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Endometriosis का दर्द दवा से भी कम नहीं — Surgery एकमात्र विकल्प?

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 09 May, 2026
  • category-iconUpdated on 09 May, 2026
  • category-iconWomen's Health
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आजकल महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) का भयंकर दर्द एक आम समस्या बन गया है। जब पेनकिलर और हार्मोनल पिल्स से दर्द कम नहीं होता, तो डॉक्टर अक्सर सर्जरी का विकल्प देते हैं। ये दवाएँ और सर्जरी कुछ समय के लिए आराम देती हैं, लेकिन बीमारी की जड़ वहीं रहती है। आयुर्वेद के अनुसार, यह मुख्य रूप से 'अपान वात' के बिगड़ने और दूषित रक्त के जमने (रक्त दृष्टि) का परिणाम है। सही आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों, पंचकर्म और जीवनशैली में बदलाव लाकर, बिना सर्जरी के इस दर्दनाक बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

Endometriosis और असहनीय दर्द क्या है?

एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जहाँ गर्भाशय (Uterus) के अंदर पाई जाने वाली लाइनिंग (एंडोमेट्रियम) गर्भाशय के बाहर—जैसे ओवरी, फैलोपियन ट्यूब या आँतों पर—बढ़ने लगती है। एक सामान्य महिला में यह लाइनिंग पीरियड्स के दौरान टूटकर शरीर से बाहर निकल जाती है, लेकिन एंडोमेट्रियोसिस में बाहरी लाइनिंग टूट तो जाती है पर शरीर से बाहर नहीं निकल पाती। इससे अंदर भयंकर सूजन, गाँठें और सिस्ट (Chocolate cyst) बन जाते हैं। लोग इसके लिए दर्द निवारक गोलियाँ या गर्भनिरोधक (Birth control) पिल्स खाते हैं, जो दर्द को दबाती हैं लेकिन अंदर जमा खून को नहीं निकालतीं। बिना डॉक्टर की सलाह के सिर्फ दर्द की गोलियों पर निर्भर रहना प्रजनन अंगों को हमेशा के लिए कमज़ोर कर देता है।

Endometriosis और पेल्विक दर्द से जुड़ी मुख्य बीमारियाँ कौन सी हैं?

प्रजनन तंत्र और पेल्विक हिस्से की तकलीफ से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा में मुख्य रूप से ये बीमारियाँ देखी जाती हैं:

  • चॉकलेट सिस्ट (Endometrioma): ओवरी के अंदर पुराना दूषित खून जमा होकर गाँठ बन जाता है, जो गहरे भूरे रंग का होता है।
  • एडेनोमायोसिस (Adenomyosis): जब गर्भाशय की लाइनिंग गर्भाशय की माँसपेशियों के अंदर गहराई तक बढ़ने लगती है।
  • पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिज़ीज़ (PID): प्रजनन अंगों में भारी इन्फेक्शन और सूजन, जो दर्द को बढ़ाती है।
  • फाइब्रॉइड्स (Fibroids): गर्भाशय के अंदर या बाहर पनपने वाली कठोर गाँठें, जो भारी ब्लीडिंग और दर्द का कारण बनती हैं।

Endometriosis के लक्षण और संकेत (जिन्हें हम नज़रअंदाज़ करते हैं)

पेनकिलर से आराम मिलने के बाद दर्द का बार-बार लौट आना कई आंतरिक स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसके मुख्य लक्षण और संकेत इस प्रकार हैं:

  • भयंकर पेल्विक दर्द: पीरियड्स से कई दिन पहले और बाद तक कमर, जाँघों और पेल्विक हिस्से में असहनीय मरोड़ और दर्द रहना।
  • मासिक धर्म में भारी रक्तस्राव: पीरियड्स के दौरान बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग होना और खून के बड़े थक्के (Clots) आना।
  • शारीरिक संबंध बनाते समय दर्द: पेल्विक हिस्से में सूजन और गाँठों के कारण संबंध बनाते समय भारी दर्द महसूस होना।
  • मल-मूत्र त्यागते समय तकलीफ: अगर लाइनिंग आँतों या ब्लैडर पर बढ़ गई है, तो टॉयलेट जाते समय चुभन और दर्द होना।
  • दवा का असर खत्म होते ही वापसी: पेनकिलर का असर खत्म होते ही कुछ ही घंटों में दर्द का फिर से शुरू हो जाना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

बार-बार Endometriosis का दर्द लौटने के कारण (वात और रक्त दृष्टि)

एंडोमेट्रियोसिस के दर्द के पीछे सिर्फ हार्मोनल असंतुलन नहीं, बल्कि कई गहरे अंदरूनी कारण हो सकते हैं:

  • अपान वात का भड़कना: रूखा खाना और तनाव से 'अपान वात' बिगड़ता है, जो मासिक धर्म के खून को नीचे (बाहर) धकेलने के बजाय ऊपर की ओर (Retrograde menstruation) धकेल देता है।
  • रक्त और कफ की अशुद्धि: कमज़ोर पाचन के कारण बना 'आम' खून में मिलकर उसे दूषित करता है, जो कफ के साथ मिलकर गर्भाशय के बाहर गाँठें बनाता है।
  • तनाव और एंग्जायटी: मानसिक तनाव कॉर्टिसोल को बढ़ाता है, जो एस्ट्रोजन के स्तर को बिगाड़ कर एंडोमेट्रियोसिस को भड़काता है।
  • खराब पाचन और कब्ज़: कब्ज़ के कारण आँतों में गैस (वात) बढ़ती है, जो गर्भाशय पर भारी दबाव डालती है।

Endometriosis के जोखिम और गंभीर जटिलताएँ

इस असहनीय दर्द को अगर अनदेखा किया जाए या सिर्फ पेनकिलर के भरोसे छोड़ दिया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • बांझपन (Infertility): ओवरी और फैलोपियन ट्यूब में सिस्ट और स्कार टिश्यू बनने से गर्भधारण करना मुश्किल या नामुमकिन हो जाता है।
  • अंगों का आपस में चिपकना (Adhesions): भारी सूजन के कारण गर्भाशय, आँतें और ब्लैडर आपस में चिपक जाते हैं, जो खतरनाक होता है।
  • सिस्ट का फटना (Ruptured Cyst): अगर चॉकलेट सिस्ट फट जाए, तो पूरे पेट में ज़हरीला खून फैल जाता है, जो एक मेडिकल एमरजेंसी है।
  • मानसिक अवसाद (Depression): हर महीने भयंकर दर्द सहने के डर से महिला गहरे डिप्रेशन और चिड़चिड़ेपन का शिकार हो जाती है।

समय पर डॉक्टर से परामर्श लेने से इन जोखिमों और सर्जरी को टाला जा सकता है।

Endometriosis (अपान वात और रक्त दृष्टि) पर आयुर्वेदिक दृष्टिकोण क्या है?

आयुर्वेद के हिसाब से एंडोमेट्रियोसिस सिर्फ हार्मोन्स या गाँठ की दिक्कत नहीं है। आयुर्वेद में इसे 'वाताधिक्य योनिव्यापद' और 'गुल्म' (गाँठ) की श्रेणी में रखा जाता है। जब शरीर में अपान वात अपनी दिशा भूल जाता है (प्रतिलोम गति), तो वह मासिक धर्म के रक्त को बाहर निकालने के बजाय शरीर के अंदर ही धकेल देता है। वहाँ यह कफ दोष और 'आम' के साथ मिलकर कठोर गाँठें (Chocolate cyst) बना लेता है। डॉक्टर नाड़ी देखकर ढूँढते हैं कि वात का स्तर कितना बिगड़ चुका है। आयुर्वेद में बस दर्द को सुन्न करना या गर्भाशय को काटकर निकालना (Surgery) मकसद नहीं है, वो चाहते हैं कि अपान वात सही दिशा में बहे, दूषित रक्त साफ हो और गाँठें प्राकृतिक रूप से पिघल जाएँ।

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण क्या है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर महिला का शरीर और स्वास्थ्य अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके शरीर के अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: दर्द उठने के समय, ब्लीडिंग के प्रकार और थक्कों की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: पिछली अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और खायी जा रही हार्मोनल पिल्स का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • जीवनशैली का विश्लेषण: रोज़ाना के खान-पान, तनाव के स्तर और पाचन की स्थिति को परखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: वात असंतुलन और रक्त दृष्टि को पकड़ने के बाद ही सिस्ट को पिघलाने का सबसे सटीक इलाज शुरू किया जाता है।

हार्मोन संतुलित करने और Endometriosis दूर करने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में वात शांत करने, दूषित खून को निकालने और सिस्ट को पिघलाने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • कांचनार (Kanchanar): यह शरीर के किसी भी हिस्से में बनी गाँठ या सिस्ट को पिघलाने (ग्रंथि भेदन) की आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली औषधि है।
  • शतावरी (Shatavari): यह महिला प्रजनन तंत्र को गहरा पोषण देती है, हार्मोन्स को संतुलित करती है और पेल्विक सूजन को शांत करती है।
  • अशोक (Ashoka): यह गर्भाशय की माँसपेशियों को ताकत देता है और भारी ब्लीडिंग व दर्दनाक मरोड़ को तुरंत कम करता है।
  • वरुण (Varun): यह जमे हुए खून और टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर निकालता है और ब्लैडर व ओवरी के आस-पास की सूजन काटता है।

