बच्चे जब अपने खेल-कूद में मगन होते हैं, तो उन्हें दुनिया की कोई सुध-बुध नहीं रहती। दिन भर उछल-कूद करना, खूब पसीना बहाना, लेकिन पानी पीने की बात तो जैसे वो बिल्कुल ही भूल जाते हैं। गर्मी के दिन हों या फिर बच्चे का पेट खराब हो, उल्टी-दस्त लगे हों या तेज़ बुखार हो, तो शरीर का सारा पानी बहुत तेज़ी से सूखने लगता है। बस इसी को हम 'डिहाइड्रेशन' यानी पानी की कमी कहते हैं।
अब दिक्कत ये है कि छोटे बच्चे हमेशा मुंह से बोलकर नहीं बता पाते कि उन्हें प्यास लगी है या अंदर से उन्हें कैसा लग रहा है। कई बार वे सीधे पानी माँगने के बजाय बस बिना बात के चिड़चिड़े हो जाते हैं या छोटी-छोटी बातों पर रोना शुरू कर देते हैं। ऐसे में माँ-बाप को ही समझदारी दिखानी पड़ती है। उन्हें बच्चे की हरकतों और शरीर के उन छोटे-छोटे इशारों को खुद ही समझना पड़ता है, जो चीख-चीख कर बताते हैं कि बच्चे का शरीर अंदर से पानी माँग रहा है।
बच्चों में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) जल्दी क्यों हो जाती है?
आपने भी अक्सर गौर किया होगा कि हम बड़ों के मुकाबले बच्चे बहुत जल्दी निढाल हो जाते हैं और उनका शरीर एकदम मुरझा जाता है। इसके पीछे कोई बहुत बड़ा विज्ञान नहीं है, बस उनके शरीर की बनावट और कुछ कुदरती वजहें हैं:
- छोटा शरीर, लेकिन पानी की ज़्यादा ज़रूरत: बच्चों का शरीर भले ही हमारे मुकाबले छोटा होता है, लेकिन कुदरत ने उनके शरीर में पानी का हिस्सा बड़ों से कहीं ज़्यादा रखा है। ऐसे में, जब पसीने के रास्ते थोड़ा सा भी पानी बाहर निकलता है, तो उनके शरीर का पूरा बैलेंस तुरंत डगमगा जाता है।
- शरीर की मशीनरी का तेज़ भागना: बच्चों के शरीर का इंजन बहुत तेज़ी से काम करता है। उनकी दिन भर की उछल-कूद और भाग-दौड़ की वजह से शरीर की ताकत और पानी, दोनों ही बड़ों की तुलना में बहुत तेज़ी से खर्च होते हैं।
- स्किन से पानी का जल्दी उड़ना: बच्चों का वज़न भले कम हो, लेकिन उनकी स्किन की बनावट ऐसी होती है कि शरीर की गर्मी और पसीना बहुत तेज़ी से बाहर निकलता है। आसान शब्दों में कहें तो उनके शरीर का पानी बहुत जल्दी भाप बनकर हवा में उड़ जाता है।
- पानी के लिए बड़ों के भरोसे रहना: बहुत छोटे बच्चे प्यास लगने पर खुद जाकर मटके या बोतल से पानी नहीं पी सकते। वे हर चीज़ के लिए माँ-बाप के भरोसे होते हैं। अगर घर के बड़े ध्यान न दें या खेल-खेल में बच्चे को पानी पिलाना भूल जाएं, तो उनके शरीर में बहुत जल्दी पानी का सूखा पड़ जाता है।
किन परिस्थितियों में डिहाइड्रेशन का खतरा सबसे ज़्यादा होता है?
