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अंडाशय में सिस्ट और हार्मोन असंतुलन क्यों होता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 15 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 18 Jun, 2026
  • category-iconWomen's Health
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हार्मोनल पिल्स और तुरंत पीरियड लाने वाली दवाओं का इस्तेमाल अंडाशय में सिस्ट (Ovarian Cysts) और हार्मोन असंतुलन (PCOD/PCOS) जैसी बीमारियों में काफी आम है। ये दवाएँ और गोलियाँ शरीर में कृत्रिम रूप से हार्मोन डालकर लक्षणों को कुछ समय के लिए दबा देती हैं और ब्लीडिंग ला देती हैं, जिससे मरीज़ को लगता है कि वह पूरी तरह ठीक हो गई है और उसकी परेशानी खत्म हो गई है।

लेकिन कई बार ऐसा होता है कि मरीज़ को दवा छोड़ने के तुरंत बाद फिर से महीनों तक पीरियड्स नहीं आते, सिस्ट का आकार बढ़ जाता है और बीमारी पहले से भी बड़े रूप में वापस आ जाती है। इसके कारण कई हो सकते हैं जैसे लगातार हार्मोन की गोलियाँ (OCPs) खाने से प्रजनन तंत्र का कमज़ोर होना, बीमारी कितनी गंभीर है, दवाओं पर शरीर की निर्भरता, या सबसे महत्वपूर्ण शरीर में मौजूद अशुद्धियाँ और अंदर जमा टॉक्सिन्स जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं। इस बात को समझना ज़रूरी है, ताकि वक्त रहते डॉक्टर से सलाह ली जा सके और ओवरीज़ की सेहत प्राकृतिक रूप से बनी रहे।

अंडाशय में सिस्ट और हार्मोन असंतुलन क्या है?

अंडाशय (Ovary) महिला के प्रजनन तंत्र का मुख्य हिस्सा है जो हर महीने एक स्वस्थ अंडा (Egg) और ज़रूरी हार्मोन (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) बनाता है। जब शरीर में हार्मोन का असंतुलन हो जाता है (विशेषकर पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन का बढ़ना), तो अंडाशय में अंडे पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते और फूटने के बजाय छोटी-छोटी पानी की थैलियों (Cysts) का रूप ले लेते हैं। इस स्थिति को पीसीओएस (PCOS) या पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिज़ीज़ (PCOD) कहते हैं। 

आमतौर पर महिलाएँ इसका शिकार खराब खान-पान, भयंकर तनाव, बहुत ज़्यादा वज़न बढ़ने या इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण होती हैं। जब सिस्ट बन जाती हैं, तो पीरियड्स का रुकना, चेहरे पर बाल आना और बाँझपन जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। गोलियाँ खाने पर कुछ समय के लिए सिस्ट सिकुड़ जाती हैं या साइकिल नॉर्मल हो जाती है, लेकिन ये दवाएँ सिर्फ लक्षणों को ढकती हैं, शरीर के अंदर मौजूद उस अनुकूल माहौल को ठीक नहीं करतीं जिसमें हार्मोन बिगड़ रहे हैं और सिस्ट बन रही हैं। दवा को बिना सोचे-समझे लंबे समय तक इस्तेमाल करना लिवर पर बुरा असर डालता है।

सिस्ट और हार्मोन असंतुलन की बीमारियाँ कितने प्रकार की होती हैं?

स्त्री रोग और हार्मोन से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा में मुख्य रूप से ये बीमारियाँ देखी जाती हैं

  • फंक्शनल सिस्ट (Functional Cysts) ये सबसे आम हैं और मासिक धर्म के दौरान प्राकृतिक रूप से बनती हैं और आमतौर पर खुद ही कुछ महीनों में खत्म हो जाती हैं।
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) इसमें हार्मोन असंतुलन के कारण अंडाशय के किनारे पर बहुत सारी छोटी-छोटी गाँठें (सिस्ट) बन जाती हैं, जिससे ओव्यूलेशन रुक जाता है।
  • एंडोमेट्रियोमा (Endometrioma) इसे 'चॉकलेट सिस्ट' भी कहते हैं। इसमें गर्भाशय की परत (एंडोमेट्रियम) के टिशू अंडाशय में बढ़ने लगते हैं और खून से भरी गाँठें बना लेते हैं।
  • डर्मोइड सिस्ट (Dermoid Cysts) ये जन्मजात कोशिकाओं से बनती हैं और इनमें बाल या दाँत जैसे ऊतक (Tissues) हो सकते हैं।

