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आजकल साइटिका की समस्या बहुत आम हो गई है। खासकर उन लोगों में जो दिन भर बैठकर काम करते हैं या जिनकी जीवनशैली ज्यादा सक्रिय नहीं है।
इसमें दर्द केवल कमर तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि कमर से शुरू होकर कूल्हे और फिर पैर तक फैल जाता है। कई बार यह दर्द इतना तेज होता है कि चलना, बैठना और सोना भी मुश्किल हो जाता है।
अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या धीरे-धीरे लंबे समय तक रहने वाली (chronic) बन सकती है। इसलिए इसे शुरुआत में ही समझना और सही इलाज कराना बहुत जरूरी है।
साइटिका क्या है?
साइटिका (Sciatica) कोई अलग बीमारी नहीं है, बल्कि एक condition (स्थिति) है जो sciatic nerve (साइटिक नस) से जुड़ी होती है। यह नस हमारी कमर (lower back) से शुरू होकर कूल्हों और दोनों पैरों तक जाती है। जब यह नस दब जाती है या उसमें सूजन (inflammation) आ जाती है, तब जो दर्द होता है उसे साइटिका कहते हैं। इसका दर्द अलग तरह का होता है – जैसे करंट लगना, जलन या खिंचाव जैसा महसूस होना।
साइटिका के प्रकार
साइटिका के कुछ प्रकार होते हैं, जिन्हें समझना आसान है:
1. तीव्र साइटिका (Acute Sciatica)
यह कम समय के लिए होता है और सही देखभाल से 4–6 हफ्तों में ठीक हो सकता है।
2. पुराना साइटिका (Chronic Sciatica)
यह लंबे समय तक चलता है और बिना इलाज के ठीक नहीं होता।
3. बदलता हुआ साइटिका (Alternating Sciatica)
इसमें कभी दाएं पैर में दर्द होता है, कभी बाएं पैर में।
4. दोनों तरफ का साइटिका (Bilateral Sciatica)
दोनों पैरों में एक साथ दर्द होता है (यह थोड़ा गंभीर हो सकता है)।
लक्षण
अगर आपको साइटिका (Sciatica) है, तो ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
- कमर से शुरू होकर पैर तक जाने वाला दर्द
- कूल्हे में दर्द या भारीपन
- पैर में झनझनाहट (tingling)
- सुन्नपन (numbness)
- जलन (burning sensation)
- मांसपेशियों में कमजोरी (muscle weakness)
- बैठने पर दर्द बढ़ना
- उठने-बैठने में परेशानी
कई लोग बताते हैं कि उन्हें ऐसा लगता है जैसे नस खिंच रही हो यह साइटिका का common symptom है।
कारण
साइटिका होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं:
शारीरिक कारण :
- स्लिप डिस्क (Slip Disc)
- रीढ़ की हड्डी में बदलाव (spine degeneration)
- चोट (injury)
जीवनशैली से जुड़े कारण :
- लंबे समय तक बैठना (long sitting)
- बैठने का गलत तरीका
- exercise (व्यायाम) की कमी
अन्य कारण:
- मोटापा (obesity)
- तनाव (stress)
- मांसपेशियों की कमजोरी
जोखिम कारक और जटिलताएं
अगर ध्यान न दिया जाए, तो समस्या बढ़कर नस को नुकसान तक पहुंच सकती है।
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जोखिम कारक |
संभावित जटिलताएं |
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लंबे समय तक बैठना |
दर्द पुराना हो जाना |
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गलत ढंग |
रीढ़ पर असर |
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मोटापा |
नस पर दबाव |
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स्वास्थ्य लाभ धीमी |
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तनाव (stress) |
मांसपेशियों में जकड़न |
इसका निदान कैसे किया जाता है?
