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Uric Acid और Knee Pain– एक की दवा दूसरे को क्यों नहीं ठीक करती?

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 07 May, 2026
  • category-iconUpdated on 07 May, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5007

उठते-बैठते घुटनों से आने वाली कट-कट की आवाज़, सीढ़ियां चढ़ते समय होने वाली चुभन और सुबह सोकर उठने पर जोड़ों में महसूस होने वाली भयंकर जकड़न आजकल यह हर घर की कहानी बन चुकी है। जैसे ही हमारे घुटनों में दर्द शुरू होता है, हम अक्सर खुद ही डॉक्टर बन जाते हैं। कोई हमें कैल्शियम की गोलियां खाने की सलाह देता है, तो कोई तुरंत यूरिक एसिड (Uric Acid) का टेस्ट करवाने को कह देता है। रिपोर्ट में अगर यूरिक एसिड थोड़ा सा भी बढ़ा हुआ आ जाए, तो हम मान लेते हैं कि यही हमारे घुटने के दर्द का असली विलेन है और यूरिक एसिड कम करने की दवाइयां खाना शुरू कर देते हैं।

लेकिन, महीनों दवा खाने के बाद भी घुटने का दर्द टस से मस नहीं होता। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? क्योंकि हर घुटने का दर्द यूरिक एसिड नहीं होता, और हर यूरिक एसिड की दवा आपके घिसते हुए घुटनों को नहीं बचा सकती। घुटने घिसना (Osteoarthritis) एक 'मैकेनिकल' समस्या है, जबकि यूरिक एसिड का बढ़ना (Gout) एक 'मेटाबॉलिक' समस्या है। इन दोनों का कारण अलग है, प्रकृति अलग है, तो फिर दवा एक कैसे हो सकती है? आइए समझते हैं कि आपका घुटना असल में किस बीमारी का शिकार है और क्यों सही निदान (Diagnosis) के बिना आप सिर्फ अंधेरे में तीर चला रहे हैं।

असली कारण: घुटने का घिसना और यूरिक एसिड का बढ़ना दो अलग बातें हैं

घुटने के दर्द का सही इलाज तभी संभव है जब आप इसके पीछे के विज्ञान को समझें। आइए देखते हैं कि ये दोनों समस्याएं कैसे अलग हैं:

  • घुटने का घिसना (Osteoarthritis / Mechanical Wear & Tear): हमारे घुटने के जोड़ों के बीच एक गद्दी (Cartilage) और एक तरल पदार्थ (Synovial Fluid) होता है जो शॉक एब्जॉर्बर का काम करता है। बढ़ती उम्र, बढ़ा हुआ वज़न (Obesity), या गलत पॉश्चर के कारण जब यह गद्दी घिसने लगती है और तरल पदार्थ सूखने लगता है, तो हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं। यह एक मैकेनिकल समस्या है। इसमें यूरिक एसिड की दवा खाने से कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि वह आपकी घिसी हुई गद्दी (Cartilage) को वापस नहीं ला सकती।
  • यूरिक एसिड का बढ़ना (Gout / Metabolic Disorder): यूरिक एसिड हमारे शरीर में प्यूरिन (Purine) नामक प्रोटीन के टूटने से बनता है। सामान्यतः हमारी किडनी इसे फिल्टर करके पेशाब के ज़रिए बाहर निकाल देती है। लेकिन जब खराब मेटाबॉलिज़्म या गलत खानपान (जैसे बहुत ज़्यादा रेड मीट, शराब, या दालें) के कारण किडनी इसे बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह एसिड क्रिस्टल (Crystals) का रूप लेकर जोड़ों में जमा होने लगता है। ये सुई जैसे क्रिस्टल जोड़ों में भयंकर चुभन और सूजन (Inflammation) पैदा करते हैं। अगर आपके घुटने की गद्दी सुरक्षित है, लेकिन दर्द यूरिक एसिड के कारण है, तो घुटने बदलवाने (Knee Replacement) या कैल्शियम खाने से यह दर्द कभी नहीं जाएगा।

इस समस्या के मुख्य प्रकार: आपका शरीर किस श्रेणी में है?

