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कॉर्पोरेट लाइफस्टाइल ने युवाओं में डायबिटीज को इतना आम क्यों बना दिया है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आज की भागदौड़ भरी कॉर्पोरेट ज़िंदगी में युवाओं के बीच डायबिटीज एक महामारी की तरह फैल रही है घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना, काम का भारी दबाव और बेवक़्त खाने की आदतों ने शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ दिया है लोग अक्सर हल्की थकान या बारबार प्यास लगने जैसे संकेतों को काम का तनाव समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर एक गंभीर बीमारी का रूप ले लेती है। समय पर इसका इलाज और जीवनशैली में बदलाव करना इसलिए बेहद ज़रूरी है क्योंकि अनियंत्रित शुगर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को धीरेधीरे खोखला कर सकती है। आयुर्वेद के अनुसार, डायबिटीज केवल खून में शुगर बढ़ना नहीं, बल्कि पूरे मेटाबॉलिज्म की खराबी है।

डायबिटीज या मधुमेह

इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझें तो, हमारा शरीर जो भी खाना खाता है, वह अंत में ग्लूकोज यानी शुगर में बदल जाता है ताकि शरीर को ऊर्जा मिल सके। इस शुगर को कोशिकाओं तक पहुँचाने का काम इंसुलिन नाम का हार्मोन करता है डायबिटीज वह स्थिति है जहाँ या तो शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या कोशिकाएं उस इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पातीं। नतीजतन, शुगर कोशिकाओं में जाने के बजाय खून में ही जमा होने लगती है, जिससे शरीर को ऊर्जा नहीं मिल पाती और अंगों को नुकसान पहुँचता है।

डायबिटीज के विभिन्न प्रकार और उनकी अवस्थाएं

डायबिटीज को मुख्य रूप से इन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है, जो युवाओं और बुजुर्गों में अलगअलग तरह से प्रभावी होती हैं

टाइप1 डायबिटीज इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। यह अक्सर बचपन या किशोरावस्था में शुरू होती है।

टाइप2 डायबिटीज यह सबसे आम प्रकार है, जो खराब जीवनशैली और मोटापे के कारण होती है। कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले युवा इसी का शिकार ज़्यादा हो रहे हैं।

प्रीडायबिटीज यह वह स्थिति है जहाँ शुगर लेवल सामान्य से ज़्यादा है लेकिन अभी वह डायबिटीज की श्रेणी में नहीं आया है। इसे सही वक़्त पर संभलकर ठीक किया जा सकता है।

गर्भावधि मधुमेह यह केवल गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में होता है, जो बाद में टाइप2 डायबिटीज का ख़तरा बढ़ा सकता है।

सेकेंडरी डायबिटीज किसी विशेष दवा के सेवन या अग्न्याशय पैनक्रियाज की बीमारी के कारण होने वाली शुगर।

शरीर में दिखने वाले मुख्य लक्षण

बारबार पेशाब आना खून में बढ़ी हुई शुगर को बाहर निकालने के लिए किडनी को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

अत्यधिक प्यास और भूख शरीर की कोशिकाएं ऊर्जा के लिए तरसती हैं, जिससे व्यक्ति को हर वक़्त भूख और प्यास महसूस होती है।

अकारण थकान पर्याप्त नींद लेने के बाद भी शरीर में ऊर्जा की कमी और भारीपन महसूस होना।

धुंधला दिखाई देना शुगर का बढ़ा हुआ स्तर आँखों के लेंस की नमी को प्रभावित कर सकता है।

ज़ख्म भरने में वक़्त लगना खून में शुगर होने से शरीर की प्राकृतिक मरम्मत की प्रक्रिया बहुत धीमी पड़ जाती है।

युवाओं में डायबिटीज बढ़ने के मुख्य कारण

शारीरिक सक्रियता की कमी ऑफिस में 8 से 10 घंटे बैठकर काम करने से कैलोरी बर्न नहीं होती और वज़न बढ़ने लगता है।

मानसिक तनाव काम का दबाव शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ाता है, जो सीधे तौर पर शुगर लेवल को बिगाड़ देता है।

जंक फूड और सॉफ्ट ड्रिंक्स बेवक़्त पिज्जा, बर्गर और मीठे पेय पदार्थों का सेवन इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करता है।

नींद की कमी रात भर जागकर काम करना या मोबाइल का इस्तेमाल शरीर की जैविक घड़ी को खराब कर देता है।

धूम्रपान और शराब ये दोनों ही अग्न्याशय की कार्यक्षमता को कम करते हैं और मेटाबॉलिज्म को सुस्त बनाते हैं।

