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सर्दी में Joints ज़्यादा क्यों दर्द करते हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 30 Apr, 2026
  • category-iconUpdated on 30 Apr, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5006

जोड़ों के दर्द की खामोश चेतावनी: क्या आप अपनी चाल को खतरे में डाल रहे हैं?

जब हमारे जोड़ों में हल्का सा दर्द या जकड़न शुरू होती है, तो हम अक्सर इसे "कल ठीक हो जाएगा" कहकर टाल देते हैं। लेकिन ये छोटी सी टीस असल में आपके शरीर का अलार्म है। जोड़ों के दर्द को नज़रअंदाज़ करना सिर्फ दर्द सहना नहीं है, बल्कि अपनी आज़ादी को खोना है। अगर आज ध्यान नहीं दिया, तो कल चलना-फिरना, सीढ़ियां चढ़ना या अपनी पसंद का काम करना भी मुश्किल हो सकता है। अब वक्त है जागने का और अपने शरीर को फिर से लचीला बनाने का।

जोड़ों का दर्द आखिर है क्या?

आसान शब्दों में कहें तो हमारे जोड़ उस 'कब्जे' (hinge) की तरह हैं जो शरीर को मोड़ने और चलाने में मदद करते हैं। जब इन जोड़ों के बीच की गद्दी (Cartilage) घिसने लगती है या वहाँ सूजन आ जाती है, तो उसे हम जोड़ों का दर्द या आर्थराइटिस कहते हैं। यह सिर्फ बूढ़ों की बीमारी नहीं है, बल्कि गलत खान-पान और लाइफस्टाइल की वजह से अब युवाओं में भी दिखने लगी है।

जोड़ों के दर्द के अलग-अलग रूप (Types)

हर दर्द एक जैसा नहीं होता, इसके मुख्य तीन प्रकार हैं:

  • हड्डियों का घिसना (Osteoarthritis): जैसे गाड़ी का टायर चलते-चलते घिस जाता है, वैसे ही उम्र के साथ हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं।
  • गठिया (Rheumatoid Arthritis): इसमें हमारे शरीर की सुरक्षा प्रणाली (Immune System) गलती से हमारे जोड़ों पर ही हमला कर देती है।
  • यूरिक एसिड वाला दर्द (Gout): जब खून में यूरिक एसिड बढ़ जाता है, तो वह जोड़ों में सुई जैसे चुभने वाले क्रिस्टल बना देता है।

लक्षण: कैसे पहचानें कि खतरा बढ़ रहा है?

आपका शरीर दर्द के जरिए आपसे कुछ कहना चाहता है। इन संकेतों को समझें:

  • सुबह की जकड़न: सोकर उठने के बाद आधे घंटे तक शरीर का भारी और जाम लगना।
  • सूजन और लाली: जोड़ों का फूल जाना और छूने पर गरम महसूस होना।
  • हड्डियों की आवाज़: चलते या उठते समय जोड़ों से 'कट-कट' की आवाज़ आना।
  • चलने में दिक्कत: पहले जो दूरी आप आसानी से तय करते थे, अब उसमें दर्द होता है।

अगर सुबह उठते ही उंगलियां या घुटने जाम लगें, तो हल्के गुनगुने पानी में सेंधा नमक डालकर सिकाई करें। इससे तुरंत आराम मिलता है।

 कारण: क्यों रूठ जाते हैं आपके जोड़?

इसके पीछे कई वजह हो सकती हैं, जिन्हें आप खुद सुधार सकते हैं:

  • बढ़ता वजन: ज्यादा वजन का सीधा दबाव आपके घुटनों और कूल्हों पर पड़ता है।
  • पेट की खराबी: आयुर्वेद मानता है कि अगर पेट साफ नहीं है, तो शरीर में गंदगी (आमा) जमा होकर जोड़ों में दर्द पैदा करती है
  • पुरानी चोट: बचपन या जवानी की कोई चोट बुढ़ापे में दर्द बनकर उभर सकती है।
  • बैठे रहने की आदत: जो जोड़ हिलेगा नहीं, वह जल्दी जाम हो जाएगा।

रिफाइंड तेल छोड़कर लकड़ी के कोल्हू का तेल या शुद्ध घी खाएं। यह जोड़ों में 'ग्रीस' का काम करता है।

खतरे और नुकसान (Risk Factors & Complications)

क्या करने से खतरा बढ़ता है?

