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Liver Function Test में SGOT -SGPT बढ़े हुए - कब Worry करें?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 18 May, 2026
  • category-iconUpdated on 13 Jun, 2026
  • category-iconLiver and Gall
  • blog-view-icon5069

लिवर हमारे शरीर का एक बहुत ही खास हिस्सा है। आप इसे शरीर का फिल्टर कह सकते हैं। इसका काम खून को साफ करना, खाने को पचाना, शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालना और हमारी एनर्जी को बैलेंस रखना है। लेकिन ज़रा सोचिए, जब इस पर काम का बोझ ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ जाए या किसी वजह से इसकी काम करने की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ जाए, तो क्या होगा? ऐसे में खून के अंदर कुछ खास एंजाइम्स का लेवल बढ़ जाता है।

इनमें से दो सबसे अहम नाम हैं: SGOT और SGPT। जब भी हम लिवर की सेहत चेक कराते हैं, तो अक्सर इन्हीं दोनों को देखा जाता है। अब दिक़्क़त ये है कि लोग इनकी बढ़ी हुई रिपोर्ट देखते ही एकदम घबरा जाते हैं। सच तो ये है कि इनका बढ़ना हर बार किसी भयानक बीमारी का इशारा नहीं होता। कई बार सिर्फ उल्टे-सीधे खान-पान, किसी दवा के साइड-इफेक्ट, शराब पीने या शरीर में हल्की-फुल्की सूजन की वजह से भी ये बढ़ जाते हैं। इसलिए रिपोर्ट देखकर डरने के बजाय यह समझना ज़रूरी है कि शरीर आखिर ऐसा बर्ताव क्यों कर रहा है। जब असली वजह पकड़ में आ जाएगी, तभी सही इलाज तय हो पाएगा।

SGOT और SGPT क्या होते हैं और ये क्यों बढ़ते हैं?

SGOT और SGPT खास तरह के एंजाइम होते हैं जो लिवर की सेहत का हाल बताते हैं। लिवर फंक्शन टेस्ट में सबसे पहले इन्हीं पर नज़र डाली जाती है। अगर इनका लेवल बढ़ा हुआ आ रहा है, तो इसका सीधा मतलब है कि आपके लिवर पर किसी चीज़ का बहुत ज़्यादा दबाव पड़ रहा है।

अगर हम SGOT की बात करें, तो यह सिर्फ आपके लिवर में ही नहीं मिलता। यह दिल, मांसपेशियों और शरीर के कुछ दूसरे हिस्सों में भी होता है। इसलिए जब शरीर के इन अंगों में कोई अंदरूनी खिंचाव, तनाव या चोट लगती है, तब भी इसका लेवल बढ़ जाता है। यानी यह सिर्फ लिवर की नहीं, बल्कि पूरे शरीर की अंदरूनी थकावट या स्ट्रेस का संकेत देता है।

दूसरी तरफ आता है SGPT। यह एंजाइम खास तौर पर सिर्फ लिवर की कोशिकाओं (सेल्स) के अंदर ही पाया जाता है। अगर रिपोर्ट में यह बढ़ा हुआ है, तो यह सीधा और पक्का इशारा है कि आपके लिवर पर सीधा असर पड़ रहा है या वहां कोई सूजन आ गई है। इसी वजह से इसे लिवर की सेहत नापने का सबसे सटीक पैमाना माना जाता है।

लिवर फंक्शन टेस्ट में क्या देखा जाता है?

लिवर फंक्शन टेस्ट (जिसे हम LFT भी कहते हैं) सिर्फ एक-दो नंबरों की रिपोर्ट नहीं है। यह पूरे लिवर का एक डिटेल चेकअप है जिससे यह पता चलता है कि आपका लिवर अंदर से कितना मजबूत है और कैसे काम कर रहा है। इस टेस्ट में कई चीज़ें एक साथ देखी जाती हैं। पहला तो यही चेक होता है कि एंजाइम्स (जैसे SGOT, SGPT) का लेवल क्या है, ताकि लिवर के तनाव का पता चले। दूसरा, पित्त (Bile) का काम देखा जाता है जिससे ये समझ आता है कि आपका शरीर टॉक्सिन्स को बाहर निकाल पा रहा है या नहीं और आपका पाचन कैसा चल रहा है। इसके अलावा, हमारा लिवर शरीर के लिए ज़रूरी प्रोटीन बनाता है, टेस्ट में यह भी चेक होता है कि लिवर अपना ये काम ठीक से कर पा रहा है या नहीं। साथ ही, शरीर की एनर्जी और मेटाबॉलिज्म की पूरी प्रक्रिया की जांच भी इसी टेस्ट के ज़रिए हो जाती है।

क्या हमेशा High SGOT-SGPT खतरनाक होते हैं?

