Diseases Search
Close Button
 
 

Sugar-free foods diabetes patients के लिए हमेशा safe होते हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर हम सोचते हैं कि अगर किसी बिस्कुट या मिठाई के डिब्बे पर शुगर फ्री लिखा है, तो हम उसे कितना भी खा सकते हैं। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि ऐसी चीज़ें खाने के बाद भी कई बार आपकी शुगर बढ़ जाती है या पेट भारी लगने लगता है? दरअसल, हमारे शरीर को धोखा देना इतना आसान नहीं है। जब हम चीनी की जगह कोई और मीठी चीज़ खाते हैं, तो दिमाग और शरीर उसे अलग तरीके से पचाते हैं। सिर्फ मीठा न होने से कोई चीज़ शुगर के मरीज़ों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती। यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह कोई जादुई उपाय नहीं है, बल्कि कई बार यह फायदे की जगह हमारे शरीर को अंदर से खोखला कर रहा होता है।

शरीर के अंदर कृत्रिम मिठास के काम करने का असली तरीका

हमारे शरीर में इंसुलिन नाम का एक ज़रूरी हिस्सा होता है जो शुगर को पचाने का काम करता है। जब आप बनावटी मिठास वाली कोई चीज़ खाते हैं, तो आपकी जीभ तुरंत दिमाग को संदेश भेजती है कि कुछ मीठा आ रहा है। दिमाग इंसुलिन को तैयार रहने के लिए कहता है। लेकिन जब वह चीज़ पेट में जाती है, तो उसमें असली ऊर्जा या चीनी नहीं होती। इस तरह बार-बार शरीर को धोखा देने से इंसुलिन का काम करने का तरीका बिगड़ने लगता है और जब आप असल में कुछ खाते हैं, तो शरीर उसे ठीक से पचा नहीं पाता।

मीठा न होने के बावजूद शुगर बढ़ने का मुख्य कारण

कई बार आप बाज़ार से शुगर फ्री रसगुल्ला या कुकीज़ लाते हैं और सोचते हैं कि इससे शुगर बिल्कुल नहीं बढ़ेगी। लेकिन समस्या सिर्फ मिठास में नहीं, बल्कि उसमें इस्तेमाल हुए मैदे, खराब तेल और दूसरे रसायनों में भी होती है। अगर आप खाते समय सिर्फ चीनी पर ध्यान दे रहे हैं और उसमें मौजूद मैदे को भूल गए हैं, तो वह खाना भी शरीर में जाकर अंत में शुगर ही बनाएगा। इसी गलतफहमी में लोग अक्सर ऐसी चीज़ें ज़रूरत से ज़्यादा खा लेते हैं, जिससे वज़न और शुगर दोनों बेकाबू होने लगते हैं।

बनावटी मिठास का हमारे पाचन तंत्र और सेहत पर सीधा असर

जब हम इन बनावटी मीठी चीज़ों को खाते हैं, तो हमारे शरीर के अंदर बहुत सारे बदलाव एक साथ होते हैं:

  • भूख का बेकाबू होना: बनावटी मिठास खाने से हमारी मीठा खाने की तलब शांत नहीं होती, बल्कि दिमाग और मीठा मांगता है, जिससे हम ज़रूरत से ज़्यादा खा लेते हैं।
  • पेट में ऐंठन और गैस: इन उत्पादों में कुछ ऐसे रसायन होते हैं जिन्हें हमारा शरीर आसानी से पचा नहीं पाता, जिससे भयंकर गैस और पेट फूलने की दिक्कत होती है।
  • अच्छे जीवाणुओं का मरना: ज़्यादा बनावटी मिठास हमारे पेट के अच्छे जीवाणुओं को खत्म कर देती है, जिससे खाना पचना और मुश्किल हो जाता है।
  • शरीर का भ्रमित होना: शरीर मीठे स्वाद पर प्रतिक्रिया देता है, लेकिन असली ऊर्जा न मिलने पर कमज़ोरी और बहुत ज़्यादा चिड़चिड़ापन महसूस होता है।

लगातार ऐसी चीज़ें खाने से शरीर में होने वाले नुकसान

अगर आप रोज़ाना शुगर-फ्री गोलियाँ या डाइट ड्रिंक पी रहे हैं, तो इसे नज़रअंदाज़ बिल्कुल न करें। यह शरीर में चल रही किसी बड़ी गड़बड़ी का कारण बन सकता है:

