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Period में इतना दर्द कि काम नहीं कर पातीं — ये Normal नहीं है

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 25 May, 2026
  • category-iconUpdated on 12 Jun, 2026
  • category-iconWomen's Health
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हर महीने उन खास दिनों का आना कई महिलाओं के लिए किसी खौफनाक बुरे सपने से कम नहीं होता। जब पेट के निचले हिस्से और कमर में ऐसा दर्द उठे कि आप बिस्तर से न उठ पाएं, उल्टियाँ आने लगें और आपको अपने ऑफिस या स्कूल से छुट्टी लेनी पड़ जाए, तो यह कोई सामान्य पीरियड पेन नहीं है। बचपन से ही लड़कियों को यह सिखाया जाता है कि यह तो हर औरत को सहना पड़ता है, लेकिन इस दर्द को बर्दाश्त करने की आदत आपके शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर रही है।

ज़्यादातर महिलाएं इस असहनीय दर्द को सामान्य मानकर हर महीने पेनकिलर्स (Painkillers) का सहारा लेती हैं और हॉट वॉटर बैग से सिकाई करती रहती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया इतनी दर्दनाक क्यों हो सकती है कि आपको अपाहिज कर दे? हकीकत यह है कि यह दर्द आपके गर्भाशय और हॉर्मोन्स का एक भयंकर अलार्म है। जब तक आप अपने शरीर के इस इमरजेंसी सिग्नल को नहीं समझेंगी, तब तक कोई भी पेनकिलर इस तबाही को हमेशा के लिए नहीं रोक सकता।

मासिक धर्म में यह भयंकर दर्द (Dysmenorrhea) आखिर क्यों होता है?

मासिक धर्म (Menstruation) शरीर की सफाई की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन जब यह प्रक्रिया एक दर्दनाक सज़ा बन जाए, तो इसके पीछे शरीर के अंदर चल रहे कई भयंकर बदलाव ज़िम्मेदार होते हैं:

  • प्रोस्टाग्लैंडिंस (Prostaglandins) का ओवर-प्रोडक्शन: पीरियड्स के दौरान गर्भाशय अपनी पुरानी परत (Endometrium) को बाहर निकालने के लिए सिकुड़ता (Contract) है। इसके लिए शरीर प्रोस्टाग्लैंडिंस नामक केमिकल बनाता है। जब यह केमिकल ज़रूरत से बहुत ज़्यादा बनता है, तो गर्भाशय में भयंकर ऐंठन (Severe Spasms) होती है।
  • ऑक्सीजन की कमी (Ischemia): जब गर्भाशय बहुत तेज़ी से और ज़ोर से सिकुड़ता है, तो उसके आसपास की रक्त वाहिकाएं (Blood vessels) दब जाती हैं। इससे गर्भाशय की मांसपेशियों तक कुछ पल के लिए ऑक्सीजन और खून नहीं पहुँच पाता, जिससे चुभने वाला भयंकर दर्द होता है।
  • अंदरूनी सूजन (Inflammation): हॉर्मोनल असंतुलन और शरीर में जमा टॉक्सिन्स के कारण पेल्विक (Pelvic) हिस्से में भयंकर सूजन आ जाती है, जो इस दर्द को कई गुना बढ़ा देती है।

मासिक धर्म का यह असहनीय दर्द किन प्रकारों का हो सकता है?

पीरियड्स का दर्द केवल एक तरह का नहीं होता। इसके पीछे छिपे कारणों के आधार पर मेडिकल साइंस इसे मुख्य रूप से दो भयंकर प्रकारों में बाँटता है:

  • प्राइमरी डिस्मेनोरिया (Primary Dysmenorrhea): यह वह दर्द है जो पीरियड्स शुरू होने के 1-2 दिन पहले शुरू होता है और 2-3 दिन तक रहता है। इसमें पेल्विक ऑर्गन में कोई बीमारी नहीं होती, बल्कि यह केवल केमिकल (Prostaglandins) के असंतुलन से होता है। यह अक्सर युवा लड़कियों में होता है।
  • सेकेंडरी डिस्मेनोरिया (Secondary Dysmenorrhea): यह बहुत खतरनाक है। इसमें दर्द किसी गंभीर बीमारी के कारण होता है, जैसे एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis), फाइब्रॉइड्स (Fibroids) या पीसीओडी (PCOD)। यह दर्द पीरियड्स से कई दिन पहले शुरू होकर पीरियड्स खत्म होने के बाद तक तड़पाता रहता है।

शरीर के किन खामोश संकेतों से पहचानें कि यह दर्द नॉर्मल नहीं है?

थोड़ा बहुत क्रैम्प (Cramp) होना सामान्य है, लेकिन जब दर्द आपकी दिनचर्या को रोक दे, तो शरीर कुछ ऐसे खामोश अलार्म बजाता है जिन्हें कभी भी इग्नोर नहीं करना चाहिए:

  • उल्टी और भयंकर मतली आना (Nausea & Vomiting): दर्द के साथ-साथ चक्कर आना, जी मिचलाना और उल्टियाँ होना यह बताता है कि शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिंस का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ चुका है।
  • पैरों और कमर तक दर्द का फैलना: जब पेट के निचले हिस्से का दर्द आपकी जांघों (Thighs) और कमर के निचले हिस्से (Lower back) तक बुरी तरह फैल जाए, जिससे आपके लिए सीधा खड़ा होना भी मुश्किल हो जाए।
  • बड़े खून के थक्के (Heavy Clots) आना: पीरियड्स के दौरान लगातार बड़े-बड़े और काले रंग के खून के थक्कों का आना, जो गर्भाशय में भारी आम और सूजन का स्पष्ट संकेत है।
  • रोज़मर्रा के काम ठप हो जाना: दर्द के कारण इतना क्रोनिक फटीग और ब्रेन फॉग होना कि आपको अपनी ऑफिस या स्कूल की डेस्क से उठकर बिस्तर पर लेटना ही पड़े।

दर्द से तुरंत राहत पाने के चक्कर में महिलाएं क्या गलतियाँ करती हैं?

हर महीने होने वाली इस सज़ा से बचने की बेताबी में महिलाएं अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेती हैं, जो उनके मासिक धर्म की समस्याएं और भी भयंकर बना देते हैं:

  • पेनकिलर्स (NSAIDs) की लत: दर्द को सुन्न करने के लिए अंधाधुंध ब्रूफेन या मेफ्टाल स्पाज़ (Meftal Spas) जैसी भारी गोलियाँ खाना। लंबे समय तक इनका सेवन सीधा आपके लिवर और किडनी को डैमेज करता है और शरीर को गोलियों का आदी बना देता है।
  • हॉट वॉटर बैग का अत्यधिक उपयोग: कुछ गर्माहट आराम देती है, लेकिन बहुत ज़्यादा गर्म सिकाई से वहां की नसें फैल जाती हैं (Vasodilation), जिससे ब्लीडिंग और सूजन और ज़्यादा भड़क सकती है।
  • दवाइयों से पीरियड्स को आगे बढ़ाना: किसी ट्रिप या पूजा के लिए हॉर्मोनल पिल्स (Hormonal Pills) खाकर पीरियड्स को ज़बरदस्ती टालना। यह शरीर के प्राकृतिक साइकिल को पूरी तरह क्रैश कर देता है।

आयुर्वेद असहनीय मासिक दर्द और हॉर्मोनल असंतुलन को कैसे समझता है?

