Diseases Search
Close Button
 
 

बाल झड़ना और थकान – क्या thyroid imbalance का संकेत है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

सुबह उठते ही कंघी में उलझे हुए बालों के गुच्छे और शरीर में ऐसी थकावट मानो रात भर सोए ही न हों, यह आज के समय में घर-घर की कहानी बन चुकी है। ज़्यादातर लोग इसे ऑफिस के भारी काम, उम्र के बढ़ने या मौसम के बदलाव का नतीजा मानकर महंगे शैम्पू बदलते रहते हैं और स्ट्रॉन्ग कॉफी पीकर दिन गुज़ारते हैं।

लेकिन जब ये दोनों समस्याएं एक साथ आपके शरीर पर हावी होने लगें, तो यह कोई सामान्य शारीरिक कमज़ोरी नहीं है। यह आपके गले में मौजूद उस छोटी सी तितली के आकार की ग्रंथि (Thyroid gland) का एक खौफनाक अलार्म है, जो आपके पूरे मेटाबॉलिज़्म को कंट्रोल करती है। जब यह सिस्टम अंदर से क्रैश होता है, तो बाहरी तेल या विटामिन्स की गोलियाँ इस तबाही को कभी नहीं रोक सकतीं।

बाल झड़ने और शरीर टूटने के पीछे गले की इस ग्रंथि का क्या खेल है?

जब आपकी थायराइड ग्रंथि ज़रूरत से कम या ज़्यादा हॉर्मोन बनाती है, तो शरीर के हर सेल (Cell) का मेटाबॉलिज़्म डगमगा जाता है। इन दो समस्याओं के पीछे ये अंदरूनी कारण काम कर रहे होते हैं:

  • मेटाबॉलिज़्म का धीमा पड़ना (Slow Metabolism): थायराइड हॉर्मोन्स शरीर की ऊर्जा के इंजन हैं। जब ये हॉर्मोन्स कम बनते हैं, तो शरीर के गैर-ज़रूरी अंगों (जैसे बाल और त्वचा) को पोषण मिलना बंद हो जाता है, जिससे क्रोनिक फटीग हावी हो जाता है।
  • हेयर फॉलिकल्स (Hair follicles) का सिकुड़ना: T3 और T4 हॉर्मोन्स बालों की जड़ों को बढ़ने (Anagen phase) का सिग्नल देते हैं। इनकी कमी से बाल अपनी जड़ें छोड़ देते हैं और समय से पहले झड़ने वाले फेज़ (Telogen phase) में चले जाते हैं।
  • ऊर्जा का उत्पादन रुकना: सेल्स के अंदर एटीपी (ATP) का निर्माण रुक जाता है, जिससे आप 8 घंटे सोने के बाद भी थकावट महसूस करते हैं और आपका पाचन तंत्र पूरी तरह सुस्त पड़ जाता है।

थायराइड का यह असंतुलन किन प्रकारों का हो सकता है?

थायराइड ग्रंथि का काम बिगड़ना केवल एक तरह की बीमारी नहीं है। हॉर्मोन्स के घटने या बढ़ने के आधार पर यह आपको इन अलग-अलग रूपों में अपना शिकार बना सकता है:

  • हाइपोथायरायडिज़्म (Hypothyroidism): यह सबसे आम प्रकार है। इसमें ग्रंथि पर्याप्त हॉर्मोन नहीं बना पाती, जिससे मेटाबॉलिज़्म सुस्त हो जाता है, बाल गुच्छों में झड़ते हैं, थकावट होती है और वज़न का बढ़ना बेकाबू हो जाता है।
  • हाइपरथायरायडिज़्म (Hyperthyroidism): इसमें ग्रंथि बहुत ज़्यादा हॉर्मोन बनाने लगती है। मेटाबॉलिज़्म इतना तेज़ हो जाता है कि इंसान कमज़ोरी महसूस करता है, बाल पतले हो जाते हैं और वज़न तेज़ी से गिरने लगता है।
  • हाशिमोटो डिसीज़ (Hashimoto's Thyroiditis): यह एक ऑटोइम्यून (Autoimmune) स्थिति है जहाँ आपका अपना ही इम्यून सिस्टम भ्रमित होकर थायराइड ग्रंथि पर हमला कर देता है, जिससे ग्रंथि अंदर ही अंदर खत्म होने लगती है।

किन खामोश संकेतों से पहचानें कि यह थकावट थायराइड की ही देन है?

