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X-Ray में Arthritis दिखा — क्या अब ज़िन्दगी भर दर्द रहेगा?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 28 May, 2026
  • category-iconUpdated on 13 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
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जब X-Ray रिपोर्ट में गठिया लिखा दिखाई देता है तो सबसे पहला ख्याल यही आता है कि अब क्या पूरी ज़िंदगी दर्द में गुज़रेगी? और बस यहीं से डर शुरू हो जाता है।

कई लोग उसी दिन से खुद को सीमित मान लेते हैं। सीढ़ियाँ चढ़ना, ज़मीन पर बैठना, सुबह उठना, हर चीज़ एक चुनौती लगने लगती है। जबकि सच यह है कि X-Ray सिर्फ जोड़ों की मौजूदा स्थिति दिखाता है, यह यह नहीं बताता कि आगे की ज़िंदगी कैसी होगी।

गठिया (Arthritis) आखिर होता क्या है?

जब हमारे जोड़ों (Joints) की ग्रीस सूखने लगे, उनमें सूजन आ जाए और हड्डियां घिसने लगें, तो उसे गठिया कहते हैं। धीरे-धीरे हमारे जोड़ों की लचक खत्म हो जाती है और रोज़ के छोटे-छोटे काम करना भी पहाड़ जैसा लगता है। इसकी शुरुआत बड़े चुपचाप होती है सुबह उठने पर हल्की जकड़न, चलते वक्त घुटने में चुभन या सीढ़ियां चढ़ते समय नसों में खिंचाव। हम इसे 'आम थकावट' या 'बढ़ती उम्र' मानकर टाल देते हैं।

लेकिन यही हमारी सबसे बड़ी गलती होती है। धीरे-धीरे यह दर्द बढ़ने लगता है। कुछ लोगों में यह सिर्फ घुटनों तक रहता है, तो कइयों के हाथ, कंधे, गर्दन और कमर भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। आप इसे नज़रअंदाज़ करने में जितनी देर करेंगे, इसके इलाज में उतना ही ज्यादा समय लगेगा।

गठिया के मुख्य प्रकार

गठिया कोई एक सिंगल बीमारी नहीं है। इसके कई रूप हैं और हर रूप में दर्द की वजह अलग होती है। सही इलाज के लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि आपको कौन सा गठिया हुआ है:

  • ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis): यह सबसे ज्यादा लोगों को होता है। इसमें हड्डियों के सिरों को बचाने वाली गद्दी (Cartilage) घिसने लगती है। यह आमतौर पर घुटनों, कूल्हों और हाथों में होता है और बढ़ती उम्र के साथ इसका खतरा बढ़ जाता है।
  • रूमेटाइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis): इसे आम भाषा में 'गठिया बाय' भी कहते हैं। इसमें आपके शरीर की ताक़त (इम्यूनिटी) खुद ही अपने जोड़ों पर हमला कर देती है। इसमें भयंकर सूजन, दर्द और जकड़न होती है और यह एक साथ कई जोड़ों को जकड़ लेता है।
  • गाउट (Gout / वात रक्त): जब शरीर में यूरिक एसिड बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो वो जोड़ों में छोटे-छोटे क्रिस्टल बनकर चुभने लगता है। इसका दर्द अक्सर पैर के अंगूठे से शुरू होता है और भयंकर सूजन लाता है।
  • सोरियाटिक गठिया (Psoriatic Arthritis): यह उन लोगों को अपना शिकार बनाता है जिन्हें सोरायसिस (स्किन की बीमारी) होती है। इसमें स्किन खराब होने के साथ-साथ जोड़ों में भी भारी दर्द और सूजन रहती है।
  • एंकाइलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस (Ankylosing Spondylitis): इसमें सीधा वार रीढ़ की हड्डी पर होता है। रीढ़ के जोड़ आपस में जुड़ने और अकड़ने लगते हैं। सही समय पर इलाज न हो, तो इंसान की कमर एकदम झुक जाती है।
  • जुवेनाइल गठिया (Juvenile Arthritis): यह बच्चों का गठिया है। कई बार बहुत छोटी उम्र में ही बच्चों के जोड़ों में सूजन और दर्द शुरू हो जाता है।

