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क्या आपका स्क्रीन टाइम आपकी आँखों के साथ-साथ आपके 'पित्त' को भी बढ़ा रहा है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आज की डिजिटल ज़िंदगी में हमारा अधिकांश वक़्त मोबाइल, लैपटॉप या टीवी की स्क्रीन के सामने बीतता है। आँखों में जलन, सूखापन और थकान अब एक आम समस्या बन चुकी है, जिसे हम 'डिजिटल आई स्ट्रेन' कहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि स्क्रीन से निकलने वाली यह 'नीली रोशनी' Blue Light केवल आपकी दृष्टि को ही नहीं, बल्कि आपके शरीर के आंतरिक 'पित्त' दोष को भी भड़का रही है? आँखों का सीधा संबंध हमारे शरीर की गर्मी और पित्त से होता है। समय पर इसका इलाज करना इसलिए बेहद ज़रूरी है क्योंकि आँखों की अनदेखी आगे चलकर दृष्टि की स्थायी कमज़ोरी, गंभीर सिरदर्द और मानसिक तनाव का कारण बन सकती है।

डिजिटल आई स्ट्रेन क्या होता है?

इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझें तो, जब हम बहुत लंबे समय तक बिना पलकें झपकाए किसी डिजिटल स्क्रीन को देखते हैं, तो हमारी आँखों की मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। हमारी आँखें प्राकृतिक रूप से दूर और पास की चीज़ों को देखने के लिए बनी हैं, लेकिन स्क्रीन पर लगातार फोकस करने से आँखों के भीतर की नमी सूखने लगती है। सरल शब्दों में, यह आँखों की थकान की वह स्थिति है जहाँ आपकी आँखें 'ओवरहीट' हो जाती हैं और उन्हें आराम की सख़्त ज़रूरत होती है।

आँखों की समस्याओं के विभिन्न प्रकार

स्क्रीन टाइम के कारण होने वाली दिक़्क़तों को इन पाँच श्रेणियों में बाँटा जा सकता है

सूखी आँखें Dry Eyes आँखों में नमी की कमी होना और ऐसा महसूस होना जैसे आँखों में रेत चुभ रही हो।

दृष्टि का धुंधलापन स्क्रीन से नज़र हटाने के बाद दूर की चीज़ों को साफ़ देखने में दिक़्क़त महसूस होना।

आंखों का तनाव आँखों के गोलों में भारीपन और पीछे की नसों में खिंचाव महसूस होना।

दोहरी दृष्टि Double Vision थकान के कारण एक ही चीज़ की दो आकृतियाँ दिखाई देना।

कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम यह वह स्थिति है जहाँ आँखों के साथ-साथ गर्दन और कंधों में भी जकड़न होने लगती है।

शरीर में दिखने वाले मुख्य लक्षण

आँखों में लालिमा और जलन आँखों का रंग गुलाबी या लाल होना और हर वक़्त जलन महसूस होना।

बार-बार पानी आना थकान की वजह से आँखें खुद को गीला रखने के लिए ज़्यादा पानी छोड़ने लगती हैं।

तेज़ सिरदर्द विशेष रूप से माथे के बीच और आँखों के ठीक ऊपर होने वाला दर्द।

प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता अचानक तेज़ रोशनी या धूप में जाने पर आँखों का चौंधिया जाना।

एकाग्रता में कमी पढ़ते समय अक्षरों का तैरता हुआ महसूस होना और ध्यान न लगा पाना।

 आँखों में पित्त और तनाव बढ़ने के मुख्य कारण

पलकें कम झपकाना स्क्रीन देखते समय हम सामान्य से बहुत कम बार पलकें झपकाते हैं, जिससे लुब्रिकेशन खत्म हो जाता है।

नीली रोशनी का प्रभाव डिजिटल स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी आँखों के 'रेटिना' को नुकसान पहुँचाती है और पित्त बढ़ाती है।

