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Kidney health के लिए hydration क्यों जरूरी है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे शरीर के अंदर की गंदगी रोज़ाना कैसे साफ होती है? यह सारा कमाल हमारी दोनों किडनी का है। हमारी किडनी बिल्कुल एक छन्नी की तरह काम करती है, जो खून से सारे ज़हरीले तत्वों को छानकर पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देती है। लेकिन इस छन्नी को सही से काम करने के लिए जिस चीज़ की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है, वह है पानी। अगर हम पानी कम पीते हैं, तो शरीर की यह मशीन जाम होने लगती है। आइए बिल्कुल आम बोलचाल की भाषा में समझते हैं कि हमारी किडनी की सेहत के लिए पानी यानी हाइड्रेशन इतना ज़रूरी क्यों है और पानी न पीने से हमें कितना भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

किडनी और पानी का आपस में क्या कनेक्शन है?

हमारे शरीर का लगभग सत्तर प्रतिशत हिस्सा पानी से ही बना है। किडनी का मुख्य काम खून को साफ करना और फालतू चीज़ों को शरीर से बाहर करना है। जब हम भरपूर मात्रा में पानी पीते हैं, तो खून पतला रहता है और किडनी उसे आसानी से छान पाती है। पानी ही वह ज़रिया है जो शरीर के कोने-कोने से गंदगी को बटोरकर किडनी तक लाता है। अगर पानी कम होगा, तो गंदगी किडनी के अंदर ही जमने लगेगी और पथरी का रूप ले लेगी। इसलिए, अपनी किडनी को एक बेहतरीन फिल्टर बनाए रखने के लिए, शरीर में पानी की सही मात्रा का होना सबसे अहम काम है। पानी की कमी सीधा आपकी किडनी को सुखा सकती है।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं

डॉक्टर हमेशा यह समझाते हैं कि प्यास लगने का इंतज़ार करना सबसे बड़ी भूल है। जब हमें प्यास लगती है, तब तक हमारा शरीर अंदर से काफी सूख चुका होता है। डॉक्टरों की सबसे बड़ी चेतावनी यह होती है कि कम पानी पीने से पेशाब बहुत गाढ़ा हो जाता है। इसी गाढ़े पेशाब में मौजूद यूरिक एसिड और कैल्शियम जैसे तत्व आपस में जुड़कर पथरी बना देते हैं। इसके अलावा, पानी की कमी से किडनी के अंदर इन्फेक्शन होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए, डॉक्टर सलाह देते हैं कि दिन भर में थोड़ा-थोड़ा करके पानी पीते रहना चाहिए, ताकि किडनी पर अचानक से कोई दबाव न पड़े और वह अपना काम आसानी से करती रहे।

किडनी को नुकसान पहुँचाने वाली हम कौन सी गलतियां करते हैं? 

हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में जाने-अनजाने कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो सीधा हमारी किडनी की सेहत पर बहुत बुरा असर डालती हैं:

  • पेशाब रोककर रखना: काम के चक्कर में बहुत देर तक पेशाब रोके रखने से किडनी पर भारी दबाव पड़ता है और इन्फेक्शन का खतरा बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है।
  • पेनकिलर का ज़्यादा इस्तेमाल: ज़रा सा सिरदर्द या बदन दर्द होने पर बिना सोचे-समझे दर्द की गोली खा लेना किडनी के सेल्स को बुरी तरह डैमेज करता है।
  • पानी की जगह कोल्ड ड्रिंक पीना: जब प्यास लगे तो पानी पीने के बजाय चाय, कॉफी या मीठे कोल्ड ड्रिंक पीना किडनी के लिए बहुत नुकसानदायक है।
  • नमक ज़्यादा खाना: खाने में बहुत ज़्यादा नमक लेने से किडनी को उसे बाहर निकालने में बहुत ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जो उसे थका देती है।

कम पानी पीने वाले कितने प्रतिशत लोग किडनी की बीमारी का शिकार होते हैं?

हेल्थ एक्सपर्ट्स और मेडिकल रिसर्च के आँकड़े यह बताते हैं कि जिन लोगों को किडनी में पथरी (Stone) की समस्या होती है, उनमें से लगभग 70 से 80 प्रतिशत मामलों की सबसे बड़ी वजह लंबे समय तक कम पानी पीना ही होती है। इसके अलावा, यूरिन इन्फेक्शन (UTI) के शिकार होने वाले ज़्यादातर मरीज़ भी वही होते हैं जो दिन भर में दो-तीन गिलास पानी पर ही काम चलाते हैं। भारत जैसे गर्म देश में जहाँ पसीना बहुत आता है, वहाँ पानी की कमी के कारण किडनी की बीमारियां और भी तेज़ी से फैल रही हैं। इसलिए, अपनी पानी पीने की आदत को हल्के में लेना बहुत भारी पड़ सकता है।

किडनी को बीमारियों से बचाने के लिए पानी पीने का सही तरीका क्या है?

