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6 साल के इंतजार के बाद दीपिका को मिली खुशखबरी – आयुर्वेद ने बदली जिंदगी

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 20 May, 2026
  • category-iconUpdated on 20 May, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5009

कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहाँ उम्मीद और निराशा साथ-साथ चलने लगते हैं। एक तरफ दिल में चाहत होती है कि सब ठीक हो जाए, और दूसरी तरफ लगातार कोशिशों के बाद भी नतीजे न मिलें तो मन थकने लगता है। दीपिका का सफर भी कुछ ऐसा ही था, 6 साल का लंबा इंतज़ार, कई तरह के इलाज, और हर बार एक नई उम्मीद के साथ आगे बढ़ना। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगता है, लेकिन समय के साथ जब बार-बार कोशिशों के बाद भी परिणाम नहीं मिले, तो मन पर इसका असर पड़ने लगा। फिर भी हर नए दिन के साथ एक छोटी सी उम्मीद बनी रहती थी। कभी किसी सलाह से, कभी किसी नए इलाज से, और कभी सिर्फ अपने अंदर की हिम्मत से।

6 साल की लंबी प्रतीक्षा का मानसिक बोझ

छह साल का समय आसान नहीं था। हर महीने एक नई उम्मीद बनती और फिर वही इंतज़ार शुरू हो जाता। धीरे-धीरे यह एक रूटीन जैसा बन गया था।

कई बार मन में सवाल आते थे कि आगे क्या होगा, और कब चीजें सही होंगी। लगातार चल रहे इस प्रोसेस की वजह से थकान भी महसूस होने लगी थी। यह सिर्फ इलाज का सफर नहीं था, बल्कि एक लंबा इंतज़ार भी था, जिसमें धैर्य बनाए रखना सबसे बड़ी बात थी।

इलाज की शुरुआत: एलोपैथी और होम्योपैथी का अनुभव

शुरुआत में दीपिका ने अलग-अलग इलाज अपनाए। पहले एलोपैथी की दवाइयाँ लीं, फिर होम्योपैथी का भी सहारा लिया गया। हर बार उम्मीद रहती थी कि शायद अब कुछ सही परिणाम मिलेगा। लेकिन सच यह रहा कि कोई खास रिज़ल्ट नहीं मिला। कुछ समय के लिए हल्का फर्क महसूस होता था, लेकिन वह टिक नहीं पाता था। लगातार कोशिशों के बावजूद जब सुधार नहीं दिखा, तो मन में निराशा भी आने लगी। हर नए इलाज के साथ उम्मीद जुड़ती थी, लेकिन अंत में वही इंतज़ार रह जाता था। धीरे-धीरे यह समझ आने लगा कि समस्या सिर्फ दवाइयों से पूरी तरह हल नहीं हो पा रही है, और शायद किसी अलग दृष्टिकोण की जरूरत है।

निराशा, तनाव और सामाजिक दबाव का असर

इस पूरे सफर में सिर्फ इलाज ही नहीं चल रहा था, बल्कि मानसिक दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा था। समाज के सवाल, रिश्तेदारों की बातें और बार-बार मिलने वाले सुझाव, ये सब मिलकर मन पर असर डालते थे। कई बार बिना कुछ बोले भी हालात समझ में आ जाते थे। लोग सीधे कुछ न कहें, फिर भी उनके इशारे और बातें मन तक पहुँच जाती थीं। धीरे-धीरे यह सब एक तनाव जैसा बनने लगा था।  घर के अंदर भी सोच भारी रहने लगी थी। हर बातचीत में कहीं न कहीं यही विषय आ जाता था, जिससे मन पर दबाव और बढ़ जाता था। समय के साथ यह स्थिति सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि गहरे मानसिक संघर्ष में बदल गई थी।

आयुर्वेद में इनफर्टिलिटी को कैसे देखा जाता है?

