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क्या थायरॉइड की गोली जिंदगीभर खानी पड़ेगी? जानिए एलोपैथी और आयुर्वेद का असली अंतर

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आजकल थायरॉइड इतनी आम बीमारी हो गई है कि हर दूसरे घर में कोई न कोई सुबह उठते ही इसकी गोली खा रहा है। लेकिन जैसे ही किसी को पता चलता है कि उसे थायरॉइड है, तो सबसे बड़ा डर यही सताता है कि "क्या अब जिंदगी भर यह गोली खानी पड़ेगी?"

यह सवाल हर उस इंसान के दिमाग में घूमता है जिसकी रिपोर्ट में थायरॉइड निकलता है। हमारे आस-पास यह बात बिल्कुल पक्की मान ली गई है कि थायरॉइड कभी जड़ से खत्म नहीं होता, बस रोज खाली पेट एक गोली खाकर काम चलाना पड़ता है।

थायरॉइड क्या है और यह कैसे काम करता है?

थायरॉइड हमारे गले के निचले हिस्से में मौजूद एक छोटी सी ग्रंथि (ग्लैंड) होती है, जो बिल्कुल किसी तितली जैसी दिखती है। इसका असली काम कुछ खास तरह के केमिकल (हार्मोन) बनाना है, जो हमारे शरीर के इंजन (मेटाबॉलिज्म) को चलाते हैं। मेटाबॉलिज्म का सीधा सा मतलब है कि हम जो खाना खाते हैं, शरीर उसे कितनी जल्दी ताकत (एनर्जी) में बदलता है।

थायरॉइड के प्रमुख प्रकार और उनकी पहचान

ये बीमारी मुख्य रूप से दो तरह की होती है। ये इस बात पर तय होता है कि आपके गले की ये ग्रंथि कितनी तेज या सुस्त काम कर रही है:

  • हाइपोथायरॉइडिज़्म (सुस्त थायरॉइड): आजकल यह सबसे ज्यादा देखने में आने वाली बीमारी है। इसमें आपकी थायरॉइड ग्रंथि सुस्त पड़ जाती है और जरूरत के मुताबिक हार्मोन नहीं बना पाती। इससे शरीर का पूरा इंजन धीमा पड़ जाता है। नतीजा? आपका वजन अचानक तेजी से बढ़ने लगता है, दिन भर भयंकर थकावट रहती है, पेट साफ नहीं होता (कब्ज) और दूसरों के मुकाबले आपको बहुत ज्यादा ठंड लगती है।
  • हाइपरथायरॉइडिज्म (अति-सक्रिय या तेज थायरॉइड): इसमें आपकी ग्रंथि पगला जाती है और जरूरत से बहुत ज्यादा हार्मोन खून में फेंकने लगती है। इससे शरीर का इंजन हद से ज्यादा तेज दौड़ने लगता है। इसके मरीजों का वजन अचानक बहुत तेजी से गिरने लगता है, हर वक्त एक अजीब सी घबराहट रहती है, दिल ऐसे धड़कता है जैसे बाहर आ जाएगा और इन्हें भयंकर गर्मी लगती है।

थायरॉइड के आम लक्षण (इसे कैसे पहचानें?)

थायरॉइड शरीर के किसी एक हिस्से की नहीं, बल्कि सिर से लेकर पैर तक पूरे शरीर की बीमारी है। इसलिए इसके इशारे भी पूरे शरीर में दिखते हैं:

शारीरिक लक्षण (शरीर के इशारे)

  • थकावट और भारीपन: रात भर अच्छी नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही शरीर में भारीपन और सुस्ती लगना।
  • वजन का ऊपर-नीचे होना: बिना डाइट या रूटीन बदले अचानक से फूलना या एकदम सूखकर कांटा हो जाना।
  • बाल और स्किन की हालत खराब होना: बालों का गुच्छों में गिरना, पतला होना और स्किन का एकदम सूखा, खुरदुरा और बेजान हो जाना।
  • सर्दी-गर्मी न झेल पाना: दूसरों के मुकाबले बहुत ज्यादा ठंड लगना या फिर जरा सी गर्मी में पसीने से नहा लेना।