जोखिम बढ़ाने वाले कारण और होने वाली जटिलताएं

 जोखिम बढ़ाने वाले 5 प्रमुख कारण

 पारिवारिक इतिहास यदि मातापिता को डायबिटीज है, तो आनुवंशिक रूप से इसका ख़तरा बढ़ जाता है।

 बढ़ा हुआ वज़न विशेष रूप से पेट के आसपास की चर्बी इंसुलिन के काम में बाधा डालती है।

 उच्च रक्तचाप हाई बीपी और हाई शुगर अक्सर एक साथ शरीर पर हमला करते हैं।

 पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन डायबिटीज के ख़तरे को ज़्यादा बढ़ा देता है।

 बढ़ती उम्र हालाँकि अब यह युवाओं में आम है, लेकिन 35 के बाद मेटाबॉलिज्म और धीमा पड़ जाता है।

होने वाली 5 गंभीर जटिलताएं

किडनी की विफलता लंबे समय तक बढ़ी हुई शुगर किडनी की नसों को स्थायी रूप से खराब कर सकती है।

हृदय रोग डायबिटीज के मरीज़ों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक आने की संभावना सामान्य से बहुत ज़्यादा होती है।

डायबिटिक न्यूरोपैथी पैरों की नसें सुन्न हो जाना या उनमें जलन महसूस होना।

आँखों की समस्या जिसे रेटिनोपैथी कहते हैं, इससे पूरी तरह अंधापन होने का ख़तरा रहता है।

 पैरों में अल्सर छोटी सी चोट भी गंभीर संक्रमण का रूप ले सकती है, जिससे पैर काटने की नौबत आ सकती है।

 डायबिटीज की जाँच कैसे की जाती है?

 फास्टिंग ब्लड शुगर सुबह खाली पेट खून की जाँच करना ताकि बिना भोजन के शुगर का स्तर पता चल सके।

 पीपी ब्लड शुगर खाना खाने के ठीक दो घंटे बाद की जाँच, जिससे शरीर की भोजन पचाने की क्षमता पता चले।

 HbA1c टेस्ट यह सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट है जो पिछले 3 महीनों का औसत शुगर लेवल बताता है।

 ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट मीठा घोल पिलाकर शरीर की इंसुलिन प्रतिक्रिया को मापना।

 पेशाब की जाँच यह देखने के लिए कि क्या शुगर या प्रोटीन पेशाब के ज़रिए बाहर निकल रहा है।

आयुर्वेद में डायबिटीज प्रमेह और मधुमेह

आयुर्वेद में डायबिटीज को प्रमेह कहा जाता है। इसमें 20 प्रकार के प्रमेह बताए गए हैं जिनमें मधुमेह सबसे गंभीर है

दोषों का असंतुलन आयुर्वेद के अनुसार शरीर में कफ दोष बढ़ने से मेद चर्बी बढ़ती है जो मूत्र मार्ग को प्रभावित करती है।

मंदाग्नि का प्रभाव जब पाचन अग्नि कमज़ोर होती है तो शरीर आम टॉक्सिन्स बनाता है जो नसों में रुकावट पैदा करते हैं।

ओजस का क्षय मधुमेह में शरीर का सार तत्व यानी ओजस पेशाब के ज़रिए बाहर निकल जाता है जिससे मरीज़ कमज़ोर हो जाता है।

क्या खाएं और क्या न खाएं?

क्या खाएं

साबुत अनाज जौ रागी और बाजरा जैसे मोटे अनाज जो धीरे-धीरे शुगर रिलीज़ करते हैं।

हरी सब्जियाँ लौकी तोरई करेला और मेथी जैसी सब्जियाँ जो फाइबर से भरपूर हों।

दालें और फल मूंग की दाल और फाइबर युक्त फल जैसे सेब या पपीता सीमित मात्रा में।

क्या न खाएं

सफेद ज़हर चीनी मैदा और सफेद चावल का सेवन बिल्कुल बंद कर देना ज़रूरी है।

मीठे फल आम चीकू अंगूर और केले जैसे फलों से बचें क्योंकि ये शुगर को तेज़ी से बढ़ाते हैं।

तला-भुना भोजन बाहर का जंक फूड और पैकेट बंद जूस शरीर में आम Toxins बढ़ाते हैं।

ठीक होने में कितना समय लग सकता है?

