हम सोचते हैं कि घर का बना खाना हमेशा सेहतमंद होता है इसलिए इसे जितना चाहें उतना खा सकते हैं। दाल रोटी, सब्ज़ी या छाछ जैसी चीज़ें शरीर को ताकत तो देती हैं, लेकिन क्या ज़रूरत से ज़्यादा खाना सही है? जब हम अपनी भूख से बहुत ज़्यादा घर का खाना भी खा लेते हैं तो हमारे शरीर को उसे पचाने में ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसी मेहनत को metabolic load बढ़ना कहते हैं। शरीर की एक सीमा होती है और जब हम उसमें हद से ज़्यादा चीज़ें डालते हैं, तो पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है और कई तरह की शारीरिक परेशानियाँ शुरू हो सकती हैं।
Healthy खाना ज़्यादा खाने से क्या होता है?
आप घर का बना अच्छा और पौष्टिक खाना खा रहे हों लेकिन उसे ज़रूरत से ज़्यादा खाने पर पेट में भारीपन महसूस होता है। आपका पाचन तंत्र एक मशीन की तरह काम करता है। जब आप इसमें एक साथ बहुत सारा खाना डाल देते हैं, तो इसे पचाने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। इससे पेट में गैस, एसिडिटी और खट्टी डकारें आने की समस्या पैदा होती है। ज़्यादा खाना खाने से शरीर के अंगों को उसे तोड़ने और पोषक तत्वों को अलग करने में ज़्यादा ऊर्जा लगानी पड़ती है, जिससे आप पूरे दिन थकान महसूस करते हैं और काम में मन नहीं लगता।
एक्सपर्ट्स की क्या राय है?
एक्सपर्ट्स के अनुसार एक ही तेल को बार-बार गर्म करना सेहत के लिए गंभीर जोखिम बन जाता है जब वह ट्रांस फैट, फ्री रेडिकल्स और विषैले एल्डिहाइड में बदल जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और FSSAI के अनुसार तेल को तीन से अधिक बार गर्म करना, उसका रंग काला होना या उससे धुआं उठने लगना इसे नुकसानदायकके बना देता है।
क्या ज़्यादा खाना भी शरीर पर बोझ डालता है?
चाहे खाना घर का हो या बाहर का, जब आप मतलब से ज़्यादा खाते हैं, तो यह सीधे तौर पर आपके पाचन तंत्र और मेटाबॉलिज़्म पर बहुत ज़्यादा बोझ डालता है। शरीर को उस अतिरिक्त भोजन को पचने के लिए ज़्यादा एंजाइम और एसिड पैदा करने पड़ते हैं। पेट लिवर और आँतों को अपनी नॉर्मल ताकत से दोगुना ज़्यादा काम करना पड़ता है। इसी वजह से शरीर में तनाव बढ़ता है और मेटाबॉलिक रेट बिगड़ने लगता है। लंबे समय तक ऐसा करने से पाचन से जुड़ी पुरानी बीमारियाँ घर कर सकती हैं और शरीर सुस्त हो जाता है।
क्या Healthy खाना भी ज़्यादा कैलोरी दे सकता है?
यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है कि घर के हेल्दी खाने में कैलोरी नहीं होती। घी, मेवे, दूध, पनीर और यहाँ तक कि गेहूँ की रोटी में भी अच्छी खासी कैलोरी होती है। अगर आप दिन भर में अपनी ज़रूरत से ज़्यादा ये चीज़ें खा रहे हैं, तो आपका शरीर अतिरिक्त कैलोरी को जमा करने लगता है। एक कटोरी दाल या एक मुट्ठी बादाम सेहत के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन अगर आप चार कटोरी दाल और बहुत सारे बादाम एक साथ खाएँगे तो वह भी शरीर में कैलोरी का भंडार ही बढ़ाएगा जिसे शरीर फैट में बदल देगा।
ओवरईटिंग से Blood Sugar पर क्या असर पड़ता है?
ज़रूरत से ज़्यादा हेल्दी खाना खाने पर ब्लड शुगर पर सीधा असर पड़ता है:
- तेज़ी से शुगर बढ़ना: ज़्यादा खाना खाने से शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ती है, जो टूटकर ग्लूकोज़ में बदल जाती है और ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ा देती है।
- इंसुलिन का ज़्यादा बनना: बढ़े हुए शुगर को कंट्रोल करने के लिए पैंक्रियाज़ को ज़्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है, जिससे उस पर दबाव पड़ता है।
- इंसुलिन रेजिस्टेंस: रोज़ाना ज़्यादा खाने से कोशिकाएँ इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं रहतीं, जिससे टाइप-2 डायबिटीज़ का खतरा बढ़ जाता है।
- ऊर्जा का उतार-चढ़ाव: शुगर तेज़ी से बढ़ने और फिर गिरने के कारण शरीर में अचानक कमज़ोरी महसूस होने लगती है।
Healthy Food की मात्रा कितनी होनी चाहिए?
