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गुड़, चीनी या शहद? जानिए किससे सबसे जल्दी होता है शुगर स्पाइक, क्या है पूरी सच्चाई

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

मीठा खाना किसे पसंद नहीं होता। खाने के बाद अगर कुछ मीठा न मिले, तो बहुत से लोगों को लगता है जैसे उनका खाना पूरा ही नहीं हुआ। लेकिन आज के समय में जब हर घर में डायबिटीज़ और मोटापे जैसी परेशानियां आम हो गई हैं, तो मीठे को लेकर एक अजीब सा डर भी बैठ गया है। लोग सफेद चीनी को जहर मानने लगे हैं और उसकी जगह धड़ल्ले से गुड़ या शहद का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई लोगों को लगता है कि अगर उन्होंने चाय में चीनी की जगह गुड़ डाल लिया, तो उन्होंने अपनी सेहत पर बहुत बड़ा अहसान कर दिया। लेकिन क्या वाकई ऐसा है? क्या सच में गुड़ या शहद खाने से हमारा ब्लड शुगर नहीं बढ़ता? चलिए आज इन सारे सवालों के जवाब बिल्कुल सीधी और सरल भाषा में समझते हैं।

चीनी गुड़ और शहद में असली फर्क क्या होता है

अगर हम इनके बनने के तरीके की बात करें, तो आपको यह जानकर शायद हैरानी न हो कि चीनी और गुड़ दोनों एक ही चीज से बनते हैं, और वो है गन्ने का रस। गांव में आपने देखा होगा कि गन्ने के रस को बड़ी-बड़ी कड़ाहियों में घंटों तक उबाला जाता है। जब यह रस गाढ़ा हो जाता है और इसे बिना किसी केमिकल के सुखा लिया जाता है, तो वह गुड़ बन जाता है। यह एकदम प्राकृतिक तरीका है। वहीं, जब इसी रस को मशीनों में डालकर तेज़ी से घुमाया जाता है, इसमें से सारा रंग और नमी निकाल दी जाती है और केमिकल से साफ किया जाता है, तब जाकर सफेद चीनी बनती है। दूसरी तरफ शहद इन दोनों से बिल्कुल अलग है। इसे मधुमक्खियां फूलों के रस से बनाती हैं। यानी तीनों का स्वाद भले ही मीठा हो, लेकिन इनके हमारे घर तक पहुंचने का सफर बिल्कुल अलग होता है।

शुगर स्पाइक का सच और कौन सबसे तेज़ी से ब्लड शुगर बढ़ाता है

अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर कि आखिर शरीर में जाने के बाद ये तीनों क्या करते हैं। शुगर स्पाइक का सीधा सा मतलब है कि कोई चीज खाने के बाद आपके खून में कितनी जल्दी मिठास घुल जाती है। जब आप सफेद चीनी खाते हैं, तो शरीर को उसे पचाने में बिल्कुल भी मेहनत नहीं करनी पड़ती। वह सीधे आपके खून में दौड़ने लगती है और आपका ब्लड शुगर अचानक से बहुत तेज़ी से ऊपर भागता है। अब बात करते हैं गुड़ की। गुड़ क्योंकि थोड़ा कम रिफाइंड होता है, इसलिए यह चीनी के मुकाबले खून में घुलने में थोड़ा सा ज्यादा समय लेता है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि इसका असर भी कुछ देर बाद वही होता है जो चीनी का होता है। शहद की बात करें तो इसमें फ्रुक्टोज ज्यादा होता है, इसलिए यह एकदम से तो शुगर नहीं बढ़ाता, लेकिन धीरे-धीरे यह भी खून में मिठास का स्तर काफी ऊपर ले जाता है।

क्या शहद को सेहत का खज़ाना मानना हमारी भूल है

आजकल वजन कम करने की चाहत में बहुत से लोग सुबह उठते ही गर्म पानी में शहद और नींबू मिलाकर पीते हैं। टीवी और विज्ञापनों ने हमारे दिमाग में यह बात भर दी है कि शहद से वजन कम होता है और यह डायबिटीज़ वालों के लिए भी एकदम सुरक्षित है। लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है। आपको यह जानकर अचरज होगा कि एक चम्मच शहद में एक चम्मच सफेद चीनी से भी ज्यादा कैलोरी होती है। हां, शहद में चीनी के मुकाबले ग्लाइसेमिक इंडेक्स थोड़ा कम होता है और इसमें कुछ एंटी-ऑक्सीडेंट्स जरूर होते हैं, लेकिन अगर आपको शुगर की बीमारी है, तो आपका शरीर शहद को भी एक तरह की चीनी ही मानता है। बाजार में मिलने वाले ज्यादातर शहद में तो अलग से शुगर सिरप मिला होता है, जो सेहत को और भी ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।

