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Silent uric acid: बिना दर्द के शरीर में क्या नुकसान हो रहा है?

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 24 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 24 Apr, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5005

आपके शरीर का 'खामोश मेहमान' जो धीरे-धीरे घर बना रहा है

कल्पना कीजिए कि आपके घर की पाइपलाइन में धीरे-धीरे कचरा जमा हो रहा है, लेकिन बाहर से सब कुछ ठीक दिख रहा है। अचानक एक दिन पाइप फट जाता है। 'साइलेंट यूरिक एसिड' बिल्कुल वैसा ही है। अक्सर हमें लगता है कि जब तक जोड़ों में दर्द नहीं, तब तक सब ठीक है, लेकिन यही वह समय है जब यह एसिड आपके खून में चुपचाप घुल रहा होता है। इसे नज़रअंदाज़ करना किसी जलते हुए बम पर बैठने जैसा है। आज हम उस पर्दे को हटाएंगे और जानेंगे कि बिना दर्द के भी यह आपको कैसे बीमार कर रहा है।

क्या है यह यूरिक एसिड का 'लोचा'?

आसान शब्दों में कहें तो, यूरिक एसिड हमारे शरीर का एक 'बाय-प्रोडक्ट' है। जब हम कुछ खास चीजें खाते हैं, तो हमारा शरीर उन्हें तोड़ता है और इस प्रक्रिया में एक कचरा निकलता है जिसे यूरिक एसिड कहते हैं। अगर आपकी किडनी एक सुपर-फास्ट क्लीनर की तरह काम कर रही है, तो वह इसे पेशाब के जरिए बाहर निकाल देती है। लेकिन जब कचरा ज्यादा हो और सफाई कर्मचारी (किडनी) धीमा, तब यह खून में घूमने लगता है और अंगों के आसपास जमने लगता है

इसके अलग-अलग पड़ाव: आप कहाँ खड़े हैं?

हर किसी को सीधे दर्द नहीं होता। इसकी तीन मुख्य स्थितियां हैं:

  • दबे पाँव आना (Asymptomatic): ब्लड रिपोर्ट में लेवल 7 से ऊपर है, लेकिन आप एकदम फिट महसूस कर रहे हैं। यही सबसे धोखेबाज समय है।
  • अचानक हमला (Acute Gout): रात को सोए तो ठीक थे, पर सुबह अंगूठे में ऐसा दर्द जैसे किसी ने सुई चुभो दी हो।
  • पुरानी बीमारी (Chronic): जब यह क्रिस्टल आपके शरीर में पत्थर जैसी गांठें बना लेते हैं।

वे छोटे-छोटे संकेत जिन्हें हम 'नॉर्मल' समझ लेते हैं

हमारा शरीर बहुत बुद्धिमान है, वह छोटे इशारे देता है। क्या आप इन्हें महसूस कर रहे हैं?

  • पैर के तलवों में सुबह उठते ही हल्की सी जकड़न।
  • दिन भर भरपूर पानी पीने के बाद भी पेशाब का रंग गहरा पीला होना।
  • हल्का सा बुखार जैसा महसूस होना या बिना काम किए थकान।
  • त्वचा पर अचानक होने वाली खुजली, जिसका कोई स्किन इन्फेक्शन कारण न हो।

यह समस्या आ कहाँ से रही है?

आजकल की "फास्ट लाइफ" इसका सबसे बड़ा कारण है:

  • प्रोसेस्ड फूड का प्यार: पैकेट बंद जूस और बाहर का खाना।
  • पानी से दूरी: जब आप कम पानी पीते हैं, तो किडनी कचरा साफ नहीं कर पाती।
  • तनाव और अधूरी नींद: इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म बिगड़ता है और एसिड लेवल बढ़ता है।

 रिस्क और पेचीदगियां: एक गंभीर नजर

इसे हल्के में लेना आपकी सबसे बड़ी गलती हो सकती है। नीचे दी गई टेबल आपको असलियत दिखाएगी:

रिस्क फैक्टर्स (खतरा किनको है?)

