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Breakfast skip करना weight loss में help करता है या metabolism बिगाड़ता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

बचपन से हम सब सुनते आ रहे हैं कि "सुबह का नाश्ता दिन का सबसे ज़रूरी खाना है।" लेकिन आजकल फिटनेस की दुनिया में एक अलग ही बहस छिड़ी है। कुछ लोगों का कहना है कि नाश्ता छोड़ने से तेज़ी से वज़न घटता है, तो कुछ डराते हैं कि इससे मेटाबॉलिज़्म बिल्कुल ठप हो जाएगा।

लोग कन्फ्यूज़ हैं कि आखिर सच क्या है? सच ये है कि हर इंसान का शरीर अलग होता है। सुनी-सुनाई बातों पर जाने के बजाय, आइए समझते हैं कि आपके शरीर के लिए क्या सही है।

नाश्ता इतना जरूरी क्यों माना जाता है? 

रात को सोते समय हमारा शरीर 8 से 12 घंटे तक भूखा रहता है। दिल, दिमाग और फेफड़ों को चलाने के लिए शरीर अपनी पुरानी जमा ऊर्जा (एनर्जी) खर्च करता है। सुबह उठने तक शरीर का 'पेट्रोल' लगभग खत्म हो जाता है। ऐसे में एक हेल्दी नाश्ता शरीर के लिए ईंधन का काम करता है। इसे खाने से दिमाग तेज़ चलता है, काम में फोकस बढ़ता है और दिनभर की सुस्ती गायब हो जाती है।

क्या नाश्ता छोड़ने से सच में वज़न कम होता है? 

वज़न घटाने वालों को अक्सर लगता है कि सुबह का खाना छोड़ने से दिनभर की कैलोरी कम हो जाएगी और वे पतले हो जाएंगे। लेकिन असल ज़िन्दगी में अक्सर इसका उल्टा होता है।

नाश्ता छोड़ने से दोपहर तक इतनी तेज़ भूख लग जाती है कि लोग लंच में जरूरत से ज़्यादा खा लेते हैं या दिनभर कुछ न कुछ अनहेल्दी स्नैक्स चबाते रहते हैं। इससे वज़न घटने के बजाय बढ़ जाता है। हालांकि, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो नाश्ता न करने के बाद भी लंच और डिनर में एकदम नपा-तुला खाते हैं। ऐसे लोगों का वज़न कम हो सकता है।

वज़न इस पर निर्भर नहीं करता कि आपने नाश्ता किया या छोड़ा, बल्कि इस पर करता है कि पूरे दिन में आपने क्या और कितना खाया।

नाश्ता छोड़ने का मेटाबॉलिज़्म पर असर 

मेटाबॉलिज़्म वह प्रोसेस है जो हमारे खाने को ताकत में बदलता है। कई लोग डराते हैं कि नाश्ता न करने से यह मशीन 'बंद' या स्लो हो जाएगी। लेकिन सच्चाई यह है कि अगर एक स्वस्थ इंसान अपनी मर्जी से नाश्ता छोड़ दे, तो उसका मेटाबॉलिज़्म अचानक खराब नहीं होता। हमारा शरीर बहुत समझदार है और वह कुछ घंटे बिना खाए भी बिल्कुल नॉर्मल तरीके से काम कर सकता है।

असली दिक्कत तब आती है जब वज़न घटाने के जुनून में लोग लंबे समय तक भूखे रहते हैं या बहुत कम खाते हैं। ऐसे में शरीर को लगता है कि "अब खाना नहीं मिलेगा", तो वह खुद की एनर्जी बचाने के लिए मेटाबॉलिज़्म की स्पीड को धीमा कर देता है। यानी, समस्या कभी-कभार नाश्ता छोड़ने में नहीं, बल्कि शरीर को लगातार भूखे रखने में है। 

जब आप नाश्ता नहीं करते, तब शरीर के अंदर क्या होता है?

