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सुबह उठते ही शरीर का एक हिस्सा सुन्न — क्या इसे नजरअंदाज करना सही है

Information By Dr. Keshav Chauhan

सुबह उठते ही शरीर के किसी हिस्से (खासकर हाथ या पैर) का सुन्न पड़ जाना (Numbness) या चींटियाँ चलने जैसा महसूस होना एक आम बात सी लगने लगी है। ज़्यादातर लोग इसे "गलत करवट सोने" या "नस दबने" का नाम देकर एक मामूली बात समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। उन्हें लगता है कि थोड़ी देर हाथ-पैर हिलाने या मालिश करने से सब ठीक हो जाएगा। लेकिन जब यह सुन्नपन कभी-कभार की बजाय आपकी रोज़ सुबह की आदत बन जाए, तो यह एक बहुत ही गंभीर चेतावनी हो सकती है। आजकल युवाओं और बुज़ुर्गों दोनों में नसों की कमज़ोरी और ब्लड सर्कुलेशन की कमी के मामले बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यह वह शुरुआती संकेत है जब आपका शरीर आपको अंदरूनी नर्व डैमेज (Nerve Damage) या बढ़ते ब्लड शुगर (Diabetic Neuropathy) के बारे में आगाह कर रहा होता है। आखिर ऐसा क्या है कि लोग इस गंभीर शुरुआती चेतावनी को नहीं समझते? इस ब्लॉग में हम गहराई से समझेंगे कि सुबह का यह सुन्नपन असल में क्या है, इसे नज़रअंदाज़ करना क्यों खतरनाक हो सकता है, और कैसे आयुर्वेद की मदद से आप अपनी नसों को दोबारा जीवित कर एक स्वस्थ जीवन की ओर लौट सकते हैं।

सुबह का सुन्नपन (Morning Numbness) असल में क्या है?

सुबह उठने पर शरीर का सुन्न होना असल में आपकी नसों (Nerves) और रक्त संचार (Blood Circulation) की प्रणाली का एक 'अलार्म' है। जब आप सोते हैं, तो शरीर खुद को रिपेयर करता है, लेकिन अगर आपकी नसें अंदर से कमज़ोर हैं, ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है, या शरीर में विटामिन्स (जैसे B12) की भारी कमी है, तो नसों तक सही मात्रा में ऑक्सीजन और खून नहीं पहुँच पाता। मेडिकल भाषा में इसे 'पेरिफेरल न्यूरोपैथी' (Peripheral Neuropathy) या नसों का डैमेज होना कहते हैं। यह सुन्नपन इस बात का सबूत है कि आपके शरीर का अंदरूनी संचार तंत्र (Communication System) खराब हो रहा है और नसें धीरे-धीरे अपनी संवेदनशीलता खो रही हैं।

लक्षणों का अस्थायी (Temporary) होना

शुरुआत में यह सुन्नपन सुबह उठने के कुछ मिनटों बाद खुद ही ठीक हो जाता है। लोग सोचते हैं कि "रात को हाथ दब गया होगा" और वे अपने काम में लग जाते हैं। दर्द न होने और सिर्फ झनझनाहट होने के कारण लोग इसे बीमारी मानते ही नहीं हैं और कोई ठोस एक्शन नहीं लेते।

"उम्र का असर या आम कमज़ोरी" वाली गलत सोच

ज़्यादातर लोग यह मान बैठते हैं कि 30-40 की उम्र के बाद थोड़ी बहुत सुस्ती और सुन्नपन आना आम बात है। वे इसे थकान या साधारण कमज़ोरी समझकर पेनकिलर या मल्टीविटामिन की गोलियाँ खुद ही खा लेते हैं और अपनी उसी गलत दिनचर्या को जारी रखते हैं, जो अंततः उन्हें स्थायी नर्व डैमेज तक पहुँचा देती है।

सुन्नपन पर एक्शन न लेने के भयंकर परिणाम: इन्हें बिल्कुल नज़रअंदाज़ न करें

अगर आप यह मानकर बैठे हैं कि यह तो बस नसों का दबना है और खुद ही ठीक हो जाएगा, तो आप अनजाने में अपने अंगों को बहुत बड़े खतरे में डाल रहे हैं।

