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PCOS में Acne, Facial Hair, Hair Loss — Triple Trouble का इलाज

Information By Dr. Keshav Chauhan
  • category-iconPublished on 04 May, 2026
  • category-iconUpdated on 04 May, 2026
  • category-iconWomen's Health
  • blog-view-icon5006

आजकल महिलाओं में पीसीओएस (PCOS) की समस्या तेज़ी से बढ़ रही है, और इसके साथ आने वाला 'ट्रिपल ट्रबल' चेहरे पर भयंकर मुहांसे (Acne), अनचाहे बाल (Facial Hair), और सिर के बालों का झड़ना (Hair Loss)  महिलाओं के आत्मविश्वास को पूरी तरह खत्म कर देता है। एलोपैथी में इन लक्षणों को दबाने के लिए अक्सर हार्मोनल गोलियाँ (Contraceptive Pills) दी जाती हैं। ये दवाइयाँ कुछ समय के लिए त्वचा को साफ ज़रूर करती हैं, लेकिन जड़ पर काम न करने से वज़न बढ़ता है और शरीर अंदर से कमज़ोर हो जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह समस्या खराब मेटाबॉलिज़्म और 'पित्त-कफ' दोष के भड़कने से जुड़ी है। जीवा आयुर्वेद प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से हार्मोन्स को संतुलित कर इस समस्या को जड़ से मिटाता है ताकि आपकी प्राकृतिक सुंदरता वापस लौट सके।

PCOS का यह 'Triple Trouble' (Acne, Facial Hair, Hair Loss) असल में क्या है?

पीसीओएस (Polycystic Ovary Syndrome) महिलाओं के प्रजनन तंत्र और मेटाबॉलिज़्म से जुड़ी एक जटिल स्थिति है। जब महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन (Androgen/Testosterone) ज़रूरत से ज़्यादा बनने लगते हैं, तो यह 'ट्रिपल ट्रबल' सामने आता है। बढ़ा हुआ एण्ड्रोजन त्वचा की तैल ग्रन्थियाँ (Sebaceous Glands) को अति-सक्रिय कर देता है, जिससे चेहरे पर भयंकर मवाद वाले मुहांसे निकलते हैं। यही पुरुष हार्मोन ठुड्डी (Chin) और सीने पर कड़े बाल (Hirsutism) उगा देता है, लेकिन सिर के बालों की जड़ों को कमज़ोर कर उन्हें तेज़ी से गिराने (Male-pattern baldness) लगता है। लेज़र या क्रीम का इस्तेमाल सिर्फ बाहरी इलाज है, जबकि असली गड़बड़ी शरीर के अंदर चल रही होती है।

PCOS में दिखने वाले इन हार्मोनल लक्षणों के भयंकर संकेत

इस ट्रिपल ट्रबल के दौरान शरीर द्वारा दिए जाने वाले भयंकर लक्षण इस प्रकार हैं:

  • सिस्टिक एक्ने (Cystic Acne): गालों के निचले हिस्से (Jawline) और ठुड्डी पर बड़े, दर्दनाक और गहरे दाने निकलना जो जल्दी ठीक नहीं होते।
  • अनचाहे बाल (Hirsutism): होठों के ऊपर (Upper lip), ठुड्डी, सीने और पेट पर मोटे और काले बालों का तेज़ी से उगना।
  • बालों का झड़ना (Hair Thinning): सिर के बीच वाले हिस्से (Crown area) से बालों का बहुत पतला होना और रोज़ाना कंघी करते समय गुच्छों में टूटना।
  • त्वचा का काला पड़ना (Acanthosis Nigricans): गर्दन के पीछे, काँख (Armpits) और जाँघों के बीच की त्वचा का बहुत ज़्यादा काला और मोटा हो जाना।

ये संकेत अगर लगातार दिखें तो तुरंत अपने ब्लड टेस्ट कराएँ और चिकित्सक से परामर्श लें।

PCOS में त्वचा और बालों के खराब होने के असली कारण

चेहरे पर दाने और बालों के झड़ने के पीछे गहरे अंदरूनी कारण होते हैं:

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance): जब शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो पैंक्रियास ज़्यादा इंसुलिन बनाता है। यह अतिरिक्त इंसुलिन ओवरीज़ (Ovaries) को पुरुष हार्मोन बनाने के लिए उकसाता है।
  • रक्त में पित्त और 'आम' का संचय: खराब पाचन और जंक फूड से बना 'आम' (Toxins) रक्त को दूषित करता है। यह पित्त की भयंकर गर्मी को बढ़ाकर चेहरे पर दाने पैदा करता है।
  • तनाव और नींद की कमी: स्ट्रेस हार्मोन (Cortisol) सीधे तौर पर एण्ड्रोजन के स्तर को बढ़ा देता है, जिससे बाल झड़ने की समस्या बहुत तेज़ी से बढ़ती है।
  • विरुद्ध आहार: ठंडी और भारी चीज़ें एक साथ खाने से शरीर का मेटाबॉलिज़्म सुस्त हो जाता है और ओवरीज़ में सिस्ट (Cysts) बनने लगती हैं।

PCOS के इन लक्षणों को अनदेखा करने के गंभीर जोखिम

'ट्रिपल ट्रबल' को अगर सिर्फ बाहरी समस्या मानकर अनदेखा किया जाए, तो यह कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है:

  • गंभीर अवसाद (Depression): चेहरे पर बाल और मुहांसे महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालते हैं, जिससे वे समाज में जाने से कतराने लगती हैं और डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं।
  • बांझपन (Infertility): हार्मोन्स का यह असंतुलन अंडे (Ovum) को सही समय पर फूटने (Ovulation) नहीं देता, जिससे माँ बनने में भयंकर परेशानी आती है।
  • डायबिटीज़ का खतरा: इंसुलिन रेजिस्टेंस को अगर समय पर ठीक न किया जाए, तो यह कम उम्र में ही टाइप-2 डायबिटीज़ (Type-2 Diabetes) में बदल जाता है।

PCOS के 'Triple Trouble' पर आयुर्वेद का क्या नज़रिया है?

आयुर्वेद में PCOS को 'आर्तव क्षय' या 'पुष्पघ्नी जातहारिणी' से जोड़कर देखा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, वात और कफ दोष के बिगड़ने से प्रजनन तंत्र के स्रोत (Channels) ब्लॉक हो जाते हैं। जब यह ब्लॉकेज इंसुलिन और रस धातु को खराब करती है, तो 'आम' रक्त में मिलकर मुहांसे (पित्त) और बालों का झड़ना (वात) शुरू कर देता है। डॉक्टर नाड़ी देखकर मर्ज़ को पकड़ते हैं कि हार्मोन किस दोष की वजह से बिगड़े हैं। आयुर्वेद में बस लेज़र से बाल जलाना या मुहांसों की क्रीम लगाना मकसद नहीं है, बल्कि वो चाहते हैं कि बीमारी जड़ से ठीक हो, ओवरीज़ साफ हों, और पुरुष हार्मोन का स्तर प्राकृतिक रूप से कम हो।

जीवा आयुर्वेद PCOS के हार्मोन्स को संतुलित करने के लिए कैसे काम करता है?

जीवा आयुर्वेद का उपचार दृष्टिकोण पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इलाज शुरू करने से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट इन मुख्य बातों पर बारीकी से ध्यान देते हैं:

  • कस्टमाइज़्ड इलाज: हर महिला का शरीर और स्वास्थ्य (प्रकृति) अलग होता है, इसलिए इलाज पूरी तरह से उनके अनुकूल ही तय किया जाता है।
  • लक्षणों की पहचान: मरीज़ को दिख रहे मुहांसों की प्रकृति (मवाद या दर्द), बालों के झड़ने और पीरियड्स के समय की बारीकी से जाँच की जाती है।
  • पुरानी मेडिकल हिस्ट्री: मरीज़ द्वारा ली जा रही गर्भनिरोधक गोलियाँ या अन्य हार्मोनल दवाओं का पूरा रिकॉर्ड देखा जाता है।
  • सटीक इलाज की रूपरेखा: कुपित दोषों को पकड़ने के बाद ही इंसुलिन रेजिस्टेंस को तोड़ने और हार्मोन्स को बैलेंस करने का सबसे सटीक आयुर्वेदिक इलाज शुरू किया जाता है।

PCOS के लक्षणों को प्राकृतिक रूप से मिटाने वाली अचूक जड़ी-बूटियाँ

आयुर्वेद में ओवरीज़ को ताकत देने, सूजन कम करने और एण्ड्रोजन को घटाने के लिए ये जड़ी-बूटियाँ बेहद असरदार हैं:

  • शतावरी (Shatavari): यह महिलाओं के लिए सबसे बेहतरीन जड़ी-बूटी है। यह ओवरीज़ को ताकत देती है और बिगड़े हुए हार्मोन्स (एस्ट्रोजन) को प्राकृतिक रूप से संतुलित करती है।
  • कचनार (Kanchanar): यह शरीर की ग्रन्थियों (Glands) की सूजन और ओवरीज़ में बनी सिस्ट (Cysts) को पिघलाने में बेहद असरदार है।
  • सारिवा (Sariva): यह एक बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर (Blood purifier) है। यह खून से 'आम' को साफ कर सिस्टिक एक्ने (मुहांसों) को जड़ से खत्म करता है।
  • भृंगराज (Bhringraj): यह सिर की त्वचा के वात दोष को शांत करता है और बालों की जड़ों को मज़बूत कर बालों का झड़ना तुरंत रोकता है।

ओवरीज़ और रक्त को साफ करने की पंचकर्म चिकित्सा

प्राकृतिक तरीके से शरीर को अंदर से शुद्ध कर, हार्मोन्स को 'रीसेट' (Reset) करने की आयुर्वेदिक प्रक्रिया:

  • विरेचन (Virechana): शरीर से पुराने रसायनों और टॉक्सिन्स को निकालने के लिए यह एक अचूक चिकित्सा है। औषधीय जड़ी-बूटियाँ देकर पेट साफ कराया जाता है, जिससे लिवर और रक्त से अतिरिक्त पुरुष हार्मोन (Testosterone) और पित्त बाहर निकल जाता है।
  • नस्य (Nasya): नाक में औषधीय तेल की बूँदें डालना पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) को एक्टिव करता है, जो पूरे शरीर के हार्मोन्स को कंट्रोल करने का मुख्य केंद्र है।

PCOS के ट्रिगर्स को खत्म करने वाला शुद्ध आहार

आयुर्वेदिक वेलनेस में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि PCOS में आहार ही आपकी सबसे बड़ी दवा है:

क्या खाएँ?

  • सुपाच्य और हल्का भोजन: मूंग की दाल, लौकी और पेठे का इस्तेमाल बढ़ाएँ, यह इंसुलिन लेवल को नॉर्मल रखते हैं।
  • मेथी और दालचीनी: सुबह खाली पेट मेथी दाना का पानी और चुटकी भर दालचीनी लेना इंसुलिन रेजिस्टेंस को तेज़ी से कम करता है।
  • हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ: पालक और ब्रोकली (अच्छी तरह पकाकर) खाएँ, जो शरीर से अतिरिक्त एण्ड्रोजन को साफ करती हैं।

क्या न खाएँ?

  • डेयरी और चीनी: बाज़ार का दूध (जिसमें कृत्रिम हार्मोन हो सकते हैं), मिठाइयाँ और चीनी का सेवन बिल्कुल बंद कर दें।
  • ग्लूटेन और मैदा: पिज़्ज़ा, बर्गर, और रिफाइंड आटा शरीर में भयंकर 'आम' और सूजन बढ़ाते हैं जो सीधे मुहांसों के रूप में चेहरे पर निकलते हैं।
  • जंक फूड: तली-भुनी चीज़ें लिवर पर दबाव डालती हैं, जिससे हार्मोन्स और ज़्यादा बिगड़ जाते हैं।

जीवा आयुर्वेद में PCOS की रोगी की गहराई से जाँच कैसे होती है?

जीवा आयुर्वेद में मरीज़ की जाँच सिर्फ अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखकर नहीं, बल्कि पूरी समझ के साथ की जाती है।

  • सबसे पहले आपकी परेशानी, मुहांसों और बालों के झड़ने की रफ्तार को आराम से सुना जाता है।
  • आपके द्वारा इस्तेमाल की गई मुहांसों की क्रीम या हार्मोनल गोलियों की हिस्ट्री के बारे में पूछा जाता है।
  • आपके आहार, तनाव और पेट साफ (कब्ज़) होने की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • नाड़ी जाँच और शरीर की प्रकृति को जानकर 'आम' के स्तर का पता लगाया जाता है।

हमारे यहाँ आपके इलाज का सफर कैसे होता है?