आधुनिक चिकित्सा जिसे केवल यूटेराइन कॉन्ट्रैक्शन (Uterine contractions) मानती है, आयुर्वेद उसे शरीर में अपान वात के भयंकर अवरोध (Blockage), दूषित आर्तव धातु और कमज़ोर जठराग्नि के रूप में बहुत गहराई से समझता है:

  • अपान वात का भयंकर प्रकोप (Vata Imbalance): शरीर के निचले हिस्से (मल, मूत्र और मासिक धर्म) को बाहर निकालने की प्राकृतिक गति अपान वात की होती है। जब वात दोष भड़कता है और उसकी गति उल्टी या ब्लॉक हो जाती है, तो खून गर्भाशय में फँसने लगता है और भयंकर ऐंठन (Kashtartava) पैदा करता है।
  • जठराग्नि की कमज़ोरी और आम: जब आपका पाचन तंत्र कमज़ोर होता है, तो भोजन पेट में सड़कर आम (Toxins) बनाता है। यह चिपचिपा आम गर्भाशय की नलियों और मांसपेशियों में जाकर जम जाता है, जिससे वहां भयंकर सूजन आ जाती है।
  • पित्त और रक्त की विकृति: जब जीवनशैली के कारण शरीर में पित्त (गर्मी) बहुत अधिक बढ़ जाती है, तो खून दूषित हो जाता है, जिससे ब्लीडिंग बहुत भयंकर होती है और जलन के साथ दर्द होता है।

गर्भाशय को शांत और वात को संतुलित करने वाली आयुर्वेदिक डाइट

पीरियड्स से एक हफ़्ते पहले और उसके दौरान आपको अपनी डाइट से वात और सूजन बढ़ाने वाले पदार्थों को तुरंत हटाना होगा। यह डाइट चार्ट आपके गर्भाशय को रिलैक्स करने में मदद करेगा:

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - वात शांत करने और पोषण देने वाले) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - ऐंठन और गैस बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) पुराना चावल, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी, दलिया। मैदा, वाइट ब्रेड, बासी रोटियाँ, पैकेटबंद नूडल्स।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (गर्भाशय की नसों के लिए सबसे बड़ा अमृत), तिल का तेल। रिफाइंड ऑयल, बहुत ज़्यादा डीप-फ्राइड चीज़ें, बाज़ार के ट्रांस फैट्स।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, गाजर, परवल, अच्छी तरह पकी हुई पालक। कच्चा सलाद भारी मात्रा में, राजमा, छोले, भारी कटहल।
फल (Fruits) पपीता (पाचन के लिए बेहतरीन), उबला हुआ सेब, मीठे अनार। खट्टे फल (कच्चा नींबू, संतरा), बिना मौसम के कोल्ड स्टोरेज वाले फल।
पेय पदार्थ (Beverages) अजवाइन-जीरे का पानी, गुनगुना पानी, रात को हल्दी वाला दूध (घी के साथ)। अत्यधिक डार्क कॉफी, शराब, बर्फ का ठंडा पानी, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स।

हॉर्मोन्स सुधारने के लिए जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे कई मेध्य और आर्तव-पोषक रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के गर्भाशय को रिलैक्स करते हैं और ऐंठन को जड़ से खत्म करते हैं:

  • शतावरी: महिलाओं के लिए यह सबसे बड़ा आयुर्वेदिक वरदान है। यह एक बेहतरीन प्राकृतिक फाइटोएस्ट्रोजन (Phytoestrogen) है। यह शरीर की खुश्की को दूर करती है, गर्भाशय की मांसपेशियों को शांत करती है और ऐंठन को रोकती है।
  • अशोका (Ashoka): आयुर्वेद में अशोक का मतलब ही है जो शोक (दुख/दर्द) को दूर करे। अशोका की छाल गर्भाशय (Uterus) को भयंकर ताक़त देती है और हैवी ब्लीडिंग व दर्द को बहुत तेज़ी से कंट्रोल करती है।
  • गिलोय: शरीर से भयंकर टॉक्सिन्स (आम) को पिघलाने और पेल्विक सूजन (Inflammation) को खत्म करने के लिए गिलोय एक जादुई रसायन है। यह इम्यूनिटी को बढ़ाता है और फाइब्रॉइड्स जैसी समस्याओं को बढ़ने से रोकता है।
  • अश्वगंधा: भयंकर दर्द के कारण जब शरीर गहरे मानसिक तनाव और अकारण एंग्जायटी में होता है, तो अश्वगंधा नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करता है और स्ट्रेस हॉर्मोन (कॉर्टिसोल) को घटाता है।

