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Hyaluronic Acid Injection ले लिया, फिर भी घुटने में दर्द — आगे क्या?

Information By Dr. Keshav Chauhan     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan
  • category-iconPublished on 11 May, 2026
  • category-iconUpdated on 13 Jun, 2026
  • category-iconJoint Health
  • blog-view-icon5046

घुटनों के असहनीय दर्द और सीढ़ियाँ चढ़ने की लाचारी से बचने के लिए, जब डॉक्टर नी-रिप्लेसमेंट (Knee Replacement) की सलाह देते हैं, तो ज़्यादातर लोग घबरा जाते हैं। इस बड़ी सर्जरी से बचने के लिए एक बीच का रास्ता चुना जाता है, 'हायलूरॉनिक एसिड इंजेक्शन' (Hyaluronic Acid Injection)। इसे घुटनों में 'कृत्रिम ग्रीस' (Artificial Gel/Lubricant) डालना भी कहा जाता है। हज़ारों रुपये खर्च करके यह इंजेक्शन लगवाने के बाद कुछ हफ़्तों तक तो सब ठीक लगता है, लेकिन अचानक एक दिन वो 'कट-कट' की आवाज़ और सुई चुभने वाला दर्द फिर से लौट आता है।

आप हैरान रह जाते हैं कि जब घुटने में चिकनाई डाल दी गई थी, तो फिर दर्द क्यों वापस आ गया? सच्चाई यह है कि बाहर से डाला गया यह कृत्रिम जेल (Gel) आपके घुटने की बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है। जब आपके शरीर का अंदरूनी वातावरण ही उस चिकनाई को सुखा रहा हो और हड्डियाँ अंदर से खोखली हो चुकी हों, तो कोई भी बाहरी इंजेक्शन आपके घुटनों को हमेशा के लिए नहीं बचा सकता।

हायलूरॉनिक एसिड (HA) इंजेक्शन अक्सर क्यों फेल हो जाते हैं?

यह इंजेक्शन जोड़ों के बीच प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले साइनोवियल फ्लूइड (Synovial Fluid) की नकल करता है। लेकिन जब स्थिति गंभीर होती है, तो यह कृत्रिम सहारा भी घुटने टेक देता है:

  • हड्डियों का आपस में रगड़ना (Bone-on-Bone OA): अगर आपका ऑस्टियोआर्थराइटिस एडवांस स्टेज (Stage 4) में पहुँच चुका है, जहां कार्टिलेज पूरी तरह घिस चुका है, तो वहां कोई भी जेल काम नहीं करेगा। हड्डियों के टकराने से इंजेक्शन का जेल तुरंत खत्म हो जाता है।
  • भयंकर अंदरूनी सूजन (Severe Inflammation): अगर आपके घुटनों में पहले से ही भारी सूजन और ज़हरीला 'आम' (Toxins) भरा हुआ है, तो शरीर का इम्यून सिस्टम इस बाहरी हायलूरॉनिक एसिड को नष्ट कर देता है और वह टिक नहीं पाता।
  • वात का अत्यधिक रूखापन: आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में वात (हवा और रूखापन) भयंकर रूप से बढ़ा हो, तो वह प्राकृतिक चिकनाई के साथ-साथ इस कृत्रिम चिकनाई को भी कुछ ही महीनों में पूरी तरह सुखा देता है।
  • यांत्रिक असंतुलन (Mechanical Misalignment): अगर आपके चलने का तरीका (Gait) बिगड़ चुका है या वज़न बहुत ज़्यादा है, तो घुटनों पर पड़ने वाला असंतुलित दबाव किसी भी इंजेक्शन को बेअसर कर देता है।

घुटने का दर्द और कार्टिलेज का डैमेज किन प्रकारों का होता है?

