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Daytime sleepiness किन health issues से जुड़ सकती है ?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

अक्सर हम सोचते हैं कि दिन में आँखें भारी होना या बार-बार उबासी आना सिर्फ रात में कम सोने का नतीजा है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि आप रात भर अच्छी नींद लेते हैं, फिर भी दोपहर होते-होते शरीर टूटने लगता है और काम में बिल्कुल मन नहीं लगता? दरअसल, यह सिर्फ कोई आम थकावट नहीं है, बल्कि आपके शरीर का आपको यह बताने का तरीका है कि अंदर कुछ गड़बड़ चल रही है। जब हमारा शरीर किसी अंदरूनी बीमारी या कमी से जूझ रहा होता है, तो उसकी सारी ऊर्जा उससे लड़ने में खर्च हो जाती है। सिर्फ चाय या कॉफी पी लेने से यह समस्या जड़ से खत्म नहीं होती। जब तक आप अपने शरीर की इस छिपी हुई पुकार को नहीं सुनेंगे, यह सुस्ती आपका पीछा नहीं छोड़ेगी।

हर वक़्त थकान क्यों महसूस होती है? 

हमारे शरीर को एक मशीन की तरह समझें जिसे चलने के लिए लगातार सही ईंधन (एनर्जी) की ज़रूरत होती है। जब हम खाना खाते हैं, तो वह पचकर ग्लूकोज़ में बदलता है, जिससे हमें ताकत मिलती है। लेकिन जब शरीर में कोई हार्मोनल दिक्कत होती है या खून की कमी होती है, तो यह सिस्टम धीमा पड़ जाता है। शरीर का सारा फोकस आपके अहम अंगों (जैसे दिल और दिमाग) को चलाने में लग जाता है और बाकी कामों के लिए एनर्जी नहीं बचती। इसी वजह से बैठे-बैठे आपकी आँखें झपकने लगती हैं, हाथ-पैरों में जान नहीं महसूस होती और हर समय बिस्तर पर लेटने का मन करता है।

क्या सिर्फ रात की अधूरी नींद ही इस भारीपन का इकलौता कारण है? 

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। कई बार आप पूरे आठ घंटे की गहरी नींद लेकर उठते हैं, फिर भी दिन भर ऐसा लगता है जैसे कोई नशा छाया हुआ हो। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि समस्या आपकी नींद की अवधि में नहीं, बल्कि नींद की क्वालिटी और शरीर के अंदर चल रहे तनाव में है। अगर आप सोते समय भी दिमाग में ऑफिस या घर की उलझनें लेकर चल रहे हैं, तो आपका दिमाग रात में भी पूरी तरह आराम की स्थिति में नहीं जा पाता। इसके अलावा शरीर में पोषण की कमी होने पर भी, चाहे आप कितनी भी देर सो लें, सुबह उठने पर वह ताज़गी महसूस ही नहीं होगी।

लगातार बनी रहने वाली इस कमज़ोरी का आपके शरीर पर क्या असर होता है? 

जब शरीर में हर वक़्त सुस्ती छाई रहती है, तो सिर्फ काम ही नहीं रुकता, बल्कि अंदर ही अंदर कई बदलाव एक साथ होने लगते हैं:

  • फोकस खतम होना: दिमाग चीज़ों को जल्दी प्रोसेस नहीं कर पाता और काम में बहुत गलतियाँ होने लगती हैं।
  • भयंकर चिड़चिड़ापन: जब शरीर थका होता है, तो छोटी-छोटी बातों पर भी बहुत तेज़ गुस्सा आने लगता है।
  • मेटाबॉलिज़्म का गिरना: बैठे रहने और सुस्त रहने से शरीर खाना पचाने की स्पीड धीमी कर देता है, जिससे वज़न तेज़ी से बढ़ने लगता है।
  • इम्यूनिटी कमज़ोर होना: लगातार थका हुआ शरीर बीमारियों से लड़ने की ताकत खोने लगता है और आप जल्दी-जल्दी बीमार पड़ने लगते हैं।

क्या अंदरूनी उदासी या बोरियत भी आपको बिस्तर से उठने नहीं देती? 