पेल्विक हिस्से को ताकत देने के लिए पंचकर्म: वात शमन और ग्रंथि भेदन

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, जमे हुए दूषित रक्त को बाहर निकालने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • बस्ती और उत्तर बस्ती: जब दर्द सालों पुराना हो और डॉक्टर ने सर्जरी की सलाह दी हो, तो बस्ती पंचकर्म किया जाता है।
  • इलाज का समय: यह 7 से 21 दिनों तक चलने वाली वात नाड़ियों और प्रजनन अंगों की गहरी चिकित्सा की प्राकृतिक प्रक्रिया है।
  • अपान वात को सही करने के लिए बस्ती: गुदा मार्ग से औषधीय काढ़ा या तेल डाला जाता है, जो वात को शांत कर पेल्विक हिस्से का दर्द खींच लेता है।
  • सूजन और सिस्ट के लिए उत्तर बस्ती: गर्भाशय के अंदर औषधीय तेल डालकर अंदरूनी सूजन और गाँठों को पिघलाया जाता है।

Endometriosis के रोगी के लिए सही और शुद्ध आहार

सिस्ट को पिघलाने और दर्द को कम करने के लिए वात-कफ को शांत करने वाला, सुपाच्य और गर्म आहार चुनना महत्वपूर्ण है:

क्या खाएँ?

  • गर्म और हल्का भोजन: पुराना चावल, मूंग की दाल और शुद्ध देसी घी का इस्तेमाल बढ़ाएँ, यह अपान वात को सही दिशा में रखते हैं।
  • अजवाइन और जीरे का पानी: दिन भर हल्का गुनगुना पानी पिएँ। अजवाइन का पानी पेट की गैस और पेल्विक मरोड़ को तुरंत शांत करता है।
  • गर्म तासीर वाले मसाले: खाने में हल्दी, सोंठ और लहसुन का प्रयोग ज़रूर करें, ये जमे हुए खून और सूजन को काटते हैं।

क्या न खाएँ?

  • ठंडी और बादी चीज़ें: फ्रिज का पानी, दही, राजमा और छोले का सेवन बिल्कुल बंद कर दें, यह शरीर में भारी वात और दर्द पैदा करते हैं।
  • मैदा और जंक फूड: पिज़्ज़ा, बिस्किट और पैकेटबंद चीज़ें सूजन बढ़ाती हैं और शरीर में 'आम' पैदा करती हैं।
  • रेड मीट और कैफीन: भारी माँस और बहुत ज़्यादा चाय-कॉफी हार्मोन्स को बिगाड़ कर सिस्ट को तेज़ी से बढ़ाते हैं।

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच कैसे होती है

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच पूरी समझ के साथ की जाती है। यहाँ कोशिश होती है कि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जाए।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी और दर्द के लक्षणों को आराम से सुना जाता है।
  • आपकी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और खायी जा रही पेनकिलर व हार्मोन पिल्स के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके खाने-पीने और ठंडी चीज़ें लेने की आदतों को समझा जाता है।
  • आपकी नींद, मानसिक तनाव और कब्ज़ की स्थिति पर ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जाना जाता है।

इन सब चीज़ों को समझने के बाद आपके लिए एक ऐसा इलाज प्लान बनाया जाता है, जो सर्जरी की नौबत को टाल सके।

जीवा आयुर्वेद से संपर्क कैसे करें?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे +919266714040 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

पूरी तरह ठीक होने में कितना समय लगता है?

बीमारी का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है, इसलिए ठीक होने का समय इन बातों पर निर्भर करता है:

  • बीमारी और शरीर की स्थिति: ठीक होने का वक्त कई बातों से तय होता है जैसे सिस्ट का आकार कितना बड़ा है और पेनकिलर पर निर्भरता कितनी ज़्यादा है।
  • हल्की समस्या में सुधार: अगर दर्द की शुरुआत है, तो आमतौर पर 2 से 3 मासिक धर्म चक्र (Cycles) में ही दर्द और ब्लीडिंग नॉर्मल होने लगती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर चॉकलेट सिस्ट बड़ी है और सालों पुरानी है, तो गाँठों को पिघलने और पूरी तरह स्वस्थ होने में 6 महीने से 1 साल भी लग सकता है।
  • स्थायी परिणाम: डाइट का कड़ाई से पालन करने पर हार्मोन बैलेंस हो जाते हैं और भविष्य में बिना सर्जरी के दर्द लौटकर नहीं आता।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक उपचार और दोष-आधारित आयुर्वेदिक उपचार में अंतर

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य पेनकिलर्स, हार्मोनल पिल्स और सर्जरी से लक्षण दबाना अपान वात संतुलित कर गाँठों को प्राकृतिक रूप से खत्म करना
नज़रिया सिस्ट को केवल हार्मोनल/ओवरी की समस्या मानना वात असंतुलन और जमे हुए दूषित रक्त को मूल कारण मानना
उपचार तरीका Birth control pills, दर्दनाशक और Laparoscopy सर्जरी कांचनार और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से अंदरूनी शुद्धि व हीलिंग
डाइट और लाइफस्टाइल दवाओं और सर्जरी पर मुख्य फोकस वात-शामक आहार, नियमित दिनचर्या और दोष संतुलन पर ज़ोर
लंबा असर सर्जरी के बाद भी सिस्ट दोबारा बनने का खतरा शरीर की प्राकृतिक हीलिंग से दीर्घकालिक और स्थायी आराम मिलना

डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए?

तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • पेल्विक हिस्से का दर्द इतना भयंकर हो जाए कि उठना-बैठना या चलना नामुमकिन लगने लगे।
  • पीरियड्स के दौरान भारी ब्लीडिंग हो और बहुत बड़े-बड़े खून के थक्के (Clots) लगातार आते रहें।
  • पेट में अचानक असहनीय ऐंठन और बुखार हो (यह सिस्ट फटने का संकेत हो सकता है)।
  • पेनकिलर खाने के बाद भी दर्द और मरोड़ में कोई कमी न आ रही हो।

समय पर सलाह लेने से शरीर के अंगों को खराब होने या इनफर्टिलिटी जैसी बड़ी जटिलताओं से बचाया जा सकता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) का दर्द 'अपान वात' के बिगड़ने और दूषित खून के गर्भाशय के बाहर जमा होने का परिणाम है। गलत खान-पान और तनाव के कारण शरीर की प्राकृतिक सफाई प्रणाली रुक जाती है, जिससे भयंकर दर्द देने वाली गाँठें बन जाती हैं। बाहरी पेनकिलर या सर्जरी सिर्फ कुछ समय के लिए राहत देते हैं, लेकिन बीमारी की जड़ को खत्म नहीं करते। कांचनार और शतावरी जैसी आयुर्वेदिक औषधियों व पंचकर्म के माध्यम से वात को शांत कर, इन गाँठों को बिना सर्जरी के पिघलाया जा सकता है और हमेशा के लिए दर्द से आज़ादी पाई जा सकती है।

FAQs

हाँ, अगर सिस्ट बहुत ज़्यादा गंभीर अवस्था में न हो, तो आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और पंचकर्म से गाँठों को प्राकृतिक रूप से पिघलाकर सर्जरी को पूरी तरह टाला जा सकता है।

जब 'अपान वात' की गति उल्टी हो जाती है, तो खून बाहर निकलने के बजाय गर्भाशय के बाहर जमे हुए सिस्ट पर भारी दबाव डालता है, जिससे असहनीय मरोड़ और दर्द होता है।

बिल्कुल नहीं। पेनकिलर सिर्फ दिमाग तक दर्द के सिग्नल को रोकती हैं। वे अंदर बन रही गाँठों या वात दोष को खत्म नहीं करतीं, इसलिए दवा का असर खत्म होते ही दर्द लौट आता है।

हाँ, जब ओवरी या फैलोपियन ट्यूब में सिस्ट और सूजन आ जाती है, तो अंडा (Egg) सही से रिलीज़ नहीं हो पाता और गर्भधारण करने में भारी दिक्कत आती है।

हाँ, आयुर्वेद में कांचनार को 'ग्रंथि हर' (गाँठ तोड़ने वाली) औषधि कहा गया है। यह शरीर की गहराई में जमे पुराने दूषित खून और सिस्ट को धीरे-धीरे पिघलाकर बाहर निकाल देती है।

बिल्कुल, वात दोष रूखा और गति कराने वाला होता है। जब यह पेल्विक हिस्से में भड़कता है, तो नसों और माँसपेशियों में भारी ऐंठन पैदा करता है जिससे चुभने वाला दर्द होता है।

अजवाइन तासीर में गर्म होती है और यह वात को तुरंत शांत करती है। पीरियड्स के दौरान इसे पीने से गर्भाशय की सिकुड़ी हुई नसें रिलैक्स होती हैं और दर्द में आराम मिलता है।

हाँ, फ्रिज का ठंडा पानी, आइसक्रीम और दही खाने से शरीर में भारी वात और कफ बढ़ता है, जो खून को जमा कर सिस्ट का आकार तेज़ी से बढ़ा देता है।

हाँ, उत्तर बस्ती महिलाओं के लिए एक बहुत ही सुरक्षित और जादुई चिकित्सा है। इसमें सीधे गर्भाशय के अंदर औषधीय तेल पहुँचाकर अंदरूनी सूजन और गाँठों को प्राकृतिक रूप से खत्म किया जाता है।

हाँ, भारी तनाव शरीर में वात दोष और कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ाता है, जो एस्ट्रोजन के स्तर को बिगाड़ कर बीमारी को और दर्दनाक बना देता है।

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