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Women में UTI risk क्यों बढ़ सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 04 Jul, 2026
  • category-iconUpdated on 04 Jul, 2026
  • category-iconWomen's Health
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अक्सर महिलाएं घर और ऑफिस की ज़िम्मेदारियों में इतनी व्यस्त हो जाती हैं कि वे अपनी सेहत से जुड़े छोटे-छोटे सिग्नल्स को नज़रअंदाज़ कर देती हैं। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि अचानक यूरिन पास करते समय तेज़ जलन होना, पेट के निचले हिस्से में भयंकर ऐंठन या बार-बार वॉशरूम भागने की ज़रूरत क्यों महसूस होने लगती है? यह कोई सामान्य असहजता नहीं है, बल्कि यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की दस्तक है ,वर्किंग वीमेन, कॉलेज जाने वाली लड़कियों और यहाँ तक कि हाउसवाइव्स में भी यह समस्या आज बेहद आम हो चुकी है सिर्फ ढेर सारा पानी पीकर या पेनकिलर खाकर इस तकलीफ को दबा देने से समस्या खत्म नहीं होती, बल्कि शरीर के अंदर संक्रमण का असली इलाज तब शुरू होता है जब हम महिलाओं में होने वाले UTI रिस्क की जड़ को समझते हैं यह समझना बहुत ज़रूरी है कि यह समस्या कोई शर्म की बात या वहम नहीं है, बल्कि आपके यूरिनरी ट्रैक्ट का एक गंभीर इन्फेक्शन है जो आपसे सही समय पर देखभाल और सही आदतों में बदलाव की पुकार कर रहा है।

महिलाओं का शरीर और यूटीआई का सीधा कनेक्शन

जब हम बात करते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में यूटीआई का खतरा कई गुना ज़्यादा क्यों होता है, तो इसका सबसे बड़ा कारण महिलाओं की शारीरिक बनावट है। महिलाओं का मूत्रमार्ग पुरुषों की तुलना में काफी छोटा होता है, और यह मलाशय के बेहद करीब स्थित होता है। मलाशय के आसपास पाए जाने वाले बैक्टीरिया, विशेषकर,बहुत आसानी से और बेहद कम दूरी तय करके यूरिनरी ब्लैडर तक पहुँच जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान, यदि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो, तो ये बैक्टीरिया ब्लैडर की दीवारों से चिपक जाते हैं और तेज़ी से अपनी संख्या बढ़ाने लगते हैं। यही कारण है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में इस इन्फेक्शन का शिकार बहुत जल्दी और बार-बार होती हैं।

क्या सिर्फ गंदा टॉयलेट इस्तेमाल करने से ही यूटीआई होता है?

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है अक्सर यह मान लिया जाता है कि यूटीआई केवल पब्लिक टॉयलेट्स या गंदे वॉशरूम का इस्तेमाल करने से होता है। बेशक, गंदे टॉयलेट्स एक बड़ा कारण हैं, लेकिन सिर्फ यही एकमात्र विलेन नहीं है। कई बार महिलाएं सोमवार से शुक्रवार तक ऑफिस या कॉलेज में काम के दबाव के कारण घंटों तक यूरिन रोक कर रखती हैं,या फिर दिन भर में पर्याप्त पानी नहीं पीतीं। यूरिन को लंबे समय तक ब्लैडर में रोक कर रखने का मतलब सिर्फ इतना है कि आपने बैक्टीरिया को पनपने और अपनी संख्या दोगुनी करने के लिए एक आदर्श माहौल दे दिया है। अगर आप इस क्रॉनिक आदत के साथ जी रही हैं और सोचती हैं कि शाम को घर जाकर वॉशरूम यूज़ कर लूँगी, तो फायदे की जगह आप अपनी किडनी और ब्लैडर की सेहत को सालों पीछे धकेल रही हैं। समस्या सिर्फ बाहरी गंदगी में नहीं, बल्कि हमारी इस आधी-अधूरी दिनचर्या और स्वच्छता की गलत आदतों में भी है।

इस समस्या से आपकी सेहत पर क्या असर पड़ता है?