कुछ बीमारियाँ और हालात ऐसे होते हैं जब माँ-बाप को बहुत ज़्यादा चौकन्ना रहना पड़ता है। इन मौकों पर बच्चे के पानी पीने पर दोगुना ध्यान देना बहुत ज़रूरी हो जाता है:
- उल्टी और दस्त लगना: बच्चों के शरीर का पानी सूखने की सबसे बड़ी और आम वजह यही है। जब बच्चे को लगातार उल्टियां या दस्त लगें, तो शरीर का सारा ज़रूरी पानी और ताकत (नमक-पानी का बैलेंस) बहुत ही तेज़ी से बहकर बाहर निकल जाता है।
- बहुत तेज़ बुखार आना: बुखार में जब शरीर एकदम भट्टी की तरह तपता है, तो शरीर कुदरती तौर पर खुद को ठंडा करने के लिए पसीना छोड़ता है। अब भई, बुखार जितना तेज़ होगा, पसीने के जरिए शरीर का पानी भी उतनी ही तेज़ी से भाप बनकर उड़ जाएगा।
- चिलचिलाती गर्मी और तेज़ धूप: गर्मियों की छुट्टियों में बच्चे दोपहर की परवाह किए बिना बाहर खेलने भागते हैं। अब तेज़ धूप और गर्मी में खूब पसीना बहता है, और अगर बच्चा उस हिसाब से बीच-बीच में पानी न पिए, तो शरीर में पानी का अकाल पड़ना एकदम तय है।
- गले में दर्द या खराश होना: कई बार गले में सूजन या टॉन्सिल हो जाने पर बच्चे कुछ भी घूंटने (निगलने) से डरते हैं। गले में होने वाले इसी दर्द के मारे वो पानी पीने से भी जी चुराने लगते हैं, और धीरे-धीरे उनके शरीर में पानी की कमी शुरू हो जाती है।
बच्चों में डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेत
अगर समय रहते पानी की कमी के इन शुरुआती इशारों को पकड़ लिया जाए, तो स्थिति को गंभीर होने से आसानी से रोका जा सकता है:
- बार-बार प्यास लगना: अगर बच्चा अचानक से बार-बार पानी माँग रहा है या पानी की बोतल छोड़ने को तैयार नहीं है, तो समझ लीजिए शरीर पानी की माँग कर रहा है।
- मुंह और होंठ का सूखना: बच्चे के होंठ फटने लगें, मुंह के अंदर का हिस्सा सूखा और चिपचिपा लगे, या बोलते समय मुंह में थूक (लार) कम दिखे, तो यह डिहाइड्रेशन का संकेत है।
- पेशाब का रंग और मात्रा बदलना: यह सबसे सटीक तरीका है। अगर बच्चा पिछले कई घंटों से वाशरूम नहीं गया है, या उसके पेशाब का रंग गहरे पीले (Dark Yellow) सेब के सिरके जैसा आ रहा है, तो उसके शरीर में पानी की कमी हो रही है। सामान्य पेशाब हल्के पीले या पानी जैसा साफ होना चाहिए।
- बिना बात का चिड़चिड़ापन: जब शरीर में पानी कम होता है, तो बच्चे बिना किसी वजह के रोने लगते हैं, जिद करते हैं और बहुत चिड़चिड़े हो जाते हैं।
- चेहरे की चमक गायब होना: बच्चे का चेहरा अचानक से थका-थका और उतरा हुआ लगने लगता है। उनकी खेलने-कूदने की एनर्जी कम हो जाती है।
छोटे शिशुओं (Infants) में डिहाइड्रेशन के अलग संकेत
एक साल से छोटे बच्चे बोलकर कुछ नहीं बता सकते, इसलिए माता-पिता को उनकी शारीरिक बनावट और डायपर पर नजर रखनी चाहिए:
- सूखा डायपर: अगर शिशु का डायपर लगातार 6 घंटे या उससे ज़्यादा समय तक सूखा रहे (उसने पेशाब न किया हो), तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
- सिर का तालू (Fontanelle) धंसना: छोटे बच्चों के सिर के ऊपर एक मुलायम हिस्सा (तालू) होता है। डिहाइड्रेशन होने पर यह मुलायम हिस्सा अंदर की तरफ धंस जाता है।
- दूध पीने से इनकार करना: अगर बच्चा माँ का दूध या बोतल का दूध पीने में बिल्कुल दिलचस्पी न दिखाए और बहुत ज़्यादा सुस्त रहे।
आयुर्वेद बच्चों में जल संतुलन को कैसे देखता है?
