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Thyroid Surgery के बाद आयुर्वेद का क्या रोल? Lifelong दवा से बचाव संभव?

Information By Dr. Keshav Chauhan

थायरॉइड सर्जरी (Thyroid Surgery) के बाद मरीज़ों को अक्सर जीवन भर हार्मोन की गोली खानी पड़ती है। सर्जरी में ग्रंथि (Gland) का हिस्सा या पूरी ग्रंथि निकाल दी जाती है, जिससे शरीर में प्राकृतिक हार्मोन बनना बंद हो जाता है। लोग सोचते हैं कि सर्जरी के बाद उनकी सारी समस्याएँ खत्म हो जाएँगी, लेकिन सुस्ती, वज़न बढ़ना और कमज़ोरी जैसी दिक्कतें बनी रहती हैं। आयुर्वेद के अनुसार, सर्जरी के बाद शरीर का 'वात' भड़क जाता है और 'अग्नि' कमज़ोर हो जाती है। यदि ग्रंथि पूरी तरह निकाल दी गई है, तो दवा ज़रूरी है, लेकिन आयुर्वेद सर्जरी के बाद होने वाली कमज़ोरी को मिटाकर मेटाबॉलिज़्म को सुधारता है।

Thyroid Surgery के बाद हार्मोनल असंतुलन क्या है?

थायरॉइड सर्जरी (Thyroidectomy) एक ऐसी प्रक्रिया है जहाँ गले में मौजूद थायरॉइड ग्रंथि को कैंसर, बड़ी गाँठ (Goiter) या हाइपरथायरायडिज़्म के कारण काटकर निकाल दिया जाता है। एक स्वस्थ इंसान में यह ग्रंथि मेटाबॉलिज़्म और ऊर्जा को कंट्रोल करती है। लेकिन सर्जरी के बाद शरीर इस हार्मोन के लिए पूरी तरह से सिंथेटिक दवाओं (Thyroxine) पर निर्भर हो जाता है। लोग रोज़ाना खाली पेट गोली खाते हैं और ब्लड रिपोर्ट (TSH) नॉर्मल भी आ जाती है, लेकिन शरीर के अंदर बची हुई कोशिकाओं को यह कृत्रिम हार्मोन ठीक से पचता नहीं है। बिना आयुर्वेदिक सपोर्ट के सिर्फ गोली खाने से पाचक अग्नि सुस्त हो जाती है, जिससे इंसान ताउम्र थकान और मोटापे का शिकार रहता है।

Thyroid Surgery से जुड़ी मुख्य स्थितियाँ कौन सी हैं?

सर्जरी के प्रकार और उससे जुड़ी आधुनिक चिकित्सा में मुख्य रूप से ये स्थितियाँ देखी जाती हैं:

  • टोटल थायरॉयडेक्टोमी (Total Thyroidectomy): इसमें पूरी ग्रंथि को निकाल दिया जाता है। इसके बाद जीवनभर थायरॉइड की गोली खाना अनिवार्य होता है।
  • पार्शियल थायरॉयडेक्टोमी (Partial Thyroidectomy): इसमें ग्रंथि का केवल एक हिस्सा निकाला जाता है। बची हुई ग्रंथि कुछ हद तक हार्मोन बनाती है।
  • पैराथायरॉइड डैमेज (Hypocalcemia): सर्जरी के दौरान थायरॉइड के पास मौजूद कैल्शियम बनाने वाली ग्रंथियों को नुकसान पहुँचता है, जिससे शरीर में कैल्शियम अचानक गिर जाता है।
  • आवाज़ में बदलाव: सर्जरी के दौरान वोकल कॉर्ड (Vocal cord) की नसों पर दबाव पड़ने से आवाज़ भारी या कमज़ोर हो जाती है।

सर्जरी के बाद दवा खाने पर भी दिखने वाले लक्षण और संकेत

दवा से ब्लड रिपोर्ट नॉर्मल आने के बाद भी कमज़ोरी का बना रहना कई आंतरिक स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • लगातार भयंकर थकान: 8 घंटे सोने के बाद भी शरीर में ऊर्जा न रहना और सुबह उठने का मन न करना।
  • हाथों-पैरों में झुनझुनी और ऐंठन: कैल्शियम का स्तर गिरने के कारण माँसपेशियों में मरोड़ और सुन्नपन महसूस होना।
  • अचानक वज़न बढ़ना: बहुत कम खाने के बावजूद मेटाबॉलिज़्म धीमा होने के कारण तेज़ी से मोटापा बढ़ना।
  • रूखी त्वचा और बालों का झड़ना: ब्लड सर्कुलेशन धीमा होने से त्वचा का खुरदरा होना और बालों का गुच्छों में गिरना।
  • ब्रेन फॉग और चिड़चिड़ापन: चीज़ें भूल जाना, ध्यान न लगा पाना और अचानक रोने का मन करना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

