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Fennel water पीना किन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर जब हम किसी रेस्टोरेंट में खाना खाते हैं या घर पर भारी भोजन कर लेते हैं, तो आखिर में एक चम्मच सौंफ और मिश्री चबाने की आदत हम भारतीयों के खून में है। हम सोचते हैं कि यह सिर्फ मुँह की बदबू दूर करने या एक ‘माउथ फ्रेशनर’ के तौर पर काम करता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे पूर्वजों ने खाने के बाद सौंफ खाने का यह नियम क्यों बनाया था? असल में, जब आप सौंफ को सिर्फ चबाने के बजाय उसे रात भर पानी में भिगोकर या हल्का उबालकर उसका अर्क (Fennel Water) पीते हैं, तो वह एक साधारण मसाले से बदलकर एक शक्तिशाली औषधि बन जाता है।

लगातार बैठे रहने वाली जीवनशैली, तनाव और मिलावटी खानपान ने हमारे शरीर के अंदरूनी सिस्टम को बहुत धीमा कर दिया है। ऐसे में सौंफ का पानी सिर्फ पेट की गैस नहीं निकालता, बल्कि यह शरीर के हर उस अंग तक पहुँचता है जो अंदरूनी सूजन (Inflammation) और गर्मी से जूझ रहा है। आइए गहराई से समझते हैं कि यह चमत्कारी पानी किन लोगों के लिए एक संजीवनी बूटी की तरह काम करता है।

सौंफ का पानी किन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है?

सौंफ का पानी हर किसी के लिए फायदेमंद है, लेकिन कुछ खास शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए यह एक जादुई इलाज साबित हो सकता है

  • लगातार बैठे रहने वाले लोग (Office Workers) दिन भर कुर्सी पर बैठकर काम करने और एसी (AC) की ठंडी हवा में रहने से हमारा मेटाबॉलिज़्म सुस्त पड़ जाता है। खाना ठीक से पचता नहीं है और पेट फूलने (Bloating) लगता है। सौंफ का पानी आंतों को गति देता है और बैठे रहने से होने वाली कब्ज़ को तोड़ता है।
  • हार्मोनल असंतुलन और पीसीओएस (PCOS) वाली महिलाएं सौंफ में प्राकृतिक रूप से 'फाइटोएस्ट्रोजेन' (Phytoestrogens) पाए जाते हैं, जो महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की नकल करते हैं। जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान भयंकर दर्द होता है या जिनके पीरियड्स समय पर नहीं आते, उनके लिए सौंफ का पानी गर्भाशय की मांसपेशियों को आराम पहुँचाकर हार्मोन्स को संतुलित करता है।
  • वजन और लटकती हुई चर्बी से परेशान लोग कई बार हमारा वजन सिर्फ फैट की वजह से नहीं, बल्कि शरीर में रुके हुए गंदे पानी (Water Retention) की वजह से ज़्यादा दिखता है। सौंफ का पानी एक प्राकृतिक 'डाययूरेटिक' (Diuretic) है, जो पेशाब के ज़रिए शरीर के अतिरिक्त पानी और ज़हरीले तत्वों को बाहर निकालकर शरीर को हल्का और सुडौल बनाता है।
  • चेहरे पर मुँहासे और त्वचा की समस्याओं वाले लोग जब पेट में भयंकर गर्मी (पित्त) बढ़ती है, तो उसका सीधा असर चेहरे पर लाल बड़े मुँहासों के रूप में दिखता है। सौंफ का पानी खून को अंदर से साफ करता है और पेट की गर्मी को शांत करके त्वचा पर एक प्राकृतिक चमक (Glow) लाता है।

शरीर के अंदर जाकर सौंफ का पानी असल में करता क्या है?

जब आप सुबह खाली पेट सौंफ का पानी पीते हैं, तो यह सीधे आपकी आंतों (Intestines) की दीवारों पर काम करता है। सौंफ में एनेथोल (Anethole), फेनचोन (Fenchone) और एस्ट्रागोल (Estragole) नाम के खास वाष्पशील तेल (Volatile oils) होते हैं।

जैसे ही यह पानी पेट में पहुँचता है, यह गैस्ट्रिक जूस और एंजाइम्स के उत्पादन को सही मात्रा में ट्रिगर करता है। अगर पेट में बहुत ज़्यादा एसिड बन रहा है (जिससे खट्टी डकारें आती हैं), तो यह उसे शांत करता है। इसके जो ज़रूरी तेल होते हैं, वो आंतों की सिकुड़न और ऐंठन को खोल देते हैं, जिससे फंसी हुई गैस आसानी से बाहर निकल जाती है और पेट का भारीपन तुरंत दूर हो जाता है।