डॉक्टर सबसे पहले आपके लक्षण समझते हैं और आपका शारीरिक परीक्षण करते हैं।
ज़रूरत पड़ने पर ये जांच करवाई जा सकती हैं:
- एक्स-रे
- एमआरआई
- सीटी स्कैन
इनसे पता चलता है कि नस कहाँ दब रही है।
आयुर्वेद में साइटिका
आयुर्वेद में साइटिका को गृध्रसी कहा जाता है।
यह समस्या मुख्य रूप से वात दोष के असंतुलन से होती है।
जब शरीर में वात बढ़ जाता है, तो सूखापन, दर्द और जकड़न बढ़ जाती हैं, जिससे नसों में दर्द महसूस होता है।
Symptoms
कमर से पैर तक फैलता हुआ दर्द:
यह दर्द कमर से शुरू होकर कूल्हे, जांघ, पिंडली और कभी-कभी पैर की उंगलियों तक जाता है। आमतौर पर यह शरीर के एक ही तरफ होता है।
जैसे झटका लग रहा हो या जलन हो रही हो
दर्द कई बार बिजली जैसे झटके या जलन की तरह महसूस होता है, जो अचानक शुरू होता है।
झनझनाहट या सुन्नपन
पैरों में सुई चुभने जैसी अनुभूति या संवेदनहीनता महसूस हो सकती है।
कमज़ोरी या भारीपन महसूस होना:
चलने, सीढ़ी चढ़ने या लंबे समय तक खड़े रहने में पैर कमज़ोर या भारी लग सकते हैं
बैठने या खड़े होने में परेशानी:
बैठने, खड़े होने या झुकने से दर्द और बढ़ सकता है।
सोते समय करवट बदलने में तकलीफ़:
दर्द रात में बढ़ जाता है और ठीक से सोना मुश्किल हो जाता है
पैरों की मांसपेशियों पर नियंत्रण में कमी
कुछ मामलों में पैर के अंगों को हिलाना या उठाना मुश्किल हो सकता है।
जीवा आयुनिक™ उपचार पद्धति – साइटिका के लिए एक संपूर्ण आयुर्वेदिक तरीका
जीवा आयुर्वेद साइटिका के इलाज के लिए एक प्राकृतिक और पूरी तरह से व्यक्तिगत तरीका अपनाता है। यहाँ इलाज सिर्फ दर्द को दबाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि उस असली कारण को समझकर किया जाता है जिससे यह समस्या शुरू हुई। हर व्यक्ति की शरीर प्रकृति और समस्या को ध्यान में रखकर इलाज की योजना बनाई जाती है ताकि आपको अंदर से पूरी तरह से राहत, संतुलन और स्थिरता मिल सके।
जीवा आयुनिक™ उपचार पद्धति की मूल बातें – आपके स्वास्थ्य का संपूर्ण समाधान
- आयुर्वेदिक दवाएँ (HACCP प्रमाणित): जीवा में दी जाने वाली आयुर्वेदिक दवाएँ आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक जड़ी-बूटियों के संतुलन से बनाई जाती हैं। ये दवाएँ शरीर की सफाई करती हैं, ठीक होने की प्रक्रिया को तेज़ करती हैं और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं।
- योग, ध्यान और माइंडफुलनेस: तनाव को दूर करने और मानसिक शांति पाने के लिए योग और ध्यान बेहद असरदार हैं। ये तकनीकें आसान हैं और रोज़ाना करने से आपका मन और शरीर दोनों स्वस्थ रहते हैं।
- पारंपरिक आयुर्वेदिक इलाज: पंचकर्म, तेल मालिश और शरीर शुद्धिकरण जैसे उपचार शरीर के अंदर जमी गंदगी को बाहर निकालते हैं और शरीर को फिर से संतुलित करने में मदद करते हैं।
- आहार और जीवनशैली सलाह: आपकी प्रकृति और बीमारी को समझकर, जीवा के विशेषज्ञ आपको ऐसा आहार और दिनचर्या बताते हैं जो आपके शरीर को मज़बूत बनाए, रोगों से बचाए और दीर्घकालीन स्वास्थ्य बनाए रखे।
साइटिका के लिए आयुर्वेदिक औषधियाँ – जड़ों से राहत पाने का तरीका (Ayurvedic Medicines for Sciatica)
अगर आप साइटिका के दर्द से लंबे समय से परेशान हैं और सिर्फ दर्द निवारक दवाओं पर निर्भर रहकर थक चुके हैं, तो आयुर्वेद आपको एक प्राकृतिक और स्थायी समाधान देता है। आयुर्वेद में ऐसी कई जड़ी-बूटियाँ और घरेलू उपाय हैं जो नसों की सूजन को कम करके दर्द में राहत देते हैं और शरीर को अंदर से मज़बूत बनाते हैं।
यहाँ हम आपके लिए कुछ प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियों की सूची दे रहे हैं, जो साइटिका में असरदार मानी जाती हैं:
-
- हरसिंगार (Harshringar):
यह नसों की सूजन को कम करता है और दर्द को शांत करता है। इसके पत्तों का काढ़ा या रस उपयोगी माना जाता है। - सहजन (Moringa):
यह जोड़ों और नसों की सूजन को कम करता है और शरीर की गतिविधि को बेहतर बनाता है। - मेथी (Methi):
जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत देने वाली यह जड़ी आमतौर पर घरों में पाई जाती है। - अजवाइन (Ajwain):
यह प्राकृतिक सूजनरोधी (anti-inflammatory) गुणों से भरपूर होती है और साइटिका में राहत देती है। - हल्दी (Haldi):
यह एक शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट है, जो नसों की सूजन को कम करती है। - सेंधा नमक (Rock Salt):
यह मांसपेशियों को शांत करता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। गर्म पानी में मिलाकर इसका उपयोग किया जाता है। - सरसों का तेल (Mustard Oil):
इसमें मालिश करने से रक्त संचार बढ़ता है और कमर व टांगों की अकड़न में राहत मिलती है। - अश्वगंधा (Ashwagandha):
यह एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक टॉनिक है जो तनाव को कम करता है, नसों को मज़बूत करता है और शरीर को संतुलित करता है। - शल्लकी (Shallaki):
इसे गोंद के रूप में भी जाना जाता है और यह नसों तथा जोड़ों की सूजन को कम करने में बहुत असरदार है। - पुनर्नवा (Punarnava):
यह शरीर को डिटॉक्स करने के साथ-साथ ऊतकों (tissues) को फिर से जीवित करने में मदद करता है। - गुग्गुलु (Guggulu):
यह रक्त को शुद्ध करता है और जोड़ों व नसों की सूजन में राहत देता है। कई आयुर्वेदिक फार्मूलों में यह उपयोग किया जाता है। - निर्गुंडी (Nirgundi):
- यह दर्द को कम करता है और नसों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है। इसे तेल या कैप्सूल के रूप में लिया जा सकता है।
- हरसिंगार (Harshringar):
इन औषधियों का सही और संयमित उपयोग अगर जीवा के अनुभवी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह से किया जाए, तो साइटिका जैसी जटिल समस्या में भी आपको गहरी और स्थायी राहत मिल सकती है। याद रखें, आयुर्वेद सिर्फ लक्षणों को नहीं दबाता, यह आपकी पूरी जीवनशैली को संतुलित कर जड़ से इलाज करता है।
आयुर्वेदिक थेरेपी
- अभ्यंग (Abhyanga – तेल मालिश) – मांसपेशियों को आराम देता है
- स्वेदन (Swedana – स्टीम थेरेपी) – जकड़न कम करता है
- बस्ती (Basti Therapy) – वात को संतुलित करता है
- कटि बस्ती (Kati Basti) – कमर के दर्द में राहत देता है
डाइट प्लान
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क्या खाएं |
क्या न खाएं |
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गर्म और हल्का भोजन |
तला-भुना खाना |
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हरी सब्जियां |
ज्यादा मसालेदार |
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फल |
ठंडी चीजें |
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घी (थोड़ी मात्रा में) |
जंक फूड |
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सूप |
बना हुआ खाना |
जिवा आयुर्वेद में मरीज की जांच कैसे होती है ?
जिवा आयुर्वेद में डॉक्टर आपकी:
- प्रकृति (body type)
- नाड़ी जांच (pulse diagnosis)
- lifestyle (जीवनशैली)
को ध्यान में रखकर इलाज करते हैं।
हमारा उपचार प्रोसेस
- परामर्श
- जांच
- व्यक्तिगत उपचार योजना
- नियमित देखभाल
ठीक होने में कितना समय लगता है?
- हल्के मामलों में: 1–3 महीने
- मध्यम मामलों में: 3–6 महीने
- पुराने मामलों में: 6 महीने या उससे ज्यादा
इलाज से क्या रिजल्ट मिल सकते हैं?