गलत दूरी और लाइट अंधेरे कमरे में बहुत तेज़ ब्राइटनेस के साथ मोबाइल का उपयोग करना सबसे नुकसानदेह है।

अधूरी नींद रात में मोबाइल चलाकर नींद में कटौती करना आँखों की रिकवरी प्रक्रिया को रोक देता है।

मसालेदार भोजन आयुर्वेद के अनुसार, बहुत ज़्यादा मिर्च-मसाले खाना शरीर की गर्मी बढ़ाकर आँखों की जलन को और तेज़ करता है।

जोखिम बढ़ाने वाले कारण और जटिलताएं

 जोखिम बढ़ाने वाले 5 प्रमुख कारण

 डेस्क जॉब वाले पेशेवर जो लोग दिन में 8-9 घंटे कंप्यूटर पर काम करते हैं।

 कांटेक्ट लेंस का उपयोग लेंस पहनने वालों में आँखों के सूखने का ख़तरा ज़्यादा होता है।

 कम रोशनी में पढ़ना कम रोशनी में आँखों को फोकस करने के लिए ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

 उम्र का बढ़ना उम्र के साथ आँखों की प्राकृतिक नमी कम होने लगती है।

 पंखे या ए.सी. की सीधी हवा आँखों के सामने सीधी हवा चलने से आँसू तेज़ी से सूख जाते हैं।

होने वाली 5 गंभीर जटिलताएं

दृष्टि की स्थायी कमज़ोरी लंबे समय तक तनाव रहने से चश्मे का नंबर तेज़ी से बढ़ सकता है।

क्रॉनिक माइग्रेनआँखों का तनाव गंभीर और बार-बार होने वाले सिरदर्द में बदल सकता है।

नींद का विकार Insomnia नीली रोशनी 'मेलाटोनिन' हार्मोन को रोकती है, जिससे नींद गायब हो जाती है।

आँखों का संक्रमण सूखी आँखों में बैक्टीरिया के पनपने का ख़तरा ज़्यादा रहता है।

मानसिक चिड़चिड़ापन आँखों की थकान व्यक्ति के व्यवहार को चिड़चिड़ा और थका हुआ बना देती है।

आँखों की जाँच कैसे की जाती है?

दृष्टि परीक्षण Visual Acuity चार्ट पढ़वाकर यह देखना कि आपकी नज़र कितनी साफ़ है।

स्लिट लैंप जाँच आँखों की ऊपरी सतह और कॉर्निया की गहराई से जाँच करना।

आँसू परीक्षण Schirmer Test यह मापने के लिए कि आपकी आँखें पर्याप्त नमी बना रही हैं या नहीं।

रिफ्रैक्शन टेस्ट आँखों के फोकस और चश्मे की ज़रूरत को मापने के लिए।

नाड़ी और पित्त परीक्षण आयुर्वेदिक डॉक्टर यह देखते हैं कि शरीर में बढ़ी हुई गर्मी पित्त का स्तर क्या है।

आयुर्वेद में आँखों का स्वास्थ्य और 'पित्त' का संबंध

आयुर्वेद में आँखों को 'आलोचक पित्त' का स्थान माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है "सर्वेन्द्रियाणां नयनं प्रधानम्" सभी इंद्रियों में आँखें श्रेष्ठ हैं।

आलोचक पित्त यह वह शक्ति है जो हमें देखने में मदद करती है। बहुत ज़्यादा स्क्रीन देखने से यह पित्त 'भड़क' जाता है।

दृष्टि और ऊष्मा आँखें अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं। जब हम स्क्रीन की गर्मी कृत्रिम रोशनी के संपर्क में आते हैं, तो आँखों का स्नेहक Lubrication यानी 'तर्पक कफ' सूख जाता है, जिससे जकड़न और जलन होती है।

वात का हस्तक्षेप आँखों के सूखने से वायु दोष वात भी बढ़ता है, जो आँखों में दर्द और चुभन पैदा करता है।

