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Post-delivery कमज़ोरी लंबे समय तक क्यों रह सकती है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 07 Jul, 2026
  • category-iconUpdated on 07 Jul, 2026
  • category-iconWomen's Health
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माँ बनना दुनिया के सबसे खूबसूरत एहसासों में से एक है, लेकिन इसके साथ शरीर को बहुत बड़े बदलावों से गुज़रना पड़ता है। 9 महीने तक एक नन्ही जान को अपने अंदर पालना और फिर उसे जन्म देना कोई आसान काम नहीं है। इस पूरी प्रक्रिया में शरीर की बहुत सारी एनर्जी खर्च होती है। बच्चा होने के बाद हर महिला चाहती है कि वह जल्दी से ठीक होकर पहले जैसी फुर्तीली हो जाए, लेकिन कई बार यह कमज़ोरी महीनों तक पीछा नहीं छोड़ती। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि डिलीवरी के बाद यह थकान लंबे समय तक क्यों रहती है और इससे कैसे बाहर निकला जा सकता है।

डिलीवरी के बाद इतनी थकान और कमज़ोरी क्यों रहती है?

शरीर में थकान सिर्फ काम करने से नहीं होती, इसके पीछे कई अंदरूनी कारण होते हैं:

  • खून की कमी: नॉर्मल डिलीवरी हो या सी-सेक्शन दोनों में ही शरीर से काफी खून बह जाता है, जिससे आयरन की भारी कमी हो जाती है।
  • हार्मोन का बदलना: बच्चा होने के बाद शरीर में प्रेगनेंसी वाले हार्मोंस का लेवल अचानक गिर जाता है, जिससे सुस्ती और उदासी महसूस होती है।
  • स्तनपान : बच्चे को अपना दूध पिलाने में माँ के शरीर की बहुत ज़्यादा कैलोरी खर्च होती है, जिससे बार-बार भूख लगती है और कमज़ोरी महसूस होती है।
  • नींद पूरी न होना: रात-रात भर जागकर बच्चे को सँभालने से शरीर को अपनी थकान मिटाने का समय ही नहीं मिल पाता।

इस कमज़ोरी पर डॉक्टर क्या कहते हैं?

डॉक्टर हमेशा समझाते हैं कि बच्चा होने के बाद शरीर को पूरी तरह से ठीक होने में 6 हफ्ते से लेकर 6 महीने या कभी-कभी एक साल तक का समय लग सकता है। डॉक्टर इसे कोई बीमारी नहीं मानते, बल्कि यह शरीर के खुद को ठीक करने का एक तरीका है। उनकी सबसे बड़ी सलाह यही होती है कि इस दौरान अपनी हिम्मत से ज़्यादा काम न करें और अपने शरीर को आराम का थोड़ा समय दें।

कौन सी चीज़ें इस कमज़ोरी को और बढ़ा देती हैं? 

  • अपने खाने-पीने को भूल जाना: बच्चे के रूटीन में उलझकर समय पर खाना न खाना या ऐसा खाना खाना जिसमें कोई ताक़त न हो।
  • आयरन और कैल्शियम की दवाइयां छोड़ देना: अक्सर महिलाएं बच्चा होने के बाद गोलियां खाना बंद कर देती हैं, जो सबसे बड़ी गलती है।
  • ज़रूरत से ज़्यादा काम करना: खुद को 'सुपरमॉम' साबित करने के चक्कर में आराम न करना और घर के सारे काम अकेले करने की कोशिश करना।
  • पानी कम पीना: बच्चे को दूध पिलाते समय शरीर को बहुत ज़्यादा पानी की ज़रूरत होती है, पानी कम पीने से थकान दोगुनी हो जाती है।

डिलीवरी के बाद कितनी प्रतिशत महिलाएं इस कमज़ोरी का शिकार होती हैं?

रिसर्च और क्लिनिक के डेटा के हिसाब से, लगभग 40 से 50 प्रतिशत महिलाएं डिलीवरी के बाद लंबे समय तक रहने वाली थकान और कमज़ोरी का शिकार होती हैं। अपने देश में यह आँकड़ा थोड़ा और ज़्यादा है क्योंकि यहाँ ज़्यादातर लड़कियों और महिलाओं में प्रेगनेंसी से पहले ही खून की कमी एनीमिया की शिकायत देखी जाती है।

डिलीवरी के बाद की कमज़ोरी से जल्दी कैसे बाहर निकलें?

इस कमज़ोरी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है जब बच्चा सोए, तब माँ भी सोए।  घर के कामों के लिए परिवार वालों या पति की मदद लें। अपनी डाइट में प्रोटीन, आयरन और फाइबर वाली चीज़ें बढ़ाएँ। गोंद के लड्डू, मेवे, मखाने और दलिया जैसी चीज़ें शरीर को अंदर से मज़बूत बनाती हैं। इसके अलावा, रोज़ाना 10-15 मिनट की हल्की वॉक ज़रूर करें, इससे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है।

बच्चा होने के बाद किन महिलाओं को सबसे ज़्यादा कमज़ोरी आती है? 