कारणों के आधार पर घुटने और जोड़ों के दर्द को मुख्य रूप से 3 प्रकारों में बाँटा जा सकता है:

  1. ऑस्टियोआर्थराइटिस (Wear & Tear Arthritis): यह मुख्य रूप से बढ़ती उम्र और अधिक वज़न के कारण होता है। इसमें चलने, सीढ़ियां चढ़ने या उकड़ू बैठने पर घुटनों में तेज़ दर्द होता है। घुटनों से 'कट-कट' की आवाज़ (Crepitus) आती है। आराम करने पर इसमें कुछ राहत मिलती है।
  2. गाउट या यूरिक एसिड गठिया (Metabolic Arthritis): यह खराब डाइट और कमज़ोर किडनी फंक्शन के कारण होता है। इसमें दर्द अचानक उठता है, खासकर रात में। जोड़ (अक्सर पैर का अंगूठा या घुटना) लाल हो जाता है, सूज जाता है और छूने पर गर्म महसूस होता है।
  3. रुमेटीइड आर्थराइटिस (Autoimmune Inflammatory Pain): यह तब होता है जब आपके शरीर का इम्यून सिस्टम ही आपके जोड़ों पर हमला कर देता है। इसमें सुबह उठने पर जोड़ों में भयंकर जकड़न (Morning Stiffness) होती है और यह दर्द शरीर के दोनों तरफ (जैसे दोनों घुटनों या दोनों हाथों में) एक साथ होता है।

अगर इसे नॉर्मल मानकर इग्नोर किया, तो क्या होंगी जटिलताएं?

अगर आपने सही कारण जाने बिना सिर्फ पेनकिलर्स से दर्द को दबाया, तो ये भयानक जटिलताएं जन्म ले सकती हैं:

  • जोड़ों की विकृति (Joint Deformity): ऑस्टियोआर्थराइटिस को नज़रअंदाज़ करने से कार्टिलेज पूरी तरह खत्म हो सकता है, जिससे पैर टेढ़े (Bow-legged) हो सकते हैं और इंसान चलने-फिरने के लिए पूरी तरह दूसरों पर मोहताज हो सकता है।
  • किडनी स्टोन और डैमेज (Kidney Complications): अगर यूरिक एसिड का स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहे, तो ये क्रिस्टल केवल जोड़ों में ही नहीं, बल्कि किडनी में जमा होकर पथरी (Kidney Stones) बना सकते हैं और धीरे-धीरे किडनी को डैमेज कर सकते हैं।
  • क्रोनिक डिप्रेशन और लाचारी: लगातार दर्द में रहने और अपनी रोज़मर्रा की गतिविधियों (जैसे टॉयलेट जाना या ज़मीन पर बैठना) को न कर पाने की लाचारी इंसान को क्रोनिक डिप्रेशन का शिकार बना सकती है।

आयुर्वेद इसे कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे ऑस्टियोआर्थराइटिस और गाउट कहता है, आयुर्वेद उसे शरीर के दोषों (वात, पित्त, कफ) और दूषित रक्त के चश्मे से गहराई से समझता है:

  • संधिगत वात (Osteoarthritis): आयुर्वेद के अनुसार बढ़ती उम्र या गलत खानपान से शरीर में 'वात' (हवा और रूखापन) बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ वात घुटनों के जोड़ों में मौजूद 'श्लेषक कफ' (Lubrication) को सुखा देता है। चिकनाई खत्म होने से संधियों (Joints) में घर्षण होता है, जिसे संधिगत वात कहते हैं।
  • वातरक्त (Uric Acid / Gout): जब आप बहुत अधिक तीखा, खट्टा, या गरिष्ठ भोजन करते हैं, तो शरीर का 'रक्त' (Blood) दूषित हो जाता है। इसके साथ ही जब 'वात' दोष भी भड़क जाता है, तो यह दूषित रक्त के प्रवाह को रोक देता है। यह वात और दूषित रक्त का मिश्रण (वातरक्त) गुरुत्वाकर्षण के कारण सबसे पहले पैरों के अंगूठे या घुटनों में जाकर बैठ जाता है और यूरिक एसिड क्रिस्टल के रूप में सूजन पैदा करता है।
  • आम का संचय (Toxins & Inflammation): खराब पाचन (मंदाग्नि) के कारण बिना पचा हुआ भोजन 'आम' (Toxins) बन जाता है। यह आम रक्त के ज़रिए जोड़ों में जाकर बैठ जाता है, जिससे वहाँ सूजन और जकड़न (Amavata / Rheumatoid) पैदा होती है।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण

हम आपको केवल पेनकिलर देकर दर्द सुन्न करने की सलाह नहीं देते। हमारा लक्ष्य यह पहचानना है कि आपको 'संधिगत वात' है या 'वातरक्त', और उसी के अनुसार जड़ पर वार करना है।

  1. आम पाचन और रक्त शोधन (Detoxification & Blood Purification): अगर दर्द यूरिक एसिड (वातरक्त) के कारण है, तो सबसे पहले रक्त को साफ करने और किडनी के फंक्शन को सुधारने वाली औषधियां दी जाती हैं ताकि जमा हुआ यूरिक एसिड पेशाब के रास्ते बाहर निकल सके
  2. वात शमन और स्नेहन (Lubrication for Joints): अगर दर्द घुटने घिसने (संधिगत वात) के कारण है, तो भड़के हुए वात को शांत करने और जोड़ों के बीच दोबारा चिकनाई (Synovial fluid) पैदा करने के लिए विशेष हर्बल फॉर्मूलेशन और औषधीय घृत (Ghee) का प्रयोग किया जाता है।
  3. मेद शमन (Weight Management): वज़न कम करने के लिए डाइट दी जाती है, जिससे घुटनों पर पड़ने वाला मैकेनिकल लोड कम होता है।

घुटने के दर्द और यूरिक एसिड को कंट्रोल करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

दर्द और सूजन से बचने के लिए आपकी डाइट बीमारी के अनुसार होनी चाहिए। ऑस्टियोआर्थराइटिस और यूरिक एसिड की डाइट में काफी अंतर होता है।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - वात शामक और यूरिक एसिड कम करने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - सूजन और यूरिक एसिड बढ़ाने वाले)
सुपरफूड्स और वसा गाय का शुद्ध घी, भुने हुए अलसी के बीज, तिल का तेल, अखरोट। रिफाइंड ऑयल, डालडा, बाज़ार का डीप-फ्राइड जंक फूड।
अनाज (Grains) पुराना चावल, ज्वार, बाजरा, ओट्स, मूंग दाल (छिलके वाली)। मैदा, वाइट ब्रेड, उड़द की दाल, राजमा, छोले (ये यूरिक एसिड बढ़ाते हैं)।
सब्ज़ियाँ लौकी, तरोई, परवल, सहजन (Drumsticks), बथुआ, धनिया। अत्यधिक पालक, टमाटर के बीज, कटहल, मशरूम (यूरिक एसिड के लिए नुकसानदायक)।
पेय पदार्थ हल्दी-अदरक का पानी, गोखरू का काढ़ा (यूरिक एसिड के लिए), गर्म दूध। कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेटबंद जूस, शराब (Alcohol यूरिक एसिड का सबसे बड़ा दुश्मन है)।
फल (Fruits) पपीता, सेब, चेरी (Cherries यूरिक एसिड कम करने में जादुई हैं), अनानास। खट्टे फल (कुछ स्थितियों में), ठंडे और डिब्बाबंद फल।
मसाले (Spices) गिलोय, सोंठ (सूखा अदरक), लहसुन, मेथी दाना, अजवायन। बाज़ार के तेज़ कृत्रिम मसाले, अत्यधिक लाल मिर्च।

दर्द और इन्फ्लेमेशन दूर करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक औषधियाँ

  • गिलोय (Giloy / Guduchi): यूरिक एसिड (वातरक्त) को जड़ से खत्म करने के लिए गिलोय सबसे शक्तिशाली औषधि है। यह रक्त को शुद्ध करती है और इन्फ्लेमेशन को कम करती है।
  • कैशोर गुग्गुलु (Kaishore Guggulu): यह विशेष रूप से यूरिक एसिड और गाउट के लिए बनी एक शास्त्रीय औषधि है जो जोड़ों में जमे क्रिस्टल्स को पिघला कर बाहर निकालती है।
  • योगराज गुग्गुलु (Yogaraj Guggulu): अगर दर्द घुटने के घिसने (संधिगत वात) के कारण है, तो यह औषधि वात को शांत करती है और हड्डियों को ताकत देती है।
  • पुनर्नवा (Punarnava): यह किडनी के फंक्शन को उत्तेजित करती है जिससे शरीर में जमा अतिरिक्त यूरिक एसिड और टॉक्सिन्स मूत्र के रास्ते बाहर निकल जाते हैं।
  • शल्लकी (Boswellia): शरीर की अंदरूनी सूजन को कम करने के लिए यह सबसे बेहतरीन प्राकृतिक एंटी-इन्फ्लेमेटरी जड़ी-बूटी है।