जब हम बिना सोचे-समझे इस संक्रमण को नज़रअंदाज़ करते हैं और समय पर सही इलाज नहीं लेते, तो शरीर के अंदर गंभीर और नुकसानदेह बदलाव होने लगते हैं

  • किडनी इन्फेक्शन का खतरा यदि ब्लैडर के इन्फेक्शन का समय पर इलाज न किया जाए, तो बैक्टीरिया ऊपर की ओर बढ़कर किडनी तक पहुँच जाते हैं, जिससे किडनी डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • पेल्विक एरिया में असहनीय दर्द पेट के निचले हिस्से और पीठ में हफ्तों तक लगातार भारीपन, ऐंठन और दर्द रहना एक आम बात हो जाती है।
  • बार-बार संक्रमण का चक्र एक बार इन्फेक्शन पूरी तरह ठीक न होने पर यह बार-बार लौटकर आता है, जिससे महिलाओं का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होता है।
  • क्रॉनिक फटीग और चिड़चिड़ापन शरीर में लगातार इन्फेक्शन रहने से हर समय हल्का बुखार, कमजोरी महसूस होने लगती है, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आता है और रोज़मर्रा के कामों पर फोकस करना नामुमकिन सा हो जाता है।

प्राचीन आयुर्वेद महिलाओं में यूटीआई (UTI) को किस नज़रिए से देखता है?

आयुर्वेद के अनुसार, यूटीआई को मूत्रकृच्छ्र कहा जाता है। जब महिलाएं बहुत ज़्यादा तीखा, मसालेदार, खट्टा या गर्म तासीर का भोजन करती हैं, और धूप या गर्मी में ज़्यादा रहती हैं, तो शरीर में पित्त दोषअत्यधिक बढ़ जाता है। पित्त का गुण है गर्मी और तीक्ष्णता। यह बढ़ा हुआ पित्त हमारे मूत्र मार्ग में जलन और सूजन पैदा कर देता है।

आयुर्वेद मानता है कि यूरिन को वेगपूर्वक रोकने  से शरीर की अपान वायु दूषित हो जाती है। जब अपान वायु का प्राकृतिक प्रवाह बिगड़ता है, तो यूरिनरी ट्रैक्ट की नसें और मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे टॉक्सिन्स (आम) बाहर नहीं निकल पाते और संक्रमण का रूप ले लेते हैं। आयुर्वेद सिर्फ एंटीबायोटिक्स देकर अस्थाई आराम की सलाह नहीं देता, बल्कि पित्त को शांत करने, अपान वायु के प्रवाह को ठीक करने और मूत्राशय को अंदर से ठंडा व साफ़ करने वाली आदतों पर ज़ोर देता है। इसका सीधा मतलब है कि जब तक आप अपने शरीर के बढ़े हुए पित्त को शांत नहीं करेंगी, कोई भी दवा यूटीआई को जड़ से खत्म नहीं कर पाएगी।

यूटीआई (UTI) के रिस्क को तेज़ी से कम करने वाली बेहतरीन आदतें

प्रकृति और सही पर्सनल हाइजीन में कुछ ऐसी बेहतरीन आदतें छिपी हैं, जो यूटीआई के रिस्क को तेज़ी से खत्म कर शरीर को सुरक्षित और स्वस्थ बना देती हैं