इलाज न कराने पर क्या होगा?

ज्यादा वजन: घुटनों पर डबल बोझ।

विकलांगता: चलने-फिरने की ताकत खत्म होना।

गलत खान-पान: जंक फूड और ठंडी चीजें।

हड्डियों का टेढ़ापन: जोड़ अपनी जगह छोड़ सकते हैं।

व्यायाम की कमी: जोड़ों का जाम होना।

मानसिक तनाव: लगातार दर्द से चिड़चिड़ापन आना।

जांच का तरीका: एलोपैथी vs आयुर्वेद

बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए सही जांच जरूरी है। आजकल की मशीनें ये तो बता देती हैं कि कितना नुकसान हुआ है, पर आयुर्वेद ये बताता है कि नुकसान शुरू क्यों हुआ।

जांच का तरीका

एलोपैथी (Modern)

आयुर्वेद (Traditional)

मुख्य फोकस

एक्सरे (X-ray) और ब्लड टेस्ट।

नाड़ी परीक्षा और पेट की जांच।

क्या देखते हैं?

हड्डी कितनी घिसी है?

शरीर में कौन सा 'दोष' (वात) बिगड़ा है?

समाधान

पेनकिलर या सर्जरी।

खान-पान में बदलाव और जड़ी-बूटियाँ।

अपना 'दोष' पहचानें: आप कौन से टाइप के हैं?

आयुर्वेद के अनुसार, हर इंसान का शरीर अलग होता है। आपका दर्द कैसा है?

  • वात (Vata): दर्द कभी यहां होता है, कभी वहां। जोड़ सूखे और कड़क महसूस होते हैं।
  • पित्त (Pitta): जोड़ों में जलन होती है और वह हिस्सा लाल हो जाता है।
  • कफ (Kapha): जोड़ों में भारीपन और बहुत ज्यादा सूजन रहती है।

सर्दी में Joints ज़्यादा क्यों दर्द करते हैं?

क्या आपने गौर किया है कि जैसे ही ठंड आती है, घुटने ज्यादा शोर मचाने लगते हैं? इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि ठंड में हमारे जोड़ों के अंदर का तरल पदार्थ (Synovial Fluid) गाढ़ा हो जाता है, जैसे जमा हुआ घी। इससे जोड़ों की चिकनाई कम हो जाती है और नसें सिकुड़ने लगती हैं।

सर्दी के दर्द से बचने के लिए जोड़ों को हमेशा ढककर रखें और गुनगुने तिल के तेल से मालिश करें। सर्दियों में प्यास कम लगती है, लेकिन पानी पीना न छोड़ें, क्योंकि पानी की कमी जोड़ों को और ज्यादा सुखा देती है।

जोड़ों के दर्द के लिए स्वास्थ्यवर्धक डाइट प्लान

आयुर्वेद और पोषण विज्ञान के अनुसार, जोड़ों की सेहत के लिए शरीर में 'आम' (विषाक्त पदार्थों) का संचय रोकना और वात को संतुलित रखना आवश्यक है। नीचे दी गई तालिका आपको यह समझने में मदद करेगी कि आपको अपनी दिनचर्या में क्या शामिल करना चाहिए और किन चीजों से दूरी बनानी चाहिए।

क्या खाएं (Best Foods)

क्या न खाएं (Avoid Foods)

