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Stress से राहत सिर्फ therapy से नहीं, care और comfort ने भी फर्क डाला

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

ज़्यादातर लोगों को लगता है कि टेंशन या स्ट्रेस का असर सिर्फ दिमाग तक रहता है मूड चिड़चिड़ा हो जाएगा या रातों की नींद उड़ जाएगी। पर असलियत कुछ और है। जब दिमाग पर ज़रूरत से ज़्यादा प्रेशर पड़ता है, तो उसका सीधा असर शरीर पर दिखने लगता है, खासकर हमारी कमर और कंधों की जकड़न के रूप में। धर्मेंद्र जी के साथ भी ठीक ऐसा ही हुआ। 

उनकी परेशानी की शुरुआत ऑफिस के भारी काम और रोज़मर्रा की भागदौड़ से हुई। शुरुआत में उन्होंने इसे आम थकान समझकर टाल दिया, यह सोचकर कि संडे को आराम करने से सब ठीक हो जाएगा। पर ऐसा हुआ नहीं। देखते ही देखते इस मानसिक दबाव ने उनके शरीर को अपनी गिरफ्त में ले लिया और उन्हें बैक पेन (पीठ दर्द) ने घेर लिया। नौबत यहाँ तक आ गई कि ऑफिस की कुर्सी पर घंटों बैठना या सुबह सोकर उठना भी उनके लिए किसी सजा से कम नहीं था।

जैसे-जैसे वक्त बीता, धर्मेंद्र जी को एक बात बिल्कुल साफ हो गई कि उनकी कमर का यह दर्द कुर्सी पर गलत तरीके से बैठने (खराब पॉश्चर) की वजह से नहीं है। असल में उनके दिमाग का सारा स्ट्रेस और बोझ अब उनकी कमर की मांसपेशियों (muscles) में बुरी तरह जम चुका था।

दिमागी टेंशन और कमर का दर्द: वो रोज़ की उलझन

जब स्ट्रेस हद से बढ़ जाता है, तो शरीर एक 'फाइट या फ्लाइट' (Fight or Flight) मोड में चला जाता है। धर्मेंद्र जी के साथ भी यही हो रहा था:

  • कमर में जकड़न: जैसे-जैसे ऑफिस और ज़िंदगी का प्रेशर बढ़ता, उनकी कमर के निचले हिस्से और कंधों में ऐसी जकड़न आ जाती जैसे किसी ने वहां भारी पत्थर बांध दिया हो।
  • रात-रात भर जागना: शरीर थका हुआ होता था, कमर में दर्द होता था, लेकिन जैसे ही वो सोने जाते, दिमाग में हज़ारों बातें चलने लगतीं। नींद न आने की वजह से शरीर को रिकवर होने का वक्त ही नहीं मिल पाता था।
  • हर वक्त की चिड़चिड़ाहट: कमर के दर्द और दिमागी उलझन ने उनका स्वभाव बदल दिया था। वो अपने परिवार से भी ठीक से बात नहीं कर पाते थे, जिससे उन्हें और ज़्यादा गिल्ट (Guilt) महसूस होता था।

जब लगा कि सिर्फ बातों वाली Therapy काफी नहीं है

धर्मेंद्र जी ने स्ट्रेस कम करने के लिए काउंसलिंग और थेरेपी का सहारा लिया। थेरेपी से उन्हें अपनी बातें शेयर करने का मौका मिला, जो अच्छा था। लेकिन फिर भी वो बात नहीं बन रही थी।

उन्हें एहसास हुआ कि उनका शरीर अंदर से इतना थक चुका है और मांसपेशियों में इतनी जकड़न आ चुकी है कि सिर्फ बातों से दर्द नहीं जाएगा। उनके शरीर और मन दोनों को एक गहरे आराम (Comfort), देखभाल (Care) और ऐसे स्पर्श की ज़रूरत थी जो उन्हें अंदर तक शांत कर सके।

