रात में देर तक जागने और menstrual routine के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों का गहरा संबंध है जब आप पीरियड्स के आसपास देर रात तक जागती हैं तो प्राकृतिक स्लीप साइकिल बिगड़ जाती है। इससे भूख को कंट्रोल करने वाले हॉर्मोन्स का संतुलन टूट जाता है, मेंस्ट्रुअल साइकिल की वजह से शरीर में पहले से ही फील गुड हॉर्मोन सेरोटोनिन का स्तर कम होता है। वहीं नींद पूरी न होने से स्ट्रेस हॉर्मोन कोर्टिसोल भी तेज़ी से बढ़ जाता है। इन दोनों का असर आपके दिमाग को तुरंत एनर्जी देने वाले मीठे और जंक फूड्स की तरफ धकेलता है जिससे क्रेविंग्स कई गुना बढ़ जाती हैं।
देर रात जागने से cravings क्यों बढ़ती हैं?
देर रात जागने से क्रेविंग इसलिए बढ़ती है क्योंकि इससे भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। देर रात तक जागने पर भूख बढ़ाने वाला हार्मोन घ्रेलिन बढ़ जाता है और पेट भरा होने का संकेत देने वाला हार्मोन लेप्टिन घट जाता है जिससे शरीर को बार-बार मीठा या तला-भुना खाने की तेज़ इच्छा होती है। देर रात को भूख लगने के मुख्य कारण दिन में कम खाना हार्मोनों का असंतुलन देर तक जागना तनाव या बोरियत होना है। जब शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती या नींद पूरी नहीं होती तो भूख बढ़ाने वाले हॉर्मोन सक्रिय हो जाते हैं।
Sleep cycle बिगड़ने से भूख पर क्या असर?
नींद का चक्र बिगड़ने से भूख को नियंत्रित करने वाले हॉर्मोन असंतुलित हो जाते हैं। इससे शरीर में भूख बढ़ाने वाला हॉर्मोन घ्रेलिन बढ़ जाता है और पेट भरा होने का अहसास कराने वाला हॉर्मोन लेप्टिन घट जाता है। परिणामस्वरूप बार-बार तेज़ भूख लगती है मीठा या जंक फूड खाने की इच्छा बढ़ती है और वज़न बढ़ने लगता है
नींद पूरी न होने पर शरीर क्या संकेत देता है?
नींद पूरी न होने पर शरीर निम्नलिखित के संकेत देता है
- दिनभर थकान: पर्याप्त नींद न मिलने पर सुबह उठने के बाद भी शरीर सुस्त और थका हुआ महसूस कर सकता है।
- भूख और cravings बढ़ना: नींद की कमी से भूख और खाने की इच्छा बढ़ सकती है खासकर मीठा या ज़्यादा कैलोरी वाला खाना खाने का मन हो सकता है।
- ध्यान लगाने में परेशानी: पढ़ाई या रोज़मर्रा के काम में फोकस बनाए रखना मुश्किल हो सकता है और छोटी-छोटी बातें भूलने लग सकती हैं।
- मूड में बदलाव: कम नींद से चिड़चिड़ापन बेचैनी या बिना वजह तनाव महसूस हो सकता है।
- शरीर में भारीपन: लंबे समय तक नींद पूरी न होने पर शरीर में सुस्ती और भारीपन महसूस हो सकता है जिससे सामान्य काम करने का मन कम करता है।
- रूटीन बिगड़ना: देर रात तक जागने की आदत खाने उठने और सोने के समय को प्रभावित कर सकती है जिससे पूरा daily routine असंतुलित हो सकता है।
Menstrual cycle में sleep क्यों ज़रूरी है?
मेंस्ट्रुअल साइकिल के दौरान पर्याप्त और अच्छी नींद लेना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि यह हार्मोन को संतुलित रखती है ऐंठन व दर्द से राहत देती है मूड को ठीक रखती है और शरीर की ऊर्जा वापस लाने में मदद करती है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन तेज़ी से बदलते हैं जिससे थकान और कमजोरी महसूस होती है। पूरी नींद लेने से शरीर इन बदलावों का सामना आसानी से कर पाता है।
रात को देर से खाना खाने के क्या नुकसान हैं?
देर रात खाना खाने से निम्नलिखित नुक्सान हो जाते है
- वज़न और मोटापा: रात में मेटाबॉलिज़्म धीमा होता है जिससे कैलोरी ऊर्जा में बदलने के बजाय शरीर में फैट के रूप में जमा होने लगती है।
- पाचन संबंधी समस्याएं: लेट खाने से खाना ठीक से नहीं पचता जिससे गैस अपच कब्ज़ और पेट फूलने की शिकायत हो सकती है
- एसिड रिफ्लक्स: खाने के तुरंत बाद लेटने से पेट का एसिड भोजन नली में वापस आता है जिससे सीने में तेज़ जलन होती है।
- डायबिटीज़ का खतरा: रात के समय इंसुलिन की कार्यक्षमता कम हो जाती है जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकता है।
- नींद की गुणवत्ता में कमी: पाचन प्रक्रिया सक्रिय रहने के कारण दिमाग और शरीर को पूरा आराम नहीं मिलता जिससे नींद बार-बार टूटती है।
- हार्ट पर असर: लगातार यह आदत रहने से ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का जोखिम बढ़ता है जो दिल की सेहत के लिए हानिकारक है।
menstrual routine क्रेविंग: आयुर्वेदिक दृश्टिकोण क्या है
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के अनुसार पीरियड्स के दौरान होने वाली क्रेविंग शरीर में त्रिदोषों वात, पित्त और कफ के असंतुलन, धातु क्षय और पाचन शक्ति में बदलाव का संकेत होती है। आयुर्वेद में इसे शरीर की किसी खास कमी या ऊर्जा की पूर्ति की प्राकृतिक मांग माना जाता है। आयुर्वेद मानता है कि इस दौरान शरीर धातुओं को पोषित करने के लिए संकेत देता है जिसे शांत करने के लिए सही आहार और दिनचर्या ज़रूरी है।
Menstrual routine के दौरान अगर क्रेविंग हो तो क्या खाएं?
