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Driver को कमर दर्द — Lumbar Support Belt काम करती है या नुकसान?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 08 May, 2026
  • category-iconUpdated on 13 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5047

चाहे आप कैब चलाते हों, ट्रकों के स्टीयरिंग पर दिन-रात बिताते हों, या फिर रोज़ाना घंटों का सफर तय करके ऑफिस पहुँचते हों, एक ड्राइवर की ज़िंदगी कुर्सी (सीट) और सड़क के झटकों के बीच ही गुज़रती है। लगातार 8-10 घंटे एक ही पोज़िशन में बैठे रहने से जब कमर में तेज़ दर्द उठता है, तो ज़्यादातर लोग सबसे आसान और सस्ता रास्ता चुनते हैं, मेडिकल स्टोर से 'लम्बर सपोर्ट बेल्ट' (Lumbar Support Belt) खरीदना।

शुरुआत में यह बेल्ट किसी जादू की तरह काम करती है। इसे पहनते ही कमर को सहारा मिलता है और दर्द गायब सा हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि महीनों तक इस बेल्ट को बांधकर गाड़ी चलाने के बाद भी, जैसे ही आप इसे उतारते हैं, आपकी कमर टूट कर क्यों गिरने लगती है? असल में, जो बेल्ट आपको बाहर से सहारा दे रही है, वह आपकी कमर की अपनी प्राकृतिक ताकत को अंदर ही अंदर हमेशा के लिए अपाहिज बना रही है।

ड्राइविंग के दौरान आपकी कमर इतनी बुरी तरह डैमेज क्यों होती है?

गाड़ी चलाना कोई ऐसा काम नहीं लगता जिसमें भारी वज़न उठाना पड़े, फिर भी ड्राइवरों की कमर सबसे ज़्यादा क्यों टूटती है? इसका कारण सड़क और गाड़ी के बीच होने वाला वह खामोश घर्षण है जिसे आपका शरीर लगातार सहता है:

  • लगातार माइक्रो-वाइब्रेशन्स (Micro-vibrations): जब गाड़ी चलती है, तो इंजन और सड़क के गड्ढों से अनगिनत झटके (Vibrations) सीधे आपकी रीढ़ की हड्डी (Spine) पर पड़ते हैं। ये झटके रीढ़ की हड्डियों के बीच की गद्दी (Disc) को सुखा देते हैं और उसे बाहर की तरफ धकेलते हैं।
  • लगातार एक ही पोश्चर (Prolonged Sitting): लंबे समय तक बैठे रहने (Long sitting) से कमर के निचले हिस्से (Lumbar region) पर शरीर के वज़न का 40% ज़्यादा दबाव पड़ता है। इससे वहां का ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है और नसें दबने लगती हैं।
  • क्लच और ब्रेक का असंतुलन: ड्राइविंग में अक्सर एक पैर (क्लच या ब्रेक पर) ज़्यादा एक्टिव रहता है। यह असंतुलन (Asymmetry) पेल्विक (Pelvic) हिस्से की मांसपेशियों को एक तरफ से सिकोड़ देता है, जिससे कमर में भयंकर ऐंठन (Spasm) आती है।
  • डिहाइड्रेशन और सुस्ती: घंटों गाड़ी चलाने के दौरान पानी कम पीने और पेशाब रोकने की आदत से शरीर में वात (गैस) भड़कता है, जो सीधे कमर की नसों को जकड़ लेता है।

लम्बर सपोर्ट बेल्ट (Lumbar Belt): यह काम करती है या कमर को नुकसान पहुँचाती है?