  • स्थायी नर्व डैमेज (Permanent Neuropathy): महीनों तक नसों में खून का प्रवाह बाधित रहने से नसें पूरी तरह डैमेज हो जाती हैं। एक समय ऐसा आता है जब सुन्नपन हमेशा के लिए रह जाता है और आपको ठंडे या गर्म का अहसास होना बंद हो जाता है।
  • डायबिटिक फुट (Diabetic Foot) का खतरा: अगर यह सुन्नपन डायबिटीज के कारण है, तो पैरों में चोट लगने पर भी दर्द का अहसास नहीं होता, जिससे घाव भयंकर रूप ले लेते हैं और अंग काटने (Amputation) तक की नौबत आ सकती है।
  • लकवा (Paralysis) का शुरुआती संकेत: बार-बार और बिना कारण एक ही हिस्से का सुन्न होना कई बार पैरालिसिस या ब्रेन स्ट्रोक का बहुत शुरुआती और 'साइलेंट' संकेत होता है।

आयुर्वेद इस सुन्नपन (Numbness) को कैसे समझता है?

आयुर्वेद इस सुन्नपन को सिर्फ खून की कमी नहीं मानता। आयुर्वेद में नसों और संचार प्रणाली को 'वात दोष' द्वारा नियंत्रित माना जाता है। जब खराब जीवनशैली, गलत खानपान और तनाव के कारण शरीर में वात दोष बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है और साथ ही 'आम' (टॉक्सिन्स) शरीर के स्रोत (Channels) को ब्लॉक कर देता है, तो इसे 'आवरण' (Blockage) कहा जाता है। इस आवरण के कारण 'प्राण वायु' नसों तक नहीं पहुँच पाती, जिससे वह हिस्सा सुन्न (सुप्ति) पड़ जाता है। जब तक शरीर की अंदरूनी ताकत मज़बूत नहीं होगी और वात का संतुलन ठीक नहीं होगा, सिर्फ मालिश करने से बीमारी जड़ से खत्म नहीं होगी।

जीवा आयुर्वेद का समग्र प्रबंधन क्या है?

हम सिर्फ पेनकिलर या नसों को सुन्न करने वाली दवाइयाँ देकर बीमारी को दबाते नहीं हैं। हमारा मकसद आपके कमज़ोर हो रहे नर्वस सिस्टम को जड़ से ठीक करना और ब्लड सर्कुलेशन को दोबारा सेट करना है।

  • स्रोत शोधन और वात अनुलोमन: सबसे पहले आपके शरीर के ब्लॉक हो चुके चैनल्स (नसों) को खोला जाता है ताकि खून और ऊर्जा का प्रवाह बिना किसी रुकावट के पूरे शरीर में हो सके।
  • मज्जा धातु (Nervous System) का पोषण: नसों की कमज़ोरी को दूर करने के लिए 'मेध्य रसायन' और खास आयुर्वेदिक औषधियों से नसों को अंदरूनी ताकत दी जाती है ताकि वे दोबारा रिपेयर हो सकें।
  • पाचन और मेटाबॉलिज़्म सुधार: शरीर में आम (टॉक्सिन्स) बनने से रोकने के लिए आपके बिगड़े हुए पाचन को ठीक किया जाता है।

नसों की ताकत के लिए कुछ बेहतरीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें नसों को मज़बूत बनाने और ब्लड सर्कुलेशन को दुरुस्त करने के लिए बहुत ही जादुई और सुरक्षित जड़ी-बूटियाँ दी हैं, जो नर्व डैमेज में रामबाण का काम करती हैं।

  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह नर्वस सिस्टम की सबसे बेहतरीन दवा है। यह नसों को ताकत देती है, स्ट्रेस कम करती है और पूरे शरीर में रक्त संचार को बढ़ाती है।
  • बला (Bala): जैसा कि नाम से ही ज़ाहिर है, यह जड़ी-बूटी शरीर और नसों को 'बल' (ताकत) देती है। यह वात दोष को शांत कर सुन्नपन को तुरंत रोकती है।
  • गुग्गुल (Guggulu): यह शरीर के अंदर की सूजन (Inflammation) को खत्म करता है और ब्लॉक हो चुकी नसों को खोलने का अचूक काम करता है।

आयुर्वेदिक थेरेपी सुन्नपन में कैसे काम करती है?