भीषण गर्मी और खराब लाइफस्टाइल का हमारे अंगों पर असर और सौंफ की भूमिका

जैसे हीटवेव शरीर को निचोड़ लेती है, वैसे ही खराब लाइफस्टाइल और भारी खानपान हमारे अंगों को थका देते हैं। सौंफ का पानी इन अंगों की कैसे मदद करता है

  • लिवर (Liver) की सर्विसिंग हम जो भी जंक फूड या दवाइयां खाते हैं, लिवर उन सबका ज़हर सोखता है। सौंफ के एंटीऑक्सीडेंट्स लिवर के एंजाइम्स को बूस्ट करते हैं, जिससे लिवर खुद की सफाई तेज़ी से कर पाता है।
  • आंखों की नसों को ठंडक सौंफ में विटामिन A और कई ऐसे मिनरल्स होते हैं जो ऑप्टिक नर्व (Optic Nerve) को ताकत देते हैं। जो लोग दिन भर स्क्रीन के सामने रहते हैं, उन्हें सौंफ का पानी पीने से आंखों की जलन और धुंधलेपन में काफी आराम मिलता है।
  • दिमाग की शांति सौंफ के पानी में मौजूद पोटैशियम दिमाग की नसों को शांत करता है। यह स्ट्रेस हार्मोन (Cortisol) को कम करके एक अच्छी और गहरी नींद लाने में मदद करता है।

खानपान की वो गलतियाँ जो सौंफ का पानी पीते समय लोग अक्सर करते हैं

कोई भी अच्छी चीज़ अगर गलत तरीके से ली जाए, तो वह फायदा करने के बजाय नुकसान कर सकती है। सौंफ का पानी बनाते और पीते समय हम अक्सर अनजाने में ये गलतियां कर बैठते हैं

  • सौंफ को बहुत ज़्यादा उबालना कई लोग पानी में सौंफ डालकर उसे 15-20 मिनट तक खौलाते रहते हैं। ऐसा करने से सौंफ के सारे ज़रूरी उड़नशील तेल (Volatile Oils) भाप बनकर उड़ जाते हैं और पानी में सिर्फ स्वाद रह जाता है, फायदे नहीं।
  • ठंडा चिल्ड सौंफ का पानी पीना गर्मी में अक्सर लोग सौंफ का पानी बनाकर फ्रिज में रख देते हैं। एकदम ठंडा पानी पीने से पेट की नसें अचानक सिकुड़ जाती हैं और सौंफ का जो काम पाचन तंत्र को खोलना था, वह एकदम उल्टा हो जाता है। हमेशा कमरे के तापमान (Normal) या हल्का गुनगुना पानी ही पिएं।
  • सफेद चीनी मिलाना स्वाद बढ़ाने के लिए सौंफ के पानी में रिफाइंड चीनी मिलाना इसकी सारी खूबियों को मार देता है। चीनी शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ाती है। अगर मीठा करना ही है, तो धागे वाली मिश्री का इस्तेमाल करें।
  • गलत सौंफ का चुनाव बाज़ार में दो तरह की सौंफ आती हैएक मोटी (मसाले वाली) और एक बारीक (लखनवी सौंफ)। पानी बनाने के लिए हमेशा हल्की मोटी और बिना रंगी हुई प्राकृतिक सौंफ का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

किन अन्य बीमारियों के छिपे होने से यह पानी एक सहायक दवा बन सकता है?

आप बचाव के सारे तरीके अपनाते हैं, फिर भी कुछ क्रॉनिक बीमारियों में शरीर का मेटाबॉलिज़्म पूरी तरह ठप हो जाता है। यहाँ सौंफ का पानी एक बेहतरीन सपोर्टिंग रोल निभाता है