हर व्यक्ति के घुटने एक ही कारण से नहीं घिसते। आपके शरीर की प्रकृति और दोषों के आधार पर यह डैमेज तीन मुख्य प्रकारों में शरीर पर हावी होता है:

  • वात-प्रधान दर्द (सूखते घुटने): इसमें घुटने बिल्कुल सूखे और कड़े हो जाते हैं। उठते-बैठते भयंकर 'कट-कट' (Crepitus) की आवाज़ आती है। चलते समय घुटने का दर्द सुई चुभने जैसा होता है। इसके लिए वात दोष कम करने के उपाय सबसे ज़्यादा ज़रूरी हैं।
  • पित्त-प्रधान दर्द (जलते घुटने): जब यूरिक एसिड या खून की गर्मी बढ़ती है, तो घुटने लाल हो जाते हैं और छूने पर गर्म लगते हैं। इसमें दर्द के साथ-साथ भयंकर जलन (Burning sensation) होती है।
  • कफ-प्रधान दर्द (जाम घुटने): वज़न बढ़ने और सुस्त मेटाबॉलिज़्म के कारण घुटनों में पानी भर जाता है (Swelling)। इसमें दर्द से ज़्यादा भारीपन और जकड़न महसूस होती है, जिससे पैर मोड़ना असंभव हो जाता है।

क्या आपके घुटने भी स्थायी डैमेज (Permanent Damage) के ये अलार्म बजा रहे हैं?

इंजेक्शन फेल होने के बाद शरीर कई खामोश संकेत देता है, जो बताते हैं कि अब बात केवल चिकनाई की नहीं, बल्कि हड्डियों के डैमेज की है:

  • घुटने का लॉक हो जाना (Knee Locking): चलते-चलते अचानक घुटने का एक ही पोज़िशन में अटक जाना और उसे सीधा करने में भयंकर दर्द होना (यह टूटे हुए कार्टिलेज के फँसने का संकेत है)।
  • आराम करते समय भी दर्द रहना: पहले दर्द केवल चलने पर होता था, लेकिन अब रात को सोते समय या कुर्सी पर बैठे हुए भी घुटनों में मीठा-मीठा दर्द और टीस उठना।
  • घुटनों का मुड़ जाना (Buckling): सीढ़ियाँ उतरते समय अचानक ऐसा महसूस होना कि घुटनों में वज़न सहने की ताक़त ही नहीं बची है और पैर धोखा दे रहे हैं।
  • लगातार रहने वाली सूजन: बर्फ की सिकाई या पेनकिलर खाने के बाद भी घुटने की सूजन (Swelling) का कम न होना।

घुटने बचाने के चक्कर में लोग क्या भयंकर गलतियाँ करते हैं?

इंजेक्शन के फेल होने से घबराकर मरीज़ अक्सर ऐसे शॉर्टकट्स अपना लेते हैं, जो घुटनों को हमेशा के लिए खत्म कर देते हैं:

  • बार-बार इंजेक्शन लगवाना: पहला इंजेक्शन फेल होने पर कुछ महीनों बाद फिर से स्टेरॉयड (Steroids) या हायलूरॉनिक एसिड का इंजेक्शन लगवाना। बार-बार सुई चुभने से घुटने के अंदर भयंकर इन्फेक्शन (Septic Arthritis) और कार्टिलेज डैमेज का खतरा बढ़ जाता है।
  • पूरी तरह बिस्तर पकड़ लेना (Complete Bed Rest): दर्द के डर से चलना-फिरना बिल्कुल बंद कर देना। इससे घुटने की मांसपेशियाँ (Quadriceps) सूख कर कमज़ोर हो जाती हैं और घुटना हमेशा के लिए जाम हो जाता है।
  • कैल्शियम की गोलियों पर अंधी निर्भरता: बिना अपनी जठराग्नि सुधारे कृत्रिम कैल्शियम खाते रहना, जो घुटनों तक पहुँचने के बजाय केवल लगातार रहने वाली कब्ज़ और किडनी में पथरी पैदा करता है।
  • भविष्य की गंभीर जटिलताएं: अगर इस स्थिति को प्राकृतिक रूप से न संभाला जाए, तो यह जोड़ों के स्थायी डैमेज का रूप ले लेता है, जिसके बाद सर्जरी ही एकमात्र विकल्प बचता है।

आयुर्वेद घुटनों के घिसने (Osteoarthritis) को कैसे समझता है?