पंचकर्म थेरेपी: शरीर का डीप डिटॉक्स और दर्द निवारण

जब घुटनों का दर्द और जकड़न बहुत बढ़ जाए, तो सिर्फ दवाएं काफी नहीं होतीं; पंचकर्म इस दर्द को शरीर से बाहर खींच निकालता है।

  • जानु बस्ती (Janu Basti): ऑस्टियोआर्थराइटिस के लिए यह एक चमत्कारिक थेरेपी है। इसमें घुटनों के ऊपर उड़द दाल के आटे का घेरा बनाकर उसमें गर्म औषधीय तेल (जैसे महानारायण तेल) भरा जाता है। यह तेल गहराई तक जाकर रूखे हो चुके घुटनों को चिकनाई देता है और कार्टिलेज को पोषण प्रदान करता है।
  • विरेचन (Virechana): यूरिक एसिड (वातरक्त) के मरीज़ों के लिए यह सबसे असरदार है। इसमें औषधियों के ज़रिए पेट साफ किया जाता है, जिससे शरीर का दूषित पित्त और रक्त शुद्ध होता है और यूरिक एसिड का स्तर तेज़ी से गिरता है।
  • पत्र पिंड स्वेद (Patra Pinda Sweda): दर्द निवारक जड़ी-बूटियों के पत्तों की पोटली बनाकर, उसे गर्म तेल में डुबोकर घुटनों की सिकाई की जाती है। यह रुकी हुई नसों को खोलता है और जकड़न को तुरंत खत्म करता है।

जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

हम केवल एक्स-रे या ब्लड रिपोर्ट देखकर आपको पेनकिलर्स देकर घर नहीं भेजते; हम आपकी प्रकृति और जीवनशैली की गहराई से जाँच करते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह समझना कि दर्द का कारण वात का प्रकोप (घिसाव) है, दूषित रक्त (यूरिक एसिड) है, या शरीर में फैला 'आम' (Toxins) है।
  • शारीरिक मूल्याँकन: आपके घुटनों की सूजन, चलने के तरीके (Gait), और वज़न के कारण घुटनों पर पड़ने वाले दबाव की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • लाइफस्टाइल और स्ट्रेस ऑडिट: आपकी डाइट में प्यूरिन कितना है? आपकी फिजिकल एक्टिविटी कितनी है? इन सभी पहलुओं का विश्लेषण करके ही इलाज शुरू किया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हम आपको दर्द के साथ जीने नहीं देंगे, हम आपके शरीर को अंदर से हील करेंगे।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर +919266714040 पर कॉल करें।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: अगर घुटने के दर्द के कारण चलना-फिरना मुश्किल है, तो घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात करें।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपके दोषों, यूरिक एसिड लेवल और घुटने की कंडीशन के अनुसार खास औषधियाँ, पंचकर्म (जैसे जानु बस्ती) और एक कस्टमाइज़्ड डाइट रूटीन तैयार किया जाता है।

ठीक होने में लगने वाला समय कितना है?

सूजन को खत्म होने और जोड़ों को दोबारा ताक़त मिलने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती 2-3 हफ्ते: जानु बस्ती, लेप और रक्त शोधक औषधियों से घुटने की भयंकर जकड़न और लालिमा में 40-50% तक कमी आएगी।
  • 1 से 2 महीने तक: डाइट और औषधियों के असर से शरीर का यूरिक एसिड लेवल सामान्य होने लगेगा। वज़न में हल्कापन आएगा और घुटनों से आने वाली कट-कट की आवाज़ कम होने लगेगी।
  • 3 से 6 महीने तक: वात पूरी तरह शांत हो जाएगा, कार्टिलेज को पोषण मिलेगा और यूरिक एसिड का मेटाबॉलिज़्म सुधर जाएगा। आप बिना दर्द के अपनी सामान्य जीवनशैली में वापस लौट आएंगे।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएं शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