बिल्कुल नहीं! हर बार इन एंजाइम्स का बढ़ना खतरनाक नहीं होता। कई बार शरीर में होने वाले छोटे-मोटे और कुछ वक्त के बदलावों की वजह से भी इनकी वैल्यू ऊपर भाग जाती है। अगर आप थोड़ा आराम करें, खान-पान सुधार लें और थोड़ा समय दें, तो ये खुद-ब-खुद नॉर्मल हो जाते हैं। इसलिए सिर्फ एक रिपोर्ट के नंबर देखकर डर जाना कोई समझदारी नहीं है, पूरी बात को समझना ज़्यादा ज़रूरी है।

ये एंजाइम कई मामूली वजहों से भी बढ़ सकते हैं। जैसे, अगर आपको हाल ही में कोई इन्फेक्शन या बुखार हुआ हो, आपने जिम में बहुत भारी वर्कआउट कर लिया हो, या फिर पिछले कुछ दिनों से लगातार बाहर का बहुत ज़्यादा तला-भुना खा लिया हो। कई बार शरीर में हल्की सूजन या स्ट्रेस होने से भी लिवर पर कुछ समय के लिए लोड आ जाता है, जिसकी वजह से रिपोर्ट में SGOT और SGPT का लेवल बढ़कर आ जाता है।

लिवर एंजाइम बढ़ने के सामान्य कारण क्या हो सकते हैं?

लिवर एंजाइम जैसे SGOT और SGPT का बढ़ना अक्सर शरीर में चल रही किसी अंदरूनी असंतुलन या लिवर पर पड़ रहे दबाव का संकेत हो सकता है। कई बार यह स्थिति गंभीर नहीं होती, लेकिन लगातार गलत आदतें और लाइफस्टाइल इसे प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए इसके कारणों को समझना जरूरी है।

लिवर एंजाइम बढ़ने के सामान्य कारण:

  • तैलीय और भारी भोजन का अधिक सेवन: लगातार ज्यादा फैटी या जंक फूड खाने से लिवर पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
  • मोटापा: शरीर में बढ़ा हुआ फैट लिवर की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है और एंजाइम लेवल बढ़ा सकता है।
  • शराब का सेवन: अल्कोहल लिवर कोशिकाओं पर सीधा असर डाल सकता है और समय के साथ नुकसान बढ़ा सकता है।
  • वायरल संक्रमण: कुछ वायरल संक्रमण लिवर को प्रभावित कर सकते हैं और एंजाइम बढ़ा सकते हैं।
  • कुछ दवाओं का असर: लंबे समय तक या जरूरत से कुछ दवाएं लेने से लिवर पर स्ट्रेस आ सकता है।
  • निष्क्रिय जीवनशैली: शारीरिक गतिविधि की कमी से मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है, जिससे लिवर पर असर पड़ता है।

लिवर एक मजबूत और सहनशील अंग है, लेकिन लगातार गलत आदतें और लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव इसकी कार्यक्षमता को धीरे-धीरे प्रभावित कर सकता है।

शुरुआती लक्षण जिन्हें लोग अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं

लिवर से जुड़ी समस्या की शुरुआत अक्सर बहुत हल्के और सामान्य लगने वाले संकेतों से होती है, जिन्हें लोग रोजमर्रा की थकान या लाइफस्टाइल का हिस्सा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन धीरे-धीरे ये संकेत शरीर में अंदरूनी असंतुलन की ओर इशारा कर सकते हैं।

शुरुआती लक्षण:

  • थकान महसूस होना: बिना ज्यादा काम किए भी शरीर में कमजोरी और एनर्जी की कमी महसूस हो सकती है।
  • भूख कम लगना: खाने में रुचि धीरे-धीरे कम होने लगती है और appetite बदल सकता है।
  • पेट में भारीपन: हल्का खाना खाने के बाद भी पेट भरा-भरा और असहज लग सकता है।
  • त्वचा का फीका या डल दिखना: शरीर की अंदरूनी सफाई प्रभावित होने पर skin dull दिख सकती है।
  • कभी-कभी जी मिचलाना: हल्की nausea की स्थिति भी समय-समय पर महसूस हो सकती है।

इन संकेतों को अक्सर सामान्य थकान समझ लिया जाता है, लेकिन अगर ये लगातार बने रहें तो शरीर की गहराई से जांच जरूरी हो सकती है।

कब यह स्थिति गंभीर बन जाती है?

