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गर्मी में Loose Motions और Food Poisoning - पहली रात में क्या करें

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

तो बात सीधे शब्दों में ऐसी है कि जैसे ही जून की यह तपती गर्मियां शुरू होती हैं, वैसे ही हमारे पेट का मीटर भी डाउन होने लगता है। कभी कभार दोस्तों के साथ बाहर का कुछ चटपटा उड़ा लिया, कभी गलती से किसी ऐसी-वैसी जगह का पानी हलक से नीचे उतर गया, या फिर दोपहर की कड़क धूप में ज्यादा देर चक्कर काट लिए और बस, खेल शुरू! पेट में ऐसे मरोड़ उठते हैं कि बंदा सीधे वॉशरूम की तरफ ही दौड़ता रहता है। शरीर में इतनी भयंकर सुस्ती और बेचैनी छा जाती है कि पूछो मत।

और सबसे ज्यादा आफत तो तब आती है जब यह तमाशा अचानक आधी रात को शुरू होता है। अब उस वक्त न तो तुरंत कोई डॉक्टर मिलता है और न ही दवा की दुकान खुली होती है। ऐसे में किसी के भी हाथ-पैर फूलना बिल्कुल नॉर्मल है, क्योंकि एक तरफ से बार-बार मोशन हो रहे होते हैं और दूसरी तरफ से शरीर का सारा पानी और ताकत निचोड़ रही होती है।

गर्मी में पेट अचानक खराब क्यों हो जाता है? 

यार, गर्मियों का एक बड़ा गंदा सीन है सुबह तक आप भले-चंगे घूम रहे होते हैं, और शाम होते-होते पेट में ऐसे मरोड़ उठते हैं कि सीधे वॉशरूम की तरफ भागना पड़ता है। कभी उल्टी जैसा मन, तो कभी दस्त।

असल में, इस मौसम में बैक्टीरिया सुपरफास्ट स्पीड से बढ़ते हैं, जिससे खाना और पानी बहुत जल्दी सड़ने  लगते हैं। अब अनजाने में ऐसा बासी या दूषित खाना पेट में गया नहीं कि अंदर गदर मचना तय है। ऊपर से चिलचिलाती धूप और भयंकर पसीना शरीर का सारा पानी सोख लेते हैं। रही-सही कसर सड़क किनारे बिकने वाले खुले कटे फल, मक्खियां चाटता खाना और गंदा पानी पूरी कर देते हैं। यही वजह है कि जून की गर्मियों में दस्त और पेट के इन्फेक्शन के मामले रॉकेट की तरह बढ़ते हैं।

कैसे पहचानें कि यह सिर्फ Loose Motions हैं या Food Poisoning? 

अक्सर लोग दो-तीन बार वॉशरूम क्या गए, सीधे कह देते हैं, "भाई, फूड पॉइजनिंग हो गई!" पर ठहरो, हर बार ऐसा नहीं होता। दोनों में थोड़ा फर्क है:

  • साधारण दस्त : यह अमूमन मौसम के अचानक बदलने, रात में कुछ ज्यादा तीखा-तीखा खा लेने या पेट की हल्की-फुल्की खराबी से होते हैं। इसमें बार-बार भागना तो पड़ता है, पर हालत बहुत ज्यादा सीरियस नहीं होती। थोड़ा आराम करो, ओआरएस (ORS) पियो, खिचड़ी खाओ और यह एक-दो दिन में खुद ही शांत हो जाते हैं।
  • फूड पॉइजनिंग: यह अचानक और किसी सुनामी की तरह आती है। इसमें सिर्फ दस्त नहीं होते; बल्कि उसके साथ भयंकर मरोड़, लगातार उल्टियां, तेज बुखार और ऐसी कमजोरी आती है कि बिस्तर से उठना भारी हो जाता है। आपको साफ समझ आ जाएगा कि दोपहर में जो चाट या सैंडविच खाया था, यह उसी का साइड इफेक्ट है। अगर उल्टियां रुक ही नहीं रही हों, तो इसे बिल्कुल हल्के में मत लेना।

पहली रात घबराएं नहीं - सबसे पहले ये 5 काम करें 

जब पेट खराब हो, तो पैनिक होने के बजाय शांति से काम लें। पहली रात अगर आपने ये पांच बेसिक कदम उठा लिए, तो आपकी बॉडी डिहाइड्रेशन से बच जाएगी:

  1. घूंट-घूंट पानी पीते रहें: दस्त और उल्टी में शरीर का सारा जरूरी नमक और पानी बाहर बह जाता है। इसलिए ओआरएस, नींबू-पानी या नमक-चीनी का घोल थोड़ी-थोड़ी देर में पीते रहें। एक साथ पूरा ग्लास न गटकें, धीरे-धीरे पिएं।
  2. पेट पर जुल्म बंद करें: इस वक्त आपका पेट पहले से ही सूजा और परेशान है, इसलिए उस पर भारी खाना पचाने का बोझ मत डालिए। कुछ घंटों के लिए खाने से तौबा कर लें तो बेहतर है।
  3. दबाकर खाएं सुपाच्य भोजन: जब भूख लगे, तो सिर्फ सादी मूंग दाल की खिचड़ी, केला, उबले चावल का मांड या मूंग की दाल का पानी लें। ये चीजें पेट को सहलाती हैं और तुरंत एनर्जी भी देती हैं।
  4. बिस्तर पकड़ लें: बार-बार भागने से शरीर निढाल हो जाता है, इसलिए चुपचाप आराम करें ताकि बॉडी खुद को हील कर सके।

गर्मियों में इन बीमारियों से बचने के कुछ एकदम आसान उपाय

थोड़ी सी अक्ल और थोड़ी सी सावधानी बस इतना ही चाहिए गर्मियों में पेट को लोहे जैसा मजबूत रखने के लिए:

  • चूल्हे से उतरा ताजा खाना ही खाएं: गर्मियों में सुबह का बना खाना शाम तक खाने लायक नहीं बचता। बार-बार फ्रिज से निकाल कर गर्म करने की आदत छोड़ें।
  • पानी के मामले में नो कनविक्शन: हमेशा साफ और फिल्टर का पानी पिएं। घर से बाहर निकल रहे हैं, तो अपनी पानी की बोतल साथ रखना कभी न भूलें।
  • सड़क किनारे के खुले ठेले? ना बाबा ना: वो कटे हुए तरबूज-पपीते जिन पर धूल उड़ रही है, या वो चाट-पकौड़े जो खुले में रखे हैं वे कीटाणुओं के चलते-फिरते घर हैं। इनसे दूर ही भलाई है।
  • हाथ धोने में आलस कैसा: खाना खाने से पहले और वॉशरूम से आने के बाद साबुन से हाथ रगड़कर धोएं।
  • सब्जियों को अच्छे से नहलाएं: बाजार से लाए फल और कच्ची सब्जियों को बिना अच्छे से धोए सीधे मुंह में न डालें।

कौन-सी गलतियां हालत बिगाड़ सकती हैं? 

कई बार हम खुद ही अपनी बीमारी के डॉक्टर बन जाते हैं और कुछ ऐसी बेवकूफियां कर बैठते हैं जिससे सीधे हॉस्पिटल का बेड देखना पड़ता है:

  • यह सोचकर पानी न पीना कि फिर से वॉशरूम भागना पड़ेगा: यह सबसे खतरनाक गलती है! इससे बॉडी सूख जाएगी और कमजोरी डबल हो जाएगी।
  • मसालेदार खाना चालू रखना: "अरे थोड़ा सा ही तो खाया है" यह कहकर छोले-भटूरे या पराठे खाना पेट में तेजाब डालने जैसा है।
  • एक ही बार में ठूंसकर खाना: पेट को आराम चाहिए, इसलिए टुकड़ों-टुकड़ों में बहुत थोड़ा-थोड़ा खाएं।
  • चाय-कॉफी या कोल्ड ड्रिंक गटकना: कुछ लोगों को लगता है कि ठंडी कोल्ड ड्रिंक से पेट शांत होगा, जबकि इसमें मौजूद एक्स्ट्रा कैफीन और शुगर दस्त को और बढ़ा देते हैं।

कब समझें कि घर के उपाय काफी नहीं हैं? 

अगर नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

  • लगातार बहुत बार दस्त होना
  • दस्त के साथ बार-बार उल्टी होना
  • तेज बुखार आना
  • मल में खून आना
  • पेट में असहनीय दर्द या मरोड़ होना
  • मुंह का बहुत ज्यादा सूखना
  • पेशाब बहुत कम आना

आयुर्वेद क्या कहता है: गर्मियों में पेट का ये हाल क्यों होता है?

