Diseases Search
Close Button
 
 

Mood low रहना किस internal imbalance से जुड़ सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

हम सबके साथ ऐसा होता है। कभी काम के प्रेशर से, कभी घर की उलझनों से या कभी किसी खास इंसान से अनबन होने पर हमारा मूड ऑफ हो जाता है। ये ज़िन्दगी का एक नॉर्मल हिस्सा है। लेकिन क्या हो जब ये उदासी जाने का नाम ही न ले?

जब हफ्तों तक बिना किसी खास वजह के आपका मन बुझा-बुझा रहे, किसी काम में मन न लगे, बिस्तर से उठने का मन न करे और हर छोटी चीज़ एक पहाड़ जैसी लगने लगे, तो इसे सिर्फ "आज मूड खराब है" कहकर टालना सही नहीं है।

हम अक्सर सोचते हैं कि 'लो मूड' या उदासी सिर्फ दिमाग या भावनाओं का खेल है। लेकिन आयुर्वेद और आज की मेडिकल साइंस, दोनों यह मानते हैं कि हमारा शरीर और दिमाग एक-दूसरे से बहुत गहराई से जुड़े हैं। कई बार हमारे शरीर के अंदर चल रही कुछ गड़बड़ियां या असंतुलन सीधे हमारे मूड पर प्रहार करते हैं। आइए समझते हैं कि कैसे।

आयुर्वेद में मन और शरीर का क्या कनेक्शन है?

आयुर्वेद मन और शरीर को अलग-अलग खाने में नहीं बांटता। आयुर्वेद कहता है कि जो आप खा रहे हैं, जो आप सोच रहे हैं और जैसा आपका पाचन है ये तीनों मिलकर आपकी मानसिक सेहत तय करते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर में तीन दोष (वात, पित्त, कफ) और मन में तीन गुण (सत्त्व, रजस, तमस) होते हैं:

  • सत्त्व: यह शांति, खुशी और पॉजिटिव सोच का प्रतीक है।
  • रजस: यह बेचैनी, बहुत ज़्यादा सोचना और हमेशा भागने वाली स्थिति है।
  • तमस: यह सुस्ती, आलस, भारीपन और उदासी का प्रतीक है।

जब शरीर में दोष बिगड़ते हैं, तो मन के ये गुण भी डगमगा जाते हैं, और यहीं से मूड खराब होना शुरू होता है।

वो कौन-सी 4 अंदरूनी गड़बड़ियां हैं, जो आपका मूड बिगाड़ सकती हैं?

आयुर्वेद के नज़रिए से देखें, तो लो मूड के पीछे ये चार बड़े कारण हो सकते हैं:

  1. वात का असंतुलन: अगर आपका रूटीन बहुत खराब है, आप ठीक से सो नहीं रहे हैं या बहुत ज़्यादा भागदौड़ कर रहे हैं, तो शरीर में वात बढ़ जाती है। वात बढ़ने से दिमाग में तूफ़ान सा चलता रहता है। इंसान को बिना बात की घबराहट, बेचैनी, नींद न आना और डर सा लगने लगता है।
  2. पित्त का असंतुलन: जब शरीर में गर्मी या पित्त बढ़ जाता है (खासकर बहुत ज़्यादा मसालेदार खाने या स्ट्रेस से), तो इंसान का मूड बहुत जल्दी खराब होता है। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन और हमेशा तनाव में रहना, पित्त बिगड़ने की निशानी हैं।
  3. कफ का असंतुलन: अगर आपको हर वक्त सोने का मन करता है, शरीर भारी-भारी लगता है, किसी काम में उत्साह नहीं आता और आप बस बिस्तर में पड़े रहना चाहते हैं, तो समझ लीजिए कि आपके शरीर में कफ दोष बहुत ज़्यादा बढ़ गया है। कफ बढ़ने से मन में 'तमस' (आलस्य) छा जाता है।
  4. कमज़ोर 'अग्नि' और 'आम': आयुर्वेद की सबसे बड़ी सीख यही है, "जैसा अन्न, वैसा मन।" अगर आपकी पाचन अग्नि सुस्त है, तो खाना ठीक से पचता नहीं है। यह बिना पचा हुआ खाना पेट में सड़कर एक टॉक्सिन (ज़हर) बनाता है, जिसे 'आम' कहते हैं। यह खून के रास्ते पूरे शरीर और दिमाग तक पहुंचता है। इसी वजह से आपका पेट खराब होने पर आपका पूरा दिन सुस्ती और चिड़चिड़ेपन में गुज़रता है।