आधुनिक विज्ञान जहाँ केवल दो हड्डियों के बीच के गैप (Joint Space) को देखता है, वहीं आयुर्वेद इसे 'संधिगत वात' और शरीर के कमज़ोर 'धातु पोषण' के रूप में समझता है।

  • श्लेषक कफ (Synovial Fluid) का सूखना: जोड़ों के बीच प्राकृतिक चिकनाई देने वाले कफ को 'श्लेषक कफ' कहते हैं। गलत खानपान और बढ़ती उम्र से वात दोष भड़कता है, जो इस कफ को पूरी तरह सुखा देता है।
  • अस्थि धातु (Bone Tissue) का कमज़ोर होना: जब पाचन तंत्र कमज़ोर होता है, तो खाये गए भोजन से कैल्शियम और पोषण 'अस्थि धातु' तक नहीं पहुँच पाता, जिससे हड्डियाँ अंदर से खोखली (Osteoporosis) होने लगती हैं।
  • 'आम' (Toxins) का जोड़ों में जमना: कमज़ोर पाचन के कारण पेट में बनने वाला ज़हरीला 'आम' रक्त के ज़रिए घुटनों में जाकर जम जाता है। यह आम सूजन पैदा करता है और किसी भी बाहरी इंजेक्शन (HA) को टिकने नहीं देता।

घुटनों को प्राकृतिक रूप से चिकनाई देने वाली आयुर्वेदिक डाइट

आपका खाना ही आपके जोड़ों का असली ल्यूब्रिकेंट (Lubricant) है। कृत्रिम इंजेक्शन के बजाय अपनी डाइट में इन चीज़ों को शामिल करके अपने घुटनों को बचाएं।

आहार की श्रेणी क्या खाएं (फायदेमंद - अस्थि पोषक और वात शामक) क्या न खाएं (ट्रिगर फूड्स - रूखापन और यूरिक एसिड बढ़ाने वाले)
अनाज (Grains) रागी (कैल्शियम का खजाना), पुराना चावल, ओट्स, मूंग दाल की खिचड़ी। वाइट ब्रेड, मैदा, पैकेटबंद नूडल्स, रूखे बिस्कुट।
वसा (Fats) देसी गाय का शुद्ध घी (घुटनों के लिए प्राकृतिक ग्रीस), तिल का तेल। किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल, डालडा, बहुत अधिक मेयोनेज़।
सब्ज़ियाँ (Vegetables) लौकी, तरोई, कद्दू, पालक, शकरकंद (सभी अच्छी तरह पकी हुई)। कच्चा सलाद (विशेषकर रात में), भारी बैंगन, शिमला मिर्च, टमाटर के बीज।
फल और मेवे (Fruits & Nuts) रात भर भीगे हुए अखरोट, बादाम, अंजीर, पपीता, सेब। डिब्बाबंद और बिना मौसम के ठंडे फल, बाज़ार के रोस्टेड नमकीन नट्स।
पेय पदार्थ (Beverages) अस्थिशृंखला (Hadjod) का काढ़ा, हल्दी और अश्वगंधा वाला दूध। फ्रिज का बर्फ वाला पानी, बहुत ज़्यादा कोल्ड ड्रिंक्स, डार्क कॉफी।

घुटने का दर्द खींचने और कार्टिलेज रिपेयर करने वाली जड़ी-बूटियाँ

प्रकृति ने हमें ऐसे दिव्य रसायन दिए हैं, जो बिना किसी साइड-इफेक्ट के घुटने की सूजन को खत्म करते हैं और डैमेज हो चुके कार्टिलेज को दोबारा हील (Heal) करते हैं:

  • अस्थिशृंखला: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह कमज़ोर हड्डियों को जोड़ने और अस्थि धातु का घनत्व बढ़ाने के लिए आयुर्वेद की सबसे शक्तिशाली जड़ी-बूटी है।
  • शल्लकी: घुटनों की जकड़न, सूजन और 'कट-कट' की आवाज़ को तेज़ी से घटाने व डैमेज कार्टिलेज को रिपेयर करने के लिए यह बहुत अचूक औषधि है।
  • अश्वगंधा: घुटने के आस-पास की सूखती हुई मांसपेशियों को फौलादी ताकत देने के लिए अश्वगंधा एक बेहतरीन बल्य रसायन है।
  • योगराज गुग्गुलु: जोड़ों के बीच फँसे हुए ज़िद्दी वात को निकालने और जकड़न को तुरंत खोलने के लिए यह एक सबसे क्लासिकल आयुर्वेदिक मिश्रण है।
  • गिलोय: घुटनों के अंदर की गर्मी (पित्त) और भयंकर सूजन को जड़ से खत्म करने के लिए गिलोय एक बेहतरीन औषधि का काम करती है।