शुरुआती इशारे जिन्हें हम अक्सर थकावट मान लेते हैं

गठिया रातों-रात नहीं आता। शरीर पहले बहुत छोटे-छोटे अलार्म बजाता है, जिन्हें हम अक्सर इग्नोर कर देते हैं। अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है, तो अलर्ट हो जाइए:

  • सुबह की जकड़न: सुबह सोकर उठने पर शरीर लकड़ी की तरह अकड़ा हुआ लगा और बिस्तर छोड़ने में जान निकल गई।
  • कुर्सी से उठने में आफत: ज़मीन या कुर्सी पर देर तक बैठने के बाद जब उठें, तो घुटने और कमर सीधी करने में दर्द और खिंचाव महसूस हो।
  • कटकट की आवाज़: सीढ़ियां चढ़ते या उठते-बैठते वक्त घुटनों से कटकट या चटकने की आवाज़ें आने लगें।
  • मौसम के साथ दर्द: सर्दियाँ आते ही या बारिश के मौसम में जोड़ों का दर्द और भारीपन अचानक से बढ़ जाए।
  • हाथों की कमज़ोर पकड़: चाय का कप उठाने, मुट्ठी बंद करने या कोई चीज़ पकड़ने में नसों में दर्द हो।
  • हल्की सूजन: घुटनों, उंगलियों या टखनों के आस-पास कभी-कभार हल्की सूजन या गर्माहट आ जाए।
  • स्टैमिना कम होना: पहले आप जितना आराम से पैदल चल लेते थे, अब उतनी ही दूर चलने पर घुटने जवाब दे दें और भयंकर थकावट हो।
  • रात का दर्द: दिनभर तो ठीक रहे, लेकिन रात को बिस्तर पर लेटते ही जोड़ों में अजीब सी बेचैनी और दर्द शुरू हो जाए जिससे नींद टूट जाए।

वो गलतियां जो हमारे जोड़ों को अंदर ही अंदर खोखला कर रही हैं

गठिया होने का मतलब सिर्फ 'बुढ़ापा आना' नहीं है। हमारे रोज़ के कई ऐसे गलत रूटीन हैं जो जाने-अनजाने हमारे जोड़ों की ग्रीस खत्म कर रहे हैं:

  • उम्र का असर (घिसावट): जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, दो हड्डियों के बीच की गद्दी घिसने लगती है, जिससे हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं।
  • एक ही जगह जमे रहना: दिनभर कुर्सी पर बैठकर काम करना और कोई कसरत न करना जोड़ों में जंग लगा देता है और जकड़न बढ़ा देता है।
  • मोटापा (बढ़ा हुआ वज़न): आपके शरीर का हर एक किलो एक्स्ट्रा वज़न आपके घुटनों पर 4 किलो का एक्स्ट्रा दबाव डालता है। भारी वज़न घुटनों को तेज़ी से घिसता है।
  • गलत खान-पान: रोज़-रोज़ बाहर का जंक फूड, मैदा, चीनी और तला-भुना खाने से शरीर के अंदर सूजन (Inflammation) बढ़ती है, जो सीधे जोड़ों पर वार करती है।
  • विटामिन और कैल्शियम की कमी: अगर शरीर में विटामिन D और कैल्शियम ही नहीं होगा, तो हड्डियां खोखली होंगी और जोड़ों की ताक़त खत्म हो जाएगी।
  • पुरानी चोट: पुरानी चोट जो ठीक से नहीं भरी थी, वो उम्र ढलने पर गठिया का रूप ले सकती है।
  • जींस (जेनेटिक्स): अगर आपके माता-पिता या दादा-दादी को गठिया रहा है, तो आपके अंदर भी इसके आने के चांस बढ़ जाते हैं।
  • टेंशन और नींद की कमी: बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेने और ठीक से न सोने की वजह से शरीर खुद को रिपेयर नहीं कर पाता, जिससे जोड़ों की सूजन और कमज़ोरी बढ़ती है।

आखिर ये घिसावट बढ़ती कैसे है?

