जब हम रात को बिस्तर पर लेटते हैं और पैरों के तलवों में एक अजीब सी झुनझुनी या चींटियाँ रेंगने का एहसास होता है, तो अक्सर हम इसे दिन भर की थकान या गलत पोज़िशन में बैठने का नतीजा मान लेते हैं। हम पैरों को थोड़ा हिलाते हैं, मालिश करते हैं और फिर सो जाते हैं।
लेकिन अगर आप शुगर के मरीज़ हैं, तो पैरों की यह झुनझुनी और सुन्नपन कोई साधारण थकान नहीं है। यह इस बात का एक खौफनाक अलार्म है कि बढ़ा हुआ ब्लड शुगर आपके शरीर के अंदर मौजूद नसों के सबसे लंबे और नाज़ुक नेटवर्क को जलाकर राख कर रहा है।
ब्लड शुगर बढ़ने से पैरों की नसों में यह डैमेज क्यों होने लगता है?
जब खून में ग्लूकोज़ का स्तर महीनों या सालों तक लगातार अधिक रहता है, तो शरीर के मस्कुलोस्केलेटल और नर्वस सिस्टम में तबाही मचने लगती है। इस नर्व डैमेज के पीछे ये मुख्य कारण होते हैं:
- ग्लूकोज़ की टॉक्सिसिटी (Glucose Toxicity): नसों की सुरक्षा के लिए उनके चारों ओर माइलिन शीथ (Myelin sheath) नाम की एक परत होती है। अतिरिक्त शुगर एक ज़हर की तरह काम करती है और इस सुरक्षा परत को अंदर ही अंदर गला देती है।
- ऑक्सीजन और खून की कमी (Ischemia): नसों को ज़िंदा रहने के लिए छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं (Capillaries) से ऑक्सीजन और पोषण मिलता है। बढ़ा हुआ शुगर इन वाहिकाओं को ब्लॉक कर देता है, जिससे नसें ऑक्सीजन के लिए तड़पकर मरने लगती हैं।
- नसों का सिकुड़ना (Nerve Shrinkage): जैसे एक सूखा हुआ पेड़ सिकुड़ जाता है, वैसे ही पोषण न मिलने के कारण पैरों की सबसे लंबी नसें सिकुड़ जाती हैं और शरीर से दिमाग तक सही सिग्नल नहीं पहुँचा पातीं।
शुगर के कारण होने वाला यह नर्व डैमेज (Diabetic Neuropathy) किन प्रकारों का हो सकता है?
डायबिटिक न्यूरोपैथी केवल एक तरह का सुन्नपन नहीं है। यह नसों के डैमेज हुए नेटवर्क के आधार पर आपको इन भयंकर रूपों में अपना शिकार बना सकती है:
- पेरिफेरल न्यूरोपैथी (Peripheral Neuropathy): यह सबसे आम प्रकार है। इसमें पैरों के पंजों और तलवों से सुन्नपन या जलन शुरू होती है और धीरे-धीरे ऊपर घुटनों तक फैल जाती है। इसे 'ग्लव एंड स्टॉकिंग' (Glove and stocking) पैटर्न भी कहते हैं।
- ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी (Autonomic Neuropathy): यह आपके पेट, दिल और ब्लैडर को कंट्रोल करने वाली नसों को डैमेज करता है, जिससे कब्ज़ और दस्त या अचानक बैठे-बैठे चक्कर आने की समस्या शुरू हो जाती है।
- प्रॉक्सिमल न्यूरोपैथी (Proximal Neuropathy): इसमें जांघों, कूल्हों या कमर के निचले हिस्से में दर्द होता है और पैरों में इतनी कमज़ोरी आ जाती है कि कुर्सी से उठना भी मुश्किल हो जाता है।
किन खामोश संकेतों से पहचानें कि शुगर आपकी नसों को खा रही है?