आयुर्वेद में इनफर्टिलिटी को केवल प्रजनन से जुड़ी समस्या नहीं माना जाता। इसे शरीर के अंदरूनी संतुलन, धातु की कमजोरी और दोषों के असंतुलन से जुड़ी स्थिति के रूप में देखा जाता है। इसमें शरीर के साथ साथ मन की स्थिति को भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि मानसिक तनाव और असंतुलन भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए आयुर्वेद में पूरे शरीर और मन को संतुलित करने पर जोर दिया जाता है ताकि प्राकृतिक गर्भधारण की क्षमता को बेहतर बनाया जा सके।

जीवा आयुर्वेद की ओर पहला कदम, पति का सहारा और नया मोड़

जब लंबे समय तक इलाज के बाद भी कोई खास सुधार नहीं हुआ, तो दीपिका और उनके पति ने आयुर्वेद को एक बार मौका देने का फैसला किया। उम्मीद अभी भी थी, इसलिए उन्होंने जीवा आयुर्वेद की ओर कदम बढ़ाया।

इस पूरे सफर में पति का साथ सबसे बड़ी ताकत रहा। उन्होंने लगातार समाधान खोजे और हर मुश्किल समय में हिम्मत दी। इसी दौरान उन्होंने Dr. Pratap Chauhan का वीडियो देखा, जिसने सोच बदलने में मदद की और आगे का रास्ता दिखाया।

इसके बाद उन्होंने दिए गए नंबर +91 92667 14040 पर कॉल किया। कॉल के बाद वीडियो कंसल्टेशन हुई और वहीं से जीवा आयुर्वेद के साथ उनकी आगे की यात्रा शुरू हुई।

जीवा आयुर्वेद में दीपिका की जांच कैसे की गई?

आयुर्वेद में प्रजनन स्वास्थ्य या किसी भी लंबी चलने वाली समस्या को केवल एक लक्षण के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि पूरे शरीर और मन के संतुलन के आधार पर समझा जाता है। दीपिका के केस में भी वीडियो कंसल्टेशन के जरिए उनकी स्थिति का विस्तार से मूल्यांकन किया गया, ताकि समस्या की जड़ तक पहुँचा जा सके।

  • वीडियो परामर्श के दौरान उनके लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री को विस्तार से समझा गया
  • पिछले 6 साल के सभी इलाज (एलोपैथी, होम्योपैथी और अन्य प्रयास) का पूरा विश्लेषण किया गया
  • मासिक चक्र, हार्मोनल पैटर्न और शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया को ध्यान से देखा गया
  • डाइट, लाइफस्टाइल और दिनचर्या की आदतों को विस्तार से जाना गया
  • मानसिक तनाव, भावनात्मक दबाव और लगातार चल रही चिंता का आकलन किया गया
  • नींद, ऊर्जा स्तर और रोज़मर्रा की थकान को भी समझा गया
  • शरीर में संभावित वात-पित्त असंतुलन की स्थिति को ध्यान में रखा गया

इन सभी पहलुओं को जोड़कर दीपिका के लिए एक व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार की गई। इसका उद्देश्य केवल शरीर को सपोर्ट करना नहीं था, बल्कि पूरे सिस्टम, शरीर, मन और जीवनशैली, को संतुलन में लाना था, ताकि आगे का रास्ता प्राकृतिक रूप से बेहतर बन सके।

कस्टमाइज्ड (customized) आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट प्लान की शुरुआत  

दीपिका जी के मामले में लंबे समय से चली आ रही बांझपन को केवल शारीरिक समस्या नहीं माना गया, बल्कि इसे शरीर, मन और हार्मोन असंतुलन का गहरा संकेत समझा गया। वीडियो परामर्श के दौरान आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से उनके सम्पूर्ण स्वास्थ्य का मूल्यांकन किया गया और ऐसा उपचार तय किया गया जिसका उद्देश्य केवल गर्भधारण नहीं, बल्कि शरीर की प्राकृतिक प्रजनन क्षमता और समग्र संतुलन को पुनर्स्थापित करना था।