जीवा आयुर्वेद में हम इलाज की पूरी प्रक्रिया को बहुत ही व्यवस्थित और सही क्रम में रखते हैं, ताकि आपको अपनी बीमारी के लिए सबसे सटीक समाधान मिल सके।

  • अपनी जानकारी साझा करें: इलाज की शुरुआत के लिए अपनी सेहत से जुड़ी जरूरी जानकारी दें। इसके लिए आप सीधे 0129 4264323 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं।
  • डॉक्टर से अपॉइंटमेंट तय करें: आपकी सुविधा के अनुसार डॉक्टर से बात करने का समय तय किया जाता है, आप क्लिनिक विजिट या ₹49 में वीडियो कंसल्टेशन के जरिए घर बैठे भी जुड़ सकते हैं।
  • बीमारी को समझना: डॉक्टर आपसे विस्तार से बात करके आपकी तकलीफ, लाइफस्टाइल और शरीर की प्रकृति (Prakriti) को समझते हैं, ताकि बीमारी की असली वजह तक पहुँचा जा सके।
  • कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान: पूरी जांच के बाद आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड इलाज योजना बनाई जाती है, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयाँ, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार शामिल होते हैं, ताकि आपको अंदर से स्थायी राहत मिल सके।

पूरी तरह ठीक होने में कितना समय लगता है?

जीवा आयुर्वेद में PCOS का इलाज पूरी तरह से हर मरीज़ के हिसाब से किया जाता है:

  • हल्की समस्या में सुधार: अगर मुहांसे और बालों का झड़ना अभी शुरू हुआ है, तो आहार बदलने और दवाइयों से 6 से 8 हफ्तों में ही त्वचा साफ होने लगती है।
  • पुरानी बीमारी का समय: अगर अनचाहे बाल बहुत सख्त हो गए हैं और पीरियड्स महीनों से रुके हुए हैं, तो हार्मोन्स को पूरी तरह 'रीसेट' होने में 6 से 9 महीने लग सकते हैं।
  • स्थायी परिणाम: मरीज़ अगर जड़ी-बूटियों और मेथी के पानी का कड़ाई से पालन करता है, तो भविष्य में गर्भनिरोधक गोलियों के बिना भी पीरियड्स नियमित रहते हैं और 'ट्रिपल ट्रबल' खत्म हो जाता है।

मरीज़ों का भरोसा – PCOS और मुहांसों से मुक्ति के जीवन बदलने वाले अनुभव

मेरा नाम श्वेता है और मैं नोएडा की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र 30 साल है। मुझे साल 2006 से पीसीओडी (PCOD) की शिकायत थी, जिसके लिए मैंने काफी सालों तक एलोपैथिक ट्रीटमेंट किया, लेकिन मुझे कोई रिजल्ट नहीं मिला। फिर मैंने होम्योपैथिक ट्रीटमेंट भी लिया, पर उससे भी कोई आराम नहीं मिला। तभी मैंने टीवी पर जीवा आयुर्वेदा का प्रोग्राम देखा। उसके बाद मैं जीवा के नोएडा ब्रांच में गई, जहाँ मेरी मुलाकात डॉक्टर अभिलाषा तिवारी से हुई। उन्होंने मेरी प्रॉब्लम को बहुत अच्छे से समझा और मेरा ट्रीटमेंट शुरू किया।मैंने साल 2017 से यह ट्रीटमेंट शुरू किया था। डेढ़ साल तक इलाज लेने के बाद मुझे पीसीओडी में बहुत अच्छा सुधार और रिजल्ट मिला। पीसीओडी का ट्रीटमेंट खत्म होने के बाद मैंने इनफर्टिलिटी के लिए ट्रीटमेंट शुरू किया। जीवा के इलाज की मदद से आज मेरा एक छोटा सा बेटा है। मैं इस सबके लिए डॉक्टर अभिलाषा तिवारी और पूरे जीवा परिवार को धन्यवाद करना चाहती हूँ।

जीवा आयुर्वेद में इलाज का अनुमानित खर्च

आपके स्वास्थ्य के लिए आवश्यक आर्थिक निवेश को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। जीवा आयुर्वेद में, हम अपनी सेवाओं के खर्च में पूरी पारदर्शिता रखते हैं, जिससे आप अपनी चिकित्सीय ज़रूरतों के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प चुन सकें।

इलाज का खर्च

जो मरीज़ मानक और निरंतर देखभाल चाहते हैं, उनके लिए दवा और परामर्श का मासिक खर्च आमतौर पर Rs.3,000 से Rs.3,500 के बीच होता है। कृपया ध्यान दें कि यह एक अनुमानित आधार है। अंतिम खर्च मरीज़ की स्थिति की सटीक प्रकृति और गंभीरता पर गहराई से निर्भर करता है।

