भारतीय घरों में गर्मियों का मौसम हो या सर्दियों की दोपहर, खाने के साथ दही या छाछ का होना बहुत आम बात है। कई लोगों को लगता है कि दही और छाछ एक ही बात हैं, आखिर दोनों दूध से ही तो बनते हैं। इसलिए वे कभी भी, कुछ भी खा या पी लेते हैं।
लेकिन, क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि कभी दही खाने के बाद पेट एकदम भारी हो जाता है या खट्टी डकारें आने लगती हैं? अगर आपको बार-बार गैस, एसिडिटी (सीने में जलन) या पेट फूलने की शिकायत रहती है, तो आपके लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि दही और छाछ में से आपके पेट को क्या सूट करेगा।
आयुर्वेद कहता है कि जो खाना एक इंसान के लिए अमृत हो सकता है, वही दूसरे इंसान के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। यह सब हमारे पाचन पर निर्भर करता है।
दही और छाछ में आखिर फर्क क्या होता है?
इसे समझने के लिए हमें यह देखना होगा कि दोनों बनते कैसे हैं:
दही कैसे बनती है? दूध में थोड़ा सा खट्टा डालकर उसे जमने के लिए रख दिया जाता है। जब वह जमकर गाढ़ा हो जाता है, तो उसे दही कहते हैं। दही बहुत गाढ़ी होती है। इसमें दूध का सारा फैट (मलाई/चिकनाई), प्रोटीन और कैल्शियम होते हैं। दही भारी होती है, इसलिए इसे पचाने में पेट को थोड़ी मेहनत करनी पड़ती है।
छाछ कैसे तैयार होती है? पुराने जमाने में दही को मथनी से बहुत देर तक मथा जाता था। मथने से सारा मक्खन (फैट) ऊपर आ जाता था। मक्खन निकालने के बाद जो पतला पानी बचता था, उसे असली छाछ कहा जाता था। आजकल लोग सीधे दही में पानी और थोड़े मसाले मिलाकर उसे पतला कर लेते हैं, जिसे हम छाछ कहते हैं। छाछ एकदम पतली और हल्की होती है। इसमें से सारा फैट निकल चुका होता है, इसलिए यह पेट में जाते ही तुरंत पच जाती है और पेट को बहुत ठंडक देती है।

पेट में गैस और एसिडिटी क्यों बनती हैं?
पेट की इन परेशानियों को समझने के दो तरीके हैं:
जब हम बहुत ज़्यादा तीखा, मसालेदार, या बाहर का तला-भुना खाना खाते हैं, तो पेट में उसे पचाने के लिए बहुत ज़्यादा एसिड बनने लगता है। जब यह एसिड पेट से ऊपर गले की तरफ आता है, तो सीने में जलन होती है, जिसे हम एसिडिटी कहते हैं। वहीं, जब हम जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं, खाने को ठीक से चबाते नहीं हैं, या बहुत देर तक भूखे रहते हैं, तो पेट में हवा भर जाती है जिसे हम गैस कहते हैं।
आयुर्वेद बहुत सीधी बात कहता है। हमारे पेट में खाना पचाने के लिए एक 'अग्नि' होती है। जब हम गलत टाइम पर खाते हैं या बहुत भारी खाना खा लेते हैं, तो पेट की यह अग्नि सुस्त पड़ जाती है। ऐसे में खाना पचता नहीं है, बल्कि पेट में सड़ने लगता है। इसी सड़े हुए खाने से गैस, खट्टी डकारें, सीने में जलन और पेट में भारीपन शुरू होता है।
क्या दही खाने से एसिडिटी बढ़ सकती है?
दही अपने आप में बहुत अच्छी और ताकत देने वाली चीज़ है। लेकिन यह हर किसी को हर समय सूट नहीं करती।
दही की तासीर थोड़ी भारी और पचने में समय लेने वाली होती है। अगर आप बाजार की बहुत ज़्यादा खट्टी दही खाते हैं, या रात के समय दही खाते हैं, तो यह आपके पेट में जाकर और ज़्यादा एसिड बना सकती है।
जिन लोगों का पाचन पहले से ही कमज़ोर है, या जिन्हें हमेशा गैस और एसिडिटी रहती है, उन्हें दही खाने के बाद अक्सर पेट फूलने या खट्टी डकार आने की शिकायत होती है। इसका सीधा सा मतलब है कि आपका पेट उस गाढ़ी दही को पचा नहीं पा रहा है।
क्या छाछ पाचन के लिए ज़्यादा अच्छी होती है?
बिल्कुल! आयुर्वेद में छाछ को पेट के लिए 'अमृत' कहा गया है।
छाछ में पानी ज़्यादा होता है और फैट बिल्कुल नहीं होता। जब आप खाना खाने के बाद एक गिलास छाछ पीते हैं, तो वह आपके पेट के अंदर जाकर खाने को जल्दी और आसानी से पचाने में मदद करती है। यह पेट की नसों को ठंडक देती है और गैस को शरीर से बाहर निकालती है।
दही और छाछ की ताकत में क्या फर्क है?
अगर आप ताकत और वज़न बढ़ाना चाहते हैं, तो दही आपके लिए अच्छी है। दही में प्रोटीन और कैल्शियम बहुत ज़्यादा होते हैं, जो हड्डियों को मज़बूत करता है।
लेकिन, अगर आप चाहते हैं कि आपका पेट हल्का रहे, गैस पास हो जाए और शरीर में पानी की कमी न हो, तो छाछ सबसे अच्छी है। छाछ शरीर में पानी बनाए रखती है और पेट को बिना थकाए ज़रूरी ताकत दे देती है।

