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बालों में तेल + Shampoo बदला, Supplement लिया — फिर भी झड़ रहे हैं?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

हम सभी ने कभी न कभी बाथरूम की नाली या कंघी में उलझे हुए बालों के गुच्छों को देखकर घबराहट महसूस की होगी। इस डर से हम तुरंत सबसे महंगा एंटी-हेयरफॉल शैम्पू खरीदते हैं, नए-नए विज्ञापनों वाले तेलों की मालिश करते हैं और बायोटिन (Biotin) के डिब्बे खाली कर देते हैं। लेकिन कुछ हफ़्तों बाद जब हम आईने में देखते हैं, तो स्कैल्प और भी ज़्यादा खाली नज़र आती है।

यह कोई मामूली कॉस्मेटिक समस्या नहीं है जिसे केवल बाहर से लोशन या शैम्पू बदलकर सुलझाया जा सके। जब आप बाहर से जड़ों को पोषण देने की कोशिश कर रहे होते हैं, तब आपका शरीर अंदर ही अंदर एक खामोश मेटाबॉलिक और हॉर्मोनल क्रैश से जूझ रहा होता है। जब तक आप अपने शरीर के इस अलार्म को नहीं समझेंगे, महंगे तेल और सप्लीमेंट्स केवल एक धोखा साबित होंगे।

बाल झड़ने की समस्या बाहरी है या अंदरूनी?

जब आप केवल स्कैल्प पर तेल या शैम्पू रगड़ रहे होते हैं, तो आप यह भूल जाते हैं कि बाल शरीर के अंदरूनी स्वास्थ्य का एक आईना हैं। बालों के न रुकने के पीछे ये भयंकर अंदरूनी कारण ज़िम्मेदार होते हैं:

  • मेटाबॉलिज़्म और गट हेल्थ का क्रैश होना: जब आपका पाचन तंत्र कमज़ोर होता है, तो आप कितने भी महँगे सप्लीमेंट्स खा लें, शरीर उन्हें सोख नहीं पाता। पोषण खून में जाने के बजाय 'आम' (Toxins) में बदल जाता है, जिससे बालों की जड़ें भूखी मर जाती हैं।
  • हॉर्मोनल असंतुलन: महिलाओं में थायराइड का बिगड़ना या पीसीओडी (PCOD) जैसी समस्याएं सीधा हेयर फॉलिकल्स (Hair follicles) को सिकोड़ देती हैं। पुरुषों में DHT हॉर्मोन का बढ़ना जड़ों को कमज़ोर कर देता है।
  • स्ट्रेस और कॉर्टिसोल का प्रहार: ऑफिस या घर का भारी मानसिक तनाव शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ा देता है। यह स्ट्रेस हॉर्मोन बालों को उनके ग्रोथ फेज़ से निकालकर सीधे झड़ने वाले फेज़ (Telogen) में धकेल देता है।

बालों का यह झड़ना किन प्रकारों में सामने आ सकता है?

बाल झड़ने का पैटर्न हर इंसान में एक जैसा नहीं होता। शरीर के अंदरूनी दोषों और ट्रिगर्स के अनुसार, यह समस्या इन खतरनाक रूपों में आपको परेशान कर सकती है:

  • टेलोजेन एफ्लुवियम (Telogen Effluvium): यह अक्सर किसी भारी बीमारी (जैसे टाइफाइड या डेंगू), भारी स्ट्रेस या डिलीवरी के बाद होता है। इसमें अचानक से बहुत भारी मात्रा में (मुट्ठी भर) बाल पूरे स्कैल्प से गिरने लगते हैं।
  • एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया (Androgenetic Alopecia): यह महिलाओं और पुरुषों में पैटर्न बाल्डनेस (Pattern baldness) है। इसमें हॉर्मोनल असंतुलन के कारण पुरुषों के बाल आगे से उड़ने लगते हैं और महिलाओं की माँग (Parting) चौड़ी हो जाती है।
  • एलोपेसिया एरीटा (Alopecia Areata): यह एक ऑटोइम्यून स्थिति है जहाँ आपका अपना ही इम्यून सिस्टम बालों की जड़ों पर हमला कर देता है, जिससे स्कैल्प पर गोल-गोल चकत्तों (Patches) में बाल पूरी तरह उड़ जाते हैं।

किन खामोश संकेतों से पहचानें कि हेयर फॉल की जड़ अंदरूनी है?