सिर्फ पानी पीना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे सही तरीके से पीना भी आना चाहिए। हमेशा बैठकर और घूंट-घूंट करके पानी पीना चाहिए, ताकि पानी हमारे शरीर के तापमान से मेल खा सके और किडनी पर अचानक कोई लोड न पड़े। सुबह उठते ही सबसे पहले एक या दो गिलास हल्का गुनगुना पानी पीना चाहिए, इसे 'उषापान' कहते हैं। यह रात भर की जमा हुई गंदगी को एक झटके में किडनी के रास्ते बाहर कर देता है। खाना खाने के तुरंत बाद कभी भी ढेर सारा पानी न पिएं, बल्कि आधे या एक घंटे का गैप रखें। इसके साथ ही, तांबे के बर्तन या मटके का पानी पीना किडनी के लिए अमृत समान है।

किन लोगों को किडनी की बीमारी का सबसे ज्यादा खतरा रहता है? 

किडनी की बीमारी किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ खास लोगों को दूसरों के मुकाबले इसका खतरा बहुत ज़्यादा होता है, इसलिए उन्हें सचेत रहना चाहिए:

  • डायबिटीज़ के मरीज़: जिनके खून में शुगर का लेवल हमेशा बढ़ा रहता है, उनकी किडनी की छोटी-छोटी नसें और फिल्टर धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं।
  • हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग: बढ़ा हुआ बीपी (BP) किडनी की नसों पर दबाव डालता है, जिससे खून को साफ करने का सिस्टम बुरी तरह बिगड़ जाता है।
  • मोटापे के शिकार लोग: बहुत ज़्यादा वज़न होने से शरीर का पूरा सिस्टम बिगड़ता है, जिसका सीधा असर किडनी की सेहत पर पड़ता है।
  • बुज़ुर्ग लोग: उम्र बढ़ने के साथ शरीर के सभी अंगों की तरह किडनी के काम करने की ताक़त भी कुदरती रूप से कमज़ोर पड़ने लगती है।

क्या मौसम के बदलने पर पानी पीने की आदत भी बदलनी चाहिए?

हाँ, बिल्कुल बदलनी चाहिए। हमारा शरीर बाहर के मौसम के हिसाब से अपनी ज़रूरतें बदलता है। गर्मियों के मौसम में हमें पसीना बहुत आता है, जिससे शरीर का पानी तेज़ी से कम होता है। इसलिए गर्मियों में हमें कम से कम 10 से 12 गिलास पानी पीना ही चाहिए ताकि किडनी सूखने न पाए। वहीं, सर्दियों में हमें पसीना नहीं आता और प्यास भी कम लगती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम पानी पीना ही छोड़ दें। सर्दियों में भी किडनी को सफाई के लिए कम से कम 6 से 8 गिलास हल्के गुनगुने पानी की ज़रूरत होती ही है। मौसम चाहे जो भी हो, किडनी को हमेशा पानी चाहिए।

शरीर में पानी की कमी के शुरुआती इशारे कैसे समझें? 

जब शरीर में पानी की कमी होने लगती है, तो हमारी किडनी बोलकर नहीं बता सकती, लेकिन हमारा शरीर कुछ खास इशारे ज़रूर देता है जिन्हें पहचानना ज़रूरी है:

  • पेशाब का रंग बदलना: अगर आपके पेशाब का रंग डार्क पीला हो गया है और उसमें तेज़ बदबू आ रही है, तो यह पानी की कमी का सबसे पहला इशारा है।
  • मुँह और होठों का सूखना: हर वक़्त मुँह में सूखापन महसूस होना, प्यास लगना और होठों पर पपड़ी जमना डिहाइड्रेशन की साफ निशानी है।
  • बिना वजह थकान और सिरदर्द: जब दिमाग और शरीर की नसों तक पूरा पानी नहीं पहुँचता, तो भयंकर सिरदर्द होता है और शरीर हर वक़्त थका हुआ लगता है।
  • स्किन का रूखा होना: अगर आपकी त्वचा अपनी चमक खो रही है और उसमें खुजली या रूखापन आ गया है, तो समझ जाइए अंदर पानी की कमी है।

किडनी को स्वस्थ रखने के लिए किन बातों को लेकर एकदम अलर्ट रहना चाहिए?

