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सुबह उठते ही थकान महसूस होना क्या संकेत देता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

सुबह आँख खुलते ही अगर आपको ऐसा लगे कि शरीर में बिल्कुल भी जान नहीं है और दोबारा सो जाने का मन करे, तो यह कोई अच्छी बात नहीं है। रातभर सोने के बाद हमारे शरीर को एकदम ताज़ा और ऊर्जा से भरा होना चाहिए। लेकिन अगर आठ घंटे की नींद के बाद भी आप बिस्तर से उठने में हिम्मत जुटा रहे हैं, तो समझ जाइए कि शरीर अंदर से कोई परेशानी झेल रहा है। आइए बिल्कुल आम बोलचाल की भाषा में समझते हैं कि सुबह की यह थकान हमें क्या बताने की कोशिश कर रही है और इसे कैसे दूर किया जा सकता है।

सुबह उठते ही थकान क्यों लगती है?

जब हम रात को सोते हैं, तो हमारा शरीर दिनभर की थकान मिटाता है और खुद को अगले दिन के लिए तैयार करता है। अगर यह काम ठीक से नहीं हो पाता, तो सुबह सोकर उठने के बाद भी शरीर टूटा-टूटा सा रहता है।इसकी सबसे बड़ी वजह है ठी क से नींद न आना। कई बार हम कहने को तो 8 घंटे बिस्तर पर लेटे रहते हैं। 

लेकिन दिमाग में बातें चलने की वजह से गहरी नींद नहीं आ पाती। इसके अलावा शरीर में खून या विटामिन्स की कमी होना, या फिर थायरॉयड जैसी कोई अंदरूनी दिक्कत होना भी इस थकान की वजह हो सकती है।आपका शरीर बस आपसे यह कह रहा है कि उसे सिर्फ नाम का आराम नहीं, बल्कि अच्छा खाना और मन की शांति चाहिए। 

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

डॉक्टर इस बात को बहुत गंभीरता से लेते हैं। उनका मानना है कि सुबह की थकान को कभी भी सिर्फ आलस समझकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। डॉक्टर कहते हैं कि अगर यह थकान एक या दो दिन हो तो यह नॉर्मल है, शायद आपने काम ज़्यादा किया हो। लेकिन अगर यह रोज़ की कहानी बन गई है, तो यह किसी गहरी बीमारी का इशारा हो सकता है। नींद से जुड़ी बीमारी में सोते समय खर्राटे आते हैं और कुछ सेकंड के लिए सांस रुक जाती है, जिससे नींद टूटती है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि इस थकान का असली कारण पकड़ना बहुत ज़रूरी है।

नींद खराब करने वाली हम कौन-सी गलतियां करते हैं? 

हम अनजाने में कुछ ऐसी आदतें पाल लेते हैं जो हमारी नींद को खराब कर देती हैं।

  • देर रात तक मोबाइल चलाना: सोने से पहले स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी हमारे दिमाग को जगाए रखती है और नींद के हार्मोन को बनने से रोकती है।
  • रात को भारी खाना खाना: अगर आप सोने से ठीक पहले बहुत तला भुना या भारी खाना खाते हैं, तो शरीर उसे पचाने में लगा रहता है और आराम नहीं कर पाता।
  • चाय या कॉफी पीना: शाम के बाद कैफीन वाली चीज़ें पीने से दिमाग की नसें सक्रिय हो जाती हैं और गहरी नींद नहीं आ पाती।
  • गलत गद्दा और तकिया: अगर आपके सोने की जगह आरामदायक नहीं है, तो रात भर करवटें बदलते गुज़रती है और सुबह शरीर टूटता है।

सुबह की थकान से कितने प्रतिशत लोग परेशान रहते हैं?

आज के भागदौड़ भरे समय में यह समस्या बहुत तेज़ी से बढ़ रही है। हेल्थ रिपोर्ट और नींद पर हुई कई रिसर्च बताती हैं कि शहरों में रहने वाले लगभग पैंतालीस से पचास प्रतिशत लोग सुबह उठने पर खुद को थका हुआ और कमज़ोर महसूस करते हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या उन युवाओं और नौकरीपेशा लोगों की है जो रात की शिफ्ट में काम करते हैं या जिनका सोने और जागने का कोई समय तय नहीं है। महिलाओं में भी खून की कमी और घर के काम के तनाव के कारण यह सुबह की थकान बहुत ज़्यादा देखने को मिलती है।

सुबह की इस कमज़ोरी और थकान से कैसे बचें?

इस थकान से बचने का सबसे आसान तरीका है अपने सोने का एक कड़ा नियम बनाना। चाहे छुट्टी का दिन ही क्यों न हो, आपके सोने और सुबह उठने का समय एक ही होना चाहिए। इससे शरीर की अपनी एक घड़ी सेट हो जाती है। सोने से कम से कम एक घंटे पहले टीवी और मोबाइल को खुद से दूर कर दें। रात के समय हल्का गुनगुना दूध पिएं या कोई अच्छी किताब पढ़ें, जिससे दिमाग को शांति मिले। अपने कमरे में अंधेरा रखें और तापमान ऐसा रखें जिसमें आपको न ज़्यादा गर्मी लगे और न ज़्यादा ठंड, ताकि नींद बीच में न टूटे।

किन लोगों को सुबह की थकान सबसे ज्यादा होती है? 

