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Illness के बाद तुरंत gym शुरू करना सही है या risky

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि आप कई दिनों तक बुखार या किसी इन्फेक्शन के कारण बिस्तर पर पड़े रहे हों और ठीक होते ही सीधे जिम भागने का मन किया हो? फिटनेस के दीवानों को एक दिन भी वर्कआउट छोड़ना अच्छा नहीं लगता। उन्हें लगता है कि बीमारी में जो मांसपेशियाँ कमज़ोर हुई हैं, उन्हें तुरंत भारी वज़न उठाकर वापस बनाया जा सकता है। लेकिन क्या ऐसा करना आपके शरीर के लिए सुरक्षित है? या फिर यह कोई बहुत बड़ा रिस्क है? इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि बीमारी के बाद शरीर को किस तरह से वर्कआउट के लिए तैयार करना चाहिए और क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए।

एक्सपर्ट्स की क्या राय है?

मेडिकल फील्ड के बड़े एक्सपर्ट्स और फिटनेस ट्रेनरों का स्पष्ट मानना है कि बीमारी से उठने के एकदम बाद जिम जाना एक बहुत बड़ी बेवकूफी हो सकती है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जब आप बीमार होते हैं, तो आपका शरीर वायरस से लड़ते-लड़ते अंदर से बहुत कमज़ोर हो जाता है। डॉक्टरों की राय में, जब लोग ठीक होते ही भारी वज़न उठाते हैं, तो उनकी मांसपेशियों में चोट लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। रिकवरी का मतलब सिर्फ बुखार उतरना नहीं होता, बल्कि शरीर के अंदरूनी अंगों का वापस अपनी पुरानी ताकत में आना होता है, जिसमें पूरा समय लगता है।

बीमारी के ठीक होते ही वर्कआउट करना भारी क्यों पड़ता है?

यह एक बहुत ही ज़रूरी सवाल है कि आखिर बुखार या इन्फेक्शन के बाद भारी वर्कआउट नुकसान क्यों पहुँचाता है। असल में, जब आप बीमार होते हैं, तो शरीर अपनी सारी ऊर्जा बीमारी से लड़ने में लगा देता है। इस वजह से आपके शरीर की मांसपेशियाँ और नर्वस सिस्टम बहुत ज़्यादा थक जाते हैं। जब आप ठीक होते ही तुरंत जिम जाते हैं, तो शरीर को खुद को रिपेयर करने का समय ही नहीं मिल पाता है। इस ज़बरदस्ती की वजह से आपकी इम्युनिटी फिर से गिरने लगती है और आप दोबारा भयंकर रूप से बीमार पड़ सकते हैं।

कितने प्रतिशत लोग बीमारी के बाद जिम में चोटिल होते हैं?

यह जानना बहुत दिलचस्प है कि कितने लोग जल्दबाज़ी में अपना नुकसान कर बैठते हैं। स्वास्थ्य और फिटनेस सर्वेक्षणों के आँकड़े बताते हैं कि बीमारी के बाद तुरंत जिम जाने वाले लगभग पचहत्तर प्रतिशत लोग किसी न किसी चोट या भारी थकान का शिकार होते हैं। अगर हम इन कारणों को प्रतिशत में बाँटें, तो लगभग पचास प्रतिशत मामलों में इसका सीधा कारण शरीर में बनी हुई अंदरूनी कमज़ोरी होती है। तीस प्रतिशत मामलों में भारी वज़न उठाने से मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है। वहीं बचे हुए बीस प्रतिशत मामलों में शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) मुख्य रूप से ज़िम्मेदार होती है।

शरीर ठीक होने पर भी जिम में जल्दी थकान क्यों होती है?

बीमारी ठीक होने के बाद भी जब आप जिम में पहला सेट मारते हैं, तो अचानक साँस क्यों फूलने लगती है? ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर का मेटाबॉलिज़्म और खून का दौरा अभी भी सुस्त होता है। इन्फेक्शन के कारण आपके फेफड़ों और दिल पर भी बहुत गहरा असर पड़ता है। जब आप भारी व्यायाम करते हैं, तो दिल को शरीर में ऑक्सीजन पहुँचाने के लिए ज़रूरत से ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ता है। इसी वजह से आपको तुरंत पसीना आना, चक्कर आना, दिल की धड़कन का बेकाबू होना और बहुत तेज़ बेचैनी महसूस होने लगती है, जो एक बड़ा संकेत है।

वर्कआउट के दौरान किन खतरनाक लक्षणों को हल्के में न लें?