  • जिनका ऑपरेशन हुआ हो: क्योंकि यह एक बड़ी सर्जरी है और इसके टाँकों को अंदर तक सूखने में बहुत समय लगता है।
  • जिनके शरीर में खून की कमी रही हो: प्रेगनेंसी के समय जिन महिलाओं का खून (हीमोग्लोबिन) कम रहा हो, उन्हें ठीक होने में ज़्यादा समय लगता है।
  • जुड़वा बच्चों की माँएं: दो बच्चों को एक साथ जन्म देना और उन्हें सँभालना शरीर को दोगुना थका देता है।
  • जिन्हें परिवार का सपोर्ट न मिले: जिन्हें बच्चा होने के बाद आराम करने के लिए परिवार का साथ नहीं मिल पाता।

क्या माँ बनने के बाद लाइफस्टाइल में बदलाव करना ज़रूरी है?

डिलीवरी के बाद आपकी पुरानी लाइफस्टाइल काम नहीं आएगी। अब आपका सोने और जागने का समय बच्चे के हिसाब से तय होता है। मेहमानों से मिलने का समय थोड़ा कम करें ताकि आप आराम कर सकें। भारी कसरत या जिम तुरंत शुरू न करें, बल्कि रोज़ाना के रूटीन में योग और हल्की स्ट्रेचिंग को शामिल करें।

अत्यधिक कमज़ोरी के शुरुआती संकेत कैसे पहचानें? 

  • चक्कर आना: अचानक उठकर खड़े होने पर या चलते समय आँखों के आगे अंधेरा छा जाना।
  • बालों का गुच्छों में झड़ना: वैसे तो हार्मोन बदलने से बाल झड़ते हैं, लेकिन बहुत ज़्यादा झड़ना कमज़ोरी की निशानी है।
  • साँस फूलना: थोड़ा सा चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने पर ही बहुत ज़्यादा साँस फूलने लगना।
  • हर वक़्त रोने का मन करना: हर समय उदास रहना या बिना बात के रोने का मन करना (यह कमज़ोरी और डिप्रेशन दोनों का संकेत हो सकता है)।

नई माँ को किन स्थितियों में सबसे ज़्यादा अलर्ट रहना चाहिए? 

  • बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग होना: अगर डिलीवरी के कई हफ्तों बाद भी अचानक से खून ज़्यादा आने लगे।
  • तेज़ बुखार आना: जो टाँकों में इन्फेक्शन या ब्रेस्ट इन्फेक्शन का इशारा हो सकता है।
  • पैर में सूजन या दर्द: पैर की नसों में तेज़ दर्द या सूजन होना खतरनाक हो सकता है।
  • टाँकों (Stitches) में खिंचाव: अगर उठने-बैठने में टाँकों में तेज़ दर्द या मवाद जैसा कुछ महसूस हो।

बच्चा होने के बाद खानपान बदलना कितना ज़रूरी है? 

  • दूध बनाने के लिए: बच्चे के लिए पूरा और अच्छा दूध तभी बनेगा जब माँ खुद विटामिन्स से भरा अच्छा खाना खाएगी।
  • हड्डियों की मज़बूती के लिए: प्रेगनेंसी और दूध पिलाने के दौरान शरीर का काफी कैल्शियम बच्चे को चला जाता है, इसलिए दूध, पनीर, और रागी खाना ज़रूरी है।
  • मांसपेशियों को ठीक करने के लिए: डिलीवरी के दौरान नीचे की मांसपेशियां बहुत खिंच जाती हैं, जिन्हें वापस मज़बूत करने के लिए खाने में प्रोटीन होना ज़रूरी है।

बच्चे की देखभाल के साथ-साथ अपनी एनर्जी कैसे बचाएं?

बच्चे के साथ-साथ खुद पर भी ध्यान दें। बहुत ज़्यादा झुककर या गलत तरीके से बैठकर बच्चे को दूध न पिलाएँ, इससे आपकी पीठ में भयंकर दर्द हो सकता है। अपने खाने में ताज़े फल, सूप, दाल का पानी और हरी सब्ज़ियां शामिल करें। याद रखें, अगर माँ खुद सेहतमंद रहेगी, तभी वह अपने बच्चे को भी खुश और स्वस्थ रख पाएगी।

अपनी कमज़ोरी दूर करने के लिए डॉक्टर से कब मिलें? 

