जब किसी को डेंगू होता है, तो हमारा पूरा ध्यान सिर्फ दो चीज़ो पर होता है, तेज़ बुखार और प्लेटलेट्स का गिरना। लेकिन क्या आप जानते हैं कि डेंगू में मरीज़ की जान को सबसे बड़ा खतरा केवल प्लेटलेट्स की कमी से नहीं, बल्कि शरीर में पानी की कमी से भी होता है?
अक्सर लोग सोचते हैं कि मरीज़ को जो कमज़ोरी और चक्कर आ रहे हैं, वह सिर्फ बुखार की वजह से है। जबकि असल में उसके शरीर का पानी और ज़रूरी नमक तेज़ी से खत्म हो रहे होते हैं। अगर सही समय पर इस पानी की कमी को पूरा न किया जाए, तो स्थिति बहुत जल्दी बिगड़ सकती है।

डेंगू आखिर शरीर के साथ करता क्या है?
डेंगू एक वायरस है जो मच्छर के काटने से हमारे खून में पहुंचता है। जैसे ही यह वायरस शरीर में जाता है, हमारे शरीर का 'सिक्योरिटी सिस्टम' (इम्यूनिटी) उससे लड़ने लगता है। इस लड़ाई का सीधा असर हमारे पूरे शरीर पर पड़ता है।
शरीर का तापमान अचानक बहुत बढ़ जाता है, हड्डियों और आंखों के पीछे दर्द होता है और इंसान पूरी तरह से टूट जाता है। लेकिन यह वायरस सिर्फ बुखार नहीं लाता, यह हमारे खून की नसों और शरीर के पानी वाले हिस्से पर सीधा हमला करता है।
डेंगू में शरीर सूखने क्यों लगता है? (पानी की कमी के 3 बड़े कारण)
डेंगू में डिहाइड्रेशन किसी एक वजह से नहीं होता, बल्कि शरीर में एक साथ तीन ऐसी चीज़े हो रही होती हैं जो पानी को निचोड़ लेती हैं:
- बुखार और पसीना: डेंगू में शरीर का तापमान 103 या 104 डिग्री तक पहुंच जाता है। शरीर खुद को ठंडा करने के लिए बहुत ज़्यादा पसीना निकालता है। इस पसीने के जरिए शरीर का बहुत सारा पानी और ज़रूरी नमक (इलेक्ट्रोलाइट्स) बाहर बह जाता है।
- उल्टियां होना और खाने-पीने से मन हटना: डेंगू में पाचन एकदम सुस्त पड़ जाता है। मरीज़ को कुछ भी खाने या पीने का मन नहीं करता। अगर वह ज़बरदस्ती पानी पी भी ले, तो अक्सर उल्टी हो जाती है। एक तरफ शरीर पसीने से पानी खो रहा है, दूसरी तरफ उल्टी से पानी बाहर आ रहा है, और ऊपर से मरीज़ कुछ नया पी नहीं पा रहा है। ऐसे में शरीर बहुत तेज़ी से सूखने लगता है।
- खून की नसों से पानी का रिसना (प्लाज्मा लीकेज): हमारे शरीर में खून पानी के पाइपों (नसों) की तरह बहता है। गंभीर डेंगू में वायरस इन नसों की दीवारों को थोड़ा ढीला कर देता है, जिससे उनमें बहुत बारीक छेद हो जाते हैं। इन छेदों से खून के अंदर का पानी (जिसे प्लाज्मा कहते हैं) रिस-रिस कर बाहर पेट या फेफड़ों के आस-पास जमा होने लगता है।
यानी पानी शरीर में तो है, लेकिन जहां होना चाहिए (खून की नसों में), वहां नहीं है। नसें सूखने लगती हैं, खून गाढ़ा हो जाता है और हार्ट को इस गाढ़े खून को पंप करने में बहुत जोर लगाना पड़ता है। यही वजह है कि मरीज़ का ब्लड प्रेशर अचानक से गिर जाता है।

