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सर्जरी या दवाइयों के बाद भी घुटनों का दर्द क्यों ठीक नहीं होता?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 18 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 16 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
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आजकल घुटनों का दर्द केवल बुढ़ापे की निशानी नहीं रह गया है, बल्कि कम उम्र के लोग भी इससे परेशान हैं। अक्सर लोग दर्द निवारक गोलियां लेते हैं या अंत में सर्जरी का सहारा लेते हैं लेकिन कई मामलों में वक़्त बीतने के साथ दर्द दोबारा लौट आता है। घुटनों का दर्द ठीक न होने की मुख्य वजह यह है कि हम केवल बाहरी लक्षणों का इलाज करते हैं, जबकि हड्डियों के भीतर की कमज़ोरी वैसी ही बनी रहती है। समय पर सही इलाज करना इसलिए बेहद ज़रूरी है क्योंकि जोड़ों का घर्षण अगर एक बार बढ़ जाए, तो यह व्यक्ति को बैसाखी या व्हीलचेयर पर ला सकता है। आयुर्वेद इस समस्या को केवल हड्डियों की नहीं, बल्कि शरीर की आंतरिक वायु वात के असंतुलन की समस्या मानता है।

घुटनों का दर्द या संधिवात क्या होता है?

इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझें तो, हमारे घुटने दो हड्डियों के मेल से बनते हैं जिनके बीच में एक 'कुशन' कार्टिलेज और चिकनाई होती है। जब यह चिकनाई सूखने लगती है या कुशन घिस जाता है, तो हड्डियाँ आपस में टकराने लगती हैं। इसी घर्षण के कारण होने वाली सूजन और तकलीफ को घुटनों का दर्द कहा जाता है। सरल शब्दों में, यह आपके जोड़ों की वह स्थिति है जहाँ उन्हें मिलने वाली 'ग्रीस' या चिकनाई खत्म हो गई है और हड्डियाँ आपस में रगड़ खा रही हैं।

घुटनों की समस्याओं के विभिन्न प्रकार और अवस्थाएं

घुटनों के दर्द को उसके कारणों और गंभीरता के आधार पर इन पाँच श्रेणियों में समझा जा सकता है

ऑस्टियोआर्थराइटिस यह उम्र बढ़ने के साथ होने वाला सबसे आम प्रकार है, जिसमें जोड़ों का कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगता है।

रुमेटाइड आर्थराइटिस यह एक ऑटो-इम्यून समस्या है जहाँ शरीर का रक्षा तंत्र ही जोड़ों की परतों पर हमला कर उन्हें नष्ट कर देता है।

गाउट गठिया शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने की वजह से जोड़ों में छोटे-छोटे क्रिस्टल जमा हो जाते हैं, जिससे असहनीय दर्द होता है।

बर्साइटिस जोड़ों के आस-पास की तरल थैलियों में सूजन आ जाना, जिससे घुटना हिलाना भी मुश्किल हो जाता है।

पोस्ट-ट्रॉमेटिक आर्थराइटिस किसी पुरानी चोट या एक्सीडेंट के बाद विकसित होने वाला घुटनों का दर्द।

शरीर में दिखने वाले मुख्य लक्षण

चलते समय आवाज़ आना घुटने मोड़ने या सीधा करते समय चटकने या रगड़ खाने जैसी आवाज़ कट-कट आना।

सुबह की जकड़न सोकर उठने के बाद घुटनों का बहुत ज़्यादा सख़्त हो जाना और उन्हें हिलाने में दर्द होना।

सूजन और गर्माहट घुटने के जोड़ के चारों ओर सूजन रहना और उसे छूने पर हल्का गर्म महसूस होना।

संतुलन में कमी चलते समय ऐसा महसूस होना कि घुटना अचानक 'छोड़' देगा या आप गिर सकते हैं।

सीढ़ियाँ चढ़ने में तक़लीफ़ ऊपर चढ़ते या नीचे उतरते समय घुटनों के बीचों-बीच तेज़ चुभन जैसा दर्द होना।

घुटनों का दर्द होने के मुख्य कारण

वात दोष की अधिकता आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में वायु बढ़ने से जोड़ों की चिकनाई सूख जाती है, जो दर्द का मूल कारण है।

मोटापा शरीर का अत्यधिक वज़न घुटनों पर ज़्यादा दबाव डालता है, जिससे वे समय से पहले घिस जाते हैं।

पोषक तत्वों की कमी कैल्शियम, विटामिन-डी और बी-12 की कमी से हड्डियाँ और नसें कमज़ोर पड़ जाती हैं।

गलत जीवनशैली हर वक़्त खड़े रहना, ऊँची एड़ी के जूते पहनना या व्यायाम न करना जोड़ों को जाम कर देता है।