जब आप दर्द होने पर कमर में बेल्ट बांधते हैं, तो यह केवल एक बैसाखी (Crutch) का काम करती है। इसके फायदे बहुत अल्पकालिक (Short-term) हैं, लेकिन इसके नुकसान बेहद खतरनाक और स्थायी हैं:

  • मांसपेशियों का सूखना (Muscle Atrophy): यह बेल्ट का सबसे बड़ा नुकसान है। हमारी रीढ़ की हड्डी को हमारी 'कोर मसल्स' (Core muscles) संभाल कर रखती हैं। जब आप लगातार बेल्ट पहनते हैं, तो इन मांसपेशियों को काम नहीं करना पड़ता। आराम मिलने के कारण ये मांसपेशियाँ काम करना भूल जाती हैं और सूखकर बिल्कुल कमज़ोर (Atrophied) हो जाती हैं।
  • ब्लड सर्कुलेशन का रुकना: बेल्ट को कसकर बांधने से कमर के हिस्से में खून का प्राकृतिक बहाव रुक जाता है। आयुर्वेद के अनुसार जहाँ खून नहीं पहुँचता, वहां वात दोष (रूखापन) बढ़ जाता है, जिससे नसों में झुनझुनी शुरू हो जाती है।
  • बीमारी को छिपाना (Masking the Root Cause): बेल्ट पहनने से आपको दर्द महसूस नहीं होता, और आप उसी गलत पोश्चर में गाड़ी चलाते रहते हैं। अंदर ही अंदर खिसकी हुई डिस्क (Slip Disc) साइटिका नर्व (Sciatic nerve) को पूरी तरह कुचल देती है।
  • बेल्ट पर पूरी निर्भरता (Dependency): कुछ महीनों बाद स्थिति यह हो जाती है कि बिना बेल्ट के आप सीधे खड़े भी नहीं हो पाते, क्योंकि आपकी अपनी मांसपेशियों में आपकी रीढ़ को संभालने की ताकत ही नहीं बचती।

ड्राइवरों में होने वाला कमर दर्द मुख्य रूप से किन प्रकारों का होता है?

लगातार गाड़ी चलाने से होने वाला दर्द हर इंसान में एक जैसा नहीं होता। शरीर के दोषों के आधार पर यह कमर दर्द मुख्य रूप से तीन प्रकारों में महसूस होता है:

  • वात-प्रधान कमर दर्द: यह ड्राइवरों में सबसे आम है। इसमें कमर में बहुत ज़्यादा जकड़न होती है। दर्द कमर से शुरू होकर कूल्हों और जांघों से होता हुआ पैर के तलवों तक करंट की तरह दौड़ता है, जिसे साइटिका (Sciatica) कहते हैं। इसे ठीक करने के लिए वात दोष कम करने के उपाय बेहद ज़रूरी हैं।
  • पित्त-प्रधान कमर दर्द: जब शरीर में गर्मी ज़्यादा होती है, तो कमर में दर्द के साथ भयंकर जलन होती है। ऐसा लगता है जैसे नसों में आग लगी हो।
  • कफ-प्रधान कमर दर्द: घंटों बैठे रहने से जिन ड्राइवरों का वज़न बढ़ना शुरू हो जाता है, उन्हें दर्द से ज़्यादा कमर में भारीपन महसूस होता है। सुबह पीठ में जकड़न इतनी ज़्यादा होती है कि बिस्तर से उठना मुश्किल लगता है।

क्या आपकी कमर भी हमेशा के लिए डैमेज होने के ये खतरनाक अलार्म बजा रही है?

कमर का दर्द एक दिन में लकवा (Paralysis) नहीं बनता। बेल्ट के नीचे छिपी हुई आपकी कमर पहले ही कई खामोश संकेत देने लगती है, जिन्हें तुरंत पकड़ना ज़रूरी है:

  • पैरों में लगातार बढ़ता हुआ सुन्नपन: क्लच या ब्रेक दबाते समय पैर के अंगूठे या तलवे का सुन्न (Numb) महसूस होना और ग्रिप कमज़ोर पड़ जाना।
  • खांसते या छींकते समय कमर में करंट: अगर ड्राइविंग सीट पर बैठे-बैठे अचानक खांसी आ जाए, तो पेट और रीढ़ पर पड़ने वाले झटके से कमर में एक तेज़ बिजली के झटके जैसा दर्द उठना।
  • पेशाब रोकने में परेशानी: अगर नसों पर दबाव बहुत ज़्यादा बढ़ जाए, तो कई बार यूरिन पास करने में दिक्कत या उस पर से नियंत्रण (Control) हटने लगता है।
  • लगातार रहने वाली थकावट: पूरा दिन गाड़ी चलाने के बाद शरीर में ऐसी क्रोनिक फटीग (Chronic fatigue) होना जो रात भर आराम करने के बाद भी दूर न हो।

आयुर्वेद कमर दर्द और इस डैमेज के मूल कारण को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जिसे लम्बर स्पोंडिलोसिस (Lumbar Spondylosis) या हर्नियेटेड डिस्क कहता है, आयुर्वेद उसे 'कटि शूल' (Kati Shoola) और अपान वात के भयंकर प्रकोप के विज्ञान से समझता है।

  • अपान वात का उलटा बहना: कमर और श्रोणि (Pelvis) अपान वात का मुख्य स्थान हैं। घंटों बैठे रहने और लगातार रहने वाली कब्ज़ के कारण जब यह वात रुक जाता है, तो यह भड़ककर रीढ़ की नसों को जकड़ लेता है।
  • अस्थि और मज्जा धातु का सूखना: लगातार झटके (Vibrations) सहने से रीढ़ की हड्डी के बीच की प्राकृतिक गद्दी (श्लेषक कफ) सूख जाती है। अस्थि धातु कमज़ोर हो जाती है और डिस्क बाहर की तरफ खिसक जाती है।
  • 'आम' (Toxins) का नसों में जमना: जठराग्नि के कमज़ोर होने से बना हुआ अनपचा ज़हरीला कचरा (आम) जब रक्त के साथ बहकर कमर की नसों में जमता है, तो वह भयंकर सूजन और दर्द पैदा करता है।

कमर की नसों को ताकत देने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका भोजन ही आपकी रीढ़ की हड्डी को सुखा सकता है और उसे दोबारा लचीला बना सकता है। नसों को पोषण देने और सूजन को काटने के लिए इस आयुर्वेदिक डाइट को अपनी रूटीन में अनिवार्य रूप से शामिल करें।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - नसों को चिकनाई देने वाले और वात शामक) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - रूखापन और गैस बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, रागी, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद नूडल्स, बासी रोटियाँ।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (कमर के लिए अमृत), तिल का तेल। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, बहुत अधिक मक्खन, डालडा।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, पालक, शकरकंद (सभी अच्छी तरह पकी हुई)। कच्चा सलाद, अत्यधिक गोभी, भारी कटहल, बैंगन, राजमा।
फल और मेवे (Fruits & Nuts) रात भर भीगे हुए बादाम, अखरोट, अंजीर, पपीता, सेब। डिब्बाबंद और बिना मौसम के फल, बाज़ार के रोस्टेड नमकीन नट्स।
पेय पदार्थ (Beverages) हल्दी और अश्वगंधा वाला दूध (रात में), ताज़ा मट्ठा, जीरा पानी। बहुत ज़्यादा कैफीन (कॉफी नसों को सुखाती है), बर्फ का ठंडा पानी।

कमर दर्द खींचने और डिस्क को रिपेयर करने के लिए जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के कमर दर्द को खींच लेते हैं और डैमेज हो चुकी डिस्क को दोबारा हील कर देते हैं:

  • अश्वगंधा: नर्वस सिस्टम की कमज़ोरी दूर करने और सूखी हुई नसों को फौलादी ताकत देने के लिए अश्वगंधा एक अद्भुत रसायन है। यह मांसपेशियों की जकड़न को जड़ से खत्म करता है।
  • योगराज गुग्गुलु: जोड़ों और रीढ़ की हड्डी के बीच फँसे हुए ज़िद्दी वात को निकालने और जकड़न को तुरंत खोलने के लिए यह एक अचूक आयुर्वेदिक मिश्रण है।
  • त्रिफला: आयुर्वेद के अनुसार कब्ज़ कमर दर्द का सबसे बड़ा कारण है। अपान वात को शांत करने के लिए रोज़ रात को त्रिफला का सेवन करना ड्राइवरों के लिए बेहद ज़रूरी उपाय है।
  • शल्लकी: यह जड़ी-बूटी आयुर्वेद में सूजन को तेज़ी से घटाने और डैमेज कार्टिलेज को सुरक्षित रखने के लिए अचूक मानी जाती है।
  • निर्गुण्डी: मांसपेशियों की भयंकर ऐंठन को शांत करने और साइटिका के तेज़ दर्द को प्राकृतिक रूप से सुन्न करने में निर्गुण्डी का तेल या काढ़ा बहुत असरदार है।

रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और जकड़न बहुत गहराई तक स्लिप डिस्क में जम चुकी हो और केवल मौखिक दवाइयाँ काफी न हों, तो पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ नसों को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • कटि बस्ती: कमर के दर्द वाली जगह पर उड़द दाल का घेरा बनाकर उसमें गर्म औषधीय तेल भरा जाता है। यह कटि बस्ती सीधे सूखी हुई डिस्क को भारी चिकनाई देती है, जिससे साइटिका का दर्द तुरंत शांत होता है।
  • अभ्यंग मालिश: गुनगुने वात-शामक तेलों (जैसे महानारायण तेल) से की जाने वाली यह संपूर्ण शारीरिक अभ्यंग मालिश शरीर की जकड़न को खत्म करती है और नसों में ब्लड सर्कुलेशन तेज़ी से बढ़ाती है।
  • पत्र पिंड स्वेद: ताज़े औषधीय पत्तों को तेल में भूनकर बनाई गई पोटली से कमर की सिकाई की जाती है। यह थेरेपी अकड़ी हुई मांसपेशियों को तुरंत खोल देती है और दर्द खींच लेती है।
  • मात्रा बस्ती: आंतों से वात को पूरी तरह खत्म करने के लिए मेडिकेटेड ऑयल की मात्रा बस्ती दी जाती है, जो स्लिप डिस्क को प्राकृतिक रूप से अंदर से रिपेयर करने का जादुई काम करती है।

डिस्क के रिपेयर होने और दर्द खत्म होने में कितना समय लगता है?

बरसों से सूखे हुए कार्टिलेज और डैमेज हो चुकी नसों को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित और लगातार समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और पेट साफ होने से आपकी जठराग्नि सुधरेगी। कमर की भारी जकड़न व दर्द में भारी कमी आएगी। करंट जैसा साइटिका का दर्द शांत होने लगेगा।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से नसों का रूखापन खत्म होने लगेगा। पैरों की झुनझुनी और लकवे जैसा सुन्नपन लगभग खत्म हो जाएगा और आपकी मूवमेंट बिल्कुल फ्री हो जाएगी।
  • 5-6 महीने: अस्थि और मज्जा धातु पूरी तरह पोषित हो जाएगी। खिसकी हुई डिस्क वापस अपनी जगह सेट होने लगेगी और आपकी मांसपेशियाँ इतनी मज़बूत हो जाएंगी कि आपको लम्बर बेल्ट (Lumbar Belt) की कोई ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