किडनी की बीमारियों को अक्सर खामोश बीमारी कहा जाता है क्योंकि शुरुआत में इसके लक्षण बहुत मामूली होते हैं और लोग इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इसलिए सही समय पर डॉक्टर को दिखाना बहुत ज़रूरी है।

  • अगर आपकी उम्र चालीस साल से ऊपर है, तो साल में कम से कम एक बार अपनी किडनी का टेस्ट ज़रूर करवाएं।
  • अगर आपको पहले से डायबिटीज़ या हाई बीपी है, तो हर छह महीने में अपने डॉक्टर से मिलकर किडनी की स्थिति चेक करवाएं।
  • अगर माता-पिता में किसी को किडनी की समस्या रही है, तो आपको ज़्यादा अलर्ट रहने की ज़रूरत है।
  • अगर बिना थके आपको बहुत कमज़ोरी लग रही है और हमेशा जी मिचलाता है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

पानी के अलावा खानपान में किन चीज़ों का ध्यान रखना ज़रूरी है? 

किडनी को सेहतमंद रखने के लिए सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि आपकी रोज़ की डाइट का भी बहुत बड़ा रोल होता है। इसलिए खानपान में इन बातों का ध्यान रखें।

  • ज़्यादा नमक किडनी को सुखा देता है और ज़्यादा चीनी डायबिटीज़ का खतरा बढ़ाती है, जो कि किडनी की सबसे बड़ी दुश्मन है।
  • बहुत ज़्यादा नॉन-वेज या प्रोटीन सप्लीमेंट्स लेने से किडनी पर एक्स्ट्रा भार पड़ता है। प्रोटीन उतनी ही मात्रा में लें जितना आसानी से पच जाए।
  • नींबू, संतरा, मौसंबी और नारियल पानी किडनी की सफाई के लिए बहुत शानदार माने जाते हैं। इन्हें अपनी रोज़ की डाइट में ज़रूर शामिल करें।
  • हरी पत्तेदार सब्ज़ियां शरीर में खून और पानी दोनों की कमी को पूरा करती हैं और किडनी को ज़हरीले तत्वों से लड़ने की ताक़त देती हैं।

तेज़ दवाइयों और खराब लाइफस्टाइल से अपनी किडनी को कैसे बचाएं?

आजकल के समय में हम छोटी-छोटी बीमारियों के लिए तुरंत बहुत तेज़ एंटीबायोटिक (Antibiotic) या दर्द निवारक दवाइयां खा लेते हैं। ये केमिकल वाली दवाइयां सीधे हमारी किडनी के फिल्टर को छलनी कर देती हैं। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि बिना डॉक्टर के पर्चे के कोई भी दवा खुद से न खाएँ। इसके अलावा, सिगरेट और शराब का नशा किडनी के लिए ज़हर के समान है। शराब पीने से शरीर में भयंकर पानी की कमी होती है और किडनी को खून साफ करने में दुगनी मेहनत करनी पड़ती है। अच्छी नींद, रोज़ाना थोड़ा योग और घर का ताज़ा खाना खाकर आप अपनी लाइफस्टाइल सुधार सकते हैं और अपनी किडनी को डैमेज होने से बचा सकते हैं।

अपनी किडनी की जांच के लिए डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

किडनी की बीमारियों को अक्सर 'साइलेंट किलर' कहा जाता है क्योंकि शुरुआत में इसके लक्षण बहुत मामूली होते हैं और लोग इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इसलिए सही समय पर डॉक्टर को दिखाना बहुत ज़रूरी है:

  • हर साल रूटीन चेकअप: अगर आपकी उम्र 40 साल से ऊपर है, तो साल में कम से कम एक बार अपनी किडनी का टेस्ट (KFT) ज़रूर करवाएं।
  • शुगर और बीपी के मरीज़: अगर आपको पहले से डायबिटीज़ या हाई बीपी है, तो हर छह महीने में अपने डॉक्टर से मिलकर किडनी की स्थिति ज़रूर चेक करवाएं।
  • अगर परिवार में किडनी की बीमारी हो: अगर आपके माता-पिता या घर में किसी को किडनी की समस्या रही है, तो आपको पहले से ज़्यादा अलर्ट रहने की ज़रूरत है।
  • लगातार कमज़ोरी और उल्टी का मन करना: अगर बिना थके आपको बहुत कमज़ोरी लग रही है और हमेशा जी मिचलाता है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