नसें रातों-रात डैमेज नहीं होतीं। शरीर बहुत पहले से ही कई खामोश अलार्म बजाने लगता है। यदि आप इन शुरुआती संकेतों को पहचान लें, तो परमानेंट डैमेज से बचा जा सकता है:
- पैरों में लगातार चींटियाँ रेंगना (Tingling Sensation): लेटे या बैठे हुए ऐसा महसूस होना कि पैरों के तलवों में झुनझुनी हो रही है या सुइयाँ चुभ रही हैं।
- तलवों में आग जैसी जलन: रात के समय पैरों के तलवों में इतनी तेज़ जलन होना कि चादर ओढ़ना या जूते पहनना भी एक दर्दनाक सज़ा लगने लगे।
- ठंडे-गर्म का एहसास खत्म होना: अगर आपके पैर किसी गर्म चीज़ या बर्फ पर पड़ें और आपको उसका तापमान बिल्कुल महसूस न हो (यह सुन्नपन का सबसे खतरनाक स्टेज है)।
- घाव का जल्दी न भरना: पैरों में कोई कट लगना या छाला हो जाना और हफ़्तों तक उसका ठीक न होना, जो आगे चलकर डायबिटिक फुट अल्सर (Diabetic foot ulcer) बन जाता है।
झुनझुनी और दर्द से बचने के चक्कर में लोग क्या गलतियाँ करते हैं?
पैरों की इस भयानक जलन और रात की खराब होती नींद से बचने के लिए लोग अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो नर्वस सिस्टम को हमेशा के लिए अपाहिज कर देते हैं:
- नसों को सुन्न करने वाली गोलियाँ खाना: दर्द से बचने के लिए लगातार पेनकिलर्स या नसों को सुन्न करने वाली भारी दवाइयाँ (जैसे Gabapentin) खाना। ये कुछ देर के लिए दर्द मिटाती हैं, लेकिन नर्व डैमेज को अंदर ही अंदर और कर देती हैं।
- गलत मालिश करना: सुन्न पड़े पैरों में ताकत लाने के लिए किसी भी भारी या तेज़ तेल से ज़ोर-ज़ोर से मालिश करना, जिससे नाज़ुक नसें और ज़्यादा डैमेज हो जाती हैं।
- लक्षणों को केवल विटामिन की कमी मानना: यह सोचकर कि यह केवल B12 की कमी है, बिना शुगर कंट्रोल किए ढेरों विटामिन्स खाना, जो टाइप 2 डायबिटीज के असली डैमेज को छिपा देता है।
आयुर्वेद 'नर्व डैमेज' और 'डायबिटिक न्यूरोपैथी' को कैसे समझता है?
आधुनिक चिकित्सा जिसे केवल 'नर्व डैमेज' मानती है, आयुर्वेद उसे शरीर में भड़के हुए वात दोष, 'मज्जा धातु' के क्षय और ओजस के नष्ट होने के विज्ञान से गहराई से समझता है:
- वात का आवरण (Vata Imbalance): आयुर्वेद के अनुसार, नसें और नर्वस सिस्टम वात दोष का मुख्य स्थान हैं। जब हाई शुगर और खराब जीवनशैली के कारण वात भड़कता है, तो यह नसों को रूखा और बेजान कर देता है, जिससे सुन्नपन और झुनझुनी आती है।
- मज्जा धातु का क्षय: नसों के अंदर की सुरक्षा परत 'मज्जा धातु' (Bone marrow and nerve tissue) से बनती है। शुगर की अधिकता और इंसुलिन रेजिस्टेंस इस धातु को गला देती है, जिससे शरीर में नसों की कमज़ोरी आ जाती है।
- अग्निमांद्य और आम (Toxins): जब आपका पाचन तंत्र कमज़ोर होता है, तो ब्लड में अत्यधिक शुगर 'आम' (टॉक्सिन्स) का रूप ले लेती है। यह 'आम' सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को ब्लॉक कर देता है और नसों तक पोषण नहीं पहुँचने देता।
जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण इस समस्या पर कैसे काम करता है?