सिस्ट और हार्मोन असंतुलन के लक्षण और संकेत

बार-बार साइकिल बिगड़ना या वज़न का बेतहाशा बढ़ना कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसके मुख्य लक्षण और संकेत इस प्रकार हैं

  • अनियमित पीरियड्स पीरियड्स का महीनों तक न आना या बहुत कम ब्लीडिंग होना।
  • पेडू (Pelvis) में भयंकर दर्द निचले पेट में लगातार भारीपन या पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द मचना।
  • वज़न का तेज़ी से बढ़ना खासकर पेट और कमर के आसपास तेज़ी से फैट जमा होना और कम न होना।
  • चेहरे पर अनचाहे बाल और मुहाँसे पुरुष हार्मोन बढ़ने से चेहरे पर बाल आना और गंभीर पिंपल्स होना।
  • बालों का झड़ना सिर के बालों का पतला होना और गुच्छों में गिरना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

अंडाशय में सिस्ट और हार्मोन बिगड़ने के मुख्य कारण क्या हैं?

अंडाशय में बार-बार गाँठें बनने के पीछे सिर्फ कमज़ोरी नहीं, बल्कि कई अंदरूनी क्रॉनिक कारण हो सकते हैं। मुख्य कारण इस प्रकार हैं

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस जब शरीर की कोशिकाएँ इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पातीं, तो पैंक्रियाज ज़्यादा इंसुलिन बनाता है। यह अतिरिक्त इंसुलिन अंडाशय को ज़्यादा पुरुष हार्मोन (एण्ड्रोजन) बनाने के लिए उत्तेजित करता है, जिससे सिस्ट बनती हैं।
  • गलत खान-पान और कफ दोष ज़्यादा जंक फूड, मैदा और मीठा खाने से शरीर में कफ दोष और 'आम' बढ़ता है, जो ओवरी के सामान्य काम में रुकावट डालता है।
  • मानसिक तनाव (Stress) लगातार चिंता और तनाव से कॉर्टिसोल बढ़ता है, जो पूरे एंडोक्राइन सिस्टम को भ्रमित कर देता है।
  • हार्मोनल असंतुलन शरीर में ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) का बढ़ना और फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (FSH) का कम होना।
  • दोषों का असंतुलन आयुर्वेद के अनुसार शरीर में वात और कफ का पुराना असंतुलन तरल पदार्थों को जमा कर गाँठों का रूप दे देता है।

इसके जोखिम और जटिलताएँ क्या हैं?

इस समस्या को अगर अनदेखा किया जाए या सिर्फ बाहरी गोली पर निर्भर रहा जाए, तो यह कई जटिलताओं का कारण बन सकता है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं

  • बाँझपन (Infertility) अंडे सही समय पर न बनने और न फूटने के कारण गर्भधारण करने में भयंकर परेशानी आती है।
  • टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा इंसुलिन रेजिस्टेंस लंबे समय तक रहने से यह गंभीर मधुमेह का रूप ले लेता है।
  • सिस्ट का फटना (Rupture) अगर सिस्ट का आकार बहुत बड़ा हो जाए तो वह फट सकती है, जिससे पेट में अंदरूनी ब्लीडिंग और तेज़ दर्द हो सकता है, जिसमें इमरजेंसी सर्जरी की ज़रूरत पड़ती है।
  • एंडोमेट्रियल कैंसर लगातार पीरियड्स न आने से गर्भाशय की परत मोटी हो जाती है, जो भविष्य में कैंसर का खतरा बढ़ाती है।
  • मानसिक अवसाद शारीरिक बदलावों और बाँझपन के डर से गंभीर डिप्रेशन हो सकता है।
  • समय पर डॉक्टर से परामर्श और उचित इलाज लेने से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के हिसाब से अंडाशय में सिस्ट बनना सिर्फ एक अंग की दिक्कत नहीं है। आयुर्वेद में इसे 'ग्रंथि रोग' या 'आर्तव दृष्टि' कहा जाता है और यह माना जाता है कि जब शरीर में कफ और वात दोष बिगड़ जाते हैं, तब ऐसी परेशानी आती है। कफ दोष के बढ़ने से शरीर में तरल पदार्थ गाढ़ा होकर गाँठ (सिस्ट) का रूप ले लेता है और बढ़ा हुआ वात दोष पीरियड्स के सही चक्र को बिगाड़ देता है। डॉक्टर नाड़ी और जीभ देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं। वे ढूँढते हैं कि कहीं शरीर में कमज़ोर पाचन अग्नि के कारण टॉक्सिन्स (आम) तो नहीं जमा हो गए हैं, जिसने गर्भाशय और अंडाशय तक पहुँचने वाले पोषण मार्गों को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है। जब तक यह दूषित 'आम' और कफ शरीर में रहेगा, सिस्ट बनती रहेंगी। आयुर्वेद में बस ब्लड रिपोर्ट को ठीक करना और कृत्रिम हार्मोन की गोली देना मकसद नहीं है, वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, शरीर की अंदरूनी शुद्धि हो और गाँठें प्राकृतिक रूप से घुलें।

सिस्ट और हार्मोन असंतुलन के लिए महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में हार्मोन को प्राकृतिक रूप से संतुलित करने और गाँठों को गलाने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं

  • कांचनार यह शरीर में किसी भी प्रकार की गाँठ (सिस्ट) को गलाने की सबसे बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधि है।
  • अशोक यह गर्भाशय और अंडाशय के लिए सबसे अच्छा टॉनिक है। यह हार्मोन को संतुलित करता है और ओव्यूलेशन में मदद करता है।
  • शतावरी आयुर्वेद में इसे महिलाओं की सेहत के लिए बहुत शक्तिशाली माना गया है। यह प्रजनन अंगों को ताकत देती है और अंडे बनने की प्रक्रिया को सुधारती है।
  • वरुण यह कफ दोष को कम करता है और अंडाशय की रुकी हुई नलियों को खोलने में बहुत असरदार है।

आयुर्वेदिक पंचकर्म शरीर की अंदरूनी सफाई

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, दूषित दोषों को बाहर निकालकर संपूर्ण स्वास्थ्य और स्वस्थ अंडाशय पाने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया

  • गहरी सफाई और शरीर शोधन जब पीसीओडी (PCOD) और सिस्ट की समस्या सालों पुरानी हो और दवा के डोज़ लगातार बढ़ रहे हों, तो जीवा आयुर्वेद में शरीर के दोषों को संतुलित करने के लिए विशेष पंचकर्म चिकित्सा की जाती है।
  • बस्ती कर्म यह अपान वात को शांत करने का सबसे असरदार तरीका है। इसमें औषधीय काढ़े का एनीमा दिया जाता है जो सीधा प्रजनन अंगों को ताकत देता है।
  • उत्तर बस्ती गर्भाशय और अंडाशय की रुकावट खोलने और बाँझपन दूर करने के लिए औषधीय तेल को सीधा गर्भाशय के अंदर पहुँचाया जाता है, जो सिस्ट को अंदर से गलाता है।
  • उद्वर्तन अगर वज़न बहुत ज़्यादा बढ़ गया है, तो जड़ी-बूटियों के सूखे चूर्ण से मालिश की जाती है जिससे कफ और भयंकर फैट पिघलता है।

हार्मोन असंतुलन की रोगी के लिए शुद्ध आहार

जीवा आयुर्वेद और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार, हार्मोन को संतुलित करने और सिस्ट गलाने के लिए सुपाच्य, हल्का और शरीर की अग्नि को बढ़ाने वाला आहार चुनना महत्वपूर्ण है

क्या खाएँ?

