कभी ऐसा हुआ है की आपको बहुत भूख लगती है , फिर खाना आते ही आप जल्दी-जल्दी खाना खाने लगते है फिर आपकी प्लेट बहुत जल्दी खत्म हो जाती है, पर आपको ऐसा लगता है कि अभी और खाया जा सकता है और आप और खाना मंगा लेते हैं फिर थोड़ा सा खाते ही आपको लगता है की आपका पेट तो बहुत हद तक भर चुका है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपके पेट से आपके दिमाग तक पेट भरने का signal देर से पहुँचता है।
शरीर को खाना मिलने, उसे पचाने की प्रक्रिया और पेट भरने की संतुष्टि को दिमाग तक पहुंचाने में समय लगता है। जल्दी-जल्दी खाना खाने से, हम अधिक खाना खा लेते है, जिससे पेट की यह प्राकृतिक क्रिया बिगड़ जाती है और पेट भरने का एहसास देर से होता है।
पेट भरने का signal कैसे काम करता है ?
जब हम खाना शुरू करते है तो हमारा शरीर कई तरीके के संकेतो को समझना शुरू करता हैं। जब हम खाना खाते है तो हमारा पेट फैलना शुरू करता है। खाना खाने से हमारे शरीर में होर्मोनेस और तंत्र सक्रिय होते है जो हमारे दिमाग को signal देते है की अब शरीर को पर्याप्त भोजन मिल रहा है।
इसके अलावा जब हमारा खाना पचता है और आंतो तक पहुँचता है, यह signal भी दिमाग तक पहुँचता है जिससे हमारे दिमाग को यह एहसास होता है की अब पेट भर रहा है और भूख कम हो रही है। इस signal को दिमाग तक पहुँचने में 15-20 मिनट का समय लगता है यही कारण है कि हमारे दिमाग तक पेट भरने का signal देर से पहुचंता है।
इस दौरान हम जल्दी-जल्दी खाना खा लेते हैं और हमें पेट भरने का एहसास भी नहीं होता।
बहुत जल्दी खाना खाने से क्या होता है?
कई बार ऐसा होता है कि आप बहुत भूखे होते हैं और आप बहुत तेज़ी से निवाले खाने लगते हैं, जिससे आपका पेट तो लगातार भर ही रहा होता है पर आपके दिमाग तक वो signal उस गति से नहीं पहुँच रहे होते है।
जब तक आपको यह एहसास होता है कि अब "बस हो गया" है, तब तक आप काफी खा चुके होते हैं। इसके बाद आपको कुछ समय में भारीपन, आलस एवं सुस्ती और पेट भरा हुआ महसूस होने लगता है।
इसलिए हर बार ऐसा नहीं होता कि आपने खाना गलत खा लिया है। खाने की रफ़्तार भी इस बात का अंदाज़ा लगा सकती है कि आप कितना खाते हैं।
जल्दी खाने से ज़्यादा खाना क्यों आसान हो जाता है?