जब आप सुबह कुछ नहीं खाते हैं, तो शरीर शुरुआत में तो अपनी पुरानी जमा की हुई ताकत से काम चलाता है।

लेकिन धीरे-धीरे आपके खून में शुगर का लेवल कम होने लगता है। ऐसे में भूख बढ़ाने वाले हार्मोन दिमाग को सिग्नल देने लगते हैं। इसके कारण कई लोगों को बहुत तेज़ गुस्सा आने लगता है, सिर में दर्द शुरू हो जाता है, शरीर टूटने लगता है और चिड़चिड़ापन होने लगता है।

वहीं, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें सुबह नाश्ता न करने पर कोई परेशानी नहीं होती। उन्हें सुबह भूख ही नहीं लगती और वे एकदम नॉर्मल महसूस करते हैं।

यही वजह है कि नाश्ता छोड़ने का असर हर इंसान पर एक जैसा नहीं होता। अगर आप दिन भर में अच्छा खाना खा रहे हैं और खूब सारा पानी पी रहे हैं, तो हो सकता है कि आपको सुबह नाश्ता न करने से कोई परेशानी ही न हो।

क्या नाश्ते को स्किप करने से पेट की चर्बी बढ़ सकती है?

अगर कोई आपसे कहे कि "सिर्फ नाश्ता न करने से पेट बाहर आ जाता है," तो यह सीधे तौर पर सच नहीं है। लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से ऐसा हो सकता है। 

जब आप नाश्ता नहीं करते और दोपहर में भूख से परेशान होते हैं, तब आपका मन सलाद या रोटी खाने का नहीं करता। उस समय मन करता है कि कुछ बहुत मीठा, तला-भुना या जंक फूड मिल जाए। जब आप खाली पेट ऐसा अनहेल्दी खाना खाते हैं, तो खून में शुगर एकदम से बहुत तेज़ बढ़ जाती है और फिर झटके से नीचे गिरती है। इससे आपको थोड़ी देर बाद फिर से तेज़ भूख लग जाती है।

लगातार इस तरह ज़रूरत से ज़्यादा खाना और गलत चीज़े खाने से, शरीर उस एक्स्ट्रा फैट को सीधा आपके पेट के आसपास चर्बी के रूप में जमा करने लगता है। इसलिए, पेट की चर्बी नाश्ता छोड़ने से नहीं बढ़ती, बल्कि नाश्ता छोड़ने के बाद लगने वाली तेज़ भूख में गलत चीज़े खाने से बढ़ती है।

किन लोगों के लिए नाश्ते को स्किप करना नुकसानदायक हो सकता है?

हर किसी के लिए नाश्ता छोड़ना सुरक्षित नहीं होता। कुछ लोगों को सुबह का नाश्ता ज़रूर करना चाहिए:

  • जिन लोगों को शुगर की बीमारी है: लंबे समय तक भूखे रहने से उनका ब्लड शुगर लेवल खतरनाक तरीके से ऊपर-नीचे हो सकता है।
  • बढ़ते हुए बच्चों को: उनकी पढ़ाई, दिमाग के विकास और दिन भर की भागदौड़ के लिए सुबह का खाना बहुत ज़रूरी है।
  • गर्भवती महिलाओं को: उनके पेट में पल रहे बच्चे के सही विकास के लिए सुबह का पोषण बहुत आवश्यक है।
  • घर के बड़े-बुजुर्गों को: ज़्यादा देर भूखे रहने से उन्हें कमजोरी आ सकती है।
  • जो लोग सुबह-सुबह भारी शारीरिक काम करते हैं या जिम जाते हैं: उनके शरीर को ईंधन की ज़रूरत होती है।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह

नाश्ता छोड़ने से न वज़न घटता है और न ही मेटाबॉलिज़्म बिगड़ता है; वज़न कम होना आपकी पूरे दिन की डाइट पर निर्भर करता है। हालांकि, इसे स्किप करने से दोपहर में ओवरईटिंग और पेट की चर्बी बढ़ने का खतरा रहता है। स्वस्थ लोगों के लिए नाश्ता छोड़ना सुरक्षित हो सकता है, लेकिन डायबिटीज के मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इसे कभी नहीं छोड़ना चाहिए। नाश्ता हमेशा मीठे से दूर और प्रोटीन व फाइबर से भरपूर होना चाहिए। 

अगर नाश्ता करें तो उसमें क्या होना चाहिए?