  • वज़न का तेज़ी से बढ़ना: लोग अक्सर यह सोचकर ज़्यादा खा लेते हैं कि इसमें चीनी नहीं है, जो आगे चलकर मोटापे का सबसे बड़ा कारण बनता है।
  • लीवर पर बहुत ज़्यादा दबाव: बनावटी रसायनों को शरीर से बाहर निकालने के लिए हमारे लीवर को अपनी क्षमता से ज़्यादा काम करना पड़ता है।
  • दिल की बीमारियों का खतरा: लंबे समय तक ऐसी बनावटी चीज़ों का इस्तेमाल करने से दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।
  • आँतों की कमज़ोरी: पेट में लगातार रसायन जाने से आँतों में सूजन और लगातार दर्द रहने लगता है।

आयुर्वेद के नज़रिए से कृत्रिम मिठास और वात पित्त का बिगड़ना

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर में वात, पित्त और कफ ये तीन मुख्य दोष होते हैं। जब आप प्रकृति के खिलाफ जाकर कोई रसायनिक या बनावटी चीज़ खाते हैं, तो शरीर का वात और कफ दोष बुरी तरह बिगड़ जाता है। बनावटी मिठास में कोई प्राकृतिक जान नहीं होती, इसलिए यह हमारे शरीर की पाचन अग्नि को एकदम मंद कर देती है। इसी कमज़ोर पाचन की वजह से ज़हरीले तत्व शरीर में रुकने लगते हैं। इसका सीधा मतलब है कि जब तक आप प्राकृतिक खानपान नहीं अपनाएँगे, तब तक शरीर के दोष और शुगर का स्तर शांत नहीं होगा।

मिठास की तलब बुझाने वाले सुरक्षित और प्राकृतिक घरेलू विकल्प

प्रकृति ने हमें ऐसी कई बेहतरीन चीज़ें दी हैं जो खाने में मीठी भी हैं और शरीर को नुकसान भी नहीं पहुँचातीं:

  • स्टीविया के पत्ते: यह मीठी तुलसी के पत्ते होते हैं जो पूरी तरह प्राकृतिक हैं और इनसे शुगर बिल्कुल नहीं बढ़ती।
  • दालचीनी: यह न सिर्फ खाने में एक मीठी महक लाती है, बल्कि खून में शुगर को कम करने में भी बहुत असरदार मानी जाती है।
  • मुलेठी: इसका स्वाद मीठा होता है और यह गले से लेकर पेट तक ठंडक देती है, साथ ही मीठे की तलब को भी तुरंत कम करती है।
  • ताज़े फल: पपीता, सेब या अमरूद जैसे फल एक सीमित मात्रा में खाने से मीठे की चाहत भी पूरी होती है और शरीर को ज़रूरी फाइबर भी मिलता है।

खाने के डिब्बों पर लिखी अधूरी जानकारी से होने वाला धोखा

आप जितना ज़्यादा इन पैकेट बंद चीज़ों पर भरोसा करते हैं, आपका शरीर उतना ही ज़्यादा अंदर से थकता है। कई बार पैकेट पर बिना चीनी लिखा होता है, लेकिन उसमें ऐसे कृत्रिम रसायन भरे होते हैं जो चीनी से भी ज़्यादा तेज़ी से खून में घुलते हैं। जब आपके पेट को फाइबर और असली पोषण ही नहीं मिलता, तो वह खाना सिर्फ शरीर का कचरा बढ़ाता है। इसी कचरे की वजह से शुगर बेकाबू होती है और नसें कमज़ोर होने लगती हैं।

शुगर फ्री खाने के नाम पर रोज़मर्रा में होने वाली बड़ी गलतियां

हम अक्सर जाने-अनजाने में कुछ ऐसा खा या पी लेते हैं जो हमारी परेशानी को दोगुना कर देता है:

  • बिना सोचे-समझे डाइट कोल्ड ड्रिंक पीना: इनमें खतरनाक रसायन होते हैं जो दिमाग और नसों पर बहुत बुरा असर डालते हैं।
  • शुगर फ्री बिस्कुट बहुत ज़्यादा खाना: इनमें फाइबर नहीं होता, बल्कि मैदा और खराब तेल होता है जो कोलेस्ट्रॉल और शुगर दोनों बढ़ाता है।
  • चाय या मिठाइयों में बनावटी गोलियों का इस्तेमाल: गर्म करने या पकाने पर ये गोलियाँ ज़हरीले तत्व छोड़ सकती हैं जो सेहत के लिए खतरनाक हैं।
  • बाज़ार के डिब्बाबंद जूस पीना: इनमें फलों का फाइबर पूरी तरह निकाल लिया जाता है और सिर्फ मीठा पानी बचता है जो शुगर को तेज़ी से बढ़ाता है।
  • खाना छोड़ने की आदत: यह सोचकर कि आज मीठा खा लिया है तो खाना छोड़ दें, इससे शुगर का स्तर अचानक गिर और बढ़ सकता है।

