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Green Tea vs Herbal Tea: acidity और नींद पर क्या असर पड़ता है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

आजकल किसी के भी घर या ऑफिस चले जाइए, दूध वाली चाय के साथ आपको ग्रीन टी या हर्बल टी के डिब्बे ज़रूर मिल जाएंगे। फिटनेस और वज़न कम करने के चक्कर में लोग इन्हें खूब पी रहे हैं।

पर हम में से ज़्यादातर लोग एक बड़ी भूल कर बैठते हैं। हम सोचते हैं कि 'ग्रीन टी' और 'हर्बल टी' दोनों एक ही चीज हैं। हमें लगता है कि कोई भी पी लो, फायदा तो करेगी ही। जबकि सच ये है कि ये दोनों एकदम अलग हैं। इनके बनने का तरीका, इनमें डलने वाली चीजें और हमारे शरीर (खासकर पेट और नींद) पर इनका असर बिल्कुल अलग होता है।

आपको अक्सर गैस या एसिडिटी की दिक्कत रहती है, या रात में ठीक से नींद नहीं आती, तो आपके लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि आपको कौन सी चाय पीनी चाहिए।

ग्रीन टी है क्या?

ग्रीन टी असल में चाय के पत्तों से ही बनती है। जी हां, ये उसी पौधे के पत्ते हैं जिनसे हमारी रोज़ की दूध वाली या काली चाय तैयार होती है।

फर्क बस इतना है कि हमारी रोज़ वाली चाय की पत्तियों को बहुत ज़्यादा सुखाया जाता है, जिससे वो काली पड़ जाती हैं। वहीं, ग्रीन टी की पत्तियों को बहुत ही कम सुखाया और प्रोसेस किया जाता है, ताकि उनका हरा रंग और उनके असली फायदे बचे रहें।

एक और सबसे ज़रूरी बात, ग्रीन टी में कुदरती रूप से 'कैफीन' पाया जाता है। कैफीन वही चीज है जो कॉफी में भी होती है।

हर्बल टी क्या होती है?

'हर्बल टी' असल में चाय है ही नहीं! इसमें चाय की पत्तियां बिल्कुल नहीं होतीं। यह अलग-अलग तरह के फूलों, बीजों, जड़ों, मसालों और जड़ी-बूटियों को पानी में उबालकर बनाई जाती है। जैसे:

  • कैमोमाइल (Chamomile) टी
  • पेपरमिंट (पुदीना) टी
  • सौंफ या जीरे की चाय
  • अदरक या तुलसी की चाय

चूंकि इसमें चाय की पत्ती नहीं होती, इसलिए लगभग सभी हर्बल टी में कैफीन बिल्कुल नहीं (Zero Caffeine) होता है।

ग्रीन टी और हर्बल टी में क्या फर्क है?

  1. कैफीन: ग्रीन टी में कैफीन होता है, जो आपके दिमाग को अलर्ट करता है। हर्बल टी में कैफीन नहीं होता, यह आपको आराम देती है।
  2. स्वाद: ग्रीन टी का स्वाद हल्का सा कड़वा हो सकता है। वहीं, हर्बल टी का स्वाद इस बात पर निर्भर करता है कि आपने उसमें क्या डाला है (जैसे पुदीने की चाय ठंडी लगेगी, अदरक की चाय तीखी लगेगी)।
  3. काम करने का तरीका: ग्रीन टी शरीर को चुस्त बनाने और वज़न कंट्रोल करने के लिए ज़्यादा पी जाती है। हर्बल टी पेट को आराम देने, सर्दी-खांसी ठीक करने या रात को अच्छी नींद लाने के लिए पी जाती है।

आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद शरीर को वात, पित्त और कफ के हिसाब से देखता है।

  • आपके शरीर में 'पित्त' (गर्मी/एसिडिटी) ज़्यादा है, तो आपको बहुत गर्म और कैफीन वाली चीजें (जैसे ग्रीन टी) कम पीनी चाहिए। आपके लिए ठंडी तासीर वाली हर्बल टी (जैसे सौंफ) अच्छी रहेगी।
  • आपको आलस (कफ) ज़्यादा आता है, तो दिन में एक कप ग्रीन टी आपके शरीर को खोल सकती है। आयुर्वेद यह भी कहता है कि कोई भी एक चाय हर इंसान के लिए अमृत नहीं हो सकती। आपको अपने शरीर की बात सुननी होगी।

एसिडिटी (सीने की जलन) पर ग्रीन टी का क्या असर होता है?