काम आने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

त्रिफला यह आँखों के लिए अमृत के समान है, जो दृष्टि को साफ़ करता है और विषाक्त पदार्थों को हटाता है।

यष्टिमधु मुलेठी यह अपने शीतल गुणों से आँखों की जलन और पित्त को शांत करने में मदद करती है।

आमलकी आंवला विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर, यह आँखों की नसों को मज़बूत बनाता है।

पुनर्नवा आँखों की सूजन और भारीपन को कम करने के लिए यह एक बेहतरीन औषधि है।

आयुर्वेदिक थेरेपी और पंचकर्म

 अक्षि तर्पण यह आँखों के लिए सबसे प्रभावी थेरेपी है। इसमें उड़द के आटे का घेरा बनाकर आँखों पर गुनगुना घी डाला जाता है, जिससे आँखों को पोषण मिलता है, सूखापन कम होता है और दृष्टि में सुधार होता है।

औषधीय घी  जैसे त्रिफला घृत भरा जाता है। यह आँखों के सूखेपन को जड़ से खत्म करता है।

 नेत्रधारा औषधीय काढ़े से आँखों को धोना, जो तत्काल ठंडक और आराम पहुँचाता है।

 पादाभ्यंग पैरों के तलवों की घी या तेल से मालिश, जो आँखों की गर्मी को नीचे की ओर खींचकर शांत करती है।

क्या खाएं और क्या न खाएं 

 क्या खाएं

 गाय का घी संतुलित मात्रा में घी का सेवन आँखों की चिकनाई बनाए रखने के लिए बेहद ज़रूरी है।

 विटामिन-ए युक्त भोजन गाजर, हरी पत्तेदार सब्जियाँ और कद्दू जो दृष्टि के लिए बेहतर हैं।

 ठंडी तासीर वाले फल अनार और मीठे अंगूर जो पित्त को संतुलित रखते हैं।

 क्या न खाएं

  अत्यधिक तीखा भोजन लाल मिर्च और गरम मसालों से बचें क्योंकि ये 'आलोचक पित्त' को भड़काते हैं।

  नमक का ज़्यादा प्रयोग अधिक नमक शरीर में पानी की कमी करता है और आँखों में जलन बढ़ाता है।

  कैफीन चाय और कॉफी का ज़्यादा सेवन शरीर को डिहाइड्रेट करता है, जिसका असर आँखों पर दिखता है।

 ठीक होने में कितना समय लग सकता है? 

आँखों की समस्या के सुधार में लगने वाला समय आपकी वर्तमान स्थिति और अनुशासन पर निर्भर करता है

 प्रथम 15 दिन आयुर्वेदिक आई ड्रॉप्स और आहार में बदलाव से आँखों की लालिमा और जलन में तत्काल फ़ायदा महसूस होने लगता है। आँखों का भारीपन कम होने लगता है।

 1 से 2 महीने यदि आप 'अक्षि तर्पण' जैसी थेरेपी लेते हैं, तो आँखों का सूखापन 60-70% तक कम हो जाता है। आँखों के पीछे होने वाला सिरदर्द और धुंधलापन काफी हद तक स्थिर होने लगता है।

 3 महीने और उससे अधिक नसों की मज़बूती और दृष्टि में स्पष्टता आने में समय लगता है। नियमित रूप से त्रिफला और घी का सेवन करने से आँखों की रोशनी सुरक्षित रहती है और भविष्य में चश्मे का नंबर बढ़ने की संभावना कम हो जाती है। यह एक सतत प्रक्रिया है, क्योंकि स्क्रीन का उपयोग आजकल की ज़िंदगी का अनिवार्य हिस्सा है।

इलाज से क्या फ़ायदा मिल सकता है? 

