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Alzheimer's शुरू होने से 10 साल पहले के Warning Signs

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 19 May, 2026
  • category-iconUpdated on 19 May, 2026
  • category-iconMental Health
  • blog-view-icon5009

आजकल याददाश्त का भयंकर रूप से कमज़ोर होना और अल्ज़ाइमर (Alzheimer's) की बीमारी का खतरा बहुत आम हो गया है। लोग अक्सर 10 साल पहले दिखने वाले इन डरावने 'वॉर्निंग साइन्स' (Warning Signs) को बढ़ती उम्र की आम कमज़ोरी समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इस गलतफहमी में वे सिर्फ मल्टीविटामिन्स खाते रहते हैं, जिससे दिमाग की नसें और भड़क जाती हैं। एलोपैथी में इस खतरे को दबाने के लिए अक्सर नींद की भारी गोलियाँ या दिमाग को सुन्न करने वाली दवाओं की सलाह दे दी जाती है। ये चीज़ें कुछ समय के लिए लक्षणों को सुन्न ज़रूर कर देती हैं, लेकिन जड़ पर काम न करने से दिमाग अंदर से भयंकर रूप से कमज़ोर हो जाता है और नसें सूखने लगती हैं। आयुर्वेद के अनुसार, यह समस्या 'प्राण वात' के भड़कने और 'मज्जा धातु' (Brain tissue) के सूखने से जुड़ी है। जीवा आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से आपकी भूलने की बीमारी के असली कारण को पकड़कर इस भयंकर खतरे को जड़ से मिटाता है ताकि आप बिना डरे एक स्वस्थ और तेज़ दिमाग के साथ अपनी ज़िंदगी जी सकें।

Alzheimer's की 'असली पहचान' क्या है?

अल्ज़ाइमर दिमाग की वह भयंकर बीमारी है जिसमें ब्रेन सेल्स (Brain Cells) सिकुड़ कर मरने लगते हैं। लेकिन यह बीमारी अचानक नहीं होती, इसके लक्षण 10 से 15 साल पहले ही शरीर में दिखने लगते हैं, जिसे पहचानना बेहद ज़रूरी है:

  • माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट (MCI): यह अल्ज़ाइमर की सबसे पहली सीढ़ी है। इसमें इंसान रोज़ाना की छोटी-छोटी चीज़ें भूलने लगता है, लेकिन अपना काम खुद कर सकता है।
  • डिमेंशिया (Dementia): यह वह भयंकर अवस्था है जब दिमाग भयंकर रूप से सिकुड़ जाता है और इंसान अपनी पहचान, रिश्ते और रोज़मर्रा के काम पूरी तरह भूल जाता है।

कृत्रिम गोलियों का इस्तेमाल सिर्फ बाहरी इलाज है, जबकि असली गड़बड़ी शरीर के अंदर दबे हुए वात प्रकोप और 'आम' (गंदगी) के भयंकर ज़हर में चल रही होती है।

दिमाग डैमेज होने के भयंकर प्रकार

अल्ज़ाइमर और याददाश्त खत्म होने को मुख्य रूप से इस तरह बाँटा जा सकता है:

  • अर्ली-ऑनसेट अल्ज़ाइमर (Early-Onset Alzheimer's): यह बहुत खतरनाक प्रकार है जो 40 से 50 साल की उम्र में ही शुरू हो जाता है और दिमाग को तेज़ी से सुखा देता है।
  • लेट-ऑनसेट अल्ज़ाइमर (Late-Onset Alzheimer's): यह 65 साल की उम्र के बाद होता है, जिसमें याददाश्त धीरे-धीरे खत्म होती है।
  • वैस्कुलर डिमेंशिया (Vascular Dementia): हाई बीपी (BP) या स्ट्रोक के कारण दिमाग की नसों में खून का प्रवाह रुक जाने से याददाश्त का हमेशा के लिए चला जाना।

10 साल पहले दिखने वाले भयंकर शारीरिक संकेत (Warning Signs)

शरीर और दिमाग द्वारा दिए जाने वाले डरावने लक्षण इस प्रकार हैं:

  • सूँघने की क्षमता खत्म होना (Loss of Smell): अल्ज़ाइमर शुरू होने से सालों पहले इंसान को खाने या परफ्यूम की खुशबू आनी पूरी तरह बंद हो जाती है।
  • रास्ता भूल जाना: जानी-पहचानी जगहों पर अचानक रास्ता भटक जाना और यह समझ न आना कि वे वहाँ कैसे पहुँचे।
  • भयंकर डिप्रेशन और मूड स्विंग्स: बिना किसी वजह के अचानक भयंकर उदासी, डर और चिड़चिड़ापन महसूस होना।
  • एक ही बात बार-बार पूछना: कुछ ही देर पहले हुई बातचीत को पूरी तरह भूल जाना और एक ही सवाल को भयंकर रूप से बार-बार दोहराना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत भारी गोलियाँ रोकें और अपनी जाँच कराएँ।