जीवा आयुर्वेद में हम आपको केवल एक और दर्द निवारक गोली देकर घर नहीं भेजते। हमारा लक्ष्य आपकी अग्नि को जगाकर शुगर कंट्रोल करना और सिकुड़ चुकी नसों को दोबारा जीवित करना है:
- वात शमन और स्नेहन: सबसे पहले प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से नसों के रूखेपन को खत्म किया जाता है और शरीर में वात दोष को शांत किया जाता है ताकि जलन और झुनझुनी तुरंत कम हो।
- मज्जा धातु का पोषण: 'रसायन' चिकित्सा के माध्यम से डैमेज हो चुकी नसों की माइलिन शीथ को प्राकृतिक रूप से रिपेयर (Repair) करने का काम किया जाता है।
- अग्नि दीपन और स्रोतोशोधन: जठराग्नि को मज़बूत किया जाता है ताकि शुगर लेवल स्टेबल (Stable) रहे और शरीर के सारे ब्लॉक्ड चैनल्स (Srotas) खुल जाएं।
शुगर कंट्रोल करने और नसों को ताकत देने वाली आयुर्वेदिक डाइट
अपनी सिकुड़ती हुई नसों को बचाने के लिए आपको अपनी डाइट से मीठे और 'आम' बढ़ाने वाले पदार्थों को तुरंत हटाना होगा। यह डाइट चार्ट आपकी नसों के लिए संजीवनी का काम करेगा:
| आहार की श्रेणी | क्या खाएं (फायदेमंद - नसों को ताक़त देने वाले) | क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - शुगर और वात बढ़ाने वाले) |
| अनाज (Grains) | जौ (Barley), ओट्स, रागी, छिलके वाली मूंग दाल, पुराना चावल। | मैदा, वाइट ब्रेड, बासी रोटियाँ, पैकेटबंद नूडल्स। |
| वसा (Fats) | देसी गाय का शुद्ध घी (नसों की खुश्की के लिए सबसे बड़ा अमृत), बादाम। | रिफाइंड ऑयल, बहुत ज़्यादा बाज़ार का ट्रांस फैट। |
| सब्ज़ियाँ (Vegetables) | लौकी, करेला, परवल, तरोई, मेथी, पालक (हल्के मसालों में पकी हुई)। | भारी आलू, कटहल, बहुत ज़्यादा कच्चा सलाद (विशेषकर रात में)। |
| फल (Fruits) | पपीता, अमरूद, आँवला, जामुन। | बहुत ज़्यादा खट्टे फल, डिब्बाबंद और केमिकल वाले मीठे जूस, आम। |
| पेय पदार्थ (Beverages) | गुनगुना पानी, मेथी का पानी, छाछ (जीरा डालकर)। | अत्यधिक डार्क कॉफी, शराब, बर्फ का ठंडा पानी, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स। |
नर्व डैमेज को रिवर्स करने वाली जड़ी-बूटियाँ
प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के हाई ब्लड शुगर को कंट्रोल करते हैं और मरती हुई नसों को दोबारा ताकत देते हैं:
- अश्वगंधा: यह नर्वस सिस्टम के लिए सबसे बेहतरीन एडैप्टोजेन है। यह सिकुड़ चुकी नसों में दोबारा ऊर्जा भरता है और पैरों की कमज़ोरी व कंपन (Tremors) को दूर करता है।
- गिलोय: यह शरीर से भारी टॉक्सिन्स (आम) को पिघलाकर बाहर निकालती है और ब्लड शुगर को धीरे-धीरे रेगुलेट करने में मदद करती है, जिससे नसों पर ग्लूकोज़ का हमला रुकता है।
- त्रिफला: यह पेट को साफ़ रखता है और शरीर के चैनल्स (Srotas) को खोलता है। कब्ज़ दूर होने से वात शांत होता है और पैरों की झुनझुनी कम होती है।
- शतावरी: यह शरीर के अंदरूनी सूखेपन को खत्म करती है। यह मज्जा धातु को गहराई से पोषण देती है और नसों की 'माइलिन शीथ' की सुरक्षा करती है।
