Diseases Search
Close Button
 
 

बिना कारण Skin पर लाल चकत्ते आते हैं — Allergy नहीं, ये Urticaria है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

कभी-कभी अचानक शरीर पर लाल और उभरे हुए चकत्ते निकल आते हैं। ये थोड़ी देर में खुद ही गायब होते हैं और फिर किसी दूसरी जगह निकल आते हैं। साथ में तेज़ खुजली, जलन और बेचैनी भी होने लगती है। हम में से ज़्यादातर लोग इसे कोई आम एलर्जी मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

लेकिन जब यह परेशानी बार-बार होने लगे और दवाइयों से सिर्फ कुछ घंटों का आराम मिले, तो यह सोचना ज़रूरी हो जाता है कि आखिर शरीर के अंदर क्या चल रहा है। आपको बता दें कि हर लाल चकत्ता एलर्जी नहीं होता। कई बार यह 'अर्टिकेरिया' (Urticaria) यानी शीतपित्त की दिक्कत होती है। आयुर्वेद के अनुसार, स्किन पर दिखने वाली यह बीमारी सिर्फ बाहर की नहीं है, बल्कि इसका सीधा कनेक्शन आपके शरीर के अंदर बिगड़े हुए बैलेंस से है। जब तक आप अंदर की उस गड़बड़ी को नहीं समझेंगे, यह तकलीफ बार-बार लौटकर आती रहेगी।

Urticaria क्या है?

अर्टिकेरिया स्किन की एक ऐसी हालत है, जिसमें शरीर पर अचानक लाल, उभरे हुए और खुजली वाले चकत्ते निकल आते हैं। ये चकत्ते कुछ मिनटों से लेकर कई घंटों तक रहते हैं और फिर बिना कुछ किए खुद ही मिट जाते हैं। लेकिन परेशानी तब होती है जब ये थोड़ी देर बाद किसी दूसरी जगह पर फिर से उभर आते हैं।

यह दिक्कत बार-बार लौटकर आती है। कभी मौसम बदलने पर, कभी कुछ उल्टा-सीधा खाने के बाद, कभी टेंशन लेने पर, तो कभी बिना किसी साफ़ वजह के ही यह शुरू हो जाता है। कुछ लोगों को यह सिर्फ कुछ दिनों के लिए होता है, पर कुछ लोगों में यह महीनों तक चलता रहता है, जिसे क्रॉनिक अर्टिकेरिया कहते हैं।

क्या हर खुजली Urticaria ही होती है?

बिल्कुल नहीं। यह लोगों के मन में बैठी हुई बहुत बड़ी गलतफहमी है। स्किन पर ज़रा सी खुजली, लालपन या चकत्ते दिखते ही हम मान बैठते हैं कि किसी चीज़ से एलर्जी हो गई है।

पर कई बार असली वजह कुछ और ही होती है। खराब पाचन, लंबे समय तक रहने वाली टेंशन या शरीर की गर्म तासीर ये सब भी स्किन पर ऐसी परेशानियां ला सकते हैं। अर्टिकेरिया में हमारा शरीर एक खास तरह का केमिकल बहुत ज़्यादा मात्रा में छोड़ने लगता है। इसी वजह से स्किन पर सूजन और लाल चकत्ते आ जाते हैं। कई बार तो इसकी कोई साफ़ वजह भी समझ नहीं आती।

त्वचा पर Urticaria के शुरुआती संकेत

शुरू में लोग इसे मामूली सी खुजली या गर्मी का असर मान लेते हैं। पर धीरे-धीरे शरीर कुछ ऐसे इशारे देता है जो बताते हैं कि यह कोई आम खुजली नहीं है:

  • अचानक लाल उभरे चकत्ते: शरीर पर बिना बात के लाल और उभरे हुए चकत्ते निकल आना, जो छूने में थोड़े सख्त लगें।
  • तेज़ खुजली: चकत्तों वाली जगह पर इतनी तेज़ खुजली मचना कि हाथ रोकना मुश्किल हो जाए, और खुजाने पर यह और भी ज़्यादा फैल जाए।
  • त्वचा पर जलन: खुजली के साथ-साथ स्किन पर जलन और गर्माहट लगना।
  • शरीर में गर्मी महसूस होना: शरीर अंदर से एकदम गर्म लगने लगे और बेचैनी बढ़ जाए।
  • रात में तकलीफ बढ़ना: दिन भर सब ठीक रहे, पर रात को बिस्तर पर लेटते ही खुजली और जलन तेज़ हो जाए।
  • जगह बदलना: चकत्ते एक हिस्से से ठीक हों और थोड़ी ही देर में किसी और हिस्से पर निकल आएं।
  • चेहरे पर सूजन: कई बार चेहरे पर, खास तौर पर होंठों और आंखों के आस-पास सूजन आ जाती है।

Urticaria और सामान्य एलर्जी में क्या फर्क है?

बहुत से लोग इन दोनों को एक ही बीमारी मान लेते हैं, लेकिन इनमें बहुत बड़ा फर्क है। आम एलर्जी की हमेशा कोई न कोई साफ़ वजह होती है। जैसे धूल, कोई दवा, खाने की कोई खास चीज़ या कोई क्रीम। आप उस चीज़ से दूर होंगे, तो आपकी तकलीफ अपने आप कम हो जाएगी। इसके चकत्ते भी एक ही हिस्से तक सीमित रहते हैं।

लेकिन अर्टिकेरिया में ऐसा नहीं होता। ज़्यादातर लोग बताते हैं कि उन्होंने कुछ भी नया नहीं खाया या लगाया, फिर भी अचानक चकत्ते निकल आए। ये काफी तेज़ी से फैलते हैं, आकार बदलते हैं और खुजली तेज़ होती है। ये बस एक जगह से गायब होकर दूसरी जगह निकलते रहते हैं।

बार-बार Urticaria होने के पीछे छिपे कारण

अर्टिकेरिया महज़ स्किन की दिक्कत नहीं है। इसके पीछे शरीर के अंदर की कई गहरी वजहें छुपी होती हैं। जब तक आप उन्हें नहीं समझेंगे, यह बार-बार लौटकर आता रहेगा:

  • खराब पाचन: जब आपका पाचन ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर में गंदगी जमा होने लगती है। यही गंदगी स्किन पर चकत्तों के रूप में बाहर आती है।
  • बढ़ी हुई गर्मी: शरीर के अंदर बहुत ज़्यादा गर्मी बढ़ जाने पर स्किन में जलन, लालपन और चकत्ते उभरने लगते हैं।
  • तनाव और बेचैनी: लंबे समय का मानसिक तनाव आपकी इम्युनिटी को कमज़ोर कर देता है। इसका सीधा असर स्किन पर दिखता है।
  • ज़्यादा मसालेदार खाना: तला-भुना खाना शरीर में पित्त (गर्मी) को बढ़ाता है, जो अर्टिकेरिया का एक बड़ा कारण है।
  • नींद की कमी: रोज़ पूरी नींद न लेने से शरीर अंदर से कमज़ोर होता है और स्किन की परेशानियां बढ़ने लगती हैं।
  • इम्युनिटी का ओवरएक्टिव होना: कभी-कभी शरीर छोटी-छोटी बातों पर बहुत तेज़ रिएक्शन देने लगता है, जिससे बार-बार चकत्ते निकलते हैं।
  • इन्फेक्शन: शरीर के अंदर बैठा कोई पुराना इन्फेक्शन भी इस बीमारी को बार-बार हवा दे सकता है।
  • दवाओं का असर: लंबे समय तक पेनकिलर्स खाने से भी स्किन पर उनका उल्टा असर दिख सकता है।
  • गर्म मौसम: बहुत तेज़ गर्मी और पसीने के मिलने से भी स्किन पर खुजली और चकत्ते बढ़ जाते हैं।

कौन सी चीज़ें Urticaria को बढ़ावा देती हैं?