अंदरूनी और दिमागी लक्षण

  • मूड खराब रहना और टेंशन: बिना किसी बात के चिड़चिड़ापन, हर वक्त घबराहट (टेंशन) या गहरे डिप्रेशन में रहना।
  • पेट की दिक्कतें: पुरानी से पुरानी कब्ज का पीछा न छोड़ना या हाजमे का बिल्कुल बैठ जाना।
  • औरतों में पीरियड्स की गड़बड़ी: पीरियड्स का टाइम पर न आना, बहुत ज्यादा या एकदम कम ब्लीडिंग होना।
  • गले में भारीपन: गले के निचले हिस्से में सूजन सी लगना या आवाज का भारी और बदल जाना।

रोज सुबह खाई जाने वाली थायरॉइड की गोली आखिर करती क्या है?

थायरॉइड की दवा (जैसे लेवोथायरोक्सिन) असल में कोई 'इलाज' नहीं, बल्कि एक 'हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी' है।

  • बाहरी आपूर्ति (External Supply): जब आपकी थायरॉइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती, तो ये गोलियाँ शरीर को वह हार्मोन बाहर से उपलब्ध कराती हैं।
  • स्तर को स्थिर रखना: यह दवा रक्त में हार्मोन के स्तर को कृत्रिम रूप से सामान्य बनाए रखती है, ताकि शरीर के अंग (हृदय, मस्तिष्क, पाचन) सामान्य रूप से काम कर सकें।
  • कंट्रोल, सुधार नहीं: यह गोली ग्रंथि (Gland) को ठीक करने का काम नहीं करती, बल्कि केवल उस कमी को पूरा करती है जो शरीर के अंदर हो रही है।

क्या थायरॉइड की गोली सच में जिंदगी भर खानी पड़ेगी?

थायरॉइड के हर मरीज के दिमाग में हथौड़े की तरह बजता है। अंग्रेजी दवा (एलोपैथी) और अपने आयुर्वेद में इसके जवाब बिल्कुल अलग हैं:

अंग्रेजी डॉक्टरों (एलोपैथी) का क्या कहना है? 

ज्यादातर मामलों में डॉक्टर आपको यही कहते हैं कि भई, यह गोली तो अब जिंदगी भर चलेगी। इसके पीछे उनकी ये वजहें होती हैं:

  • ग्रंथि का काम न करना: अगर आपकी ग्रंथि अंदर से बिल्कुल डैमेज हो चुकी है और उसने काम करना हमेशा के लिए बंद कर दिया है।
  • शरीर का आदी हो जाना: जब शरीर को सालों तक बाहर से गोली के जरिए बैठे-बिठाए हार्मोन मिलने लगता है, तो अंदर की ग्रंथि पूरी तरह आलसी हो जाती है और खुद से कुछ भी बनाना बंद कर देती है।
  • खतरा न लेना: गोली छोड़ते ही थकावट, मोटापा और सारे पुराने लक्षण तुरंत वापस आ सकते हैं, जिससे शरीर में दूसरी बड़ी बीमारियां खड़ी हो सकती हैं। इसलिए डॉक्टर गोली बंद करने का रिस्क नहीं लेते।

आयुर्वेद में थायरॉइड को कैसे देखा जाता है?