पैरों की झुनझुनी और सुन्नपन दूर करने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़
जब वात और शुगर की टॉक्सिसिटी नसों में बहुत गहराई तक जम चुकी हो और केवल डाइट से आराम न मिल रहा हो, तो पंचकर्म की ये क्लासिकल बाहरी थेरेपीज़ पैरों को तुरंत डिकंप्रेस कर देती हैं:
- अभ्यंग मालिश: वात दोष को शांत करने और ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने के लिए क्षीरबला या महानारायण जैसे ठंडे व पोषण देने वाले औषधीय तेलों से पैरों की हल्की मालिश की जाती है।
- पादभ्यंग (Foot Massage): पैरों के तलवों में हज़ारों नसों के एंडिंग्स (Nerve endings) होते हैं। रात को कांसा वटी या घी से तलवों की मालिश करने से सुन्नपन दूर होता है और नींद पूरी न होना जैसी समस्या खत्म होती है।
- शिरोधारा थेरेपी: न्यूरोपैथी अक्सर भयंकर मानसिक तनाव और अकारण एंग्जायटी का कारण बनती है। सिर पर औषधीय तेल की लगातार धार गिराने से नर्वस सिस्टम तुरंत शांत होता है।
- विरेचन थेरेपी: शरीर से दूषित पित्त और भारी टॉक्सिन्स को मल के रास्ते बाहर निकालने के लिए लिवर और आंतों की डीप-क्लीनिंग की जाती है, जो शुगर कंट्रोल का अचूक उपाय है।
जीवा आयुर्वेद में हम मरीज़ों की जाँच कैसे करते हैं?
हम केवल यह सुनकर कि "पैरों में जलन है" कोई नसों की गोली नहीं थमा देते; हम आपके पूरे मेटाबॉलिज़्म और हॉर्मोनल सिस्टम की गहराई से जाँच करते हैं:
- नाड़ी परीक्षा: सबसे पहले नाड़ी (Pulse) चेक करके यह समझना कि आपके अंदर वात का स्तर कितना खतरनाक हो चुका है और क्या जठराग्नि सुस्त पड़ गई है।
- शारीरिक मूल्याँकन: आपके पैरों के तलवों की संवेदनशीलता (Sensitivity), त्वचा का रूखापन और घावों की बहुत बारीकी से जाँच की जाती है।
- लाइफस्टाइल ऑडिट: क्या आप लगातार कुर्सी पर बैठे रहने को मजबूर हैं? क्या आपका भारी वज़न का बढ़ना नसों पर दबाव डाल रहा है? इन सभी आदतों का गहराई से विश्लेषण किया जाता है।
हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?
हम आपको इस दर्द और सुन्नपन के खौफ में अकेला नहीं छोड़ते। एक प्राकृतिक और कॉन्फिडेंट जीवन की ओर हर कदम पर हम आपका पूर्ण मार्गदर्शन करते हैं:
- जीवा से संपर्क करें: बेझिझक होकर सीधे हमारे नंबर +919266714040 पर कॉल करें और अपने 'पैरों की झुनझुनी' की समस्या के बारे में विस्तार से बात करें।
- अपॉइंटमेंट फिक्स करें: आप हमारे 80 से भी ज़्यादा क्लिनिक में आकर आराम से डॉक्टर से आमने-सामने मिल सकते हैं और अपनी पुरानी ब्लड शुगर रिपोर्ट्स दिखा सकते हैं।
- ऑनलाइन वीडियो कंसल्टेशन: अगर चलने-फिरने में तकलीफ के कारण क्लिनिक आना मुश्किल है, तो आप अपने घर बैठे अत्यंत सुरक्षित माहौल में वीडियो कॉल से हमारे विशेषज्ञ वैद्यों से बात कर सकते हैं।
- व्यक्तिगत प्लान: आपके दोषों के अनुसार खास जड़ी-बूटियाँ, पंचकर्म थेरेपी और एक असरदार पित्त शांत करने वाले आहार का रूटीन तैयार किया जाता है।
नसों के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने में कितना समय लगता है?