अगर आप उन लोगों में से हैं जिन्हें सुबह नाश्ता करना पसंद है, तो आपका नाश्ता ऐसा होना चाहिए जो आपको घंटों तक ताकत दे और पेट भरा रखे।

एक अच्छे नाश्ते में ये चीज़े शामिल होनी चाहिए:

  • प्रोटीन: जैसे घर का बना पनीर, ताजी दही, या बेसन/मूंग दाल का चीला। प्रोटीन से पेट लंबे समय तक भरा रहता है।
  • फाइबर: ताजे फल, सब्जियां, ओट्स या दलिया। फाइबर आपके पेट को साफ रखता है।
  • अच्छे फैट: थोड़े से भीगे हुए बादाम, अखरोट या बीज।

बाजार में मिलने वाले मीठे कॉर्नफ्लेक्स, डिब्बाबंद जूस, सफेद ब्रेड, या बहुत ज़्यादा तेल में तली हुई चीज़े सुबह के नाश्ते के लिए अच्छे विकल्प नहीं हैं।

वज़न कम करने का असली राज़ क्या है?

सच तो यह है कि सिर्फ नाश्ता छोड़ने या करने से कोई जादुई तरीके से पतला नहीं होता। वज़न घटाने का असली राज़ आपकी रोज़मर्रा की इन छोटी-छोटी आदतों में छिपा है:

  • जितना खाएं, उससे ज़्यादा पचाएं: आप दिन भर में जो भी खाते हैं, कोशिश करें कि उससे थोड़ा ज़्यादा पसीना बहाएं या शारीरिक रूप से एक्टिव रहें।
  • थाली में सही चीज़ें रखें: अपने खाने में दाल, अंडे, सोया, पनीर (प्रोटीन) और खूब सारी ताज़ी सब्जियां (फाइबर) ज़रूर शामिल करें। इससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है।
  • रोज़ थोड़ा पसीना बहाएं: भारी भरकम जिम जाना ज़रूरी नहीं है, लेकिन रोज़ आधा-पौन घंटा (30-45 मिनट) तेज़़ चलना (वॉक करना), साइकिल चलाना या कोई भी कसरत करना बहुत ज़रूरी है।
  • पैकेट वाली चीज़ों से बचें: कोल्ड ड्रिंक, डिब्बाबंद जूस, पैकेट वाले स्नैक्स और बहुत ज़्यादा मीठे को अपनी ज़िंदगी से बाहर कर दें।
  • नींद लें: रात को कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लें। नींद की कमी शरीर का सिस्टम बिगाड़ कर वज़न बढ़ाती है।
  • टेंशन कम लें: अक्सर टेंशन में इंसान बिना भूख के भी मीठा या अनाप-शनाप खा लेता है, जो सीधा मोटापे में बदलता है।
  • शॉर्टकट न खोजें: कोई ऐसी सख्त डाइट (भूखे रहना) न अपनाएं जिसे आप 10 दिन बाद तंग आकर छोड़ दें। घर के सादे खाने के साथ ऐसा रूटीन बनाएं, जिसे आप पूरी ज़िंदगी खुशी-खुशी निभा सकें।

निष्कर्ष

अगर सुबह उठकर नाश्ता करने से आपको पूरे दिन काम करने की अच्छी एनर्जी मिलती है, आपकी भूख कंट्रोल में रहती है और आप दिन भर चिड़चिड़े नहीं होते, तो इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए रखें।

अगर आपको सुबह बिल्कुल भूख नहीं लगती, और आप अपने बाकी के खान-पान में भरपूर पोषण ले रहे हैं, तो आपके लिए नाश्ता छोड़ना भी बिल्कुल ठीक है।