घुटनों को प्राकृतिक ग्रीस (Lubrication) देने वाली बेहतरीन आयुर्वेदिक थेरेपीज़

जब वात और जकड़न बहुत गहराई तक घुटनों में जम चुकी हो और बाहरी इंजेक्शन फेल हो चुका हो, तो पंचकर्म की ये थेरेपीज़ घुटनों को तुरंत नया जीवन देती हैं:

  • जानु बस्ती: घुटने के दर्द वाली जगह पर उड़द दाल का घेरा बनाकर उसमें गर्म औषधीय वात-शामक तेल (जैसे महानारायण तेल) भरा जाता है। यह तेल त्वचा के रास्ते गहराई तक जाकर सूखे हुए जोड़ों को प्राकृतिक चिकनाई देता है।
  • पत्र पिंड स्वेद: ताज़े औषधीय पत्तों को तेल में भूनकर बनाई गई पोटली से घुटने की सिकाई की जाती है। यह थेरेपी अकड़ी हुई मांसपेशियों को तुरंत खोल देती है और दर्द खींच लेती है।
  • अभ्यंग मालिश: गुनगुने औषधीय तेलों से की जाने वाली यह संपूर्ण शारीरिक अभ्यंग मालिश शरीर की जकड़न को खत्म करती है और नसों में ब्लड सर्कुलेशन तेज़ी से बढ़ाती है।
  • मात्रा बस्ती: आंतों से वात को पूरी तरह खत्म करने के लिए मेडिकेटेड ऑयल की बस्ती थेरेपी दी जाती है, जो जोड़ों को प्राकृतिक रूप से अंदर से रिपेयर करने का जादुई काम करती है।

घुटनों के प्राकृतिक रूप से रिपेयर होने और दर्द खत्म होने में कितना समय लगता है?

बरसों के डैमेज और सूखे हुए कार्टिलेज को दोबारा प्राकृतिक अवस्था में लाने में थोड़ा अनुशासित और लगातार समय लगता है:

  • शुरुआती 1-2 महीने: आपकी जठराग्नि सुधरेगी। घुटने की भारी सूजन, गर्माहट व दर्द में भारी कमी आएगी। सुबह उठने पर होने वाली जकड़न शांत होने लगेगी।
  • 3-4 महीने: पंचकर्म और रसायनों के प्रभाव से नसों का रूखापन खत्म होने लगेगा। उठते-बैठते आने वाली 'कट-कट' की आवाज़ें कम हो जाएंगी और आपकी मूवमेंट बिल्कुल फ्री हो जाएगी।
  • 5-6 महीने: अस्थि धातु पूरी तरह पोषित हो जाएगी। शरीर प्राकृतिक रूप से अपना 'श्लेषक कफ' बनाने लगेगा और आप बिना किसी बाहरी इंजेक्शन या पेनकिलर के एक ऊर्जावान और दर्द-मुक्त जीवन जी सकेंगे।

आधुनिक (Injections) और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में अंतर

घुटने के कार्टिलेज डैमेज के इलाज को लेकर आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के नज़रिए में एक बहुत बड़ा और बुनियादी अंतर है।