होने वाली मुश्किलें (Complications)

क्या किया जा सकता है? (Solution)

जो लोग एक्सरसाइज नहीं करते

किडनी की पथरी: असहनीय दर्द और इन्फेक्शन

रोजाना 30 मिनट की सैर और योग

जिन्हें बीपी या शुगर है

दिल का खतरा: नसों में ब्लॉकेज की शुरुआत

चीनी और नमक पर कंट्रोल

बहुत ज्यादा प्रोटीन/मीट खाने वाले

जोड़ों का डैमेज: हड्डियों का टेढ़ापन

खाने में फाइबर और हरी सब्जियां बढ़ाएं

परिवार में किसी को यह समस्या रही हो

मेटाबॉलिक सिंड्रोम: मोटापा और सुस्ती

समय-समय पर बॉडी चेकअप

आधुनिक आयुर्वेद: इलाज ही नहीं, शुद्धिकरण

आज का आयुर्वेद सिर्फ 'चूर्ण' नहीं है, यह साइंस और कुदरत का मेल है।

अपनी 'प्रकृति' को पहचानें (Identify Your Dosha)

आयुर्वेद में इसे 'वात-रक्त' कहते हैं। आपका शरीर किस टाइप का है?

  1. वात डोमिनेंट: क्या आपके जोड़ों से कटकट की आवाज आती है और दर्द घूमता रहता है?
  2. पित्त डोमिनेंट: क्या जोड़ों में गर्मी महसूस होती है और बहुत ज्यादा पसीना आता है?
  3. कफ डोमिनेंट: क्या शरीर में भारीपन रहता है और सुबह उठने का मन नहीं करता?

आधुनिक जांच का तरीका

आज के समय में हम रिपोर्ट भी देखते हैं और नाड़ी भी। केवल दवा नहीं, बल्कि मिट्टी के बर्तनों में बना खाना (Claypot cooking) और 16 घंटे का उपवास (Intermittent Fasting) यूरिक एसिड को जड़ से उखाड़ने में मदद करते हैं।

आयुर्वेद का नजरिया: क्या है 'वात-रक्त'?

आयुर्वेद में हाई यूरिक एसिड को 'वात-रक्त' (Vatarakta) के नाम से जाना जाता है। जैसा कि नाम से ही साफ है, यह दो चीजों के बिगड़ने से होता है: वात दोष और रक्त धातु (खून)।

जब हमारा पाचन तंत्र (Digestive system) कमजोर हो जाता है, तो शरीर में 'आम' (जहरीले तत्व या टॉक्सिंस) बनने लगते हैं। यह 'आम' जब खून में मिलकर वायु (Vata) के प्रवाह को रोकता है, तो यूरिक एसिड जोड़ों और मांसपेशियों में जमा होने लगता है। आयुर्वेद इसे सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि शरीर के 'फिल्ट्रेशन सिस्टम' और 'मेटाबॉलिज्म' की सुस्ती मानता है।

जीवा आयुर्वेद का विशेष उपचार दृष्टिकोण (Ayunique™)

जीवा आयुर्वेद में हम केवल लक्षणों का इलाज नहीं करते, बल्कि बीमारी की जड़ तक जाते हैं। हमारा Ayunique™ दृष्टिकोण यह मानता है कि हर व्यक्ति की शारीरिक बनावट (Prakriti) अलग है, इसलिए इलाज भी व्यक्तिगत होना चाहिए।

  • जड़ की पहचान: क्या यूरिक एसिड गलत खान-पान से बढ़ा है या कमजोर किडनी की वजह से? हम पहले इसे समझते हैं।
  • मेटाबॉलिज्म में सुधार: आपकी 'जठराग्नि' (Digestive Fire) को मजबूत किया जाता है ताकि यूरिक एसिड दोबारा न बने।
  • प्रकृति आधारित चिकित्सा: आपके वात, पित्त या कफ दोष के संतुलन के आधार पर दवाएं तय की जाती हैं।