सर्जरी के बाद बार-बार कमज़ोरी लौटने के कारण (अग्निमांद्य और धातु क्षय)

सर्जरी के बाद थायरॉइड की गोली खाने के बावजूद थकान होने के पीछे सिर्फ बाहरी कारण नहीं, बल्कि गहरे अंदरूनी कारण हो सकते हैं:

  • पाचक अग्नि का बुझना: ग्रंथि के कटने से शरीर का 'अग्नि' केंद्र प्रभावित होता है, जिससे खाना ऊर्जा में बदलने के बजाय फैट (मोटापा) में बदलने लगता है।
  • लिवर की कमज़ोरी (Conversion Issue): आप जो गोली (T4) खाते हैं, उसे एक्टिव हार्मोन (T3) में बदलने का काम लिवर करता है। लिवर कमज़ोर होने से यह कनवर्ज़न रुक जाता है।
  • वात दोष का भड़कना: आयुर्वेद के अनुसार शरीर के किसी भी अंग के कटने या सर्जरी से वात दोष भड़कता है, जो नसों में रूखापन और भयंकर कमज़ोरी लाता है।
  • कैल्शियम का अवशोषण रुकना: पाचक अग्नि कमज़ोर होने से शरीर भोजन से कैल्शियम नहीं सोख पाता, जिससे हड्डियाँ कमज़ोर हो जाती हैं।

Thyroid Surgery के बाद के जोखिम और गंभीर जटिलताएँ

सर्जरी के बाद की इस कमज़ोरी को अगर 'नॉर्मल' मानकर छोड़ दिया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis): कैल्शियम की भारी कमी से हड्डियाँ अंदर से खोखली और भुरभुरी हो जाती हैं।
  • हृदय रोग का खतरा: धीमे मेटाबॉलिज़्म से कोलेस्ट्रॉल तेज़ी से बढ़ता है, जो हार्ट ब्लॉकेज का खतरा पैदा करता है।
  • गंभीर अवसाद (Depression): ऊर्जा की कमी और मोटापे के कारण इंसान गहरे डिप्रेशन और एंग्जायटी का शिकार हो जाता है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस: मेटाबॉलिज़्म बिगड़ने से शुगर का स्तर बिगड़ता है जो टाइप-2 डायबिटीज़ का रूप ले सकता है।

समय पर डॉक्टर से परामर्श लेने से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।

सर्जरी के बाद रिकवरी पर आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद स्पष्ट मानता है कि जो अंग (थायरॉइड ग्रंथि) शरीर से काट कर निकाल दिया गया है, उसे दोबारा नहीं उगाया जा सकता। इसलिए अगर 'टोटल थायरॉइडेक्टोमी' हुई है, तो बाहरी हार्मोन (दवा) लेना एक मजबूरी और ज़रूरत है। लेकिन आयुर्वेद इसे 'अग्निमांद्य' और 'ओजस क्षय' की स्थिति मानता है। डॉक्टर नाड़ी देखकर ढूँढ़ते हैं कि वात दोष कितना बढ़ा हुआ है और लिवर दवा को पचा पा रहा है या नहीं। आयुर्वेद का मकसद आपकी गोली को बंद करना नहीं है (अगर ग्रंथि पूरी निकल चुकी है), बल्कि शरीर की 'पाचक अग्नि' को इतना मज़बूत करना है कि वह उस कृत्रिम हार्मोन को सही से पचाकर ऊर्जा में बदल सके और सर्जरी के बाद आई कमज़ोरी व मोटापे को जड़ से खत्म कर सके।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण क्या है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके शरीर के अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: थकान, झुनझुनी और वज़न बढ़ने की गति की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: सर्जरी की रिपोर्ट (Partial या Total), TSH का स्तर और रोज़ खायी जाने वाली गोली की डोज़ का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • जीवनशैली का विश्लेषण: रोज़ाना के खान-पान, पाचन और नींद को परखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: अग्निमांद्य और वात असंतुलन को पकड़ने के बाद ही शरीर को ताक़त देने का सबसे सटीक इलाज शुरू किया जाता है।