लिवर के एंजाइम का थोड़ा-बहुत ऊपर-नीचे होना कई बार महज़ कुछ दिनों की बात होती है। लेकिन अगर कुछ परेशानियां लगातार बनी हुई हैं या बढ़ती ही जा रही हैं, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह इस बात का साफ इशारा है कि शरीर के अंदर कुछ बड़ा गड़बड़ हो रहा है और अब तुरंत जांच करवाना ज़रूरी हो गया है।

अगर ये बातें नज़र आएं, तो तुरंत ध्यान दें:

  • अगर आपके ब्लड टेस्ट में बार-बार SGOT और SGPT का लेवल हाई आ रहा है, तो इसका सीधा मतलब है कि लिवर पर लगातार कोई न कोई भारी दबाव पड़ रहा है।
  • आंखों का सफेद हिस्सा या आपकी स्किन का रंग पीला पड़ने लगे, तो यह पीलिया का लक्षण है। यह बताता है कि लिवर अपना फिल्टर करने वाला काम ठीक से नहीं कर पा रहा है।
  • पेट के ऊपरी हिस्से में लगातार दर्द या अजीब सा भारीपन महसूस होना भी एक बड़ा संकेत है कि लिवर या उसके आस-पास के हिस्से में कुछ दिक़्क़त पनप रही है।
  • अगर पैरों में या पेट पर बिना वजह सूजन दिखने लगे, तो समझ लीजिए कि शरीर के अंदर पानी और तरल पदार्थों का बैलेंस बुरी तरह बिगड़ गया है।

ऐसी किसी भी स्थिति में घर पर इंतज़ार करने या घरेलू नुस्खे आज़माने के बजाय तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए, ताकि समय रहते सही वजह पकड़ी जा सके।

किन लोगों को ज़्यादा संभलकर रहने की ज़रूरत है?

कुछ लोगों में लिवर के एंजाइम बिगड़ने का खतरा दूसरों के मुकाबले कहीं ज़्यादा होता है। खास तौर पर तब, जब आपका रोज़मर्रा का रूटीन या सेहत लिवर पर एक्स्ट्रा काम का बोझ डाल रही हो। ऐसे लोगों की रिपोर्ट में अक्सर ये एंजाइम्स ऊपर-नीचे होते देखे जाते हैं।

इन स्थितियों में लिवर पर सबसे ज़्यादा असर पड़ता है:

  • जिन लोगों का वजन ज़रूरत से ज़्यादा है, उनके शरीर की एक्स्ट्रा चर्बी (फैट) लिवर पर भी चढ़ने लगती है, जिससे लिवर सुस्त पड़ जाता है।
  • अगर किसी को शुगर या डायबिटीज की परेशानी है, तो ब्लड शुगर के ऊपर-नीचे होने से लिवर का मेटाबॉलिज्म सीधे तौर पर कमज़ोर होने लगता है।
  • जो लोग रोज़ाना या बहुत ज़्यादा शराब पीते हैं, उनके लिवर की कोशिकाओं (सेल्स) को सीधा और बहुत गहरा नुकसान पहुंचता है।
  • दिन भर सिर्फ कुर्सी पर बैठे रहने और कोई भी फिजिकल काम या एक्सरसाइज न करने से शरीर का पूरा सिस्टम धीमा पड़ जाता है, जिसका सारा लोड लिवर पर आता है।
  • जो लोग हर वक्त बहुत ज़्यादा स्ट्रेस या टेंशन में रहते हैं, उनके शरीर के हॉर्मोन्स इस कदर बिगड़ते हैं कि इसका सीधा असर लिवर के काम करने की क्षमता पर पड़ता है।

अगर आपका रूटीन भी कुछ ऐसा ही है, तो सिर्फ रिपोर्ट देखकर घबराने के बजाय अपनी लाइफस्टाइल और खान-पान को सुधारना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

आयुर्वेद में लिवर को कैसे देखा जाता है?