आयुर्वेद मानता है कि हमारे शरीर का एक बड़ा हिस्सा 'जल महाभूत' से बना है। जब बच्चों का पाचन बिगड़ता है या वे गलत खान-पान करते हैं, तो वात और पित्त दोष असंतुलित हो जाते हैं, जिससे शरीर का जल सूखने लगता है। आयुर्वेद में बच्चों के लिए मूंग दाल का पानी, चावल का माँड (Rice water) और मिश्री मिला हुआ सौंफ का पानी बहुत लाभकारी माना गया है, जो शरीर को ताकत और नमी दोनों देते हैं।
डिहाइड्रेशन से बचाव के आसान और उपाय
जैसे कहा जाता है कि इलाज से बेहतर बचाव है, आप इन आदतों को अपनाकर अपने बच्चे को डिहाइड्रेशन से दूर रख सकते हैं:
- पानी का रूटीन बनाएं: बच्चों को प्यास लगने का इंतज़ार न करने दें। खेलते समय, पढ़ाई करते समय हर एक घंटे में उन्हें पानी पीने की याद दिलाएं।
- बाहर जाते वक्त बोतल साथ रखें: बच्चा पार्क में खेलने जा रहा हो या स्कूल, उसकी अपनी एक आकर्षक पानी की बोतल हमेशा उसके साथ होनी चाहिए।
- पानी वाले फल खिलाएं: गर्मियों में बच्चों को तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और संतरे जैसे फल खाने को दें। इनमें 80-90% तक पानी होता है।
- धूप से बचाएं: दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक की चिलचिलाती धूप में बच्चों को बाहर खेलने से रोकें। बाहर जाते समय हल्के रंग के सूती कपड़े पहनाएं।
घर पर क्या करें? (प्राथमिक उपाय)
अगर डिहाइड्रेशन हल्का है (शुरुआती संकेत हैं), तो आप घर पर ही इन उपायों से बच्चे को ठीक कर सकते हैं:
- घूंट-घूंट करके पिलाएं: बच्चे को एक साथ बहुत सारा पानी या लिक्विड न पिलाएं, इससे उसे दोबारा उल्टी हो सकती है। हर 5-10 मिनट में एक-एक चम्मच या एक-एक घूंट पिलाते रहें।
- स्तनपान (Breastfeeding) न रोकें: अगर शिशु माँ का दूध पीता है, तो उसे बार-बार स्तनपान कराते रहें। माँ का दूध पानी की कमी पूरी करने का सबसे बेहतरीन तरीका है।
- नारियल पानी और छाछ: अगर बच्चा 6 महीने से बड़ा है, तो उसे ताजा नारियल पानी, बिना शक्कर का नींबू पानी, या हल्की पतली छाछ भी दी जा सकती है।
डॉक्टर के पास तुरंत कब भागना चाहिए?
घर के नुस्खों पर तब तक ही निर्भर रहें जब तक बच्चा लिक्विड अंदर पचा पा रहा हो। नीचे दी गई स्थितियों में बिना एक पल की देरी किए बच्चे को अस्पताल ले जाएं:
- अगर बच्चा कुछ भी पीने से लगातार मना कर रहा है।
- पानी या ORS पीते ही तुरंत उल्टी कर दे रहा है।
- पिछले 8-10 घंटों से डायपर गीला नहीं किया है।
- बच्चा बेहोशी की हालत में जा रहा है या उसे झटके (दौरे) आ रहे हैं।
- दस्त या उल्टी में खून आ रहा हो।
निष्कर्ष
बच्चों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की शुरुआत बहुत ही मामूली लगने वाले लक्षणों से होती है। लेकिन अगर माता-पिता समय रहते इन संकेतों पर ध्यान न दें, तो स्थिति कुछ ही घंटों में खतरनाक रूप ले सकती है। सूखे होंठ, गहरे रंग का पेशाब, डायपर का सूखा रहना और बिना आंसुओं के रोना—ये ऐसे अलार्म हैं जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
एक जागरूक माता-पिता के तौर पर, बच्चे की पानी पीने की आदतों पर नजर रखें और घर में हमेशा ORS का पैकेट मौजूद रखें। याद रखिए, सही समय पर पिलाया गया थोड़ा-थोड़ा पानी और सही चिकित्सकीय सलाह आपके बच्चे को बड़ी परेशानी से बचा सकती है।
References
Fluid management in severely malnourished children under 5 years of age without shock





