प्रोटोकॉल

अधिक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण के लिए, हम विशेष पैकेज प्रोटोकॉल प्रदान करते हैं। ये योजनाएँ शारीरिक लक्षणों और समग्र जीवनशैली सुधार दोनों को संबोधित करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।

पैकेज में शामिल हैं:

इस प्रोटोकॉल के खर्च में Rs.15,000 से Rs.40,000 तक का एकमुश्त भुगतान शामिल है, जो इलाज की पूरी 3 से 4 महीने की अवधि को कवर करता है।

जीवाग्राम

गहन और पूरी तरह से समर्पित देखभाल की आवश्यकता वाले मरीज़ों के लिए, हमारे जीवाग्राम केंद्र उपचार का बेहतरीन अनुभव प्रदान करते हैं। जीवाग्राम एक शांत, पर्यावरण के अनुकूल माहौल में स्थित एक समग्र स्वास्थ्य केंद्र है।

कार्यक्रम में आमतौर पर शामिल हैं:

जीवाग्राम में 7-दिनों के स्वास्थ्य प्रवास का खर्च लगभग ₹1 लाख है, जो आपके शरीर और दिमाग को फिर से तरोताज़ा करने में मदद करने के लिए निरंतर व्यक्तिगत देखभाल सुनिश्चित करता है।

लोग जीवा आयुर्वेद पर क्यों भरोसा करते हैं?

जीवा आयुर्वेद में हमारा मकसद सिर्फ लक्षणों को कुछ समय के लिए दबाना नहीं, बल्कि बीमारी की असली वजह को जड़ से खत्म करना है। यही वह खास बात है जिसकी वजह से लाखों मरीज़ हम पर दिल से भरोसा करते हैं।

  • जड़ कारण पर ध्यान: सिर्फ लक्षण नहीं, बीमारी की असली वजह को समझकर इलाज किया जाता है।
  • व्यक्तिगत उपचार: हर मरीज के शरीर, प्रकृति और लाइफस्टाइल के अनुसार अलग प्लान बनाया जाता है।
  • सिस्टेमैटिक जांच: वात असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को गहराई से समझकर इलाज तय किया जाता है।
  • प्राकृतिक दवाइयाँ: शुद्ध जड़ी-बूटियों पर आधारित दवाइयाँ, बिना शरीर पर अतिरिक्त बोझ डाले।
  • अनुभवी डॉक्टर: आयुर्वेद विशेषज्ञों की टीम द्वारा लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है।
  • बेहतर परिणाम: 90%+ मरीजों में धीरे-धीरे स्पष्ट और सकारात्मक सुधार देखा गया है।

आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक उपचार में क्या अंतर है?

पहलू आधुनिक चिकित्सा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
इलाज का मुख्य लक्ष्य OCPs से पीरियड्स को कृत्रिम रूप से नियंत्रित करना और एण्ड्रोजन दबाना ओवरीज़ की ‘अग्नि’ को मज़बूत कर हार्मोन को प्राकृतिक रूप से संतुलित करना
नज़रिया समस्या को केवल हार्मोनल इश्यू मानना ‘अग्नि’, ‘आम’ और ओवरी फंक्शन को एक साथ जोड़कर देखना
उपचार तरीका दवाइयों से मुहांसे और चक्र को अस्थायी रूप से कंट्रोल करना शतावरी, कचनार जैसी जड़ी-बूटियों से अंदरूनी संतुलन बनाना
डाइट और लाइफस्टाइल लाइफस्टाइल पर कम ज़ोर, दवाओं पर निर्भरता अग्नि-वर्धक आहार और संतुलित दिनचर्या को आधार बनाना
लंबा असर दवा छोड़ते ही समस्या का दोबारा और तेज़ी से लौटना ‘आम’ की सफाई से जड़ से सुधार और दीर्घकालिक संतुलन

PCOS के भयंकर लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह कब लें?