बीमारी को बुलाने वाले असली और छिपे हुए कारण

इस भयंकर खतरे के पीछे गहरे अंदरूनी कारण ये होते हैं:

  • भयंकर वात प्रकोप और तनाव: लगातार सालों तक भयंकर मानसिक तनाव और चिंता में रहने से दिमाग की नसें सूखकर कड़क हो जाती हैं।
  • नींद की भयंकर कमी: रात को ठीक से न सोने से दिमाग अपनी सफाई (Detox) नहीं कर पाता, जिससे 'एमाइलॉइड प्लैक' (Amyloid plaque) नाम का भयंकर ज़हर नसों में जम जाता है।
  • जठराग्नि की कमज़ोरी (आम): पाचन खराब होने से शरीर में भयंकर 'आम' (गंदगी) बनता है, जो दिमाग की नसों में जाकर भयंकर रुकावट पैदा करता है।
  • गलत खानपान: बहुत ज़्यादा जंक फूड, कैफी़न (Caffeine) और चीनी खाने से 'मज्जा धातु' को पोषण मिलना बंद हो जाता है।

इन 'Hidden Risks' को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

इस स्थिति को अगर सिर्फ 'बढ़ती उम्र की थकावट' मानकर अनदेखा किया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • पूरी तरह याददाश्त खोना: इंसान अपनी बीवी, बच्चों और खुद का नाम तक हमेशा के लिए भूल जाता है।
  • बोलने और निगलने की क्षमता खत्म होना: बीमारी के भयंकर रूप लेने पर इंसान न कुछ बोल पाता है और न ही खाना निगल पाता है।
  • बेडरिडन (Bedridden) होना: दिमाग का शरीर से कंट्रोल खत्म होने पर इंसान जीवन भर के लिए बिस्तर पर आ जाता है।

दिमाग की कमज़ोरी पर आयुर्वेद का क्या चमत्कारी नज़रिया है?

आयुर्वेद में इस भयंकर बीमारी को 'स्मृति नाश' या 'अपस्मार' से जोड़कर देखा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, वात दोष के भयंकर प्रकोप से 'तर्पक कफ' सूख जाता है, जो दिमाग को नमी देता है। जब दूषित वात दिमाग की नसों में जाता है, तो वह पूरी याददाश्त को सुखा देता है। जीवा आयुर्वेद के डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं कि बीमारी 'प्राण वात' के बिगड़ने से है या कफ के सूखने से। आयुर्वेद में बस दिमाग को सुन्न करना मकसद नहीं है, बल्कि वो चाहते हैं कि नसों को अंदरूनी चिकनाहट मिले, सूजन खत्म हो और वात-पित्त हमेशा के लिए शांत हो।

जीवा आयुर्वेद दिमाग को सुरक्षित रखने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर व्यक्ति का शरीर और स्वास्थ्य (प्रकृति) अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह उनके अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: मरीज़ को होने वाले भूलने की रफ्तार, नींद और तनाव की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: मरीज़ की एमआरआई (MRI) रिपोर्ट और ली जा रही भारी दवाइयों का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: कुपित वात-पित्त दोष को पकड़ने के बाद ही दिमाग की अंदरूनी सूजन कम करने और याददाश्त बढ़ाने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

दिमाग को प्राकृतिक रूप से हील करने वाली अचूक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में दिमाग को ताकत देने, सूजन कम करने और वात को शांत करने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • ब्राह्मी (Brahmi): यह दिमाग के लिए आयुर्वेद का सबसे बड़ा प्राकृतिक टॉनिक है। यह भयंकर रूखेपन को सोख लेती है और 'तर्पक कफ' को बढ़ाती है।
  • शंखपुष्पी (Shankhpushpi): यह बढ़ा हुआ मानसिक तनाव शांत करने की सबसे अचूक दवा है। यह सूखी हुई नसों में दोबारा जान डालती है।
  • ज्योतिष्मती (Jyotishmati): यह याददाश्त (Memory) को कई गुना बढ़ा देती है और नसों में जमे ज़हर को काटती है।
  • अश्वगंधा (Ashwagandha): यह मानसिक तनाव की भयंकर ऐंठन को खोलता है और कमज़ोर हो चुकी नसों को फौलाद जैसी ताकत देता है।