  • जब कमज़ोरी इतनी ज़्यादा हो कि आपको बच्चे को गोद में उठाने में भी डर लगने लगे।
  • जब आप पूरी रात सो न पाएं और दिन में भयानक थकान रहे।
  • अगर आपको खुद को या बच्चे को नुकसान पहुँचाने जैसे डरावने खयाल आएं।
  • लगातार सिरदर्द रहे या आँखों के सामने धुंधलापन छाने लगे।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक देखभाल में क्या फर्क है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) आयुर्वेदिक जच्चा केयर
मुख्य लक्ष्य प्रसव के बाद माँ के स्वास्थ्य की जाँच, पोषण की कमी पूरी करना और जटिलताओं का उपचार। प्रसव के बाद शरीर की रिकवरी, संतुलन और समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान।
उपचार का तरीका आयरन, कैल्शियम, विटामिन्स, आवश्यक दवाइयाँ और चिकित्सकीय निगरानी। संतुलित आहार, जड़ी-बूटियाँ, तेल मालिश और पारंपरिक देखभाल।
पोषण पर ध्यान पोषक तत्वों की कमी को वैज्ञानिक तरीके से पूरा किया जाता है। गर्म और सुपाच्य भोजन, पारंपरिक आहार और रिकवरी को सहारा देने वाले उपाय।
रिकवरी का दृष्टिकोण संक्रमण की रोकथाम, घाव भरने और शारीरिक स्वास्थ्य पर ज़ोर। शरीर को धीरे-धीरे मज़बूत बनाने और दिनचर्या सुधारने पर ध्यान।
संतुलित दृष्टिकोण आवश्यकता अनुसार चिकित्सकीय उपचार और नियमित फॉलो-अप। आधुनिक देखभाल के साथ संतुलित जीवनशैली अपनाने पर विशेष बल।

निष्कर्ष

माँ बनने का सफर एक मैराथन की तरह है, यह कोई 100 मीटर की दौड़ नहीं है जिसे तुरंत जीतना हो। शरीर ने एक नई ज़िंदगी बनाने में पूरे 9 महीने लगाए हैं, तो उसे वापस अपने पुराने रूप में आने के लिए भी कम से कम उतना समय चाहिए ही। अपनी कमज़ोरी को नज़रअंदाज़ न करें। सही डाइट, परिवार के साथ, अच्छी नींद और डॉक्टर की सलाह से आप इस कमज़ोरी को आसानी से हरा सकती हैं। अपनी रिकवरी को एन्जॉय करें और खुद से प्यार करना न भूलें।

References

https://www.who.int/publications/i/item/9789240045989

https://www.who.int/activities/raising-the-importance-of-postnatal-care

https://www.who.int/news/item/30-03-2022-who-urges-quality-care-for-women-and-newborns-in-critical-first-weeks-after-childbirth

https://www.healthline.com/health/postpartum-recovery-timeline

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

आमतौर पर डिलीवरी के बाद 6 से 8 हफ्ते तक काफी कमज़ोरी महसूस होती है। लेकिन शरीर को पूरी तरह से अंदर से ठीक होने में 6 महीने से लेकर एक साल तक लग सकता है।

दूध पिलाने से माँ की काफी कैलोरी खर्च होती है। अगर आप अच्छा खाना और भरपूर पानी नहीं ले रही हैं, तो इससे पक्का कमज़ोरी आएगी।

हाँ, क्योंकि यह एक बड़ी सर्जरी है। इसमें नॉर्मल डिलीवरी के मुकाबले खून भी ज़्यादा बहता है और टाँके सूखने में भी समय लगता है, इसलिए कमज़ोरी ज़्यादा दिन टिकती है।

आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और खूब सारा पानी। इसके अलावा घर के बने गोंद और सोंठ के लड्डू भी बहुत फायदा करते हैं।

बिल्कुल नहीं। कम से कम शुरुआती 40 दिन (सव्वा महीना) आपको भारी काम, वज़न उठाना या ज़्यादा देर खड़े रहना बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

हाँ, डॉक्टर आमतौर पर कम से कम 3 से 6 महीने तक आयरन और कैल्शियम खाते रहने की सलाह देते हैं ताकि शरीर में हुई कमी पूरी हो सके।

प्रेगनेंसी के समय जो हार्मोन बढ़ गए थे, वे अब नॉर्मल हो रहे होते हैं, इसलिए बाल झड़ते हैं। यह कुछ समय की बात है, जो बाद में खुद ठीक हो जाता है।

बेल्ट बाँधने से लटकी हुई मांसपेशियों को सपोर्ट मिलता है और पीठ दर्द में थोड़ा आराम मिलता है, लेकिन इससे अंदर की कमज़ोरी दूर नहीं होती।

नींद की कमी, ब्लड प्रेशर कम होना, और शरीर में पानी या खून की कमी के कारण अक्सर नई माँओं को चक्कर आने की समस्या होती है।

हाँ, जब शरीर लंबे समय तक थका हुआ और कमज़ोर रहता है, तो इसका सीधा असर दिमाग पर पड़ता है, जिससे उदासी, चिड़चिड़ापन और टेंशन बढ़ने का खतरा काफी ज़्यादा हो जाता है।

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