पुरानी चोट बचपन या युवावस्था में लगी चोट का सही इलाज न होना आगे चलकर गंभीर दर्द बन जाता है।

जोखिम बढ़ाने वाले कारण और जटिलताएं

जोखिम बढ़ाने वाले 5 प्रमुख कारण

उम्र का प्रभाव 40 की उम्र के बाद शरीर में ऊतकों का पुनर्निर्माण धीमा हो जाता है।

खेलकूद या भारी मेहनत एथलीटों या मज़दूरों में घुटनों के घिसने का ख़तरा ज़्यादा होता है।

वंशानुगत कारण यदि परिवार में बड़ों को गठिया की समस्या रही हो।

महिलाओं में मेनोपॉज हार्मोनल बदलाव के कारण महिलाओं की हड्डियाँ तेज़ी से कैल्शियम खोने लगती हैं।

धूम्रपान और शराब ये बुरी आदतें हड्डियों तक रक्त संचार को धीमा कर देती हैं।

होने वाली 5 गंभीर जटिलताएं

स्थायी विकलांगता जोड़ों का पूरी तरह जाम हो जाना, जिससे चलना-फिरना नामुमकिन हो जाए।

हड्डियों का टेढ़ापन दर्द के कारण गलत तरीके से चलने से पैरों की बनावट O या X शेप बिगड़ सकती है।

मांसपेशियों का क्षय दर्द की वजह से पैर का इस्तेमाल न करने से मांसपेशियाँ सूखने लगती हैं।

मानसिक तनावअपनी ज़िंदगी के सामान्य काम न कर पाने की वजह से व्यक्ति चिड़चिड़ा और उदास रहने लगता है।

सर्जरी की विफलता कई बार सर्जरी के बाद भी संक्रमण या शरीर द्वारा इंप्लांट को स्वीकार न करने से समस्या बढ़ जाती है।

आयुर्वेद में घुटनों का दर्द 'संधिवात' का विज्ञान

आयुर्वेद में इसे 'संधिवात' कहा जाता है। इसे इस प्रकार समझा जाता है

वात का प्रकोप आयुर्वेद मानता है कि जब पाचन खराब होता है, तो शरीर में 'आम' विषाक्त तत्व बनते हैं। ये तत्व वायु वात के साथ मिलकर जोड़ों में जम जाते हैं।

खली भाव जोड़ों के भीतर की खाली जगह में जब वायु भर जाती है, तो वह वहां की नमी और चिकनाई को सोख लेती है, जिससे जोड़ सूखे और कड़क हो जाते हैं।

अस्थि धातु का क्षय जब हड्डियों को सही पोषण नहीं मिलता, तो वे कमज़ोर होकर घिसने लगती हैं।

काम आने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

  • शल्लकी Shallaki यह जोड़ों की सूजन और दर्द को प्राकृतिक रूप से कम करती है।
  • गुग्गुलु Guggulu हड्डियों के घर्षण को कम करने और उन्हें मज़बूत बनाने के लिए बेस्ट है।
  • अश्वगंधा Ashwagandha माँसपेशियों को ताकत देती है और लुब्रिकेशन बढ़ाती है।
  • सोंठ Dry Ginger यह जोड़ों में जमा गंदगी Toxins को जलाकर दर्द कम करती है।

आयुर्वेदिक थेरेपी Panchakarma

घुटनों के दर्द में क्या खाएं और क्या न खाएं?

क्या खाएं फायदेमंद क्या न खाएं परहेज
देसी घी और तिल का तेल ठंडी चीजें आइसक्रीम/कोल्ड ड्रिंक
मेथी दाना और अदरक बासी और सूखा खाना
दूध और ड्राई फ्रूट्स मैदा और सफेद चीनी
सहजन Drumstick खट्टी चीजें दही/अचार/इमली
लहसुन और हल्दी ज़्यादा चाय और कॉफी

मरीज़ों का अनुभव

मुझे 6 साल से घुटने में बहुत दर्द था और मैंने कई डॉक्टरों को दिखाया। एलोपैथिक में तो मेरा काम का लोड बढ़ने के साथ पैर में सूजन बहुत ज़्यादा हो जाता था। चलने में मुझे प्रॉब्लम होता था। कभी-कभी लगता था जैसे मैं चल रही हूँ तो गिर जाऊँगी, तो काफी अंदर से मुझे भय रहता था।

बहुत ज़्यादा मेरे पैर में प्रॉब्लम आ गई। लेफ्ट और राइट पैर में, जैसे मुझे लेफ्ट पैर में प्रॉब्लम है, दोनों में बहुत फर्क आने लगा। फिर मैंने उन्हें सब बात अपने घुटने के बारे में और कमर के बारे में बताई।

जीवा Jiva की दवा से मुझे कमर दर्द में बहुत आराम है और घुटना तो 70% मेरा सूजन और दर्द बहुत कम हो गया है। यदि आप लोगों को जोड़ों में दर्द, घुटनों में दर्द, कमर दर्द काफी सालों से है, तो आप लोग जीवा आयुर्वेदा Jiva Ayurveda में संपर्क जरूर करें। थैंक यू।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर?

