉस्ट फैन लगा हो और खिड़कियाँ खुली हों, कपड़े सुखाने के लिए सबसे सही रहता है।

कपड़े धोते समय पानी में थोड़ा सा बेकिंग सोडा या किसी अच्छी खुशबू वाले फैब्रिक कंडीशनर का इस्तेमाल करें।

एसी हवा से नमी खींचता है इसलिए एसी वाले कमरे में कपड़े जल्दी सूख सकते हैं और सीलन नहीं बढ़ती।

नमी कम करने के लिए आप डीह्यूमिडिफायर  का इस्तेमाल कर सकते हैं या खिड़कियाँ खोलकर वेंटिलेशन सुधार सकते हैं।

हीटर के बहुत करीब कपड़े सुखाने से आग लगने का खतरा होता है, इसलिए यह बिल्कुल भी सही तरीका नहीं है।

ये बहुत छोटे न दिखने वाले कीड़े होते हैं जो सीलन भरी जगहों पर तेज़ी से पनपते हैं और अस्थमा व एलर्जी पैदा करते हैं।

मशीन में कपड़ों को अच्छे से स्पिन करें और स्टैंड पर फैलाते समय उनके बीच में पर्याप्त दूरी ज़रूर रखें।

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