गरम और ताजा खाना: हमेशा ताजा बना हुआ भोजन ही लें।

बासी और ठंडा खाना: फ्रिज में रखा खाना दर्द बढ़ाता है।

अदरक और लहसुन: ये नेचुरल तरीके से सूजन को घटाते हैं।

खट्टी और ठंडी चीजें: दही, लस्सी और नींबू से बचें।

हल्के अनाज: जैसे दलिया, मूंग की दाल और पुराने चावल।

भारी दालें: राजमा, छोले और उड़द की दाल (गैस बनाने वाली चीजें)।

देसी घी: जोड़ों की चिकनाई (Lubrication) बनाए रखने के लिए।

मैदा और जंक फूड: ये शरीर में 'आम' या कचरा जमा करते हैं।

हमारी मरीज़ों की देखभाल की चरण-दर-चरण प्रक्रिया:

कॉल की उम्मीद करें: अपनी संपर्क जानकारी जमा करें, या आप हमें 0129 4264323 पर कॉल भी कर सकते हैं।

अपॉइंटमेंट की पुष्टि।

आप अपॉइंटमेंट तय कर सकते हैं और हमारे आयुर्वेदिक विशेषज्ञों से सलाह लेने के लिए हमारे क्लिनिक आ सकते हैं।

अगर आपको अपने आस-पास हमारा क्लिनिक नहीं मिल रहा है, तो आप 0129 4264323 पर ऑनलाइन सलाह भी ले सकते हैं। इसकी कीमत सिर्फ़ 49 रुपये (नियमित कीमत 299 रुपये) है और आप घर बैठे ही हमारे डॉक्टरों से सलाह ले सकते हैं।

विस्तृत जाँच

जीवा डॉक्टर आपकी स्वास्थ्य समस्या की असली वजह जानने के लिए पूरी और विस्तृत जाँच करेंगे।

असली वजह पर आधारित इलाज

जीवा डॉक्टर लक्षणों और असली वजह को ठीक करने के लिए बहुत असरदार, प्राकृतिक और आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल करके आपके लिए खास इलाज सुझाएँगे।

आपकी रिकवरी का सफर: कदम-दर-कदम (Treatment Journey)

इलाज की शुरुआत से पूरी तरह ठीक होने तक का सफर कुछ इस तरह होता है:

  1. पहला कदम (Consultation): डॉक्टर आपकी पूरी जांच करते हैं और बीमारी का कारण ढूंढते हैं।
  2. दूसरा कदम (Customized Medicine): आपकी प्रकृति के अनुसार आपके लिए खास जड़ी-बूटियाँ तैयार की जाती हैं।
  3. तीसरा कदम (Diet & Lifestyle): आपको एक व्यक्तिगत डाइट चार्ट दिया जाता है जिसे 'जीवा गाइड' कहा जाता है।
  4. चौथा कदम (Regular Follow-ups): समय-समय पर डॉक्टर आपकी प्रगति देखते हैं और जरूरत पड़ने पर दवाओं में बदलाव करते हैं।

सुधार की समयसीमा: कितने समय में मिलेगा आराम? (Healing Timeline)

चूंकि आयुर्वेद बीमारी को जड़ से खत्म करता है, इसलिए इसमें थोड़ा धैर्य रखना जरूरी है। आमतौर पर:

  • 15 से 30 दिन: जोड़ों की जकड़न में कमी महसूस होने लगती है और पाचन बेहतर होता है।
  • 3 से 6 महीने: पुराने दर्द में काफी राहत मिलती है और जोड़ों की गतिशीलता (Movement) बढ़ जाती है।
  • गंभीर या बहुत पुराने रोगों में इलाज 1 साल तक भी चल सकता है ताकि बीमारी दोबारा न लौटे।

आपको क्या परिणाम मिलेंगे? (Expectations vs. Reality)

जीवा में इलाज का मतलब सिर्फ दर्द कम करना नहीं, बल्कि आपके जीवन की गुणवत्ता को सुधारना है। नीचे दी गई तालिका से आप समझ सकते हैं कि इलाज से पहले और बाद में आपके जीवन में क्या बदलाव आएगा:

इलाज शुरू होने के बाद, आप धीरे-धीरे दर्द निवारक गोलियों (Painkillers) पर अपनी निर्भरता कम होते हुए देखेंगे और शरीर में एक नई ऊर्जा महसूस करेंगे।