हार्मोनल बदलाव के संकेत दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए यदि:

  • चेहरे, ठुड्डी और सीने पर पुरुषों की तरह कड़े और काले बाल तेज़ी से उगने लगें।
  • पीरियड्स महीनों तक न आएं या आने पर भयंकर दर्द हो।
  • सिर के आगे के हिस्से (Crown) से बाल गुच्छों में गिरकर स्कैल्प (Scalp) साफ दिखने लगे।
  • वज़न बिना कुछ ज़्यादा खाए तेज़ी से बढ़ता जाए और कम न हो।

निष्कर्ष: 

आयुर्वेद के हिसाब से PCOS का 'ट्रिपल ट्रबल' (मुहांसे, अनचाहे बाल, बालों का झड़ना) मुख्य रूप से खराब मेटाबॉलिज़्म और इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण बिगड़े हुए वात-कफ दोष से जुड़ी समस्या है। अप्राकृतिक जीवनशैली से बना 'आम' पुरुष हार्मोन को बढ़ाता है। सिर्फ बाहर से क्रीम लगाने या लेज़र करवाने से दाने कुछ देर के लिए छुप जाते हैं लेकिन बीमारी अंदर ही रहती है और शरीर कमज़ोर होता जाता है। इलाज में शरीर की शुद्धि, शतावरी जैसी जड़ी-बूटियाँ और मेथी का शुद्ध आहार सबसे ज़्यादा आवश्यक है, जिससे आपका शरीर बिना किसी कृत्रिम गोली के जीवन भर सेहतमंद बना रहे।

FAQs

हाँ, जब आयुर्वेदिक इलाज से एण्ड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का स्तर कम होता है और सिर की त्वचा का वात दोष शांत होता है, तो भृंगराज जैसी जड़ी-बूटियों की मदद से बालों की जड़ें दोबारा मज़बूत होती हैं और नए बाल उगने लगते हैं।

नहीं, लेज़र सिर्फ बाहर से बालों को जलाता है। जब तक शरीर के अंदर पुरुष हार्मोन (Testosterone) बढ़ा रहेगा, तब तक बाल दोबारा और सख्त होकर वापस आते रहेंगे। जड़ से इलाज ज़रूरी है।

हाँ, बाज़ार में मिलने वाले पैकेटबंद दूध में अक्सर ऐसे तत्व होते हैं जो इंसुलिन के स्तर को तेज़ी से बढ़ाते हैं, जिससे मुहांसे और पीसीओएस की समस्या भड़क जाती है।

बिल्कुल। मेथी दाना (Fenugreek) प्राकृतिक रूप से इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करता है। जब इंसुलिन संतुलित होता है, तो पुरुष हार्मोन अपने आप कम हो जाता है और चेहरे के मुहांसे साफ हो जाते हैं।

हाँ, 100% संभव है। पीसीओएस बांझपन नहीं है, बल्कि अंडे के न फूटने की समस्या है। आयुर्वेद में पंचकर्म और शतावरी की मदद से ओव्यूलेशन (Ovulation) को प्राकृतिक रूप से ठीक कर गर्भधारण किया जा सकता है।

नहीं, पीसीओएस कोई सर्दी-ज़ुकाम नहीं जो अपने आप चला जाए। यह एक लाइफस्टाइल डिज़ीज़ है। अगर इसका सही इलाज और परहेज़ न किया जाए, तो यह उम्र के साथ डायबिटीज़ और हृदय रोगों में बदल सकता है।

कभी नहीं। पीसीओएस के दाने बहुत गहरे और मवाद वाले होते हैं। इन्हें फोड़ने से इन्फेक्शन पूरे चेहरे पर फैल जाता है और ज़िंदगी भर के लिए गहरे गढ्ढे (Scars) बन जाते हैं।

पीसीओएस में इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण शरीर खाने को ऊर्जा में बदलने के बजाय सीधे फैट (चर्बी) के रूप में जमा करने लगता है। इसलिए जब तक इंसुलिन संतुलित नहीं होता, वज़न कम नहीं होता।

हाँ, तनाव के दौरान शरीर में 'कॉर्टिसोल' हार्मोन निकलता है जो सीधे तौर पर ओवरीज़ को पुरुष हार्मोन बनाने के लिए उकसाता है। इससे रातों-रात चेहरे पर भयंकर दाने निकल आते हैं।

बिल्कुल। जीवा आयुर्वेद में सही डाइट, जड़ी-बूटियों (कचनार, सारिवा) और विरेचन पंचकर्म के ज़रिए ओवरीज़ अपना काम प्राकृतिक रूप से करना सीख जाती हैं, जिससे गोलियों की ज़रूरत हमेशा के लिए खत्म हो जाती है।

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