  • सही हाइड्रेशन और फ्लशिंग दिन भर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं। पानी शरीर के लिए एक नेचुरल क्लीनर की तरह काम करता है, जो यूरिनरी ट्रैक्ट में मौजूद बैक्टीरिया को बिना रुके शरीर से बाहर कर देता है।
  • सही हाइजीन तकनीक वॉशरूम का उपयोग करने के बाद हमेशा आगे से पीछे की ओर साफ़ करें। यह एक छोटी सी आदत मलाशय के बैक्टीरिया को मूत्रमार्ग तक पहुँचने से रोकने में सबसे कारगर है।
  • नेचुरल कॉटन अंडरगारमेंट्स हमेशा सूती और ढीले अंडरगारमेंट्स पहनें। सिंथेटिक कपड़े नमी को सोख नहीं पाते, जिससे वहां बैक्टीरिया और फंगस के पनपने का खतरा बढ़ जाता है।
  • इंटेसीफाई यूरिनेशन (पोस्ट-इन्टरकोर्स) शारीरिक संबंध बनाने के तुरंत बाद यूरिन पास करना और उस हिस्से को साफ़ करना बेहद ज़रूरी है, ताकि यदि कोई बैक्टीरिया अंदर प्रवेश कर गया हो, तो वह तुरंत बाहर निकल जाए।

महिलाओं में यूटीआई के खतरे को और बढ़ा देती हैं गलतियाँ

हम अक्सर अपनी व्यस्त लाइफस्टाइल में जाने-अनजाने कुछ ऐसी गलतियाँ कर बैठते हैं जो परेशानी को कई गुना बढ़ा देती हैं

  • यूरिन को लंबे समय तक रोकना ऑफिस मीटिंग्स या सफर के दौरान घंटों यूरिन को दबाकर रखना बैक्टीरिया के लिए एक खुला इन्विटेशन है।
  • केमिकल प्रोडक्ट्स और सेंटेड वॉश का इस्तेमाल इंटीमेट एरिया की सफाई के लिए खुशबूदार साबुन, सेंटेड स्प्रे या कठोर केमिकल्स वाले वॉश का इस्तेमाल करना। ये प्रोडक्ट्स वहां के प्राकृतिक पीएच (pH) बैलेंस को बिगाड़ देते हैं, जिससे अच्छे बैक्टीरिया मर जाते हैं और इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है।
  • चाय-कॉफी और शराब का अत्यधिक सेवन बहुत ज़्यादा कैफीन या अल्कोहल का सेवन ब्लैडर को इरिटेट करता है, जिससे यूरिनरी ट्रैक्ट में सूजन और जलन बढ़ जाती है।
  • गीले या पसीने वाले कपड़े पहने रखना वर्कआउट या स्विमिंग के बाद लंबे समय तक गीले या पसीने से तर कपड़ों में रहना बैक्टीरिया को पनपने का पूरा मौका देता है।

दवाओं की जगह इन आसान और प्राकृतिक तरीकों से पाएं यूटीआई से राहत

आप कुछ बहुत ही आसान, ठंडे और प्राकृतिक तरीके अपनाकर अपने यूरिनरी सिस्टम को वापस पुरानी फॉर्म में ला सकती हैं

  • क्रैनबेरी जूस का सेवन बिना चीनी वाला शुद्ध क्रैनबेरी जूस पिएं। इसमें मौजूद तत्व बैक्टीरिया को ब्लैडर की दीवारों पर चिपकने से रोकते हैं, जिससे वे यूरिन के रास्ते आसानी से बाहर निकल जाते हैं।
  • धनिया और सौंफ का पानी रात को एक चम्मच धनिया के बीज और सौंफ को पानी में भिगो दें। सुबह इस पानी को छानकर मिश्री मिलाकर पिएं। यह आयुर्वेद का एक बेहतरीन नुस्खा है जो बढ़े हुए पित्त को शांत कर यूरिन की जलन को तुरंत कम करता है।
  • नारियल पानी और जौ का पानी नारियल पानी और जौ का उबला हुआ पानी शरीर को अंदर से डिटॉक्सिफाई करते हैं और यूरिनरी ट्रैक्ट की सूजन को तेज़ी से कम करते हैं।
  • इलायची और आंवला चूर्ण सुबह खाली पेट हल्के गुनगुने पानी के साथ आंवला चूर्ण और थोड़ी सी इलायची का सेवन करने से मूत्राशय की इम्युनिटी बढ़ती है और बार-बार होने वाला संक्रमण रुकता है।

यूटीआई (UTI) के दौरान डॉक्टर के पास की नौबत कब आ सकती है?