बीमारी के बाद शरीर को धीरे-धीरे आदत डालना सही है, लेकिन जब जिम में शरीर कुछ गंभीर इशारे दे, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। इन खतरनाक लक्षणों को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए:

  • सीने में तेज़ चुभन: अगर वज़न उठाते समय सीने में भारी दबाव और दर्द महसूस हो।
  • चक्कर खाकर गिरना: अगर आँखों के आगे अचानक अंधेरा छा जाए और संतुलन बिगड़ने लगे।
  • साँस बहुत ज़्यादा फूलना: जब हल्का वार्मअप करने पर भी साँस बिल्कुल काबू में न आए।
  • मांसपेशियों में भयंकर दर्द: अगर थोड़ा सा वज़न उठाते ही नसों में बहुत तेज़ ऐंठन शुरू हो जाए।

क्या आपकी एंटीबायोटिक दवाइयाँ कमज़ोरी का कारण हैं?

जी हाँ, कई बार बीमारी को खत्म करने के लिए हम जो तेज़ एंटीबायोटिक दवाइयाँ लेते हैं, वे ही जिम में हमारी कमज़ोरी का सबसे बड़ा कारण बन जाती हैं। इन दवाइयों का काम वायरस को मारना होता है, लेकिन ये शरीर के अच्छे बैक्टीरिया को भी पूरी तरह से खत्म कर देती हैं। इससे आपका पाचन तंत्र बिगड़ जाता है और खाना सही से ऊर्जा में नहीं बदल पाता। इसके अलावा, कुछ दवाइयाँ आपकी मांसपेशियों और जोड़ों को रूखा बना देती हैं। इसीलिए, दवाइयों का कोर्स पूरा होने के तुरंत बाद जिम जाना आपकी हड्डियों और नसों के लिए बहुत बड़ा खतरा है।

रिकवरी को लेकर हमारा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या कहता है?

आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, हमारा पूरा शरीर वात, पित्त और कफ दोषों पर चलता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के मुताबिक, किसी भी भारी बीमारी के बाद शरीर में 'ओजस' (अंदरूनी ताकत या इम्युनिटी) बिल्कुल खत्म हो जाता है और वात दोष बढ़ जाता है। जब आप बिना आराम किए सीधे जिम जाकर भारी कसरत करते हैं, तो यह बढ़ा हुआ वात दोष आपकी हड्डियों और जोड़ों को पूरी तरह सुखा देता है। आयुर्वेद स्पष्ट रूप से कहता है कि बीमारी के बाद शरीर को प्राकृतिक आहार और पूरे आराम से पहले अपना 'ओजस' वापस पाने का पूरा मौका देना चाहिए।

जिम वापसी पर शरीर को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?

जब बीमारी के बाद आप दोबारा जिम जाने की सोचें, तो ज़बरदस्ती करने के बजाय कुछ आसान और सुरक्षित तरीके आजमाने चाहिए। ये तरीके आपकी रिकवरी को बहुत तेज़ और बेहतर बनाते हैं:

  • हल्के व्यायाम से शुरुआत: भारी वज़न उठाने के बजाय सिर्फ स्ट्रेचिंग और हल्की वॉक से शुरुआत करें।
  • हाइड्रेशन का ध्यान: कसरत के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दें, खूब सारा पानी पिएँ।
  • समय कम रखें: शुरुआत में एक घंटे के बजाय सिर्फ बीस से पच्चीस मिनट ही वर्कआउट करें।
  • शरीर की सुनें: अगर ज़रा सी भी थकान लगे, तो तुरंत अपना वर्कआउट रोक दें।

क्या बीमारी का मानसिक तनाव भी फिटनेस को प्रभावित करता है?