सालों की हाई ब्लड शुगर और गलत आदतों से डैमेज हुई नसों को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित समय लगता है:
- शुरुआती 1-2 महीने: औषधियों और डाइट से आपका ब्लड शुगर लेवल स्टेबल (Stable) होना शुरू होगा। पैरों के तलवों में होने वाली आग जैसी जलन और झुनझुनी काफी हद तक कम हो जाएगी।
- 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से ब्लड सर्कुलेशन बेहतरीन होगा। सुन्न पड़े पैरों में थोड़ी संवेदनशीलता (Sensitivity) वापस आने लगेगी और आपका चलना आसान होगा।
- 5-6 महीने: आपकी नसें और मज्जा धातु पूरी तरह से रिपेयर और पोषित हो जाएंगी। आप बिना किसी नसों को सुन्न करने वाली गोली के, एक प्राकृतिक, सुरक्षित और दर्दरहित जीवन जीना शुरू कर देंगे।
जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च
आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।
इलाज का खर्च
जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करता है।
प्रोटोकॉल
अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
पैकेज में शामिल हैं:
- दवा
- परामर्श
- मानसिक स्वास्थ्य सत्र
- योग और ध्यान मार्गदर्शन
- आहार योजना
- थेरेपी
इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।
जीवाग्राम
गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।
कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:
- प्रामाणिक पंचकर्म चिकित्सा
- सात्विक भोजन
- आधुनिक उपचार सेवाएँ
- आरामदायक आवास
- जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने वाली कई अन्य सुविधाएँ
जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताजा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।
मरीज़ जीवा आयुर्वेद पर भरोसा क्यों करते हैं?
हम आपको जीवन भर के लिए नसों को सुन्न करने वाली तेज़ गोलियों का गुलाम नहीं बनाते, बल्कि हम आपके शरीर की उस प्राकृतिक ताकत को जगाते हैं जो नसों को रिपेयर कर सके:
- जड़ से इलाज: हम सिर्फ पैरों की जलन को दबाने की बात नहीं करते; हम आपकी जठराग्नि को ठीक करते हैं और शरीर से 'आम' व हाई ब्लड शुगर को जड़ से कंट्रोल करते हैं।
- विशेषज्ञ डॉक्टर: हमारे पास सालों का शानदार अनुभव है। हमने कई मरीज़ों को डायबिटिक न्यूरोपैथी और फुट अल्सर के खतरनाक जाल से निकालकर वापस प्राकृतिक स्वास्थ्य दिया है।
- कस्टमाइज्ड केयर: आपका नर्व डैमेज भारी मोटापे (कफ) के कारण बढ़ रहा है या अत्यधिक स्ट्रेस और रूखेपन (वात) के कारण? हमारा इलाज बिल्कुल आपके मूल कारण पर आधारित होता है।
- प्राकृतिक और सुरक्षित: बाज़ार की तेज़ दवाइयाँ (जैसे Gabapentin) दिमाग को सुन्न कर देती हैं, जबकि हमारे आयुर्वेदिक रसायन (अश्वगंधा, गिलोय) पूरी तरह सुरक्षित हैं और शरीर को प्राकृतिक ताकत देते हैं।
आधुनिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर
डायबिटिक न्यूरोपैथी (पैरों की झुनझुनी) के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।
| श्रेणी | आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) | आयुर्वेद (Holistic care) |
| इलाज का मुख्य लक्ष्य | नसों के दर्द के सिग्नल को ब्लॉक करने के लिए भारी एंटी-डिप्रेसेंट और नर्व रिलैक्सेंट्स देना। | वात को शांत करना, जठराग्नि को मज़बूत करके ब्लड शुगर कंट्रोल करना और 'रसायन' द्वारा नसों को रिपेयर करना। |
| बीमारी को देखने का नज़रिया | इसे केवल हाई शुगर के कारण नसों के परमानेंट और लाइलाज डैमेज (Irreversible damage) की एक समस्या मानना। | इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात दोष और 'मज्जा धातु' के क्षय का एक संपूर्ण सिंड्रोम (Syndrome) मानना। |
| डाइट और लाइफस्टाइल | डाइट में केवल मीठा छोड़ने की आम सलाह दी जाती है। | डाइट में कॉम्प्लेक्स कार्ब्स, शुद्ध गाय का घी, और अग्नि को सुधारने के लिए सात्विक आहार पर विशेष ज़ोर दिया जाता है। |
| लंबा असर | दवाइयाँ दर्द सुन्न करती हैं, लेकिन डैमेज चलता रहता है जिससे अंततः सुन्नपन भयंकर हो जाता है। | शरीर का मेटाबॉलिज़्म और नसें अंदर से इतनी मज़बूत हो जाती हैं कि सुन्नपन कम होता है और शुगर प्राकृतिक रूप से कंट्रोल होती है। |
डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?