बिलकुल! हमारा दिमाग बहुत ही चालाक होता है। जब आप अपनी ज़िंदगी के किसी हिस्से से खुश नहीं होते, चाहे वह आपकी नौकरी हो या रिश्ते, तो दिमाग उस सच्चाई से बचने के लिए 'नींद' को एक ढाल की तरह इस्तेमाल करता है। जब आप बोर होते हैं या अंदर से निराश होते हैं, तो शरीर में डोपामाइन (खुशी वाला हार्मोन) का स्तर गिर जाता है। इससे शरीर को कोई नया काम करने की प्रेरणा ही नहीं मिलती और आपको ऐसा महसूस होता है कि आपके अंदर बिल्कुल जान नहीं है। इसलिए कहा जाता है कि कई बार इंसान शरीर से नहीं, बल्कि मन से थका हुआ होता है।

आपके रोज़ के खानपान की वो गलतियाँ जो शरीर को बैटरी डाउन कर देती हैं 

हम अक्सर स्वाद के चक्कर में कुछ ऐसा खा लेते हैं जो हमारी सुस्ती को दोगुना कर देता है:

  • भारी और तला-भुना खाना खाने से शरीर की बहुत ज़्यादा एनर्जी उसे पचाने में खर्च होती है, जिससे तुरंत भयंकर नींद आती है।
  • मैदे वाली चीज़ें शरीर में जाते ही ब्लड शुगर को तेज़ी से बढ़ाती हैं और फिर एकदम से गिरा देती हैं, जिससे शरीर टूट सा जाता है।
  • दिन में बहुत ज़्यादा मीठा खाने से एनर्जी में अचानक उछाल आता है, और कुछ ही देर बाद शरीर पूरी तरह थक कर सुस्त पड़ जाता है।
  • पानी कम पीने से डिहाइड्रेशन होता है, जो थकान और शरीर दर्द का सबसे बड़ा और आम कारण है।
  • सुबह का नाश्ता छोड़ने पर शरीर दिन भर एनर्जी बचाने के मोड में रहता है, जिससे हर वक़्त आलस महसूस होता है।

नींद भगाने के लिए बार-बार चाय-कॉफी पीना कब शरीर के लिए दुश्मन बन जाता है? 

जब भी ऑफिस में नींद आती है, हम तुरंत एक कड़क चाय या कॉफी की डिमांड करते हैं। ये चीज़ें तुरंत राहत तो दे देती हैं और दिमाग को जगा देती हैं, लेकिन रोज़ाना इनके सहारे काम चलाना बहुत खतरनाक है। कैफीन आपके दिमाग को सिर्फ धोखा देता है कि आप थके नहीं हैं, लेकिन अंदर ही अंदर आपका शरीर निचुड़ रहा होता है। अगर आप रोज़ 4-5 कप कॉफी पीकर खुद को जगाए रखेंगे, तो कुछ समय बाद शरीर का अपना नेचुरल एनर्जी सिस्टम काम करना बंद कर देगा और अगले दिन की सुस्ती और भी भयंकर हो जाएगी।

बिना किसी दवा के अपनी खोई हुई चुस्ती वापस पाने के बेहद आसान तरीके 

आप कुछ बहुत ही आसान और घरेलू तरीके अपनाकर दिन की इस उबासी से आराम पा सकते हैं:

  • जब भी दिन में बहुत तेज़ नींद आए, तो अपनी जगह से उठकर थोड़ा स्ट्रेच करें या ठंडे पानी से मुँह धो लें। इससे नर्वस सिस्टम तुरंत जाग जाता है।
  • दोपहर के खाने के बाद छाछ में थोड़ा भुना जीरा डालकर पिएँ। यह खाने को पचाने में मदद करता है और पेट में भारीपन नहीं होने देता।
  • अगर मुमकिन हो, तो दिन में 15 से 20 मिनट की एक छोटी सी झपकी ले लें। इससे दिमाग रीबूट हो जाता है, बस ध्यान रहे कि यह झपकी लंबी न हो।
  • काम के बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। शरीर हाइड्रेटेड रहेगा तो सुस्ती आपके पास भी नहीं फटकेगी।

आयुर्वेद आपकी इस पुरानी थकान को जड़ से कैसे मिटाता है? 

आयुर्वेद सिर्फ थकान मिटाने की कोई ऊपरी दवा नहीं देता, बल्कि वह शरीर के अंदरूनी सिस्टम को रिपेयर करता है। आयुर्वेद यह मानता है कि आपकी दिन की नींद आपके खराब लाइफस्टाइल और बिगड़े हुए कफ दोष का ही नतीजा है। इसमें डॉक्टर पहले आपकी नाड़ी देखकर शरीर के दोष को समझते हैं। शरीर की अंदरूनी सफाई और बढ़े हुए कफ को बाहर निकालने के लिए खास तरह की मालिश या थेरेपी दी जाती है। इसके साथ ही, आपका डाइट प्लान ऐसे सेट किया जाता है जो आपके मेटाबॉलिज़्म की अग्नि को तेज़ करे, जिससे शरीर खुद अपनी एनर्जी बनाना सीख जाता है।

दिन की नींद को हल्के में लेना कब छोड़ दें और तुरंत डॉक्टर से मिलें? 