जब नसें पूरी तरह सुन्न पड़ने लगें और सिर्फ दवाइयाँ असर न करें, तो हमारी प्राचीन पंचकर्म थेरेपी सीधे आपकी कोशिकाओं की गहराई में जाकर डिटॉक्स करती है।

  • अभ्यंग और स्वेदन (Abhyanga & Swedana): गर्म औषधीय तेलों से की गई गहरी मालिश और उसके बाद हर्बल भाप, जमे हुए टॉक्सिन्स को पिघलाकर ब्लॉक नसों को तुरंत खोल देती है और सुन्नपन दूर करती है।
  • बस्ती (Basti): वात दोष को जड़ से खत्म करने के लिए बस्ती (मेडिकेटेड एनीमा) आयुर्वेद में सबसे श्रेष्ठ चिकित्सा मानी जाती है। यह नर्वस सिस्टम को पूरी तरह रीसेट कर देती है।

नसों को कमज़ोर होने से बचाने के लिए वात-शामक डाइट प्लान क्या हो?

आप जो खाते हैं, वही आपकी नसों को या तो ब्लॉक करता है या उन्हें ताकत देता है। सुन्नपन दूर करने के लिए वात-शामक डाइट लेना बहुत ज़्यादा ज़रूरी है।

  • आहार का सिद्धांत: गर्म, ताज़ा और हल्का स्निग्ध (थोड़ा घी/तेल युक्त) भोजन अपनाएँ। रूखा, सूखा और ठंडा खाना वात बढ़ाता है, इसलिए इससे बचें।
  • पोषक तत्व: डाइट में विटामिन B12, ओमेगा-3 और कैल्शियम से भरपूर चीज़ें जैसे बादाम, अखरोट, दूध और घी शामिल करें। जंक फूड से बचें जो नसों में सूजन पैदा करते हैं।
  • पाचन संतुलन: हल्दी और सौंठ (अदरक) का उपयोग करें, जो खून को पतला रखकर नसों में सर्कुलेशन बढ़ाते हैं। बासी खाना और बेकरी प्रोडक्ट्स से परहेज़ करें।
  • दैनिक पेय: रात को सोने से पहले हल्दी या अश्वगंधा वाला गुनगुना दूध पिएँ, जो नसों को आराम देकर उन्हें रिपेयर करता है। ठंडे पेय (Cold drinks) बिल्कुल बंद कर दें।
  • जीवनशैली सहयोग: रोज़ाना सूक्ष्म व्यायाम (Joint rotations) करें। एक ही जगह पर घंटों लगातार बैठने से बचें।

जीवा आयुर्वेद में हम सुन्नपन के मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?

जब आप सही समय पर हमारे पास आते हैं, तब हम आपकी बीमारी को नाड़ी से महसूस करते हैं और शरीर के अंदर छिपी असली जड़ तक पहुँचते हैं।

  • नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले पल्स चेक करके यह गहराई से समझना कि वात दोष ने आपकी नसों और रक्त संचार को किस स्तर तक प्रभावित किया है।
  • सर्कुलेशन और मेटाबॉलिज़्म का मूल्यांकन: डॉक्टर आपके लाइफस्टाइल को बहुत बारीकी से चेक करते हैं कि कहीं ब्लड शुगर या कोलेस्ट्रॉल तो नसों को ब्लॉक नहीं कर रहा।
  • टॉक्सिन का विश्लेषण: यह देखना कि आपके शरीर में 'आम' (गंदगी) नसों में कहाँ-कहाँ आवरण पैदा कर रहा है।
  • लाइफस्टाइल चेक: आपकी काम करने की पोज़ीशन और बैठने का तरीका देखना। घंटों गलत पोस्चर में बैठना सुन्नपन का एक बड़ा कारण है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