पेल्विक सूजन और वात को दूर करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और आम पेल्विक रीजन में गहराई तक जम चुका हो और केवल गोलियों से आराम न मिल रहा हो, तो पंचकर्म की ये क्लासिकल थेरेपीज़ शरीर को तुरंत डिकंप्रेस कर देती हैं:

  • कटि बस्ती: कमर के निचले हिस्से (Lower back) पर उड़द की दाल का घेरा बनाकर उसमें गुनगुना औषधीय तेल भरा जाता है। यह सूखी और कड़क हो चुकी पेल्विक नसों को चिकनाई देकर गर्भाशय की ऐंठन को तुरंत शांत करता है।
  • मात्रा बस्ती (Matra Basti): भयंकर अपान वात को जड़ से उखाड़ने के लिए औषधीय तेल (जैसे धन्वंतरम तैलम) का एनीमा दिया जाता है। यह सीधा ओवरीज़ और गर्भाशय को पोषण देता है और दर्द को हमेशा के लिए गायब कर देता है।
  • अभ्यंग मालिश: वात दोष को शांत करने और शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सुधारने के लिए शुद्ध औषधीय तेलों (विशेषकर पेट और कमर के आस-पास) से मालिश की जाती है।
  • विरेचन थेरेपी: शरीर से दूषित पित्त और भयंकर टॉक्सिन्स को मल के रास्ते बाहर निकालने के लिए लिवर और आंतों की डीप-क्लीनिंग की जाती है, जो थायराइड और पीसीओडी के मामलों में गेम-चेंजर साबित होती है।

गर्भाशय के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?

सालों से डैमेज हो रहे गर्भाशय और भड़के हुए वात को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और वात-नाशक डाइट से आपका अपान वात शांत होगा। अगले पीरियड्स में दर्द की तीव्रता (Intensity) और थक्कों (Clots) का आना काफी हद तक कम हो जाएगा।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म (बस्ती) और रसायनों के प्रभाव से पेल्विक रीजन का ब्लड सर्कुलेशन बेहतरीन होगा। आपको उल्टियाँ या चक्कर आने बंद हो जाएंगे और आप पीरियड्स के दौरान भी काम कर पाएंगी।
  • 5-6 महीने: आपकी आर्तव धातु और गर्भाशय पूरी तरह से पोषित हो जाएंगे। आप बिना किसी पेनकिलर के, एक प्राकृतिक और दर्द-रहित मासिक धर्म का अनुभव करेंगी।

आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

इस असहनीय मासिक दर्द के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द के सिग्नल को रोकने के लिए भारी NSAIDs (पेनकिलर) या ओव्यूलेशन रोकने के लिए हॉर्मोनल पिल्स देना। अपान वात को अनुलोम करना, गर्भाशय को मज़बूत करना और 'बस्ती' द्वारा प्राकृतिक रूप से सूजन को खत्म करना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल गर्भाशय के कॉन्ट्रैक्शन (Contraction) और प्रोस्टाग्लैंडिंस की एक स्थानीय समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए अपान वात और दूषित 'आर्तव धातु' का एक संपूर्ण सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल डाइट पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता, केवल गर्म पानी की सिकाई की आम सलाह दी जाती है। डाइट में 'स्नेहन' (घी), वात-नाशक भोजन, और तनाव कम करने के लिए शिरोधारा थेरेपी पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।
लंबा असर पेनकिलर्स का असर 6-8 घंटे में खत्म होते ही दर्द फिर से भयंकर रूप में लौट आता है। शरीर का मेटाबॉलिज़्म और गर्भाशय अंदर से इतने मज़बूत हो जाते हैं कि दर्द प्राकृतिक रूप से हमेशा के लिए शांत हो जाता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालाँकि आयुर्वेद आपके अपान वात को संतुलित कर दर्द को पूरी तरह रोक सकता है, लेकिन अगर आपको अपने पीरियड्स या शरीर में ये भयंकर बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • दर्द के कारण बेहोश हो जाना (Fainting): अगर पेल्विक हिस्से में इतना भयंकर दर्द उठे कि आप उसे बर्दाश्त न कर पाएं और आपकी आँखों के आगे अंधेरा छा जाए या आप बेहोश हो जाएं।
  • असहनीय दर्द के साथ तेज़ बुख़ार (Fever): अगर पीरियड्स के दौरान कमर दर्द के साथ तेज़ बुख़ार आए और भयंकर बदबूदार डिस्चार्ज (Foul-smelling discharge) हो (यह पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिसीज़ - PID का बड़ा अलार्म है)।
  • अत्यधिक भारी ब्लीडिंग: अगर आपको हर 1-2 घंटे में अपना पैड या टैम्पोन (Tampon) बदलना पड़े और बड़े-बड़े थक्के (Clots) लगातार आते रहें।
  • अचानक दर्द का पैटर्न बदलना: अगर आपको पहले कभी दर्द नहीं होता था, लेकिन 25 या 30 की उम्र के बाद अचानक पीरियड्स में असहनीय दर्द शुरू हो गया हो (यह फाइब्रॉइड या एंडोमेट्रियोसिस का लक्षण है)।

निष्कर्ष

अपने शरीर के गर्भाशय को एक ऐसी नाज़ुक मशीन समझें जो हर महीने खुद को साफ करती है। जब इस मशीन में आम (गंदगी) फँस जाता है और इसका रास्ता (अपान वात) ब्लॉक हो जाता है, तो यह मशीन खुद को साफ करने के लिए भयंकर ज़ोर लगाती है, और इसी भयंकर ज़ोर की गूंज आपको असहनीय दर्द के रूप में महसूस होती है। उल्टियाँ आना, दर्द के मारे बिस्तर से न उठ पाना, और हर महीने पेनकिलर के डिब्बे खाली करना, ये कोई औरतों की नॉर्मल ज़िंदगी नहीं है; यह एक अलार्म है कि आपका आर्तव धातु पूरी तरह सूख चुका है और आपका शरीर अंदर से लड़ते-लड़ते थक गया है। केवल पेनकिलर्स खाकर या हॉर्मोनल पिल्स से पीरियड्स को रोककर इस भयंकर डैमेज को टालने की कोशिश न करें, क्योंकि यह आपके शरीर की फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) को हमेशा के लिए अपाहिज कर रहा है।

हर महीने की इस सज़ा और पेनकिलर्स के इस ज़हरीले चक्रव्यूह से बाहर निकलें। बाहर के रूखे जंक फूड को छोड़कर हमेशा गर्म, सुपाच्य और शुद्ध गाय के घी से बना भोजन खाएं। अपनी डाइट में अजवाइन का पानी, पपीता और दलिया शामिल करें। शतावरी, अशोका और गिलोय जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की कटि बस्ती व मात्रा बस्ती थेरेपी से अपनी सूखी हुई नसों को प्राकृतिक चिकनाई देकर नया जीवन दें। इस दर्दनाक माहवारी को अपनी किस्मत न बनने दें, आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

मासिक धर्म के पहले दिन पेट के निचले हिस्से में हल्का भारीपन या बहुत ही सामान्य क्रैम्प (Cramp) होना नॉर्मल है। लेकिन अगर दर्द इतना भयंकर हो कि आपको उल्टियाँ आएं, पेनकिलर खानी पड़े और आप अपना स्कूल/ऑफिस का काम न कर पाएं, तो यह मेडिकल भाषा में डिस्मेनोरिया है और यह बिल्कुल भी नॉर्मल नहीं है।