प्रकृति का वरदान: यूरिक एसिड के लिए चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद के खजाने में ऐसी कई औषधियां हैं जो खून को साफ करने और यूरिक एसिड को बाहर निकालने में माहिर हैं:

  • गिलोय (Guduchi): इसे आयुर्वेद में 'अमृत' कहा गया है। यह खून से एसिड को सोखकर उसे बाहर निकालने में सबसे प्रभावी है।
  • गोक्षुरा (Gokshura): यह एक नेचुरल मूत्रवर्धक (Diuretic) है जो किडनी की कार्यक्षमता को बढ़ाकर एसिड को पेशाब के रास्ते बाहर निकालता है।
  • नीम और मंजिष्ठा: ये जड़ी-बूटियाँ खून को शुद्ध (Blood Purifier) करती हैं और जोड़ों की जलन को कम करती हैं।
  • पुनर्नवा: जैसा कि नाम से पता चलता है—'पुनः' 'नवा' (फिर से नया करने वाला)—यह किडनी की कोशिकाओं को नया जीवन देता है।

आयुर्वेदिक थेरेपी और पंचकर्म: भीतर से सफाई

जब एसिड का स्तर बहुत बढ़ जाता है, तो केवल दवाएं काफी नहीं होतीं। तब हमें शरीर की 'सर्विसिंग' यानी पंचकर्म की जरूरत पड़ती है:

  • विरेचन (Virechana): औषधियों के जरिए पित्त और रक्त की अशुद्धियों को दस्त के रास्ते बाहर निकालना।
  • बस्ती (Basti): यह वात रोगों के लिए सबसे बढ़िया इलाज है। औषधीय तेलों या काढ़े के जरिए वात को संतुलित किया जाता है।
  • लेप (Local Application): सूजन वाली जगह पर 'दशांग लेप' जैसे आयुर्वेदिक लेप लगाने से तुरंत ठंडक और दर्द में राहत मिलती है।

खान-पान का संतुलन: क्या खाएं और क्या बचाएं?

यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में आपकी रसोई सबसे बड़ा औषधालय है। नीचे दी गई तालिका आपकी मदद करेगी:

क्या खाएं (Best Foods)

क्या न खाएं (Avoid Strictly)

क्यों? (The Reason)

पुराना चावल, मूंग की दाल

मैदा, राजमा, छोले, उड़द की दाल

हल्का भोजन पाचन आसान बनाता है और 'आम' नहीं बनने देता।

लौकी, कद्दू, परवल, टिंडा

पालक, मशरूम, फूलगोभी

ज्यादा प्यूरीन वाली सब्जियां यूरिक एसिड को बढ़ाती हैं।

छाछ (बिना मलाई), गाय का घी

दही, पनीर, भारी दूध के उत्पाद

दही वात-रक्त में सूजन बढ़ा सकता है।

अदरक, हल्दी, धनिया

लाल मिर्च, बहुत ज्यादा नमक, सिरका

मसाले जो शरीर में गर्मी (Pitta) बढ़ाते हैं, वे दर्द को तेज करते हैं।

खूब सारा गुनगुना पानी

शराब, मीठे कोल्ड ड्रिंक्स

पानी टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है, जबकि शराब उन्हें रोकती है।

जीवा आयुर्वेद में आपकी सेहत की अनूठी जांच (The Assessment)

जीवा में हमारा मानना है कि हर शरीर की अपनी एक कहानी होती है। इसलिए हम सिर्फ बीमारी का नहीं, बीमार व्यक्ति का इलाज करते हैं। हमारी जांच प्रक्रिया में ये मुख्य पड़ाव शामिल हैं:

  • प्रकृति विश्लेषण (Prakriti Analysis): क्या आप जानते हैं कि आपकी शारीरिक और मानसिक बनावट जन्म से ही तय होती है? हमारे डॉक्टर आपकी वात, पित्त और कफ की स्थिति की जांच करते हैं ताकि यह समझा जा सके कि यूरिक एसिड आपके शरीर में क्यों बढ़ा।
  • नाड़ी परीक्षण (Pulse Diagnosis): हमारी प्राचीन और सटीक तकनीक, जिसमें डॉक्टर आपकी कलाई की धड़कन से शरीर के भीतर के अंगों की सेहत और दोषों के असंतुलन का पता लगाते हैं।
  • विस्तृत बातचीत: आपकी जीवनशैली, तनाव का स्तर, नींद की गुणवत्ता और पाचन शक्ति पर गहराई से चर्चा की जाती है।

हमारी मरीज़ों की देखभाल की चरण-दर-चरण प्रक्रिया:

कॉल की उम्मीद करें: अपनी संपर्क जानकारी जमा करें, या आप हमें 0129 4264323 पर कॉल भी कर सकते हैं।

अपॉइंटमेंट की पुष्टि।

आप अपॉइंटमेंट तय कर सकते हैं और हमारे आयुर्वेदिक विशेषज्ञों से सलाह लेने के लिए हमारे क्लिनिक आ सकते हैं।

अगर आपको अपने आस-पास हमारा क्लिनिक नहीं मिल रहा है, तो आप 0129 4264323 पर ऑनलाइन सलाह भी ले सकते हैं। इसकी कीमत सिर्फ़ 49 रुपये (नियमित कीमत 299 रुपये) है और आप घर बैठे ही हमारे डॉक्टरों से सलाह ले सकते हैं।

विस्तृत जाँच

जीवा डॉक्टर आपकी स्वास्थ्य समस्या की असली वजह जानने के लिए पूरी और विस्तृत जाँच करेंगे।

असली वजह पर आधारित इलाज

जीवा डॉक्टर लक्षणों और असली वजह को ठीक करने के लिए बहुत असरदार, प्राकृतिक और आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल करके आपके लिए खास इलाज सुझाएँगे।

सुधार की समयसीमा: कब दिखेगा असर? (Healing Timeline)

यूरिक एसिड के मामले में धैर्य बहुत जरूरी है क्योंकि हम इसे दबाते नहीं, बल्कि जड़ से निकालते हैं:

  • पहले 15-20 दिन: शरीर का डिटॉक्स शुरू होता है। आप हल्कापन महसूस करेंगे और पेशाब के जरिए टॉक्सिन्स बाहर निकलने लगेंगे।
  • 1 से 3 महीने: यह सबसे महत्वपूर्ण समय है। जोड़ों की जकड़न कम होने लगती है और ब्लड रिपोर्ट में यूरिक एसिड का लेवल नीचे आने लगता है।
  • 4 से 6 महीने: पुराने और गंभीर मामलों में स्थायी राहत के लिए और शरीर के मेटाबॉलिज्म को पूरी तरह ठीक करने के लिए इतना समय लग सकता है।

आपको क्या परिणाम मिलेंगे? (Expectations)

जब आप जीवा के साथ अपनी हीलिंग यात्रा शुरू करते हैं, तो आप ये बदलाव देख सकते हैं:

  • जोड़ों के दर्द और सूजन में भारी कमी।
  • किडनी फंक्शन (Creatinine/eGFR) में सुधार।
  • पाचन शक्ति का बढ़ना और बेहतर एनर्जी लेवल।
  • बार-बार पेनकिलर्स लेने की मजबूरी से आजादी।

मरीजों का अनुभव 

मुझे 5 साल से यूरिक एसिड की समस्या थी। एलोपैथी से आराम मिलता था, पर दवा छोड़ते ही दर्द लौट आता था। जीवा आयुर्वेद की 3 महीने की दवाओं और डाइट चार्ट से आज मेरा लेवल 4.5 है और मैं बिना दर्द के सुबह की सैर कर पाता हूँ।" — राजेश खन्ना, दिल्ली