घरेलू उपचार और लाइफस्टाइल में सुधार करने के बाद भी अगर शरीर में ये लक्षण दिखें, तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और यूरिन कल्चर टेस्ट कराना चाहिए

  • जब यूरिन पास करते समय असहनीय दर्द के साथ-साथ कँपकँपी देकर तेज़ बुखार आने लगे।
  • जब यूरिन का रंग बहुत गहरा, धुंधला  दिखाई दे या उसमें से अत्यधिक दुर्गंध आए।
  • जब यूरिन में खून के अंश दिखाई देने लगें।
  • जब दर्द पेट के निचले हिस्से से बढ़कर पीठ के पीछे और पसलियों के नीचे पहुँच जाए, जो किडनी इन्फेक्शन का साफ संकेत है।

निष्कर्ष

हमेशा याद रखें कि आपकी सेहत और स्वच्छता आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, किसी भी काम या संकोच से बढ़कर। प्रकृति ने महिलाओं के शरीर को बेहद संवेदनशील और अनोखा बनाया है, जिसे थोड़ी सी अतिरिक्त देखभाल की ज़रूरत होती है। आप दिन भर में कितना पानी पीती हैं, हाइजीन का कितना ध्यान रखती हैं और अपनी डाइट में क्या शामिल करती हैं, इसका सीधा असर आपके यूरिनरी हेल्थ पर पड़ता है। इसलिए, सिर्फ दर्द की दवा खाकर या जलन को सहन करके यूटीआई को टालने की लापरवाही बिल्कुल न करें।

अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में अपने शरीर की आवाज़ को सुनें। उसे पूरी तरह हाइड्रेटेड रखें, इंटीमेट हाइजीन के सुनहरे नियमों का पालन करें और केमिकल प्रोडक्ट्स से दूरी बनाएं। जब आप अंदर से साफ़, ठंडी और तनाव-मुक्त दिनचर्या अपनाएंगी, तो यकीनन आप न सिर्फ यूटीआई के इस बार-बार होने वाले जोखिम को हराएंगी, बल्कि हर दिन पूरी ऊर्जा, आत्मविश्वास और सेहतमंद मुस्कान के साथ अपनी ज़िंदगी का आनंद ले पाएंगी।

References

Urinary tract infections | Office on Women's Health

Urinary tract infection in women - PMC

Urinary Tract Infection

Urinary Tract Infection Basics | UTI | CDC

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

 UTI (Urinary Tract Infection) मूत्र मार्ग में होने वाला संक्रमण है, जो ब्लैडर, यूरेथ्रा या किडनी को प्रभावित कर सकता है।

महिलाओं का मूत्रमार्ग छोटा होता है, जिससे बैक्टीरिया आसानी से ब्लैडर तक पहुँच सकते हैं।

यूरिन करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना, पेट के निचले हिस्से में दर्द और यूरिन की तेज गंध इसके सामान्य लक्षण हैं।

नहीं, पानी कम पीना, लंबे समय तक यूरिन रोकना और गलत हाइजीन भी इसके प्रमुख कारण हैं।

कुछ महिलाओं में यह बार-बार हो सकता है, लेकिन लगातार संक्रमण होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

हाँ, पर्याप्त पानी बैक्टीरिया को यूरिन के साथ बाहर निकालने में मदद करता है।

बहुत टाइट या सिंथेटिक अंडरगारमेंट्स नमी बढ़ाकर संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं।

कुछ महिलाओं में ऐसा हो सकता है, इसलिए बाद में यूरिन पास करना लाभदायक माना जाता है।

सही हाइजीन, पर्याप्त पानी, समय पर यूरिन करना और कॉटन अंडरगारमेंट्स पहनना मददगार है।

यदि तेज बुखार, पीठ में दर्द, यूरिन में खून या लगातार जलन हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।

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