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Eczema flare-up मौसम बदलने पर क्यों बढ़ सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

गुलाबी ठंड की शुरुआत हो, मॉनसून की पहली बारिश हो या फिर गर्मियों की दस्तक मौसम का बदलना अमूमन हर किसी को अच्छा लगता है। लेकिन कुछ लोगों के लिए यह सुखद अहसास एक बड़ी मुसीबत लेकर आता है। जैसे ही हवा का रुख बदलता है, उनकी त्वचा में अचानक से तेज खुजली, लाल चकत्ते और असहनीय रूखापन वापस लौट आता है। वे समझ जाते हैं कि उनके शांत बैठे एक्ज़िमा ने दोबारा करवट ले ली है।

ऐसे में मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर हर बार मौसम के बदलते ही यह समस्या इतनी उग्र क्यों हो जाती है? एक्ज़िमा कोई सामान्य खुजली नहीं है, बल्कि यह त्वचा की संवेदनशीलता से जुड़ी एक गहरी स्थिति है।  

मौसम बदलने पर त्वचा पर क्या असर पड़ता है?

जब भी अचानक से मौसम बदलता है, तो हवा में मौजूद नमी का स्तर और बाहर का तापमान बहुत तेज़ी से ऊपर-नीचे होता है। हमारा शरीर इस अचानक आए बदलाव के लिए तुरंत तैयार नहीं हो पाता, जिसका सीधा असर हमारी त्वचा की सबसे बाहरी परत पर पड़ता है। यह बाहरी परत एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है जो बाहरी बैक्टीरिया और एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों को शरीर के भीतर जाने से रोकती है।

जब हवा में नमी अचानक बहुत कम या बहुत ज्यादा हो जाती है, तो यह सुरक्षा कवच कमज़ोर पड़ने लगता है। त्वचा के भीतर मौजूद प्राकृतिक तेल और नमी गायब होने लगती है, जिससे त्वचा की कोशिकाओं के बीच सूक्ष्म दरारें आ जाती हैं। इन दरारों के कारण बाहरी धूल-मिट्टी और एलर्जी तत्व आसानी से त्वचा के भीतर प्रवेश कर जाते हैं। इसके जवाब में हमारा इम्यून सिस्टम वहां भारी सूजन और तेज खुजली पैदा कर देता है, जिसे हम एक्ज़िमा फ्लेयर अप कहते हैं।

हर मौसम में परेशानी की वजह एक जैसी नहीं होती

सर्दियों के मौसम में चलने वाली ठंडी, शुष्क हवाएं और घरों के भीतर इस्तेमाल होने वाले हीटर त्वचा की बची-कुची नमी को भी पूरी तरह सोख लेते हैं। इस मौसम में त्वचा बहुत रूखी, पपड़ीदार और बेजान हो जाती है, जिससे सर्दियों वाला एक्ज़िमा तेज़ी से उभरता है। इस रूखेपन के कारण त्वचा में खिंचाव होता है और ज़रा सा खरोंचने पर भी वहां लालिमा और घाव बन जाते हैं।

इसके विपरीत, गर्मी और बरसात के मौसम में चुनौती पूरी तरह बदल जाती है। इन महीनों में अत्यधिक उमस और पसीना एक्ज़िमा का सबसे बड़ा दुश्मन बनते हैं। पसीने में मौजूद नमक, खनिज और बैक्टीरिया जब त्वचा के संवेदनशील हिस्सों पर लंबे समय तक जमा रहते हैं, तो वे वहां गंभीर जलन और चुभन वाली खुजली पैदा करते हैं। यही वजह है कि एक्ज़िमा के मरीजों को हर बदलते मौसम में एक बिल्कुल नई चुनौती का सामना करना पड़ता है।

कौन-सी छोटी बातें एक्ज़िमा को और भड़का सकती हैं?

दैनिक जीवन की कुछ बहुत ही सामान्य दिखने वाली आदतें अनजाने में इस त्वचा रोग की तीव्रता को कई गुना बढ़ा देती हैं:

  • बहुत गर्म पानी से नहाना: सर्दियों में अत्यधिक गर्म पानी से देर तक नहाने से त्वचा का नेचुरल ऑयल पूरी तरह नष्ट हो जाता है और रूखापन बढ़ता है।
  • बार-बार साबुन का इस्तेमाल: कठोर केमिकल, तेज खुशबू और झाग वाले साबुनों का बार-बार इस्तेमाल त्वचा के सुरक्षा कवच को पूरी तरह तोड़ देता है।
  • पसीना लंबे समय तक त्वचा पर रहना: वर्कआउट या उमस के बाद पसीने से भीगे कपड़ों में देर तक बैठे रहने से नसों में खुजली की तीव्रता बढ़ती है।
  • धूल और एलर्जी पैदा करने वाली चीज़ें: मौसम बदलते समय हवा में उड़ने वाले परागकण, धूल के कण और पालतू जानवरों के बाल एक्ज़िमा को तुरंत ट्रिगर करते हैं।
  • त्वचा को नाखूनों से खरोंचना: खुजली होने पर ज़ोर से खरोंचने से त्वचा पर घाव हो जाते हैं, जिससे वहां बैक्टीरिया का सेकेंडरी इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • बहुत तंग या खुरदरे कपड़े पहनना: सिंथेटिक, नायलॉन या खुरदरे ऊनी कपड़े त्वचा से लगातार रगड़ खाते हैं, जिससे प्रभावित हिस्से में सूजन बढ़ जाती है।

क्या हर खुजली एक्ज़िमा ही होती है?