पीरियड्स के दौरान क्रेविंग होने पर जंक फूड या ज़्यादा मीठा खाने के बजाय हेल्दी विकल्प चुनें हेल्दी चीज़ें हमारे शरीर को ऊर्जा देने में मदद करती हैं।
- फल: केला या सेब खाएं। इनमें मौजूद नेचुरल शुगर आपकी क्रेविंग शांत करती है।
- डार्क चॉकलेट: सामान्य चॉकलेट के बजाय थोड़ा सा डार्क चॉकलेट खाएं क्योंकि यह मैग्नीशियम और मूड ठीक करने वाली चीज़ों से भरपूर होती है।
- भुने हुए मखाने या चने: डीप-फ्राइड चिप्स के बजाय हल्के भुने हुए मखाने चने या बादाम लें।
- दही या छाछ: यह पेट को ठंडा रखती है और ब्लोटिंग से बचाती है।
- मैदे वाली चीजों के बजाय ओट्स ब्राउन राइस या दलिया खाएं।
- नट्स और सीड्स: बादाम, अखरोट और कद्दू के बीज खाएं, जो शरीर को हेल्दी फैट और ऊर्जा देते हैं।
Periods से पहले cravings को कैसे कंट्रोल करें?
पीरियड्स से पहले क्रेविंग्स को कंट्रोल करने के लिए एक बार में भारी भोजन करने के बजाय दिनभर में थोड़ा थोड़ा और संतुलित भोजन लें:
- पर्याप्त पानी पिएं: कई बार शरीर प्यास को भूख या क्रेविंग समझ लेता है।
- हल्का व्यायाम करें: टहलने या योग करने से एंडोर्फिन का स्तर सुधरता है।
- तनाव से दूर रहें: तनाव बढ़ने से हाई-कैलोरी और मीठा खाने की इच्छा ज़्यादा होती है।
- जंक फूड और ज़्यादा नमक: चिप्स या पैक्ड फूड खाने से शरीर में पानी रुकता है और पेट फूलता है।
menstrual routine के लिए जड़ी बूटियाँ
आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ बहुत असरदार मानी जाती हैं। ये जड़ी-बूटियाँ हॉर्मोन का संतुलन सुधारती हैं और शरीर की सूजन कम करती हैं।
- शतावरी: यह महिलाओं के लिए एक बेहतरीन टॉनिक है जो चक्र को नियमित करता है।
- दालचीनी: इंसुलिन स्तर को सुधारकर अनियमित पीरियड को ठीक करने में मदद करती है।
- अश्वगंधा: तनाव कम करता है, जो हॉर्मोन असंतुलन का एक मुख्य कारण है।
- अदरक: चाय में डालकर पीने से पेट की ऐंठन और मतली कम होती हैं।
क्रेविंग्स रोकने के उपाय
- समय पर सोना: हर रात 7 से 8 घंटे की गहरी नींद लें।
- तनाव कम करना: तनाव और कम नींद मिलकर cravings को बढ़ाते हैं।
- स्क्रीन बंद करना: सोने से एक घंटा पहले फोन या टीवी न देखें।
- टाइम से खाना: समय पर भोजन करें
डॉक्टर से कब मिलें?
- पूरे महीने क्रेविंग: खाने की तीव्र इच्छा सिर्फ पीरियड्स के आस-पास न होकर पूरे महीने बनी रहे।
- मानसिक असर: क्रेविंग या मूड स्विंग्स इतने ज़्यादा हों कि तनाव, चिंता या डिप्रेशन महसूस हो।
- दैनिक कार्य: लक्षण इतने हों कि आप अपने रोज़मर्रा के काम न कर पाएं।
- अन्य शारीरिक समस्याएं: इसके साथ अत्यधिक ब्लीडिंग चक्कर आना या बहुत ज़्यादा थकान हो।
निष्कर्ष
रात में देर तक जागने और मेंस्ट्रुअल रूटीन के दौरान हॉर्मोनल बदलावों का सीधा असर हमारी क्रेविंग्स पर पड़ता है। नींद पूरी न होने से भूख बढ़ाने वाला हॉर्मोन और तनाव बढ़ाने वाला कोर्टिसोल बढ़ जाता है, जिससे मीठे या जंक फूड की इच्छा तेज़ हो जाती है। पीरियड्स में सेरोटोनिन की कमी इसे और बढ़ाती है। इसे नियंत्रित करने के लिए 7-8 घंटे की नींद तनाव मुक्त जीवन और फल डार्क चॉकलेट व नट्स जैसे संतुलित आहार का ज़रूरी है। शतावरी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ भी हॉर्मोनल संतुलन बनाए रखने में मददगार हैं।
References:
https://www.healthline.com/health/period-cravings
https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/3428887/
https://www.sciencedirect.com/science/article/abs/pii/0018506X87900043