हमारा लक्ष्य आपको भारी दवाइयों के दुष्प्रभावों से बचाकर एक बहुत ही सुरक्षित और प्राकृतिक इलाज का रास्ता देना है।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर 0129 4264323 पर कॉल करें। हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ आपसे बहुत प्यार और धैर्य से बात करेंगे।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: काम के मारे हालत खराब है और बाहर जाना मुश्किल है, तो घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात करें।
  • विस्तृत जाँच: आपकी मौजूदा रिपोर्ट्स (विटामिन टेस्ट या शुगर लेवल) को बहुत ध्यान से समझा जाता है।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपके लिए खास वात-नाशक जड़ी-बूटियाँ, नसों को ताकत देने वाले रसायन और वात-शामक डाइट का एक पूरा रूटीन तैयार किया जाता है।

ठीक होने (Recovery) में लगने वाला समय कितना है?

आयुर्वेद डैमेज हो रही नसों को प्राकृतिक रूप से रिपेयर करता है। आपकी नसों को दोबारा जीवित होने और नई ताकत मिलने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है।

  • शुरुआती कुछ हफ्ते: आपके शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सुधरेगा; सुबह उठने पर होने वाली झनझनाहट और भारीपन कम होने लगेगा।
  • 1 से 3 महीने तक: सुन्नपन की समस्या में काफी हद तक स्थिरता आने लगेगी। शरीर एक प्राकृतिक हल्कापन और ऊर्जा महसूस करेगा।
  • 3 से 6 महीने तक: आपकी नसें पूरी तरह से साफ और मज़बूत हो जाएँगी। आपकी इम्युनिटी और नर्वस सिस्टम इतना सुधर जाएगा कि आप एक अनुशासित जीवनशैली के साथ नसों की कमज़ोरी से हमेशा के लिए आज़ाद हो सकेंगे।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

अपने इलाज पर कितना खर्च आएगा, यह जानना हर मरीज़ के लिए ज़रूरी होता है। जीवा आयुर्वेद में हम खर्च की जानकारी साफ और आसान तरीके से देते हैं, ताकि आप बिना किसी उलझन के सही फैसला ले सकें।

इलाज का सामान्य खर्च:

जो लोग अपनी बीमारी के लिए नियमित (regular) इलाज शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए दवाइयों और डॉक्टर की सलाह का महीने का खर्च लगभग ₹3,000 से ₹3,500 के बीच आता है। यह एक औसत अंदाज़ा है। असल खर्च आपकी बीमारी कितनी पुरानी है और उसकी स्थिति कैसी है, इस पर निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल (स्पेशल पैकेज):

अगर आप अपनी बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए थोड़ा ज़्यादा गहराई और विस्तार से इलाज करना चाहते हैं, तो हमारे 'विशेष पैकेज' आपके लिए सबसे अच्छे हैं। इसमें हम सिर्फ बीमारी को नहीं दबाते, बल्कि आपकी पूरी लाइफस्टाइल को सुधारने पर काम करते हैं। इसमें शामिल हैं:

  • खास दवाइयाँ (Customized Medicines)
  • सीनियर डॉक्टर से कंसल्टेशन
  • मन को शांत रखने के सेशन्स (Stress Management)
  • योग और फर्टिलिटी एक्सरसाइज़ की ट्रेनिंग
  • पर्सनल डाइट प्लान (जो सिर्फ आपके लिए बना हो)

इन पैकेजेस का खर्च आमतौर पर ₹15,000 से ₹40,000 के बीच होता है, जो आपके 3 से 4 महीने के पूरे इलाज को कवर करता है।

जीवाग्राम (24x7 देखभाल वाला इलाज):

जिन लोगों को बीमारी से लड़ने के लिए ज़्यादा ध्यान, शांति और आराम के साथ इलाज (पंचकर्म व शोधन) चाहिए, उनके लिए हमारा जीवाग्राम सेंटर सबसे बेहतरीन विकल्प है। यह प्रकृति के करीब बना एक ऐसा सेंटर है जहाँ आपको घर जैसा सुकून और अस्पताल जैसी केयर मिलती है। यहाँ आपको मिलता है:

  • पंचकर्म थेरेपी (उत्तर बस्ती, विरेचन और अंदरूनी सफाई)
  • सादा और पौष्टिक 'सात्विक' खाना
  • इलाज की आधुनिक और बेहतर सुविधाएँ
  • आरामदायक रहने की व्यवस्था