अगर आपका पेट बहुत नाजुक है या आपको अक्सर गैस और सीने में जलन रहती है, तो आपको ग्रीन टी से थोड़ा सावधान रहना चाहिए।

खाली पेट पीने का नुकसान: कई लोग वज़न कम करने के चक्कर में सुबह उठते ही सबसे पहले खाली पेट गर्म ग्रीन टी पी लेते हैं। ग्रीन टी में 'टैनिन' और 'कैफीन' होता हैं। जब यह खाली पेट अंदर जाता है, तो यह पेट में बनने वाले एसिड (तेजाब) को और बढ़ा देता है। इससे कई लोगों को सीने में तेज जलन, खट्टी डकारें, या उल्टी जैसा मन होने लगता है।

क्या करें? 

अगर आपको ग्रीन टी पीनी ही है, तो कभी भी खाली पेट न पिएं। इसे हमेशा नाश्ते के बाद या दोपहर के खाने के 1-2 घंटे बाद पिएं।

एसिडिटी पर हर्बल टी का क्या असर होता है?

अगर पेट में गैस है, तो हर्बल टी पानी का काम कर सकती है।

अधिकांश कैफीन-मुक्त हर्बल टी कई लोगों में पेट को आराम पहुंचा सकती हैं। हालांकि हर हर्बल टी सभी लोगों के लिए उपयुक्त नहीं होती। बल्कि आप सही हर्बल टी चुनें, तो यह आपकी एसिडिटी को शांत कर सकती है।

  • सौंफ की चाय: यह पेट को ठंडक देती है और गैस निकालती है।
  • पुदीने की चाय: यह पाचन को शांत करती है।
  • अदरक की चाय (हल्की): अगर बहुत ज़्यादा मसालेदार खाना खा लिया है, तो हल्की अदरक की चाय पेट को आराम दे सकती है।

Doctor’s Note

ग्रीन टी और हर्बल टी का शरीर पर बिल्कुल अलग असर होता है। ग्रीन टी में कैफीन और टैनिन होता है, जिसे खाली पेट पीने से गंभीर एसिडिटी (सीने में जलन) हो सकती है और शाम को पीने से आपकी नींद उड़ सकती है। इसके विपरीत, हर्बल टी (जैसे सौंफ, पुदीना या कैमोमाइल) पूरी तरह से कैफीन-मुक्त होती है; यह पेट की गैस को शांत करती है और गहरी नींद लाने में मदद करती है।

एसिडिटी से बचने के लिए ग्रीन टी को हमेशा खाने के 1-2 घंटे बाद ही पिएं, और रात के समय रिलैक्स करने के लिए सिर्फ हर्बल टी का ही चुनाव करें।

आपकी नींद पर ग्रीन टी का क्या असर होता है?

ग्रीन टी में मौजूद कैफीन दिमाग को संकेत देता है कि "अभी काम का समय है, जागते रहो।"

यही वजह है कि जो लोग ऑफिस में काम करते हैं या पढ़ाई करते हैं, वे दोपहर में ग्रीन टी पीना पसंद करते हैं। लेकिन अगर आप इसे शाम 5-6 बजे के बाद पिएंगे, तो यह आपकी रातों की नींद उड़ा सकती है। आपको बिस्तर पर करवटें बदलनी पड़ेंगी, नींद बहुत हल्की आएगी और आप सुबह उठकर थका हुआ महसूस करेंगे। इसलिए, सोने से पहले ग्रीन टी को बिल्कुल 'ना' कहें।

नींद पर हर्बल टी का क्या असर होता है?

अगर आप दिन भर की थकान के बाद रात को सुकून की नींद चाहते हैं, तो हर्बल टी आपकी सबसे अच्छी दोस्त है।

बिना कैफीन वाली हर्बल टी आपके दिमाग और मांसपेशियों को शांत करने का काम करती है। कैमोमाइल टी दुनिया भर में 'स्लीप टी' (नींद वाली चाय) के नाम से मशहूर है। इसे सोने से करीब एक घंटा पहले पीने से शरीर हल्का महसूस होता है और नींद बहुत अच्छी और गहरी आती है।

किसे कौन सी चाय चुननी चाहिए?

  • आपको एसिडिटी या गैस रहती है: तो ग्रीन टी कम पिएं या खाली पेट बिल्कुल न पिएं। आपके लिए सौंफ या पुदीने की हर्बल टी बेस्ट है।
  • आपको अच्छी नींद चाहिए: तो रात को सिर्फ कैमोमाइल या किसी शांत करने वाली हर्बल टी का चुनाव करें।
  • आप दिन में चुस्त रहना चाहते हैं (ऑफिस या पढ़ाई के लिए): तो सुबह के नाश्ते के बाद या दोपहर में 1-2 कप ग्रीन टी आपके लिए एकदम सही रहेगी।

चाय पीने का सही तरीका और समय क्या हैं?