मेटाबॉलिज़्म और रिकवरी वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में मेटाबॉलिज़्म तेज़ करने, वात शांत करने और शरीर की ऊर्जा लौटाने के लिए ये 4 जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह सर्जरी के बाद कमज़ोर हुए नर्वस सिस्टम को नई ताक़त देती है और लिवर को हार्मोन (T4 से T3) बदलने में मदद करती है।
  • शंख भस्म (Shankh Bhasma): यह प्राकृतिक कैल्शियम का बेहतरीन स्रोत है, जो सर्जरी के बाद होने वाली झुनझुनी और हड्डियों के दर्द को तुरंत शांत करता है।
  • शिलाजीत (Shilajit): यह कोशिकाओं में ऊर्जा (ATP) बनाने की प्रक्रिया को तेज़ करता है और पुरानी से पुरानी थकान को जड़ से मिटाता है।
  • गिलोय (Giloy): यह इम्युनिटी को मज़बूत करती है और शरीर से सारे विषैले टॉक्सिन्स (आम) को बाहर निकालकर मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करती है।

शरीर को ताक़त देने के लिए पंचकर्म: वात शमन और अग्नि दीपन

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, सर्जरी के बाद की थकान को मिटाने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • अभ्यंग और उद्वर्तन: जब थकान बहुत ज़्यादा हो और वज़न लगातार बढ़ रहा हो, तो पंचकर्म चिकित्सा की जाती है।
  • इलाज का समय: यह 7 से 21 दिनों तक चलने वाली वात नाड़ियों की गहरी चिकित्सा की प्राकृतिक प्रक्रिया है।
  • मोटापा कम करने के लिए उद्वर्तन: औषधीय चूर्ण से पूरे शरीर की सूखी मालिश की जाती है, जो जमे हुए फैट (कफ) को गहराई से काटती है।
  • नसों को पोषण (अभ्यंग): औषधीय तेलों से शरीर की मालिश की जाती है, जो वात को शांत कर नसों के सुन्नपन और दर्द को खींच लेती है।

Thyroid Surgery के रोगी के लिए सही और शुद्ध आहार

सर्जरी के बाद मेटाबॉलिज़्म सुस्त हो जाता है, इसलिए वात-कफ को शांत करने वाला, सुपाच्य और गर्म आहार चुनना महत्वपूर्ण है:

क्या खाएँ?

  • मखाना और तिल: ये प्राकृतिक कैल्शियम के बेहतरीन स्रोत हैं। सर्जरी के बाद रोज़ाना थोड़े मखाने और सफेद तिल चबाकर खाएँ।
  • गर्म और हल्का भोजन: पुराना चावल, मूंग की दाल और घी का इस्तेमाल बढ़ाएँ, यह पाचक अग्नि को तेज़ करते हैं।
  • गर्म तासीर वाले मसाले: खाने में सोंठ, काली मिर्च, लहसुन और हल्दी का प्रयोग ज़रूर करें, ये भारीपन और सुस्ती काटते हैं।

क्या न खाएँ?

  • ठंडी और बादी चीज़ें: फ्रिज का ठंडा पानी, दही और राजमा कभी न खाएँ, यह शरीर में तुरंत वात और मोटापा पैदा करते हैं।
  • मैदा और चीनी: बिस्किट, ब्रेड और मिठाइयाँ शरीर की पाचक अग्नि को पूरी तरह सुन्न कर देती हैं, इनका सेवन बिल्कुल बंद कर दें।
  • सोया उत्पाद: कच्चा पत्तागोभी और सोयाबीन का सेवन सीमित कर दें, क्योंकि ये दवा के अवशोषण (Absorption) में रुकावट डालते हैं।

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच कैसे होती है

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच पूरी समझ के साथ की जाती है। यहाँ कोशिश होती है कि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जाए।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी और भयंकर थकान के लक्षणों को आराम से सुना जाता है।
  • आपकी सर्जरी की रिपोर्ट और थायरॉइड की गोली की डोज़ के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके खाने-पीने और ठंडी चीज़ें लेने की आदतों को समझा जाता है।
  • आपकी नींद, हाथों-पैरों की झुनझुनी और वज़न बढ़ने की स्थिति पर ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जाना जाता है।

इन सब चीज़ों को समझने के बाद आपके लिए एक ऐसा इलाज प्लान बनाया जाता है, जो पाचक अग्नि को वापस जला सके।

जीवा आयुर्वेद से संपर्क कैसे करें?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे +919266714040 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

रिकवरी और दवा की डोज़ कम होने में कितना समय लगता है?