बीमारी के दौरान और उसके बाद की चिंता भी आपकी फिटनेस पर असर डालती है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में टेंशन एक ऐसी चीज है जो बीमारी से उठने के बाद आपकी रिकवरी को बहुत धीमा कर देती है।जब आप बीमार होकर बिस्तर पर होते हैं, तो अक्सर यही सोचते रहते हैं कि शरीर कितना कमजोर हो रहा है और मसल्स घट रही हैं। इसी ज्यादा सोचने और टेंशन लेने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन्स बढ़ जाते हैं, जो आपकी बॉडी को अंदर से जल्दी ठीक होने नहीं देते।फिर जब आप इसी सिरदर्द और टेंशन के साथ वर्कआउट करने या जिम जाते हैं, तो दिमाग और शरीर का सही बैलेंस नहीं बन पाता। ऐसे में वर्कआउट करते वक्त चोट लगने का रिस्क बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। 

बीमारी के बाद सेफ वर्कआउट के लिए क्या उपाय अपनाएँ?

अगर आप चाहते हैं कि बीमारी के बाद आपकी फिटनेस यात्रा बिना किसी नुकसान के दोबारा शुरू हो, तो आपको अपनी दिनचर्या में कुछ खास बदलाव करने होंगे। सुरक्षित रिकवरी के लिए ये उपाय अपनाएँ:

  • पूरी नींद लें: रात में कम से कम आठ घंटे की गहरी नींद लें ताकि शरीर अंदर से रिपेयर हो सके।
  • प्रोटीन वाली डाइट: अपनी डाइट में सुपाच्य प्रोटीन बढ़ाएँ ताकि टूटी हुई मांसपेशियाँ वापस बन सकें।
  • इम्युनिटी बूस्टर लें: ताज़े फल और हरी सब्ज़ियाँ खाएँ जो शरीर को प्राकृतिक रूप से ताकत देती हैं।
  • जल्दबाज़ी बिल्कुल न करें: पुराने वाले भारी वज़न तक पहुँचने में थोड़ा धैर्य और संयम रखें।

आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का नज़रिया पेट खराब होने के कारण (जैसे संक्रमण, फूड पॉइज़निंग या अन्य कारण) की पहचान कर उसके अनुसार उपचार किया जाता है। समग्र स्वास्थ्य, पाचन, आहार-विहार और व्यक्ति की प्रकृति के संतुलन पर ध्यान दिया जाता है।
उपचार का तरीका आवश्यकता के अनुसार दवाइयाँ, ओआरएस, तरल पदार्थ और अन्य चिकित्सकीय उपचार दिए जाते हैं। जड़ी-बूटियों, संतुलित आहार, दिनचर्या और जीवनशैली में सुधार पर ज़ोर दिया जाता है।
सुरक्षा दवाइयाँ डॉक्टर की सलाह से दी जाती हैं और आवश्यकता के अनुसार उनकी निगरानी की जाती है। आयुर्वेदिक औषधियाँ भी केवल योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह और सही मात्रा में ही लेनी चाहिए।
डाइट का महत्व हल्का भोजन, पर्याप्त पानी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार आहार अपनाने की सलाह दी जाती है। पाचन के अनुकूल आहार, नियमित दिनचर्या और संतुलित भोजन को महत्वपूर्ण माना जाता है।
दीर्घकालिक लक्ष्य कारण का उपचार, शरीर में पानी की कमी रोकना और दोबारा समस्या होने का जोखिम कम करना। स्वस्थ पाचन, संतुलित जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल दिया जाता है।

तुरंत डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

बीमारी के बाद हल्की थकान होना एक आम बात है और यह आराम करने से खुद-ब-खुद ठीक हो जाती है। लेकिन हमें मालूम होना चाहिए कि कब स्थिति गंभीर रूप ले सकती है और तुरंत नज़दीकी डॉक्टर के पास जाना चाहिए:

  • बुखार का वापस आना: अगर जिम से आने के बाद शरीर का तापमान अचानक फिर से बहुत तेज़ हो जाए।
  • लगातार उल्टियाँ होना: वर्कआउट के बाद तेज़ घबराहट हो और कुछ भी खाने पर तुरंत उल्टी हो जाए।
  • बेहोशी छा जाना: शरीर में कमज़ोरी इतनी ज़्यादा बढ़ जाए कि आप अपनी जगह से उठ भी न पाएँ।

निष्कर्ष: 