सिर्फ आयुर्वेद ही नहीं, ये शारीरिक कारण भी मूड गिराते हैं

अगर हम मॉडर्न साइंस की बात करें, तो कुछ बहुत ही बेसिक शारीरिक कमियां भी आपको डिप्रेशन जैसी फीलिंग दे सकती हैं:

  • नींद की कमी: अगर आप लगातार कई रातों से 7-8 घंटे की गहरी नींद नहीं ले रहे हैं, तो दिमाग का चिड़चिड़ा होना तय है।
  • विटामिन्स की कमी: विटामिन B12, विटामिन D, आयरन या मैग्नीशियम की कमी सीधे आपके एनर्जी लेवल और मूड को ज़मीन पर ला पटकती है।
  • हार्मोनल बदलाव: थायरॉइड की दिक्कत, महिलाओं में पीरियड्स, प्रेगनेंसी के बाद या मेनोपॉज़ के दौरान हार्मोन्स के ऊपर-नीचे होने से मूड स्विंग्स होना बहुत आम है।
  • दिन भर बैठे रहना: अगर आप पूरा दिन कुर्सी पर बैठे रहते हैं और कोई फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते, तो शरीर में 'हैप्पी हार्मोन्स' (Endorphins) रिलीज़ नहीं होते, जिससे मूड लो रहता है।

कैसे पहचानें कि अब अलर्ट होने का टाइम आ गया है?

अगर नीचे दी गई बातें आपके साथ 2 हफ्तों से ज़्यादा से हो रही हैं, तो इन्हें इग्नोर न करें:

  • हर वक्त बिना काम किए भी थका-थका लगना।
  • उन कामों में मज़ा न आना जो पहले बहुत पसंद थे (जैसे म्यूज़िक सुनना या दोस्तों से मिलना)।
  • नींद उड़ जाना या फिर दिन भर बस सोते रहना।
  • भूख एकदम मर जाना या फिर स्ट्रेस में बहुत ज़्यादा खाना (Binge eating)।
  • लोगों से दूर भागना और अकेले कमरे में बंद रहने का मन करना।

लो मूड को ठीक करने के आयुर्वेदिक और लाइफस्टाइल टिप्स

दवाइयों से पहले कुछ बेसिक आदतों को सुधार कर देखिए, शायद आपका मूड अपने आप सेट हो जाए:

  • दिनचर्या फिक्स करें: सोने, जागने और खाने का एक टाइम टेबल बनाएं। शरीर को एक रिदम बहुत पसंद होती है।
  • हल्का और सादा खाना: जब मूड लो हो, तो जंक फूड या बहुत ज़्यादा मीठा खाने का मन करता है। लेकिन यही चीज़ें शरीर में सुस्ती बढ़ाती हैं। ताज़ा, घर का बना हल्का खाना (जैसे खिचड़ी, सूप, दाल) खाएं जो आसानी से पच जाए।
  • सुबह की धूप: सुबह उठकर कम से कम 20 मिनट हल्की धूप में बैठें या टहलें। यह आपके विटामिन D और 'हैप्पी हार्मोन्स' दोनों को बूस्ट करेगा।
  • योग और गहरी सांसें: स्ट्रेस को कम करने के लिए अनुलोम-विलोम (प्राणायाम) से बेहतर कुछ नहीं है। यह बढ़े हुए वात को तुरंत शांत करता है।
  • डिजिटल डिटॉक्स: सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल या लैपटॉप बंद कर दें। स्क्रीन की नीली लाइट दिमाग को रिलैक्स नहीं होने देती।

क्या सिर्फ घरेलू उपाय काफी हैं? कब डॉक्टर के पास जाएं?