प्राकृतिक नमी की बहाली आँखों में ड्रॉप्स डालने की बार-बार की ज़रूरत खत्म हो जाती है और आँखें खुद को गीला रखने में सक्षम होती हैं।

दृष्टि में स्पष्टता आँखों की थकान हटने से चीज़ें ज़्यादा साफ़ और स्पष्ट दिखाई देने लगती हैं।

सिरदर्द से मुक्ति आँखों के तनाव से होने वाले पुराने सिरदर्द और माइग्रेन के हमलों में भारी गिरावट आती है।

पित्त का संतुलन शरीर की आंतरिक गर्मी कम होने से आँखों की जलन के साथ-साथ एसिडिटी और चिड़चिड़ेपन में भी आराम मिलता है।

नींद की गुणवत्ता आँखों और मन को ठंडक मिलने से गहरी और सुकून भरी नींद आने लगती है, जो शरीर की रिकवरी के लिए ज़रूरी है।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर?

विशेषता आधुनिक इलाज आयुर्वेदिक इलाज
तरीका मुख्य रूप से लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स कृत्रिम आँसू का उपयोग होता है। यह 'तर्पण' और जड़ी-बूटियों से आँखों की प्राकृतिक नमी को बहाल करता है।
प्रभाव इसका असर अस्थायी होता है और बार-बार ड्रॉप्स डालने की ज़रूरत पड़ती है। यह नसों को भीतर से पोषण देकर दृष्टि और आँखों के स्वास्थ्य में स्थायी सुधार लाने का प्रयास करता है।
दृष्टिकोण केवल आँखों के लक्षणों का इलाज करता है। यह शरीर की गर्मी पित्त और पाचन को संतुलित कर समग्र सुधार पर ज़ोर देता है।

निष्कर्ष

आपका स्क्रीन टाइम आपकी आँखों के लिए केवल एक शारीरिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह आपके 'पित्त' दोष के संतुलन को भी बिगाड़ रहा है। आँखों की उपेक्षा करना आपकी आने वाली ज़िंदगी के रंगों को धुंधला कर सकता है। आयुर्वेद का होलीस्टिक हीलिंग नज़रिया आपको न केवल तकनीक के दुष्प्रभावों से बचाता है, बल्कि आपकी आँखों को वह प्राकृतिक शीतलता और पोषण देता है जिसकी उन्हें सख़्त ज़रूरत है। स्क्रीन से ब्रेक लें, आँखों को आराम दें और आयुर्वेद के साथ अपनी दृष्टि को सुरक्षित बनाएं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, हर 20 मिनट बाद 20 फीट दूर 20 सेकंड के लिए देखना आँखों की मांसपेशियों को आराम देता है।

हाँ, लेकिन त्रिफला के पानी को कपड़े से अच्छी तरह छानना बेहद ज़रूरी है ताकि कोई कण आँखों को नुकसान न पहुँचाए।

शुद्ध गुलाब जल की तासीर ठंडी होती है जो पित्त को शांत करने में बहुत मदद करती है।

हाँ, यह नीली रोशनी के प्रभाव को कम करता है और आँखों पर दबाव को थोड़ा घटाता है।

आयुर्वेद के अनुसार, गाय का घी 'चक्षुष्य' (आँखों के लिए हितकारी) है और यह नसों को मज़बूत बनाता है।

यह नीली रोशनी को कुछ हद तक रोकता है, लेकिन आँखों को प्राकृतिक आराम देना और पित्त शांत करना ज़्यादा महत्वपूर्ण है।

बिल्कुल, पित्त बढ़ने और आँखों के थकने से मस्तिष्क शांत नहीं हो पाता, जिससे अनिद्रा होती है।

बच्चों की आँखें बहुत कोमल होती हैं, ज़्यादा स्क्रीन टाइम उनकी दृष्टि के विकास को बाधित कर सकता है।

हाँ, सुबह ओस वाली घास पर चलने से शरीर की गर्मी शांत होती है जिसका सीधा प्रभाव आँखों पर पड़ता है।

जीवा में 'अक्षि तर्पण' विशेष रूप से आँखों के सूखेपन और कमज़ोरी को दूर करने के लिए किया जाता है।

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