कृत्रिम मिठास के कारण शरीर में पैदा होने वाली दूसरी बीमारियाँ

कई बार आप सब कुछ सही करते हैं, फिर भी कुछ दूसरी बीमारियों की वजह से दिक्कतें बढ़ सकती हैं:

  • थायराइड की समस्या: बहुत ज़्यादा रसायनों वाले खाने से थायराइड ग्रंथि का काम धीमा हो सकता है, जिससे थकावट और घबराहट दोनों होती हैं।
  • खाना पचाने की ताकत का कम होना: कृत्रिम चीज़ें शरीर की ऊर्जा जलाने की ताकत को कम कर देती हैं, जिससे खाना सीधा चर्बी में बदलने लगता है।
  • नींद की भारी कमी: बहुत ज़्यादा डाइट सोडा या चाय-कॉफी पीने से रात की नींद खराब होती है और अगला दिन तनाव में गुज़रता है।
  • दवाइयों का बेअसर होना: जब शरीर में बहुत सारे रसायन होते हैं, तो शुगर की दवाइयाँ भी अपना पूरा असर नहीं दिखा पातीं।

बिना दवा के शुगर कैसे कंट्रोल करें? 

आप कुछ बहुत ही आसान और घरेलू तरीके अपनाकर इस परेशानी से आराम पा सकते हैं:

  • अपने खाने में फाइबर वाली चीज़ें जैसे जई और हरी सब्ज़ियाँ ज़्यादा शामिल करें, जिससे शुगर खून में बहुत धीरे-धीरे घुले।
  • मेथी दाने का पानी सुबह खाली पेट पीने से शरीर की इंसुलिन बनाने की ताकत फिर से जाग जाती है।
  • जब भी आपको मीठा खाने का बहुत मन करे, तो एक छोटा टुकड़ा भुने हुए मखाने या कुछ बादाम चबा लें, इससे भूख शांत हो जाएगी।
  • रात का खाना एकदम हल्का रखें और सोने से कम से कम दो घंटे पहले खा लें ताकि शरीर को खाना पचाने का पूरा समय मिल सके।

स्वस्थ जीवन के लिए रोज़ की आदतों में कुछ बहुत ही आसान बदलाव

अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके आप बहुत बड़ा फायदा देख सकते हैं:

  • खाने का समय तय करें: रोज़ एक ही समय पर खाना खाने की आदत डालें ताकि शरीर सही तरीके से शुगर को पचा सके।
  • सब्ज़ियों का सलाद पहले खाएं: खाना खाने से पहले एक प्लेट सलाद खाने से पेट भर जाता है और आप ज़्यादा खाने से बच जाते हैं।
  • पैदल चलने की आदत डालें: हर बार खाना खाने के बाद कम से कम पंद्रह मिनट ज़रूर टहलें, इससे शुगर तुरंत नियंत्रण में आ जाती है।
  • तनाव को दूर रखें: ज़्यादा टेंशन लेने से शरीर में तनाव वाले हार्मोन बढ़ते हैं जो सीधा ब्लड शुगर को आसमान पर पहुँचा देते हैं।

घरेलू उपाय काम न आने पर डॉक्टर से संपर्क करने का सही समय

घरेलू उपाय अपनाने और मीठा छोड़ने के बाद भी अगर समस्या बनी रहे, तो आपको डॉक्टर के पास ज़रूर जाना चाहिए:

  • जब आपकी शुगर का स्तर दवाइयाँ खाने के बाद भी हमेशा बहुत ज़्यादा रहता हो।
  • जब पैरों में सुन्नपन, झुनझुनी या लगातार दर्द रहने लगे, यह नसों के कमज़ोर होने का सीधा इशारा है।
  • आपका वज़न बिना किसी कारण के अचानक तेज़ी से गिरने लगे और बहुत ज़्यादा कमज़ोरी महसूस हो।
  • आँखों से अचानक धुंधला दिखाई देने लगे या बार-बार शरीर में कहीं भी इन्फेक्शन होने लगे।

प्राकृतिक मीठा बनाम शुगर-फ्री: दोनों में क्या फर्क है? 