हमारा शरीर एक चलती-फिरती मशीन है। उठना, बैठना, चलना हर काम में घुटनों और जोड़ों पर ज़बरदस्त प्रेशर पड़ता है। जब तक आप अच्छी डाइट लेते हैं और सही आराम करते हैं, तब तक जोड़ इस लोड को आराम से झेल लेते हैं।

लेकिन जब आपका खान-पान खराब होता है और आप शरीर से मेहनत करवाना बंद कर देते हैं, तो हड्डियों के बीच की कुशनिंग (गद्दी) घिसने लगती है। यह परत जितनी पतली होती है, हड्डियां उतनी ही ज्यादा आपस में रगड़ खाती हैं। इसी रगड़ की वजह से दर्द, सूजन और अकड़न शुरू हो जाती है। भारी वज़न और पुरानी चोट इस घिसावट की स्पीड को दोगुना कर देते हैं।

क्या X-Ray रिपोर्ट खराब आने का मतलब है कि अब ज़िंदगी भर दर्द झेलना होगा?

बिल्कुल नहीं! और यही सबसे बड़ा भ्रम है जो हमारे दिमाग में बैठ जाता है। बहुत से लोग X-Ray में गठिया देखते ही हार मान लेते हैं कि अब आराम नहीं मिलेगा।

लेकिन याद रखिए, हमारा शरीर हमेशा बदलता रहता है। अगर आप अपने जोड़ों की सूजन कम कर लें, आस-पास की मांसपेशियों (Muscles) को ताकतवर बना लें और घुटनों से वज़न का दबाव घटा लें, तो आपकी ज़िंदगी एकदम नॉर्मल और एक्टिव हो सकती है। सही खान-पान, अच्छा रूटीन और सही इलाज के दम पर लाखों लोग गठिया के बावजूद एकदम फिट लाइफ जी रहे हैं।

X-Ray की रिपोर्ट सिर्फ आपके शरीर का आज का हाल बता रही है, यह आपके भविष्य की भविष्यवाणी बिल्कुल नहीं कर सकती।

आयुर्वेद गठिया को किस तरह समझता है? 

आयुर्वेद में गठिया को 'संधिगत वात' या 'आमवात' कहा जाता है। यह सिर्फ जोड़ों की कोई अलग सी बीमारी नहीं है, बल्कि आपके पूरे शरीर के सिस्टम और हाज़मे के बिगड़ने का पक्का सबूत है।

जब शरीर में वात (हवा) बेकाबू हो जाता है और पाचन सुस्त पड़ जाता है, तो खाना ठीक से नहीं पचता। यही अधपचा खाना शरीर में 'आम' (यानी ज़हरीली गंदगी) बनकर खून में घूमने लगता है। धीरे-धीरे यह गंदगी जाकर जोड़ों के बीच जम जाती है, और वहीं से दर्द, सूजन और जकड़न की शुरुआत होती है।

आयुर्वेद कहता है कि जब वात बिगड़ता है तो शरीर अंदर से सूखने लगता है। नसों में खिंचाव आता है, उठते-बैठते जोड़ों से कट-कट की आवाज़ें आती हैं और बदन जकड़ जाता है। इसलिए आयुर्वेद गठिया के इलाज में सिर्फ पेनकिलर नहीं देता, बल्कि भड़के हुए वात को शांत करने और हाज़मे को रॉकेट बनाने पर काम करता है।

आयुर्वेद का इलाज करने का तरीका 

आयुर्वेद गठिया को सिर्फ हड्डियों की घिसावट नहीं मानता। यह असल में वात के बिगड़ने, हाज़मे की खराबी, शरीर में भरी गंदगी और गलत रूटीन का नतीजा है:

  • असली जड़ पर वार: इलाज सिर्फ दर्द को सुन्न करने के लिए नहीं होता। गठिया क्यों हुआ? मोटापे की वजह से, हमेशा बैठे रहने से या खराब हाज़मे से? पहले इन कमियों को पकड़ा और सुधारा जाता है।
  • वात और सूखेपन का इलाज: बढ़ा हुआ वात ही जोड़ों को सुखाता और जकड़ता है। इसलिए शरीर को अंदर से नमी (ग्रीस) और आराम देने वाले तरीके अपनाए जाते हैं।
  • पेट की आग (पाचन) तेज़ करना: अगर पाचन खराब है तो शरीर में गंदगी (आम) बनती रहेगी और जोड़ों में जमती रहेगी। सबसे पहले हाज़मे को दुरुस्त किया जाता है ताकि यह गंदगी बनने का बंद हो।
  • जोड़ों को अंदरूनी ताक़त: घुटनों और हड्डियों को अंदर से ऐसी खुराक दी जाती है कि आप बिना दर्द के आराम से उठ-बैठ सकें।
  • लाइफस्टाइल सेट करना: रात-रात भर जागना, ठंडी चीज़ें खाना, कुर्सी पर जमे रहना और कसरत न करना इन आदतों को बदले बिना गठिया कभी ठीक नहीं होता।

गठिया में काम आने वाली आयुर्वेदिक दवाई

ये खास जड़ी-बूटियां पेनकिलर की तरह सिर्फ दर्द को सुन्न नहीं करतीं, बल्कि जोड़ों की सूजन खींचकर उन्हें अंदर से दोबारा मजबूत बनाने का काम करती हैं:

  • योगराज गुग्गुलु: जोड़ों की भयंकर सूजन घटाने और पुरानी से पुरानी जकड़न को खोलने के लिए यह एक पक्का आयुर्वेदिक नुस्खा है।
  • अश्वगंधा: लंबे समय तक दर्द सहने से शरीर एकदम टूट जाता है। ऐसे में यह जड़ी-बूटी सारी थकान मिटाकर बदन में नई जान और ताकत भर देती है।
  • दशमूल: भड़के हुए वात को शांत करने और नसों की कठोर जकड़न को ढीला करने का यह सबसे पुराना और भरोसेमंद तरीका है।
  • त्रिफला: पेट साफ रखने और पाचन सुधारने में इसका कोई तोड़ नहीं। जब पेट में गैस और गंदगी (आम) नहीं रुकेंगी, तो जोड़ों में वात भी जमा नहीं होगा।

जोड़ों को सुकून देने वाली खास आयुर्वेदिक थेरेपी 

इन परखे हुए देसी तरीकों का बस एक ही मकसद है थके हुए जोड़ों को रिलैक्स करना और जकड़न को खोलना:

  • अभ्यंग (तेल की मालिश): जड़ी-बूटियों वाले हल्के गरम तेल से जब बदन की चंपी होती है, तो सूखे जोड़ों को नमी मिलती है और सारी जकड़न मिनटों में छूमंतर हो जाती है।
  • जानु बस्ती: इसमें घुटनों के ऊपर आटे का एक घेरा बनाकर खास औषधीय तेल भरा जाता है। सूखे और कटकट करने वाले घुटनों को सीधी ग्रीस देने का इससे बढ़िया कोई जुगाड़ नहीं है।
  • स्वेदन (भाप से सिकाई): हल्की गर्माहट वाली भाप लेने से शरीर की अकड़न और भारीपन बर्फ की तरह पिघल जाता है।

डाइट (खान-पान) में क्या-क्या बदलाव करें? 

गठिया में आपका खाना ही आपकी सबसे बड़ी दवा है। डाइट ऐसी होनी चाहिए जो शरीर को भारी न करे:

  • गरम और ताज़ा खाना: हमेशा ताज़ा और हल्का गरम खाना ही खाएं। बासी खाना वात को भड़काता है।
  • मूंग दाल और हल्का खाना: पेट पर बोझ डालने वाला भारी खाना बिल्कुल न खाएं। मूंग दाल जैसी हल्की चीज़ें खाएं जो तुरंत पच जाएं।
  • गुनगुना पानी पिएं: दिन भर हल्का गुनगुना पानी पीने से पाचन तेज़ रहता है और शरीर की गंदगी पसीने के रास्ते बाहर निकलती है।
  • तला-भुना बिल्कुल बंद: ज्यादा तेल-मसाले और बाहर का भारी खाना जोड़ों में सीधा सूजन बढ़ाता है। इसे आज ही छोड़ दें।
  • ठंडी चीज़ों से दूर रहें: बर्फ वाला पानी, कोल्ड ड्रिंक या बहुत ठंडी चीज़ें दर्द और जकड़न को तुरंत बढ़ा देती हैं।
  • टाइम पर खाएं: बेवक्त खाने की आदत पूरे शरीर के सिस्टम को हिला देती है। अपना एक टाइमटेबल बनाएं।

मरीज़ों का भरोसा – उनके जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम अनिल कुमारी वर्मा है, मेरी उम्र 60 वर्ष है और मैं दिल्ली से हूँ। साल 2008 में मुझे अर्थराइटिस हो गया था। मेरे पैरों में अचानक सूजन आ गई और बहुत तेज दर्द रहने लगा। हम डॉक्टर के पास गए, एक्स-रे करवाया गया तो ऑपरेशन की सलाह दी गई। मैंने कई दवाइयाँ भी लीं, लेकिन कोई खास आराम नहीं मिला। धीरे-धीरे मेरा आयुर्वेद पर विश्वास बढ़ा। फिर मेरी एक दोस्त ने मुझे जीवा आयुर्वेद के बारे में बताया। इसके बाद मैं जीवाग्राम गई और वहाँ से इलाज शुरू कराया। यहाँ मुझे सही मार्गदर्शन, थेरेपी और आयुर्वेदिक उपचार मिला, जिससे मेरी स्थिति में सुधार आने लगा।

डॉक्टर के पास कब भागना चाहिए? 

गठिया के दर्द को कभी भी मामूली समझकर इग्नोर न करें। अगर शरीर ये इशारे दे रहा है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:

  • दर्द कम होने का नाम ही न ले रहा हो और दिन-ब-दिन भयंकर होता जा रहा हो।
  • सुबह उठते ही शरीर एकदम लकड़ी की तरह अकड़ जाता हो।
  • जोड़ों की सूजन लंबे समय से बनी हुई हो।
  • सीढ़ियां चढ़ने या दो कदम चलने में भी जान निकलती हो।
  • हाथों से चीज़ें छूटने लगें और मुट्ठी बंद करने में भी दर्द हो।
  • रात को बिस्तर पर लेटते ही दर्द इतना बढ़ जाए कि नींद न आए।
  • जोड़ों से कट-कट की तेज़ आवाज़ें आने लगें और लचक खत्म हो जाए।

निष्कर्ष 

गठिया सिर्फ हड्डियों के घिसने की बीमारी नहीं है। यह आपकी खराब लाइफस्टाइल, सुस्त हाज़मे, टेंशन और शरीर में भरी गंदगी का नतीजा है। मॉडर्न साइंस जहां सिर्फ पेनकिलर से दर्द दबाने पर फोकस करती है, वहीं आयुर्वेद शरीर की सूखी पड़ी नसों को ग्रीस देकर वात को जड़ से शांत करने पर काम करता है।

अगर आप सही टाइम पर अपना खान-पान सुधार लें, थोड़ा पैदल चलें, ताज़ा खाना खाएं और टेंशन छोड़ दें, तो आप लंबे समय तक बिना किसी दर्द के एक एक्टिव और फिट लाइफ जी सकते हैं।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

गठिया को अक्सर केवल उम्र बढ़ने से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। कई बार कम उम्र के लोगों में भी जोड़ों का दर्द, सूजन और जकड़न दिखाई देने लगती है। गलत खानपान, लंबे समय तक बैठे रहना, शरीर में सूजन और पुरानी चोटें भी इसकी वजह बन सकती हैं। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो समस्या धीरे-धीरे बढ़ सकती है। इसलिए शुरुआती संकेतों को समझना ज़रूरी माना जाता है।