श्रेणी आधुनिक चिकित्सा (Symptomatic care) आयुर्वेद (Holistic care)
इलाज का मुख्य लक्ष्य दर्द को सुन्न करने के लिए स्टेरॉयड (Steroids) और चिकनाई के लिए कृत्रिम हायलूरॉनिक एसिड (HA) इंजेक्शन लगाना। वात को शांत करना, 'आम' को पचाना और अस्थि धातु को प्राकृतिक रूप से पोषण देकर अपना 'श्लेषक कफ' खुद बनाना।
बीमारी को देखने का नज़रिया इसे केवल दो हड्डियों के बीच के गैप (Joint Space) और कार्टिलेज के घिसने की एक स्थानीय (Local) समस्या मानना। इसे कमज़ोर पाचन, बिगड़े हुए वात और अस्थि धातु के सूखने का एक संपूर्ण शारीरिक सिंड्रोम मानना।
डाइट और लाइफस्टाइल अक्सर डाइट पर कोई खास ज़ोर नहीं दिया जाता, केवल वज़न कम करने की आम सलाह दी जाती है। वात-शामक डाइट, सोंठ का पानी, सही पोश्चर, और जानु बस्ती (तेल रोकना) को ही इलाज का सबसे बड़ा आधार माना जाता है।
लंबा असर इंजेक्शन का असर कुछ महीनों में खत्म हो जाता है और अंततः सर्जरी (Surgery) ही विकल्प बचती है। शरीर अंदर से मज़बूत होता है और घुटने की मांसपेशियाँ प्राकृतिक रूप से खुद को हील कर लेती हैं, जिससे इंसान स्थायी रूप से दर्द-मुक्त रहता है।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना कब ज़रूरी हो जाता है?

हालांकि आयुर्वेद इस घुटने के डैमेज को काफी हद तक रिवर्स कर सकता है, लेकिन अगर आपको अपने घुटने में ये कुछ गंभीर और अचानक होने वाले बदलाव दिखें, तो तुरंत मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है:

  • घुटने का पूरी तरह लाल और भयंकर गर्म हो जाना: अगर इंजेक्शन के कुछ दिनों बाद घुटना अचानक सूज जाए, आग जैसा गर्म लगे और साथ में तेज़ बुखार आ जाए (यह Septic Arthritis या इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है)।
  • चलने पर अचानक घुटने का मुड़ जाना (Giving way): अगर पैर ज़मीन पर रखते ही घुटना बिल्कुल वज़न न ले पाए और आप गिर पड़ें (यह लिगामेंट टियर का इशारा है)।
  • पैर की उँगलियों का सुन्न पड़ना: अगर घुटने के दर्द के साथ-साथ पैर के निचले हिस्से या उँगलियों में लकवे जैसी सुन्नता (Numbness) आ जाए।
  • असहनीय फटने वाला दर्द: अगर रात के समय आराम करते हुए भी घुटने में ऐसा भयंकर दर्द हो जो किसी भी पेनकिलर से शांत न हो रहा हो।

निष्कर्ष

घुटने में 'हायलूरॉनिक एसिड' (HA) का इंजेक्शन लगवाना बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी जंग लगी और डैमेज मशीन में केवल तेल (Oil) डाल देना; जब तक आप उस जंग (आम/Toxins) को साफ नहीं करेंगे और अंदर की टूटी हुई हड्डियों (अस्थि धातु) को रिपेयर नहीं करेंगे, तब तक कोई भी कृत्रिम तेल आपके घुटनों को बचा नहीं सकता। इंजेक्शन के फेल होने के बाद उठने वाला दर्द आपके शरीर का वह चीखता हुआ अलार्म है जो बता रहा है कि आपका वात दोष भड़क चुका है और वह किसी भी बाहरी चिकनाई को तुरंत सुखा रहा है। जब आप इस अलार्म को रोज़ाना पेनकिलर्स या बार-बार इंजेक्शन लगवाकर दबाते हैं, तो आप अपनी हड्डियों को हमेशा के लिए सर्जरी की तरफ धकेल रहे होते हैं। इस खतरनाक चक्र से बाहर निकलें। अपनी डाइट में रागी, तिल और शुद्ध गाय का घी शामिल करें। अस्थिशृंखला, शल्लकी और अश्वगंधा जैसी जादुई जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें, और पंचकर्म की जानु बस्ती थेरेपी से अपने सूखे हुए घुटनों को प्राकृतिक चिकनाई देकर नया जीवन दें। कृत्रिम इंजेक्शन्स के धोखे से बचें, और अपने जोड़ों को स्थायी रूप से ताक़तवर बनाने के लिए आज ही जीवा आयुर्वेद से संपर्क करें।