बाल रातों-रात गुच्छों में नहीं गिरते। शरीर बहुत पहले से कई खामोश अलार्म बजाने लगता है। यदि आप इन शुरुआती संकेतों को पहचान लें, तो गंजेपन से बचा जा सकता है:

  • जड़ों में दर्द (Trichodynia): बालों की जड़ों को छूने पर या कंघी करते समय स्कैल्प में दर्द या खिंचाव महसूस होना, जो जड़ों के अत्यधिक कमज़ोर होने का इशारा है।
  • नाखूनों का टूटना और पीला पड़ना: बाल और नाखून एक ही प्रोटीन (Keratin) से बनते हैं। अगर आपके नाखून बहुत जल्दी टूट रहे हैं या कमज़ोर हैं, तो यह सीधे तौर पर कुपोषण का संकेत है।
  • थकावट और वज़न का बिगड़ना: बालों के झड़ने के साथ-साथ अगर आपको दिन भर क्रोनिक फटीग महसूस होता है और अचानक वज़न का बढ़ना शुरू हो गया है, तो यह सीधा थायराइड या हॉर्मोन्स का अलार्म है।
  • अत्यधिक डैंड्रफ और इन्फेक्शन: स्कैल्प पर बड़े-बड़े पपड़ीदार डैंड्रफ का जमना या खुजली वाले इन्फेक्शन होना, जो फंगस और दूषित खून का संकेत है।

बाल बचाने के चक्कर में लोग क्या गलतियाँ करते हैं?

बालों को बचाने की बेताबी में लोग अक्सर इंटरनेट पर देखकर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो स्कैल्प को हमेशा के लिए बंजर बना देते हैं:

  • मिनॉक्सिडिल (Minoxidil) का अंधाधुंध इस्तेमाल: डॉक्टर की सलाह के बिना केमिकल लोशन लगाना। यह कुछ समय के लिए बाल उगाता ज़रूर है, लेकिन जैसे ही आप इसे छोड़ते हैं, बाल पहले से दोगुनी तेज़ी से झड़ जाते हैं।
  • बार-बार शैम्पू और सप्लीमेंट्स बदलना: अपनी खराब जीवनशैली को सुधारे बिना हर महीने नए प्रोडक्ट आज़माना। इससे स्कैल्प का प्राकृतिक पीएच (pH) बिगड़ जाता है और जड़ें डैमेज हो जाती हैं।
  • हीट और केमिकल ट्रीटमेंट्स: झड़ते हुए बालों को अच्छा दिखाने के लिए स्ट्रेटनिंग (Straightening), केराटिन या कलर करवाना, जो बालों के बचे-खुचे बॉन्ड्स (Bonds) को भी तोड़ देता है।

आयुर्वेद 'बालों के झड़ने' (Khalitya) और अंदरूनी डैमेज को कैसे समझता है?

आधुनिक चिकित्सा जिसे केवल विटामिन्स की कमी या जेनेटिक्स का खेल मानती है, आयुर्वेद उसे शरीर में 'अस्थि धातु' के क्षय, भड़के हुए 'पित्त' और कमज़ोर जठराग्नि के रूप में गहराई से समझता है:

  • पित्त दोष का प्रकोप (Pitta Imbalance): आयुर्वेद के अनुसार बालों का गिरना (खालित्य) मुख्य रूप से पित्त (शरीर की गर्मी) के भड़कने से होता है। जब जंक फूड या स्ट्रेस से खून में पित्त बढ़ता है, तो यह स्कैल्प की जड़ों (Follicles) को अंदर ही अंदर जला देता है।
  • अस्थि धातु की कमज़ोरी: बाल 'अस्थि धातु' (हड्डियों) का मल (By-product) माने जाते हैं। जब आपका पाचन कमज़ोर होता है, तो अस्थि धातु को पोषण नहीं मिलता, जिससे हड्डियाँ कमज़ोर होती हैं और बाल झड़ने लगते हैं।
  • वात का आवरण: जब लगातार कुर्सी पर बैठे रहने और नींद पूरी न होना आपकी आदत बन जाती है, तो वात दोष भड़क कर स्कैल्प की नमी को सुखा देता है, जिससे बाल रूखे होकर बीच से टूटने लगते हैं।

बालों को झड़ने से रोकने और जड़ें मज़बूत करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

अपने बालों को दोबारा उगाने के लिए आपको अपनी डाइट से 'पित्त' और 'आम' बढ़ाने वाले पदार्थों को तुरंत हटाना होगा। यह डाइट चार्ट आपके फॉलिकल्स के लिए प्राकृतिक खाद का काम करेगा:

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - बालों को पोषण देने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - पित्त और हेयर फॉल बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, ओट्स, जौ, रागी (कैल्शियम का खजाना), मूंग दाल। मैदा, वाइट ब्रेड, बासी रोटियां, अत्यधिक पैकेटबंद नूडल्स।
पेय पदार्थ (Beverages) नारियल पानी, आँवला और करी पत्ते का रस, ताज़ा छाछ। अत्यधिक डार्क कॉफी, शराब, खट्टे डिब्बाबंद जूस, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स।
वसा और बीज (Fats & Seeds) देसी गाय का शुद्ध घी, सफेद तिल (Sesame), कद्दू के बीज, बादाम। रिफाइंड ऑयल, बहुत ज़्यादा डीप-फ्राइड चीज़ें, बाज़ार के ट्रांस फैट्स।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, गाजर, पालक (पका हुआ), कद्दू, सहजन (Drumsticks)। बहुत ज़्यादा तीखी लाल मिर्च, खट्टे टमाटर, बैंगन।
फल (Fruits) आँवला, मीठे अनार, उबला हुआ सेब, पपीता, मुनक्का। बहुत ज़्यादा खट्टे फल, बिना मौसम के डिब्बाबंद फल।

फॉलिकल्स को ज़िंदा करने वाली चमत्कारी जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य 'केश्य' (बालों के लिए उत्तम) रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के बालों की जड़ों को अंदर से ताकत देते हैं और हॉर्मोन्स को बैलेंस करते हैं:

  • भृंगराज (Bhringraj): आयुर्वेद में इसे 'केशराज' (बालों का राजा) कहा जाता है। यह लिवर को डिटॉक्स करता है और खून को साफ़ करता है, जिससे बालों का समय से पहले सफेद होना और झड़ना जड़ से रुक जाता है।
  • आँवला (Amla): यह विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स का पावरहाउस है। यह स्कैल्प के ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है और भड़के हुए पित्त को तुरंत शांत करता है।
  • शतावरी: जब हेयर फॉल का कारण पीसीओडी या मेनोपॉज़ (Menopause) जैसे हॉर्मोनल इंबैलेंस हों, तो शतावरी एक फाइटोएस्ट्रोजन के रूप में काम करके हॉर्मोन्स को बैलेंस करती है और बालों की ग्रोथ को वापस लाती है।
  • अश्वगंधा: भारी स्ट्रेस और कॉर्टिसोल के कारण झड़ते बालों के लिए यह जादुई है। यह नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करता है और हेयर साइकल को दोबारा ग्रोथ फेज़ (Anagen) में भेजता है।

बालों का गिरना रोकने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब पित्त और स्ट्रेस शरीर में बहुत गहराई तक जम चुका हो और केवल गोलियों से हेयर फॉल न रुक रहा हो, तो पंचकर्म की ये बाहरी थेरेपीज़ स्कैल्प को तुरंत डिकंप्रेस कर देती हैं:

  • शिरोधारा थेरेपी: बालों के झड़ने का सबसे बड़ा कारण स्ट्रेस है। सिर पर औषधीय तेल की लगातार धार गिराने से नर्वस सिस्टम तुरंत शांत होता है, ब्रेन फॉग दूर होता है और बालों की जड़ों को गज़ब का पोषण मिलता है।
  • नस्य थेरेपी: आयुर्वेद में नाक को सिर का द्वार माना गया है। नाक में अणु तेल या षडबिंदु तेल की बूंदें डालने से यह सीधे मस्तिष्क के केंद्रों और बालों की जड़ों तक पहुँचकर डैमेज को रिपेयर करता है।
  • शिरोभ्यंग (Head Massage): स्कैल्प की सूखी और कमज़ोर नसों में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने के लिए भृंगराज या नीलीभृंगादि तेल से विशेष पॉइंट्स (मर्म) पर मालिश की जाती है।
  • विरेचन थेरेपी: शरीर से दूषित पित्त और भारी टॉक्सिन्स को मल के रास्ते बाहर निकालने के लिए लिवर की यह डीप-क्लीनिंग की जाती है, जो बालों के लिए एक परमानेंट फिक्स (Fix) साबित होती है।

फॉलिकल्स के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

सालों के डैमेज और केमिकल शैम्पू से खराब हुई स्कैल्प को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और डाइट से आपका भड़का हुआ पित्त शांत होगा। बाथरूम और तकिए पर गिरने वाले बालों की संख्या (Hair fall) में गज़ब की कमी नज़र आएगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म (नस्य/शिरोधारा) और रसायनों के प्रभाव से स्कैल्प का ब्लड सर्कुलेशन बेहतरीन होगा। जहाँ बाल पतले हो गए थे, वहां छोटे-छोटे नए बाल (Baby hairs) आने शुरू होंगे।
  • 5-6 महीने: आपकी अस्थि धातु और हॉर्मोनल सिस्टम पूरी तरह से पोषित हो जाएगा। आप बालों की मोटाई (Volume) और चमक में एक प्राकृतिक, सुरक्षित और परमानेंट बदलाव देखेंगे।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