  • थायराइड (Thyroid) की समस्या हाइपोथायरायडिज्म में सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि इंसान का मेटाबॉलिज़्म बहुत धीमा हो जाता है, जिससे बेवजह वज़न बढ़ता है और सुस्ती रहती है। सौंफ का पानी थायराइड को सीधा ठीक नहीं करता (यह एक मिथक है कि सिर्फ सौंफ थायराइड खत्म कर देगी), लेकिन यह मेटाबॉलिज़्म को किक-स्टार्ट करता है और थायराइड के कारण होने वाले वॉटर रिटेंशन और कब्ज़ को पूरी तरह खत्म करता है।
  • डायबिटीज (शुगर) टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में अक्सर पाचन की भारी दिक्कतें होती हैं। सौंफ का अर्क इंसुलिन की सेंसिटिविटी को सुधारने में हल्की मदद करता है और ब्लड शुगर के अचानक बढ़ने (Spike) को रोकता है।
  • हाई ब्लड प्रेशर सौंफ में मौजूद पोटैशियम रक्त वाहिकाओं (Blood vessels) को चौड़ा करता है, जिससे नसों पर खून का दबाव कम होता है और बीपी नियंत्रण में रहता है।

बिना किसी दवा के, इन आसान तरीकों से बनाएं अपनी परेशानी का जादुई नुस्खा

आप अपनी ज़रूरत के हिसाब से सौंफ के पानी में कुछ और जादुई चीज़ें मिलाकर इसका असर दस गुना तक बढ़ा सकते हैं

  • हार्मोनल बैलेंस और थायराइड के लिए (CCF Tea) एक चम्मच धनिया के बीज, एक चम्मच जीरा और एक चम्मच सौंफ को रात भर पानी में भिगो दें। सुबह इसे हल्का गुनगुना करके पिएं। यह तीनों का संगम शरीर की हर ग्रंथि (Gland) को रीसेट कर देता है।
  • भयंकर एसिडिटी और पेट की जलन के लिए एक गिलास पानी में एक चम्मच पिसी हुई सौंफ और आधा चम्मच धागे वाली मिश्री का पाउडर मिलाकर कुछ देर छोड़ दें। इसे छानकर दिन में दो बार घूंट-घूंट करके पिएं। यह पेट के लिए एकदम नेचुरल एसी (AC) का काम करेगा।
  • गैस और जोड़ों के दर्द (वात) के लिए सौंफ के साथ चुटकी भर अजवायन डालकर उबाल लें (सिर्फ 2 मिनट)। यह शरीर में रुकी हुई गंदी वायु को तुरंत पास कर देगा और नसों का दर्द खींच लेगा।

सौंफ के पानी को लेकर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है?

आयुर्वेद शरीर को तीन दोषों (वात, पित्त, कफ) के नज़रिए से देखता है। आयुर्वेद के अनुसार, ज़्यादातर जड़ी-बूटियां जो पाचन बढ़ाती हैं (जैसे अदरक या काली मिर्च), उनकी तासीर गर्म होती है और वे पित्त (गर्मी) बढ़ा सकती हैं। लेकिन सौंफ आयुर्वेद में एक अद्भुत अपवाद है।

सौंफ की तासीर ठंडी (शीतवीर्य) होती है। यह 'जठराग्नि' (पाचन की आग) को तो बढ़ाती है, लेकिन पेट में गर्मी पैदा किए बिना। आयुर्वेद में इसे 'त्रिदोषशामक' माना गया है, यानी यह तीनों दोषों को बैलेंस करती है। खासकर यह बढ़े हुए 'पित्त' (Acidity/Heat) और 'अपान वात' (नीचे की ओर जाने वाली वायु, जो कब्ज़ और गैस करती है) को तुरंत शांत करने के लिए एक अचूक अस्त्र है।

सिर्फ घरेलू नुस्खों के भरोसे न रहें, डॉक्टर से कब पूछना ज़रूरी है?

हालाँकि सौंफ का पानी पूरी तरह प्राकृतिक है, लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में इसे पीने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए या डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए

  • गर्भवती महिलाएं (Pregnant Women) गर्भावस्था के दौरान बहुत ज़्यादा मात्रा में सौंफ का पानी पीने से गर्भाशय में संकुचन (Contractions) पैदा हो सकता है, जिससे प्री-मैच्योर डिलीवरी का खतरा रहता है। डॉक्टर की सलाह के बिना इसे नियमित रूप से नहीं लेना चाहिए।
  • खून पतला करने वाली दवाएं लेने वाले लोग जो लोग पहले से ही ब्लड थिनर (Blood thinners) ले रहे हैं, उन्हें सौंफ का बहुत ज़्यादा अर्क नहीं लेना चाहिए क्योंकि यह खून के थक्के जमने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
  • हार्मोन-सेंसिटिव कैंसर वाले मरीज़ चूंकि सौंफ में एस्ट्रोजन की तरह काम करने वाले तत्व होते हैं, इसलिए ब्रेस्ट कैंसर या ओवेरियन कैंसर जैसी बीमारियों में इसे भारी मात्रा में लेने से पहले ऑन्कोलॉजिस्ट से बात करना बेहद ज़रूरी है।