  • वात संतुलन और प्रजनन स्थिरता: वात दोष की अस्थिरता को मुख्य कारण माना गया। इसे संतुलित कर शरीर में स्थिरता, जड़ता और प्रजनन लय को सुधारने पर ध्यान दिया गया, ताकि प्राकृतिक क्षमता पुनः सक्रिय हो सके।
  • पाचन और आंतरिक शुद्धि पर ध्यान: कमजोर पाचन और शरीर में विषैले तत्वों को समस्या का महत्वपूर्ण कारण माना गया। पाचन सुधारकर शरीर को भीतर से हल्का, शुद्ध और पोषक तत्वों को सही तरीके से ग्रहण करने योग्य बनाया गया।
  • मानसिक शांति और तनाव प्रबंधन: दीपिका जी की मानसिक स्थिति को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया। तनाव कम करने, मन को शांत करने और भावनात्मक स्थिरता लाने के लिए विशेष उपाय सुझाए गए, ताकि शरीर पर मानसिक दबाव कम हो सके।
  • हार्मोनल और शारीरिक संतुलन सुधार: शरीर की प्राकृतिक हार्मोन लय को संतुलित करने पर ध्यान दिया गया। उद्देश्य था कि प्रजनन तंत्र बिना बाधा के अपनी सामान्य कार्यप्रणाली में लौट सके।
  • जीवनशैली और दिनचर्या में सुधार: संतुलित आहार, समय पर भोजन, पर्याप्त विश्राम और नियमित दिनचर्या अपनाने पर जोर दिया गया। छोटे-छोटे जीवनशैली परिवर्तन को उपचार का आधार बनाया गया ताकि परिणाम स्थायी हो सकें।

डाइट में छोटे बदलाव, जिन्होंने बड़ा असर दिखाया 

दीपिका के लंबे समय से चल रहे प्रजनन असंतुलन और हार्मोनल गड़बड़ी में सबसे पहले शरीर के भीतर की “सूजन”, “दोष असंतुलन” और “पाचन कमजोरी” को शांत करने पर ध्यान दिया गया। उद्देश्य था—शरीर को भीतर से हल्का, स्थिर और संतुलित बनाना। छोटे लेकिन बेहद सटीक बदलावों ने धीरे-धीरे शरीर में सकारात्मक परिवर्तन शुरू कर दिए।

  • भारी, तैलीय और अत्यधिक मसालेदार भोजन को कम किया गया ताकि शरीर में गर्मी और विषैले तत्व न बढ़ें
  • मैदा, पैकेट फूड और प्रोसेस्ड चीज़ें पूरी तरह हटाई गईं जिससे हार्मोनल असंतुलन पर दबाव कम हो
  • हल्का, गर्म और सुपाच्य भोजन अपनाया गया ताकि पाचन अग्नि संतुलित रहे और शरीर भीतर से मजबूत बने
  • दिनभर गुनगुना पानी पीने की आदत दी गई जिससे शरीर की अंदरूनी सफाई और सर्कुलेशन बेहतर हो
  • भोजन की मात्रा और समय को नियमित किया गया ताकि शरीर को एक स्थिर जैविक लय मिल सके

क्या आयुर्वेदिक उपचार और औषधियाँ सुरक्षित हैं?

दीपिका के मन में भी शुरुआत में यही आशंका थी कि कहीं आयुर्वेदिक औषधियाँ शरीर पर कोई दुष्प्रभाव न डाल दें। लेकिन समझाया गया कि आयुर्वेदिक औषधियाँ प्राकृतिक जड़ी-बूटियों पर आधारित होती हैं और उनका मुख्य उद्देश्य शरीर के भीतर संतुलन को पुनः स्थापित करना होता है। ये औषधियाँ शरीर के प्राकृतिक हार्मोन संतुलन को सहयोग देने पर काम करती हैं। लक्ष्य केवल लक्षणों को दबाना नहीं, बल्कि जड़ कारण को सुधारना होता है। शरीर की अग्नि और धातु को पोषण देकर प्रजनन तंत्र को मजबूत बनाया जाता ।है समय के साथ शरीर अपनी प्राकृतिक कार्यक्षमता की ओर लौटने लगता है

जीवा के विशेष पंचकर्म और मानसिक स्वास्थ्य सत्र

लंबे समय से चल रहे हार्मोनल असंतुलन और मानसिक तनाव को देखते हुए शरीर और मन दोनों की शुद्धि और स्थिरता पर विशेष ध्यान दिया गया। इसका उद्देश्य केवल शारीरिक सुधार नहीं, बल्कि सम्पूर्ण संतुलन स्थापित करना था।

