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late-night scrolling अगली सुबह भूख और cravings को कैसे बदल सकता है?

Information By Dr. VD Aggarwal     Medically Reviewed by Dr.Partap Chauhan

रात को बेड पर जाने के बाद फोन उठाना आज लगभग रोज की आदत बन चुकी है , बस 5 मिनट फ़ोन देखना सोशल मीडिया स्क्रोल करना यह सेशन 5 मिनट से शुरू होता है, और एक-दो घंटे तीन घंटे तक लंबा चलता है समस्या सिर्फ इतनी सी नहीं है, इससे सोने का समय पीछे चला जाता है, अगर यह आदत रोज दोहराई जाये तो अगली सुबह आपकी भूख ,खाने  की इच्छा और क्रेविंग्स में अलग महसूस कर सकते हो |

कभी सुबह नाश्ता करने का मन नहीं करता , तो कभी उठते ही चाय बिस्किट जैसी मीठी चीज या कोई जल्दी बनाया हुआ स्नैक्स खाने की इच्छा होने लगती है, इसका संबंध सिर्फ इच्छा शक्ति से नहीं है ,नींद की अवधि और क्वालिटी पर भी फर्क पड़ता है

शरीर पे क्या असर पड़ता है ?

सोने से पहले लगातार फोन देखना कई लोगों के लिए नींद आने में देरी से जुड़ा हो सकता है, खासकर जब स्क्रोलिंग के दौरान नए वीडियो, मैसेज या फिर ऑनलाइन शॉपिंग देखने के लिए आपका दिमाग काफी समय तक अलर्ट रहता है ,

फोन की स्क्रीन की रोशनी और उत्तेजक कंटेंट भी बेडटाइम रूटिंग को प्रभावित कर सकता है लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है हर व्यक्ति में स्क्रीन टाइम का असर एक जैसा नहीं होता ,सोना या पर्याप्त नींद न मिल पाना भी आपको अधिक परेशान कर सकता है |

कम नींद और अगली सुबह की भूख का कनेक्शन 

नींद और भूख एक दूसरे से जुड़े हुए हैं ,जब नींद कम या बराबर होती है तो शरीर के हंगर रेगुलेटिंग सिग्नल में बदलाव आता है इसकी वजह से अगली सुबह कुछ लोगों को सामान्य से ज्यादा भूख लग सकती है ,कुछ लोगों में उल्टा होता है, तो खाने की इच्छा देर से महसूस होती है, इसलिए अगर आप देर रात को स्क्रोलिंग के बाद सुबह भूख का पैटर्न बदल जाए तो इसे केवल मेरी भूख खराब है समझ कर नजअंदाज ना करें |

सुबह ब्रेकफास्ट स्किप करने का मन क्यों करता है ?

अगर देर रात में खाना खाया गया हो और उसके बाद देर तक जागा गया हो, तो सुबह तक पर्याप्त समय बीते बिना ही उठना पड़ सकता है इससे ब्रेकफास्ट के समय भूख कम लग सकती है ,इसके अलावा खराब नींद के बाद कुछ लोगों को सुबह सरदर्द या सामान्य खिंचाव महसूस हो सकता है ,ऐसे में खाना भी प्राथमिकता नहीं लगता, लेकिन ब्रेकफास्ट की जरूरत हर व्यक्ति में बिल्कुल एक जैसी नहीं होती अगर आपको सुबह भूख नहीं लगती तो जबरदस्ती बहुत बड़ा मील खाने की जरूरत नहीं है,बेहतर है कि दिन की शुरुआत में बैलेंस तरीके से करें और बाद में भूख लगने पर ही पौष्टिक भोजन ले | 

इस आदत को कैसे सुधारे ?

अगर आपको लगता है कि लेट नाइट स्क्रोलिंग आपकी स्लिप और अगले दिन की ईटिंग हैबिट को प्रभावित कर रहा है तो छोटे-छोटे बदलाव आप कर सकते हैं |

सोने से 30-60 मिनट पहले स्क्रोलिंग कम करें

एकदम फोन छोड़ना मुश्किल हो सकता है शुरुआत में बेड टाइम से पहले स्क्रोलिंग का समय धीरे-धीरे कम करें

फोन को बेड से दूर रखें

अगर फोन हाथ में रहेगा तो आपका ध्यान इसी में रहेगा या आसपास रखने पर भी आप बार-बार इसकी तरफ इस्तेमाल करने की इच्छा व्यक्त कर सकते है |

रात में भारी snacks से बचे

अगर वास्तव में भूख लगी है तो हल्का और बैलेंस ऑप्शन चुने केवल बोर होने की वजह से खाने की आदत को पहचानना भी जरूरी है |

सुबह प्रोटीन और फाइबर वाला भोजन ले

जब भूख लगे तो सिर्फ शुगर, ड्रिंक, बिस्किट या तले भुने ,नमकीन के ऊपर डिपेंड ना रहे , ऐसा करने की बजाय ऐसा ब्रेकफास्ट चुने जिसमें प्रोटीन और फाइबर जैसे कि पनीर, दाल ,वेज फूड, ओट्स, दही और फल , नट्स आदि ले |

स्लीप शेड्यूल को regular रखें

हर दिन लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करना आपकी ओवरऑल रूटीन में मददगार साबित हो सकता है और आपकी भूख को भी बैलेंस करता है

समस्या का समाधान न करने से क्या दिक्कत हो सकती है ? 

