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PCOD में mood swing और self-confidence पर असर

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 29 Jul, 2026
  • category-iconUpdated on 29 Jul, 2026
  • category-iconWomen's Health
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जब भी किसी लड़की या महिला को PCOD (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज) होता है, तो लोगों को लगता है कि यह सिर्फ पीरियड्स के लेट होने या वज़न बढ़ने की बीमारी है। लेकिन असल ज़िन्दगी में इसकी कहानी इससे कहीं ज़्यादा बड़ी है। यह परेशानी सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह आपके मन, आपकी भावनाओं और आपके आत्मविश्वास को भी अंदर तक हिला कर रख देती है।अक्सर PCOD वाली लड़कियों को बिना किसी खास वजह के बहुत ज़्यादा चिड़चिड़ापन, उदासी, तेज़ गुस्सा या टेंशन होने लगती है। कई बार उन्हें खुद से ही चिढ़ होने लगती है। 

PCOD दिमागी सेहत को कैसे बिगाड़ता है?

PCOD शरीर के अंदर हार्मोन्स के बिगड़ने की समस्या है। इसमें महिलाओं के शरीर में जो अंडे बनने का सिस्टम होता है, वह ठीक से काम नहीं कर पाता। इसकी वजह से शरीर का पूरा बैलेंस बिगड़ जाता है।

अब बात यह है कि जब शरीर में हार्मोन्स ऊपर-नीचे होते हैं, तो उनका असर सिर्फ आपके पीरियड्स पर नहीं पड़ता। हमारे दिमाग में कुछ ऐसे केमिकल होते हैं जो हमें खुश रखते हैं, शांत रखते हैं और हमें एनर्जी देते हैं। हार्मोन्स बिगड़ने से दिमाग के ये केमिकल भी डिस्टर्ब हो जाते हैं। यही वजह है कि PCOD से जूझ रही लड़कियों का मूड बार-बार खराब होता है और वे अचानक से बहुत निराश या उदास हो जाती हैं।

मूड स्विंग क्यों होते हैं?

हार्मोन्स के बदलाव: महिलाओं के शरीर में कुछ खास हार्मोन्स होते हैं। PCOD में इन हार्मोन्स का बैलेंस पूरी तरह बिगड़ जाता है (कई बार पुरुषों वाले हार्मोन्स शरीर में बढ़ने लगते हैं)। इसका सीधा असर दिमाग पर होता है। आपने ध्यान दिया होगा कि कभी-कभी किसी बहुत छोटी सी बात पर आपको इतना तेज़ गुस्सा आ जाता है कि आप खुद हैरान रह जाती हैं, या फिर कोई बहुत ही नॉर्मल सी बात सुनकर आप रोने लगती हैं। यह सब इन्हीं बिगड़े हुए हार्मोन्स की वजह से होता है। हर महिला में इसके लक्षण अलग होते हैं। किसी को थोड़ा बहुत चिड़चिड़ापन होता है, तो किसी के लिए पूरा दिन खुशी से बिताना एक बड़ा टास्क बन जाता है।

ब्लड शुगर और मूड का कनेक्शन: PCOD वाली बहुत सी महिलाओं के शरीर में इंसुलिन (Insulin) ठीक से काम नहीं करता। इंसुलिन हमारे शरीर में शुगर को कंट्रोल करता है। जब यह ठीक से काम नहीं करता, तो खून में शुगर का लेवल अचानक से ऊपर-नीचे होने लगता है। जरा सोचिए, जब आपके शरीर की एनर्जी ही फिक्स नहीं है, तो आप कैसा महसूस करेंगी? आपको अचानक से बहुत तेज़ थकान होगी, घबराहट महसूस होगी और मूड एकदम से खराब हो जाएगा। इसलिए PCOD में सही खाना सिर्फ वज़न कम करने के लिए नहीं, बल्कि दिमाग को शांत रखने के लिए भी बहुत जरूरी है।

PCOD और कम होते आत्मविश्वास के बीच का रिश्ता

आत्मविश्वास कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो सिर्फ अच्छे सोचने से आ जाए। यह इस बात पर बहुत ज़्यादा निर्भर करता है कि आप खुद को शीशे में देखकर कैसा महसूस करती हैं और अपने शरीर को लेकर कितनी सहज हैं।