आयुर्वेद का वो Care और Comfort वाला टच

लगातार दर्द और स्ट्रेस से परेशान होकर धर्मेंद्र जी ने आयुर्वेद की तरफ रुख किया। पहली ही मुलाकात में उन्हें कुछ अलग महसूस हुआ। यहाँ सिर्फ उनके स्ट्रेस लेवल पर बात नहीं हुई, बल्कि उनके रूटीन, उनके खान-पान और शरीर के वात दोष (Vata Dosha) को समझने की कोशिश की गई:

  • स्ट्रेस और वात का कनेक्शन: डॉक्टर ने उन्हें बहुत ही सरल भाषा में समझाया कि जब हम बहुत ज़्यादा स्ट्रेस लेते हैं, तो शरीर में 'वात' (हवा और रूखापन) बढ़ जाता है। यही बढ़ा हुआ वात नसों और मांसपेशियों की नमी को सोख लेता है, जिससे कमर में दर्द और जकड़न शुरू हो जाती है।
  • सिर्फ दवाई नहीं, केयर की ज़रूरत: धर्मेंद्र जी को बताया गया कि उन्हें कड़वी गोलियों से ज़्यादा, शरीर को आराम देने वाली थेरेपी और मानसिक सुकून की दरकार है।

सुकून भरा इलाज: शरीर और मन दोनों की डीप हीलिंग

धर्मेंद्र जी का इलाज सिर्फ एक पर्चे तक सीमित नहीं रहा। उन्हें वो 'Comfort' दिया गया जिसकी उनके शरीर को सालों से तलाश थी:

  • शिरोधारा (Shirodhara) का जादू: स्ट्रेस को खत्म करने के लिए उन्हें शिरोधारा दी गई। जब गुनगुना औषधीय तेल लगातार उनके माथे (Third eye) पर गिराया गया, तो उनका दिमाग एकदम शांत हो गया। उन्होंने बताया कि सालों बाद उन्हें इतनी गहरी और सुकून भरी नींद आई थी।
  • अभ्यंग (गर्म तेल की मालिश): कमर की जकड़न को खोलने के लिए महानारायण जैसे गर्म और ताकतवर तेलों से उनके शरीर की मालिश की गई। इस केयरिंग टच ने मांसपेशियों में जमा सारे स्ट्रेस को जैसे पिघला कर रख दिया।
  • मन को रिलैक्स करने वाली औषधियाँ: दिमाग को विचारों से बचाने और नसों को ताकत देने के लिए उन्हें अश्वगंधा, ब्राह्मी और जटामांसी जैसी सौम्य औषधियाँ दी गईं।
  • गर्म सिकाई (स्वेदन): तेल की मालिश के बाद जब कमर की हल्की भाप से सिकाई की गई, तो दर्द न जाने कहाँ गायब हो गया।

लाइफस्टाइल में आए छोटे लेकिन एहम बदलाव

आयुर्वेद के साथ-साथ धर्मेंद्र जी ने अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ बहुत ही सिंपल और रिलैक्सिंग बदलाव किए:

  • गर्म और सादा खाना: रूखे और ठंडे खाने (जो स्ट्रेस और वात बढ़ाते हैं) की जगह, उन्होंने घर का बना गर्म, ताज़ा और थोड़ा घी वाला खाना शुरू किया, जिसने शरीर को अंदर से नरमाहट दी।
  • डिजिटल डिटॉक्स और परिवार का साथ: उन्होंने तय किया कि रात 8 बजे के बाद वो स्क्रीन नहीं देखेंगे। वो समय उन्होंने अपने परिवार के साथ गपशप करने और खुद को 'Comfort' देने में लगाया।
  • हल्की स्ट्रेचिंग: जिम में भारी वज़न उठाने की बजाय, उन्होंने सुबह ताज़ी हवा में हल्की स्ट्रेचिंग और प्राणायाम शुरू किया।

निष्कर्ष

धर्मेंद्र जी की कहानी हमें सिखाती है कि स्ट्रेस से लड़ना अकेले दिमाग का काम नहीं है। जब स्ट्रेस कमर के दर्द या शारीरिक बीमारी का रूप ले ले, तो शरीर को भी प्यार, आराम और 'Care' की ज़रूरत होती है।