  • दालचीनी और मेथी सुबह खाली पेट मेथी का पानी या दालचीनी की चाय पिएँ, यह ब्लड शुगर को नियंत्रित कर हार्मोन संतुलित करती है।
  • पपीता और तिल कच्चा पपीता और भुने हुए तिल गुड़ के साथ खाएँ, इनकी तासीर गर्म होती है जो रुके हुए पीरियड्स को लाने में मदद करती है।
  • फाइबर युक्त आहार ताज़ी सब्ज़ियाँ, ओट्स और साबुत अनाज खाएँ, ये इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करते हैं और पचने में हल्के होते हैं।

क्या न खाएँ?

  • जंक फूड और मैदा पिज्जा, बर्गर और मैदे से बनी चीज़ें बिल्कुल बंद कर दें, ये शरीर में कफ और गाँठें पैदा करती हैं।
  • डेयरी और चीनी ज़्यादा दूध, पनीर और मीठी चीज़ें पीसीओएस (PCOS) में सबसे ज़्यादा नुकसान करती हैं, क्योंकि यह वज़न और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाती हैं।
  • ठंडी और भारी चीज़ें फ्रिज का ठंडा पानी और बासी खाना खाने से वात बढ़ता है, जो समस्या को और खराब करता है।

ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में रोगों का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है, इसलिए ठीक होने का समय मुख्य रूप से इन बातों पर निर्भर करता है

  • बीमारी और शरीर की स्थिति ठीक होने का वक्त कई बातों से तय होता है जैसे सिस्ट का आकार क्या है, आप कितने सालों से गोलियाँ खा रही हैं, और आपका कफ दोष कितना बढ़ा हुआ है।
  • हल्की समस्या में सुधार अगर सिस्ट छोटी हैं (PCOD की शुरुआत है), तो आमतौर पर 2 से 3 महीने में ही साइकिल सुधरने लगती है और वज़न कम होने लगता है।
  • पुरानी बीमारी का समय अगर सिस्ट बड़ी हैं, सालों पुरानी समस्या है और इंसुलिन बहुत ज़्यादा बढ़ा हुआ है, तो शरीर को पूरी तरह शुद्ध होने और ओवरीज़ को खुद काम करने में 6 महीने से 1 साल तक का समय भी लग सकता है।
  • उपचार का तरीका इस प्राकृतिक इलाज में मुख्य रूप से गाँठें गलाने वाली जड़ी-बूटियाँ, सही खानपान और व्यायाम शामिल होता है।
  • स्थायी परिणाम मरीज़ अगर अपनी डाइट का कड़ाई से पालन करता है, तो दोष संतुलित हो जाते हैं और भविष्य में हार्मोन की गोलियों पर निर्भरता हमेशा के लिए खत्म हो जाती है।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

जीवा आयुर्वेद उन लोगों के लिए एक वरदान है जो किसी भी बीमारी से पीड़ित हैं! मैं बांझपन के इलाज के लिए जीवा आयुर्वेद गई थी और वहाँ मेरी मुलाक़ात एक सीनियर डॉक्टर से हुई। उन्होंने मुझे इस तरह से गाइड किया कि इलाज शुरू होने के एक महीने बाद ही मैं प्रेग्नेंट हो गई। उनकी दवाएँ बहुत अच्छी हैं। इसके अलावा, उनके डॉक्टर बहुत अनुभवी और कुशल हैं। मैं गायनेकोलॉजिकल समस्याओं के लिए जीवा आयुर्वेद की ज़ोरदार सिफ़ारिश करती हूँ।

कोमल (फरीदाबाद)

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

मासिक धर्म की बीमारी में आधुनिक और आयुर्वेदिक इलाज का नज़रिया बिल्कुल अलग है

तुलना का आधार आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक चिकित्सा
उपचार का दृष्टिकोण हार्मोन देकर लक्षणों को नियंत्रित करना बीमारी की जड़ पर काम करना
कार्य करने का तरीका कृत्रिम हार्मोन (OCPs) से पीरियड्स लाना शरीर को अंदर से संतुलित कर साइकिल को प्राकृतिक बनाना
मूल कारण पर प्रभाव सिस्ट को नहीं हटाता, ओवरीज़ को सक्रिय नहीं करता कफ-वात असंतुलन और टॉक्सिन्स को संतुलित करता है
उपचार विधियाँ हार्मोनल दवाइयाँ (OCPs) जड़ी-बूटियाँ और संतुलित आहार
दुष्प्रभाव दवा छोड़ते ही पीरियड्स रुकना, लिवर पर असर सामान्यतः सुरक्षित, प्राकृतिक सुधार
परिणाम अस्थायी नियंत्रण सिस्ट में सुधार, साइकिल नियमित होना
समय जल्दी असर थोड़ा समय लगता है, लेकिन दीर्घकालिक लाभ