  • अभ्यंग (तेल मालिश थेरेपी): औषधीय तेलों से हल्की मालिश द्वारा शरीर में जमे तनाव, जकड़न और वात असंतुलन को शांत करने पर ध्यान दिया गया। इससे शरीर को गहरी विश्रांति मिली और आंतरिक स्थिरता बढ़ी।
  • शोधन और हल्के पंचकर्म उपाय: शरीर में जमा विषैले तत्वों को संतुलित रूप से बाहर निकालने और आंतरिक सफाई के लिए हल्के पंचकर्म उपाय अपनाए गए। इससे शरीर हल्का और अधिक ग्रहणशील बना।
  • वात-पित्त शमन थेरेपी: बढ़े हुए वात और पित्त को शांत करने के लिए विशेष थेरेपी दी गई, जिससे दर्द, चिड़चिड़ापन और आंतरिक अस्थिरता में कमी आई।
  • मानसिक शांति और तनाव कम करने वाले सत्र: लगातार चल रहे मानसिक दबाव और चिंता को कम करने के लिए रिलैक्सेशन और श्वसन आधारित तकनीकें अपनाई गईं, जिससे मन धीरे-धीरे स्थिर होने लगा।
  • भावनात्मक संतुलन पुनर्स्थापन: धीरे-धीरे आत्मविश्वास, उम्मीद और भावनात्मक स्थिरता को वापस लाने पर काम किया गया, जिससे शरीर ने उपचार को अधिक सकारात्मक रूप से स्वीकार करना शुरू किया।

धीरे-धीरे बदलावों की अनुभूति और सकारात्मक संकेतों का उभरना

समय के साथ शरीर में छोटे-छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव महसूस होने लगे। हल्कापन बढ़ने लगा, मन पहले से अधिक शांत रहने लगा और ऊर्जा स्तर में सुधार दिखने लगा। यह परिवर्तन भले ही धीरे थे, लेकिन लगातार सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे थे।

इसी दौरान धैर्य और अनुशासन की असली परीक्षा भी हुई। नियमों का पालन करना और नियमितता बनाए रखना आसान नहीं था, लेकिन निरंतरता ने पूरी प्रक्रिया को स्थिरता दी। धीरे-धीरे शरीर ने खुद भी सुधार के संकेत देने शुरू किए, जो उम्मीद को और मजबूत करते गए और विश्वास को गहराई प्रदान करते गए।

परिवार में उम्मीद का फिर से जागना 

जब धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिखने लगे, तो परिवार में लगभग बुझ चुकी उम्मीद फिर से जीवित हो उठी। घर का माहौल बदलने लगा, जहाँ पहले चिंता और थकान थी, वहाँ अब एक नई ऊर्जा और हल्की मुस्कान लौट आई।

और फिर वह विशेष दिन आया, जिसने पूरी यात्रा को अर्थपूर्ण बना दिया, खुशखबरी मिली। यह क्षण केवल सूचना नहीं था, बल्कि वर्षों की प्रतीक्षा, संघर्ष और विश्वास का परिणाम था। भावनाएँ इतनी गहरी थीं कि उन्हें शब्दों में समेटना कठिन था।

माँ बनना केवल एक शारीरिक स्थिति नहीं, बल्कि एक अत्यंत गहरी और जीवन बदल देने वाली अनुभूति है। यह अनुभव हर दर्द, हर इंतजार और हर संघर्ष को अर्थ दे देता है। उस पल ने जीवन को एक नई दिशा और पूर्णता का एहसास कराया।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च और पारदर्शिता 

कई लोग सोचते हैं कि ऐसा कस्टमाइज्ड आयुर्वेद बहुत महंगा होगा। लेकिन आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है । जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें ।

  • जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है । (यह एक अनुमानित आधार है और अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।)
  • अधिक व्यापक दृष्टिकोण के लिए विशेष पैकेज प्रोटोकॉल भी हैं, जिन्हें शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है ।
  • इन पैकेज में दवा, परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य सत्र, योग और ध्यान मार्गदर्शन, आहार योजना और थेरेपी शामिल हैं । इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है ।

अगर आप भी इसी राह पर हैं, तो आपको क्या करना चाहिए? 