किन लोगों को दही खानी चाहिए?
अगर आपका पेट लोहे की तरह मज़बूत है, आपको खाना आसानी से पच जाता है, आपको कोई गैस या खट्टी डकार की दिक्कत नहीं है, तो आप आराम से दही खा सकते हैं। जो लोग कसरत करते हैं या जिन्हें शरीर में ज़्यादा प्रोटीन चाहिए, उनके लिए दोपहर के समय ताजा और मीठा दही खाना बहुत फायदेमंद होता है। बस ध्यान रखें कि दही बहुत खट्टी या कई दिन पुरानी न हो।
किन लोगों को छाछ पीनी चाहिए?
अगर आप वो इंसान हैं जिसका पेट थोड़ा सा भी भारी खाना खाते ही गुब्बारे की तरह फूल जाता है, या जिसे अक्सर सीने में जलन (एसिडिटी) रहती है, तो आपको दही की जगह हमेशा छाछ को चुनना चाहिए।
छाछ पीने से पेट एकदम हल्का महसूस होता है और खाना भी जल्दी पच जाता है। खासकर गर्मियों में यह शरीर को लू और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से भी बचाता है।
एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह
गैस, एसिडिटी और कमज़ोर पाचन वाले लोगों को दही के बजाय हमेशा छाछ का सेवन करना चाहिए। दही पचने में भारी होती है, और रात के समय या बहुत खट्टी दही खाने से एसिडिटी और गैस की समस्या बढ़ सकती है। इसके विपरीत, छाछ हल्की और फैट-फ्री होती है, जो पेट को तुरंत ठंडक देती है। बेहतर पाचन के लिए दोपहर के खाने के बाद ताजी छाछ में भुना जीरा, काला नमक और हींग मिलाकर पिएं।
दही और छाछ लेने का सही समय क्या है?
समय का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है। आयुर्वेद साफ कहता है कि सूरज ढलने के बाद (रात के समय) दही कभी नहीं खानी चाहिए। रात को हमारा पाचन सबसे कमज़ोर होता है। रात में दही खाने से गला खराब हो सकता है, कफ बन सकता है और गैस की दिक्कत बढ़ सकती है। दही खाने का सबसे अच्छा समय सुबह या दोपहर है।
छाछ पीने का सबसे अच्छा समय दोपहर का खाना खाने के तुरंत बाद होता है। यह दोपहर के भारी खाने को आसानी से पचा देती है।

हम कौन सी गलतियाँ करते हैं जिससे गैस और एसिडिटी बढ़ती हैं?
हम अक्सर अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो हमारे पेट का पूरा सिस्टम बिगाड़ देती हैं:
- फ्रिज में रखी कई दिन पुरानी और खट्टी दही खाना।
- रात को डिनर में दही खाना।
- पैकेट वाली ऐसी छाछ पीना जिसमें बहुत ज़्यादा नमक या प्रिजर्वेटिव्स (केमिकल) मिले हों।
- एकदम चिल्ड (बर्फ वाली) छाछ पीना।
हमें सिर्फ यह नहीं देखना है कि हम क्या खा रहे हैं, बल्कि यह भी देखना है कि हम उसे कैसे खा रहे हैं।
आयुर्वेद के अनुसार छाछ को और फायदेमंद कैसे बनाएं?
आयुर्वेद कहता है कि सादी छाछ पीने से अच्छा है कि उसमें कुछ पेट को फायदा पहुंचाने वाले मसाले मिला लिए जाएं। ताजी छाछ में थोड़ा सा भुना हुआ जीरा, एक चुटकी काला या सेंधा नमक, और थोड़ी सी बारीक कटी हुई पुदीना या धनिया पत्ती मिला लें। अगर आपको गैस ज़्यादा बनती है, तो एक चुटकी हींग भी मिला सकते हैं। यह छाछ आपके पेट के लिए किसी महंगी दवा से ज़्यादा अच्छा काम करेगी।
डॉक्टर के पास जाना कब ज़रूरी हो जाता है?
कभी-कभार गैस या एसिडिटी होना नॉर्मल है। लेकिन अगर आपको यह दिक्कत हफ्ते में 4-5 दिन हो रही है। सीने में जलन रहती है, खाना गले में अटकता हुआ महसूस होता है, बिना डाइटिंग किए वज़न कम हो रहा है, या उल्टी करने का मन करता है, तो आपको तुरंत एक अच्छे पेट के डॉक्टर को दिखाना चाहिए। ऐसी हालत में सिर्फ दही या छाछ बदलने से काम नहीं चलेगा। यह किसी बड़े अल्सर या इन्फेक्शन का इशारा हो सकता है, जिसका सही इलाज ज़रूरी है।
निष्कर्ष
दही और छाछ दोनों ही दूध से बने हैं, दोनों ही शरीर के लिए अच्छे हैं, लेकिन दोनों का काम करने का तरीका अलग है। अगर आपका पेट एकदम फिट है और पाचन मज़बूत है, तो आप ताज़ी दही का मज़ा ले सकते हैं। लेकिन अगर गैस, एसिडिटी, और पेट का भारीपन आपको परेशान करता हैं, तो दही से दूर रहें। आपके लिए छाछ एक सच्चा दोस्त साबित होगी। और सबसे ज़रूरी बात, पेट को हमेशा खुश रखने के लिए सिर्फ छाछ पीना काफी नहीं है। समय पर खाना खाएं, बाहर का जंक फूड कम करें, खाने को चबा-चबाकर खाएं और अच्छी नींद लें।
References
Acid Reflux (GER & GERD) in Adults - NIDDK
What is nonacid reflux disease? - PMC




























































































