समस्या (इलाज से पहले)

समाधान (जीवा उपचार के बाद)

सीढ़ियां चढ़ने में असहनीय दर्द।

बिना किसी सहारे के आसानी से चलना-फिरना।

दवाओं के साइड इफेक्ट्स और सुस्ती।

प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से कोई दुष्प्रभाव नहीं।

जोड़ों में सूजन और लालिमा।

सूजन में भारी कमी और जोड़ों का लचीलापन।

रात में दर्द के कारण नींद न आना।

गहरी और सुकून भरी नींद।

मरीजों का अनुभव 

"मेरे पैरों और टखनों में असहनीय दर्द रहता था। जब भी मैं कोई रूखा-सूखा या तला-भुना खाना खाती, तो यह दर्द और भी ज्यादा बढ़ जाता था। जब मैंने ब्लड टेस्ट करवाया, तो पता चला कि मेरा यूरिक एसिड (Uric Acid) बहुत बढ़ा हुआ है। डॉक्टरों ने मुझे पेनकिलर्स दीं, लेकिन उनसे मिलने वाला आराम बस कुछ समय के लिए ही होता था। इसके बाद मैंने जीवा आयुर्वेद (Jiva Ayurveda) के डॉक्टर से परामर्श लिया। उन्होंने मुझे कुछ हर्बल दवाएं सुझाईं, जिनसे मुझे दर्द में लंबे समय के लिए राहत मिली है। अब मैं काफी बेहतर महसूस कर रही हूँ और आप सभी को जीवा के आयुर्वेदिक उपचार की सलाह देती हूँ।"

— राज कुमारी

जीवा आयुर्वेद में इलाज की अनुमानित लागत

अपनी सेहत के लिए ज़रूरी आर्थिक निवेश को समझना ज़रूरी है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं की लागत में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी मेडिकल ज़रूरतों के हिसाब से सबसे सही विकल्प चुन सकें।

इलाज की लागत

जो मरीज़ नियमित, लगातार देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और कंसल्टेशन की मासिक लागत आमतौर पर 3,000 रुपये से 3,500 रुपये के बीच होती है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित शुरुआती लागत है। अंतिम लागत मरीज़ की बीमारी की सही प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करती है।

प्रोटोकॉल

ज़्यादा व्यापक और व्यवस्थित तरीके के लिए, हम खास पैकेज प्रोटोकॉल देते हैं। ये प्लान शारीरिक लक्षणों और पूरी जीवनशैली में सुधार, दोनों पर ध्यान देने के लिए बनाए गए हैं। पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल की लागत में एक बार में 15,000 रुपये से 40,000 रुपये तक का पेमेंट शामिल होता है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

जिन मरीज़ों को गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की ज़रूरत होती है, उनके लिए हमारे जीवाग्राम केंद्र बेहतरीन इलाज का अनुभव देते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में बना एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है, और यह ये सुविधाएँ देता है:

  • असली पंचकर्म थेरेपी
  • सात्विक भोजन
  • आधुनिक इलाज सेवाएँ
  • आरामदायक रहने की जगह
  • और भी कई जीवन-स्तर सुधारने वाली सुविधाएँ

जीवाग्राम में 7 दिनों के लिए पूरी तरह से समर्पित वेलनेस स्टे की लागत लगभग 1 लाख रुपये है, जो आपके शरीर और मन को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए लगातार, व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

मरीज जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?