आयुर्वेद थायरॉइड को सिर्फ गले की एक ग्रंथि (ग्लैंड) की बीमारी मानकर नहीं छोड़ देता। हमारे वैद्यों के हिसाब से, यह शरीर के तीन मेन पिलर्स वात (गैस), पित्त (गर्मी) और कफ तथा पाचन अग्नि के बीच का पूरा तालमेल बिगड़ने की निशानी है। आयुर्वेद इस बीमारी को ऊपर से नहीं दबाता, बल्कि इसकी एकदम जड़ तक जाता है।

वात-पित्त-कफ का बैलेंस और हार्मोन्स की गड़बड़ी: शरीर में हार्मोन्स का सही बनना इस बात पर टिका है कि आपके शरीर का अंदरूनी बैलेंस कैसा है:

  • कफ का भड़कना और सुस्ती: जब शरीर में 'कफ' जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है, तो शरीर में भारीपन और आलस भर जाता है। यही वजह है कि सुस्त थायरॉइड (हाइपोथायरॉइड) वाले मरीजों में कफ बहुत ज्यादा होता है, जिससे उनका वजन तेजी से बढ़ता है और हर वक्त थकावट रहती है।
  • वात और पित्त का असर: शरीर में वात बढ़ने से अंदरूनी सूखापन आता है और हार्मोन्स के सिग्नल डगमगा जाते हैं। वहीं, गर्मी (पित्त) बिगड़ने से शरीर का तापमान और खाना पचाने की स्पीड दोनों का कबाड़ा हो जाता है।

पेट की आग (पाचन), शरीर का आम: आयुर्वेद के नजरिए से थायरॉइड की सबसे बड़ी जड़ 'मंदाग्नि' यानी आपके सुस्त पड़े पाचन में छिपी है:

  • आम बनना: जब आपकी पाचन अग्नि ठंडी पड़ जाती है, तो खाया हुआ खाना ठीक से पचता नहीं। यही आधा-अधूरा पचा हुआ खाना पेट में सड़कर एक चिपचिपा और जहरीला तत्व बना देता है, जिसे हम 'आम' कहते हैं।
  • नसों और रास्तों का जाम होना: यह चिपचिपा तत्व शरीर की पतली-पतली नसों और रास्तों में जाकर उन्हें बिल्कुल जाम कर देता है। ये वही रास्ते हैं जहां से शरीर के हर अंग तक हार्मोन्स और असली पोषण पहुंचती है।
  • इंजन (मेटाबॉलिज्म) का बैठ जाना: जब ये सारे रास्ते ब्लॉक हो जाते हैं, तो गले की थायरॉइड ग्रंथि को ना तो सही सिग्नल मिल पाता है और ना ही पोषण। नतीजा? शरीर का पूरा इंजन बैठ जाता है। इसी पूरी गड़बड़ी को आज की अंग्रेजी दवाइयों में 'थायरॉइड' कहा जाता है।

थायरॉइड को जड़ से मिटाने का आयुर्वेदिक तरीका

आयुर्वेद में हम थायरॉइड को सिर्फ हार्मोन की कमी या ज्यादती नहीं मानते। हमारा मानना है कि यह शरीर के अंदर की बड़ी गड़बड़ी है खासकर बढ़ा हुआ कफ-वात, ठंडा पड़ा पाचन। हमारा मकसद सिर्फ बाहर से गोली देकर हार्मोन कंट्रोल करना नहीं है, बल्कि उस सूख चुकी ग्रंथि में दोबारा जान फूंकना है ताकि वो अपना काम खुद कर सके।