हेयर फॉल और गंजेपन के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य ब्लड फ्लो बढ़ाने के लिए स्कैल्प पर मिनॉक्सिडिल (Minoxidil) लगाना और DHT ब्लॉकर्स देना। पित्त को शांत करना, जठराग्नि को मज़बूत करना और 'नस्य' व 'शिरोधारा' द्वारा प्राकृतिक रूप से जड़ों को पोषण देना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल जेनेटिक्स, विटामिन्स की कमी या बालों के रोम की एक बाहरी समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, दूषित रस व अस्थि धातु और भड़के हुए 'पित्त' का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल डाइट पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता, केवल बायोटिन (Biotin) सप्लीमेंट्स खाने की आम सलाह दी जाती है। डाइट में 'पित्त-नाशक' भोजन, शुद्ध गाय का घी, और स्ट्रेस कम करने के लिए सात्विक दिनचर्या पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर दवा या लोशन छोड़ते ही उगे हुए बाल फिर से भयंकर रूप में गिरने लगते हैं (Rebound Hair Fall)। शरीर का मेटाबॉलिज़्म और हॉर्मोन्स अंदर से इतने मज़बूत हो जाते हैं कि बाल प्राकृतिक रूप से जड़ों से उगना और टिकना सीख जाते हैं।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालाँकि आयुर्वेद आपकी जड़ों को मज़बूत करके हेयर फॉल को पूरी तरह रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने बालों या स्कैल्प में ये बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • चकत्तों में बाल उड़ना (Patchy Hair Loss): अगर आपके सिर पर अचानक सिक्कों के आकार के गोल-गोल चकत्ते (Alopecia Areata) बन जाएं जहाँ बाल बिल्कुल न हों, जो एक सीवियर ऑटोइम्यून अटैक का संकेत है।
  • स्कैल्प पर दाने या पस (Pus) पड़ना: अगर बालों की जड़ों में बड़े-बड़े फोड़े हो जाएं जिनमें से पस या खून निकले (Folliculitis), जो बैक्टीरियल इन्फेक्शन का अलार्म है।
  • थकावट के साथ गुच्छों में बाल गिरना: अगर बाल झड़ने के साथ-साथ आपको अचानक से पीरियड डिस्टर्बेंस, चक्कर आना और वज़न तेज़ी से गिरने जैसी समस्या हो।
  • आइब्रो (Eyebrows) और शरीर के अन्य बाल भी गिरना: अगर सिर के अलावा आपकी भौंहें, पलकें या शरीर के अन्य हिस्सों के बाल भी अचानक गिरने लगें (यह एलोपेसिया यूनिवर्सलिस का संकेत हो सकता है)।

निष्कर्ष

अपने बालों को एक हरे-भरे पेड़ के पत्तों की तरह समझें। जब पेड़ की मिट्टी (आपका पेट) में ज़हर घुल जाए और उसकी जड़ों (Follicles) को पानी (पोषण) न मिले, तो पत्ते झड़ने ही लगेंगे। ऐसे में आप पत्तों पर बाहर से कितना भी हरा रंग (महंगे शैम्पू और केमिकल तेल) पोत लें, वे कभी वापस ज़िंदा नहीं होंगे। मुट्ठी भर बालों का रोज़ाना गिरना, स्कैल्प का दिखना और सप्लीमेंट्स खाने के बाद भी कोई रिज़ल्ट न मिलना, ये कोई आम जेनेटिक समस्या नहीं है; यह एक अलार्म है कि आपका 'पित्त दोष' बेकाबू हो चुका है और आपका खून बालों की जड़ों को अंदर ही अंदर जला रहा है। केवल विज्ञापन देखकर शैम्पू बदलने या केमिकल लोशन लगाकर इस धातु-क्षय को टालने की कोशिश न करें, क्योंकि यह आपके फॉलिकल्स को हमेशा के लिए डेड (Dead) कर रहा है।

इस हेयर फॉल और डिप्रेशन के ज़हरीले चक्रव्यूह से बाहर निकलें। बाहर के रूखे जंक फूड और हीट टूल्स को छोड़कर हमेशा ठंडा, सुपाच्य और 'पित्त-नाशक' भोजन खाएं। अपनी डाइट में आँवला, सफेद तिल और नारियल पानी शामिल करें। भृंगराज, शतावरी और अश्वगंधा जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की नस्य व शिरोधारा थेरेपी से अपने डैमेज्ड फॉलिकल्स को प्राकृतिक पोषण देकर नया जीवन दें। बालों के झड़ने को अपनी किस्मत न बनने दें, आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