आम तौर पर लोग त्वचा पर होने वाली हर छोटी-मोटी खुजली या लालिमा को एक्ज़िमा समझकर खुद ही मेडिकल स्टोर से क्रीम लाकर लगाना शुरू कर देते हैं। यह तरीका बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। त्वचा पर खुजली होने के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे कि फंगल इन्फेक्शन, सोरायसिस, स्कैबीज़ या किसी खास चीज़ से होने वाली सामान्य एलर्जी।

एक्ज़िमा की अपनी एक विशिष्ट पहचान होती है; इसमें त्वचा अत्यधिक रूखी होने के साथ-साथ पपड़ीदार बन जाती है, चमड़ी मोटी होने लगती है और यह मुख्य रूप से कोहनी के अंदरूनी हिस्से, घुटनों के पीछे, गर्दन और चेहरे पर बार-बार लौटकर आती है। सही पहचान इसलिए ज़रूरी है क्योंकि फंगल इन्फेक्शन और एक्ज़िमा का इलाज एक-दूसरे से बिल्कुल विपरीत होता है। गलत क्रीम का इस्तेमाल त्वचा की समस्या को और गंभीर बना सकता है।

मौसम बदलते समय त्वचा की देखभाल कैसे करें?

यदि आप चाहते हैं कि बदलते मौसम के साथ आपका एक्ज़िमा काबू में रहे, तो अपनी रोज़मर्रा की दिनचर्या में इन जरूरी गाइडलाइंस को कड़ाई से शामिल करें:

  • त्वचा: नहाने के तुरंत बाद, जब त्वचा में थोड़ी नमी बची हो, तब बिना खुशबू वाला एक गाढ़ा मॉइस्चराइज़र या शुद्ध नारियल तेल अच्छी मात्रा में लगाएं।
  • हल्के और मुलायम कपड़े पहनें: त्वचा को आराम देने के लिए हमेशा ढीले-ढाले, हल्के रंग के और शुद्ध सूती कपड़ों का ही चुनाव करें ताकि त्वचा खुलकर सांस ले सके।
  • बहुत गर्म पानी से बचें: नहाने के लिए हमेशा हल्के गुनगुने या सामान्य पानी का प्रयोग करें और नहाने की कुल अवधि को 5 से 10 मिनट से ज़्यादा न बढ़ने दें।
  • त्वचा को बार-बार रगड़ने से बचें: नहाने के बाद तौलिये से त्वचा को ज़ोर-ज़ोर से रगड़कर सुखाने के बजाय हल्के हाथों से थपथपाकर पानी को साफ़ करें।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ: त्वचा को बाहर से मॉइस्चराइज़ करने के साथ-साथ अंदर से हाइड्रेटेड रखना भी बेहद ज़रूरी है, इसलिए दिनभर में पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लें।

आयुर्वेद इस बार-बार बढ़ने वाली परेशानी को कैसे देखता है?

आयुर्वेद विज्ञान के मौलिक सिद्धांतों के अनुसार, एक्ज़िमा को 'विचर्चिका' रोग के अंतर्गत समझा जाता है। आयुर्वेद मानता है कि यह समस्या केवल त्वचा की ऊपरी बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर के भीतर मौजूद मुख्य रूप से पित्त और कफ दोष के असंतुलित होने और खून की अशुद्धि के कारण पैदा होती है। जब बाहर का मौसम बदलता है, तो हमारे शरीर का आंतरिक वातावरण भी उसके अनुकूल बदलने का प्रयास करता है, जिससे कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के दोष भड़क जाते हैं।

आयुर्वेद इस समस्या को ठीक करने के लिए ऋतुचर्या यानी मौसम के अनुसार खानपान बदलने पर बहुत ज़ोर देता है। मौसम बदलते समय बहुत ज़्यादा खट्टा, नमकीन, तीखा और गरिष्ठ भोजन करने से बचना चाहिए क्योंकि ये खून में पित्त की मात्रा को बढ़ाकर त्वचा में खुजली और जलन को तेज करते हैं। इस दौरान पाचन तंत्र को साफ़ रखने के लिए हल्की डाइट लेना और त्वचा को शांत करने के लिए नीम या मुलेठी से सिद्ध तेलों का प्रयोग करना बेहद लाभकारी माना जाता है।

किन संकेतों पर इंतज़ार नहीं करना चाहिए?