गुड़ के अपने फायदे हैं लेकिन शुगर के मरीज़ों के लिए कितनी छूट है

यह बात सौ फीसदी सच है कि सफेद चीनी के मुकाबले गुड़ हजार गुना बेहतर है। चीनी में सिर्फ और सिर्फ खाली कैलोरी होती है, यानी वह शरीर को मोटापे के अलावा कुछ नहीं देती। वहीं गुड़ के अंदर गन्ने का सारा पोषण बचा रहता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे कई सारे मिनरल्स होते हैं। यही वजह है कि सर्दियों में गुड़ खाने से शरीर को गर्मी मिलती है और खून की कमी भी दूर होती है। लेकिन अगर आप डायबिटीज़ के मरीज़ हैं, तो आपके लिए कहानी बदल जाती है। न्यूट्रिशन के मामले में गुड़ भले ही जीत जाए, लेकिन जब बात खून में शुगर बढ़ाने की आती है, तो गुड़ और चीनी में बस उन्नीस-बीस का ही फर्क होता है। अगर आपको शुगर है और आप यह सोचकर आधा किलो गुड़ खा रहे हैं कि यह नुकसान नहीं करेगा, तो आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं।

आयुर्वेद की नज़र में मीठा और इसे खाने का सही तरीका

आयुर्वेद के अनुसार मीठा यानी 'मधुर रस' शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है, लेकिन इसका ज्यादा इस्तेमाल कफ दोष बढ़ाता है। पुराने गुड़ और शुद्ध शहद को सीमित मात्रा में फायदेमंद माना गया है। आयुर्वेद सख्त हिदायत देता है कि शहद को कभी भी गर्म करके नहीं खाना चाहिए, यह शरीर में जहर का काम करता है।

ग्लाइसेमिक इंडेक्स का खेल समझना आपके लिए क्यों ज़रूरी है

डॉक्टर अक्सर ग्लाइसेमिक इंडेक्स या जीआई (GI) की बात करते हैं। आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसा पैमाना है जो बताता है कि कोई खाना कितनी तेज़ी से खून में शुगर बढ़ाएगा। इसे शून्य से सौ के बीच नापा जाता है। शुद्ध ग्लूकोज का जीआई सौ होता है। सफेद चीनी का जीआई लगभग पैंसठ के आसपास होता है। आपको हैरानी होगी कि गुड़ का जीआई भी लगभग इसी के बराबर यानी चौंसठ से पचासी के बीच होता है। शहद का जीआई अट्ठावन के आसपास रहता है। इन आंकड़ों से एकदम साफ हो जाता है कि ये तीनों ही चीजें खून में शुगर बढ़ाने की पूरी ताकत रखती हैं। इसलिए डायबिटीज़ के मरीज़ों को इन तीनों से ही एक सुरक्षित दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

मीठे की तेज़ तलब लगे तो आखिर खुद को कैसे रोकें

अब सवाल यह उठता है कि अगर चीनी, गुड़ और शहद तीनों ही शुगर बढ़ाते हैं, तो फिर मीठा खाने की इच्छा होने पर इंसान क्या करे। इसका सबसे अच्छा और प्राकृतिक उपाय ताजे फल हैं। जब आप कोई मीठा फल जैसे सेब, पपीता या अमरूद खाते हैं, तो उसमें मिठास के साथ-साथ बहुत सारा फाइबर भी होता है। यह फाइबर खून में शुगर को एकदम से घुलने नहीं देता और एक तरह से ब्रेक का काम करता है। इसके अलावा आप कभी-कभार खजूर, मुनक्का या अंजीर भी खा सकते हैं। कुछ लोग स्टीविया के पत्तों का भी इस्तेमाल करते हैं जो प्राकृतिक रूप से मीठे होते हैं और शुगर भी नहीं बढ़ाते। बस आपको अपनी जीभ को धीरे-धीरे असली और प्राकृतिक मिठास की आदत डालनी होगी।