सबसे ज़रूरी बात यह है कि अपने शरीर की ज़रूरतों को समझें। अपनी प्लेट में सादा और पौष्टिक खाना रखें, रोज थोड़ी कसरत करें, पानी खूब पिएं और रात को चैन की नींद सोएं। अगर आप अपनी डाइट में कोई बहुत बड़ा बदलाव करना चाहते हैं, तो हमेशा किसी अच्छे डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें।

References

Steps for Losing Weight | Healthy Weight and Growth | CDC

Optimal Diet Strategies for Weight Loss and Weight Loss Maintenance - PMC

Effect of breakfast on weight and energy intake: systematic review and meta-analysis of randomised controlled trials - PMC

The effectiveness of breakfast recommendations on weight loss: a randomized controlled trial1 - PMC

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

नहीं। बिना दूध-चीनी वाली चाय या ब्लैक कॉफी कुछ समय के लिए ताज़गी दे सकती है, लेकिन यह शरीर को प्रोटीन, फाइबर और दूसरे ज़रूरी पोषक तत्व नहीं देती। अगर लंबे समय तक सिर्फ इसी पर निर्भर रहें, तो बाद में तेज़ भूख लग सकती है।

अगर आपको सुबह स्वाभाविक रूप से भूख नहीं लगती, तो जबरदस्ती भारी नाश्ता करने की ज़रूरत नहीं है। आप थोड़ा समय बाद हल्का और पौष्टिक भोजन ले सकते हैं। साथ ही यह भी देखें कि कहीं देर रात खाना खाने की आदत इसकी वजह तो नहीं है।

हां, कई लोगों में ऐसा होता है। रात में बहुत देर से या ज़्यादा मात्रा में खाना खाने पर सुबह भूख कम लग सकती है। इसलिए रात का भोजन समय पर और हल्का रखना फायदेमंद हो सकता है।

कुछ लोगों में ऐसा हो सकता है। खासकर जिनका काम मानसिक या शारीरिक रूप से ज़्यादा मेहनत वाला है, उन्हें सुबह भोजन न करने पर थकान या ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। हालांकि यह हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है।

सिर्फ फल खाना हर किसी के लिए पर्याप्त नहीं होता। फलों के साथ दही, पनीर, अंडा, या मुट्ठीभर मेवे जैसी प्रोटीन वाली चीज जोड़ने से भोजन ज़्यादा संतुलित बन सकता है और लंबे समय तक पेट भरा रहता है।

अगर आपका काम लंबे समय तक ध्यान और एकाग्रता मांगता है, तो संतुलित नाश्ता कई लोगों के लिए मददगार हो सकता है। हालांकि जिन लोगों को सुबह भूख नहीं लगती, वे अपनी दिनचर्या के अनुसार पहला भोजन थोड़ा बाद में भी ले सकते हैं।

कभी-कभी समय बदलना सामान्य है, लेकिन रोज़ बहुत अनियमित समय पर खाना खाने से कुछ लोगों में भूख और खाने की आदतें प्रभावित हो सकती हैं। जहां तक संभव हो, नियमित भोजन का समय रखना बेहतर माना जाता है।

अगर ऐसा कभी-कभार होता है और आपकी बाकी डाइट संतुलित रहती है, तो आमतौर पर इससे कोई बड़ी समस्या नहीं होती। लेकिन हर वीकेंड ज़रूरत से ज़्यादा खाना खाने की आदत बन जाए, तो वज़न नियंत्रण मुश्किल हो सकता है।

हां। उम्र, शारीरिक गतिविधि, स्वास्थ्य और दवाइयों के अनुसार भोजन की ज़रूरत बदल सकती है। इसलिए जो तरीका युवावस्था में सही लगता था, ज़रूरी नहीं कि वही आगे भी सभी के लिए उपयुक्त हो।

नहीं। नाश्ते का कोई एक "परफेक्ट" समय नहीं है। सही समय वही है जो आपकी नींद, काम, भूख और स्वास्थ्य के अनुसार फिट बैठे। सबसे ज़रूरी बात यह है कि आपका पूरा दिन का भोजन संतुलित और पौष्टिक हो।

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