पिछले कुछ सालों में, जीवा आयुर्वेद ने हज़ारों ऐसे मरीजों का भरोसा जीता है जो प्राकृतिक और पर्सनलाइज़्ड हेल्थकेयर समाधान ढूंढ रहे हैं। जीवा आयुर्वेद पर मरीजों के भरोसे के कुछ मुख्य कारण ये हैं:

  • बीमारी की जड़ पर आधारित इलाज

पारंपरिक इलाज के उलट, जो सिर्फ़ बीमारी के लक्षणों पर ध्यान देते हैं, आयुर्वेदिक इलाज बीमारी की जड़ को ठीक करने और शरीर में मौजूद उन अंदरूनी असंतुलनों को ठीक करने पर ज़ोर देता है जिनकी वजह से बीमारी होती है।

  • अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर

जीवा आयुर्वेद के पास अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टरों की एक बहुत बड़ी टीम है, जो किसी भी बीमारी के लिए इलाज सुझाने से पहले हर मरीज की स्थिति की अच्छी तरह से जांच करते हैं।

  • पर्सनलाइज़्ड "Ayunique" इलाज का तरीका

आयुर्वेदिक इलाज बहुत ज़्यादा पर्सनलाइज़्ड होता है और हर व्यक्ति की प्रकृति और जीवनशैली के हिसाब से तैयार किया जाता है।

  • संपूर्ण इलाज

आयुर्वेदिक इलाज सिर्फ़ दवाओं तक ही सीमित नहीं है; इसमें खान-पान और जीवनशैली में बदलाव, सांस लेने की तकनीकें, और तनाव को मैनेज करने के तरीके भी शामिल हैं, ताकि शरीर और मन का पूरी तरह से इलाज हो सके।

  • पूरे भारत में मरीजों का भरोसा

बहुत बड़ी संख्या में मरीजों ने Jiva के इलाज के तरीकों और सुझावों को अपनाने के बाद अपनी सेहत में सुधार देखा है। इससे पता चलता है कि आयुर्वेदिक इलाज के लिए लोग जीवा आयुर्वेद पर कितना भरोसा करते हैं।

  • 95% मरीजों ने इलाज शुरू करने के 3 महीने के अंदर ही अपनी सेहत में काफ़ी सुधार देखा।
  • 88% मरीजों ने एलोपैथिक दवाएँ पूरी तरह से लेना बंद कर दिया।
  • हर दिन 8000+ मरीजों का कंसल्टेशन होता है।
  • दुनिया भर में 15 लाख से ज़्यादा संतुष्ट मरीज़
  • 30+ वर्षों की आयुर्वेदिक विशेषज्ञता
  • पूरे भारत में 80+ क्लिनिक

आधुनिक इलाज (Allopathy) vs आयुर्वेदिक उपचार

आज के समय में जब जोड़ों का दर्द होता है, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है—हड्डियों के डॉक्टर के पास जाएं या आयुर्वेद अपनाएं? दोनों ही विज्ञान अपनी जगह सही हैं, लेकिन उनके काम करने का तरीका बिल्कुल अलग है। एलोपैथी जहाँ तुरंत राहत देने पर फोकस करती है, वहीं आयुर्वेद आपकी बीमारी को उसकी जड़ों से उखाड़ने का काम करता है।

नीचे दी गई तालिका आपको यह समझने में मदद करेगी कि आपके शरीर के लिए लंबे समय तक क्या सही रहेगा:

विशेषता

आधुनिक इलाज (Allopathy)

आयुर्वेदिक उपचार (Ayurveda)

मुख्य लक्ष्य

दर्द और सूजन को तुरंत कम करना

बीमारी की जड़ (वात और टॉक्सिन्स) को मिटाना।

दवाइयां

पेनकिलर्स और स्टेरॉयड का उपयोग।

प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ और तेल।

दुष्प्रभाव (Side Effects)

लंबे समय तक लेने पर किडनी या लिवर पर असर।

पूरी तरह प्राकृतिक, कोई साइड इफेक्ट नहीं।

इलाज का तरीका

लक्षणों को दबाना (Symptomatic Relief)।

शरीर का शुद्धिकरण और जीवनशैली में बदलाव।

सर्जरी

घुटने बदलना (Knee Replacement) अंतिम विकल्प।

पंचकर्म के जरिए सर्जरी की नौबत टालने की कोशिश।

डॉक्टर को कब दिखाएं? (संकेत जिन्हें नज़रअंदाज़ न करें)

कभी-कभी हम जोड़ों के दर्द को मामूली समझकर घर पर ही इलाज करते रहते हैं, लेकिन कुछ संकेत बहुत खतरनाक हो सकते हैं। अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • अगर जोड़ों का दर्द इतना बढ़ जाए कि आप रात को सो न सकें।
  • अगर घुटने या जोड़ों में बहुत ज्यादा लाली और गर्मी महसूस हो।
  • बिना किसी चोट के जोड़ों में अचानक भारी सूजन आ जाना।
  • अगर जोड़ों के दर्द के साथ आपको हल्का बुखार भी रहने लगे।

देर न करें, आज ही जीवा के विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह लें!

