Diseases Search
Close Button
 
 

Poor sleep immunity को कैसे कमजोर कर सकती है?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि सुबह उठने के बाद भी शरीर टूटा-टूटा सा लगता है? दिन भर सुस्ती छाई रहती है और मौसम में ज़रा सा बदलाव होते ही सबसे पहले आपको सर्दी-ज़ुकाम जकड़ लेता है? हम अक्सर इसके लिए अपनी डाइट या मौसम को दोष देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी इस कमज़ोर होती इम्यूनिटी (रोगों से लड़ने की ताकत) के पीछे आपकी 'खराब नींद' का सबसे बड़ा हाथ हो सकता है?

आजकल रात-रात भर वेब सीरीज़ देखना, मोबाइल पर रील्स स्क्रॉल करना या ऑफिस की टेंशन में करवटें बदलना हमारी ज़िंदगी का नॉर्मल हिस्सा बन गया है। हमें लगता है कि कम सोने से सिर्फ नींद आएगी या थकान होगी, लेकिन असल में खराब नींद चुपचाप हमारे शरीर के 'सिक्योरिटी सिस्टम' (इम्यूनिटी) को अंदर से खोखला कर रही होती है।

जब हम सोते हैं, तो शरीर के अंदर क्या चल रहा होता है?

हमें लगता है कि जब हम सो जाते हैं, तो हमारा शरीर भी काम बंद करके आराम कर रहा होता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है।  जब हम गहरी नींद में होते हैं, तब शरीर की 'रिपेयरिंग' का काम शुरू होता है:

  • शरीर दिन भर की थकान को दूर करता है।
  • थकी हुई मांसपेशियों ठीक करता है।
  • हमारा दिमाग दिन भर की बातों को डिलीट करता है और काम की चीज़ों को मेमोरी में सेव करता है।
  • शरीर नए 'फाइटर सेल्स' (बीमारियों से लड़ने वाले सैनिक) बनाता है, जो हमें वायरस और इन्फेक्शन से बचाते हैं।

अगर आप शरीर को सोने का टाइम नहीं देंगे, तो ये रिपेयरिंग का काम बीच में ही रुक जाएगा।

कम नींद कैसे हमारी इम्यूनिटी को खराब करती है? 

जब आप लगातार कई दिनों तक कम सोते हैं या कच्ची नींद लेते हैं, तो:

  • आपकी शरीर की  इम्यूनिटी कमज़ोर पड़ने लगती है। उनके पास वायरस से लड़ने की ताकत नहीं बचती।
  • मौसम बदलने पर जो ज़ुकाम दो दिन में ठीक हो जाना चाहिए, वो कमज़ोर इम्यूनिटी की वजह से हफ्तों तक खिंच जाता है।
  • शरीर में अंदरूनी सूजन बढ़ने लगती है, जिससे बदन दर्द और भारीपन रहने लगता हैं।
  • वैक्सीन या दवाइयों का असर भी ऐसे शरीर पर कम होता है जो नींद की कमी से जूझ रहा हो।

आयुर्वेद इस बारे में क्या कहता है?

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर को तंदुरुस्त रखने के लिए तीन चीज़ें सबसे ज़रूरी हैं, अच्छा खाना, अच्छी नींद और सही रूटीन।

आयुर्वेद में एक शब्द है 'ओजस' (Ojas)। आप इसे अपने शरीर की अंदरूनी बैटरी या चमक कह सकते हैं। यही ओजस हमारी असली इम्यूनिटी है। जब हम सही समय पर और गहरी नींद सोते हैं, तो हमारा ओजस बढ़ता है।

लेकिन जब हम रात भर जागते हैं, तो शरीर में क्या होता है?

  • वात बढ़ जाती है: रात को जागने से शरीर में रूखापन और गैस (वात) बढ़ती है, जिससे शरीर में दर्द और दिमाग में टेंशन होती है।
  • पाचन अग्नि सुस्त पड़ जाती है: पाचन कमज़ोर हो जाता है।
  • गंदगी (आम) जमा होती है: खाना ठीक से न पचने की वजह से पेट में गंदगी और टॉक्सिन्स (जिसे आयुर्वेद में 'आम' कहते हैं) जमा होने लगते हैं। यही गंदगी बीमारियों का घर बनती है और हमारे 'ओजस' यानी इम्यूनिटी को ख़त्म कर देती है।

शरीर के वो इशारे जो बताते हैं कि नींद की कमी इम्यूनिटी बिगाड़ रही है

आपका शरीर हमेशा आपसे बात करता है। अगर आपकी नींद पूरी नहीं हो रही है, तो शरीर ये संकेत देने लगता है:

  • बार-बार बीमार पड़ना: घर में किसी को भी ज़ुकाम हो, सबसे पहले आप उसकी चपेट में आ जाते हैं।
  • घाव जल्दी न भरना: अगर छोटा सा कट या खरोंच लगने पर भी उसे ठीक होने में बहुत टाइम लग रहा है।
  • हर वक्त चिड़चिड़ापन: बिना बात के गुस्सा आना और किसी काम में फोकस न कर पाना।
  • पेट खराब रहना: सुबह पेट साफ न होना, दिन भर गैस बनना या भारीपन लगना।
  • कमज़ोरी: सुबह सोकर उठने के बाद भी ऐसा लगना जैसे शरीर में कोई एनर्जी ही नहीं है।

अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो समझ जाइए कि शरीर अलार्म बजा रहा है।

एक्सपर्ट डॉक्टर की विशेष सलाह

कभी-कभार नींद न आना आम बात है, लेकिन अगर आपको हफ्तों तक नींद नहीं आती, सोते समय तेज़ खर्राटे आते हैं, रात में सांस घुटने जैसा महसूस होता है या 8-9 घंटे सोने के बाद भी दिनभर अत्यधिक थकान रहती है, तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। ये स्लीप एप्निया जैसी गंभीर समस्या के संकेत हो सकते हैं, जिसके लिए डॉक्टर से जांच कराना ज़रूरी है।

आज की लाइफस्टाइल में हमारी नींद क्यों उड़ गई है?

हम आखिर सो क्यों नहीं पा रहे हैं? इसके पीछे हमारी रोज़मर्रा की कुछ खराब आदतें ही ज़िम्मेदार हैं:

  • स्क्रीन का नीला प्रकाश (Blue Light): रात को बिस्तर पर लेटकर मोबाइल चलाना सबसे बड़ी गलती है। फोन से निकलने वाली नीली रोशनी हमारे दिमाग को बेवकूफ बनाती है। दिमाग को लगता है कि अभी दिन ही है, इसलिए वो नींद लाने वाला केमिकल बनाता ही नहीं है।
  • लेट नाइट डिनर (देर से खाना): रात 11 बजे हैवी खाना खाना या जंक फूड मंगाना। जब पेट में इतना भारी खाना जाएगा, तो शरीर रात भर उसे पचाने में लगा रहेगा, आराम कब करेगा?
  • शाम के बाद चाय-कॉफी: चाय और कॉफी में कैफीन होता है जो हमारी नींद कोसों दूर भगा देता है।
  • दिमाग में चलती मशीन: ऑफिस का काम, कल क्या होगा, ईएमआई कैसे जाएगी, ये सारी टेंशन दिमाग को शांत नहीं होने देतीं।

पेट, नींद और इम्यूनिटी: तीनों का संबंध 

आयुर्वेद कहता है कि अगर आपका पेट ठीक नहीं है, तो आपकी नींद खराब होगी। और अगर नींद खराब है, तो पेट खराब होगा।

आपने रात को बहुत भारी और मसालेदार खाना खा लिया। अब आप सो गए, लेकिन आपका पेट पूरी रात उस भारी खाने को पचाने में मशीन की तरह काम कर रहा है। ऐसे में आपको गहरी नींद आ ही नहीं सकती। सुबह उठेंगे तो पेट में गैस, एसिडिटी, सीने में जलन और खट्टी डकारें होंगी। जब पेट साफ नहीं होगा और नींद पूरी नहीं होगी, तो शरीर में सुस्ती आएगी और इम्यूनिटी अपने आप ज़ीरो हो जाएगी।

अपनी नींद और इम्यूनिटी को वापस कैसे लाएं?

अपनी नींद को सुधारने के लिए आपको कोई बहुत महंगी चीज़ें नहीं चाहिए, बस अपनी आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करने हैं:

सोने का टाइम फिक्स करें: हमारे शरीर को एक रूटीन पसंद है। कोशिश करें कि रोज़ रात को एक ही समय (जैसे 10 या 10:30 बजे) बिस्तर पर चले जाएं। सुबह भी एक ही समय पर उठने की आदत डालें। कुछ ही दिनों में शरीर की अपनी घड़ी (बॉडी क्लॉक) सेट हो जाएगी।

मोबाइल से दूरी (गैजेट कर्फ्यू): सोने से कम से कम एक घंटे पहले टीवी, लैपटॉप और मोबाइल बंद कर दें। इसकी जगह आप कोई अच्छी किताब पढ़ सकते हैं, हल्का म्यूजिक सुन सकते हैं या परिवार वालों से बात कर सकते हैं।

रात का खाना हल्का रखें: आयुर्वेद का सबसे बड़ा नियम है, रात का खाना सूरज ढलने के आस-पास या सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले खा लें। रात को दाल-चावल, खिचड़ी, दलिया या सूप जैसी हल्की चीज़ें खाएं जो आसानी से पच जाएं। रात को राजमा, छोले या भारी नॉन-वेज खाने से बचें।

हल्दी और जायफल वाला दूध: अगर रात को नींद नहीं आती, तो सोने से पहले आधा कप हल्का गुनगुना दूध पिएं। उसमें बस एक चुटकी हल्दी और ज़रा सा जायफल घिसकर डाल लें। यह दूध शरीर की थकान भी मिटाता है और दिमाग को शांत करके बहुत अच्छी नींद लाता है।