हम इंडियंस चाय के दीवाने हैं, लेकिन इसे भी पीने का एक सही तरीका होता है:

  • कितनी पिएं? कोई भी चाय हो (ग्रीन या हर्बल), दिन भर में 2 से 3 कप से ज़्यादा न पिएं। बहुत ज़्यादा पीना किसी भी चीज का अच्छा नहीं है।
  • समय क्या हो? खाना खाने के तुरंत बाद कभी चाय न पिएं, यह खाने के प्रोटीन और आयरन को शरीर में लगने नहीं देती। खाना खाने के कम से कम एक घंटे बाद ही चाय पिएं।
  • रात का नियम: सोने से 3-4 घंटे पहले कैफीन वाली चीजें (ग्रीन टी या कॉफी) पूरी तरह बंद कर दें।

निष्कर्ष 

अगर आप दिन में काम के बीच खुद को फ्रेश रखना चाहते हैं और आपको पेट की कोई दिक्कत नहीं है, तो ग्रीन टी पिएं। लेकिन आपका पेट नाजुक है, आपको एसिडिटी परेशान करती है और आप रात को आराम की नींद सोना चाहते हैं, तो हर्बल टी से बेहतर कुछ नहीं।

अपने शरीर के इशारों को समझें। अगर कोई चाय पीने के बाद पेट में भारीपन या जलन हो रही है, तो समझ जाएं कि वह आपके लिए सही नहीं है। सही समय पर सही चाय चुनें और स्वस्थ रहें!

References

Green Tea: Current Knowledge and Issues - PMC

Green Tea: Usefulness and Safety | NCCIH

Exploring the ancient roots and modern global brews of tea and herbal beverages: A comprehensive review of origins, types, health benefits, market dynamics, and future trends - PMC

Role of Herbal Teas in Regulating Cellular Homeostasis and Autophagy and Their Implications in Regulating Overall Health - PMC

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

दूध और चीनी मिलाने से इन दोनों चाय के असली फायदे कम हो सकते हैं। अगर आपको मीठा पसंद है, तो चाय के हल्का ठंडा होने पर (उबलते पानी में नहीं) थोड़ा सा शहद या गुड़ मिला सकते हैं।

खुली पत्तियां हमेशा टी-बैग से बेहतर होती हैं। टी-बैग्स में अक्सर चाय का चूरा होता है और कभी-कभी बैग का पेपर या माइक्रो-प्लास्टिक भी गर्म पानी में मिल सकता है। इसलिए, अच्छी क्वालिटी की खुली पत्ती चुनें।

बिल्कुल! गर्मियों के मौसम में आप इन्हें ठंडा करके भी पी सकते हैं। इनके फायदे ठंडे या गर्म दोनों रूपों में लगभग एक जैसे ही रहते हैं। बस इसमें बाजार वाली चीनी न मिलाएं।

नहीं, दवा हमेशा सादे पानी के साथ ही खानी चाहिए। ग्रीन टी या हर्बल टी में मौजूद तत्व आपकी दवा के साथ मिलकर उसके असर को कम या खराब कर सकते हैं। दवा और चाय के बीच कम से कम 1 घंटे का अंतर रखें।

अगर आप अच्छी क्वालिटी की खुली ग्रीन टी की पत्तियां इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आप उन्हें 2 बार तक गर्म पानी में डाल सकते हैं। हालांकि, दूसरी बार में उसका स्वाद और फायदे थोड़े कम हो जाएंगे।

नहीं, बच्चों को कैफीन की बिल्कुल ज़रूरत नहीं होती। इससे उनकी नींद और ध्यान लगाने की क्षमता खराब हो सकती है। अगर बच्चा चाहे तो उसे हल्की हर्बल टी (जैसे तुलसी, कैमोमाइल या सौंफ का पानी) दी जा सकती है।

आप व्रत में ब्लैक टी, ग्रीन टी और हर्बल टी पी सकते हैं। बस यह ध्यान रखें कि हर्बल टी बनाते समय उसमें कोई ऐसा मसाला न डालें जो आपके व्रत के नियमों के खिलाफ हो।

ग्रीन टी में मौजूद पॉलीफेनॉल्स और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा के स्वास्थ्य को सपोर्ट कर सकते हैं, लेकिन केवल ग्रीन टी पीने से त्वचा की समस्याएं ठीक होने का दावा नहीं किया जा सकता। 

ग्रीन टी में कैफीन होता है, इसलिए गर्भावस्था में इसे दिन में 1 छोटे कप से ज़्यादा नहीं पीना चाहिए। हर्बल टी पीने से पहले भी अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें, क्योंकि कुछ गर्म तासीर वाली जड़ी-बूटियां नुकसान कर सकती हैं।

पत्तियां जल्दी सड़ती नहीं हैं, लेकिन समय के साथ उनकी महक और फायदे कम ज़रूर हो जाते हैं। पैकेट खुलने के बाद इन्हें हवा बंद डिब्बे में रखें और 6 से 8 महीने के अंदर इस्तेमाल कर लें।

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