Diseases Search
Close Button
 
 

PCOD में सिर्फ periods irregular नहीं होते: weight, acne, mood और fatigue भी signals हैं

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 18 Jul, 2026
  • category-iconUpdated on 18 Jul, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5005

जब भी किसी लड़की या महिला को पता चलता है कि उसे PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज) है, तो सबसे पहली बात दिमाग में यही आती है कि "मेरे पीरियड्स सही समय पर नहीं आ रहे हैं।" बहुत सी महिलाओं को लगता है कि अगर पीरियड्स हर महीने सही आ रहे हैं, तो उन्हें PCOD हो ही नहीं सकता।

लेकिन यह सच नहीं है। PCOD सिर्फ आपके पीरियड्स की बीमारी नहीं है। यह आपके पूरे शरीर के हार्मोन्स का बिगड़ना है। कई बार महिलाएं सालों तक अपने बढ़ते वज़न, चेहरे के पिंपल्स, बाल झड़ने या बेवजह की थकान का अलग-अलग इलाज करवाती रहती हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि इन सबके पीछे असल विलेन PCOD ही था। 

क्या सिर्फ अनियमित पीरियड्स ही PCOD का इशारा हैं?

बिल्कुल नहीं! यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। हां, यह सच है कि PCOD में ज़्यादातर महिलाओं को पीरियड्स दो-तीन महीने तक नहीं आते, या आते हैं तो बहुत कम या बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग होती है। लेकिन कुछ महिलाओं में पीरियड्स हर महीने एकदम टाइम पर आते हैं, फिर भी उन्हें PCOD होता है। उनके शरीर में पिंपल्स, वज़न बढ़ना या बालों का झड़ना जैसे बाकी लक्षण दिख रहे होते हैं।

इसलिए सिर्फ कैलेंडर देखकर यह तय मत कीजिए कि आपको PCOD है या नहीं। शरीर के बाकी इशारों को भी समझना होगा।

PCOD में वज़न इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ता है?

"मैं तो बहुत कम खाती हूँ, फिर भी मेरा वज़न बढ़ता ही जा रहा है और पेट के आसपास की चर्बी कम ही नहीं होती।" क्या आपके साथ भी ऐसा होता है? यह PCOD का एक बहुत बड़ा लक्षण है।

इसके पीछे एक सीधा सा कारण है,  'इंसुलिन रेजिस्टेंस'। जब हम कुछ खाते हैं, तो शरीर उससे शुगर बनाकर एनर्जी लेता है। लेकिन PCOD में शरीर इस शुगर को ताकत में नहीं बदल पाता, और वह शुगर पेट के आसपास फैट (चर्बी) बनकर जमा होने लगती है। जब वज़न बढ़ता है, तो PCOD बिगड़ता है और जब PCOD बिगड़ता है, तो वज़न और बढ़ता है। यह एक ऐसा जाल है जिसे सही डाइट और कसरत से ही तोड़ा जा सकता है।

चेहरे पर बार-बार पिंपल्स (Acne) और ऑयली स्किन क्यों होती हैं?

टीनएज (14-18 की उम्र) में पिंपल्स होना आम बात है, लेकिन अगर आपकी उम्र 20, 25 या 30 साल हो गई है और फिर भी आपके चेहरे, खासकर ठुड्डी, जॉलाइन और गर्दन पर पिंपल्स निकल रहे हैं, तो यह PCOD का इशारा हो सकता है।

PCOD में पुरुषों वाले हार्मोन बढ़ जाते हैं। ये हार्मोन आपकी स्किन में बहुत ज़्यादा तेल बनाने लगते हैं। जब स्किन पर तेल बढ़ता है, तो रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और पिंपल्स निकलने लगते हैं। आप बाहर से कितने भी महंगे फेसवॉश या क्रीम लगा लें, जब तक अंदर से हार्मोन्स ठीक नहीं होंगे, पिंपल्स वापस आते रहेंगे।

मूड स्विंग्स, बेवजह रोना और चिड़चिड़ापन क्यों बढ़ जाते हैं?

PCOD सिर्फ शरीर को नहीं थकाता, यह दिमाग को भी बहुत थका देता है। अचानक से बहुत गुस्सा आना, छोटी-छोटी बातों पर रोने का मन करना, हमेशा उदास रहना या बहुत ज़्यादा टेंशन लेना, ये सब आपके स्वभाव की खराबी नहीं है, बल्कि आपके शरीर में नाच रहे हार्मोन्स का नतीजा है।

लगातार वज़न बढ़ने की टेंशन, चेहरे के पिंपल्स और बालों का झड़ना भी महिलाओं को अंदर से परेशान कर देता है, जिससे उनका चिड़चिड़ापन और बढ़ जाता है।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह

PCOD सिर्फ अनियमित पीरियड्स नहीं, बल्कि एक गंभीर हार्मोनल असंतुलन है। पीरियड्स समय पर आने के बावजूद अगर आपका तेज़ी से वज़न बढ़ रहा है, चेहरे पर बाल या ज़िद्दी पिंपल्स आ रहे हैं, और अत्यधिक थकान रहती है, तो यह PCOD और 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' का संकेत है। इन्हें कॉस्मेटिक समस्या मानकर ब्यूटी ट्रीटमेंट पर समय बर्बाद करने के बजाय, सटीक जांच के लिए तुरंत गायनेकोलॉजिस्ट से मिलें। 

हर समय थकान क्यों महसूस होती है?