आयुर्वेद का फंडा बड़ा क्लियर है। गर्मी के मौसम में हमारे आसपास का वातावरण जितना गर्म होता है, हमारे शरीर के भीतर का 'पित्त दोष' भी उतना ही भड़क उठता है। पित्त का सीधा नाता हमारी पेट की आग (पाचन अग्नि) और गर्मी से है। जब यह पित्त हद से ज्यादा बढ़ जाता है, तो पेट में भयंकर जलन, एसिडिटी, कच्ची डकारें और बार-बार दस्त जैसी दिक्कतें होने लगती हैं।

ऊपर से जब हम इस भड़के हुए पित्त में एक्स्ट्रा मिर्च-मसाले, बासी खाना या जंक फूड डाल देते हैं, तो हमारी पाचक अग्नि मंद हो जाती है। खाना पचने के बजाय सड़ने लगता है और शरीर में 'आम' बनने लगते हैं, जो पेट दर्द और मरोड़ बनकर बाहर निकलते हैं।

पित्त को शांत करने वाली कुछ जादुई आयुर्वेदिक औषधियां

आयुर्वेद में ऐसी बेहतरीन बूटियां हैं :

  • बेल: गर्मियों में बेल का शरबत या मुरब्बा पेट के लिए अमृत है। यह आंतों को बांधता है और बार-बार वॉशरूम भागने की आदत को रोकता है।
  • कुटज : जब दस्त किसी भी तरह न रुक रहे हों, तो आयुर्वेद में कुटज की छाल का इस्तेमाल किया जाता है। यह आंतों के इन्फेक्शन को जड़ से साफ करती है।
  • नागरमोथा: पेट के मरोड़, ऐंठन और गैस की तकलीफ में यह बूटी बहुत आराम पहुँचाती है।
  • धनिया और सौंफ: इन दोनों को पानी में उबालकर या वैसे ही चबाकर खाने से पेट की गर्मी शांत होती है और एसिडिटी से तुरंत राहत मिलती है।
  • गिलोय और मुलेठी: गिलोय पेट के इन्फेक्शन से लड़ती है और मुलेठी आंतों के अंदरूनी छालों या जलन को मलाई की तरह शांत करती है।

शरीर के सिस्टम को रीबूट करने वाली आयुर्वेदिक थेरेपीज़

कई बार जब खान-पान सुधारने के बाद भी डाइजेशन पटरी पर नहीं आता, तब कुछ आयुर्वेदिक थेरेपीज़ कमाल का असर दिखाती हैं:

  • अभ्यंग (हल्की मालिश): सही तेलों से जब शरीर की मालिश होती है, तो बढ़ा हुआ वात और पित्त शांत होता है, जिससे पेट की नसें रिलैक्स हो जाती हैं।
  • शिरोधारा: आप सोचेंगे पेट खराब होने पर माथे का क्या कनेक्शन? भाई, जब पेट खराब होता है तो दिमाग में जो स्ट्रेस और बेचैनी बढ़ती है, उसे शिरोधारा पल भर में सोख लेती है।
  • पंचकर्म: अगर आंतों में सालों पुराना कचरा जमा है, तो डॉक्टर की देखरेख में की जाने वाली यह क्लीनिंग प्रोसेस पूरे सिस्टम को नया जैसा बना देती है।
  • योग और प्राणायाम: वज्रासन (खाने के बाद), पवनमुक्तासन और ठंडी सांसों वाला 'शीतली प्राणायाम' पेट को ठंडा और दुरुस्त रखने का सबसे बेस्ट और मुफ्त का इलाज हैं।

सहायक आहार: क्या खाएं और क्या न खाएं

पेट खराब होने पर सही भोजन चुनना उतना ही जरूरी है जितना सही इलाज। हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन पेट को आराम देने में मदद कर सकता है, जबकि कुछ चीजें परेशानी को और बढ़ा सकती हैं।

क्या खाएं?

  • खिचड़ी
  • मूंग दाल का पानी
  • दही-चावल (यदि दही से परेशानी न होती हो)
  • नारियल पानी
  • ओआरएस और पर्याप्त मात्रा में पानी
  • ताजे और हल्के फल

क्या न खाएं?