यहाँ 7 दिन का प्रोग्राम लगभग ₹1 लाख का होता है। इसमें आपको हर समय विशेषज्ञों की देखभाल मिलती है, ताकि आपका शरीर और मन दोनों पूरी तरह से तरोताज़ा (rejuvenated) होकर स्वस्थ प्रेगनेंसी के लिए तैयार हो सकें।

मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • असली कारण पर आधारित इलाज: हमारा पूरा ध्यान इस बात पर होता है कि बीमारी की जड़ (Root Cause) क्या है। हम सिर्फ बाहरी हार्मोन नहीं देते, बल्कि शरीर के अंदर जाकर उस प्रजनन समस्या को ठीक करते हैं जिससे बांझपन शुरू हुआ है।
  • हर मरीज़ के लिए एक खास प्लान: आयुर्वेद मानता है कि हर इंसान का शरीर अलग होता है। इसलिए, हम सबको एक ही दवा नहीं देते। आपका इलाज आपकी अपनी प्रकृति, खान-पान और आपकी लाइफस्टाइल के हिसाब से खास आपके लिए तैयार किया जाता है।
  • जाँच और इलाज का सही तरीका: हम एक बहुत ही व्यवस्थित (systematic) प्रक्रिया का पालन करते हैं। इससे शरीर के वात दोष और मेटाबॉलिज़्म से जुड़ी समस्याओं को गहराई से समझकर उन्हें बैलेंस करने में मदद मिलती है।
  • शुद्ध और सुरक्षित दवाइयाँ: जीवा की सभी आयुर्वेदिक दवाइयाँ पूरी तरह से शुद्ध जड़ी-बूटियों से बनी होती हैं। इनके बनाने में सुरक्षा और क्वालिटी के कड़े मानकों का पालन किया जाता है ताकि आपको या आपके होने वाले बच्चे को कोई नुकसान न हो।
  • अनुभवी डॉक्टरों की टीम: हमारे पास ऐसे डॉक्टरों की एक बड़ी टीम है जिन्हें आयुर्वेद का सालों का अनुभव है। ये एक्सपर्ट्स हर दिन हज़ारों मरीज़ों की मुश्किल समस्याओं को सुलझाने में उनकी मदद करते हैं।
  • परिणाम जो सच में दिखते हैं: हमारे 90% से ज़्यादा मरीज़ों ने अपने स्वास्थ्य में बड़ा और सकारात्मक सुधार महसूस किया है।
  • दवाइयों पर निर्भरता में कमी: हमारा लक्ष्य आपको अंदर से सेहतमंद बनाना है। हमारे 88% मरीज़ धीरे-धीरे कृत्रिम दवाओं और भारी-भरकम हार्मोनल इंजेक्शन्स पर अपनी निर्भरता कम करने में सफल रहे हैं और एक नेचुरल लाइफस्टाइल की ओर बढ़े हैं।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

सुन्नपन या नसों की कमज़ोरी से निपटने के लिए हम अक्सर जल्दबाज़ी में गलत कदम उठाते हैं।

तुलना का आधार आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक चिकित्सा
मुख्य लक्ष्य विटामिन/दवाओं से दर्द कंट्रोल वात संतुलित कर नसों को मजबूत करना
नज़रिया नसों को स्थायी डैमेज मानना शरीर की self-healing क्षमता पर भरोसा
डाइट/लाइफस्टाइल सप्लीमेंट्स पर फोकस वात-शामक डाइट और व्यायाम मुख्य
लंबा असर डोज़ बढ़ती जाती है नर्वस सिस्टम मजबूत, स्थायी सुधार

डॉक्टर को तुरंत कब दिखाना चाहिए? 