जब किसी लड़की का वज़न अचानक बढ़ने लगता है या चेहरे पर बाल आने लगते हैं, तो लोग, रिश्तेदार या दोस्त अनजाने में ही सही, लेकिन टोकने लगते हैं, "अरे, तू कितनी मोटी हो गई है", "चेहरे पर दाने क्यों हो रहे हैं?" इन बातों को बार-बार सुनने से एक लड़की का खुद पर से भरोसा टूटने लगता है। वह लोगों से मिलना-जुलना कम कर देती है और खुद की तुलना दूसरी लड़कियों से करके दुखी रहने लगती है।

शरीर में होने वाले बदलाव जो आत्मविश्वास को तोड़ देते हैं

PCOD सिर्फ एक हार्मोनल असंतुलन नहीं है, बल्कि यह एक महिला के मानसिक स्वास्थ्य, आत्म-छवि और आत्मविश्वास पर गहरा असर डालने वाली चुनौती है। 

वज़न का बढ़ना: PCOD में अचानक से वज़न बढ़ना सबसे आम बात है। सबसे ज़्यादा दुख तब होता है जब एक लड़की जिम जाती है, अपनी डाइट कंट्रोल करती है, लेकिन फिर भी वज़न मशीन की सुई नीचे नहीं आती। यह देखकर बहुत हताशा होती है। यह समझना बहुत जरूरी है कि PCOD में वज़न कम करना बाकी लोगों के मुकाबले थोड़ा मुश्किल और धीमा होता है। इसमें आपकी कोई गलती नहीं है, बस आपको थोड़ा ज़्यादा धैर्य रखना होता है।

चेहरे पर मुंहासे और ऑयली स्किन: चेहरे पर बड़े-बड़े और दर्द वाले दाने निकलना सिर्फ स्किन की प्रॉब्लम नहीं है। यह सीधे आपके कॉन्फिडेंस पर चोट करता है। कई लड़कियां घर से बाहर निकलने से पहले घंटों शीशे के सामने खड़ी होकर इन्हें मेकअप से छिपाने की कोशिश करती हैं। कोई फोटो खींच ले, तो उन्हें घबराहट होने लगती है।

चेहरे पर अनचाहे बाल: चेहरे, ठुड्डी या शरीर के बाकी हिस्सों पर लड़कों की तरह बाल आने लगना भावनात्मक रूप से बहुत रुला देने वाला होता है। हमारे समाज में सुंदरता को लेकर जो पैमाने बने हैं, उनमें यह चीज़ लड़कियों को बहुत असहज कर देती है। उन्हें बार-बार पार्लर भागना पड़ता है, जो अपने आप में एक बड़ा स्ट्रेस है।

बालों का झड़ना: एक तरफ चेहरे पर बाल आ रहे होते हैं, और दूसरी तरफ सिर के बाल गुच्छों में झड़ने लगते हैं। कंघी करते समय या नहाते समय टूटते हुए बालों को देखना बहुत बड़ा मेंटल स्ट्रेस देता है। बाल लड़कियों की खूबसूरती का अहम हिस्सा माने जाते हैं, ऐसे में मांग का चौड़ा होना या बाल पतले होना रातों की नींद उड़ा देता है।

भावनात्मक तनाव और घबराहट का बढ़ता असर

जब शरीर में रोज़ इतने सारे बदलाव हो रहे हों और लाख कोशिशों के बाद भी कोई अच्छा रिजल्ट न दिख रहा हो, तो तनाव (टेंशन) होना बहुत लाजमी है। कई लड़कियों को अपने भविष्य को लेकर डर लगने लगता है। उनके मन में सवाल आते हैं कि "क्या मैं कभी ठीक हो पाऊंगी?", "क्या मेरी शादी में दिक्कत आएगी?", या "क्या मैं कभी मां बन पाऊंगी?" अगर इन डरावने ख्यालों पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह डिप्रेशन का रूप भी ले सकते हैं।

रिश्तों, पढ़ाई और नौकरी पर PCOD का सीधा असर

बार-बार मूड खराब होना और हर वक्त थका-थका महसूस करना सिर्फ आप तक सीमित नहीं रहता। इसका असर आपके आस-पास के लोगों पर भी पड़ता है। बिना बात के घर वालों से, अपनी मां से या पति से बहस हो जाती है। ऑफिस में काम पर फोकस नहीं हो पाता। पढ़ाई में मन नहीं लगता क्योंकि दिमाग में हर वक्त अपनी सेहत की टेंशन चलती रहती है। लड़कियां पार्टियों में या शादियों में जाने से कतराने लगती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि कोई उनके वज़न या चेहरे को लेकर कुछ कह न दे।