शरीर रातों-रात डैमेज नहीं होता; वह बहुत पहले से कई खामोश अलार्म बजाने लगता है। यदि आप इन शुरुआती संकेतों को पहचान लें, तो ग्रंथि को पूरी तरह सूखने से रोका जा सकता है:

  • अचानक और बिना कारण वज़न का बढ़ना (Unexplained Weight Gain): आप बहुत कम खाना खा रहे हैं और भारी कसरत कर रहे हैं, फिर भी आपका वज़न लगातार बढ़ता जा रहा है।
  • त्वचा और बालों का रूखापन (Extreme Dryness): स्किन कागज़ की तरह पतली और रूखी हो जाती है और बाल अपनी प्राकृतिक चमक खोकर बीच से टूटने लगते हैं।
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द: सुबह उठने पर गर्दन और कंधों में जकड़न रहना और पिंडलियों में बिना कसरत के भी दर्द रहना।
  • हॉर्मोनल असंतुलन और कमज़ोरी: महिलाओं में इसके कारण अचानक मासिक धर्म की समस्याएं शुरू हो जाती हैं और पीसीओडी (PCOD) जैसे लक्षण उभरने लगते हैं।

थकान और हेयर फॉल से बचने के चक्कर में लोग क्या गलतियाँ करते हैं?

जब बाल लगातार टूटते हैं और शरीर सुस्त रहता है, तो लोग अक्सर घबराहट में ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो थायराइड ग्रंथि को हमेशा के लिए अपाहिज कर देते हैं:

  • महंगे हेयर प्रोडक्ट्स और विटामिन्स की लत: असली कारण जाने बिना बायोटिन (Biotin) या महंगे लोशन लगाना, जो हॉर्मोन्स को ठीक किए बिना केवल बाहरी दिखावा करते हैं।
  • सुस्ती भगाने के लिए कैफीन का सहारा: थकावट दूर करने के लिए दिन भर डार्क कॉफी पीना। यह नर्वस सिस्टम को ओवर-स्टिमुलेट कर देता है और एड्रिनल ग्लैंड्स (Adrenal glands) को थका देता है।
  • हॉर्मोनल पिल्स पर पूरी तरह निर्भरता: केवल सिंथेटिक हॉर्मोन (Thyroxine) की गोलियाँ खाते रहना और अपनी खराब जीवनशैली को न सुधारना, जिससे शरीर खुद हॉर्मोन बनाना हमेशा के लिए भूल जाता है।

आयुर्वेद 'थायराइड असंतुलन' और इस कमज़ोरी को कैसे समझता है?

आधुनिक चिकित्सा जिसे केवल आयोडीन की कमी और एंडोक्राइन एरर मानती है, आयुर्वेद उसे शरीर में 'अग्निमांद्य', 'आम' के भारी जमाव और दोषों के आवरण के रूप में गहराई से समझता है:

  • धात्वाग्नि का बुझ जाना (Metabolic Fire Failure): आयुर्वेद के अनुसार थायराइड की समस्या असल में 'धात्वाग्नि' (Tissues' metabolism) के कमज़ोर होने का नतीजा है। जब यह अग्नि बुझती है, तो शरीर के हर सेल में सुस्ती छा जाती है।
  • कफ और वात का आवरण: जब शरीर में कफ बढ़ता है, तो वह गले के 'विशुद्ध चक्र' (थायराइड का स्थान) को ब्लॉक कर देता है। इसके साथ बढ़ा हुआ वात दोष बालों और त्वचा की नमी को सुखाकर उन्हें झड़ा देता है।
  • रसायन और ओजस का क्षय: जब लगातार कुर्सी पर बैठे रहने और खराब डाइट के कारण शरीर को सही पोषण (रस धातु) नहीं मिलता, तो इम्यूनिटी (ओजस) गिर जाती है, जिससे ऑटोइम्यून जैसी  बीमारियाँ ट्रिगर हो जाती हैं।

थायराइड को संतुलित करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अपनी ग्रंथि को दोबारा एक्टिव करने के लिए आपको अपनी डाइट में 'कफ-नाशक' और मेटाबॉलिज़्म तेज़ करने वाला आयुर्वेदिक डाइट प्लान शामिल करना होगा:

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - ग्रंथि को सुस्त करने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, ओट्स, ज्वार, दलिया, छिलके वाली मूंग दाल। मैदा, वाइट ब्रेड, बासी रोटियाँ, पैकेटबंद नूडल्स।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (नसों की ताक़त के लिए), नारियल का तेल। रिफाइंड ऑयल, बहुत ज़्यादा बाज़ार का ट्रांस फैट, भारी क्रीम।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, परवल (अदरक के तड़के के साथ पकी हुई)। कच्चा पत्ता गोभी, ब्रोकली, सोयाबीन (Goitrogens), बहुत ज़्यादा कच्चा सलाद।
फल (Fruits) पपीता, उबला हुआ सेब, मीठे अनार। बिना मौसम के कोल्ड स्टोरेज वाले ठंडे फल।
पेय पदार्थ (Beverages) धनिए का पानी (थायराइड के लिए जादुई), गुनगुना पानी। बर्फ का ठंडा पानी, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, अत्यधिक डार्क कॉफी।

थायराइड ग्रंथि को ताकत देने के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के हॉर्मोन्स को बैलेंस करते हैं और बालों की जड़ों को दोबारा ज़िंदा करते हैं:

  • कचनार (Kanchnar): यह आयुर्वेद में थायराइड और किसी भी प्रकार की ग्रंथि की सूजन (Glandular swelling) को दूर करने की सबसे प्रमुख औषधि है। यह ग्रंथि के ब्लॉकेज को प्राकृतिक रूप से खोलती है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): भारी मानसिक तनाव के कारण जब कॉर्टिसोल बढ़ता है और थायराइड सुस्त होता है, तो अश्वगंधा नसों की कमज़ोरी को दूर करके शरीर को फौलादी ऊर्जा देता है।
  • त्रिफला (Triphala): यह केवल पेट साफ नहीं करता, बल्कि शरीर के टॉक्सिन्स (आम) को बाहर निकालकर मेटाबॉलिज़्म को रीबूट करता है, जिससे विटामिन्स का एब्जॉर्प्शन सुधरता है।
  • भृंगराज (Bhringraj): जब खून में गर्मी (पित्त) और कमज़ोरी के कारण हेयर फॉल होता है, तो भृंगराज बालों की जड़ों (Follicles) को सीधा पोषण देकर उन्हें झड़ने से रोकता है।

मेटाबॉलिज़्म सुधारने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब कफ और टॉक्सिन्स शरीर में बहुत गहराई तक जम चुके हों, तो पंचकर्म की ये क्लासिकल थेरेपीज़ शरीर को तुरंत रीबूट कर देती हैं:

  • उद्वर्तन थेरेपी: जब हाइपोथायरायडिज़्म के कारण भारी मोटापा हावी हो, तो सूखे हर्बल पाउडर (त्रिफला आदि) से शरीर पर उल्टी दिशा में मालिश की जाती है। यह ज़िद्दी फैट और कफ को सीधे पिघला देती है।
  • नस्य थेरेपी: नाक को सिर और गले का द्वार माना गया है। नासिका में औषधीय तेल की बूंदें डालने से यह सीधे गले की थायराइड ग्रंथि को स्टिमुलेट करता है और बालों का गिरना रोकता है।
  • विरेचन थेरेपी: शरीर से दूषित पित्त और भारी टॉक्सिन्स को मल के रास्ते बाहर निकालने के लिए लिवर की यह डीप-क्लीनिंग की जाती है, जो मेटाबॉलिक सिंड्रोम को जड़ से खत्म करती है।
  • शिरोधारा थेरेपी: हॉर्मोनल इंबैलेंस और अकारण एंग्जायटी को शांत करने के लिए सिर पर गुनगुने तेल की धार गिराई जाती है, जो ब्रेन फॉग को तुरंत दूर करती है।

ग्रंथि के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

सालों से सुस्त पड़ी थायराइड ग्रंथि और डैमेज हुए मेटाबॉलिज़्म को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और सही डाइट से आपका कफ और 'आम' कम होगा। दिन भर रहने वाली सुस्ती गायब होगी और बालों का गिरना काफी हद तक कंट्रोल होने लगेगा।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से आपका मेटाबॉलिज़्म (धात्वाग्नि) सुधरेगा। आपका भारी वज़न धीरे-धीरे कम होगा और त्वचा की चमक लौटने लगेगी।
  • 5-6 महीने: आपका एंडोक्राइन सिस्टम पूरी तरह से फौलादी हो जाएगा। आप हॉर्मोन्स के प्राकृतिक संतुलन के साथ एक ऊर्जावान और सुरक्षित जीवन जीना शुरू कर देंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