आयुर्वेद में लिवर को “यकृत” कहा जाता है, जिसे शरीर में पित्त दोष का मुख्य स्थान माना जाता है। यह अंग शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने, भोजन को ऊर्जा में बदलने और शरीर से विषैले तत्वों को प्रोसेस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही यह रक्त को शुद्ध रखने की प्रक्रिया में भी सहयोग करता है।

जब शरीर में पित्त दोष असंतुलित हो जाता है, तो यकृत की कार्यक्षमता पर असर पड़ सकता है। पित्त बढ़ने की स्थिति में शरीर में गर्मी बढ़ना, सूजन की प्रवृत्ति, एसिडिटी और जलन जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। ऐसे में लिवर पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है, जिससे एंजाइम स्तर में बदलाव देखने को मिल सकता है।

आयुर्वेद में लिवर के इलाज का नज़रिया

आयुर्वेद में लिवर की दिक़्क़त को सिर्फ़ रिपोर्ट में बढ़े हुए एंजाइम्स के तौर पर नहीं देखा जाता। इसका सीधा संबंध आपके कमज़ोर हाज़मे, सुस्त मेटाबॉलिज्म, भड़के हुए पित्त दोष और शरीर के अंदर जमा हो रहे ज़हरीले कचरे से है। इसलिए इलाज का असली मकसद सिर्फ नंबर्स को घटाना नहीं, बल्कि पूरे शरीर को अंदर से दुरुस्त करना होता है।

  • पाचन शक्ति (अग्नि) को जगाना: जब हाज़मा कमज़ोर होता है, तो पेट में गंदगी और टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। इसीलिए सबसे पहला ध्यान आपकी पाचक अग्नि को ठीक करने पर दिया जाता है।
  • पित्त दोष को काबू में लाना: लिवर का सीधा नाता पित्त से है। अगर शरीर में पित्त बढ़ेगा, तो लिवर में गर्मी, सूजन और जलन पैदा होगी। आयुर्वेद इस बढ़ी हुई गर्मी को शांत करता है।
  • 'आम' यानी ज़हरीले तत्वों को साफ़ करना: शरीर के अंदर जमा अनपचा भोजन या कचरा (जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं) लिवर पर सबसे ज़्यादा बोझ डालता है। इसलिए शरीर की अंदरूनी सफ़ाई बहुत ज़रूरी है।
  • किडनी और डिटॉक्स सिस्टम को ताक़त देना: लिवर का बोझ कम करने के लिए शरीर के नेचुरल डिटॉक्स सिस्टम और किडनी को सहारा दिया जाता है, ताकि सारी गंदगी आसानी से बाहर निकल सके।
  • खान-पान और लाइफस्टाइल में सुधार: बिना समय खाना, बहुत ज़्यादा तला-भुना खाना और कम पानी पीना लिवर को बीमार करता है। इसीलिए एक सादा और सही रूटीन अपनाने की सलाह दी जाती है।

लिवर में असरदार आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

ये देसी जड़ी-बूटियां लिवर की सिर्फ ऊपरी साफ-सफाई करके नहीं छोड़ देतीं। इनका असली टारगेट होता है लिवर पर बैठी उस सालों पुरानी जिद्दी चर्बी को काटना और उसे वापस एक नई मशीन जैसा बना देना:

  • कुटकी: जब बात हाज़मे की आती है, तो कुटकी किसी बड़े वरदान से कम नहीं लगती। लिवर के ऊपर जो मोटी चर्बी जम जाती है, उसे गलाने और लिवर के फंक्शन को दोबारा सेट करने में कुटकी का वाकई कोई मुकाबला नहीं है।
  • कालमेघ: यह स्वाद में आपको भले ही बहुत कड़वा लगे, लेकिन लिवर को अंदर से डिटॉक्स करने का यह सबसे सॉलिड तरीका माना जाता है। यह सारी सूजन को उतार देता है और लिवर को बिल्कुल नया और साफ़ कर देता है।
  • त्रिफला: अगर आपका पेट साफ़ रहेगा तो लिवर भी हेल्दी बना रहेगा। आंतों में सालों से फंसी गंदगी को बाहर निकालने और कब्ज़ जैसी चिड़चिड़ी दिक्कत को जड़ से मिटाने के लिए त्रिफला एक बहुत ही पुराना और आज़माया हुआ नुस्खा है।
  • गिलोय: गिलोय को सिर्फ बुखार उतारने या इम्युनिटी बढ़ाने तक सीमित मत समझिए। यह फैटी लिवर की सूजन को भी बहुत तेज़ी से खींचने की ताकत रखती है। यह लिवर को अंदर से इतना फौलादी बना देती है कि वह जल्दी दोबारा बीमार न पड़े।