अगर आपका मूड कुछ दिनों से खराब है और थोड़ा आराम करने या रूटीन सुधारने से ठीक हो जाता है, तो कोई टेंशन की बात नहीं है। 

लेकिन, अगर हफ्तों बाद भी कोई सुधार न हो, आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी (नौकरी, पढ़ाई या रिश्ते) खराब होने लगे, हमेशा निराशा हावी रहे, या मन में खुद को नुकसान पहुँचाने के ख्याल आएं तो सिर्फ घरेलू नुस्खों पर डिपेंड न रहें। तुरंत किसी अच्छे साइकोलॉजिस्ट या डॉक्टर से बात करें।

निष्कर्ष

लगातार खराब रहने वाले मूड को सिर्फ 'दिमाग की उपज' मान लेना सबसे बड़ी गलती है। कई बार आपका शरीर उदासी के ज़रिए आपसे बात करने की कोशिश कर रहा होता है शायद उसे अच्छी नींद चाहिए, शायद विटामिन्स चाहिए, या शायद वो पेट की गैस और कब्ज़ से परेशान है।

आयुर्वेद हमें यही सिखाता है कि अगर मन को खुश रखना है, तो शरीर को भी साफ और स्वस्थ रखना होगा। अपने खाने, अपनी नींद और अपनी दिनचर्या पर ध्यान दीजिए। जब शरीर अंदर से खुश होगा, तो आपके चेहरे पर असली वाली स्माइल अपने आप वापस आ जाएगी!

References

Depressive disorder (depression)

Depression - National Institute of Mental Health (NIMH)

Increase the proportion of adolescents with depression who get treatment — MHMD‑06 - Healthy People 2030 | odphp.health.gov

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ। कुछ लोगों में मौसम में बदलाव, खासकर सर्दियों के दौरान धूप कम मिलने से मूड प्रभावित हो सकता है। यदि यह समस्या बार-बार होती है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।

नहीं। हर बार लो मूड का मतलब डिप्रेशन नहीं होता। तनाव, नींद की कमी, शारीरिक बीमारी या जीवन की परिस्थितियाँ भी इसका कारण हो सकती हैं। लेकिन यदि लक्षण लगातार बने रहें, तो विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।

हाँ। सीमित मात्रा में कैफीन कुछ लोगों में सतर्कता बढ़ा सकती है, लेकिन अधिक मात्रा में सेवन करने से बेचैनी, घबराहट या नींद प्रभावित हो सकती है, जिसका असर मूड पर पड़ सकता है।

हाँ। आधुनिक शोध के अनुसार, आंत और मस्तिष्क के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध होता है, जिसे गट-ब्रेन एक्सिस (Gut-Brain Axis) कहा जाता है। पाचन तंत्र की सेहत मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है।

कुछ लोगों में अत्यधिक सोशल मीडिया उपयोग तनाव, तुलना की भावना, अकेलेपन या चिंता को बढ़ा सकता है। संतुलित स्क्रीन टाइम मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है।

हाँ। हल्का डिहाइड्रेशन भी कुछ लोगों में थकान, ध्यान की कमी और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण है।

हाँ। लंबे समय तक अत्यधिक काम का दबाव, पर्याप्त आराम न मिलना और मानसिक थकान बर्नआउट का कारण बन सकते हैं, जिससे व्यक्ति का मूड और कार्यक्षमता दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

आयुर्वेद में व्यक्ति की प्रकृति (वात, पित्त, कफ) और पाचन शक्ति के अनुसार आहार की सलाह दी जाती है। इसलिए सभी लोगों के लिए एक जैसा आहार उपयुक्त नहीं माना जाता। व्यक्तिगत सलाह के लिए योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श करें।

हाँ। कुछ दवाइयाँ, जैसे कुछ हार्मोनल दवाएँ या अन्य चिकित्सकीय उपचार, कुछ लोगों में मूड में बदलाव ला सकते हैं। यदि दवा शुरू करने के बाद ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो अपने डॉक्टर से सलाह लें।

हाँ। यदि लंबे समय तक मूड लो रहे, तो डॉक्टर आवश्यकतानुसार थायरॉयड, विटामिन B12, विटामिन D, आयरन या अन्य स्वास्थ्य संबंधी जांच की सलाह दे सकते हैं, ताकि किसी छिपे हुए शारीरिक कारण की पहचान की जा सके।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us