कुल मिलाकर आपको अपने शरीर के साथ क्या करना चाहिए

पूरी बात का निचोड़ यह है कि मीठा अपने आप में कोई जहर नहीं है, बशर्ते आप स्वस्थ हों और इसे एक लिमिट में खाएं। अगर आपके घर में सफेद चीनी का डिब्बा है, तो उसे हटाकर उसकी जगह गुड़ ले आएं।, यह एक अच्छी शुरुआत है। क्योंकि इससे आपके परिवार को केमिकल वाली चीनी से छुटकारा मिलेगा और गुड़ के पोषक तत्व मिलेंगे। लेकिन अगर घर में किसी को डायबिटीज़ है, तो उन्हें गुड़ और शहद को भी चीनी की तरह ही समझकर खाना चाहिए। कभी महीने में एक-आध बार थोड़ा सा स्वाद चखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसे अपनी रोज की आदत बना लेना खतरे से खाली  नहीं है। अपने शरीर को समझिए, संतुलित खाना खाइए और किसी भी चीज की अति करने से बचिए, यही अच्छे स्वास्थ्य का सबसे सीधा और सच्चा रास्ता है।

References

https://www.healthline.com/nutrition/blood-sugar-spikes

https://www.cdc.gov/diabetes/living-with/10-things-that-spike-blood-sugar.html

https://www.healthline.com/health/blood-sugar-spike

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बहुत से लोगों को लगता है कि ब्राउन शुगर बहुत हेल्दी है, लेकिन असल में यह सफेद चीनी में ही थोड़ा सा मोलासेस (गन्ने का शीरा) मिलाकर बनाई जाती है। इसका आपके ब्लड शुगर पर असर बिल्कुल सफेद चीनी जैसा ही होता है, इसलिए यह कोई बहुत अच्छा विकल्प नहीं है।

नहीं, इन्हें रोज़ाना और लंबे समय तक खाने से हमारे पेट और आंतों के अच्छे बैक्टीरिया पर बुरा असर पड़ सकता है। कभी-कभार चाय या कॉफी में इसका इस्तेमाल ठीक है, लेकिन इसकी पक्की आदत डाल लेना शरीर के लिए सही नहीं है।

कोकोनट शुगर यानी नारियल की चीनी खून में थोड़ा धीरे घुलती है, लेकिन इसमें कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट लगभग सफेद चीनी जितने ही होते हैं। इसलिए शुगर के मरीजों को इसे भी बहुत संभलकर ही खाना चाहिए।

अगर आप मीठा खाना ही चाहते हैं, तो उसे हमेशा अपने पूरे खाने (लंच या डिनर) के बाद खाएं। खाने में मौजूद फाइबर और प्रोटीन मीठे को खून में बहुत तेज़ी से घुलने से रोक लेते हैं। खाली पेट मीठा खाना सबसे ज्यादा नुकसान करता है।

बिल्कुल सही। अगर आपने कुछ मीठा खा लिया है, तो 15-20 मिनट की हल्की सैर ज़रूर कर लें। ऐसा करने से आपकी मांसपेशियां उस शुगर को एनर्जी के रूप में खर्च कर लेती हैं और खून में शुगर एकदम से नहीं बढ़ती।

डिब्बाबंद चीज़ों पर 'शुगर-फ्री' लिखा देखकर कभी धोखा न खाएं। इनमें असली चीनी की जगह कई बार ऐसे केमिकल या माल्टोडेक्सट्रिन जैसी छुपी हुई शुगर होती है, जो सेहत को असली चीनी से भी ज़्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।

दिन भर अगर आप सही से खाना नहीं खाते या आपके खाने में प्रोटीन की कमी होती है, तो शरीर को रात में तुरंत एनर्जी चाहिए होती है, जो मीठे से मिलती है। इसके अलावा दिनभर की थकान और स्ट्रेस भी रात को मीठे की तलब बढ़ाते हैं।

नहीं, बच्चों को भी बहुत ज़्यादा मीठा नहीं देना चाहिए, चाहे वो गुड़ ही क्यों न हो। बचपन से ही बहुत ज़्यादा मीठा खाने की आदत डालने से आगे चलकर उनके दांत खराब हो सकते हैं और बचपन के मोटापे जैसी दिक्कतें आ सकती हैं।

हां, खाली पेट मीठा खाने से वह सीधे और बहुत तेज़ी से खून में चला जाता है, जिससे शरीर में इंसुलिन एकदम से उछाल मारता है। इसलिए मीठा हमेशा कुछ नमकीन या फाइबर वाली चीज़ खाने के बाद ही खाना बेहतर है।

भले ही बाज़ार में इसे बहुत हेल्दी बताकर बेचा जाता है, लेकिन इसमें फ्रुक्टोज नाम की शुगर की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है। यह सीधे आपके लीवर पर असर डालता है और ज़्यादा खाने पर फैटी लीवर की समस्या पैदा कर सकता है।

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