कुछ खास उम्र और परेशानी वाले लोगों को सुबह उठने में सबसे ज़्यादा दिक्कत और कमज़ोरी महसूस होती है।

  • थायरॉयड के मरीज़: जिन लोगों का थायरॉयड हार्मोन संतुलित नहीं होता, उनका शरीर हमेशा सुस्त रहता है और सुबह उठने का मन नहीं करता।
  • खून की कमी वाले लोग: शरीर में आयरन या हीमोग्लोबिन कम होने से नसों में ऑक्सीजन सही से नहीं पहुंचती, जिससे हर समय थकान छाई रहती है।
  • तनाव लेने वाले लोग: जो लोग हर बात की बहुत ज़्यादा चिंता करते हैं, उनका दिमाग रात में भी चलता रहता है और उन्हें गहरी नींद नहीं आती।
  • छोटे बच्चों की माताएं: रात भर उठकर बच्चे को संभालने के कारण नई माताओं की नींद कभी पूरी नहीं हो पाती है, जिससे उन्हें कमज़ोरी लगती है।

क्या सुबह ताज़ा उठने के लिए लाइफस्टाइल बदलनी चाहिए?

बिल्कुल बदलनी चाहिए। बिना लाइफस्टाइल सुधारे आप सुबह की इस सुस्ती को नहीं भगा सकते। दिन भर कुर्सी पर बैठे रहने से हमारा शरीर थककर नहीं, बल्कि जकड़कर कमज़ोर हो जाता है। रोज़ाना कम से कम आधा घंटा पैदल चलना या हल्का व्यायाम करना बहुत ज़रूरी है। जब आप दिन में पसीना बहाते हैं, तो शरीर सच में थकता है और रात को बहुत शानदार गहरी नींद आती है। इसके अलावा, दिन भर में भरपूर पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी होने से भी सारी एनर्जी खत्म हो जाती है। अपनी जीवनशैली को प्रकृति के साथ जोड़ें और समय पर सोएं।

खतरनाक थकान के शुरुआती इशारे कैसे समझें? 

अगर यह थकान किसी बड़ी बीमारी का संकेत है, तो आपका शरीर आपको कुछ खास इशारे ज़रूर देगा।

  • हर वक़्त नींद आना: रात को आठ नौ घंटे सोने के बाद भी अगर दिन भर आपको उबासियां आ रही हैं और  आँखें बंद हो रही हैं।
  • चिड़चिड़ापन और गुस्सा: थकान के कारण दिमाग सही से काम नहीं करता और इंसान हर छोटी बात पर भड़कने लगता है।
  • वज़न का अचानक बढ़ना: अगर बिना ज़्यादा खाए आपका वज़न तेज़ी से बढ़ रहा है और सुबह उठने में जान निकल रही है, तो यह थायरॉयड हो सकता है।
  • मांसपेशियों में दर्द: सुबह उठते ही पिंडलियों में दर्द होना या पूरे बदन में हल्का हल्का दर्द बने रहना अंदरूनी कमज़ोरी की निशानी है।

थकान दूर करने के लिए खानपान में क्या ध्यान रखें?

रात की अच्छी नींद और सुबह की अच्छी एनर्जी सीधा आपके खाने-पीने की आदतों से जुड़ी होती है।

  • रात का खाना हल्का रखें: रात को हमेशा दाल, सूप, या उबली हुई सब्ज़ियां खाएं जो आसानी से पच जाएं और पेट पर भारी न पड़ें।
  • विटामिन डी और बी बारह: शरीर में इन दोनों विटामिन्स की कमी से भयानक थकान होती है। इसलिए सुबह की धूप लें और दूध-दही का सेवन बढ़ाएँ।
  • आयरन वाली चीज़ें: पालक, गुड़, चना और चुकंदर को अपने खाने में शामिल करें ताकि शरीर में नया खून बने और एनर्जी वापस आए।
  • देर रात कुछ न खाएं: रात को भूख लगने पर नमकीन या बिस्कुट खाने से बचें, यह आपकी नींद के हार्मोन को बिगाड़ देता है।

खराब आदतों और तनाव से अपनी एनर्जी कैसे बचाएं?

आज की दुनिया में हम शारीरिक मेहनत कम और दिमागी मेहनत ज़्यादा कर रहे हैं। दिमाग की थकान शरीर की थकान से कहीं ज़्यादा भारी होती है। ऑफिस का तनाव, घर की चिंताएं और हर वक़्त कुछ न कुछ सोचते रहने से हमारी सारी एनर्जी खर्च हो जाती है। अपनी एनर्जी बचाने के लिए ना बोलना सीखें। जो काम ज़रूरी नहीं हैं, उन पर अपना दिमाग न खपाएं। सोने से पहले ध्यान लगाने की आदत डालें। जब आप अपने दिमाग को शांत करना सीख जाएंगे, तो आपकी नींद भी गहरी होगी और आप सुबह एकदम ताज़ा उठेंगे।

थकान दूर न होने पर डॉक्टर से कब मिलें? 