बिल्कुल। अलग-अलग शैम्पू में अलग-अलग केमिकल्स (Sulphates/Parabens) और pH लेवल होते हैं। जब आप बार-बार शैम्पू बदलते हैं, तो स्कैल्प का प्राकृतिक ऑयल (Sebum) पूरी तरह खत्म हो जाता है। इससे जड़ें कमज़ोर हो जाती हैं और बाल रूखे होकर बीच से टूटने लगते हैं।

बायोटिन बालों के लिए ज़रूरी है, लेकिन बाल झड़ने का कारण हमेशा बायोटिन की कमी नहीं होता। अगर हेयर फॉल स्ट्रेस, थायराइड या कमज़ोर पाचन के कारण है, तो आप कितने भी बायोटिन के डिब्बे खा लें, बाल नहीं उगेंगे। पहले असली कारण (Root cause) को ठीक करना ज़रूरी है।

शत-प्रतिशत। मिनॉक्सिडिल ब्लड वेसल्स को फैलाकर बालों को ज़बरदस्ती न्यूट्रिशन देता है। यह हॉर्मोन्स या पाचन को ठीक नहीं करता। जैसे ही आप इसे लगाना बंद करते हैं, जो बाल इसके सहारे उगे थे, वे सब कुछ ही हफ़्तों में बहुत तेज़ी से वापस गिर जाते हैं।

यह आपकी स्कैल्प पर निर्भर करता है। अगर आपकी स्कैल्प बहुत ऑयली (कफ प्रधान) है या डैंड्रफ है, तो रोज़ाना तेल लगाने से रोमछिद्र (Pores) ब्लॉक हो जाएंगे और हेयर फॉल बढ़ जाएगा। बाल धोने से 1-2 घंटे पहले या एक रात पहले हल्का गुनगुना तेल लगाना सबसे सही तरीका है।

हाँ, स्ट्रेस के कारण होने वाले हेयर फॉल (Telogen Effluvium) को पूरी तरह रिवर्स किया जा सकता है। जैसे ही आप आयुर्वेद (शिरोधारा/अश्वगंधा) के माध्यम से कॉर्टिसोल लेवल को कम करते हैं और नर्वस सिस्टम को शांत करते हैं, बाल अपने प्राकृतिक ग्रोथ साइकिल में वापस आ जाते हैं।

सीधे तौर पर नहीं, लेकिन जब डैंड्रफ के कारण स्कैल्प में खुजली होती है और आप उसे खुजाते हैं, तो बालों की जड़ें डैमेज हो जाती हैं। इसके अलावा, फंगस के कारण होने वाली सूजन (Inflammation) हेयर फॉलिकल्स को कमज़ोर कर देती है, जिससे बाल टूटते हैं।

हाँ। गर्म पानी स्कैल्प के पोर्स (Pores) को खोल देता है और जड़ों से प्राकृतिक तेल को पूरी तरह खींच लेता है। इससे स्कैल्प बहुत ज़्यादा रूखी (Dry) हो जाती है और बाल कमज़ोर होकर टूटने लगते हैं। सिर धोने के लिए हमेशा सामान्य या हल्के गुनगुने पानी का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

बहुत आम है। पीसीओडी में महिलाओं के शरीर में मेल हॉर्मोन्स (Androgens) का स्तर बढ़ जाता है। यह हॉर्मोन बालों की जड़ों को सिकोड़ देता है (Miniaturization), जिससे बाल पतले होने लगते हैं और माँग चौड़ी हो जाती है। इसे रोकने के लिए हॉर्मोन्स को बैलेंस करना ज़रूरी है।

हाँ, इसे ट्रैक्शन एलोपेसिया (Traction Alopecia) कहते हैं। जब आप रोज़ाना पोनीटेल या जूड़ा बहुत कसकर बाँधते हैं, तो बालों की जड़ों पर लगातार खिंचाव (Tension) पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा करने से आगे की हेयरलाइन (Hairline) पीछे खिसकने लगती है और जड़ें हमेशा के लिए मर जाती हैं।

शत-प्रतिशत। आयुर्वेद के अनुसार बालों का सफेद होना (Palitya) खून में पित्त (गर्मी) बढ़ने के कारण होता है। आँवला सबसे बेहतरीन शीत-वीर्य (ठंडा) और पित्त-नाशक रसायन है। यह बालों को प्राकृतिक मेलेनिन (रंग) प्रदान करता है और असमय सफेद होने से जड़ से रोकता है।

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