थायराइड और बालों के झड़ने के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य बाहरी रूप से सिंथेटिक थायरॉक्सिन (Thyroxine) हॉर्मोन की गोलियाँ देना। धात्वाग्नि को जगाना, कफ का आवरण हटाना और ग्रंथि को खुद हॉर्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल एक ग्रंथि का फेलियर (Failure) और ताज़िंदगी चलने वाली बीमारी मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए कफ दोष और 'आम' के भारी जमाव का एक रिवर्सिबल (Reversible) सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल डाइट पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता, केवल खाली पेट गोली खाने की आम सलाह दी जाती है। डाइट में गोभी-सोयाबीन छोड़ने, थायराइड के लिए धनिए का पानी पीने और अग्नि सुधारने पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर गोली का डोज़ समय के साथ बढ़ता जाता है, और बाल गिरना व कमज़ोरी अक्सर पूरी तरह ठीक नहीं होती। शरीर का मेटाबॉलिज़्म अंदर से इतना मज़बूत हो जाता है कि हॉर्मोन्स प्राकृतिक रूप से संतुलित होना सीख जाते हैं।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालाँकि आयुर्वेद आपकी ग्रंथि को मज़बूत करके आपको पूरी तरह रिपेयर कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने शरीर में ये बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • गले में भारी सूजन (Goiter): अगर गले के सामने वाले हिस्से में अचानक बहुत बड़ी और कड़क गांठ (Swelling) उभर आए, जिससे सांस लेने या खाना निगलने में तकलीफ हो।
  • दिल की धड़कन का बेकाबू होना (Palpitations): बैठे-बैठे अचानक दिल की धड़कन का इतनी तेज़ हो जाना कि घबराहट के मारे पसीना आ जाए (यह हाइपरथायरायडिज़्म का अटैक हो सकता है)।
  • अत्यधिक डिप्रेशन और याददाश्त जाना: अगर थायराइड के कारण डिप्रेशन हावी हो जाए और रोज़मर्रा के छोटे-छोटे काम करना भी असंभव लगने लगे।
  • आँखों का बाहर की तरफ निकलना (Bulging Eyes): अगर आपकी आँखें लाल रहने लगें और वे अपनी जगह से बाहर की ओर उभरी हुई (Exophthalmos) दिखने लगें।

निष्कर्ष

अपने शरीर के मेटाबॉलिज़्म को एक बड़ी फैक्ट्री की तरह समझें, जिसका मुख्य स्विच (Main Switch) आपके गले में मौजूद थायराइड ग्रंथि है। जब गलत खानपान, स्ट्रेस और बिगड़े हुए लाइफस्टाइल के कारण यह ग्रंथि सुस्त पड़ जाती है, तो पूरी फैक्ट्री में ऊर्जा का उत्पादन रुक जाता है। सुबह बिस्तर से उठने की हिम्मत न होना, कंघी करते ही बालों का गुच्छों में गिरना और बिना कुछ खाए वज़न का लगातार बढ़ना, ये कोई आम थकावट या मौसम का असर नहीं है; यह एक अलार्म है कि आपका 'कफ दोष' बेकाबू हो चुका है और आपकी धात्वाग्नि पूरी तरह बुझ चुकी है। केवल विज्ञापन देखकर महंगे हेयर शैम्पू खरीदकर या ताज़िंदगी सिंथेटिक हॉर्मोन्स की गोलियाँ खाकर इस मेटाबॉलिक क्रैश को टालने की कोशिश न करें, क्योंकि यह आपकी ग्रंथि की प्राकृतिक क्षमता को हमेशा के लिए अपाहिज कर रहा है।

इस थकावट और हेयर फॉल के ज़हरीले चक्रव्यूह से बाहर निकलें। बाहर के जंक फूड, पत्ता गोभी और सोयाबीन को छोड़कर हमेशा हल्का, सुपाच्य और 'अग्नि' को बढ़ाने वाला भोजन खाएं। अपनी डाइट में धनिए का पानी, पुराना चावल और कद्दू के बीज शामिल करें। कचनार, अश्वगंधा और भृंगराज जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की नस्य व उद्वर्तन थेरेपी से अपने सुस्त मेटाबॉलिज़्म को प्राकृतिक गर्मी देकर नया जीवन दें। बालों के झड़ने और थकावट को अपनी किस्मत न बनने दें, आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बिल्कुल। जब थायराइड हॉर्मोन्स का स्तर गिरता है, तो बाल रेस्टिंग फेज़ में चले जाते हैं। लेकिन जैसे ही आयुर्वेद की मदद से आपकी ग्रंथि दोबारा एक्टिव होती है और धात्वाग्नि मज़बूत होती है, बालों की जड़ों को पोषण मिलने लगता है और वे दोबारा उग आते हैं।