- दर्द में कमी
- चलने-फिरने में सुधार
- नसों की ताकत बढ़ना
- नींद में सुधार
- रोजमर्रा की जिंदगी आसान होना
जीवा आयुर्वेद में इलाज की अनुमानित लागत
अपनी सेहत के लिए ज़रूरी आर्थिक निवेश को समझना ज़रूरी है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं की लागत में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी मेडिकल ज़रूरतों के हिसाब से सबसे सही विकल्प चुन सकें।
इलाज की लागत
जो मरीज़ नियमित, लगातार देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और कंसल्टेशन की मासिक लागत आमतौर पर 3,000 रुपये से 3,500 रुपये के बीच होती है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित शुरुआती लागत है। अंतिम लागत मरीज़ की बीमारी की सही प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करती है।
प्रोटोकॉल
ज़्यादा व्यापक और व्यवस्थित तरीके के लिए, हम खास पैकेज प्रोटोकॉल देते हैं। ये प्लान शारीरिक लक्षणों और पूरी जीवनशैली में सुधार, दोनों पर ध्यान देने के लिए बनाए गए हैं। पैकेज में शामिल हैं:
- दवा
- कंसल्टेशन
- मानसिक सेहत के सेशन
- योग और ध्यान
- खान-पान (डाइट)
इस प्रोटोकॉल की लागत में एक बार में 15,000 रुपये से 40,000 रुपये तक का पेमेंट शामिल होता है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।
जीवाग्राम
जिन मरीज़ों को गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की ज़रूरत होती है, उनके लिए हमारे जीवाग्राम केंद्र बेहतरीन इलाज का अनुभव देते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में बना एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है, और यह ये सुविधाएँ देता है:
- असली पंचकर्म थेरेपी
- सात्विक भोजन
- आधुनिक इलाज सेवाएँ
- आरामदायक रहने की जगह
- और भी कई जीवन-स्तर सुधारने वाली सुविधाएँ
जीवाग्राम में 7 दिनों के लिए पूरी तरह से समर्पित वेलनेस स्टे की लागत लगभग 1 लाख रुपये है, जो आपके शरीर और मन को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए लगातार, व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।
मरीज जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?
पिछले कुछ सालों में, जीवा आयुर्वेद ने हज़ारों ऐसे मरीजों का भरोसा जीता है जो प्राकृतिक और पर्सनलाइज़्ड हेल्थकेयर समाधान ढूंढ रहे हैं। जीवा आयुर्वेद पर मरीजों के भरोसे के कुछ मुख्य कारण ये हैं:
- बीमारी की जड़ पर आधारित इलाज
पारंपरिक इलाज के उलट, जो सिर्फ़ बीमारी के लक्षणों पर ध्यान देते हैं, आयुर्वेदिक इलाज बीमारी की जड़ को ठीक करने और शरीर में मौजूद उन अंदरूनी असंतुलनों को ठीक करने पर ज़ोर देता है जिनकी वजह से बीमारी होती है।
- अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर
जीवा आयुर्वेद के पास अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टरों की एक बहुत बड़ी टीम है, जो किसी भी बीमारी के लिए इलाज सुझाने से पहले हर मरीज की स्थिति की अच्छी तरह से जांच करते हैं।
- पर्सनलाइज़्ड "Ayunique" इलाज का तरीका
आयुर्वेदिक इलाज बहुत ज़्यादा पर्सनलाइज़्ड होता है और हर व्यक्ति की प्रकृति और जीवनशैली के हिसाब से तैयार किया जाता है।
- संपूर्ण इलाज
आयुर्वेदिक इलाज सिर्फ़ दवाओं तक ही सीमित नहीं है; इसमें खान-पान और जीवनशैली में बदलाव, सांस लेने की तकनीकें, और तनाव को मैनेज करने के तरीके भी शामिल हैं, ताकि शरीर और मन का पूरी तरह से इलाज हो सके।
- पूरे भारत में मरीजों का भरोसा
बहुत बड़ी संख्या में मरीजों ने Jiva के इलाज के तरीकों और सुझावों को अपनाने के बाद अपनी सेहत में सुधार देखा है। इससे पता चलता है कि आयुर्वेदिक इलाज के लिए लोग जीवा आयुर्वेद पर कितना भरोसा करते हैं।
- 95% मरीजों ने इलाज शुरू करने के 3 महीने के अंदर ही अपनी सेहत में काफ़ी सुधार देखा।
- 88% मरीजों ने एलोपैथिक दवाएँ पूरी तरह से लेना बंद कर दिया।
- हर दिन 8000+ मरीजों का कंसल्टेशन होता है।
- दुनिया भर में 15 लाख से ज़्यादा संतुष्ट मरीज़
- 30+ वर्षों की आयुर्वेदिक विशेषज्ञता
- पूरे भारत में 80+ क्लिनिक
एलोपैथी vs आयुर्वेद
|
आधार |
एलोपैथी |
आयुर्वेद |
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तरीका |
लक्षणों पर नियंत्रण |
मूल कारण का उपचार |
|
असर |
जल्दी राहत |
धीरे लेकिन स्थायी |
|
दुष्प्रभाव |
हो सकते हैं |
कम |
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परिणाम |
अस्थायी |
लंबे समय तक |
डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?