एक्ज़िमा को मैनेज किया जा सकता है, लेकिन कुछ ऐसे गंभीर लक्षण होते हैं जहां आपको तुरंत किसी अच्छे स्किन स्पेशलिस्ट यानी त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

  • जब तमाम घरेलू उपायों, मॉइस्चराइज़र और सावधानियों के बाद भी त्वचा की खुजली और लालिमा लगातार गंभीर होती जा रही हो।
  • प्रभावित त्वचा के हिस्सों से पीला गाढ़ा पानी, पस या खून बहना शुरू हो गया हो, जो कि एक एक्टिव बैक्टीरियल इन्फेक्शन का बड़ा लक्षण है।
  • त्वचा पर अचानक से बहुत तेज़ असहनीय दर्द होना, प्रभावित हिस्से का अत्यधिक सूज जाना या छूने पर बहुत गर्म महसूस होना।
  • उचित इलाज के बावजूद त्वचा पर बार-बार इन्फेक्शन का लौटकर आना और घावों का सामान्य समय में ठीक न होना।
  • अत्यधिक खुजली और जलन के कारण रात की नींद पूरी तरह उड़ जाना और रोज़मर्रा के बेहद बुनियादी काम करने में भी भारी कठिनाई होना।

निष्कर्ष

अपनी त्वचा के शुरुआती सिग्नल्स को पहचानना, सही समय पर सही मॉइस्चराइज़र का चुनाव करना और लाइफस्टाइल की छोटी-छोटी गलतियों को सुधारना इस समस्या की गंभीरता को 80 प्रतिशत तक कम कर सकता है। भोजन और दिनचर्या में छोटे बदलाव करके आप अपने शरीर के आंतरिक संतुलन को बनाए रख सकते हैं। अपनी त्वचा की बुद्धिमानी से देखभाल कीजिए, ताकि हर बदलता हुआ मौसम आपके लिए डर के बजाय सेहतमंद बदलाव का जरिया बने।

संदर्भ लिंक्स (Reference Links)

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बिल्कुल नहीं। एक्ज़िमा पूरी तरह से एक गैर-संक्रामक स्थिति है। यह किसी मरीज के संपर्क में आने से, उसका सामान इस्तेमाल करने से या हाथ मिलाने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में कभी नहीं फैलती।

बिना किसी केमिकल और खुशबू वाला शुद्ध कोल्ड-प्रेस नारियल तेल एक्ज़िमा के लिए सबसे अच्छा और सुरक्षित माना जाता है। यह त्वचा को प्राकृतिक रूप से नमी देता है और इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण इन्फेक्शन से बचाते हैं।

जी हां। मौसम बदलते समय अत्यधिक डिब्बाबंद फूड्स, रिफाइंड चीनी, बहुत ज्यादा मिर्च-मसाले और खट्टी चीज़ों से परहेज करना चाहिए। हरी सब्जियां, पानी से भरपूर फल और सादा सुपाच्य भोजन खाने से खून साफ़ रहता है और त्वचा शांत रहती है।

सीमित मात्रा में सुबह की हल्की धूप सेकना फायदेमंद हो सकता है क्योंकि इससे विटामिन डी मिलता है। लेकिन दोपहर की तेज धूप और उससे होने वाले पसीने से त्वचा में अचानक तेज खुजली और फ्लेयर अप शुरू हो सकता है।

हां, कोलोइडल ओट्स यानी बारीक पिसे हुए ओट्स को गुनगुने पानी में मिलाकर नहाने से त्वचा की सूजन और भयंकर खुजली में बहुत राहत मिलती है। यह त्वचा पर एक सुरक्षात्मक परत बनाने में मदद करता है।

हाँ, बच्चों की त्वचा बड़ों के मुकाबले बहुत ज्यादा पतली और संवेदनशील होती है। इसलिए मौसम के तापमान और उमस में थोड़ा सा भी बदलाव उनके गालों, घुटनों और कोहनी पर एक्ज़िमा को बहुत जल्दी भड़का देता है।

एक्ज़िमा की अत्यधिक सूखी त्वचा के लिए पतले लोशन के मुकाबले गाढ़ी क्रीम या ऑइंटमेंट ज्यादा बेहतर होते हैं। इनमें तेल की मात्रा ज्यादा होती है जो त्वचा की नमी को लंबे समय तक लॉक करके रखती है।

आयुर्वेद के अनुसार, नीम के पत्तों को पानी में उबालकर, फिर उस पानी को गुनगुना करके नहाने से त्वचा की खुजली, कीटाणु और लालिमा बहुत जल्दी शांत होती है। अत्यधिक ठंडे या अत्यधिक गर्म पानी से पूरी तरह बचना चाहिए।

स्विमिंग पूल के पानी में मिलाया जाने वाला क्लोरीन एक बहुत कड़ा केमिकल है जो त्वचा को बहुत ज्यादा रूखा बना देता है। इसलिए स्विमिंग के तुरंत बाद सादे पानी से नहाएं और पूरी त्वचा पर अच्छी तरह मॉइस्चराइज़र ज़रूर लगाएं।

बिल्कुल। मानसिक तनाव हमारे शरीर में सूजन बढ़ाने वाले केमिकल्स रिलीज करता है। जब मौसम के बदलाव के साथ मानसिक तनाव भी जुड़ जाता है, तो एक्ज़िमा की खुजली और घाव दोगुनी तेज़ी से बाहर उभर आते हैं।

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