जब हम धीरे-धीरे खाना खाते हैं, तब हमें खाने की खुशबू, स्वाद और बनावट का अंदाज़ा लग जाता है।
लेकिन जब हम जल्दी-जल्दी खाना खाते है तो हमारा ध्यान खाना खत्म करने में रहता है हम ये महसूस ही नहीं कर पाते की अब भूख खत्म हो चुकी हैं।
इसके अलावा टीवी, मोबाइल और स्क्रीन के सामने बैठकर खाना खाने से ये आदतें और बढ़ सकती हैं। स्क्रीन देखते हुए खाना खाने से हमारा सारा ध्यान सिर्फ स्क्रीन पर ही रहता है हमारा दिमाग शरीर से मिलने वाले signal की ओर ध्यान ही नहीं देता।
बहुत तेज़ी से खाने से हमारे शरीर और पाचन तंत्र को कई नुकसान हो सकते है।
जैसे, पाचन संबंधी समस्या, वज़न बढ़ना, डायबिटीज का खतरा, आदि जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
इसका मतलब यह नहीं है की जल्दी खाने से हर बार व्यक्ति ज़्यादा खाना ही खायेगा, धीरे खाना शरीर के भूख और संतुष्टि के संकेतो को पहचानने में मदद कर सकता है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद खाना खाने को सिर्फ पेट भरने की प्रक्रिया नहीं मानता, बल्कि यह एक पवित्र प्रक्रिया है जो पूरे होश में करनी चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार, बहुत जल्दी-जल्दी खाना खाने से हमारे शरीर की पाचन प्रक्रिया असंतुलित हो जाती है, जिससे पेट भरने का संकेत दिमाग तक देर से पहुँचता है।
जब आप बहुत जल्दी खाना खाते हैं तो इससे आपकी प्राण वायु (जो खाने को मुँह से पेट तक ले जाती है) और समान वायु (जो खाना पचाने में मदद करती है) का प्रवाह बिगड़ जाता है। इस असंतुलन के कारण मस्तिष्क और पेट के बीच का आपसी तालमेल धीमा हो जाता है, जिससे पेट भरने का एहसास देर से होता है। इससे पाचन शक्ति भी कमज़ोर हो जाती है और खाना सही से पचता नहीं है।
खाने की गति को कम कैसे करें ?
खाना खाने की गति को कम करना स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। सरकारी संस्थाएँ भी वज़न और पाचन नियंत्रित रखने के लिए mindful eating की सलाह देती हैं।
जब आप बहुत तेज़ी से खाते है तो पेट से दिमाग तक, पेट भर जाने का signal जो लगभग 20 मिनट तक पहुँचता है वो नहीं पहुंच पाता जिससे आप ज़रूरत से ज़्यादा खाना खा लेते है और फिर आपको पाचन संबंधी समस्याओं आदि का सामना करना पड़ता है।
खाने की गति कम करने के उपाय हैं :
- खाने को अच्छी तरह से चबाकर खाना , जिससे पाचन क्रिया आसान हो जाती है और गति अपने आप धीमी हो जाती है।
- स्क्रीन से दूर रहे, खाना खाते समय स्क्रीन से दूर रहे, जब ध्यान कही और भटका होता है तो हम ज़रूरत से ज़्यादा खाना खा लेते है जो हमारे शरीर को कई तरीके से नुकसान पहुँचाता है।
- छोटे कौर ले, एक बार में बड़े निवाले न खाये, छोटे-छोटे कौर लेकर खाएं।
- एक सीमित समय में खाएं, कोशिश करें कि खाने के लिए 20-30 मिनट का समय तय करें और उसी के दौरान खाना खाएं।
- शुरुआत धीरे करे, शुरू के 3 निवाले बहुत ही धीमी गति से चबाकर खाये, जिससे आगे का खाना भी मध्यम गति से खाने की आदत बनेगी।
निष्कर्ष
बहुत जल्दी खाना खाने से पेट भरने का एहसास देर से महसूस हो सकता है क्योंकि, भूख सन्तुष्ट करने और पेट भरने का शरीर को एहसास दिलाने वाले संकेत देर से काम करते है। उसी बीच हम बहुत अधिक खाना खा चुके होते, जिससे हमारा पेट ज़रूरत से ज़्यादा भर जाता।
इसलिए अगली बार खाना खाते समय अपने प्लेट को जल्दी खत्म करने की बजाये धीमी गति से खाना खाये प्रत्येक निवाले को धीमी गति से खाएं, खाने का स्वाद ले, खुशबू महसूस करे, बीच-बीच में रुके और अपनी शरीर की बात सुने।
खाना सिर्फ ये बताने की दौड़ नहीं है कि प्लेट कितनी जल्दी खाली होगी, कभी-कभी थोड़ा धीरे खाना ही शरीर को यह बताने का मौका देता है की "अब पेट भर गया है"।
References
Why you feel full after eating | National Institutes of Health (NIH)










































