PCOD और मानसिक संतुलन: आयुर्वेदिक दृष्टिकोण

आयुर्वेद के अनुसार, PCOD केवल एक शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह कफ और वात दोष का असंतुलन है जो आपके मनोवह स्रोत (मस्तिष्क की नाड़ियों) को प्रभावित करता है। कफ का बढ़ना मन में सुस्ती और निराशा लाता है, जबकि वात का बिगड़ना चिंता, घबराहट और अनियंत्रित मूड स्विंग्स पैदा करता है।

इसे संतुलित करने और आत्मविश्वास वापस पाने के कुछ सरल आयुर्वेदिक उपाय:

  • हार्मोनल सपोर्ट के लिए अडैप्टोजेंस: शतावरी (हार्मोन्स को संतुलित करने के लिए) और अश्वगंधा (तनाव के स्तर को घटाने के लिए) जैसी जड़ी-बूटियाँ मन को शांति और स्थिरता देती हैं।
  • वात-शामक प्राणायाम: रोज़ाना 10–15 मिनट अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम करें। यह तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को शांत करके एंग्जायटी को कम करता है।
  • पाचन अग्नि में सुधार: दिन में एक बार सौंफ, दालचीनी और थोड़ी-सी सोंठ (सूखे अदरक का पाउडर) की चाय पीएं। यह शरीर में टॉक्सिन्स (आम) को जमने नहीं देती, जिससे भारीपन और मूड ऑफ की समस्या दूर होती है।
  • शिरोभ्यंग और नस्य : रात को सोने से पहले गुनगुने तिल के तेल से सिर की मालिश करें और नाक में 2-2 बूंद देसी गाय का घी डालें। यह मन को गहरा विश्राम देता है और नींद की क्वालिटी सुधारता है।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह 

PCOD में होने वाले मूड स्विंग्स और गिरता आत्मविश्वास आपकी कोई व्यक्तिगत कमी नहीं है, बल्कि यह हॉर्मोनल उतार-चढ़ाव और वात-कफ दोष के असंतुलन का सीधा नतीजा हैं। शारीरिक बदलावों से निराश होने के बजाय खुद पर धैर्य रखें। नियमित प्राणायाम, तनाव-प्रबंधन और अश्वगंधा व शतावरी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के सही इस्तेमाल से हॉर्मोन्स को संतुलित करके मन की शांति और आत्मविश्वास दोबारा हासिल किया जा सकता है। 

इस Mood Swing और Low Confidence को कैसे संभालें?

PCOD के कारण होने वाले मूड स्विंग्स और गिरते आत्मविश्वास को सही जीवनशैली, आत्म-देखभाल और रोज़़मर्रा की छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके आसानी से संभाला जा सकता है। 

  • नियमित एक्सरसाइज: आपको कोई भारी वज़न उठाने की ज़रूरत नहीं है। रोज़़ 30 से 40 मिनट तेज़-तेज़ चलना (वॉक करना), योग करना या डांस करना बहुत मदद करता है। जब आप पसीना बहाती हैं, तो शरीर में कुछ 'हैप्पी हॉर्मोन्स' (खुशी देने वाले रसायन) बनते हैं जो आपके मूड को तुरंत अच्छा कर देते हैं।
  • संतुलित और सही खाना: खाने में बाहर का जंक फूड, मैदा और बहुत ज़्यादा मीठा बिल्कुल बंद कर दें। इसकी जगह घर का सादा खाना, हरी सब्जियां, दालें, ताजे फल और सलाद खाएं। सही खाना आपके ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखता है, जिससे आपको एकदम से गुस्सा या सुस्ती नहीं आती।
  • अच्छी और गहरी नींद: नींद कोई लग्जरी नहीं, बल्कि आपके शरीर की सबसे बड़ी जरूरत है। रोज़ रात को 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें। कोशिश करें कि रोज़ एक ही समय पर सोएं और सुबह एक ही समय पर उठें। अच्छी नींद आपके बिगड़े हुए हार्मोन्स को रिपेयर करने का काम करती है।
  • टेंशन कम करना: टेंशन लेने से PCOD और ज़्यादा बिगड़ता है। खुद को शांत रखने के तरीके खोजें। गहरी सांसें लें, अपना कोई पसंदीदा काम करें, म्यूजिक सुनें या अपनी किसी ऐसी दोस्त से बात करें जो आपको समझती हो।

कब किसी डॉक्टर या एक्सपर्ट से बात करनी चाहिए?