किन लोगों को इसका सबसे ज़्यादा खतरा है?
वैसे तो पानी की कमी किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों को बहुत जल्दी डिहाइड्रेशन हो जाता है:
- छोटे बच्चे: वे बता नहीं पाते कि उन्हें प्यास लगी है और खेलते-खेलते पानी पीना भूल जाते हैं।
- बुजुर्ग लोग: उम्र के साथ शरीर में पानी को रोक कर रखने की क्षमता कम हो जाती है।
- शुगर (डायबिटीज़) के मरीज़: शुगर के मरीजों को पहले से ही बार-बार पेशाब आने की दिक्कत होती है, जिससे पानी जल्दी कम होता है।
- गर्भवती महिलाएं: इन्हें अपने साथ-साथ बच्चे के लिए भी पानी की ज़रूरत होती है।
एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह
डेंगू में अक्सर लोग सिर्फ प्लेटलेट्स पर ध्यान देते हैं, जबकि असल खतरा गंभीर डिहाइड्रेशन और 'प्लाज्मा लीकेज' (खून की नसों से तरल का रिसना) से होता है। यदि मरीज तरल पदार्थ नहीं पचा पा रहा है, उसे लगातार उल्टियां हो रही हैं, अत्यधिक सुस्ती छा रही है, पेट में तेज दर्द है, या मसूड़ों/नाक से खून आ रहा है, तो सिर्फ नारियल पानी या घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें। ये 'डेंगू शॉक सिंड्रोम' के गंभीर चेतावनी संकेत हो सकते हैं।
शरीर में पानी कम हो रहा है, यह कैसे पहचानें?
डिहाइड्रेशन अचानक नहीं होता, शरीर इसके इशारे देता है। आपको बस इन इशारों को पकड़ना है।
शुरुआती इशारे (अलार्म):
- बहुत तेज़ प्यास लगना और होंठों का बार-बार सूखना।
- पेशाब का रंग गहरा पीला या सरसों के तेल जैसा हो जाना।
- दिन भर में बहुत कम पेशाब आना (अगर 4-6 घंटे तक पेशाब न आए, तो यह पानी की कमी का पक्का इशारा है)।
- हर वक्त चक्कर आना या सिर भारी लगना।
- बैठने के बाद अचानक खड़े होने पर आंखों के आगे अंधेरा छा जाना।
खतरे के इशारे (जब तुरंत अस्पताल भागना पड़े):
- मरीज़ की अजीब सी बातें करना या बहुत ज़्यादा नींद में रहना (सुस्ती)।
- हाथ और पैरों का एकदम ठंडा पड़ जाना।
- दिल की धड़कन का बहुत तेज़ हो जाना लेकिन नब्ज का कमज़ोर महसूस होना।
- पेशाब का पूरी तरह से बंद हो जाना।
इस दौरान पानी और तरल पदार्थ पीना इतना ज़रूरी क्यों है?
अगर आप डेंगू के मरीज़ को लगातार पानी या लिक्विड देते रहेंगे, तो उसका खून गाढ़ा नहीं होगा। खून पतला रहेगा तो वह आसानी से शरीर के हर अंग (किडनी, लिवर, दिमाग) तक पहुंचेगा। शरीर में ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी।
इसके अलावा, खूब सारा लिक्विड पीने से शरीर के अंदर मौजूद वायरस और गंदगी पेशाब के रास्ते तेजी से बाहर निकल जाती है और मरीज बहुत जल्दी रिकवर करता है।
आयुर्वेद इस बारे में क्या कहता है?
आयुर्वेद के नज़रिए से देखें तो डेंगू में शरीर की 'गर्मी' (पित्त) बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है। यह बढ़ी हुई गर्मी शरीर के सारे तरल पदार्थों (कफ और रस धातु) को सुखाने लगती है।
इसलिए आयुर्वेद भी यही सलाह देता है कि शरीर को अंदर से ठंडा रखने वाली चीजें खानी-पीनी चाहिए। आयुर्वेद में गिलोय, पपीते के पत्ते और तुलसी का पानी पीने की सलाह दी जाती है, जो न सिर्फ बुखार कम करते हैं बल्कि शरीर को अंदर से सूखने से भी बचाते हैं।

क्या सिर्फ सादा पानी पीना काफी है? (क्या पिएं और क्या नहीं)
डेंगू में सिर्फ आरओ (RO) का सादा पानी पीना काफी नहीं है, क्योंकि शरीर से सिर्फ पानी नहीं, बल्कि ज़रूरी नमक भी निकल गया है। सादे पानी में वो नमक नहीं होता।
ये चीज़े ज़रूर पिएं:
- नारियल पानी: इसे कुदरत का ओआरएस कहा जाता है। यह पेट को ठंडक देता है और ताकत लौटाता है।
- नींबू पानी: इसमें हल्का सा काला नमक और चीनी मिलाकर पिएं।
- दाल का पानी या सब्जियों का सूप: यह पचने में आसान होता है और ताकत देता है।
- छाछ या मट्ठा: अगर उल्टी नहीं हो रही है, तो छाछ बहुत फायदेमंद है।
- रस वाले फल: संतरा, मौसमी, तरबूज और खीरा खाएं।
पीने का सही तरीका: मरीज़ को एक साथ गिलास भरकर पानी कभी न दें, इससे तुरंत उल्टी हो जाएगी। हर 10-15 मिनट में दो-दो घूंट करके पानी पिलाएं।
इन चीजों से बिल्कुल दूर रहें:
- चाय और कॉफी: इनमें कैफीन होता है, जो बार-बार पेशाब लाता है और शरीर को और सुखा देता है।
- कोल्ड ड्रिंक्स या बहुत मीठे जूस: ये पेट में गैस बनाते हैं और पानी सोख लेते हैं।
- बाजार का तला-भुना खाना: यह पाचन को और खराब कर देगा।
डॉक्टर के पास भागने में देरी न करें
डेंगू में हालात बहुत जल्दी बदलते हैं। अगर मरीज़ लगातार उल्टियां कर रहा है और एक घूंट पानी भी नहीं पचा पा रहा है, या उसे पेट में बहुत तेज़ दर्द उठ रहा है, तो घर पर इंतजार न करें।
अगर नाक, मसूड़ों या पॉटी के रास्ते से खून आने लगे, या मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगे, तो उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराएं।
निष्कर्ष
डेंगू कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिससे जीता न जा सके। इसका सबसे बड़ा इलाज आपके घर की रसोई और पानी की बोतल में ही छिपा है।
बुखार और प्लेटलेट्स की टेंशन डॉक्टर पर छोड़ दें, आपका काम सिर्फ यह होना चाहिए कि मरीज़ का मुंह कभी सूखने न पाए। उसे लगातार घूंट-घूंट करके कुछ न कुछ तरल पदार्थ पिलाते रहें। अगर आप मरीज के शरीर में पानी की कमी नहीं होने देंगे, तो डेंगू का वायरस कुछ ही दिनों में अपने आप कमज़ोर पड़कर शरीर से बाहर हो जाएगा। सही समय पर सही लिक्विड डाइट ही डेंगू से जल्दी बाहर आने का रास्ता है।
References
Dengue Fever - StatPearls - NCBI Bookshelf
Dengue guidelines, for diagnosis, treatment, prevention and control





