आज धर्मेंद्र जी का बैक पेन पूरी तरह गायब है और वो पहले से कहीं ज़्यादा खुश और रिलैक्स रहते हैं। उन्होंने मान लिया है कि शरीर कोई मशीन नहीं है; कभी-कभी इसे बस एक अच्छे मसाज, शिरोधारा के सुकून और अपनों के साथ की ज़रूरत होती है।

References

Stress

STRESS AND HEALTH: Psychological, Behavioral, and Biological Determinants - PMC

Doing What Matters in Times of Stress

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

जी हाँ, बिल्कुल। जब आप स्ट्रेस में होते हैं, तो आपकी मांसपेशियां (खासकर कमर और कंधों की) सिकुड़ जाती हैं और टाइट हो जाती हैं। लंबे समय तक ऐसा रहने से वहां भयंकर दर्द शुरू हो जाता है।

शिरोधारा में माथे पर लगातार गिरता गुनगुना तेल हमारे नर्वस सिस्टम को सीधा रिलैक्स करता है। यह शरीर में हैप्पी हॉर्मोन्स (जैसे सेरोटोनिन) को बढ़ाता है और स्ट्रेस हॉर्मोन (कॉर्टिसोल) को कम करता है।

आयुर्वेद में मानसिक तनाव, डर, घबराहट और शरीर के दर्द को मुख्य रूप से 'वात दोष' (Vata Dosha) के असंतुलन से जोड़ा जाता है।

रोज़ रात को सोने से पहले गुनगुने तिल के तेल या सरसों के तेल से अपने पैरों के तलवों और कमर की हल्की मालिश करें। यह शरीर के वात को तुरंत शांत करता है और अच्छी नींद लाता है।

हाँ। स्ट्रेस होने पर कॉफी, बहुत ज़्यादा चाय, रूखा-सूखा और ठंडा खाना नहीं खाना चाहिए। इसकी बजाय गुनगुना दूध, घी, बादाम और ताज़ा पका हुआ गर्म भोजन लेना चाहिए, जो नसों को ताकत देता है।

बिल्कुल! स्ट्रेस का असर सिर्फ कमर पर ही नहीं पड़ता। जब आप बहुत ज्यादा टेंशन लेते हैं, तो अक्सर अनजाने में अपने कंधों और जबड़े को भी सिकोड़ लेते हैं। इसकी वजह से गर्दन में जकड़न, कंधों में भारीपन और लगातार सिरदर्द (Tension Headaches) जैसी परेशानियां भी शुरू हो सकती हैं।

अगर आपको बहुत ज्यादा स्ट्रेस या मांसपेशियों में दर्द रहता है, तो हफ्ते में कम से कम 2 से 3 बार किसी विशेषज्ञ से या घर पर ही गर्म तेल (जैसे तिल या सरसों का तेल) की मालिश जरूर करवानी चाहिए। यह आपके नर्वस सिस्टम को बहुत गहरा आराम देती है।

जी हाँ, अश्वगंधा आयुर्वेद की एक बेहद चमत्कारी औषधि है। यह सिर्फ आपके दिमाग को शांत करके स्ट्रेस हॉर्मोन (Cortisol) को कम नहीं करती, बल्कि नसों और मांसपेशियों को अंदर से ताकत भी देती है, जिससे दर्द और थकावट अपने आप दूर होने लगती है।

सिर्फ बिस्तर पर लेट जाना और आंखें बंद कर लेना ही असली आराम नहीं है। अगर आपका दिमाग लगातार कल की चिंताओं में उलझा है, तो आप 8 घंटे बाद भी थके हुए ही उठेंगे। इसलिए अच्छी और गहरी नींद के लिए सोने से पहले गैजेट्स दूर रखें, मनपसंद संगीत सुनें या पैरों के तलवों की मालिश करें, ताकि दिमाग सच में 'स्विच ऑफ' हो सके।

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