लिवर को रिलैक्स करने वाली कमाल की आयुर्वेदिक थेरेपी 

हमारी दादियों-नानियों के ज़माने के इन परखे हुए तरीकों का बस एक ही काम है पूरे शरीर को अंदर से नहला-धुला कर एकदम नया कर देना:

  • पंचकर्म: ये खून और शरीर के कोने-कोने से ज़हरीली गंदगी को निचोड़ लेता है, जिससे लिवर का सारा लोड तुरंत खत्म हो जाता है।
  • विरेचन: ये शरीर की ऐसी डीप-क्लीनिंग है जो बेकाबू हो चुके पित्त की गर्मी को शांत कर देती है। एक बार ये हो जाए, तो लिवर की सफाई और चर्बी गलने की स्पीड अपने आप डबल हो जाती है।
  • उद्वर्तन (सूखे पाउडर से रगड़ाई): इसमें जड़ी-बूटियों वाले चूर्ण से पूरे बदन की ज़ोरदार रगड़ाई की जाती है। सच बताऊं तो जो चर्बी बिल्कुल पत्थर बन चुकी है, उसे तोड़ने का इससे बढ़िया कोई आयुर्वेदिक जुगाड़ नहीं है।
  • अभ्यंग (तेल की मालिश): जब जड़ी-बूटियों वाले हल्के गुनगुने तेल से बदन की चंपी होती है, तो शरीर का ब्लड सर्कुलेशन एकदम फास्ट हो जाता है। और इसी तेज़ खून के बहाव का सीधा फायदा थके हुए लिवर को जल्दी रिकवर होने में मिलता है।

लिवर में सहायक आहार

सही आहार लिवर पर पड़ने वाले दबाव को कम करने और उसकी कार्यक्षमता को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है।

क्या खाएं?

  • ताजा और हल्का भोजन
  • हरी सब्जियां और मौसमी फल
  • मूंग दाल और सुपाच्य भोजन
  • पर्याप्त पानी और नारियल पानी
  • हल्के और घर के बने भोजन
  • सीमित मात्रा में घी

क्या न खाएं?

  • बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन
  • अत्यधिक मसालेदार खाना
  • शराब और धूम्रपान
  • पैकेट बंद और प्रोसेस्ड फूड
  • बहुत ज्यादा मीठे पेय
  • लंबे समय तक खाली पेट रहना

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मुझे लिवर सिरोसिस की समस्या डायग्नोज़ हुई थी, जिसके बाद मुझे इंफेक्शन भी हो गया। चलने में दिक्कत, खाने में परेशानी और कब्ज जैसी समस्याएँ बढ़ती चली गईं। मैं एक प्राइवेट हॉस्पिटल में 5 दिन भर्ती भी रहा, लेकिन वहाँ से कोई खास आराम नहीं मिला।

इसके बाद मैंने डॉ. प्रताप चौहान का कार्यक्रम देखा और दोस्तों से बात करने के बाद जीवा आयुर्वेद आने का निर्णय लिया। यहाँ मुझे पहले 10 दिनों के लिए पंचकर्म उपचार दिया गया। धीरे-धीरे थेरेपी के साथ मुझे बिना ज्यादा दवाइयों के काफी बेहतर महसूस होने लगा। यहाँ का स्टाफ, वातावरण और लाइफस्टाइल बहुत अच्छे हैं। आज मैं पहले से काफी बेहतर महसूस करता हूँ और मेरी स्थिति में सुधार हुआ है। 

कब डॉक्टर से सलाह लें?