हम आपके दर्द को केवल पेनकिलर्स या स्टेरॉयड इंजेक्शन से सुन्न नहीं करते।

  • जड़ से इलाज: हम सिर्फ दर्द निवारक नहीं देते; हम यह पहचानते हैं कि आपको यूरिक एसिड की दवा की ज़रूरत है या घुटने को पोषण देने की, और उसी जड़ पर प्रहार करते हैं।
  • विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का शानदार अनुभव है। हमने हज़ारों मरीज़ों को बिना घुटने की सर्जरी (Knee Replacement) के गंभीर गठिया से बाहर निकाला है।
  • कस्टमाइज्ड केयर: आपका दर्द मोटापे की वजह से है या क्रोनिक यूरिक एसिड की वजह से? हमारा इलाज बिल्कुल आपके मूल कारण (Root Cause) पर आधारित होता है।
  • प्राकृतिक और सुरक्षित: एलोपैथिक पेनकिलर्स और यूरिक एसिड की तेज़ दवाइयां लंबे समय तक लेने से किडनी डैमेज का खतरा रहता है, जबकि आयुर्वेदिक औषधियां पूरी तरह सुरक्षित हैं और किडनी के फंक्शन को बेहतर बनाती हैं।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Root Cause Healing)
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द कम करने के लिए पेनकिलर्स, स्टेरॉयड इंजेक्शन, और आखिर में घुटने बदलना (Knee Replacement)। आम' को बाहर निकालना, यूरिक एसिड कंट्रोल करना, और घुटने की गद्दी को प्राकृतिक रूप से पोषण देना।
शरीर को देखने का नज़रिया घुटने के दर्द को सिर्फ हड्डी या कार्टिलेज की लोकलाइज़्ड समस्या मानना। दर्द को शरीर के खराब मेटाबॉलिज़्म, दूषित रक्त और वात दोष का सम्मिलित परिणाम मानना।
डाइट पर विचार डाइट पर सामान्य सलाह, लेकिन मुख्य निर्भरता दवाओं पर। डाइट को ही आधी दवा माना जाता है (यूरिक एसिड और वात के अनुसार अलग-अलग डाइट)।
लंबा असर पेनकिलर्स से ऑर्गन डैमेज का खतरा और दर्द का बार-बार वापस आना। शरीर अंदर से मज़बूत होता है, मेटाबॉलिज़्म सुधरता है और दर्द स्थायी रूप से दूर होता है।

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए?

घुटने का दर्द भले ही उम्र या यूरिक एसिड की वजह से हो, लेकिन अगर आपको ये गंभीर संकेत (Red Flags) दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • घुटने का अचानक लॉक हो जाना (Locking of Knee): अगर चलते-चलते आपका घुटना अचानक एक ही जगह अटक जाए और सीधा या मुड़ न पाए।
  • अत्यधिक लालिमा और तेज़ बुखार: अगर घुटने का जोड़ आग की तरह गर्म हो, लाल हो जाए और आपको तेज़ बुखार आने लगे (यह गंभीर इन्फेक्शन या एक्यूट गाउट का संकेत हो सकता है)।
  • घुटने का आकार बदलना (Deformity): अगर आपको लगे कि आपके पैरों का आकार बदल रहा है या घुटने बाहर की तरफ मुड़ रहे हैं।
  • वज़न सहन न कर पाना: अगर आप अपने पैर पर ज़रा सा भी वज़न डालते हैं और भयंकर दर्द के कारण गिर जाते हैं।

निष्कर्ष

घुटने का दर्द सिर्फ यह नहीं बताता कि आप बूढ़े हो रहे हैं; कई बार यह बताता है कि आपके शरीर का मेटाबॉलिज़्म कमज़ोर हो चुका है। बिना यह जाने कि आपके दर्द का कारण बढ़ा हुआ यूरिक एसिड है या घिसता हुआ कार्टिलेज, खुद से दवाइयां खाना आपके घुटनों को हमेशा के लिए बर्बाद कर सकता है। जब तक आप सही कारण (Root Cause) को एड्रेस नहीं करेंगे, तब तक कोई भी पेनकिलर या कैल्शियम की गोली आपको राहत नहीं दे सकती। दर्द को दबाना छोड़ें और उसे सही निदान के साथ जड़ से मिटाने का संकल्प लें। अपनी डाइट को अपनी बीमारी के अनुसार चुनें, वज़न को कंट्रोल करें, और जीवा आयुर्वेद के पंचकर्म व शुद्ध औषधियों से अपने घुटनों को नया जीवन दें। सही दिशा में उठाया गया एक कदम आपको जीवन भर के दर्द और लाठी के सहारे से आज़ाद कर सकता है।