सोया प्रोडक्ट्स में गोइट्रोजेन्स (Goitrogens) नामक प्राकृतिक रसायन होते हैं। ये रसायन शरीर में आयोडीन (Iodine) को सोखने की प्रक्रिया में बाधा डालते हैं। आयोडीन के बिना थायराइड ग्रंथि हॉर्मोन नहीं बना सकती, जिससे ग्रंथि और भी ज़्यादा सुस्त पड़ जाती है।

शत-प्रतिशत। आयुर्वेद के अनुसार साबुत धनिया (Coriander seeds) मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करता है और गले के हिस्से में जमे हुए कफ व टॉक्सिन्स को पिघलाता है। रात भर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट इस पानी को उबालकर पीना थायराइड ग्रंथि के लिए एक जादुई टॉनिक है।

सुबह उठते ही सबसे पहले हल्का गुनगुना पानी पीना चाहिए जिसमें थोड़ा सा नींबू या धनिया उबला हुआ हो। यह जठराग्नि को किक-स्टार्ट करता है। चाय या कॉफी (Caffeine) से दिन की शुरुआत करना एड्रिनल ग्लैंड्स को थका देता है और थायराइड को नुकसान पहुँचाता है।

हाँ। स्ट्रेस के कारण शरीर में कॉर्टिसोल (Cortisol) हॉर्मोन बढ़ जाता है। कॉर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर सीधे तौर पर थायराइड ग्रंथि को हॉर्मोन (T3 और T4) बनाने से रोकता है। यही कारण है कि आयुर्वेद में अश्वगंधा और शिरोधारा थेरेपी को थायराइड के इलाज में प्रमुख माना गया है।

इन सब्ज़ियों में भी गोइट्रोजेन्स होते हैं। हालांकि, कच्चा खाने पर ये सबसे ज़्यादा नुकसान करती हैं (जैसे सलाद में)। लेकिन इन्हें बहुत अच्छी तरह उबालने या पकाने से गोइट्रोजेन्स का प्रभाव काफी हद तक नष्ट हो जाता है। फिर भी, इन्हें बहुत सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए।

बहुत आम है। थायराइड हॉर्मोन्स महिलाओं के रिप्रोडक्टिव सिस्टम (Reproductive system) से सीधे जुड़े होते हैं। हाइपोथायरायडिज़्म के कारण अक्सर पीरियड्स बहुत भारी (Heavy flow) आते हैं या उनका साइकिल बहुत लंबा हो जाता है, जो पीसीओडी (PCOD) जैसी समस्याओं को जन्म देता है।

बेहद ज़रूरी है। एक्सरसाइज़ शरीर के तापमान को बढ़ाती है, ब्लड सर्कुलेशन को तेज़ करती है और धात्वाग्नि (Metabolism) को जगाती है। सूर्य नमस्कार और सर्वांगासन जैसे योगासन थायराइड ग्रंथि पर सीधा और सकारात्मक दबाव डालते हैं।

हाँ, इसे पोस्टपार्टम थायरोडिटिस (Postpartum Thyroiditis) कहा जाता है। डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में हॉर्मोन्स और इम्युनिटी में भारी बदलाव आते हैं, जिससे थायराइड ग्रंथि में अस्थायी सूजन आ जाती है। अक्सर यह सही डाइट और आराम से अपने आप ठीक हो जाता है।

अगर आपकी थायराइड ग्रंथि पूरी तरह नष्ट (Dead) नहीं हुई है और समस्या केवल उसके सुस्त होने (Sluggishness) की है, तो आयुर्वेद (कचनार, पंचकर्म और सही डाइट) से ग्रंथि को दोबारा एक्टिव किया जा सकता है। समय के साथ, डॉक्टर की देखरेख में धीरे-धीरे गोली की डोज़ कम की जा सकती है और कई मामलों में यह पूरी तरह छूट भी सकती है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us