पहलू प्राकृतिक मीठा शुगर-फ्री (Artificial Sweeteners)
स्रोत फल, शहद, खजूर या स्टीविया जैसे प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त। लैब में तैयार किए गए कृत्रिम या कम-कैलोरी स्वीटनर्स।
शरीर पर प्रभाव प्राकृतिक शर्करा के साथ कुछ पोषक तत्व भी मिल सकते हैं; ऊर्जा प्रदान करता है। मिठास देता है, लेकिन अधिकांश शुगर-फ्री स्वीटनर्स बहुत कम या शून्य कैलोरी देते हैं।
पाचन पर प्रभाव संतुलित मात्रा में सेवन स्वस्थ आहार का हिस्सा हो सकता है। कुछ लोगों में पाचन संबंधी असुविधा हो सकती है; प्रभाव व्यक्ति और स्वीटनर के प्रकार पर निर्भर करता है।
सुरक्षा सीमित मात्रा में संतुलित आहार के साथ लेना उचित माना जाता है। स्वीकृत दैनिक सीमा (ADI) के भीतर उपयोग करने पर अधिकांश स्वीटनर्स नियामक संस्थाओं द्वारा सुरक्षित माने जाते हैं।
दीर्घकालिक दृष्टिकोण संतुलित मात्रा में सेवन और स्वस्थ जीवनशैली के साथ उपयोग लाभदायक हो सकता है। आवश्यकता और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार सीमित मात्रा में उपयोग करना बेहतर होता है।

निष्कर्ष: 

हमेशा याद रखें कि आपका शरीर कोई मशीन नहीं है जिसमें आप कुछ भी डाल देंगे और वह चल जाएगा। प्रकृति ने हमें जो आहार दिया है, वही हमारे लिए सबसे सुरक्षित है। इसलिए शुगर-फ्री के नाम पर बिकने वाले रसायनों को आँख बंद करके खाने की गलती न करें। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में खुद के लिए थोड़ा सा समय निकालें। अपने खानपान को सुधारें, रोज़ थोड़ा योग करें और पैकेट वाली चीज़ों से दूर रहें। जब आपका भोजन शुद्ध और प्राकृतिक होगा, तो यकीनन आपकी शुगर भी नियंत्रण में रहेगी और आप पूरी तरह से तंदुरुस्त रहेंगे।

References

https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/diabetes

https://www.who.int/health-topics/diabetes

https://www.niddk.nih.gov/health-information/diabetes/overview/managing-diabetes

https://www.nhm.gov.in/images/pdf/guidelines/nrhm-guidelines/stg/diabetes-mellitus.pdf

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

जी नहीं, इन बिस्कुटों में मिठास भले ही न हो, लेकिन इनमें मैदा और खराब तेल होता है जो शुगर और कोलेस्ट्रॉल दोनों को तेज़ी से बढ़ा सकता है। इसलिए इन्हें बहुत कम मात्रा में ही खाना चाहिए।

कभी-कभार इनका इस्तेमाल ठीक है, लेकिन रोज़ाना इन्हें खाने से आपके पाचन तंत्र और लीवर पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है।

गुड़ में चीनी जितने ही कार्बोहाइड्रेट होते हैं और यह खून में शुगर के स्तर को उसी तरह बढ़ाता है। इसलिए शुगर के मरीज़ों को गुड़ खाने से बचना चाहिए।

 बनावटी मिठास में कुछ ऐसे रसायन होते हैं जिन्हें हमारा शरीर आसानी से पचा नहीं पाता, जिसके कारण भयंकर गैस और पेट फूलने की समस्या होती है।

हाँ, स्टीविया एक प्राकृतिक पौधा है और इसका इस्तेमाल कृत्रिम गोलियों के मुकाबले कहीं ज़्यादा सुरक्षित और बहुत बेहतर माना जाता है।

 ये बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं। इनमें मौजूद खतरनाक रसायन दिमाग की नसों को कमज़ोर कर सकते हैं और आगे चलकर शुगर का खतरा और बढ़ा सकते हैं।

अगर आप फल सीमित मात्रा में और सही समय पर खाते हैं, तो उनका फाइबर शुगर को तेज़ी से बढ़ने नहीं देता। लेकिन फलों का जूस पीने से हमेशा बचना चाहिए।

इसका मतलब है कि ऊपर से सफेद चीनी नहीं डाली गई है, लेकिन उस खाने के अंदर मौजूद मैदे या स्टार्च में अपनी शुगर हो सकती है जो पचने के बाद नुकसान ही करेगी।

ज़्यादा च्युइंग गम चबाने से पेट में ज़्यादा हवा जाती है और इसमें मौजूद बनावटी मिठास पेट खराब करने का एक बड़ा कारण बन सकती है।

सही समय पर घर का बना संतुलित भोजन करना, रोज़ कम से कम आधा घंटा टहलना और तनाव से दूर रहना ही शुगर को नियंत्रण में रखने का सबसे पक्का तरीका है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us