आप घर बैठे वीडियो कॉल के जरिए या अपने नजदीकी जीवा क्लीनिक पर आकर डॉक्टर से बात कर सकते हैं।

संपर्क करें:

  • कॉल: 0129-4264323
  • वेबसाइट: www.jiva.com
  • परामर्श: पूरे भारत में ऑनलाइन और 80+ क्लिनिक उपलब्ध हैं।

निष्कर्ष

जोड़ों का दर्द सिर्फ एक शारीरिक परेशानी नहीं है, यह आपके जीवन की गति को रोकने वाला एक अवरोध है। हमने इस लेख में समझा कि कैसे खराब पाचन और 'वात' का बढ़ना आपके जोड़ों को कमजोर कर देता है। आयुर्वेद हमें सिखाता है कि अगर हम समय रहते अपने खान-पान को सुधार लें और सही जड़ी-बूटियों का सहारा लें, तो हम बुढ़ापे तक अपनी चाल को जवां रख सकते हैं। याद रखें, सर्जरी से बेहतर है सावधानी! सही निदान, सात्विक भोजन, और जीवा का विशेष उपचार ही आपके जोड़ों की लंबी उम्र की कुंजी है।

References

FAQs

जी हाँ! आयुर्वेद में क्रोनिक (पुराने) रोगों का बहुत अच्छा इलाज है। इसमें समय थोड़ा ज्यादा लग सकता है, लेकिन परिणाम स्थायी होते हैं।

बिल्कुल नहीं। एक बार जब आपके शरीर के दोष संतुलित हो जाते हैं और आप सही लाइफस्टाइल अपना लेते हैं, तो दवाइयां धीरे-धीरे बंद कर दी जाती हैं।

हल्की स्ट्रेचिंग और योग बहुत फायदेमंद हैं, लेकिन बहुत ज्यादा भारी वजन उठाने से बचें। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी कठिन व्यायाम न करें।

जी हाँ, आयुर्वेद के अनुसार दही 'अभिष्यंदी' होता है जो जोड़ों में रुकावट और सूजन पैदा कर सकता है, खासकर रात के समय।

हाँ, आप अपनी मौजूदा दवाओं के साथ आयुर्वेदिक दवाएं ले सकते हैं, लेकिन सुरक्षा के लिए हमारे डॉक्टर को अपनी दवाओं की पूरी जानकारी जरूर दें।

मालिश से न केवल हड्डियां मजबूत होती हैं, बल्कि जोड़ों के बीच की चिकनाई भी बनी रहती है। यह 'वात' को शांत करने का सबसे अच्छा तरीका है।

नहीं, बस कोशिश करें कि पुराने चावल खाएं और उन्हें उबालकर (मांड निकालकर) गरम-गरम खाएं। ठंडे चावलों से बचें।

यह घुटनों के दर्द के लिए सबसे प्रसिद्ध आयुर्वेदिक थेरेपी है। यह घुटने की मांसपेशियों को पोषण देती है और घर्षण (Friction) को कम करती है।

वजन कम करना इलाज का एक बड़ा हिस्सा है। आपके शरीर का 1 किलो कम वजन घुटनों पर पड़ने वाले दबाव को 4 किलो तक कम कर देता है!

दुर्भाग्य से आजकल खराब डाइट की वजह से बच्चों में भी जोड़ों की समस्या देखी जा रही है। इसे 'जुवेनाइल आर्थराइटिस' कहते हैं और इसका आयुर्वेद में सुरक्षित इलाज है।

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