पेट और पाचन के इलाज में एलोपैथी और आयुर्वेद के बीच का मुख्य अंतर

  • एलोपैथी का मुख्य लक्ष्य इसका पूरा ध्यान तुरंत राहत देने पर होता है। जब आपको गैस या एसिडिटी होती है, तो एंटासिड (Antacids) या पीपीआई (PPI) दवाएं पेट के एसिड को तुरंत बनना ब्लॉक कर देती हैं।
  • आयुर्वेद (सौंफ) का मुख्य लक्ष्य इसका ध्यान शरीर की जठराग्नि को सम (Balance) करने पर होता है। यह एसिड को मारता नहीं है, बल्कि पेट की परत को इतना शांत और मज़बूत कर देता है कि एसिड खुद-ब-खुद सही मात्रा में बनने लगे।
  • एलोपैथी का असर इससे चुटकियों में जलन शांत हो जाती है, लेकिन लंबे समय तक ये दवाइयां लेने से शरीर में विटामिन बी12 और कैल्शियम की भारी कमी हो सकती है।
  • आयुर्वेद का असर सौंफ का पानी धीमा काम कर सकता है, लेकिन यह पाचन तंत्र को उसकी जड़ से ठीक करता है ताकि आपको भविष्य में दवाओं पर निर्भर न रहना पड़े।

निष्कर्ष

हमेशा याद रखें कि हमारा शरीर एक बहुत ही संवेदनशील और स्मार्ट सिस्टम है। जब आप अपने पेट में बाज़ार का तला-भुना या बहुत ज़्यादा प्रोसेस्ड खाना डालते हैं, तो शरीर को उसे पचाने में संघर्ष करना पड़ता है। इसी संघर्ष का नतीजा गैस, एसिडिटी, थायराइड का बिगड़ना और सुस्ती के रूप में सामने आता है।

सौंफ का पानी कोई रातों-रात चमत्कार करने वाली जादू की छड़ी नहीं है, लेकिन अगर आप इसे अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बना लें, तो यह आपके शरीर को अंदर से साफ करने, ठंडा रखने और हर अंग को नया जीवन देने का काम करता है। सुबह उठकर खाली पेट चाय या कॉफी पीने की उस पुरानी और नुकसानदायक आदत को छोड़ें। उसकी जगह एक गिलास हल्का गुनगुना सौंफ का पानी पिएं। अपनी डाइट को सही रखें, शरीर को एक्टिव रखें, और फिर देखें कि कैसे आपका थका हुआ शरीर दोबारा पूरी ऊर्जा के साथ रीबूट हो जाता है।

References

 The effect of a fennel seed extract on the STAT signaling and intestinal barrier function - PMC

Fennel - Wikipedia

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

इसे सुबह खाली पेट पीना सबसे अधिक फायदेमंद और असरदार माना जाता है।

हाँ, रोजाना एक गिलास सौंफ का पानी पीना पाचन तंत्र के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।

हाँ, यह मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और शरीर से अतिरिक्त पानी (Water Retention) को हटाता है।

सौंफ की तासीर ठंडी (शीत) होती है, जो पेट की अंदरूनी गर्मी और पित्त को शांत करती है।

हाँ, इसमें मौजूद फाइटोएस्ट्रोजेन गर्भाशय की मांसपेशियों को आराम देकर ऐंठन और दर्द कम करते हैं

 गर्भवती महिलाओं और ब्लड थिनर (खून पतला करने वाली दवा) लेने वालों को डॉक्टर से पूछकर ही इसे लेना चाहिए।

इसे हमेशा गुनगुना या सामान्य (नॉर्मल) तापमान पर ही पिएं। फ्रिज में रखा ठंडा पानी न पिएं।

हाँ, यह खून को साफ करता है जिससे चेहरे के मुँहासे दूर होते हैं और प्राकृतिक चमक आती है।

ज़रूरी नहीं है। सौंफ को रात भर पानी में भिगोकर सुबह छानकर पीना सबसे बेहतरीन तरीका है।

हाँ, आंतों को आराम देता हैं और फंसी हुई गैस को तुरंत बाहर गैस को तुरंत बाहर निकालने में मदद करता हैं।

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