सुन्नपन को महज़ एक आम थकान समझकर घर पर ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अगर आपको शरीर में ये संकेत दिखें, तो बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बहुत ज़रूरी है:

  • अगर सुन्नपन शरीर के एक पूरे हिस्से (जैसे एक पूरा हाथ, पैर या चेहरे का आधा हिस्सा) में अचानक फैल जाए (यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है)।
  • अगर सुन्नपन के साथ आपको बोलने में, समझने में या संतुलन बनाने में भयंकर तकलीफ हो रही हो।
  • अगर सुन्नपन के कारण हाथ से चीज़ें छूटने लगें या पैरों में चप्पल पहनने का अहसास ही खत्म हो जाए।
  • अगर यह सुन्नपन कई दिनों तक लगातार बना रहे और पूरे दिन महसूस हो।

अगर आपको डायबिटीज है और पैरों की उँगलियों का रंग बदलने लगे या घाव हो जाए।

निष्कर्ष

सुबह उठते ही शरीर का सुन्न पड़ना इस बात का सीधा संकेत है कि आपकी जीवनशैली आपके नर्वस सिस्टम और ब्लड सर्कुलेशन पर बहुत भारी पड़ रही है। लगातार गलत पोज़ीशन में सोना, घंटों तक बैठे रहना, पोषक तत्वों की कमी और बढ़ा हुआ ब्लड शुगर आपकी नसों को चुपचाप डैमेज कर रहे हैं। जब सुन्नपन रोज़ की बात बन जाए, तो यह नज़रअंदाज़ करने का नहीं, बल्कि तुरंत जागने का समय है। इस समय लिया गया सही फैसला आपको लकवा, डायबिटिक फुट या स्थायी नर्व डैमेज जैसी भयानक स्थितियों से बचा सकता है। आयुर्वेद आपको इस बीमारी को शुरुआत में ही जड़ से मिटाने का एक स्थायी और प्राकृतिक समाधान देता है। सही आयुर्वेदिक उपचार, पंचकर्म थेरेपी, और वात-शामक जीवनशैली अपनाकर आप अपनी नसों को नई ताकत दे सकते हैं। अपने शरीर के शुरुआती संकेतों को सुनें, सही समय पर सही कदम उठाएँ, और जीवा आयुर्वेद के साथ अपनी ज़िंदगी को भविष्य की गंभीर बीमारियों से सुरक्षित बनाएँ।

FAQs

यह अक्सर ब्लड सर्कुलेशन की कमी, गलत तरीके से सोने के कारण नसों के दबने, विटामिन B12 की कमी या बढ़े हुए वात दोष के कारण होता है। अगर यह रोज़ हो रहा है, तो यह अर्ली नर्व डैमेज (Neuropathy) का संकेत हो सकता है।

बिल्कुल नहीं! इसे लगातार नज़रअंदाज़ करने से नसें स्थायी रूप से डैमेज हो सकती हैं, जिससे संवेदनशीलता हमेशा के लिए खत्म हो सकती है या लकवे जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।

जी हाँ! आयुर्वेद में वात-शामक जड़ी-बूटियों (जैसे अश्वगंधा, बला), अभ्यंग मालिश और बस्ती पंचकर्म से ब्लॉक नसों को खोलकर उन्हें दोबारा पूरी तरह स्वस्थ किया जा सकता है।

आपको हमेशा ताज़ा, हल्का गर्म और स्निग्ध (हल्का घी युक्त) भोजन लेना चाहिए। रुखा-सूखा, ठंडा, बासी भोजन और जंक फूड बिल्कुल बंद कर देना चाहिए क्योंकि ये वात बढ़ाते हैं और नसों को कमज़ोर करते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, अश्वगंधा, बला, गुग्गुल और हल्दी नसों की ताकत के लिए बहुत असरदार हैं। ये जड़ी-बूटियाँ ब्लड सर्कुलेशन को सुधारती हैं और नर्व डैमेज को रिपेयर करती हैं।

जी हाँ, जब ब्लड शुगर लगातार हाई रहता है, तो वह नसों को डैमेज करने लगता है (Diabetic Neuropathy)। इसका पहला लक्षण ही हाथों और पैरों की उँगलियों में चींटियाँ चलना या सुन्न पड़ना होता है।

शुरुआती कुछ ही हफ्तों में आपके शरीर का भारीपन और झनझनाहट कम होने लगती है। लेकिन नर्वस सिस्टम को पूरी तरह रिसेट करने और शरीर को दोबारा अंदरूनी ताक़त देने में आमतौर पर 3 से 6 महीने का अनुशासित समय लग सकता है।

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