हर किसी का शरीर अलग होता है और इस बीमारी को बढ़ाने वाली चीज़ें भी सबके लिए अलग होती हैं। पर कुछ चीज़ें ऐसी हैं जो इसे तेज़ी से बढ़ाती हैं। इन्हें पहचानना इलाज के लिए बहुत ज़रूरी है:

  • समुद्री खाना (सीफूड): मछली या झींगा कई लोगों में इसे एकदम से बढ़ा देते हैं।
  • ज़्यादा खट्टी चीज़ें: नींबू, इमली, अचार या खट्टे फल शरीर में पित्त बढ़ाते हैं, जिससे चकत्ते निकलने लगते हैं।
  • डिब्बाबंद खाना: पैकेट वाले खाने में मौजूद केमिकल शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • ठंडी चीज़ें: बहुत ठंडी चीज़ें शरीर में वात बढ़ाती हैं, जो इस तकलीफ को और ज़्यादा कर देती है।
  • धूप और गर्मी: तेज़ धूप में जाने या बहुत ज़्यादा पसीना आने पर खुजली और चकत्ते बढ़ सकते हैं।
  • धूल और धुआं: धूल वाली जगहों पर जाने से या धुएं से यह परेशानी बढ़ सकती है।
  • तंग (टाइट) कपड़े: बहुत ज़्यादा टाइट कपड़े पहनने से स्किन पर रगड़ और गर्मी बढ़ती है, जिससे चकत्ते उभर आते हैं।
  • दवाइयां: कुछ खास दर्द निवारक या एंटीबायोटिक दवाएं भी इसे बढ़ावा देती हैं।
  • ज़्यादा पसीना: कसरत करने या गर्मी की वजह से जब बहुत ज़्यादा पसीना आता है, तब भी स्किन पर चकत्ते निकल सकते हैं।

आयुर्वेद में शीतपित्त (Sheetapitta) और वात-पित्त का कनेक्शन

आयुर्वेद में अर्टिकेरिया को 'शीतपित्त' कहा जाता है। इसे स्किन की कोई ऊपरी बीमारी नहीं माना जाता। असली वजह तो शरीर के अंदर बैठी सर्दी, गर्मी और गंदगी के बिगड़े हुए बैलेंस में छुपी होती है। इसी वजह से स्किन पर अचानक उभरे हुए दाने निकल आते हैं और तेज़ खुजली व जलन शुरू हो जाती है।

जब शरीर में वात और पित्त दोनों बिगड़ जाते हैं, तो आपकी स्किन बहुत ज़्यादा नाज़ुक (सेंसिटिव) हो जाती है। पित्त बढ़ने की वजह से स्किन लाल पड़ने लगती है और उसमें जलन होती है। वहीं, वात के बढ़ने से खुजली और सूखापन आते हैं। जब ये दोनों मिल जाते हैं, तो बार-बार स्किन पर इस तरह के दाने निकलने लगते हैं और यह परेशानी आसानी से आपका पीछा नहीं छोड़ती।

इलाज को लेकर आयुर्वेद का नज़रिया

आयुर्वेद इसे सिर्फ स्किन की ऊपरी परेशानी मानकर नहीं चलता। इसके पीछे शरीर में बिगड़े हुए वात और पित्त, कमज़ोर पाचन, शरीर में जमा गंदगी (टॉक्सिन्स) और आपकी नाज़ुक इम्युनिटी का पूरा हाथ होता है।