ध्यान दें अगर आप समय से सोते नहीं है और अपने फोन का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं और टाइम से खाना-पीना भी नहीं कर पा रहे हैं तो आपको इस प्रकार की दिक्कत आ सकती है :

निष्कर्ष

लेट नाइट स्क्रोलिंग का असर सिर्फ आंखों या नींद तक सीमित नहीं रह सकता जब स्क्रोलिंग आपकी बेड टाइम को पीछे करती है| और नींद कम हो जाती है तो फिर अगली सुबह आपको भूख और फूड क्रेविंग का पैटर्न बदलता हुआ नजर आता है | किसी एक रात ऐसा होना चिंता की बात नहीं है ,लेकिन अगर रोज देर रात फोन का इस्तेमाल करने के बाद सुबह ब्रेकफास्ट का मन नहीं कर रहा है , दिनभर क्रेविंग रहती है या ईटिंग रूटिंग बिगड़ रहा है तो सबसे पहले अपनी नाइट टाइम स्क्रीन हैबिट और स्लिप रूटिंग पर ध्यान दें | 

References

Sleep Patterns, Eating Behavior and the Risk of Noncommunicable Diseases - PMC

The Health Impact of Nighttime Eating: Old and New Perspectives - PMC

Role of late-night eating in circadian disruption and depression: a review of emotional health impacts - PMC

Harvard study: Curb late-night eating to stave off weight gain

Disclaimer: This blog is for informational purposes only and should not be considered medical advice. The content is not intended to replace professional diagnosis, treatment, or medical guidance. For personalised healthcare advice and appropriate treatment, please consult a qualified and experienced Jiva Ayurveda doctor.

FAQs

फोन की स्क्रीन की ब्लू लाइट और दिलचस्प कंटेंट दिमाग को एक्टिव रखता है जिससे नींद आने में देरी हो सकती है। इसके कारण आप कम और खराब क्वालिटी की नींद लेते हैं, जिससे अगली सुबह भूख के सिग्नल बदल जाते हैं। कभी ज्यादा भूख लगती है, तो कभी नाश्ते का मन ही नहीं करता। यह केवल इच्छाशक्ति की बात नहीं, बल्कि आपकी नींद के पैटर्न का भी असर है।

अगर रात में देर तक जागा है या हल्का या ज्यादा नाश्ता किया है, तो सुबह तक भूख कम लगती है। खराब नींद के कारण कुछ लोगों को सिर में हल्का दर्द या थकावट महसूस हो सकती है, जिससे खाने का मन नहीं होता। हालांकि, अगर भूख नहीं है तो ज्यादा खाने की जरूरत नहीं, बल्कि हल्का, संतुलित और पौष्टिक नाश्ता बाद में लिया जा सकता है।

हर व्यक्ति की बॉडी रिस्पांस अलग होती है। कोई जल्दी नींद में चला जाता है, तो किसी का दिमाग देर तक सक्रिय रहता है। इसके अलावा आपकी व्यक्तिगत नींद की आदतें, तनाव का स्तर और दिनचर्या भी फर्क डालते हैं। इसलिए प्रभाव का अनुभव हर किसी को अलग-अलग होता है।

हाँ, खासकर अगर आपकी भूख असली नहीं बल्कि बोरियत या फोन पर ध्यान न हटने की वजह से है। अगर भूख सच में लगे तो हल्का और संतुलित स्नैक लें, जैसे फल, नट्स या दही। भारी और तला-भुना खाना रात को न लें क्योंकि इससे नींद खराब हो सकती है और अगली सुबह जहां भूख बदलती है, वहीं पेट भी परेशान हो सकता है।

सुबह नाश्ते में प्रोटीन और फाइबर वाला भोजन लेना बेहतर रहता है, जैसे पनीर, दाल, वेजिटेबल्स, ओट्स, दही, फल और नट्स। चीनी और तले-भुने नमकीन से ज्यादा संतुलित विकल्प आपको दिनभर ताजगी और शक्ति देंगे।

सोने से कम से कम 30-60 मिनट पहले फोन स्क्रोलिंग कम कर दें या बंद कर दें।फोन को बेडरूम से बाहर रखें या हाथ से दूर रखें ताकि बार-बार देखने का मन न हो।रात में भारी स्नैक्स से बचें और सही समय पर खाना खाएं।अपने सोने और उठने के समय को नियमित रखें ताकि बॉडी क्लॉक सही बनी रहे।

लगातर कम नींद, देर रात फोन इस्तेमाल और गलत खाने-पीने की आदत से तनाव, डिप्रेशन, अनिद्रा, पाचन संबंधी दिक्कतें, दिमागी थकान और पेट की शिकायतें जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। इससे आपका मन और शरीर दोनों प्रभावित होंगे।

एक या दो रातों का असर ज्यादा गहरा नहीं होता, लेकिन यदि यह आदत रोज बन जाए तो इससे नींद की गुणवत्ता खराब होती है और भूख और खाने की आदतें प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए बेहतर है कि अपनी नींद और स्क्रीन टाइम पर ध्यान दें।

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