कमर दर्द और लम्बर बेल्ट के उपयोग को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द के सिग्नल्स को ब्लॉक करने के लिए पेनकिलर्स, लम्बर बेल्ट और स्टेरॉयड इंजेक्शन देना। वात को शांत करना, 'आम' को पचाना और नसों व मांसपेशियों को प्राकृतिक रूप से पोषण देकर खुद की ताकत वापस लाना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल रीढ़ की हड्डी की एक स्थानीय (Local) मैकेनिकल डैमेज की समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात और लगातार झटकों से मज्जा/अस्थि धातु के सूखने का संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
बेल्ट का उपयोग दर्द होने पर हमेशा बेल्ट पहनने की सलाह दी जाती है, जिससे मांसपेशियाँ कमज़ोर (Atrophied) हो जाती हैं। बेल्ट को केवल एक आपातकालीन सहारा माना जाता है; असली ज़ोर कोर (Core) मांसपेशियों को मज़बूत करने पर होता है।
लंबा असर बेल्ट और दवाइयाँ छोड़ने पर सुन्नपन और दर्द तुरंत वापस आ जाता है और नसों के डैमेज का रिस्क रहता है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है और मांसपेशियाँ खुद को हील कर लेती हैं, जिससे इंसान बिना बेल्ट के दर्द-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद नसों की इस खुश्की और स्लिप डिस्क को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • मल या मूत्र पर नियंत्रण खो देना (Bowel/Bladder Incontinence): यह रीढ़ की हड्डी की नसों के भयंकर रूप से दबने (Cauda Equina Syndrome) का संकेत हो सकता है, जो एक तुरंत सर्जरी मांगने वाली मेडिकल इमरजेंसी है।
  • पैरों में लकवे (Paralysis) जैसी स्थिति: अगर पैरों की उँगलियों या पंजों का कोई हिस्सा बिल्कुल ही काम करना बंद कर दे (Foot drop) और महसूस होना पूरी तरह बंद हो जाए।
  • कमर से पैरों तक अचानक बिजली जैसा करंट दौड़ना: अगर दर्द का स्तर इतना बढ़ जाए कि क्लच या ब्रेक दबाना तो दूर, ज़मीन पर एक कदम रखना भी असंभव हो जाए और आप गिर पड़ें।
  • रात के समय असहनीय तेज़ दर्द और बुखार: अगर आराम करते समय या रात को सोते समय कमर में भयंकर चुभने वाला दर्द हो और साथ में तेज़ बुखार आ जाए।

निष्कर्ष

ड्राइविंग के दौरान कमर दर्द होना एक आम बात लग सकती है, लेकिन इसे लम्बर सपोर्ट बेल्ट (Lumbar Support Belt) के सहारे दबाने की कोशिश करना आग में घी डालने जैसा है। यह बेल्ट कुछ समय के लिए आराम ज़रूर देती है, लेकिन असल में यह आपकी कमर की अपनी ताक़त (मांसपेशियों) को आलसी और अपाहिज बना रही है। आपका कमर दर्द कोई ऐसी साधारण जकड़न नहीं है जो केवल बेल्ट से ठीक हो जाएगी; यह आपकी रीढ़ की हड्डी की उस कमज़ोर जठराग्नि और भड़के हुए वात दोष का चीखता हुआ अलार्म है जो नसों को कुचल रहा है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना पेनकिलर्स से सुन्न करते हैं, तो आप अपनी रीढ़ की हड्डी को हील करने के बजाय उसे स्थायी डैमेज की तरफ धकेल रहे होते हैं। इस खतरनाक चक्र से और बेल्ट की बैसाखी से बाहर निकलें। अपनी ड्राइविंग सीट का पोश्चर सुधारें, कब्ज़ न होने दें और अपनी डाइट में शुद्ध गाय का घी और अखरोट शामिल करें। अश्वगंधा, शल्लकी और त्रिफला जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और कटि बस्ती व मात्रा बस्ती थेरेपी से अपनी सूखी हुई नसों को प्राकृतिक चिकनाई देकर नया जीवन दें। कमर दर्द के कारण अपनी रोज़ी-रोटी को प्रभावित न होने दें, और अपनी कमर को बिना किसी बेल्ट के स्थायी रूप से ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