  • जड़ पर काम: सारा फोकस सिर्फ स्किन के दानों पर नहीं होता। इसके पीछे के असली कारणों को पकड़ा जाता है जैसे गलत खानपान, टेंशन, खराब पाचन, एलर्जी बढ़ाने वाली चीज़ें और बिगड़ा हुआ रूटीन।
  • पित्त और वात का बैलेंस: पित्त बढ़ने से लालपन और जलन बढ़ती है, जबकि वात बढ़ने से खुजली और सूखापन आता है। इसलिए इलाज में इन दोनों को बैलेंस करने पर सबसे ज़्यादा ज़ोर दिया जाता है।
  • पाचन को सुधारना: अगर आपका पाचन कमज़ोर है, तो शरीर में गंदगी जमा होने लगती है, जो स्किन की दिक्कतों को बढ़ा देती है। इसलिए पाचन को मज़बूत करना बहुत ज़रूरी है।
  • शरीर की सफाई: शरीर में जमा गंदगी स्किन को कुछ ज़्यादा ही सेंसिटिव बना देती है। इलाज के ज़रिए इस गंदगी को बाहर निकालकर स्किन को शांत किया जाता है।
  • लाइफस्टाइल और मानसिक शांति: टेंशन, कम नींद और बिगड़ा हुआ रूटीन इस बीमारी को और बढ़ा देते हैं। इसलिए इलाज में शरीर के साथ-साथ दिमाग को भी रिलैक्स रखा जाता है।

इलाज में काम आने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ

अगर आपको लगता है कि आयुर्वेद की ये बूटियां सिर्फ खुजली रोकती हैं, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। इनका असली काम आपकी स्किन को रिलैक्स करना, खून साफ करना और वात-पित्त को वापस बैलेंस में लाना है:

  • नीम: नीम का सीधा सा काम है खून की सफाई करना। यह स्किन की जलन को पूरी तरह से खींच लेता है।
  • गिलोय: इम्युनिटी को मज़बूत बनाने के लिए गिलोय बहुत काम आता है। यह शरीर के अंदर का बैलेंस बिगड़ने नहीं देता।
  • हल्दी: स्किन अगर सूज गई हो या उस पर बहुत ज़्यादा लालपन आ गया हो, तो हल्दी से बेहतर कुछ नहीं है।
  • मंजिष्ठा: खून की गंदगी दूर करने और स्किन का रंग निखारने के लिए इस जड़ी-बूटी का काफी इस्तेमाल होता है।
  • त्रिफला: इसका मेन काम आपका पेट साफ रखना है। जब यह आपका पाचन ठीक करके सारी गंदगी बाहर निकाल देगा, तो स्किन की दिक्कतें अपने आप कम होने लगेंगी।

इलाज में इस्तेमाल होने वाली आयुर्वेदिक थेरेपी

इन थेरेपी का बस एक ही टारगेट है आपकी स्किन शांत हो जाए और शरीर का जो सिस्टम बिगड़ गया है, वह फिर से पटरी पर आ जाए:

  • वमन या विरेचन (बॉडी डिटॉक्स): इसके ज़रिए शरीर की गहराई में फंसी गंदगी और बिगड़े हुए दोषों को बाहर निकाला जाता है। इससे शरीर का अंदरूनी सिस्टम रिसेट हो जाता है।
  • अभ्यंग (तेल मालिश): हल्के गुनगुने तेल की मालिश से न सिर्फ स्किन को अच्छी नमी मिलती है, बल्कि नसें भी पूरी तरह रिलैक्स महसूस करती हैं।
  • शिरोधारा: दिमाग में चल रही फालतू की उलझन और टेंशन को उतारने के लिए यह तरीका बहुत बढ़िया है। इससे पूरा शरीर शांत पड़ जाता है।
  • लेप चिकित्सा: जब तेज़ खुजली या जलन परेशान करने लगे, तो नेचुरल जड़ी-बूटियों का लेप लगाने से एकदम से आराम मिल जाता है।
  • औषधीय जल स्नान: नहाने के पानी में कुछ खास जड़ी-बूटियां मिलाने से स्किन की सेंसिटिविटी काफी हद तक कम हो जाती है।

खाने-पीने में क्या बदलाव करें? (क्या खाएं और क्या न खाएं)

क्या खाएं:

  • मूंग दाल, दलिया और पचने में हल्का खाना खाएं।
  • कद्दू, लौकी और तोरई जैसी हल्की सब्ज़ियाँ।
  • हल्दी, धनिया, जीरा और सोंठ जैसे मसालों का इस्तेमाल करें।
  • पीने के लिए हल्का गुनगुना पानी और हर्बल चाय लें।
  • ताज़े फल खाएं और हमेशा हल्का भोजन लें।