क्या आप रात को 8-9 घंटे की अच्छी नींद लेने के बाद भी सुबह उठकर थका हुआ महसूस करती हैं? दिन भर सुस्ती छाई रहती है और किसी काम में मन नहीं लगता?

यह कोई आम कमज़ोरी नहीं है। PCOD में आपकी बॉडी अंदर ही अंदर हार्मोन्स और शुगर लेवल से लड़ रही होती है। जब शरीर का सिस्टम ठीक से काम नहीं करता, तो आपकी एनर्जी का लेवल एकदम नीचे गिर जाता है। इसी वजह से आपको हर वक्त लेटे रहने का मन करता है।

PCOD के कुछ और इशारे जिन्हें हम अक्सर इग्नोर कर देते हैं

इन बड़े लक्षणों के अलावा भी शरीर कुछ छोटे इशारे देता है:

  • बालों का झड़ना: कंघी करते वक्त गुच्छों में बाल निकलना या सिर के बीच से बालों का पतला होना।
  • चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल: ठुड्डी, अपर लिप्स (मूंछों के बाल), छाती या पेट पर कड़े और काले बालों का उगना।
  • नींद न आना: रात को बार-बार करवटें बदलना और गहरी नींद न आ पाना।
  • बहुत ज़्यादा मीठा खाने की तलब: अचानक से रात को मीठा खाने का या जंक फूड खाने का मन करना, जो शरीर में शुगर के ऊपर-नीचे होने की वजह से होता है।

आयुर्वेद PCOD को किस नज़रिए से देखता है?

आयुर्वेद में PCOD नाम की कोई एक खास बीमारी नहीं लिखी है, लेकिन इसे शरीर के पाचन और दोषों के बिगड़ने से जोड़कर देखा जाता है।

आयुर्वेद कहता है कि जब हमारी पाचन अग्नि सुस्त पड़ जाती है, तो खाना ठीक से पचता नहीं है और पेट में गंदगी (जिसे 'आम' कहते हैं) जमा होने लगती है। यह गंदगी शरीर की नसों और रास्तों को ब्लॉक कर देती है, जिससे कफ और वात दोष बिगड़ जाते हैं और पीरियड्स की साइकिल रुक जाती है।

आयुर्वेद में इसका इलाज सिर्फ कोई एक गोली खाना नहीं है। इसमें सही घर का खाना, सही समय पर सोना, योग करना और जड़ी-बूटियों (जैसे शतावरी, गिलोय आदि) से शरीर को अंदर से साफ करने पर ज़ोर दिया जाता है।

PCOD को कंट्रोल करने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलें?

दवाइयां अपनी जगह हैं, लेकिन PCOD को हराने का असली हथियार आपकी लाइफस्टाइल है।

  • सही खाना खाएं: बाहर का पैकेट बंद खाना, मैदा, और बहुत ज़्यादा चीनी वाली चीज़ें बिल्कुल छोड़ दें। घर का ताज़ा खाना, हरी सब्ज़ियाँ, दालें और फल खाएं।
  • रोज पसीना बहाएं: दिन भर बैठे रहने से बचें। रोज़ाना कम से कम 45 मिनट तेज़ पैदल चलें, साइकिल चलाएं या योग (खासकर सूर्य नमस्कार और बटरफ्लाई आसन) करें।
  • टेंशन को दूर भगाएं: स्ट्रेस से हार्मोन्स और बिगड़ते हैं। अपने शौक पूरे करें, म्यूज़िक सुनें और गहरी सांसें लेने (प्राणायाम) की आदत डालें।
  • नींद पूरी लें: रात को मोबाइल साइड में रखकर समय पर सो जाएं।

ये छोटे-छोटे बदलाव कुछ ही महीनों में आपको बहुत बड़ा असर दिखाएंगे।

क्या PCOD हमेशा के लिए पूरी तरह ठीक हो सकता है?