अत्यधिक दर्द के समय या बहुत खराब सड़कों पर गाड़ी चलाते समय बेल्ट पहनना अस्थायी रूप से (Temporary) ठीक है। लेकिन इसे 8-10 घंटे रोज़ाना अपनी आदत बना लेना बहुत खतरनाक है। इससे आपकी पीठ की मांसपेशियाँ सूख (Atrophy) जाती हैं और आप हमेशा के लिए बेल्ट पर निर्भर हो जाते हैं।

आपकी सीट बहुत ज़्यादा पीछे की तरफ झुकी हुई (Reclined) नहीं होनी चाहिए। कमर बिल्कुल सीधी (90 से 100 डिग्री के कोण पर) होनी चाहिए। कमर के निचले हिस्से (Lumbar curve) को सपोर्ट देने के लिए आप सीट पर एक छोटा तौलिया (Towel roll) रोल करके रख सकते हैं।

नहीं। साइटिका में कमर से लेकर पैरों तक करंट जैसा दर्द दौड़ता है और पैर सुन्न (Numb) हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में क्लच या ब्रेक पर पैर का कंट्रोल छूट सकता है, जो ड्राइविंग के दौरान बेहद जानलेवा साबित हो सकता है।

बिल्कुल। भारी ट्रैफिक में बार-बार क्लच दबाने से शरीर का पूरा असंतुलित दबाव पेल्विस (Pelvic) और कमर के निचले हिस्से की एक तरफ की नसों पर पड़ता है। इससे कमर की मांसपेशियाँ एक तरफ से सिकुड़ जाती हैं और भयंकर ऐंठन (Spasm) पैदा करती हैं।

शत-प्रतिशत। आयुर्वेद के अनुसार आंतों में अपान वात रहता है। जब पुरानी कब्ज़ होती है, तो यह रुकी हुई गैस (वात) उल्टी दिशा में ऊपर की ओर चढ़ती है और कमर की सूखी हुई नसों में जाकर भयंकर चुभन और दर्द पैदा करती है। ड्राइवरों में यह समस्या सबसे ज़्यादा होती है।

हाँ, कटि बस्ती बहुत असरदार है। इसमें इस्तेमाल होने वाला गर्म औषधीय तेल सूखी हुई डिस्क को चिकनाई देता है, वात को शांत करता है और सूजन को हटाकर प्राकृतिक रूप से डिस्क को रिपेयर करता है, जिससे नसों पर पड़ा दबाव तुरंत कम होता है।

कमर दर्द और साइटिका का दर्द वात (रूखेपन और ठंडक) के कारण होता है। ऐसे में बर्फ लगाने से नसें और ज़्यादा सिकुड़ जाएंगी और दर्द बढ़ जाएगा। हमेशा गर्म औषधीय तेल की मालिश करने के बाद हल्की गर्म सिकाई (Steam/Heat) ही करनी चाहिए।

कभी नहीं। पीछे की जेब में मोटा पर्स (Wallet) रखकर गाड़ी चलाने से आपका पेल्विस एक तरफ झुक जाता है (Pelvic tilt)। इससे रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो जाती है और साइटिका नर्व (Sciatic nerve) सीधे दब जाती है। इसे फैट वॉलेट सिंड्रोम (Fat Wallet Syndrome) भी कहते हैं।

सरसों का तेल गर्म होता है, लेकिन नसों की गहराई तक जाकर पोषण देने के लिए तिल का तेल (Sesame oil) या उस पर आधारित आयुर्वेदिक तेल (जैसे महानारायण तेल) सबसे श्रेष्ठ होते हैं। मालिश हमेशा बहुत हल्के हाथों से करनी चाहिए।

लगातार गाड़ी चलाने वाले अक्सर बार-बार पेशाब जाने से बचने के लिए पानी कम पीते हैं। इससे रीढ़ की हड्डी की डिस्क (जिसमें 80% पानी होता है) सूख जाती है। सूखी हुई डिस्क आसानी से फट या खिसक (Slip disc) सकती है। इसलिए पर्याप्त पानी पीना बहुत ज़रूरी है।

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