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

सिस्ट और हार्मोन असंतुलन होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि

  • लगातार 3 महीने या उससे अधिक समय तक पीरियड्स बिल्कुल न आएँ।
  • पेडू (Pelvic area) में अचानक बहुत भयंकर और असहनीय दर्द हो (सिस्ट फटने का खतरा)।
  • वज़न इतनी तेज़ी से बढ़े कि कंट्रोल करना मुश्किल हो जाए।
  • चेहरे और शरीर पर बहुत ज़्यादा अनचाहे बाल आने लगें।
  • गर्भधारण की कोशिश करने के बाद भी एक साल तक सफलता न मिले।

समय पर सलाह लेने से रोग का सही निदान होता है और बाँझपन जैसी जटिलताओं से बचा जा सकता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के हिसाब से अंडाशय में सिस्ट और हार्मोन असंतुलन मुख्य रूप से कफ व वात दोष के बिगड़ने तथा शरीर में 'आम' (टॉक्सिन्स) के जमा होने से जुड़ा होता है। जंक फूड खाने, व्यायाम न करने और तनाव लेने से ओवरीज़ के मार्गों में रुकावट आती है और तरल पदार्थ गाँठ का रूप ले लेता है। सिर्फ रोज़ाना हार्मोन की गोली खाने से महीने में ब्लीडिंग तो हो जाती है, लेकिन सिस्ट जड़ से खत्म नहीं होती। इलाज में शरीर की अंदरूनी शुद्धि और दोषों को संतुलित करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। इसमें कांचनार-अशोक जैसी जड़ी-बूटियाँ इस्तेमाल करना, मेथी-दालचीनी का पानी पीना और स्वस्थ दिनचर्या अपनाना शामिल है जिससे गर्भाशय प्राकृतिक रूप से काम करे और बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सके।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, अगर बीमारी की शुरुआत में ही सही आयुर्वेदिक इलाज और डाइट का पालन किया जाए, तो सिस्ट को प्राकृतिक रूप से गलाया जा सकता है।

ये गोलियाँ सिर्फ कृत्रिम साइकिल बनाती हैं और सिस्ट को बढ़ने से कुछ समय रोकती हैं। ये बीमारी की जड़ खत्म नहीं करतीं।

हाँ, मेथी इंसुलिन के स्तर को संतुलित करती है जो हार्मोन को सुधारने और सिस्ट को कम करने में मदद करता है।

हाँ, ज़्यादा तनाव से कॉर्टिसोल बढ़ता है, जो हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ कर सिस्ट बनने की प्रक्रिया को तेज़ करता है।

हाँ, मैदा और चीनी से बनी चीज़ें इंसुलिन का स्तर बढ़ाती हैं, जो पीसीओडी में हार्मोन बिगाड़ने और कफ (सिस्ट) बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण है।

हाँ, कांचनार गुग्गुल आयुर्वेद में किसी भी प्रकार की गाँठ (सिस्ट) को गलाने के लिए सबसे असरदार औषधि मानी जाती है।

हाँ, सिस्ट होने से अंडे सही समय पर नहीं बन पाते (ओव्यूलेशन नहीं होता), जिससे गर्भधारण करने में परेशानी आ सकती है।

हाँ, अगर सिस्ट का आकार बहुत बड़ा हो जाए तो वह फट सकती है, जिससे पेट में भयंकर दर्द होता है और मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है।

हाँ, दालचीनी इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाती है, जिससे पीसीओएस में हार्मोन तेज़ी से संतुलित होते हैं।

हाँ, सिर्फ 5-10% वज़न कम करने से शरीर का इंसुलिन और हार्मोन लेवल काफी हद तक सुधर जाता है, जिससे सिस्ट घुलने में मदद मिलती है।

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