यह एक बहुत बड़ा भ्रम है। शुगर क्रेविंग्स (Sugar cravings) हॉर्मोनल बदलाव के कारण होती हैं, लेकिन अत्यधिक रिफाइंड चीनी या मीठा शरीर में सीधा इन्फ्लेमेशन (सूजन) बढ़ाता है। इससे दर्द और ऐंठन कम होने के बजाय और ज़्यादा भयंकर रूप ले सकती हैं। डार्क चॉकलेट (कम मात्रा में) थोड़ी फायदेमंद हो सकती है।

भयंकर दर्द (Severe Cramps) के दौरान भारी एक्सरसाइज़ या जिम नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे वात और बढ़ सकता है। लेकिन हल्की स्ट्रेचिंग, योग (जैसे बद्ध कोणासन या बालासन) और टहलने (Walking) से पेल्विक एरिया में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है, जो दर्द को बहुत प्राकृतिक रूप से कम करता है।

शत-प्रतिशत। कैफीन नसों को सिकोड़ देता है (Vasoconstrictor) और नर्वस सिस्टम को ओवर-स्टिमुलेट करता है। नसों के सिकुड़ने से गर्भाशय तक ऑक्सीजन का फ्लो और कम हो जाता है, जिससे क्रैम्प्स (ऐंठन) पहले से कई गुना भयंकर हो जाते हैं। पीरियड्स के दौरान कॉफी से बचना चाहिए।

हाँ, आयुर्वेद में अजवाइन को वात-अनुलोमक और भयंकर शूल-प्रशमन (दर्द निवारक) माना गया है। गुनगुने पानी में अजवाइन उबालकर पीने से पेट की फँसी हुई गैस निकलती है और गर्भाशय की ऐंठन (Spasms) तुरंत रिलैक्स (Relax) हो जाती है।

हाँ, ज़्यादातर पेनकिलर्स (NSAIDs) खून को थक्का (Clot) बनने से रोकते हैं और प्रोस्टाग्लैंडिंस को ब्लॉक करते हैं। इनका लगातार और भारी मात्रा में इस्तेमाल करने से हॉर्मोन्स का बैलेंस बिगड़ता है, जिससे कुछ महिलाओं को पीरियड्स के फ्लो में भारी कमी या अनियमितता का सामना करना पड़ता है।

कई महिलाओं में बच्चे को जन्म देने के बाद गर्भाशय का आकार बदल जाता है और प्रोस्टाग्लैंडिंस के रिसेप्टर्स कम हो जाते हैं, जिससे प्राइमरी डिस्मेनोरिया का दर्द कम हो सकता है। लेकिन अगर दर्द का कारण एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) या फाइब्रॉइड्स है, तो वह डिलीवरी के बाद भी खत्म नहीं होता।

बिल्कुल। भारत सरकार ने भी मेफ्टाल स्पाज़ (Mefenamic Acid) के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर चेतावनी जारी की है। इसके लंबे और अंधाधुंध इस्तेमाल से गैस्ट्रिक अल्सर, लिवर टॉक्सिसिटी, और किडनी डैमेज जैसे गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। इसे डॉक्टर की सख्त निगरानी के बिना नहीं लेना चाहिए।

आयुर्वेद के अनुसार, पीरियड्स के दौरान शरीर की ऊर्जा (अपान वात) नीचे की तरफ केंद्रित होती है। सिर पर ठंडा पानी डालने से शरीर का तापमान अचानक गिरता है और वात भड़क जाता है, जिससे गर्भाशय की नसों में सिकुड़न पैदा हो सकती है और दर्द बढ़ सकता है। इसलिए पहले 2-3 दिन भारी सिर धोने से बचने की सलाह दी जाती है।

हाँ, तिल का तेल आयुर्वेद में वात को जड़ से मिटाने के लिए सबसे उत्तम (Best) माना गया है। पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले और पीरियड्स के दौरान हल्के गुनगुने तिल के तेल से पेट के निचले हिस्से और कमर की मालिश (हल्के हाथों से) करने से नसों को गज़ब की गर्माहट और रिलैक्सेशन मिलता है, जिससे दर्द नहीं होता।

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