जीवा आयुर्वेद में इलाज की अनुमानित लागत

अपनी सेहत के लिए ज़रूरी आर्थिक निवेश को समझना ज़रूरी है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं की लागत में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी मेडिकल ज़रूरतों के हिसाब से सबसे सही विकल्प चुन सकें।

इलाज की लागत

जो मरीज़ नियमित, लगातार देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और कंसल्टेशन की मासिक लागत आमतौर पर 3,000 रुपये से 3,500 रुपये के बीच होती है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित शुरुआती लागत है। अंतिम लागत मरीज़ की बीमारी की सही प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करती है।

प्रोटोकॉल

ज़्यादा व्यापक और व्यवस्थित तरीके के लिए, हम खास पैकेज प्रोटोकॉल देते हैं। ये प्लान शारीरिक लक्षणों और पूरी जीवनशैली में सुधार, दोनों पर ध्यान देने के लिए बनाए गए हैं। पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल की लागत में एक बार में 15,000 रुपये से 40,000 रुपये तक का पेमेंट शामिल होता है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

जिन मरीज़ों को गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की ज़रूरत होती है, उनके लिए हमारे जीवाग्राम केंद्र बेहतरीन इलाज का अनुभव देते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में बना एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है, और यह ये सुविधाएँ देता है:

  • असली पंचकर्म थेरेपी
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक इलाज सेवाएँ
  • आरामदायक रहने की जगह
  • और भी कई जीवन-स्तर सुधारने वाली सुविधाएँ

जीवाग्राम में 7 दिनों के लिए पूरी तरह से समर्पित वेलनेस स्टे की लागत लगभग 1 लाख रुपये है, जो आपके शरीर और मन को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए लगातार, व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

पिछले कुछ सालों में, जीवा आयुर्वेद ने हज़ारों ऐसे मरीजों का भरोसा जीता है जो प्राकृतिक और पर्सनलाइज़्ड हेल्थकेयर समाधान ढूंढ रहे हैं। जीवा आयुर्वेद पर मरीजों के भरोसे के कुछ मुख्य कारण ये हैं:

  • बीमारी की जड़ पर आधारित इलाज

पारंपरिक इलाज के उलट, जो सिर्फ़ बीमारी के लक्षणों पर ध्यान देते हैं, आयुर्वेदिक इलाज बीमारी की जड़ को ठीक करने और शरीर में मौजूद उन अंदरूनी असंतुलनों को ठीक करने पर ज़ोर देता है जिनकी वजह से बीमारी होती है।

  • अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर

जीवा आयुर्वेद के पास अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टरों की एक बहुत बड़ी टीम है, जो किसी भी बीमारी के लिए इलाज सुझाने से पहले हर मरीज की स्थिति की अच्छी तरह से जांच करते हैं।

  • पर्सनलाइज़्ड "Ayunique" इलाज का तरीका

आयुर्वेदिक इलाज बहुत ज़्यादा पर्सनलाइज़्ड होता है और हर व्यक्ति की प्रकृति और जीवनशैली के हिसाब से तैयार किया जाता है।

  • संपूर्ण इलाज

आयुर्वेदिक इलाज सिर्फ़ दवाओं तक ही सीमित नहीं है; इसमें खान-पान और जीवनशैली में बदलाव, सांस लेने की तकनीकें, और तनाव को मैनेज करने के तरीके भी शामिल हैं, ताकि शरीर और मन का पूरी तरह से इलाज हो सके।

  • पूरे भारत में मरीजों का भरोसा

बहुत बड़ी संख्या में मरीजों ने Jiva के इलाज के तरीकों और सुझावों को अपनाने के बाद अपनी सेहत में सुधार देखा है। इससे पता चलता है कि आयुर्वेदिक इलाज के लिए लोग जीवा आयुर्वेद पर कितना भरोसा करते हैं।