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

इंजेक्शन का असर खत्म होने पर दर्द इसलिए बढ़ता है क्योंकि इस दौरान आपने अपने घुटनों का इस्तेमाल बिना दर्द महसूस किए (Pain Masking) किया होता है। अंदर ही अंदर कार्टिलेज और ज़्यादा घिस चुका होता है, और जब कृत्रिम चिकनाई सूखती है, तो हड्डियाँ बहुत बुरी तरह आपस में रगड़ खाती हैं।

नहीं। बार-बार सुई चुभने से घुटने के कैप्सूल (Joint Capsule) के अंदर इन्फेक्शन का खतरा बहुत बढ़ जाता है। इसके अलावा, अगर स्टेरॉयड (Steroid) मिलाया गया हो, तो वह कार्टिलेज को गला (Degrade) देता है, जिससे घुटना हमेशा के लिए कमज़ोर हो जाता है।

बिल्कुल। आयुर्वेद बाहर से तेल नहीं डालता, बल्कि शरीर की जठराग्नि को सुधारकर और वात को शांत करके शरीर को इस लायक बनाता है कि वह अपना प्राकृतिक श्लेषक कफ खुद उत्पन्न करे। घी, तिल का तेल और जानु बस्ती इसी प्रक्रिया में मदद करते हैं।

अगर भयंकर सूजन और एक्यूट दर्द है, तो सीढ़ियाँ कम चढ़नी चाहिए। लेकिन पूरी तरह चलना-फिरना बंद कर देने से घुटने की मांसपेशियाँ (Quadriceps) सूख जाएंगी। दर्द कम होने पर हल्की मूवमेंट और स्ट्रेचिंग ज़रूरी है ताकि ब्लड सर्कुलेशन बना रहे।

शत-प्रतिशत। कैफीन शरीर में वात (रूखापन) को भड़काता है और शरीर से पानी सोख (Diuretic) लेता है, जिससे जोड़ों की प्राकृतिक चिकनाई और ज़्यादा सूख जाती है और कट-कट की आवाज़ व दर्द बढ़ जाता है।

इंजेक्शन एक सुई के ज़रिए कृत्रिम रसायन घुटने में डालता है जो कुछ समय बाद सूख जाता है। जानु बस्ती में घुटने के ऊपर गर्म औषधीय तेल रोका जाता है। यह तेल त्वचा के छिद्रों से अवशोषित होकर प्राकृतिक रूप से वात को शांत करता है, सूजन घटाता है और नसों को हील (Heal) करता है।

रागी कैल्शियम का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत है। घुटनों के घिसने में अस्थि धातु (Bones) कमज़ोर हो जाती है। रागी को रोटी, चीले या हलवे के रूप में खाने से शरीर को प्राकृतिक कैल्शियम मिलता है जो आसानी से पच जाता है और हड्डियों को फौलादी बनाता है।

अगर घुटने में वात-प्रधान दर्द (केवल खुश्की, कड़कपन और दर्द) है, तो बर्फ लगाने से नसें सिकुड़ जाएंगी और दर्द बढ़ जाएगा, ऐसे में गर्म सिकाई (Hot Fomentation) करें। लेकिन अगर घुटना लाल है, आग जैसा गर्म है और सूजा हुआ (पित्त-प्रधान) है, तो वहां बर्फ की हल्की सिकाई आराम देती है।

सरसों का तेल गर्म होता है, लेकिन नसों की गहराई तक जाकर वात को शांत करने और पोषण देने के लिए तिल का तेल (Sesame oil) या उस पर आधारित आयुर्वेदिक तेल (जैसे महानारायण या क्षीरबला तेल) सबसे श्रेष्ठ होते हैं। मालिश हमेशा बहुत हल्के हाथों से (नीचे से ऊपर की ओर) करनी चाहिए।

हाँ। आपके शरीर का अतिरिक्त वज़न सीधे घुटनों के कार्टिलेज पर भारी दबाव (Mechanical Stress) डालता है। आयुर्वेद में उद्वर्तन (हर्बल पाउडर मसाज) और सही डाइट के ज़रिए वज़न कम करने से घुटनों का 50% दर्द अपने आप कम हो जाता है।

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