मॉडर्न साइंस और आयुर्वेद में किडनी की सफाई के तरीके में क्या फर्क है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
मुख्य लक्ष्य किडनी की बीमारी की पहचान, उपचार और जटिलताओं को नियंत्रित करना। स्वस्थ जीवनशैली, आहार-विहार और समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान देना।
उपचार का तरीका रक्त व मूत्र की जाँच, इमेजिंग, दवाइयाँ तथा आवश्यकता होने पर डायलिसिस या अन्य चिकित्सकीय उपचार। आहार, दिनचर्या, पारंपरिक जड़ी-बूटियों का उपयोग योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से, और जीवनशैली में सुधार।
बीमारी का दृष्टिकोण वैज्ञानिक जाँच के आधार पर रोग की गंभीरता के अनुसार उपचार किया जाता है। व्यक्ति की प्रकृति, खानपान और दैनिक आदतों को ध्यान में रखकर देखभाल की जाती है।
असर होने की गति गंभीर या आपातकालीन स्थितियों में तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप संभव होता है। नियमित पालन के साथ धीरे-धीरे समग्र स्वास्थ्य और स्वस्थ आदतों पर ध्यान दिया जाता है।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण नियमित जाँच, रक्तचाप व शुगर नियंत्रण तथा किडनी की कार्यक्षमता बनाए रखने पर ज़ोर। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नियमित दिनचर्या और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर लंबे समय तक स्वास्थ्य बनाए रखने पर बल।

निष्कर्ष

अंत में बस यही समझना ज़रूरी है कि हमारी किडनी हमारे शरीर की बहुत ही वफादार और मेहनती मशीन है, जो बिना रुके 24 घंटे काम करती है। लेकिन इस मशीन का पेट्रोल सिर्फ और सिर्फ पानी है। अगर आप इसे सही मात्रा में पानी नहीं देंगे, तो यह धीरे-धीरे काम करना बंद कर देगी। अपनी प्यास को कभी नज़रअंदाज़ न करें। जब भी घर से बाहर निकलें, पानी की एक बोतल हमेशा अपने साथ रखें। थोड़ा सा पानी पीकर हम खुद को पथरी, इन्फेक्शन और डायलिसिस जैसी भयानक बीमारियों से बचा सकते हैं। आज से ही खुद से यह वादा करें कि आप अपनी किडनी को कभी प्यासा नहीं रहने देंगे, क्योंकि जल ही जीवन है और यही आपकी सेहत का भी सबसे बड़ा राज़ है।

References

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/kidney-disease

https://www.niddk.nih.gov/health-information/kidney-disease/chronic-kidney-disease-ckd/prevention

https://www.theisn.org/in-action/advocacy-old/advocacy-activities/world-health-organisation/who-kidney-resolution/

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

आमतौर पर एक स्वस्थ इंसान को दिन भर में 8 से 10 गिलास (लगभग 2.5 से 3 लीटर) पानी पीना चाहिए, ताकि किडनी आसानी से शरीर की सफाई कर सके।

बिल्कुल नहीं। एक ही बार में बहुत सारा पानी पीने से किडनी पर अचानक भारी दबाव पड़ता है। इसलिए पानी हमेशा थोड़ा-थोड़ा और घूंट-घूंट करके ही पीना चाहिए।

यह एक बहुत बड़ा भ्रम है। बियर पीने से बहुत ज़्यादा पेशाब आता है जिससे कुछ समय के लिए छोटी पथरी खिसक सकती है, लेकिन शराब किडनी को भयंकर नुकसान पहुँचाती है। नींबू पानी इसका सबसे अच्छा विकल्प है।

अगर सादा पानी पीने का मन नहीं करता, तो आप छाछ, नारियल पानी, नींबू पानी या ताज़े फलों का रस ले सकते हैं। इससे शरीर में पानी की कमी आसानी से पूरी हो जाएगी।

अगर रात में दो या उससे ज़्यादा बार पेशाब के लिए उठना पड़ रहा है, तो यह कमज़ोर किडनी, बढ़ा हुआ शुगर या प्रोस्टेट (Prostate) की समस्या का इशारा हो सकता है।

किडनी और पेट के लिए हमेशा नॉर्मल या हल्का गुनगुना (Lukewarm) पानी पीना सबसे बेहतरीन होता है। फ्रिज का बहुत ठंडा पानी शरीर की नसों को सिकोड़ देता है।

हाँ, बिल्कुल। अगर पेशाब का रंग एकदम पानी जैसा साफ या हल्का पीला है, तो आपकी किडनी बढ़िया काम कर रही है। डार्क पीला या झाग वाला पेशाब खतरे की निशानी है।

हाँ, चाय और कॉफी में कैफीन होता है, जो शरीर से पानी को तेज़ी से बाहर निकाल देता है। इसलिए इनका ज़्यादा सेवन किडनी में जलन पैदा कर सकता है।

अगर पथरी का साइज़ बहुत छोटा (4-5 mm तक) है, तो भरपूर पानी और सही डाइट से वह पेशाब के रास्ते निकल सकती है। लेकिन बड़ी पथरी के लिए डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है।

हाँ, अगर बच्चे बाहर का जंक फूड ज़्यादा खाते हैं, पानी कम पीते हैं और घंटों तक पेशाब रोककर रखते हैं, तो कम उम्र में भी उन्हें यूरिन इन्फेक्शन और किडनी की समस्या हो सकती है।

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