  • 95% मरीजों ने इलाज शुरू करने के 3 महीने के अंदर ही अपनी सेहत में काफ़ी सुधार देखा।
  • 88% मरीजों ने एलोपैथिक दवाएँ पूरी तरह से लेना बंद कर दिया।
  • हर दिन 8000+ मरीजों का कंसल्टेशन होता है।
  • दुनिया भर में 15 लाख से ज़्यादा संतुष्ट मरीज़
  • 30+ वर्षों की आयुर्वेदिक विशेषज्ञता

आधुनिक चिकित्सा बनाम आयुर्वेद: कौन सा रास्ता बेहतर है?

यूरिक एसिड के इलाज में अक्सर लोग भ्रमित रहते हैं कि वे एलोपैथी चुनें या आयुर्वेद। यहाँ दोनों के बीच का एक निष्पक्ष तुलनात्मक विवरण दिया गया है:

विशेषता (Feature)

आधुनिक चिकित्सा (Modern Treatment)

आयुर्वेदिक चिकित्सा (Jiva Ayurveda)

दृष्टिकोण (Approach)

मुख्य रूप से लक्षणों और दर्द को दबाने पर ध्यान (Symptomatic)।

जड़ (Root Cause) और पाचन शक्ति को सुधारने पर ध्यान।

दवाएं (Medication)

रासायनिक दवाएं (जैसे Allopurinol) जो यूरिक एसिड को रोकती हैं।

गिलोय, गोक्षुरा जैसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियां जो एसिड को बाहर निकालती हैं

साइड इफेक्ट्स

लंबे समय तक पेनकिलर्स लेने से किडनी और लिवर पर असर पड़ सकता है।

कोई हानिकारक दुष्प्रभाव नहीं; उल्टा यह शरीर के अंगों को शक्ति देती है।

परिणाम (Results)

तुरंत राहत, लेकिन दवा छोड़ते ही समस्या फिर लौट सकती है।

थोड़ा समय लेती है, लेकिन परिणाम स्थायी (Sustainable) होते हैं।

पर्सनलाइजेशन

सभी मरीजों के लिए लगभग एक जैसी दवाएं।

आपकी 'प्रकृति' और 'दोषों' के आधार पर हर मरीज के लिए अलग दवा।

डॉक्टर से कब मिलें? (खतरे की घंटी)

यदि आप नीचे दिए गए लक्षणों में से किसी का भी सामना कर रहे हैं, तो तुरंत चिकित्सा सलाह लें:

  • रात के समय अचानक पैर के अंगूठे या टखने में असहनीय दर्द होना।
  • जोड़ों के पास की त्वचा का लाल पड़ जाना या बहुत गर्म महसूस होना।
  • बार-बार पथरी (Kidney Stones) की समस्या होना।
  • ब्लड रिपोर्ट में यूरिक एसिड का स्तर लगातार 7 mg/dL से ऊपर बना रहना।

जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें:

  • कॉल करें: +91-129-4040404
  • वेबसाइट: www.jiva.com
  • क्लीनिक: भारत भर में 80+ जीवा क्लीनिक उपलब्ध हैं।

निष्कर्ष 

यूरिक एसिड का बढ़ना सिर्फ जोड़ों की समस्या नहीं है, यह आपके शरीर का एक अलार्म है कि आपका मेटाबॉलिज्म गड़बड़ा गया है। इसे 'पेनकिलर्स' के पीछे न छुपाएं। आयुर्वेद की शक्ति को अपनाएं जो न केवल आपके दर्द को मिटाती है, बल्कि आपकी किडनी को सुरक्षित रखती है और शरीर को भीतर से शुद्ध करती है। याद रखें, 'जल्दी शुरुआत यानी बेहतर रिकवरी'।

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