अगर आपको ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:
- लगातार बढ़ता हुआ दर्द
- पैर में कमजोरी
- ज्यादा सुन्नपन
- चलने में कठिनाई
निष्कर्ष
साइटिका एक आम समस्या है, लेकिन इसे अनदेखा करना सही नहीं है।
अगर आप केवल अस्थायी राहत नहीं बल्कि स्थायी समाधान चाहते हैं, तो आयुर्वेद एक बेहतर और प्राकृतिक विकल्प हो सकता है।
FAQs
आयुर्वेद में साइटिका के लिए हरसिंगार, अश्वगंधा, शल्लकी, गुग्गुलु और निर्गुंडी जैसी जड़ी-बूटियाँ बहुत असरदार मानी जाती हैं। इनका उपयोग दर्द, सूजन और नसों की कमज़ोरी को ठीक करने में किया जाता है। लेकिन सबसे बेहतर दवा आपके शरीर की प्रकृति और दोष के अनुसार चुनी जाती है।
साइटिका तब होती है जब साइटिक नर्व पर दबाव आता है या उसमें सूजन हो जाती है। इसके पीछे मुख्य कारण होते हैं – गलत बैठने की आदतें, ज़्यादा वज़न, कमज़ोरी या रीढ़ की समस्याएँ। आयुर्वेद इसे वात दोष का असंतुलन मानता है।
अक्सर विटामिन B12 की कमी से नसों में सूजन या कमज़ोरी आ सकती है, जिससे साइटिका जैसे लक्षण दिखते हैं। आयुर्वेदिक रूप से ऐसे मामलों में शरीर को पोषक तत्वों से भरपूर आहार, जड़ी-बूटियाँ और सही दिनचर्या अपनाने की सलाह दी जाती है।
निर्गुंडी, अश्वगंधा और पुनर्नवा जैसी जड़ी-बूटियाँ नसों को मज़बूत और शांत करने में सहायक हैं। ये नसों की सूजन, दर्द और थकावट को कम करने के लिए उपयोग की जाती हैं। इनका नियमित सेवन नसों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है।
हरसिंगार (नाइट जैस्मिन) साइटिका दर्द में बहुत फ़ायदेमंद मानी जाती है। इसके पत्तों का काढ़ा नसों की सूजन को कम करता है और दर्द में राहत देता है। इसके अलावा गुग्गुलु और शल्लकी भी काफ़ी प्रभावी हैं।
आंवला, अनार, पपीता और केला जैसे फल साइटिका में फ़ायदेमंद माने जाते हैं। ये शरीर को ताकत देने के साथ नसों की सेहत को सुधारते हैं और पाचन को बेहतर बनाते हैं, जिससे वात दोष का संतुलन बना रहता है।
साइटिका का तेज़ इलाज तभी संभव है जब आप शुरुआती लक्षणों को पहचान कर सही समय पर इलाज शुरू करें। आयुर्वेद में पंचकर्म, हर्बल दवाएँ, नियमित योग और संतुलित आहार मिलकर साइटिका को जड़ से ठीक करने में मदद करते हैं।
योग में भुजंगासन, मर्कटासन, वज्रासन और शलभासन जैसी मुद्राएँ साइटिका के दर्द में राहत देती हैं। ये कमर और टांगों की नसों को खींचने और आराम देने में मदद करती हैं। किसी विशेषज्ञ की निगरानी में ही योग करें।
हाँ, अगर आप नियमित रूप से आयुर्वेदिक दवाएँ, उचित आहार, जीवनशैली सुधार और थेरेपी अपनाते हैं, तो साइटिका पूरी तरह से ठीक हो सकता है। समय पर इलाज और धैर्य सबसे ज़रूरी हैं।
जी हाँ, सरसों तेल में लहसुन या निर्गुंडी डालकर हल्के हाथों से मालिश करने से सूजन और दर्द में राहत मिलती है। आयुर्वेदिक तेलों से मालिश नसों की कार्यक्षमता सुधारने में भी मदद करती है।
लंबे समय तक बैठने से बचें, झुककर भारी चीज़ें न उठाएँ, सही मुद्रा में बैठें, वज़न नियंत्रित रखें और रोज़ हल्का व्यायाम करें। दिनचर्या संतुलित रखने से आप साइटिका के खतरे को काफ़ी हद तक कम कर सकते हैं।
हाँ, ठंडी चीज़ें या ठंडे पानी से नहाना वात को और बढ़ा सकता है, जिससे साइटिका का दर्द बढ़ सकता है। आयुर्वेद में गर्म पानी से स्नान और गरम पाचनवर्धक चीज़ें खाने की सलाह दी जाती है।
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