बहुत से लोगों को ठंड या बारिश के मौसम में जोड़ों का दर्द और अकड़न ज्यादा महसूस होती है। ठंड के कारण जोड़ों में जकड़न बढ़ सकती है और शरीर की गतिविधि कम होने लगती है। कई लोगों को सुबह उठते समय हाथ और घुटने ज्यादा भारी महसूस होते हैं। ऐसे समय में शरीर को गर्म रखना और हल्की गतिविधि बनाए रखना मददगार माना जाता है। मौसम का असर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है।

लगातार आराम करना कई बार जोड़ों की जकड़न को और बढ़ा सकता है। शरीर लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने पर अकड़न ज्यादा महसूस होने लगती है। हल्की गतिविधि और धीरे-धीरे चलना जोड़ों को सक्रिय बनाए रखने में मदद कर सकता है। हालांकि बहुत ज्यादा दबाव डालने वाली गतिविधियों से बचना ज़रूरी माना जाता है। संतुलित गतिविधि और पर्याप्त आराम दोनों का सही मेल महत्वपूर्ण होता है।

शरीर का बढ़ा हुआ वज़न घुटनों और कमर के जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इससे चलने-फिरने में परेशानी और दर्द ज्यादा महसूस हो सकता है। कई लोगों में वज़न बढ़ने के साथ सूजन और थकान भी बढ़ने लगती है। संतुलित भोजन और नियमित हल्की गतिविधि शरीर पर दबाव कम करने में सहायक मानी जाती है। वज़न नियंत्रण जोड़ों की देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

जो लोग लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहते हैं, उनमें जोड़ों की जकड़न ज्यादा महसूस हो सकती है। शरीर की गतिविधि कम होने से रक्त संचार धीमा पड़ सकता है और अकड़न बढ़ सकती है। कई बार गर्दन, कमर और घुटनों में भारीपन भी महसूस होने लगता है। बीच-बीच में हल्का चलना और शरीर को खींचना फायदेमंद माना जाता है। नियमित गतिविधि जोड़ों को सक्रिय बनाए रखने में मदद कर सकती है।

लगातार तनाव और चिंता शरीर की तकलीफ को और ज्यादा महसूस करा सकते हैं। कई लोगों में तनाव के समय दर्द और जकड़न बढ़ जाती है। नींद प्रभावित होने पर शरीर की थकान और भारीपन भी बढ़ सकता है। मानसिक शांति और संतुलित दिनचर्या शरीर को बेहतर महसूस कराने में सहायक मानी जाती है। इसलिए गठिया में केवल शरीर ही नहीं, मन की स्थिति पर भी ध्यान देना ज़रूरी माना जाता है।

भोजन का सीधा असर शरीर की सूजन और पाचन पर पड़ सकता है। बहुत ज्यादा तला, ठंडा और भारी भोजन कई लोगों में शरीर का भारीपन बढ़ा सकता है। वहीं हल्का और ताजा भोजन पाचन को बेहतर बनाए रखने में सहायक माना जाता है। कुछ लोगों को बाहर का भोजन खाने के बाद दर्द ज्यादा महसूस हो सकता है। सही आहार लंबे समय तक जोड़ों की देखभाल में मदद कर सकता है।

यदि घुटनों में ज्यादा दर्द और सूजन हो, तो सीढ़ियां चढ़ते समय परेशानी महसूस हो सकती है। इससे जोड़ों पर दबाव बढ़ सकता है और थकान जल्दी महसूस हो सकती है। हालांकि पूरी तरह गतिविधि बंद करना भी सही नहीं माना जाता। धीरे-धीरे और सावधानी के साथ चलना बेहतर माना जाता है। यदि दर्द बहुत ज्यादा हो, तो विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी हो सकता है।

पर्याप्त नींद न मिलने पर शरीर की थकान और दर्द ज्यादा महसूस हो सकता है। कई लोगों को रात में करवट बदलते समय दर्द के कारण नींद टूटती रहती है। लगातार खराब नींद शरीर की ऊर्जा और सहनशक्ति को प्रभावित कर सकती है। आरामदायक नींद शरीर को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए गठिया में नींद की गुणवत्ता पर ध्यान देना भी ज़रूरी माना जाता है।

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