  • तला-भुना भोजन
  • बहुत मसालेदार भोजन
  • बाहर का खाना
  • बासी या लंबे समय तक रखा हुआ भोजन
  • कोल्ड ड्रिंक और बहुत ठंडे पेय
  • अधिक चाय और कॉफी

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम बुधराम है और मैं करोल बाग, दिल्ली का रहने वाला हूं। पिछले कई वर्षों से मैं पेट की समस्याओं से परेशान था। मैंने कई जगह इलाज करवाया और दवाइयां भी लीं। कुछ समय के लिए आराम मिलता था, लेकिन फिर एक-दो महीने बाद वही समस्या दोबारा शुरू हो जाती थी। लगातार पेट दर्द, गैस और असहजता की वजह से मेरी दिनचर्या प्रभावित होने लगी थी।

फिर मेरे बड़े भाई की सलाह पर मैं जीवा आयुर्वेद से जुड़ा। यहां मेरी समस्या को ध्यान से समझा गया और मुझे आयुर्वेदिक उपचार शुरू करने की सलाह दी गई। शुरुआती कुछ हफ्तों में ही मुझे सकारात्मक बदलाव महसूस होने लगा। पिछले 7 महीनों से मैं नियमित उपचार ले रहा हूं और अब पहले की तुलना में लगभग 75% बेहतर महसूस करता हूं। पेट दर्द और गैस की समस्या में काफी राहत मिली है। यहां का सहयोगी स्टाफ और देखभाल का तरीका भी बहुत अच्छा लगा। मैं जीवा आयुर्वेद का धन्यवाद करता हूं, जिसने मुझे बेहतर स्वास्थ्य की ओर बढ़ने में मदद की।

डॉक्टर के पास जाने में देरी कब भारी पड़ सकती है?

हर बार घर के नुस्खे काम नहीं आते। अगर मामला इन लोगों का हो या ये स्थितियां बन रही हों, तो तुरंत डॉक्टर की क्लीनिक पर पहुंचें:

  • अगर दस्त लगातार 2 से 3 दिनों तक बने रहें और कम होने का नाम न लें।
  • अगर मरीज कोई छोटा बच्चा, गर्भवती महिला या घर के बुजुर्ग हों।
  • जब पेट में ऐसा दर्द हो कि मरीज सीधा न खड़ा हो पा रहा हो।
  • चक्कर आकर या बेहोशी आने लगे।

निष्कर्ष

गर्मियों में पेट खराब होना कोई ऐसी अनोखी आफत नहीं है जिससे बचा न जा सके। यह साफ तौर पर हमारी छोटी-मोटी लापरवाहियों का नतीजा होता है। सिर्फ दस्त रोकने की दवा खा लेना इसका परमानेंट इलाज नहीं है।

आयुर्वेद कहता है कि अपनी पाचन शक्ति को पहचानो और उसी के हिसाब से अपनी लाइफस्टाइल बदलो। साफ पानी पियो, ताजा खाना खाओ, पेट को उतना ही दो जितना वह आसानी से संभाल सके और इस चिलचिलाती गर्मी में भी अपने पेट को एकदम कूल और हैप्पी रखो!

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

यह कमज़ोर पाचन शक्ति, गैस बनने या भोजन ठीक तरह से न पचने का संकेत हो सकता है।

हाँ, बार-बार पेट फूलना कई बार कमज़ोर पाचन और गैस बनने से जुड़ा हो सकता है।

हाँ, बिना ठीक से चबाए जल्दी खाना खाने से पाचन पर दबाव बढ़ सकता है और गैस बनने लगती है।

हाँ, लगातार तनाव और चिंता पाचन को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे भारीपन और डकार जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

पेट फूलना, गैस, भारीपन, भूख कम लगना, कब्ज और बार-बार डकार आना इसके सामान्य संकेत माने जाते हैं।

हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन लेना बेहतर माना जाता है, जैसे मूंग दाल, गुनगुना पानी और घर का बना भोजन।

हाँ, देर रात भोजन करने से पाचन धीमा पड़ सकता है और गैस व भारीपन की परेशानी बढ़ सकती है।

कभी-कभी गैस बनना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर यह रोज होने लगे, तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

सही खानपान और नियमित दिनचर्या के साथ कुछ सप्ताह में हल्का सुधार महसूस हो सकता है, जबकि बेहतर संतुलन बनने में कुछ महीने लग सकते हैं।

अगर पेट फूलना, डकार, भारीपन या पेट दर्द लंबे समय तक बना रहे और घरेलू उपायों से राहत न मिले, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

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