अगर आपको अपने पैरों या शरीर में ये बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल इमरजेंसी में जाना ज़रूरी हो जाता है:
- पैरों में गहरा घाव (Foot Ulcer) होना: अगर आपके पैर में कोई कांटा चुभ गया हो या छाला हो गया हो, जिसमें दर्द न हो लेकिन वह पकने (Pus) लगे और हफ़्तों तक ठीक न हो।
- पैर का रंग काला या नीला पड़ना (Gangrene): अगर आपके पैर की उंगलियाँ या तलवे अचानक ठंडे पड़ जाएं और उनका रंग नीला या काला होने लगे (यह ब्लड फ्लो पूरी तरह रुकने का संकेत है)।
- अचानक संतुलन खोना (Loss of Balance): पैरों में इतना सुन्नपन आ जाना कि चलते समय आप महसूस ही न कर पाएं कि पैर ज़मीन पर है या नहीं, और आप बार-बार गिर रहे हों।
- तेज़ बुख़ार और घबराहट: अगर पैर के किसी घाव के साथ आपको कंपकंपी के साथ तेज़ बुख़ार आने लगे, जो इन्फेक्शन के खून में फैलने (Sepsis) का बड़ा अलार्म है।
निष्कर्ष
अपने शरीर के नर्वस सिस्टम को एक बिजली की वायरिंग की तरह समझें। जब आप कई सालों तक अपनी ब्लड शुगर को अनकंट्रोल्ड छोड़ देते हैं, तो यह बढ़ा हुआ ग्लूकोज़ एक एसिड (Acid) की तरह काम करता है, जो इन तारों (नसों) की प्लास्टिक कोटिंग (मायलिन शीथ) को जलाकर खा जाता है। रात को सोते समय पैरों के तलवों में आग लगना, ऐसा महसूस होना जैसे चींटियाँ रेंग रही हैं, और पैरों का बिल्कुल सुन्न पड़ जाना, ये कोई आम थकान नहीं है; यह एक अलार्म है कि आपका 'वात दोष' बेकाबू हो चुका है और आपके शरीर का कम्युनिकेशन सिस्टम ठप हो रहा है। केवल नसों को सुन्न करने वाली गोलियाँ खाकर इस डैमेज को कुछ घंटों के लिए टालने की कोशिश न करें, क्योंकि यह आपके पैरों को हमेशा के लिए अपाहिज कर सकता है।
सुन्न करने वाली दवाइयों और बढ़ते हुए डायबिटिक डैमेज के इस ज़हरीले चक्रव्यूह से बाहर निकलें। बाहर के मैदे वाले जंक फूड को छोड़कर हमेशा घर का बना, फाइबर से भरपूर और वात-नाशक भोजन खाएं। अपनी डाइट में जौ, करेला और मेथी का पानी शामिल करें। अश्वगंधा, गिलोय और शतावरी जैसी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की पादभ्यंग व शिरोधारा थेरेपी से अपनी सूखी और बेजान हो चुकी नसों को प्राकृतिक ताकत देकर नया जीवन दें। पैरों की इस झुनझुनी को अपनी लाइफस्टाइल की मजबूरी न बनने दें, और अपने नर्वस सिस्टम को स्थायी रूप से सुरक्षित बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

