तुलना का आधार आधुनिक एलोपैथिक इलाज आयुर्वेदिक जीवा इलाज
काम करने का तरीका यह मुख्य रूप से दर्द के संकेतों को दिमाग तक पहुंचने से रोकता है। यह दर्द की जड़—बढ़े हुए 'वात' और घुटनों के सूखेपन पर काम करता है।
दवाओं का असर पेनकिलर और स्टेरॉयड का असर अस्थायी होता है; दवा छोड़ते ही दर्द वापस आ जाता है। जड़ी-बूटियां और तेल धीरे-धीरे घुटनों के ग्रीस Synovial Fluid को दोबारा बनाने में मदद करते हैं।
दुष्प्रभाव Side-effects लंबे समय तक पेनकिलर लेने से किडनी, लिवर और पेट में अल्सर होने का खतरा रहता है। आयुर्वेदिक उपचार प्राकृतिक हैं, जो न सिर्फ घुटने बल्कि पूरे शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधारते हैं।
सर्जरी का विकल्प जब दर्द बढ़ जाता है, तो अक्सर 'नी रिप्लेसमेंट' Knee Replacement ही आखिरी रास्ता बचता है। आयुर्वेद का लक्ष्य पंचकर्म और दवाओं के जरिए सर्जरी की नौबत को टालना और जोड़ों को बचाना है।
इलाज का आधार यह केवल घुटने के एक्सरे और गैप को देखता है। यह शरीर की प्रकृति वात, पित्त, कफ, दोषों के असंतुलन और जोड़ों की अंदरूनी स्थिति को ध्यान में रखकर इलाज करता है।

डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

  • यदि घुटना पूरी तरह मुड़ना या सीधा होना बंद हो जाए।
  • यदि दर्द की वजह से आपकी रात की नींद उड़ जाए।
  • यदि घुटने के जोड़ में लालिमा और बहुत तेज़ बुखार जैसा महसूस हो।
  • यदि घुटना अचानक 'लॉक' हो जाए और आप चल न पाएं।
  • यदि पैर के निचले हिस्से में सुन्नपन या झनझनाहट बढ़ने लगे।

निष्कर्ष

घुटनों का दर्द केवल एक शारीरिक तक़लीफ़ नहीं, बल्कि यह आपकी ज़िंदगी की गति को रोकने वाली चुनौती है। सर्जरी या दवाइयों के बाद भी दर्द बने रहना इस बात का संकेत है कि समस्या की जड़ यानी 'वात' अभी भी शरीर में मौजूद है। आयुर्वेद का होलीस्टिक हीलिंग मार्ग आपको न केवल दर्द से आज़ादी देता है, बल्कि आपके जोड़ों को पुनर्जीवित करता है। अपनी सेहत के प्रति ज़िम्मेदार बनें और आज ही आयुर्वेद के साथ एक दर्द-मुक्त ज़िंदगी की शुरुआत करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, आयुर्वेद में ऐसी औषधियाँ और थेरेपी (जैसे जानु बस्ती) हैं जो कार्टिलेज के पोषण में मदद करती हैं।

बिल्कुल, शरीर का केवल 5 किलो वज़न कम करने से घुटनों पर पड़ने वाला दबाव 50% तक कम हो जाता है।

नहीं, यदि घुटने में बहुत ज़्यादा सूजन और लाली है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के तेज़ मालिश न करें।

ठंड वात को बढ़ाती है और नसों को सिकोड़ देती है, जिससे जोड़ों की जकड़न बढ़ जाती है।

केवल गोली काफी नहीं है, शरीर को उसे सोखने (Absorption) के लिए अच्छी पाचन अग्नि और धूप की भी ज़रूरत होती है।

ताज़ा नींबू पानी विटामिन-सी देता है, लेकिन बहुत खट्टा और पुराना अचार वात बढ़ा सकता है।

हाँ, गेंहू के दाने जितना चूना दही या पानी में लेना फ़ायदेमंद है, लेकिन पथरी के मरीज़ों को इससे बचना चाहिए।

नहीं, 80% मामलों में सही आयुर्वेदिक उपचार से सर्जरी को टाला जा सकता है।

हाँ, लहसुन में वात-नाशक गुण होते हैं, इसका तेल मालिश के लिए बहुत बेहतर है।

जीवा आपकी प्रकृति के अनुसार कस्टमाइज़्ड दवाइयाँ और पंचकर्म देता है जो जोड़ों को जड़ से ठीक करते हैं।

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