बीमारी के बाद तुरंत जिम भागना कोई बहादुरी का काम नहीं है, बल्कि यह अपने शरीर के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ है। यह समझना होगा कि बीमार होने के बाद शरीर को दोबारा अपनी पुरानी ताकत में आने के लिए पूरे आराम और सही पोषण की बहुत ज़्यादा ज़रूरत होती है। फिटनेस कोई एक दिन की रेस नहीं है, बल्कि यह ज़िंदगी भर चलने वाला एक लंबा सफर है। अपने शरीर की ज़रूरतों को अच्छे से समझें और उसे आराम करने का मौका दें। सही आहार, भरपूर नींद और हल्का व्यायाम ही आपको दोबारा पूरी तरह फिट बना सकता है। सेहतमंद रहें, सुरक्षित रहें।

References

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/physical-activity

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC5911985/

https://www.healthline.com/health/sick-from-working-out

https://www.medicalnewstoday.com/articles/exercise-after-being-sick

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बुखार उतरने के बाद शरीर को पूरी तरह से रिकवर होने के लिए कम से कम एक हफ्ते का समय देना चाहिए। अगर आपको कोई बड़ा इन्फेक्शन था, तो डॉक्टर की सलाह के बाद पंद्रह दिन का आराम भी ज़रूरी हो सकता है।

बिल्कुल नहीं। प्री-वर्कआउट में बहुत ज़्यादा कैफीन होता है जो आपकी हार्ट रेट को तेज़ी से बढ़ाता है। कमज़ोर शरीर में इसे लेने से बेचैनी, घबराहट और दिल की धड़कन बेकाबू होने का बहुत बड़ा खतरा रहता है।

पहला वर्कआउट बहुत ही हल्का होना चाहिए। इसमें भारी डंबल या मशीन का इस्तेमाल करने के बजाय आपको सिर्फ पंद्रह मिनट की हल्की स्ट्रेचिंग, योग या ट्रेडमिल पर बहुत धीमी वॉक से ही शुरुआत करनी चाहिए।

नहीं, जब तक आपकी एंटीबायोटिक दवाइयों का कोर्स पूरी तरह से खत्म न हो जाए, तब तक जिम जाने से हमेशा बचें। ये दवाइयाँ शरीर को थका देती हैं और इनके साथ व्यायाम करने से मांसपेशियों में भारी दर्द हो सकता है।

यह एक बहुत बड़ा मिथक है। पसीना बहाने से कोई भी वायरस शरीर से बाहर नहीं निकलता है, बल्कि बीमार शरीर में भारी कसरत करने से इम्युनिटी और ज़्यादा गिर जाती है और आप दोबारा गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं।

बीमारी के कारण शरीर का ब्लड प्रेशर और ग्लूकोज़ लेवल बहुत ज़्यादा कम हो जाता है। जब आप कमज़ोर शरीर के साथ कसरत करते हैं, तो दिमाग तक सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुँचती, जिससे अचानक तेज़ चक्कर आने लगते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, कमज़ोरी को तेज़ी से दूर करने के लिए रोज़ाना रात को सोते समय एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच अश्वगंधा पाउडर मिलाकर पीना बहुत फायदेमंद होता है। यह आपकी अंदरूनी ताकत को वापस लाता है।

जी नहीं, बीमारी के बाद मांसपेशियाँ पहले से ही टूटी हुई होती हैं। अगर आप भारी वज़न उठाएँगे, तो उन्हें जुड़ने का समय नहीं मिलेगा और आप मसल इंजरी या स्लिप डिस्क जैसे खतरनाक दर्द का आसानी से शिकार हो सकते हैं।

शुरुआत के दिनों में हल्का कार्डियो (जैसे साइक्लिंग या पैदल चलना) वेट लिफ्टिंग से कहीं ज़्यादा सुरक्षित होता है। कार्डियो आपके फेफड़ों को मज़बूत करता है, जबकि वेट लिफ्टिंग सीधे आपकी कमज़ोर मांसपेशियों पर बहुत भारी दबाव डालती है।

आपकी डाइट बहुत ही हल्की और पचने में आसान होनी चाहिए। मूंग दाल, उबले हुए अंडे, पपीता, दलिया और नारियल पानी जैसी चीज़ें लें जो शरीर को बिना ज़्यादा मेहनत किए तुरंत ताकत और हाइड्रेशन प्रदान करती हैं।

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