डायबिटीज कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो एक हफ्ते की दवा से ठीक हो जाए इसे पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए धैर्य की ज़रूरत होती है

प्रथम 1 से 2 महीने आयुर्वेदिक दवाओं और सख्त डाइट से शुगर लेवल में स्थिरता आने लगती है और थकान कम होती है।

3 से 6 महीने इंसुलिन की संवेदनशीलता सुधरने लगती है और यदि मरीज़ प्री-डायबिटिक है तो वह पूरी तरह सामान्य हो सकता है।

दीर्घकालिक प्रबंधन टाइप-2 डायबिटीज वाले मरीज़ों को अपनी जीवनशैली में स्थायी बदलाव करने पड़ते हैं ताकि वे बिना किसी जटिलता के एक लंबी ज़िंदगी जी सकें।

 इलाज से क्या फ़ायदा मिल सकता है?

  1. अंगों की सुरक्षा सही इलाज से आप किडनी हार्ट और आँखों को होने वाले स्थायी नुकसान से बच सकते हैं।
  2. ऊर्जा में वृद्धि जब शुगर खून के बजाय कोशिकाओं में जाने लगती है तो आप दिन भर सक्रिय और फ्रेश महसूस करते हैं।
  3. दवाओं पर कम निर्भरता आयुर्वेद की मदद से आप एलोपैथिक दवाओं की भारी डोज़ और उनके साइड इफ़ेक्ट्स को कम कर सकते हैं।
  4. बेहतर मानसिक स्वास्थ्य शुगर लेवल स्थिर रहने से मूड स्विंग्स और मानसिक तनाव में भारी कमी आती है।
  5. घाव भरने की क्षमता शरीर की प्राकृतिक हीलिंग पावर दोबारा मज़बूत हो जाती है।

आयुर्वेद में डायबिटीज प्रमेह और दोषों का प्रभाव

आयुर्वेद में डायबिटीज को प्रमेह कहा जाता है जिसमें 20 प्रकार के पेशाब संबंधी विकारों का वर्णन है। इसे मुख्य रूप से कफ दोष की अधिकता और मंदाग्नि धीमी पाचन शक्ति से जोड़ा जाता है। जब शरीर में कफ बढ़ता है और हम व्यायाम नहीं करते तो वह मेदा चर्बी को दूषित करता है और मूत्र मार्ग से ओजस शरीर की शक्ति को बाहर निकालने लगता है। आयुर्वेद मानता है कि इलाज केवल शुगर कम करना नहीं बल्कि शरीर की अग्नि को दोबारा जलाना है।

क्या खाएं और क्या न खाएं आहार योजना

 क्या खाएं

  •  साबुत अनाज जौ रागी और बाजरा जैसे अनाज जो धीरे-धीरे शुगर छोड़ते हैं।
  •  हरी सब्जियाँ मेथी बथुआ करेला और लौकी का सेवन ज़्यादा करें।
  •  दालें मूंग और अरहर की दालें जो पचाने में हल्की और प्रोटीन से भरपूर हों।

 क्या न खाएं

  •   मैदा और सफेद चीनी ये सीधे तौर पर शुगर को भड़काती हैं।
  •   मीठे फल बहुत ज़्यादा आम चीकू या अंगूर खाने से बचें।
  •   तली-भुनी चीज़ें समोसे कचोरी और बाज़ार का पैकेट बंद खाना पित्त और कफ को बिगाड़ता है।

मरीज़ों का अनुभव

मेरा नाम रेनू लूम्बा है मेरी उम्र 60 साल है और मैं पेशे से टीचर रही हूँ। मुझे पिछले 25 सालों से सेहत से जुड़ी कुछ समस्याएं रहती थीं और मैं बॉर्डरलाइन डायबिटीज पर थी। लेकिन इसी साल जनवरी में जब मैंने टेस्ट करवाया तो मेरी डायबिटीज अचानक बहुत ज़्यादा निकली। हम बहुत घबरा गए थे। एलोपैथिक डॉक्टर ने दवाइयाँ बताईं लेकिन हम एलोपैथी शुरू नहीं करना चाहते थे क्योंकि हमें पता था कि वो दवाइयाँ उम्र भर खानी पड़ेंगी। मेरे हस्बैंड हमेशा टीवी पर डॉक्टर प्रताप चौहान जी को फॉलो करते थे तो उन्होंने सुझाव दिया कि हमें जीवा चलना चाहिए। 

हम जीवा के कालकाजी क्लिनिक गए जहाँ हमें डायबिटीज मैनेजमेंट प्रोग्राम के बारे में पता चला। उस प्रोग्राम के तहत मेरे हाथ पर 15 दिन के लिए एक सेंसर लगाया गया जो यह मॉनिटर करता था कि किस चीज को खाने से मेरा शुगर लेवल अप-डाउन हो रहा है। 