मेटाबॉलिज़्म और कमज़ोरी का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है, इसलिए ठीक होने का समय इन बातों पर निर्भर करता है:

  • दवा बंद होने की स्थिति: अगर ग्रंथि पूरी तरह निकल चुकी है (Total Thyroidectomy), तो गोली जीवन भर चलेगी। लेकिन अगर ग्रंथि का आधा हिस्सा बचा है (Partial), तो आयुर्वेद से डोज़ काफी हद तक कम या बंद हो सकती है।
  • हल्की समस्या में सुधार: आयुर्वेदिक इलाज शुरू करने के 4 से 6 हफ्तों में ही शरीर की ऊर्जा वापस आने लगती है और झुनझुनी खत्म हो जाती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: मेटाबॉलिज़्म के पूरी तरह तेज़ होने और वज़न कम होने में 6 महीने से 1 साल लग सकता है।
  • स्थायी परिणाम: डाइट का कड़ाई से पालन करने पर शरीर कृत्रिम हार्मोन को सही से पचाने लगता है और थकान हमेशा के लिए दूर हो जाती है।

मरीज़ों का भरोसा – रोग मुक्त जीवन का अनुभव

मैं फरीदाबाद से सुनील सिंह हूँ। कुछ समय पहले मेरा वजन अचानक बढ़ने लगा, जिसके बाद जांच कराने पर पता चला कि मुझे थायरॉइड की समस्या है। मैंने एलोपैथिक दवाइयाँ लीं, लेकिन उनसे मेरे वजन और स्वास्थ्य में कोई खास सुधार नहीं हुआ।इसके बाद मेरी हालत और बिगड़ गई और दोबारा जांच में पता चला कि मुझे फैटी लिवर (ग्रेड 3) और किडनी से जुड़ी कुछ समस्याएँ भी हैं। इस दौरान मैं बहुत तनाव में रहने लगा और मेरी नींद भी प्रभावित हो गई।फिर मैंने जीवा आयुर्वेद से संपर्क किया। यहाँ डॉक्टरों ने मेरी पूरी जांच करके मेरी समस्या के मूल कारण को समझा और उसी के अनुसार इलाज शुरू किया।मुझे आयुर्वेदिक दवाइयों के साथ-साथ मेरे लिए विशेष डाइट प्लान भी दिया गया। धीरे-धीरे मेरी सेहत में सुधार हुआ और मेरा फैटी लिवर ग्रेड 3 से घटकर ग्रेड 1 हो गया।आज मैं पहले से काफी बेहतर महसूस करता हूँ और आयुर्वेदिक जीवनशैली को सभी को अपनाने की सलाह देता हूँ।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य सर्जरी के बाद Thyroxine और कैल्शियम सप्लीमेंट्स देना अग्नि और मेटाबॉलिज़्म सुधारकर शरीर को प्राकृतिक रूप से ऊर्जा बनाना
नज़रिया हार्मोन की कमी को केवल बाहरी सप्लीमेंट से पूरा करना कमजोर पाचन, लिवर कार्य और कमज़ोर मेटाबॉलिज़्म को मूल कारण मानना
उपचार तरीका जीवनभर सिंथेटिक हार्मोन और कैल्शियम गोलियों पर निर्भरता अश्वगंधा, शिलाजीत और जड़ी-बूटियों से लिवर व ऊर्जा प्रणाली को मज़बूत करना
डाइट और लाइफस्टाइल दवाओं के साथ सीमित खान-पान सलाह सुपाच्य आहार, अग्नि-वर्धक दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली पर ज़ोर
लंबा असर थकान, कमजोरी और सप्लीमेंट्स पर निर्भरता बनी रहना शरीर का ऊर्जा निर्माण बेहतर होना और दीर्घकालिक ताक़त मिलना

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • हाथों, पैरों या मुँह के आस-पास भयंकर सुन्नपन और ऐंठन हो (यह कैल्शियम के खतरनाक स्तर तक गिरने का संकेत है)।
  • आवाज़ बहुत ज़्यादा बैठ जाए या खाना निगलने में भारी तकलीफ हो।
  • थायरॉइड की गोली खाने के बाद भी हृदय की धड़कन बहुत तेज़ या बहुत धीमी महसूस हो।
  • शरीर का वज़न तेज़ी से बढ़ने लगे और भारी डिप्रेशन रहने लगे।