पैरों की मालिश: आयुर्वेद में इसे बहुत असरदार माना गया है। सोने से पहले सरसों के तेल या नारियल तेल की कुछ बूंदें अपने पैरों के तलवों पर लगाएं और 2 मिनट तक मालिश करें। इससे शरीर की सारी गर्मी और टेंशन दूर होती हैं और गहरी नींद आती है।

कैफीन को कहें ना: शाम 4 बजे के बाद चाय या कॉफी पीने की आदत छोड़ दें। अगर कुछ पीने का मन है, तो हर्बल टी, ग्रीन टी या सिर्फ गुनगुना पानी पिएं।

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

कभी-कभार नींद न आना नॉर्मल बात है। लेकिन अगर आपको नीचे बताई गई कोई दिक्कत हो रही है, तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाएं:

  • अगर आप बिस्तर पर जाते हैं, लेकिन घंटों तक नींद नहीं आती और यह कई हफ्तों से चल रहा है।
  • अगर रात में सोते समय आपको बहुत तेज़ खर्राटे आते हैं और बीच-बीच में सांस रुकने लगती है (इसे स्लीप एप्निया कहते हैं)।
  • अगर आप रात में 8-9 घंटे सोते हैं, फिर भी दिन भर ऑफिस या स्कूल में आपकी आंखें बंद होती रहती हैं।

इन बातों को नज़रअंदाज़ न करें, सही समय पर चेकअप करवाना बहुत ज़रूरी है।

निष्कर्ष 

हम अक्सर अपनी सेहत को सुधारने के लिए महंगी दवाइयां, विटामिन्स और जिम के पीछे भागते हैं, लेकिन उस चीज़ को भूल जाते हैं जो एकदम फ्री है और शरीर के लिए सबसे बड़ी दवा है, और वो है हमारी नींद!

अच्छी नींद कोई ऐशो-आराम की चीज़ नहीं है, यह शरीर की बुनियादी ज़रूरत है। अगर आप अपने शरीर को सोने का पूरा टाइम देंगे, तो शरीर अपने अंदर की बीमारियों को खुद ही ठीक कर लेगा

Reference’s

Insomnia (primary)

Insomnia: Definition, Prevalence, Etiology, and Consequences - PMC

Chronic Insomnia - StatPearls - NCBI Bookshelf

Insomnia | MedlinePlus

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

हाँ। लगातार कम नींद लेने से शरीर की संक्रमणों से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और बार-बार बीमार पड़ने का खतरा बढ़ सकता है।

आयुर्वेद के अनुसार निद्रा स्वास्थ्य के तीन मुख्य स्तंभों में से एक है। अच्छी नींद शरीर, मन और ओजस को संतुलित रखने में मदद करती है।

ओजस को शरीर की जीवन शक्ति और प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता का आधार माना जाता है। यह अच्छे पाचन, संतुलित जीवनशैली और पर्याप्त नींद से पोषित होता है।

हाँ। लंबे समय तक रहने वाला तनाव नींद की गुणवत्ता को खराब कर सकता है और धीरे-धीरे प्रतिरक्षा प्रणाली पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

हल्का और संतुलित भोजन जैसे दाल, सब्जियां, खिचड़ी या अन्य आसानी से पचने वाले भोजन लेना बेहतर माना जाता है।

हाँ। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी शरीर की प्राकृतिक नींद की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रतिदिन लगभग 7 से 9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लाभकारी मानी जाती है।

आयुर्वेद के अनुसार हाँ। कमजोर पाचन और आम बनने से नींद प्रभावित हो सकती है, जबकि खराब नींद पाचन को भी कमजोर कर सकती है।

कई मामलों में नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, योग, ध्यान और जीवनशैली में बदलाव से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। यदि समस्या बनी रहे, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना आवश्यक है।

Top Ayurveda Doctors

Social Timeline

Our Happy Patients

  • Sunita Malik - Knee Pain
  • Abhishek Mal - Diabetes
  • Vidit Aggarwal - Psoriasis
  • Shanti - Sleeping Disorder
  • Ranjana - Arthritis
  • Jyoti - Migraine
  • Renu Lamba - Diabetes
  • Kamla Singh - Bulging Disc
  • Rajesh Kumar - Psoriasis
  • Dhruv Dutta - Diabetes
  • Atharva - Respiratory Disease
  • Amey - Skin Problem
  • Asha - Joint Problem
  • Sanjeeta - Joint Pain
  • A B Mukherjee - Acidity
  • Deepak Sharma - Lower Back Pain
  • Vyjayanti - Pcod
  • Sunil Singh - Thyroid
  • Sarla Gupta - Post Surgery Challenges
  • Syed Masood Ahmed - Osteoarthritis & Bp
Book Free Consultation Call Us