मॉनिटरिंग के बाद मेरी दवाइयाँ शुरू की गईं और उसके बहुत अच्छे परिणाम आए। मेरा HbA1c जो पहले 8.2 था अब घटकर 6.4 आ गया है। मैं जीवा की मेडिसिंस और उनके द्वारा दिए गए डाइट चार्ट से बहुत खुश हूँ। 

4 महीने के पैकेज के बाद मैं खुद को बहुत हेल्दी एक्टिव और एनर्जेटिक महसूस कर रही हूँ। मैं डॉक्टर प्रताप चौहान और जीवा की पूरी टीम की बहुत शुक्रगुजार हूँ क्योंकि यहाँ पर्सनल अटेंशन दी जाती है। मैं आप सबसे भी यही कहूँगी कि अगर आपको डायबिटीज की प्रॉब्लम है तो प्लीज जीवा जॉइन कीजिए।

आधुनिक उपचार और आयुर्वेदिक उपचार में अंतर?

विशेषता आधुनिक इलाज  आयुर्वेदिक इलाज 
लक्ष्य इसका मुख्य ध्यान रक्त में मौजूद शुगर को तुरंत नियंत्रित करने पर होता है। इसका लक्ष्य पाचन अग्नि को बढ़ाकर और पेनक्रियाज को सक्रिय कर शुगर के मूल कारण को ठीक करना है।
तरीका यह इंसुलिन या ओरल दवाओं के माध्यम से शरीर को बाहर से मदद देता है। यह शरीर की अपनी इंसुलिन बनाने और इस्तेमाल करने की क्षमता को सक्रिय करता है।
साइड इफ़ेक्ट लंबे समय तक दवाओं के सेवन से किडनी और पाचन तंत्र पर नुकसान का खतरा रहता है। जड़ी-बूटियों और संतुलित आहार पर आधारित अपेक्षाकृत सुरक्षित और पोषण देने वाला उपचार।
दृष्टिकोण यह बीमारी के लक्षणों का इलाज करता है। यह मरीज़ की प्रकृति और होलिस्टिक हीलिंग Holistic Healing पर ज़ोर देता है।

डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

  •   यदि आपका वज़न अचानक बहुत तेज़ी से गिरने लगे।
  •   यदि आपको हर वक़्त बहुत ज़्यादा प्यास और थकान महसूस हो रही हो।
  •   यदि आपके पेशाब के पास चींटियाँ दिखाई देने लगें अत्यधिक शुगर का संकेत।
  •   यदि हाथ-पैरों में अक्सर सुन्नपन या झनझनाहट रहने लगे।
  •   यदि आँखों के सामने अचानक अंधेरा या धुंधलापन छाने लगे।

 निष्कर्ष

कॉर्पोरेट जीवन की व्यस्तता आपको अपनी सेहत को भूलने का लाइसेंस नहीं देती। डायबिटीज एक चेतावनी है कि आपके शरीर को अब आपकी मदद और देखभाल की सख़्त ज़रूरत है। केवल गोलियों के भरोसे रहने के बजाय आयुर्वेद के होलिस्टिक हीलिंग दृष्टिकोण को अपनाएं। सही भोजन नियमित योग और आयुर्वेदिक उपचार के तालमेल से आप डायबिटीज को मात देकर एक शानदार और ऊर्जावान ज़िंदगी जी सकते हैं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं, आप कम मीठे फल जैसे सेब, अमरूद या पपीता सीमित मात्रा में खा सकते हैं क्योंकि इनमें फ़ाइबर होता है।

जी हाँ, तनाव कम होने से स्ट्रेस हार्मोन गिरते हैं जिससे इंसुलिन बेहतर काम करने लगता है और शुगर घटती है।

रोज़ाना 30-40 मिनट तेज़ पैदल चलना मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है, जो शुगर कंट्रोल करने का सबसे बेहतर तरीका है।

केवल मीठा छोड़ना काफी नहीं है, आपको अपने कार्बोहाइड्रेट और वज़न पर भी ध्यान देना होगा।

हाँ, दालचीनी इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ाती है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।

शुरुआती चरणों में सही डाइट और आयुर्वेदिक उपचार से इसे पूरी तरह रिवर्स करना मुमकिन है।

हाँ, देर रात खाने से पाचन खराब होता है जो सुबह की फास्टिंग शुगर को बढ़ा सकता है।

सीमित मात्रा में शुद्ध गाय का घी खाना शरीर के लिए अच्छा है, लेकिन डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।

कड़वी चीज़ें पाचन में मदद करती हैं, लेकिन संपूर्ण सुधार के लिए पूरी जीवनशैली बदलनी पड़ती है।

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