हम आपके हर पल दर्द सहने की मजबूरी और लोगों के बीच होने वाली परेशानी को समझते हैं। हमारा लक्ष्य आपको एक बहुत ही सुरक्षित और प्राकृतिक इलाज का रास्ता देना है।

  • जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर +919266714040 पर कॉल करें। हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ आपसे बहुत प्यार और धैर्य से बात करेंगे।
  • अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं।
  • ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: दर्द के मारे हालत खराब है और बाहर जाना मुश्किल है, तो घर बैठे वीडियो कॉल से डॉक्टर से बात करें।
  • विस्तृत जाँच: आपकी साइटिका की पूरी हिस्ट्री और उन सभी दवाईयों की लिस्ट बहुत ध्यान से समझी जाती है जो आप खा चुके हैं।
  • व्यक्तिगत प्लान: आपके लिए खास वात-नाशक जड़ी-बूटियाँ, नसों को ताकत देने वाले रसायन और वात शामक डाइट का एक पूरा रूटीन तैयार किया जाता है।

निष्कर्ष

लंबे समय तक चली यह यात्रा केवल एक इलाज की प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि धैर्य, विश्वास और संतुलन की गहरी साधना थी। शरीर के साथ-साथ मन को भी समझना और संभालना इस पूरे सफर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

जब सही दिशा, सही मार्गदर्शन और निरंतरता एक साथ मिलते हैं, तो धीरे-धीरे शरीर अपनी प्राकृतिक शक्ति को फिर से पाने लगता है। यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही देखभाल और संतुलित जीवनशैली के साथ कठिन से कठिन स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव संभव है।

FAQs

हां, लंबे समय तक चली आ रही समस्या में भी सुधार संभव होता है। जब शरीर के अंदरूनी असंतुलन को सही दिशा मिलती है तो धीरे धीरे प्राकृतिक संतुलन वापस आने लगता है। इसमें समय और निरंतरता दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सही देखभाल के साथ शरीर अपनी रिकवरी क्षमता को सक्रिय कर सकता है।

मानसिक स्थिति का सीधा प्रभाव शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। लगातार तनाव और चिंता शरीर की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं। जब मन शांत होता है तो शरीर भी बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया देता है। इसलिए मानसिक संतुलन स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण माना जाता है।

जीवनशैली में बदलाव से सुधार की प्रक्रिया बेहतर हो सकती है। नियमित दिनचर्या और संतुलित आदतें शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। हालांकि परिणाम धीरे-धीरे दिखाई देते हैं, लेकिन वे अधिक स्थायी हो सकते हैं। अनुशासन इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हां, तनाव शरीर के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। यह हार्मोन और ऊर्जा स्तर पर भी असर डालता है। लंबे समय तक तनाव रहने से शरीर की प्राकृतिक रिकवरी धीमी हो सकती है। इसलिए तनाव को नियंत्रित करना बेहद जरूरी माना जाता है।

केवल दवाइयों से हमेशा पूर्ण समाधान मिलना जरूरी नहीं होता। शरीर की स्थिति, खानपान और जीवनशैली भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं। जब इन सभी पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है तो परिणाम अधिक प्रभावी हो सकते हैं। संतुलित दृष्टिकोण बेहतर परिणाम देता है।

आहार शरीर के सुधार में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सही भोजन शरीर को ऊर्जा और पोषण देता है। गलत खानपान असंतुलन को बढ़ा सकता है। इसलिए भोजन को संतुलित और सरल रखना लाभकारी माना जाता है।

हां, ऐसी स्थितियों में सुधार धीरे धीरे होता है। शरीर को पुनः संतुलन में आने के लिए समय की आवश्यकता होती है। शुरुआती बदलाव हल्के होते हैं लेकिन आगे चलकर स्पष्ट हो सकते हैं। धैर्य इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

नींद की गुणवत्ता शरीर के सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अच्छी नींद से शरीर को पुनः ऊर्जा प्राप्त होती है। यह मानसिक और शारीरिक संतुलन दोनों को बेहतर बनाती है। खराब नींद सुधार की प्रक्रिया को धीमा कर सकती है।

भावनात्मक सहयोग से व्यक्ति को मानसिक स्थिरता मिलती है। यह तनाव को कम करने में मदद करता है। जब व्यक्ति भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस करता है तो शरीर बेहतर प्रतिक्रिया देता है। यह सुधार प्रक्रिया को अधिक सहज बनाता है।

सकारात्मक सोच शरीर और मन दोनों पर प्रभाव डालती है। यह तनाव को कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती है। सकारात्मक मानसिकता से शरीर की रिकवरी क्षमता बेहतर हो सकती है। यह स्वास्थ्य सुधार में सहायक भूमिका निभाती है।

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