अगर आपको लगता है कि आप हफ्तों से लगातार उदास हैं, आपका किसी काम में मन नहीं लग रहा, आपको बहुत ज़्यादा रोना आ रहा है, या आपकी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी बहुत ज़्यादा डिस्टर्ब हो गई है, तो प्लीज इसे छुपाइए मत। किसी अच्छे डॉक्टर या साइकोलॉजिस्ट (काउंसलर) से बात करें। दिमाग का इलाज कराना भी उतना ही नॉर्मल है, जितना बुखार का इलाज कराना। सही मदद से आप बहुत जल्दी पहले जैसा महसूस करने लगेंगी।

निष्कर्ष

PCOD को सिर्फ एक शारीरिक बीमारी मानकर इग्नोर नहीं किया जा सकता। यह आपके मन, आपके मूड और आपके आत्मविश्वास पर बहुत गहरी चोट करती है। बार-बार उदास होना, गुस्सा आना या कॉन्फिडेंस गिरना कोई नाटक नहीं है, यह एक सच्ची परेशानी है। लेकिन अच्छी बात यह है कि इसे ठीक किया जा सकता है। अपनी लाइफस्टाइल को सुधार कर, अच्छा खाना खाकर, समय पर सोकर और अपनों के प्यार और सही डॉक्टर की मदद से आप PCOD को पूरी तरह कंट्रोल कर सकती हैं। बस खुद पर भरोसा रखिए, थोड़ा धैर्य रखिए, सब कुछ धीरे-धीरे एकदम सही हो जाएगा।

References

Polycystic ovary syndrome

Polycystic Ovary Syndrome: Etiology, Current Management, and Future Therapeutics - PMC

Polycystic Ovary Syndrome (PCOS) | FDA

Polycystic ovary syndrome | Office on Women's Health 

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ। कुछ महिलाओं में बर्थ कंट्रोल पिल्स शुरू करने के बाद मूड में बदलाव, चिड़चिड़ापन या भावनात्मक उतार-चढ़ाव महसूस हो सकते हैं, जबकि कई महिलाओं को कोई फर्क नहीं पड़ता। यदि दवा शुरू करने के बाद मूड में लगातार बदलाव महसूस हों, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

कुछ महिलाओं में मेटफॉर्मिन इंसुलिन रेजिस्टेंस और ब्लड शुगर को बेहतर नियंत्रित करने में मदद करती है। जब शरीर का मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा स्तर सुधरते हैं, तो कुछ लोगों को मूड और थकान में भी सुधार महसूस हो सकता है। हालांकि, यह मूड सुधारने की दवा नहीं है।

हाँ। लगातार कम या खराब नींद हार्मोनल संतुलन, तनाव और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद PCOD के समग्र प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कुछ शोध बताते हैं कि लंबे समय तक रहने वाली सूजन का संबंध मूड और मानसिक स्वास्थ्य से हो सकता है। हालांकि, यह संबंध जटिल है और अभी इस विषय पर और अधिक शोध की आवश्यकता है।

बिल्कुल। यदि किसी महिला को मूड स्विंग्स, चिंता या आत्मविश्वास की कमी हो, तो काउंसलिंग या थेरेपी के साथ संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद जैसे जीवनशैली बदलाव बेहतर परिणाम दे सकते हैं।

परिवार को यह समझना चाहिए कि मूड स्विंग्स या भावनात्मक बदलाव केवल "मिज़ाज" नहीं हैं, बल्कि हार्मोनल बदलावों का हिस्सा हो सकते हैं। सहयोग, धैर्य और बिना आलोचना के बात करना महिला के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत मददगार होता है।

हर समय खुश रहना किसी के लिए भी संभव नहीं है। PCOD के दौरान भावनात्मक उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि ये बदलाव लंबे समय तक बने रहें या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करें, तो समय पर मदद ली जाए।

हाँ। लगातार दूसरों से अपनी तुलना करना या सोशल मीडिया पर अवास्तविक सौंदर्य मानकों को देखना आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में स्क्रीन टाइम सीमित रखना और अपनी प्रगति पर ध्यान देना अधिक लाभदायक होता है।

हाँ। वजन, ऊर्जा, नींद या नियमित पीरियड्स जैसे छोटे-छोटे सुधारों को पहचानना और उनकी सराहना करना आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है। रिकवरी एक धीरे-धीरे होने वाली प्रक्रिया है।

हाँ। यदि बार-बार उदासी, चिंता, तनाव या आत्मविश्वास की कमी महसूस हो रही हो, तो मानसिक स्वास्थ्य के बारे में भी डॉक्टर से खुलकर बात करनी चाहिए। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों का साथ में ध्यान रखना बेहतर परिणाम देने में मदद करता है।

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