यह एक ऐसा सवाल है जो हर लड़की पूछती है। सच बात यह है कि PCOD कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो बुखार की तरह 5 दिन की दवा खाकर हमेशा के लिए खत्म हो जाए। यह एक 'लाइफस्टाइल डिसऑर्डर' है।

लेकिन अच्छी खबर यह है कि आप सही डाइट और रूटीन से इसे कंट्रोल कर सकती हैं। अगर आप अपनी जीवनशैली अच्छी रखती हैं, तो आपको पता भी नहीं चलेगा कि आपको PCOD है, आपके पीरियड्स टाइम पर आएंगे और आप एक दम नॉर्मल लाइफ जिएंगी।

डॉक्टर के पास कब जाना ज़रूरी है?

डॉक्टर को तुरंत दिखाए अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण दिखते है:

  • जब आपके पीरियड्स 2-3 महीने तक न आएं या साल में सिर्फ 4-5 बार ही आएं।
  • जब आप सब कुछ सही खा रही हैं, फिर भी वज़न तेज़ी से बढ़ता ही जा रहा है।
  • चेहरे पर इतने बाल और पिंपल्स आ जाएं कि आपका कॉन्फिडेंस कम होने लगे।
  • अगर आप मां बनना चाह रही हैं लेकिन प्रेगनेंसी में दिक्कत आ रही हो।

निष्कर्ष

PCOD कोई हौव्वा या डराने वाली बीमारी नहीं है, यह बस आपके शरीर का अलार्म है जो कह रहा है कि "अपनी रूटीन और खाने-पीने की आदतों को सुधार लो।"

अगर आपका वज़न बढ़ रहा है, पिंपल्स आ रहे हैं, बाल झड़ रहे हैं या आप हर वक्त थका हुआ और चिड़चिड़ा महसूस कर रही हैं, तो इसे इग्नोर मत कीजिए। अपने शरीर के इन इशारों को समझिए। सही समय पर डॉक्टर से मिलिए, अपने खाने की प्लेट को सुधारिए और रोज़ थोड़ा समय अपने शरीर को दीजिए। आप बहुत आसानी से इस परेशानी को मात दे सकती हैं।

References

Polycystic ovary syndrome

Polycystic Ovary Syndrome: Etiology, Current Management, and Future Therapeutics - PMC

Polycystic Ovary Syndrome: Etiology, Current Management, and Future Therapeutics - PMC

Polycystic ovary syndrome

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बिल्कुल नहीं। यह एक बहुत बड़ा झूठ है। कई पतली लड़कियों को भी PCOD होता है, जिसे 'लीन PCOD' (Lean PCOD) कहा जाता है। इसलिए सिर्फ वज़न देखकर इसका अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता।

हां, ऐसा हो सकता है। PCOD के कई अलग-अलग रूप होते हैं। अगर आपको पीरियड्स नॉर्मल आ रहे हैं लेकिन हार्मोनल इंबैलेंस के बाकी लक्षण हैं, तो आपको डॉक्टर से चेकअप करवाना चाहिए।

यह सच नहीं है। PCOD में अंडे समय पर नहीं बनते जिससे प्रेगनेंसी में थोड़ी मुश्किल ज़रूर आ सकती है, लेकिन सही इलाज, दवाइयों और लाइफस्टाइल में बदलाव के बाद ज़्यादातर महिलाएं आसानी से मां बन जाती हैं।

आम बोलचाल में लोग दोनों को एक ही मानते हैं। लेकिन मेडिकल भाषा में PCOD थोड़ा हल्का रूप है जो लाइफस्टाइल से ठीक हो जाता है, जबकि PCOS एक ज़्यादा गंभीर हार्मोनल बीमारी है। इलाज और बचाव दोनों का लगभग एक जैसा ही होता है।

क्योंकि आपके शरीर में शुगर को पचाने वाला सिस्टम (इंसुलिन) ठीक से काम नहीं कर रहा होता है। इसलिए सिर्फ भूखे रहने से वज़न नहीं घटता, इसके लिए आपको मीठा छोड़ना पड़ता है और रोज़ कसरत करनी पड़ती है।

आयुर्वेद PCOD को जड़ से कंट्रोल करने में बहुत मदद करता है। लेकिन इंटरनेट से देखकर कोई भी चूर्ण या काढ़ा न पिएं। हमेशा किसी अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर को नाड़ी दिखाकर ही इलाज शुरू करें।

कुछ महिलाओं को दूध या पैकेट वाले डेरी प्रोडक्ट्स से पिंपल्स और सूजन बढ़ जाती है। अगर आपको भी दूध पीने के बाद ऐसा लगता है, तो कुछ दिन इसे छोड़कर देखें कि शरीर कैसा महसूस कर रहा है।

 जब आप टेंशन लेते हैं, तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (Cortisol) बढ़ता है, जो सीधे तौर पर आपके पीरियड्स और वज़न को बिगाड़ देता है। इसलिए खुश रहना सबसे अच्छी दवा है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us