FAQs

अगर दर्द चलते-फिरते ज़्यादा होता है और आराम करने पर कम होता है, साथ ही घुटने से 'कट-कट' की आवाज़ आती है, तो यह ऑस्टियोआर्थराइटिस है। लेकिन अगर दर्द अचानक (विशेषकर रात में) भयंकर रूप से उठे, जोड़ लाल और गर्म हो जाए, तो यह यूरिक एसिड (गाउट) का संकेत है।

बिल्कुल नहीं। यूरिक एसिड एक प्रोटीन (प्यूरिन) मेटाबॉलिज़्म की समस्या है, इसका कैल्शियम से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं, घुटने घिसने में गद्दी (Cartilage) घिसती है, सिर्फ कैल्शियम खाने से कार्टिलेज वापस नहीं बनता। इसके लिए सही आयुर्वेदिक औषधियों की ज़रूरत होती है।

छिलके वाली मूंग दाल आप सीमित मात्रा में खा सकते हैं क्योंकि यह पचने में हल्की होती है। लेकिन उड़द की दाल, राजमा, छोले और चना पूरी तरह बंद कर देने चाहिए क्योंकि इनमें प्यूरिन की मात्रा बहुत अधिक होती है जो यूरिक एसिड बढ़ाती है।

अगर दर्द ऑस्टियोआर्थराइटिस (वात) के कारण है, तो गर्म औषधीय तेल से मालिश बहुत फायदेमंद है। लेकिन अगर दर्द एक्यूट गाउट (यूरिक एसिड) या रुमेटीइड आर्थराइटिस के कारण है और घुटने में भयंकर लालिमा/सूजन है, तो मालिश करने से दर्द और बढ़ सकता है।

जानु बस्ती में घुटने के दर्द वाले हिस्से पर गर्म औषधीय तेल को रोका जाता है। यह तेल त्वचा और मांसपेशियों के भीतर गहराई तक समाकर वहाँ मौजूद सूजन को खींच लेता है, रूखे हो चुके कार्टिलेज को चिकनाई देता है और दर्द में तुरंत जादुई राहत देता है।

जी हाँ। भरपूर मात्रा में पानी पीने से किडनी को शरीर से यूरिक एसिड को फ्लश आउट (Flush out) करने में मदद मिलती है। आप पानी में थोड़ा सा गोखरू या गिलोय उबालकर भी पी सकते हैं।

बिल्कुल! वज़न कम होने से घुटनों पर पड़ने वाला मैकेनिकल दबाव कम होता है जिससे ऑस्टियोआर्थराइटिस में राहत मिलती है। साथ ही, फैट कम होने से शरीर का मेटाबॉलिज़्म सुधरता है जिससे यूरिक एसिड का स्तर भी नियंत्रित रहता है।

टमाटर में प्यूरिन कम होता है, लेकिन कुछ शोध और आयुर्वेदिक अनुभव बताते हैं कि टमाटर (विशेषकर इसके बीज) यूरिक एसिड के स्तर को ट्रिगर कर सकते हैं। इसलिए गाउट के मरीज़ों को इसका सेवन कम करना चाहिए।

बिल्कुल! अपनी कुर्सी पर लगातार पैर लटका कर न बैठें। पैरों के नीचे एक छोटा स्टूल रखें ताकि घुटनों को सपोर्ट मिले। हर 45 मिनट में एक बार खड़े होकर थोड़ा चलें जिससे जोड़ों में ब्लड सर्कुलेशन बना रहे।

एलोपैथी अक्सर लक्षणों (Symptoms) को दबाने के लिए पेनकिलर्स और यूरिक एसिड दबाने वाली दवाएं देती है, जो दवा बंद करते ही वापस आ जाता है। जीवा आयुर्वेद नाड़ी परीक्षा द्वारा यह पता लगाता है कि दर्द का कारण वात है, दूषित रक्त है या आम है, और फिर डाइट, गिलोय/गुग्गुलु जैसी औषधियों और पंचकर्म के ज़रिए बीमारी को जड़ से खत्म करता है।

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