समय पर सलाह लेने से शरीर को बड़ी जटिलताओं से बचाया जा सकता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद स्पष्ट करता है कि यदि थायरॉइड ग्रंथि को सर्जरी (Total Thyroidectomy) से पूरी तरह निकाल दिया गया है, तो शरीर को चलाने के लिए ताउम्र हार्मोन की गोली खाना अनिवार्य है। हालाँकि, यदि ग्रंथि का केवल कुछ हिस्सा निकाला गया है (Partial Thyroidectomy), तो आयुर्वेदिक इलाज से बची हुई ग्रंथि को ताक़त देकर दवा की डोज़ को कम किया जा सकता है। सर्जरी के बाद होने वाली भयंकर कमज़ोरी, कैल्शियम की कमी और सुस्त मेटाबॉलिज़्म (अग्निमांद्य) को अश्वगंधा और शंख भस्म जैसी शुद्ध जड़ी-बूटियों से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है, जिससे आप बिना थकावट के एक ऊर्जावान जीवन जी सकें।

FAQs

अगर आपकी पूरी ग्रंथि (Total Thyroidectomy) निकाल दी गई है, तो आपको जीवित रहने के लिए ताउम्र गोली खानी ही पड़ेगी। अगर ग्रंथि आधी बची है, तो आयुर्वेद की मदद से डोज़ बहुत कम या बंद हो सकती है।

नहीं, आयुर्वेद या कोई भी विज्ञान शरीर से काटकर निकाले गए किसी अंग को दोबारा नहीं उगा सकता। आयुर्वेद बचे हुए शरीर के मेटाबॉलिज़्म और बची हुई ग्रंथि की कार्यक्षमता को सुधारता है।

गोली खून में TSH लेवल ठीक करती है, लेकिन सर्जरी के बाद शरीर की 'पाचक अग्नि' सुस्त पड़ जाती है। जब तक अग्नि तेज़ नहीं होगी, खाना पचने के बजाय फैट के रूप में जमा होता रहेगा।

सर्जरी के दौरान थायरॉइड के पीछे मौजूद पैराथायरॉइड ग्रंथियों (जो कैल्शियम कंट्रोल करती हैं) को झटका लगता है, जिससे खून में कैल्शियम अचानक गिर जाता है और भयंकर झुनझुनी होती है।

बिल्कुल, अश्वगंधा एक शक्तिशाली एडाप्टोजेन है। यह सर्जरी के बाद हुए नर्व डैमेज को हील करता है, तनाव घटाता है और लिवर में सिंथेटिक हार्मोन को एक्टिव फॉर्म में बदलने में भारी मदद करता है।

हाँ, आयुर्वेद के अनुसार शरीर में कट लगने या सर्जरी होने से 'वात' तुरंत भड़कता है, जो शरीर की धातुओं को सुखा देता है और भयंकर थकान व माँसपेशियों में दर्द पैदा करता है।

हाँ, शंख भस्म आयुर्वेद का एक प्राकृतिक और बहुत सुपाच्य कैल्शियम है। यह बाज़ार में मिलने वाली कैल्शियम की भारी गोलियों की तरह कब्ज़ नहीं करता और हड्डियों को तुरंत ताकत देता है।

अगर आपकी ग्रंथि का कुछ हिस्सा बचा है, तो धनिये का पानी उसे स्टिमुलेट करता है। लेकिन अगर ग्रंथि पूरी तरह निकल चुकी है, तो यह पाचक अग्नि को ठंडा करके सूजन कम करने में मदद करता है।

हाँ, शरीर में थायरॉइड हार्मोन का सही से न पचना और कैल्शियम का गिरना सीधे नर्वस सिस्टम को धीमा कर देता है, जिससे इंसान को भारी डिप्रेशन और चीज़ें भूलने की बीमारी (Brain Fog) हो सकती है।

हाँ, उद्वर्तन (पाउडर मसाज) से बढ़ा हुआ मोटापा कम होता है और अभ्यंग (तेल की मालिश) से बढ़ा हुआ वात दोष शांत होता है, जिससे शरीर में फँसी हुई ऊर्जा फिर से दौड़ने लगती है।

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