लिवर एंजाइम (SGOT-SGPT) को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, खासकर जब लक्षण लगातार बने रहें या बढ़ने लगें।

  • लगातार थकान और कमजोरी बढ़ना
  • आंखों या त्वचा में पीलापन (जॉन्डिस) दिखाई देना
  • पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द या भारीपन
  • भूख बहुत कम हो जाना या लगातार मतली रहना
  • शरीर या पैरों में सूजन आना
  • बार-बार उल्टी या बेचैनी महसूस होना
  • रिपोर्ट में एंजाइम लगातार high बने रहना
  • आराम और खानपान सुधार के बाद भी लक्षणों में सुधार न होना

निष्कर्ष

SGOT और SGPT का बढ़ना केवल एक रिपोर्ट वैल्यू नहीं है, बल्कि यह लिवर पर पड़ रहे दबाव और शरीर के अंदरूनी संतुलन का संकेत हो सकता है। आधुनिक चिकित्सा इसे लिवर एंजाइम बढ़ने और संभावित लिवर स्ट्रेस के रूप में देखती है, जबकि आयुर्वेद इसे मुख्य रूप से पित्त दोष असंतुलन, कमजोर पाचन और शरीर में विषैले तत्वों के जमाव से जोड़कर समझता है।

अनियमित खानपान, तैलीय भोजन, शराब, तनाव और निष्क्रिय जीवनशैली इस स्थिति को और बढ़ा सकते हैं। इसलिए केवल रिपोर्ट को सामान्य करने के बजाय शरीर के अंदरूनी कारणों को समझकर पाचन, दिनचर्या और जीवनशैली को संतुलित करना लंबे समय तक लिवर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हर बार हल्का बढ़ा हुआ SGOT-SGPT तुरंत इलाज की जरूरत नहीं बताता। कई बार यह अस्थायी कारणों जैसे थकान, डाइट में बदलाव या हल्के संक्रमण से भी बढ़ सकता है। सही समय पर दोबारा टेस्ट और डॉक्टर की सलाह लेना ज्यादा उचित होता है। लगातार बढ़े रहने पर ही इसे गंभीरता से देखा जाता है।

कई मामलों में सही खानपान से लिवर पर पड़ने वाला दबाव कम हो सकता है। लेकिन अगर कारण वायरल इंफेक्शन या फैटी लिवर जैसी स्थिति हो तो केवल डाइट पर्याप्त नहीं होती। जीवनशैली, दवाएं और कारण के अनुसार बदलाव जरूरी हो सकता है। इसलिए एक ही उपाय सभी पर लागू नहीं होता।

अगर अल्कोहल सेवन लिवर एंजाइम बढ़ने का कारण हो सकता है तो इसे रोकना जरूरी होता है। शराब लिवर कोशिकाओं पर सीधा असर डाल सकती है। लगातार सेवन से स्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए डॉक्टर अक्सर इसे सीमित या बंद करने की सलाह देते हैं।

लंबे समय का तनाव शरीर के हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकता है। इससे लिवर पर अप्रत्यक्ष दबाव पड़ सकता है। कुछ लोगों में इस एंजाइम में हल्का बदलाव देखा जा सकता है। इसलिए तनाव प्रबंधन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हां, कई बार व्यक्ति को कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते लेकिन रिपोर्ट में एंजाइम बढ़े हुए आते हैं। इसे साइलेंट लिवर स्ट्रेस कहा जा सकता है। इसलिए नियमित जांच महत्वपूर्ण होती है। केवल लक्षणों पर निर्भर रहना सही नहीं होता।

फैटी लिवर शुरुआती अवस्था में अक्सर reversible होता है। सही आहार और जीवनशैली से इसमें सुधार हो सकता है। लेकिन अगर इसे लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो समस्या बढ़ सकती है। इसलिए शुरुआती पहचान बहुत जरूरी होती है।

निष्क्रिय जीवनशैली मेटाबॉलिज्म को धीमा कर सकती है। इससे शरीर में फैट जमा होने और लिवर पर दबाव बढ़ने की संभावना रहती है। नियमित हल्का व्यायाम लिवर हेल्थ को सपोर्ट कर सकता है। इसलिए एक्टिव रहना जरूरी माना जाता है।

कुछ दवाएं लंबे समय तक लेने पर लिवर पर दबाव डाल सकती हैं। यह व्यक्ति की शरीर की क्षमता और दवा के प्रकार पर निर्भर करता है। इसलिए बिना जरूरत दवा लेना ठीक नहीं माना जाता। डॉक्टर की निगरानी महत्वपूर्ण होती है।

एक बार नॉर्मल रिपोर्ट आना अच्छी बात है, लेकिन यह भविष्य की गारंटी नहीं होता। अगर कारण जीवनशैली से जुड़ा है तो दोबारा समस्या हो सकती है। इसलिए संतुलित दिनचर्या बनाए रखना जरूरी होता है। नियमित हेल्थ मॉनिटरिंग हमेशा उपयोगी रहती है।

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