स्वस्थ रहने के लिए खाने की मात्रा का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है:
- पोर्शन कंट्रोल: हमेशा छोटी प्लेट का इस्तेमाल करें और एक बार में सीमित मात्रा में ही खाना परोसें।
- भूख से थोड़ा कम खाएँ: पेट को पूरी तरह ऊपर तक भरने के बजाय, अपनी भूख का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा ही खाएँ।
- सब्ज़ियों की मात्रा: आपकी प्लेट का आधा हिस्सा ताज़ी सब्ज़ियों या सलाद से भरा होना चाहिए।
- प्रोटीन और कार्ब्स: एक चौथाई हिस्से में दाल या पनीर जैसा प्रोटीन और बाकी एक चौथाई में रोटी या चावल रखें।
- चबा-चबाकर खाएँ: खाना धीरे-धीरे चबाकर खाएँ, इससे दिमाग को समय पर पता चल जाता है कि पेट भर गया है।
ज़्यादा खाने से सुस्ती क्यों महसूस होती है?
जब आप बहुत ज़्यादा खाना खा लेते हैं तो आपका शरीर अपनी ज़्यादातर ऊर्जा उस भोजन को पचाने में लगा देता है। रक्त का प्रवाह दिमाग और मांसपेशियों से हटकर पाचन तंत्र की तरफ चला जाता है। इसके अलावा ज़्यादा खाने से शरीर में शुगर का स्तर तेज़ी से बढ़ता है और फिर अचानक गिरता है जिससे थकान हावी होने लगती है। दिमाग को आराम देने वाले कुछ हार्मोन जैसे सेरोटोनिन और मेलाटोनिन भी ज़्यादा मात्रा में निकलते हैं। यही कारण है कि ज़्यादा खाना खाने के तुरंत बाद हमें नींद और सुस्ती आने लगती हैं।
क्या ज़्यादा खाना वज़न बढ़ा सकता है?
घर का खाना भी अगर ज़रूरत से ज़्यादा खाया जाए तो वज़न बढ़ता है। वज़न बढ़ने की वजह है अगर आप खर्च की जाने वाली कैलोरी से ज़्यादा कैलोरी अंदर लेंगे तो शरीर उसे फैट के रूप में जमा कर लेगा। घर की रोटियाँ, चावल, शुद्ध घी और सूखे मेवे भले ही सेहतमंद हों, लेकिन इनमें भारी मात्रा में ऊर्जा होती है। जब हम बैठे रहने वाली जीवनशैली अपनाते हैं और बहुत सारा खाना खाते हैं तो वह एक्स्ट्रा ऊर्जा पेट और कमर के आस-पास चर्बी के रूप में जमने लगती है।
Healthy खाना खाने का सही तरीका क्या है?
घर के भोजन का फायदा उठाने के लिए उसे सही ढंग से खाना चाहिए:
- समय का ध्यान रखें: रोज़ाना एक ही समय पर खाना खाने की आदत डालें, इससे शरीर का मेटाबॉलिज़्म सही रहता है।
- पानी पीने का नियम: खाना खाने के तुरंत पहले या बाद में बहुत सारा पानी न पिएँ। इससे खाने को पचाने वाले रस कमज़ोर हो जाते हैं।
- ध्यान लगाकर खाएँ: टीवी या मोबाइल देखते हुए खाना न खाएँ। इससे हमें पता ही नहीं चलता कि हमने कितना खा लिया है।
- संतुलित आहार लें: केवल एक ही तरह का खाना न खाएँ। आहार में दाल, सब्ज़ी, रोटी, दही और सलाद सबका संतुलन बनाएँ।
ज़्यादा खाने के बाद शरीर में क्या होता है?
ज़्यादा खाने के बाद शरीर के अंदर कई प्रक्रियाएँ एकदम से बदल जाती हैं:
- पाचन तंत्र का धीमा होना: अत्यधिक खाने की वजह से आँतों पर दबाव बढ़ता है और खाना पचने में सामान्य से दोगुना समय लगता है।
- हार्ट रेट का बढ़ना: अतिरिक्त भोजन को पचाने के लिए रक्त प्रवाह को तेज़ करना पड़ता है जिससे दिल की धड़कन हल्की तेज़ हो जाती है।
- एसिड का ऊपर आना: पेट पूरी तरह भर जाने से एसिड और खाने के कण भोजन नली में वापस आने लगते हैं, जिससे सीने में जलन होती है।
- हार्मोनल बदलाव: पेट के ज़्यादा खिंचने पर शरीर अजीब सी बेचैनी महसूस करता है और गैस बनने लगती है।
निष्कर्ष:
ज़्यादती हर चीज़ की बुरी होती है' चाहे वह घर का बना शुद्ध और ताज़ा खाना ही क्यों न हो। शरीर को चलाने के लिए भोजन ईंधन की तरह है। शरीर में ज़रूरत से ज़्यादा खाना डालने पर मेटाबॉलिक लोड बढ़ता है और शरीर अंदर से थकने लगता है। इसलिए, हमेशा अपनी भूख को पहचानें, घर का बना सादा भोजन चबा-चबाकर और सीमित मात्रा में खाएँ। यही सेहतमंद और ऊर्जावान बने रहने का सबसे सही मूलमंत्र है।
References:
https://academic.oup.com/jcem/article-abstract/84/2/428/2864122
https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/10022396/
https://www.healthline.com/nutrition/overeating-effects
https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/0306460395001050
https://www.health.harvard.edu/healthy-aging-and-longevity/why-stress-causes-people-to-overeat





