दिमाग और शरीर को ताकत देने वाली पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, नसों को 'रीसेट' (Reset) करने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • शिरोधारा (Shirodhara): यह भूलने की बीमारी के लिए सबसे चमत्कारी थेरेपी है। माथे पर औषधीय तेल की धार गिराने से भयंकर एंग्ज़ायटी तुरंत खत्म होती है और नसें शांत होती हैं।
  • नस्य (Nasya): नाक में अणु तैल या औषधीय घी की बूँदें डालना सीधे दिमाग तक जाकर भयंकर सूखेपन को मिटाता है और याददाश्त को वापस लाता है।
  • बस्ती (Basti): पेट साफ कराकर शरीर से पुराने ज़हर और भयंकर वात दोष को निकालने का यह सबसे शक्तिशाली तरीका है।

वात-पित्त को शांत करने वाला शुद्ध आहार

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि इस भयंकर खतरे में आहार ही आपकी सबसे बड़ी दवा है:

क्या खाएँ?

  • गाय का शुद्ध घी: रोज़ाना अपने खाने में और रात को गर्म दूध में डालकर गाय का शुद्ध घी पिएँ। यह वात को शांत कर दिमाग की सूखी नसों को चिकनाहट (Lubrication) देता है।
  • गर्म और सुपाच्य भोजन: मूंग दाल, दलिया और ताज़ा बना गर्म भोजन लें, जो पचने में हल्का हो।
  • भिगोए हुए मेवे: सुबह खाली पेट भिगोए हुए बादाम और अखरोट खाने से भयंकर वात शांत होता है और दिमाग को ताकत मिलती है।

क्या न खाएँ?

  • वात बढ़ाने वाली दालें और सब्ज़ियाँ: राजमा, छोले, मटर, और बैंगन शरीर में भयंकर गैस (वात) बनाते हैं, जो सीधे दिमाग को जकड़ लेती है।
  • ठंडी और बासी चीज़ें: फ्रिज का ठंडा पानी, दही, आइसक्रीम और बासी खाना वात भड़काते हैं, इन्हें तुरंत बंद कर दें।
  • जंक फूड: यह शरीर में भयंकर 'आम' बनाता है जिससे जड़ी-बूटियाँ काम नहीं कर पातीं।

जीवा आयुर्वेद में रोगी की गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ रिपोर्ट देखकर नहीं, बल्कि पूरे शरीर की समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, याददाश्त कम होने की रफ्तार और सूँघने की क्षमता को आराम से सुना जाता है।
  • आपके द्वारा अनुभव किए गए तनाव, नींद की कमी और डिप्रेशन की हिस्ट्री के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके आहार, पानी पीने की आदत और पेट साफ (कब्ज़) होने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जानकर जमे 'आम' और वात दोष के भयंकर स्तर का पता लगाया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे +919266714040 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

दिमाग को पूरी तरह हील होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में भूलने की बीमारी का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: अगर भूलने की बीमारी और तनाव अभी शुरू हुआ है, तो अश्वगंधा और सही रूटीन से 3 से 4 हफ्तों में ही भयंकर डिप्रेशन खत्म हो जाता है और याददाश्त साफ होने लगती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर दिमाग की नसें सालों से सूख रही हैं, तो शिरोधारा और जड़ी-बूटियों से उन्हें 'रीसेट' होने में 3 से 6 महीने लग सकते हैं।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर जड़ी-बूटियों और शुद्ध आहार का कड़ाई से पालन करता है, तो भविष्य में यह भयंकर खतरा हमेशा के लिए टल जाता है।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक चिकित्सा (Allopathy) और आयुर्वेदिक उपचार में क्या बड़ा अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य याददाश्त, व्यवहार और दैनिक कार्यक्षमता को बनाए रखने की कोशिश करना मानसिक संतुलन, नर्वस सिस्टम सपोर्ट और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाना
नज़रिया समस्या को न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग, ब्रेन सेल्स की क्षति और उम्र से जुड़ी स्थिति के रूप में देखना इसे वात असंतुलन, मानसिक थकान और शरीर की समग्र कमजोरी से जोड़कर देखना
उपचार तरीका दवाएँ, कॉग्निटिव थेरेपी, रूटीन सपोर्ट और व्यवहार प्रबंधन शिरोधारा, ब्राह्मी, ध्यान, योग और आयुर्वेदिक जीवनशैली सपोर्ट
डाइट और लाइफस्टाइल मानसिक सक्रियता, नियमित व्यायाम, नींद और संतुलित भोजन की सलाह वात-शामक आहार, नियमित दिनचर्या, ध्यान और मानसिक शांति पर ज़ोर
लंबा असर रोग की प्रगति को धीमा करने और जीवन गुणवत्ता बनाए रखने पर ध्यान दीर्घकालिक मानसिक संतुलन और समग्र स्वास्थ्य सपोर्ट पर ध्यान

डॉक्टर की सलाह कब लें?