अगर अपनी तरफ से सब कुछ सही करने के बाद भी परेशानी कम न हो, तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाना चाहिए।

  • एक महीने से ज़्यादा थकान: अगर अच्छी नींद और अच्छे खाने के बाद भी आपको लगातार कई हफ्तों से सुबह थकान हो रही है।
  • रोज़ाना सिरदर्द होना: सुबह उठते ही सिर भारी लगना या भयंकर दर्द होना ब्लड प्रेशर का इशारा हो सकता है।
  • खर्राटे और सांस रुकना: अगर आपके घर वाले बताते हैं कि सोते समय आपकी सांस कुछ देर के लिए अटक जाती है।
  • उदासी और डिप्रेशन: अगर थकान के साथ साथ आपको हर वक़्त रोने का मन करता है और किसी काम में दिल नहीं लगता।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक इलाज में क्या फर्क है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य सुबह की थकान या सुस्ती के कारण की पहचान कर उसका उपचार करना। शरीर के संतुलन, दिनचर्या और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाना।
उपचार का तरीका खून की जाँच, थायरॉयड या अन्य ज़रूरी टेस्ट, कारण के अनुसार दवाइयाँ और पोषण संबंधी सलाह। जड़ी-बूटियाँ, संतुलित आहार, दिनचर्या, योग, मालिश और जीवनशैली में सुधार।
समस्या का दृष्टिकोण पोषण की कमी, हार्मोनल बदलाव, नींद की कमी या अन्य चिकित्सकीय कारणों की जाँच की जाती है। व्यक्ति की प्रकृति, पाचन, दिनचर्या और शरीर के संतुलन को ध्यान में रखकर देखभाल की जाती है।
असर होने की गति कारण के अनुसार उपचार शुरू होने पर अपेक्षाकृत जल्दी सुधार मिल सकता है। नियमित पालन के साथ धीरे-धीरे ऊर्जा और समग्र स्वास्थ्य में सुधार पर ध्यान दिया जाता है।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण मूल कारण का उपचार, नियमित फॉलो-अप और स्वस्थ आदतों पर ज़ोर। संतुलित जीवनशैली और नियमित दिनचर्या के माध्यम से लंबे समय तक ऊर्जा और स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल।

निष्कर्ष

सुबह उठते ही थकान महसूस होना कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर की तरफ से एक बहुत बड़ी चेतावनी है। आपका शरीर आपसे कह रहा है कि आप उसके साथ ज़्यादती कर रहे हैं। उसे सही समय पर नींद चाहिए, पौष्टिक खाना चाहिए और दिमाग को थोड़ी शांति चाहिए। अपनी नींद को कभी भी हल्के में न लें। अच्छी नींद दुनिया की सबसे अच्छी और सबसे सस्ती दवा है। आज रात से ही समय पर सोने की आदत डालें, मोबाइल को दूर रखें और फिर देखें कि अगली सुबह आपका शरीर कितनी नई ताक़त और ताज़गी के साथ उठता है।

References

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC12181921/

https://www.sciencedirect.com/science/article/abs/pii/S0022073618304722

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK555522/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

यह खून की कमी, गलत गद्दे पर सोने या शरीर में विटामिन डी की कमी के कारण हो सकता है।

इसका मतलब है कि आप आठ घंटे बिस्तर पर तो थे, लेकिन आपका दिमाग शांत नहीं था और आपको गहरी नींद नहीं आई।

सोने से ठीक पहले बहुत ज़्यादा पानी या चाय-कॉफी पीने से ऐसा होता है। कुछ मामलों में यह शुगर की बीमारी का लक्षण भी हो सकता है।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                    

जी हां, स्क्रीन की नीली रोशनी दिमाग को ऐसा महसूस कराती है जैसे अभी दिन ही है, जिससे नींद लाने वाला हार्मोन बनना बंद हो जाता है।

सुबह उठते ही एक गिलास हल्का गुनगुना पानी पीना सबसे अच्छा है। यह शरीर की सारी गंदगी साफ करके एकदम ताज़गी भर देता है।

अगर आप दिन में आधे घंटे की झपकी लेते हैं तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन दिन में दो तीन घंटे सोने से रात की नींद पक्का खराब हो जाती है।

इसे नसों की कमज़ोरी कहते हैं। यह शरीर में आयरन या विटामिन बी बारह की भारी कमी के कारण होता है।

बिल्कुल नहीं। खर्राटे आना गले की नसों के सिकुड़ने की निशानी है, जो आगे चलकर दिल की बीमारियों का कारण बन सकता है।

दिमाग हमारे शरीर की बहुत ज़्यादा एनर्जी खर्च करता है। जब हम फालतू सोचते हैं, तो दिमाग थक जाता है और पूरा शरीर कमज़ोर लगने लगता है।

जी हां, अगर बच्चे जंक फूड ज़्यादा खाते हैं, बाहर खेलने नहीं जाते और देर रात तक टीवी देखते हैं, तो उन्हें भी सुबह उठने में भारी थकान होती है।

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