घरेलू उपाय और लाइफस्टाइल सुधारने के बाद भी अगर शरीर में जान नहीं आ रही है, तो आपको बिना देरी किए डॉक्टर के पास ज़रूर जाना चाहिए:

  • जब आपको गाड़ी चलाते हुए या कोई काम करते हुए अचानक नींद के झटके आने लगें, जो जानलेवा हो सकता है।
  • जब नींद के साथ-साथ आपका वज़न बिना किसी कारण के तेज़ी से बढ़ने या घटने लगे।
  • अगर आप रात में ज़ोर-ज़ोर से खर्राटे लेते हैं और साँस रुकने की वजह से हाँफते हुए आपकी नींद खुल जाती है।
  • जब हर वक़्त निराशा लगे, कुछ भी करने का मन न करे और दिमाग में बहुत ज़्यादा नकारात्मक ख्याल आने लगें।

हमेशा याद रखें कि आपका शरीर कोई निर्जीव मशीन नहीं है, जिससे आप ज़बरदस्ती काम लेते रहें। दिन में बार-बार आने वाली नींद कोई बुरी आदत नहीं है, बल्कि यह आपके शरीर का एक अलार्म है जो कह रहा है, "प्लीज़, अब मेरी तरफ भी ध्यान दो।" इसलिए इसे सिर्फ कॉफी के घूँट से दबाने की गलती न करें। अपनी इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में अपने शरीर की ज़रूरतों को समझें। अपने खाने में सुधार करें, खुद को हाइड्रेटेड रखें और रात की नींद से कोई समझौता न करें। जब आपका शरीर अंदर से ताकतवर होगा, तो दिन भर आप में एक गज़ब की फुर्ती और खुशी बनी रहेगी।

References:

Excessive daytime sleepiness in sleep disorders - PMC

Excessive daytime sleepiness (hypersomnia) - NHS

Why Do I Feel Excessively Sleepy?

Module 2. Be Aware of the Dangers of Sleepiness and Fatigue | NIOSH | CDC

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, पीरियड्स के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं और आयरन की कमी भी हो सकती है, जिससे शरीर में भयंकर सुस्ती और दिन में नींद आने की समस्या होना बहुत आम बात है।

बिलकुल! स्क्रीन की नीली रोशनी दिमाग के मेलाटोनिन (नींद के हार्मोन) को रोक देती है। इससे आपकी नींद गहरी नहीं हो पाती और अगले दिन शरीर पूरी तरह थका हुआ महसूस करता है।

उम्र बढ़ने के साथ नींद का पैटर्न बदलता है, लेकिन दिन में हमेशा नींद आना प्राकृतिक नहीं है। यह अक्सर किसी दवा के साइड इफेक्ट या किसी छिपी हुई बीमारी का संकेत होता है।

स्लीप डेट का मतलब है आपके शरीर की नींद का उधार। अगर आप रोज़ 2 घंटे कम सोते हैं, तो हफ्ते भर में 14 घंटे का स्लीप डेट हो जाता है, जिसे चुकाने के लिए शरीर दिन में ज़बरदस्ती नींद मांगता है।

हाँ, अगर आप अपनी क्षमता से ज़्यादा वर्कआउट करते हैं और उसके हिसाब से सही डाइट या आराम नहीं लेते हैं, तो मांसपेशियाँ रिकवर नहीं हो पातीं और दिन भर भयंकर थकान छाई रहती है।

दोपहर के 2 से 4 बजे के बीच हमारे शरीर का तापमान हल्का सा गिरता है और मेलाटोनिन हार्मोन थोड़ा बढ़ता है। अगर आपका रूटीन बिगड़ा हुआ है, तो इस वक़्त सबसे तेज़ नींद के झटके आते हैं।

हाँ, सूरज की रोशनी सीधे हमारे दिमाग को जगाने का काम करती है। सर्दियों में धूप कम मिलने से शरीर ज़्यादा मेलाटोनिन बनाता है, जिससे दिन में भी रज़ाई में घुसे रहने का मन करता है।

यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें सोते वक़्त पैरों में अजीब सी झुनझुनी या ऐंठन होती है। इससे इंसान रात भर पैर हिलाता रहता है, नींद पूरी नहीं होती और दिन में सुस्ती बनी रहती है।

बिल्कुल, ऊँचाई वाली जगहों पर हवा में ऑक्सीजन का लेवल कम होता है। ऐसे में शरीर को काम करने के लिए ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे शुरुआत में दिन भर नींद आती है।

यह पूरी तरह मिथक नहीं है। चावल में ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज़्यादा होता है, जो शरीर में ब्लड शुगर तेज़ी से बढ़ाकर फिर एकदम गिरा देता है। इसी अचानक होने वाले बदलाव से खाने के बाद तेज़ नींद आती है।

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