  • कफ-वात को शांत करना और ग्रंथि को ताकत देना: थायरॉइड में सबसे ज्यादा कफ और वात (गैस) का बैलेंस बिगड़ता है। कफ बढ़ने से पाचन सुस्त होता है और वात बिगड़ने से हार्मोन्स का बहाव रुक जाता है।आयुर्वेद में ऐसी खास देसी दवाइयां दी जाती हैं जो इन दोनों को शांत करती हैं और थायरॉइड ग्रंथि की अंदरूनी सर्विसिंग करके उसे दोबारा फिट बनाती हैं।
  • पाचन सुधारना और अंदरूनी डिटॉक्स: ठंडे पड़े पाचन से जो टॉक्सिन बना है, वही तो सारे रास्तों को जाम कर रहा है। रास्तों के बंद होने से हार्मोन्स का आना-जाना रुक जाता है। हमारे इलाज से सबसे पहले पेट की आग को तेज किया जाता है और शरीर का सारा टॉक्सिन बाहर निकाला जाता है, ताकि आपका इंजन फिर से फर्राटे भर सके।
  • शरीर का इंजन (मेटाबॉलिज्म) सेट करना: थायरॉइड का सीधा कनेक्शन आपकी एनर्जी और फैट पचाने की स्पीड से है। आयुर्वेदिक इलाज से इस सुस्त पड़े इंजन को दोबारा स्टार्ट किया जाता है। जैसे ही इंजन पटरी पर आता है, थकावट गायब हो जाती है और तेजी से बढ़ता या घटता वजन अपने आप नॉर्मल होने लगता है।
  • अंदरूनी ताकत (ओजस) वापस लाना: लंबे समय तक थायरॉइड रहने से शरीर अंदर से बिल्कुल खोखला और कमजोर हो जाता है। इलाज का एक बड़ा हिस्सा शरीर को अंदर से असली पोषण देना है, ताकि आपकी वो पुरानी ताकत (ओजस) वापस लौट आए।
  • दिमाग और शरीर का बैलेंस: हर वक्त की टेंशन, गुस्सा और घबराहट सीधे थायरॉइड पर वार करते हैं। इसलिए सिर्फ दवा से काम नहीं चलता। आयुर्वेद में सही दिनचर्या, हल्के-फुल्के योग और ध्यान (मेडिटेशन) के जरिए दिमाग को रिलैक्स किया जाता है। जब दिमाग शांत रहेगा, तो शरीर के हार्मोन्स खुद-ब-खुद लाइन पर आ जाएंगे।

थायरॉइड को ठीक करने वाली देसी औषधियाँ

आयुर्वेद में थायरॉइड का इलाज सिर्फ बाहर से गोली देकर हार्मोन्स को कुछ दिन के लिए कंट्रोल करना नहीं है। इसका असली मकसद आपके गले की ग्रंथि को दोबारा ताकत देना और आपके पाचन के इंजन को एकदम सेट करना है:

  • कांचनार गुग्गुल: गले की किसी भी ग्रंथि या उसमें आई सूजन के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। यह थायरॉइड ग्रंथि की सूजन को उतारती है और उसे अंदर से इतना सपोर्ट देती है कि वो अपना काम खुद कर सके।
  • अश्वगंधा: थायरॉइड की वजह से जो दिन भर थकावट और कमजोरी छाई रहती है, अश्वगंधा उसे जड़ से मिटा देता है। यह शरीर में फुर्ती भरता है और ऊपर-नीचे हो रहे हार्मोन्स को वापस पटरी पर ले आता है।
  • त्रिफला: थायरॉइड में सबसे ज्यादा आपका पाचन बिगड़ता है और कब्ज रहती है। त्रिफला पेट की अंदर से सफाई करता है और शरीर में जमे सारे टॉक्सिन्स को बाहर निकालकर पाचन अग्नि को तेज कर देता है।

थायरॉइड को  ठीक करने के लिए असरदार आयुर्वेदिक थेरेपी

सिर्फ खाने वाली दवाइयों से ही नहीं, शरीर की पूरी अंदरूनी धुलाई करने और सुस्त पड़ी ग्रंथि को दोबारा जगाने के लिए आयुर्वेद में कुछ खास बाहरी तरीके (पंचकर्म) भी अपनाए जाते हैं जो बहुत गहराई में काम करते हैं:

  • हल्के तेल की मालिश (अभ्यंग): जब खास जड़ी-बूटियों वाले गुनगुने तेल से तसल्ली से पूरे शरीर की मालिश की जाती है, तो दिमाग की सारी टेंशन हवा हो जाती है। इससे बंद नसों में खून का बहाव तेज होता है और हार्मोन्स अपने आप सुधरने लगते हैं।
  • देसी भाप (स्वेदन): मालिश के बाद जब शरीर को जड़ी-बूटियों के पानी से बनी हल्की भाप दी जाती है, तो पसीने के रास्ते शरीर का सारा चिपचिपा कचरा बाहर निकल जाता है और आपका सुस्त पड़ा मेटाबॉलिज्म (इंजन) एकदम स्टार्ट हो जाता है।
  • बस्ती: शरीर में गैस (वात) का भड़कना हार्मोन्स को रोक देता है। बस्ती के जरिए इस गैस को शांत किया जाता है, जिससे हार्मोन्स का पूरा बैलेंस सुधर जाता है और पुरानी से पुरानी बीमारी टूट जाती है।
  • पेट और शरीर की डीप-क्लीनिंग (वमन और विरेचन): थायरॉइड में शरीर के अंदर बहुत ज्यादा भारीपन (कफ) और गर्मी (पित्त) भर जाती है। इन थेरेपी के जरिए शरीर की इस गंदगी और जमे हुए कफ को बाहर खींच लिया जाता है। आप इसे शरीर की पूरी सर्विसिंग समझ सकते हैं। 

पेशेंट टेस्टिमोनियल

मैं फरीदाबाद से श्री सुनील सिंह हूँ। कुछ समय पहले मेरा वजन अचानक बढ़ने लगा, जिसके बाद जांच कराने पर पता चला कि मुझे थायरॉइड की समस्या है। मैंने एलोपैथिक दवाइयाँ लीं, लेकिन उनसे मेरे वजन और स्वास्थ्य में कोई खास सुधार नहीं हुआ।

इसके बाद मेरी हालत और बिगड़ गई और दोबारा जांच में पता चला कि मुझे फैटी लिवर (ग्रेड 3) और किडनी से जुड़ी कुछ समस्याएँ भी हैं। इस दौरान मैं बहुत तनाव में रहने लगा और मेरी नींद भी प्रभावित हो गई।

फिर मैंने जीवा आयुर्वेद से संपर्क किया। यहाँ डॉक्टरों ने मेरी पूरी जांच करके मेरी समस्या के मूल कारण को समझा और उसी के अनुसार इलाज शुरू किया।

मुझे आयुर्वेदिक दवाइयों के साथ-साथ मेरे लिए विशेष डाइट प्लान भी दिया गया। धीरे-धीरे मेरी सेहत में सुधार हुआ और मेरा फैटी लिवर ग्रेड 3 से घटकर ग्रेड 1 हो गया।

आज मैं पहले से काफी बेहतर महसूस करता हूँ और आयुर्वेदिक जीवनशैली को सभी को अपनाने की सलाह देता हूँ।

थायरॉइड डाइट गाइड: क्या खाएं और किन चीज़ों से बचें

थायरॉइड को नियंत्रित करने में खान-पान की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। सही आहार मेटाबॉलिज्म को संतुलित करता है और हार्मोनल सिस्टम को सपोर्ट करता है। नीचे सरल तरीके से बताया गया है कि क्या खाना चाहिए और किन चीज़ों से बचना चाहिए:

क्या खाएं (Dos)

ये खाद्य पदार्थ शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित करने और ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं:

  • ताजे फल: सेब, पपीता, अनार, नाशपाती
  • सब्जियां: लौकी, तोरई, गाजर, चुकंदर, हरी पत्तेदार सब्जियां
  • अनाज: जौ, दलिया, ओट्स, ब्राउन राइस
  • प्रोटीन स्रोत: मूंग दाल, मसूर दाल, पनीर, दूध (यदि सूट करे)
  • मेवे और बीज: भीगे हुए बादाम, अखरोट, अलसी के बीज
  • स्वस्थ वसा: देसी गाय का घी, नारियल तेल
  • तरल पदार्थ: गुनगुना पानी, हर्बल चाय, नारियल पानी

क्या न खाएं (Don’ts)

ये चीज़ें थायरॉइड हार्मोन और मेटाबॉलिज्म को असंतुलित कर सकती हैं:

  • अत्यधिक गोइट्रोजन युक्त कच्चे खाद्य: कच्ची पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकली (ज्यादा मात्रा में)
  • प्रोसेस्ड और जंक फूड: पैकेट वाले स्नैक्स, बर्गर, पिज्जा, मैदा से बनी चीज़ें
  • अधिक चीनी और मीठा: केक, मिठाइयाँ, शुगर ड्रिंक्स
  • कैफीन का अधिक सेवन: चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक्स
  • सोया उत्पाद अधिक मात्रा में: सोया मिल्क, सोया प्रोटीन (विशेषकर बिना सलाह के)
  • तला-भुना और भारी भोजन: जो पाचन को धीमा करता है
  • रात में भारी या देर से खाना: इससे मेटाबॉलिज्म और हार्मोन बैलेंस प्रभावित होता है

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

  • थायरॉइड की समस्या लगातार बनी रहे या रिपोर्ट्स असामान्य हों
  • अत्यधिक थकान, वजन में अचानक बदलाव या बाल झड़ना बढ़ जाए
  • दिल की धड़कन असामान्य लगे या शरीर में कंपन महसूस हो
  • दवा लेने के बावजूद लक्षणों में सुधार न हो या बार-बार बदलाव करना पड़े
  • गर्दन में सूजन या गले में असहजता महसूस हो
  • नींद, तनाव या हार्मोनल बदलाव के साथ स्थिति बिगड़ रही हो
  • पीरियड्स अनियमित हों या महिलाओं में हार्मोनल लक्षण बढ़ें
  • बिना कारण वजन बहुत तेजी से बढ़े या घटे

निष्कर्ष

थायरॉइड केवल हार्मोन का असंतुलन नहीं, बल्कि शरीर के मेटाबॉलिज्म, पाचन और दोषों के संतुलन से जुड़ी स्थिति है। आधुनिक चिकित्सा जहां हार्मोन को बाहरी रूप से नियंत्रित करती है, वहीं आयुर्वेद शरीर के अंदर के असंतुलन को सुधारकर दीर्घकालिक संतुलन स्थापित करने पर काम करता है। सही आहार, दिनचर्या और उपचार के साथ थायरॉइड को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, लंबे समय तक तनाव रहने से हार्मोनल संतुलन प्रभावित होता है। इससे थायरॉइड के लक्षण और अधिक बढ़ सकते हैं।

हाँ, कमजोर पाचन और धीमी अग्नि थायरॉइड को प्रभावित कर सकती हैं। मेटाबॉलिज्म सीधे पाचन से जुड़ा होता है।

आयोडीन की कमी हाइपोथायरॉइड का एक कारण हो सकती है। हालांकि यह अकेला कारण नहीं होता, अन्य कारक भी जिम्मेदार होते हैं।

हाँ, नियमित हल्का व्यायाम मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है। इससे थायरॉइड के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

हाँ, यह समस्या दोनों में हो सकती है। लेकिन महिलाओं में इसके मामले अधिक देखने को मिलते हैं।

 हाँ, खराब नींद हार्मोनल संतुलन बिगाड़ सकती है। इससे थायरॉइड के लक्षण और खराब हो सकते हैं।

हाँ, हार्मोनल असंतुलन के कारण बाल झड़ना एक आम लक्षण है। सही उपचार से इसमें सुधार हो सकता है।

कुछ मामलों में रिपोर्ट और लक्षणों के आधार पर डॉक्टर दवा की डोज़ बदलते हैं। यह स्थिति के अनुसार किया जाता है।

 हाँ, खासकर हाइपरथायरॉइड में दिल की धड़कन तेज या अनियमित हो सकती है। यह एक महत्वपूर्ण लक्षण है।

यह व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में जीवनशैली और आयुर्वेदिक सपोर्ट से सुधार संभव है, लेकिन चिकित्सकीय सलाह आवश्यक होती है।

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