क्या न खाएं:

  • बहुत ज़्यादा मसालेदार और तला-भुना खाना बिल्कुल छोड़ दें।
  • ठंडी चीज़ें और आइसक्रीम खाने से बचें।
  • पैकेट में बंद और प्रोसेस्ड खाने से दूरी बनाएं।
  • बहुत ज़्यादा खट्टा और तेज़ नमक वाला खाना न खाएं।
  • वो चीज़ें बिल्कुल न खाएं जिनसे आपको एलर्जी होती है।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम अमेय है। मुझे पीठ पर रैशेज के साथ स्किन से जुड़ी समस्याएँ हो गई थीं, जिनमें फंगल इंफेक्शन, खुजली और जलन की परेशानी शामिल थी। मैंने जीवा आयुर्वेद से संपर्क किया, जहाँ डॉक्टरों ने मेरी समस्या को समझकर मेरे लिए पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट पैक तैयार किया। साथ ही मुझे जीवा बेसिल सोप के उपयोग की सलाह दी गई। इसके अलावा एक कस्टमाइज्ड डाइट प्लान भी दिया गया, जिससे मेरी स्किन कंडीशन में काफी सुधार हुआ। परिणाम बहुत अच्छे रहे और मुझे काफी राहत मिली।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

अर्टिकेरिया को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, खासकर तब जब यह बार-बार पलटकर आ रहा हो या परेशानी बढ़ रही हो। इन इशारों पर तुरंत चेकअप करवाएं:

  • अगर स्किन पर दाने लगातार कई दिनों तक बने रहें।
  • अगर खुजली इतनी तेज़ हो जाए कि रात की नींद ही उड़ जाए।
  • अगर आपके चेहरे, होंठ या आंखों के आस-पास सूजन आने लगे।
  • अगर आपको सांस लेने में हल्की सी भी तकलीफ महसूस हो रही हो।
  • अगर दवाइयां खाने के बाद भी कोई आराम न मिल रहा हो।
  • अगर शरीर के अलग-अलग हिस्सों में बार-बार नए दाने निकल रहे हों।
  • अगर यह दिक्कत बहुत लंबे समय तक खिंच जाए।
  • अगर परेशानी बहुत तेज़ी से बढ़ती हुई लगे।

निष्कर्ष 

अर्टिकेरिया (शीतपित्त) सिर्फ स्किन की ऊपरी बीमारी नहीं है। इसका सीधा कनेक्शन आपके शरीर के अंदर के सिस्टम और नाज़ुक हो चुकी इम्युनिटी से है।

आज की मॉडर्न साइंस इसे सिर्फ एलर्जी मानती है, जबकि आयुर्वेद इसे बिगड़े हुए वात-पित्त, कमज़ोर पाचन और अंदर जमा गंदगी का नतीजा मानता है। स्किन पर बार-बार होने वाली इस परेशानी को कभी नज़रअंदाज़ न करें। सही वक्त पर इसके असली कारण को समझकर आप अपना पाचन और रूटीन सुधार सकते हैं। यही इसे हमेशा के लिए कंट्रोल में रखने का सही तरीका है।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ, कई लोगों में मौसम बदलते ही त्वचा पर लाल चकत्ते और खुजली बढ़ने लगती है। तेज गर्मी, उमस, ठंडी हवा या अचानक तापमान बदलने का असर शरीर पर दिखाई दे सकता है। शरीर की संवेदनशीलता बढ़ जाने पर छोटी छोटी चीजें भी परेशानी बढ़ा देती हैं। कुछ लोगों को बरसात के समय भी यह दिक्कत अधिक होती है। इसलिए मौसम के अनुसार खानपान और दिनचर्या का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।

जी हाँ, यह समस्या केवल बड़ों में ही नहीं बल्कि बच्चों में भी दिखाई दे सकती है। बच्चों की त्वचा अधिक कोमल और संवेदनशील होती है इसलिए लाल दाने और खुजली जल्दी उभर सकती है। कई बार माता पिता इसे साधारण गर्मी या खुजली समझ लेते हैं। यदि चकत्ते बार बार आते रहें तो चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी हो जाता है। कमजोर पाचन भी इस परेशानी को बढ़ा सकता है।