दिमाग की कमज़ोरी में अगर ये भयंकर संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • इंसान खुद के घर का रास्ता या अपने सगे घरवालों के नाम अचानक भूल जाए।
  • भयंकर भ्रम (Hallucinations) होने लगें और ऐसी चीज़ें दिखें जो असल में वहाँ नहीं हैं।
  • खाना निगलने में तकलीफ होने लगे और बार-बार गले में फँसने लगे।
  • व्यवहार अचानक बहुत आक्रामक हो जाए और बिना वजह भयंकर गुस्सा आने लगे।

निष्कर्ष

निष्कर्ष के तौर पर, अल्ज़ाइमर (Alzheimer's) शुरू होने से 10 साल पहले मिलने वाले ये भयंकर वॉर्निंग साइन्स सिर्फ बढ़ती उम्र का तकाज़ा नहीं हैं, बल्कि ये शरीर में वात दोष के भड़कने और नसों के सूखने का डरावना परिणाम हैं। सिर्फ मल्टीविटामिन्स खाकर खुद को तसल्ली देना आपकी नसों को हमेशा के लिए कमज़ोर कर सकता है। असली पहचान करके शरीर को अंदर से पोषण देना, शिरोधारा जैसी चमत्कारी थेरेपी लेना, ब्राह्मी-शंखपुष्पी जैसी अचूक जड़ी-बूटियाँ अपनाना और गाय के घी का शुद्ध वात-नाशक आहार ही इसका सबसे सुरक्षित इलाज है। जीवा आयुर्वेद आपकी नसों को प्राकृतिक रूप से इतना ताकतवर बना देता है कि आप बिना किसी भयंकर बीमारी के अपनी ज़िंदगी एक तेज़ और स्वस्थ दिमाग के साथ मज़े से जी सकें।

FAQs

नॉर्मल भूलने में इंसान कोई चीज़ रखकर भूल जाता है लेकिन बाद में याद आ जाती है। अल्ज़ाइमर में ब्रेन सेल्स मरने लगते हैं, जिससे इंसान यह भी भूल जाता है कि वह चीज़ किस काम आती है, जो बहुत खतरनाक है।

हाँ, यह सबसे शुरुआती और भयंकर वॉर्निंग साइन्स में से एक है। अल्ज़ाइमर का ज़हर सबसे पहले दिमाग के उस हिस्से को डैमेज करता है जो सूँघने की क्षमता को कंट्रोल करता है।

बिल्कुल। ब्राह्मी आयुर्वेद का सबसे चमत्कारी ब्रेन टॉनिक है। यह दिमाग की नसों का भयंकर रूखापन मिटाती है और नई कोशिकाओं का निर्माण करके याददाश्त को साफ करती है।

जी हाँ। जब हम गहरी नींद सोते हैं, तो दिमाग खुद की सफाई (Detox) करता है। नींद न आने से 'एमाइलॉइड' (Amyloid) नाम का ज़हर नसों में जमने लगता है, जो अल्ज़ाइमर का सबसे बड़ा कारण है।

बिल्कुल। शिरोधारा में माथे पर गिरने वाला गर्म औषधीय तेल नसों की अंदरूनी सूजन और भयंकर तनाव को धो देता है, जिससे दिमाग 'रीसेट' हो जाता है।

दिमाग का ज़्यादातर हिस्सा फैट (Fat) से बना है। शुद्ध गाय का घी भयंकर वात को शांत करने वाला सबसे बेहतरीन 'गुड फैट' है, जो दिमाग की नसों को ताकत और चिकनाहट देता है।

जी हाँ। बहुत ज़्यादा मीठा खाने से दिमाग में सूजन आती है। आधुनिक विज्ञान अल्ज़ाइमर को 'टाइप 3 डायबिटीज़' भी कहता है, क्योंकि शुगर नसों को भयंकर रूप से डैमेज कर देती है।

हाँ। अश्वगंधा कमज़ोर नसों को फौलाद जैसी ताकत देता है और भयंकर स्ट्रेस हार्मोन (कॉर्टिसोल) को कम करके दिमाग को सुरक्षित रखता है।

ज़रूर। नाक को आयुर्वेद में 'दिमाग का दरवाज़ा' कहा गया है। नाक में अणु तेल की बूंदें डालने से वह सीधे दिमाग तक पहुँचकर सूखेपन को मिटाता है।

जी हाँ। अगर 10 साल पहले दिखने वाले इन भयंकर लक्षणों को पहचानकर समय रहते आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों (ब्राह्मी, शंखपुष्पी), पंचकर्म और शुद्ध वात-नाशक डाइट को अपना लिया जाए, तो इस बीमारी को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है।

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