कुछ लोगों में अधिक पसीना आने पर त्वचा में जलन और खुजली बढ़ जाती है। धूप में ज्यादा देर रहना या शरीर का बहुत गर्म हो जाना भी लाल चकत्तों को उभार सकता है। पसीने के कारण त्वचा अधिक संवेदनशील महसूस होने लगती है। ऐसे में ढीले सूती कपड़े पहनना और शरीर को ठंडा रखना लाभकारी माना जाता है। साफ सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी होता है।

हाँ, लगातार खुजली और बेचैनी के कारण रात में नींद ठीक से नहीं आ पाती। कई लोगों को रात होते ही त्वचा में ज्यादा जलन महसूस होने लगती है। पर्याप्त नींद न मिलने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है और परेशानी फिर और अधिक बढ़ने लगती है। इससे शरीर थका हुआ महसूस करता है। इसलिए अच्छी नींद और शांत दिनचर्या को महत्वपूर्ण माना जाता है।

कुछ मामलों में लंबे समय तक दवाइयों का सेवन शरीर की प्रतिक्रिया क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इससे त्वचा जल्दी प्रतिक्रिया देने लगती है। हालांकि हर व्यक्ति में ऐसा होना जरूरी नहीं है। यदि किसी दवा के बाद बार बार चकत्ते दिखाई दें तो चिकित्सक को इसकी जानकारी देनी चाहिए। बिना सलाह के दवा लेना परेशानी बढ़ा सकता है।

बहुत देर तक खाली पेट रहने से शरीर में असंतुलन बढ़ सकता है। कई लोगों को इससे शरीर में गर्मी और बेचैनी महसूस होने लगती है। आयुर्वेद के अनुसार अनियमित भोजन पाचन शक्ति को कमजोर करता है। इसका प्रभाव त्वचा पर भी दिखाई दे सकता है। इसलिए समय पर हल्का और संतुलित भोजन करना लाभकारी माना जाता है।

अधिकतर मामलों में चकत्ते बिना निशान छोड़े ठीक हो जाते हैं। लेकिन यदि व्यक्ति बार-बार खुजली करता रहे तो त्वचा पर काले दाग या खुरदरापन दिखाई दे सकता है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में यह समस्या अधिक हो सकती है। त्वचा को ज्यादा रगड़ने से जलन बढ़ सकती है। इसलिए खुजली को नियंत्रित रखना जरूरी माना जाता है।

हाँ, अनियमित दिनचर्या और देर रात तक जागने की आदत शरीर के संतुलन को प्रभावित कर सकती है। पर्याप्त आराम न मिलने से मानसिक तनाव बढ़ता है, जिसका असर त्वचा पर दिखाई दे सकता है। कई लोगों में रात के समय खुजली और चकत्ते ज्यादा महसूस होते हैं। शरीर को आराम और नियमित नींद मिलना जरूरी माना जाता है। इससे शरीर शांत अवस्था में रहता है।

नहीं, कई बार इसके साथ शरीर में थकान, बेचैनी और चिड़चिड़पन भी महसूस हो सकता है। कुछ लोगों में होंठ, आंख या गले के आसपास सूजन भी दिखाई दे सकती है। ऐसी स्थिति को हल्के में नहीं लेना चाहिए। बार बार होने वाली परेशानी शरीर के अंदरूनी असंतुलन की ओर संकेत कर सकती है। समय रहते सही सलाह लेना जरूरी माना जाता है।

हाँ, शरीर से स्वस्थ दिखने वाले लोगों में भी यह समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में बहुत अधिक मेहनत वाला व्यायाम या शरीर का ज्यादा गर्म होना परेशानी को बढ़ा सकता है। हालांकि हल्का और नियमित व्यायाम शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है। जरूरी यह है कि शरीर को अत्यधिक थकाया न जाए। पर्याप्त पानी और आराम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us